प्रतिवेद्य भार के सव च्च न्यायालय के समक्ष आपरातिक अपीलीय के्षत्रातिकार आपरातिक अपील संख्या....../2023 [एसएलपी (सीआरएल) संख्या -1249/2023 से उत्पन्न] रमेश चंद्र वैश्य ... अपीलका2
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य और एक अन्य …प्रत्यर्थी; निनर्ण2य
माननीय न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता अनुमति अनुदत्त की गई।
2. निवशेष अनमुति के द्वारा प्रस्ु व2मान अपील में अपीलका2 के द्वारा दाखिJल निकए गये दण्ड प्रनिMया संनिNा(एस्मिस्मन पश्चा सी.आर.पी.सी.) की ारा 4821के द्वारा आरोप-पत्र के सार्थी -सार्थी लंनिब आपरातिक काय2वाNी2को रद्द करने की मागं करे Nुए दायर आवेदन को इलाNाबाद उच्च न्यायालय(एस्मिस्मन पश्चा उच्च न्यायालय) के निवद्व न्यायाीश द्वारा 23 मई, 2022 के आदेश एवं निनर्ण2य के द्वारा Jारिरज कर निदया गया र्थीा को व2मान अपील में प्रश्नग निकया गया N।ै
1 धारा 482 के तहत आवेदन संख्या तहत आवे तहत आवेदन संख्या दन संख्या सखं्या - 38374/201 8
2 मामला अपराध सखं्या - 2 3/2 016; आपराधिधक वाद सखं्या - 376/2 016
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3. संके्षप में, अभिभयोजन का मामला यN Nै निक 14 जनवरी, 2016 को, प्राः 7 बजे, अपीलका2 का दसूरे प्रत्यर्थी; (भिशकायका2, इसके बाद) के सार्थी जल निनकासी के मुद्दे पर निववाद चल रNा र्थीा।यN आरोप लगाया गया N ैनिक इस बNस के दौरान, अपीलका2 ने भिशकायका2 और उसके परिरवार के सदस्यों के खिलए जाति से संबतंि गाखिलयां दीं , और बाद में भिशकायका2 पर शारीरिरक Nमला निकया , जिजससे उसे कई चोटें आई।ं नीजन, 20 जनवरी, 2016 को, अपीलका2 के खिJलाफ भारीय दडं संनिNा, 1860 (आईपीसी, इसके बाद) की ारा 323 और 504, अनुसूतिच जाति और अनुसूतिच जनजाति (अत्याचार निनवारर्ण) अतिनिनयम, 1989 (एससी/एसटी अतिनिनयम, इसके बाद) के N एक प्रर्थीम सूचना रिरपोट2 (एस्मिस्मनपश्चा ,पNली एफआईआर, ) दज2 की गई।
4. सबंंति सक2 ल अतिकारी (एस्मिस्मनपश्चा आई. ओ.) द्वारा जांच की गई।जांच के बाद, जो एक निदन के भीर पूरी Nो गई र्थीी, जांच अतिकारी इस निनष्कष2 पर पNुचें निक अपीलका2 के खिJलाफ मकुदमे के खिलए भेजने के खिलए सामग्री र्थीी और परिरर्णामस्वरूप, उसके खिJलाफ भा.द.ंसं. की ारा 323,504 और 3 (1) (x), ), एससी/एसटी अतिनिनयम के N 21 जनवरी, 2016 को एक आरोप-पत्र सबंंति न्यायालय में दायर निकया गया र्थीा। न्यायालय ने 3 मई, 2016 को अपरा का संज्ञान खिलया। 5 इस समय इस बा पर जोर देना मNत्वपूर्ण2 Nै निक अपीलका2 उसी घटना से उत्पन्न एफ. आई. आर. दज2 करना चाNा र्थीा।उसके अनसुार , 14 जनवरी, 2016 को भिशकायका2 और उसके बेटे ने उसे बें और लानिkयों से बरुी रN पीटा, जिजसके परिरर्णामस्वरूप वN भी घायल Nो गया। उसी ारीJ को, जब अपीलका2 ने एफ. आई. आर. दज2 करने के खिलए पुखिलस र्थीाने पNुचा, उसकी एफ. आई. आर. को पंजीकृ नNीं निकया गया र्थीा, इसके बजाय, अपीलका2 का चालान कर दडं प्रनिMया संनिNा की ारा 151,107 और 116 के N संबंति प्रभारी निनरीक्षक द्वारा निनरो में रJा गया। उसके द्वारा जमानब बन्पत्र प्रस्ु करने पर छोड़ा गया। प्रार्थीनिमकी दज2 करने में पुखिलस की निवफला के कारर्ण, अपीलका2 ने ारा
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156(3), सी.आर. पी.सी के N एक आवेदन प्रस्ु निकया जिजसके N मजिजस्ट्र ेट द्वारा पारिर आदेश के अनुसार, एक एफ.आई.आर. निदनांक 18 फरवरी, 2016 (एस्मिस्मनपश्चा "दसूरी प्रार्थीनिमकी",) को भिशकायका2 (दसूर ेप्रत्यर्थी;) के खिJलाफ आईपीसी की ारा 323, 325, 392, 452, 504, 506 के N अपराों के खिलए दज2 की गई र्थीी।
6. यN भी अंनिक निकया गया Nै निक अपीलका2 ने जिसनिवल न्यायालय के समक्ष एक मुकदमा 3संस्मिस्र्थी निकया Nै जिजसमें अपीलका2 की भूनिम पर भिशकायका2 के निनरंर अतिMमर्ण के निवरुद्ध स्र्थीायी व्यादेश की मांग की गई N।ैयN सक्षम न्यायालय के समक्ष निवचाराीन N।ै
7. उक्त आरोप -पत्र से व्यभिर्थी Nोकर , अपीलका2 ने ारा 482, सीआरपीसी के N आवेदन करके 5 अक्टूबर, 2018 को उच्च न्यायालय के अतिकार के्षत्र का आह्वान निकया। पीसी। उन्Nोंने इसके सार्थी-सार्थी उनके खिJलाफ आपरातिक काय2वाNी को इस आार पर रद्द करने की मागं की निक उक्त चाज2शीट में कोई अपरा नNीं Nै और व2मान अभिभयोजन उत्पीड़न के उद्देश्यों के खिलए दभुा2वनापूर्ण2 इरादे से स्र्थीानिप निकया गया N।ै 3 2017 का सीएस नबंर 07 4
8. यN अभिभनिना2रिर करे Nुए निक अंरिरम राN प्रदान करने के खिलए प्रर्थीमदृष्टया मामला स्र्थीानिप निकया गया र्थीा, उच्च न्यायालय ने 15 नवंबर, 2018 के अंरिरम आदेश द्वारा निनदyश निदया निक ारा 482, दडं प्रनिMया संनिNा के N आवेदन पर निवचार निकए जाने क अपीलका2 के खिJलाफ कोई दडंात्मक कार2वाई नNीं की जाए।
9 र्थीानिप, एक चुनौीपूर्ण2 सुनवाई पर, उच्च न्यायालय ने आरोप-पत्र या संज्ञान लेने में निनचले न्यायालय द्वारा अपनाई गई प्रनिMया में कोई ास्मित्वक अनिनयनिमा नNीं पाई और आके्षनिप निनर्ण2य और आदेश द्वारा दडं प्रनिMया संनिNा की ारा 482 के अीन अपीलार्थी; के आवेदन को Jारिरज कर
3 सी.एस. सखं्या 07/2017
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निदया।उच्च न्यायालय ने अभिभनिना2रिर निकया निक इस स्र पर , यN निनष्कष2 नNीं निनकाला जा सका Nै निक एक संजे्ञय अपरा के बारे में नNीं बाया गया Nै क्योंनिक उक्त आरोप थ्यात्मक प्रकृति के Nैं और उन्Nें जिसद्घ करने के खिलए पक्षकारों द्वारा साक्ष्य की आवश्यका Nोगी। मोNम्मद अलाउद्दीन Jान अन्य बनाम निबNार राज्य और अन्य4वाले मामले में इस न्यायालय के निनर्ण2य पर अवलंब लेे Nुए उच्च न्यायालय ने इस बा पर जोर निदया निक दडं प्रनिMया संनिNा की ारा 482 के अीन शनिक्तयों का प्रयोग करे समय और/या उन्मोचन के चरर्ण में न्यायालय के पास सीनिम अतिकार के्षत्र Nै और वN यN अवारिर करने के खिलए साक्ष्य का मूल्यांकन नNी कर सका क्योंनिक प्रर्थीमदृष्टया अभिभयकु्त के निवरुद्ध कोई मामला बनाया गया Nै ।उच्च न्यायालय ने यN अंनिक निकया निक साक्ष्य के निबना, इस स्र पर आरोपों की सत्या का पा लगाना संभव नNीं Nै, इसखिलए दडं प्रनिMया संनिNा की ारा 482 के N आरोप-पत्र या आपरातिक काय2वाNी को रद्द करने के खिलए आवेदन को बनाए रJा जा सका N।ै
10. अपीलका2 की ओर से सुश्री शुक्ला, निवद्वान अतिवक्ता ने निनम्नखिलखिJ प्रस्ुतियां दीं:
a. पNला एफ. आई. आर., जो छN निदन की देरी के बाद पंजीकृ निकया गया र्थीा, निवचार के बाद और भिशकायका2 के आरोपों पर गंभीर संदेN पदैा करा N।ै b. प्रर्थीम एफ. आई. आर. के पंजीकरर्ण के अगले Nी निदन उतिच अन्वेषर्ण निकए निबना आरोप-पत्र दाखिJल निकया गया र्थीा। अपीलका2 द्वारा दायर दसूरे एफ . आई. आर. एवं तिचनिकत्सीय रिरपोट2 को आरोप पत्र में नजर अदंाज कर निदया गया र्थीा।
c. भिशकायका2, गांव का एक प्रभावशाली व्यनिक्त Nोने के कारर्ण, पक्षकारों के बीच जिसनिवल न्यायालय में पNले से लंनिब जिसनिवल निववाद का निनस्ारर्ण करने के खिलए एक गुप्त उद्देश्य के सार्थी अपीलका2 के खिJलाफ आपरातिक काय2वाNी शुरू की।
d. पुखिलस ने अपीलार्थी; की भिशकाय पर कार2वाई नNीं की। दसूरा एफ. आई. आर. निदनांक 18 फरवरी, 2016 को मजिजस्ट्र ेट द्वारा दडं प्रनिMया संनिNा की
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ारा 156 (3) के N अपीलार्थी; के आवेदन पर एक आदेश पारिर करने के बाद Nी पंजीकृ निकया गया र्थीा।
e. Nरिरयार्णा राज्य और अन्य बनाम भजन लाल और अन्य5को इस क2 के समर्थी2न में रJा गया र्थीा निक यनिद एफ . आई. आर. की अंव2स्ु, उसके बाNरी आवरर्ण के आार पर ली गई Nै, ो अपीलका2 के खिJलाफ कोई मामला नNीं बना Nै, ो ऐसे निवरोी उद्देश्य वाले एफ. आई. आर. को Jारिरज निकया जाना चानिNए।
f. निNेश वमा2 बनाम उत्तराJंड राज्य और एक अन्य6वाले मामले को भी इस क2 का समर्थी2न करने के खिलए रJा गया र्थीा निक उच्च न्यायालय ने भिशकायका2 द्वारा अनुसूतिच जाति/अनुसतूिच जनजाति अतिनिनयम के प्रावानों के दरुुपयोग करने को नजरअंदाज कर निदया और न Nी पNले एफ. आई. आर. की सामग्री और न Nी आरोप-पत्र में अपीलका2 द्वारा इस्ेमाल की गई गाली - गलौज की भाषा की सटीक सामग्री का Jलुासा निकया ानिक एससी/एसटी अतिनिनयम की ारा 3 (1) (x), ) के प्रावानों को आकर्षिष निकया जा सके।
11. दनुसार, यN प्रार्थी2ना की गई निक अपीलका2 द्वारा की गई प्रार्थी2ना को स्वीकृ निकया जाए।
12 इस अपील को Jारिरज करने की मागं करे Nुए प्रर्थीम प्रत्यर्थी; (राज्य) की ओर से उपस्मिस्र्थी निवद्व अपर मNातिवक्ता श्री प्रसाद ने निनम्नखिलखिJ रूप में प्रतिवाद निकयाः
a. अपीलका2 ने एक गंभीर अपरा निकया र्थीा जिजसके परिरर्णामस्वरूप भिशकायका2 को परिरर्णामी निववाद में कई चोटें आई र्थीीं। b. पुखिलस ने भिशकायका2 द्वारा निदए गए बयान और उसके बाद की जांच के आार पर उतिच प्रनिMया का पालन करने के बाद निनचली निवचारर्ण न्यायालय के समक्ष 21 जनवरी, 2016 को आरोप-पत्र दाखिJल निकया।
5 1992 supp(1) scc 335
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c. उच्च न्यायालय ने, आके्षनिप निनर्ण2य और आदेश द्वारा, अपीलका2 द्वारा प्रस्ु आवेदन को रद्द आदेशने के खिलए उतिच रूप से Jारिरज आदेश निदया N।ै
d. यN स्र्थीानिप निवति Nै निक दडं प्रनिMया संनिNा की ारा 482 के अीन अतिकार के्षत्र का प्रयोग पूर्ण2 सक2 ा के सार्थी निकया जाना चानिNए और उच्च न्यायालय ने अतिकार के्षत्र का प्रयोग करने से इकंार करने में गली नNीं की र्थीी।
13. श्री शुक्ला, भिशकायका2 (दसूरे प्रतिवादी) की ओर से उपस्मिस्र्थी Nोने वाले निवद्वान अतिवक्ता ने उच्च न्यायालय के आके्षनिप निनर्ण2य और आदेश का समर्थी2न निकया। उनके अनुसार, जांच अतिकारी द्वारा एक निदन के भीर जांच का परूा Nोना असामान्य लग सका Nै लेनिकन यN असंभव नNीं N।ै उन्Nोंने यN भी क2 निदया निक आरोप-पत्र दायर निकए जाने के बाद कानून को अपना काम करने की अनुमति दी जानी चानिNए और यनिद अपीलका2 आरोपों की निवरचना से व्यभिर्थी Nै ो वN कानून के अनसुार अपना उपचार मागं सका N।ै अपीलका2 द्वारा Nस्के्षप का कोई मामला स्र्थीानिप नNीं निकया गया र्थीा, श्री शुक्ला ने अपील को Jारिरज करने के खिलए प्रार्थी2ना की।
14. Nमने पक्षकारों को सनुा Nै और रिरकॉड2 पर उपस्मिस्र्थी सामग्री के सार्थी उच्च न्यायालय के निनर्ण2य और आदेश का अवलोकन निकया N।ै
15. अनुसूतिच जाति/अनुसूतिच जनजाति अतिनिनयम की ारा 3 (1) (x), ), एस. ओ. 152 (ई) निदनांक 18 जनवरी, 2016 द्वारा इसके संशोन को अतिसूतिच करने से पNले, इस प्रकार Nःै
" 3.अत्याचार के अपराों के खिलए दडं -(1) जो कोई अनुसूतिच जाति या अनुसतूिच जनजाति का सदस्य नNीं Nै, *
(x), ) अनुसूतिच जाति या अनुसूतिच जनजाति के निकसी सदस्य को साव2जनिनक रूप से निकसी भी स्र्थीान पर अपमानिन करने के इरादे से जानबूझकर अपमानिन करा या डराा N;ै
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16. भिशकायका2 के अनुरो पर पजंीकृ प्रर्थीम एफ. आई. आर. घटना के स्र्थीान के बारे में कुछ नNी बााी Nै और जो, जना में से एक के Nोने के नाे, उस समय उपस्मिस्र्थी र्थीा जब अपीलका2 पर जाति संबंी दवु्य2वNार करने का आरोप लगाया गया N।ै Nालांनिक, अपीलका2 के आदेश पर पंजीकृ दसूरे एफ. आई. आर. के पढ़ने पर, ऐसा प्री Nोा Nै निक यN घटना अपीलका2 के घर पर Nुई र्थीी।
17. पNला प्रश्न जो उत्तर की मांग करा Nै वN यN Nै निक क्या यN साव2जनिनक दृनिष्ट में र्थीा निक अपीलका2 ने भिशकायका2 का अपमान करने या उसे अपमानिन करने के इरादे से जाति संबंी गाखिलयां दीं। जांच अतिकारी द्वारा 21 जनवरी, 2016 को दायर आरोप-पत्र से ऐसा प्री Nोा N ैनिक अभिभयोजन पक्ष भारीय दडं भा.दं.सं. की ारा 323 और 504 र्थीा अनसुूतिच जाति/अनुसूतिच जनजाति अतिनिनयम की ारा 3 (1) (x), ) के N अपीलका2 के खिJलाफ आरोप य करने के खिलए ीन गवाNों के साक्ष्य पर भरोसा करना Nोगा।न ो प्रर्थीम एफ. आई. आर. और न Nी आरोप-पत्र घटना के स्र्थीान पर (अपीलका2, उसकी पत्नी और उसके बेटे के अलावा) पांचवें व्यनिक्त (जना के एक सदस्य) की उपस्मिस्र्थीति का उल्लेJ करा N।ैक्योंनिक अपीलका2 द्वारा निदया गया कर्थीन , यनिद कोई Nो , साव2जनिनक दृनिष्ट के भीर निकसी भी स्र्थीान पर नNीं र्थीा , एससी/एसटी अतिनिनयम की ारा 3 (1) (x), ) को आकर्षिष करने के खिलए मूल घटक गायब/अनुपस्मिस्र्थी र्थीा।इसखिलए, Nम माने Nैं निक घटना के समय (अपीलका2 द्वारा भिशकायका2 को जाति से सबंंति गाखिलयां देने की ) प्रासंनिगक बिंबद ुपर, जना का कोई भी सदस्य मौजूद नNीं र्थीा.
18. इसके अलावा, यN माने Nुए निक अपीलका2 ने भिशकायका2 को अपमान या अपमानिन करने के उद्देश्य से जाति संबंी गाखिलयां दी र्थीीं, यN भिशकायका2 के मामले को एससी/एसटी अतिनिनयम के ) ारा 3(1) (x), ) के दायरे में लाने के खिलए आगे नNीं बढ़ाा N।ै Nमने पNली F.I.R से नोट निकया N।ै सार्थी Nी आरोप-पत्र निक इसमें अपीलका2 के 9 वें पाठ्यMम के मौखिJक निववाद के दौरान या भिशकायका2 की जाति का कोई संदभ2 नNीं
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N,ै जिसवाय इस आरोप/निटप्पर्णी के निक जाति-संबंी गाखिलयां दी गई।ं निवायी आशय से स्पष्ट प्री Nोा Nै निक निकसी व्यनिक्त को अपमानिन करने के खिलए निकया गया प्रत्येक अपमान या डराना-मकाना अनुसूतिच जाति/अनुसूतिच जनजाति अतिनिनयम की ारा 3 (1) (x), ) के N ब क अपरा नNीं माना जाएगा, जब क निक निकसी निवशेष अनुसूतिच जाति या जनजाति का सदस्य Nोने के कारर्ण इस रN के अपमान या मकी को लतिक्ष नNीं निकया जाा N।ैयनिद कोई निकसी अन्य को साव2जनिनक रूप से निकसी भी स्र्थीान पर बेवकूफ (बेवकूफ) या मूJ2 (मJु2) या चोर (चोर) कNा Nै, ो यN स्पष्ट रूप से अपमानजनक या आMामक भाषा के उपयोगका2 द्वारा अपमान करने या अपमानिन करने का इरादा रJा N।ै यNां क निक यनिद यN सामान्य रूप से निकसी ऐसे व्यनिक्त के खिलए निनदyभिश निकया जाा Nै, जो अनुसूतिच जाति या जनजाति Nै , ो भी ारा 3 (1) (x), ) को आकर्षिष करना पया2प्त नNीं Nो सका Nै जब क निक ऐसे शब्दों को जातिवादी निटप्पभिर्णयों के सार्थी जोड़ा न जाए।चंूनिक अनुसूतिच जाति/अनुसूतिच जनजाति अतिनिनयम की ारा 18 ारा 438, Cr.PC के N अदाल के अतिकार के्षत्र के आह्वान पर रोक लगाी Nै और अन्य कानूनों पर अनुसूतिच जाति/अनुसूतिच जनजाति अतिनिनयम के अतिभावी प्रभाव को ध्यान में रJे Nुए, यN वांछनीय Nै निक एक अभिभयकु्त के अीन Nै ारा 3(1)(x), ) के N अपरा के कभिर्थी कृत्य के खिलए उसका निवचारर्ण चलाया जाा Nै ो उसके द्वारा साव2जनिनक दृश्य के निकसी भी स्र्थीान पर निकए गए बयानों को रJेांनिक निकया गया Nै, यनिद एफ.आई.आर. में नNीं N।ै (जो सभी थ्यों और घटनाओं का एक निवश्वकोश Nोना आवश्यक नNीं Nै), लेनिकन कम से कम चाज2शीट में (जो या ो जांच के दौरान या अन्यर्थीा रिरकॉड2 निकए गए गवाNों के बयानों के आार पर यैार निकया गया Nै) ानिक अदाल को यN पा लगाने में सक्षम बनाया जा सके क्या चाज2शीट अपरा का संज्ञान लेने से पNले, एससी/एसटी अतिनिनयम के N एक अपरा का मामला बना Nै, जो उसके समक्ष स्मिस्र्थीति के परिरपे्रक्ष्य में एक उतिच राय बनाने के खिलए प्रतिबद्ध N।ै व2मान प्रकृति के मामले में लागू निकए जाने वाले सीनिम परीक्षर्ण के खिलए भी, 21 जनवरी,
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2016 का आरोप-पत्र ारा 3 (1) (x), ) के N अपीलका2 द्वारा निकए गए निकसी अपरा का कोई मामला नNीं बनाा Nै , जिजससे उसे मुकदमा चलाने की आवश्यका Nो।
19. श्री शुक्ला द्वारा उद्धृ निNेश वमा2 उपरोक्त में निवनिनश्चय के पैरा 15 और 16 को उस दृनिष्टकोर्ण के समर्थी2न में मदद के खिलए जोर निदया जा सका Nै जिजसको उपर उद्धृ निकया जा चुका N।ै
20. दसूरा प्रश्न जो Nमारा ध्यान आकर्षिष करगेा , वN यN Nै निक क्या अपीलका2 के निवरुद्ध दांतिडक काय2वानिNयों को भारीय दडं भा .दं.सं. की ारा 323 और 504 के अीन दडंनीय अपराों के आरोप का सामना कर रNे अपीलका2 को ध्यान में रJे Nुए आगे बढ़ाने की अनुमति दी जानी चानिNए।
21. भारीय दडं संनिNा की ारा 323 स्वेच्छा से उपNति कारिर करने के खिलए दडं निवनिN करी N।ै भारीय दडं भा.दं.सं. की ारा 319 में उपNति को निकसी व्यनिक्त को शारीरिरक दद2, बीमारी या दबु2ला के रूप में परिरभानिष निकया गया N।ैप्रर्थीम एफ. आई. आर. में आरोप Nै निक अपीलका2 ने भिशकायका2 को पीटा र्थीा जिजसके कारर्ण से उसे कई चोटें आई र्थीीं। Nालांनिक भिशकायका2 ने आरोप लगाया निक इस रN की घटना कई लोगों ने देJी और उसके Nार्थी पर चोट लगी, लेनिकन आरोप-पत्र में भिशकायका2 की पत्नी और बेटे के अलावा निकसी अन्य चश्मदीद गवाN का जिजM नNीं Nै और न Nी निकसी मेतिडकल रिरपोट2 का।प्रनिMया में भिशकायआरोप-पत्र द्वारा लगी चोट की प्रकृति न ो प्रर्थीम एफ . आई. आर. और न Nी आरोप-पत्र से परिरलतिक्ष Nोी N।ैइसके निवपरी , अपीलका2 ने घटना के ुरं बाद घायलों का इलाज करवाया र्थीा। व2मान काय2वाNी में पNले प्रत्यर्थी; (राज्य) द्वारा दायर प्रत्यूत्तर शपर्थीपत्र में, इस संबं में निवचार करने योग्य कोई सामग्री नNीं Nै , जिसवाय एक स्पष्ट बयान के निक भिशकायका2 के Nार्थी और शरीर के अन्य निNस्सों में कई चोटें
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आई Nैं।यनिद वास्व में भिशकायका2 के कर्थीन पर निवश्वास निकया जाए ो जांच अतिकारी को उसका समर्थी2न करने के खिलए एक तिचनिकत्सा रिरपोट2 मागंनी चानिNए र्थीी।निकसी निदए गए मामले में एक निदन के भीर जांच को पूरा करने की सराNना की जा सकी Nै, लेनिकन व2मान मामले में यN न्याय के निN के कारर्ण यN सेवा में अतिक नुकसान पNुचंाा N।ैस्मिस्र्थीति ब और भी स्पष्ट Nो जाी Nै जब इस काय2वाNी के दौरान प्रर्थीम प्रत्यर्थी; सनिN पक्ष Nमें दसूरी एफ.आई.आर. के परिरर्णाम से अवग कराने में असमर्थी2 Nोे Nैं। निकसी भी स्मिस्र्थीति में, Nम अभिभयोजन पक्ष के मामले में ऐसी कोई सच्चाई नNीं पाे Nैं जिजससे ारा 323, आईपीसी की काय2वाNी को जारी रJने की अनुमति निमल सके।
22. निफयोना श्रीJण्डे अन्य बनाम मNाराष्ट्र राज्य 7वाले ारा में इस न्यायालय को यN अभिभनिना2रिर करने का अवसर निमला निकः
"13. भारीय दडं सनंिNा की ारा 504 में निनम्नखिलखिJ त्व शानिमल Nैं (क) जानबूझकर निकया गया अपमान, (J) अपमान ऐसा Nोना चानिNए जो निकसी व्यनिक्त को उकसाए और (ग) अभिभयकु्त का इरादा Nोना चानिNए या उसे यN पा Nोना चानिNए निक इस रN के उकसावे से दसूरा व्यनिक्त साव2जनिनक शांति भंग करगेा या कोई अन्य अपरा करगेा।जानबूझकर निकया गया अपमान इस Nद क Nोना चानिNए निक वN निकसी व्यनिक्त को साव2जनिनक शांति भंग करने या कोई अन्य अपरा करने के खिलए उकसाए।जो व्यनिक्त जानबूझकर निकसी अन्य व्यनिक्त का अपमान करा Nै या यN जाना Nै निक यN निकसी अन्य व्यनिक्त को उकसाएगा और इस रN के उकसावे से साव2जनिनक शांति भंग Nोगी या कोई अन्य अपरा Nोगा, ऐसी स्मिस्र्थीति में ारा 504 के त्व संुष्ट Nोे Nैं।अपरा का गkन करने वाले आवश्यक त्वों में से एक यN Nै निक ऐसा कोई काय2 या आचरर्ण निकया जाना चानिNए जो जानबूझकर अपमान के बराबर Nो और यN थ्य निक आरोपी ने भिशकायका2 के सार्थी दवु्य2वNार निकया Nै , आईपीसी की ारा 504 के N दोषजिसतिद्ध का वारटं देने के खिलए अपने आप में पया2प्त नNीं N।ै
23. मामले के थ्यों और परिरस्मिस्र्थीतियों के आार पर , Nमें यN मानने में र्थीोड़ी निNचनिकचाNट Nै निक भले Nी अपीलका2 ने भिशकायका2 का दरुुपयोग, दरुुपयोग करना निकया Nो, लेनिकन ऐसा दरुुपयोग, दरुुपयोग
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करना अपने आप में और निकसी और चीज के निबना अपीलका2 को मुकदमे का सामना करने के खिलए मजबूर की अनपुस्मिस्र्थीति में करा Nै, निवशेष रूप से इस रN के जानबूझकर अपमान के घटक के स्पष्ट अभाव में निक यN एक व्यनिक्त को साव2जनिनक शांति को ोड़ने या कोई अन्य अपरा करने के खिलए उकसा सका N।ै
24. Nम अभिभखिलखिJ करे Nैं निक उच्च न्यायालय ने उतिच परिरपे्रक्ष्य में आरोप-पत्र सनिN दांतिडक काय2वानिNयों की चुनौी की सराNना करने में निवफल रNने में स्वयं को गल निनदyभिश निकया और इस रN की चुनौी को अस्वीकार करने में न्यायाीश की गंभीर निवफला को जन्म निदया।
25. उपयु2क्त कारर्णों से , Nम बेनिNचक यN अभिभनिना2रिर करे Nैं निक यN आपरातिक मामला संख्या 376/2016 को जारी रJने की अनुमति देने के खिलए निवति की प्रनिMया का दरुुपयोग करना Nोगा।उच्च न्यायालय के आके्षनिप निनर्ण2य और आदेश को अपास् करे Nुए, Nम आपरातिक मामला संख्या 376/2016 को भी रद्द करे Nैं।
26 परिरर्णामः, यN अपील सफल Nोी N।ै र्थीानिप, पक्षकारों को अपनी लाग स्वयं वNन करनी Nोगी।
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न्यायमूर्ति रवीन्द्र भट्ट
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न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता
नई निदल्ली
19 मई, 2023.
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