Madhya Pradesh act 004 of 2001 : The MADHY PRADESH ELECTRICITY REFORMS ACT 2000

Department
  • Energy Department
Enforcement Date

20 Feb 2001

B AT i e et e लिनाा ! i | J‘- डाक-च्यय की पूर्व-अदायमी के बिना | शक “डाक दवा भेजे जाने के लिए अनुसत्त, i 'डनुमत्ति-पू्र क्र. भोपाल-एप.पी. e T, 04 भोपाल-2001. क्र पंजी क्रमांक पोपाल डिनोजन एम.पी. 108/भोपाल/ 2001. ः (असाधारण) - प्राधिकार से प्रकाशित st v क्रमांक 99 3 :.... भोपाल, मंगलवार, दिनांक 20 फरवरी 2001--फालुन 1, शक 1922, विधि और विधायी कार्य विभाग भोपाल, दिवांक 20 फरवरी 2001 क्र, 1688-इक्कीस-अए प्रा. ).-मध्यप्रदेश विधान सभा का निम्नलिखित अधिनियम, जिस पर दितांक 12 फरवरी 2001 को राष्ट्रपत्ति की अगुपत्ति प्राप्त हो चुकी है, एतर्द्वारा सर्वसाधाएण की जानकारी के लिये प्रकाशित किया जाता है. J gy TR F A W O आदेशानुसार, आर. के. सिटोके, अतिरिवत राचिव,

धाराएँ : ही के दही हद o, 1% 1. 3. ¥, . {E. मध्यप्रदेश अधिनियम क्रमांक ४ सन्‌ २००९. मध्यप्रदेश विद्युत ग अधिनियम, २०००. - jgw प्रारंधि संक्षित नाम, सिस्तार और प्रारम्भ, ं “परिभाषाएं, | अध्याय दो मध्यप्रदेश राज्य आयोग की स्थापना और गठन, अध्यक्ष (चेयरपर्थन? और सदस्यों का चयन करने की लिए समिति का यठन आयोग के सदस्य के रूप में नियुक्ति के लिए नो. सदस्य की पदावधि, सेवा की शर्तें इत्यादि अध्यक्ष (चेयरपर्सन) या सदस्यों का हटाया जाना , आयोग के सचिय, कर्मचार्वृन्द और परापर्शदात्तीओं की सियुषित अध्याय-तीन आयोग के कृत्य, शक्तियां, और कार्यवाहियां आयोग के कृत्य, आयोग की शक्तियां. आयोग की कार्यवाहियां. | अध्याय-चार | H | ; राज्य सरकार की शक्ति राज्य सरकार को सामान्य शक्ति, सन्‍्य सरकार और आयोग के बीच विंदाद का 'पाध्यस्थपू, अध्याय-पांच ' पारेषण तथा प्रद्याय का अनुज्ञापन अनुज्ञापन, आयोग द्वारा अनुज्ञपा प्रदान किया जाना, अनुशप्ति रखने को आवश्यकता से छूट, - . ,r} - व 1 ३ ६ - B & o ली,

R qumi% राजपन, दिगांके 20 फॉवरो 2001 198 (1) श७. .... अनुकप्ति की शर्तों का संशोधन, न L. अतुज्षप्ति का प्रतिसंहरण. 1%, जहां अनुस्प्ति प्रतिसंहत को जाती है वहां उपबंध. पड २०. अनुज्ञस्तिधारक- तथा उत्पादक कंपनियों के साधारण कर्तव्य तथा शब्तियां, शव २१... आपुज्पिधारियों तथा उत्पादक कंपनियों गर निर्मन्धन, R अुस्प्तिपारियों के चार्पिक लेखा, . अध्याय-छह बोर्ड का पुनर्गठन २३. .... मध्यप्रदेश विद्युत मण्डल की संपत्तियों, कृत्यों और कर्तव्यों का पुनर्गठन, रद, कार्मिकों से संबंधित उपबंध. W, अंपरण में फेरफार. i अध्याय-सात टैरिफ 3E. टैरिफ, २७, .... राज्य सरकार द्वात् आर्थिक सहायता: ;. अध्याय-आठ आदेश तथा प्रवर्तन i _ . अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आदेश, २९. .... अनुपालन सुनिश्नित करने के लिए सिंतिम आदेश. ३० आपात उपबंध, . ' 3. il st aifim amdwl = और उनका प्रचर्तन, जुर्गनि और प्रभार. ’ 3 आयोग का सामान्य विसंत्रण. . i हा अनुज्ञप्तिधारियों द्वास काम करने के मानक, जानकारी का प्रकटीकरण इत्यादि 33. राज्य सलाहकार समिति. ३४... विद्युतू ग्रदाय कार्य करने के सानक. s, कार्य करने केमसानकों की जानकारी. <%, तफ्भोकता संरदण विधियों के लिए व्यावृत्ति, caec ' कार्य करने के स्तरों के संबंध में जानकारी, ४'.. ज्कह ३८, जानकारी के प्रकटीकरण का प्रसिमेध, । . उध्याय-दस; i . triwwr( और अपील ३९... आयोग द्वारा पाप्यस्थपू, , ४०... विद्युतू निरीक्षकों के विनिश्चयों के सिरुद्ध अपीलें. ¥, आयोग के आदेशों के विरुद्ध अपीतें.

हरे, ¥3. ६. ¥, AN Yo, पर. %3. पे, पु, U, ५६, Y, फुट, अध्याय-ग्यारह लेखां, संपरीक्षा तथा रिपोर्ट आयोग का चजट, ! आयोग का लेखा और उसकी संपरीक्षा, - आयोग की वार्षिक शिपोर्ट, अध्याय-नारह T अपराध और शास्तियां धारा १४ के उल्लंघन के लिए शास्ति. अन्य उपबंधों के उल्लंघन के लिये Wi, कंपनियों द्वारा अपराध, अपराधों का संज्ञान और उनके प्रशमन की शक्ति. . शास्तियां और कार्यवाहियां अन्य कार्रवाइयों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेंगी, अध्याय-तेरह तो प्रकीर्ण फीस, जुमनि और प्रभ्ण्रों की वसूली, जुर्ाने और प्रभारों का उपयोजन ं अधिरोपित्त जुपनि या शस्तियों का कोई अधिकारिता का वर्जन R कठिनाईयों को दूर करने की शक्ति विनियप बनाने को शक्ति नियम बनाने कौ शबितति ई पाग संक्रांत नहीं किया जाएगा, आयोग के सदस्य तथा कर्मजारिवृन्द लोक सेवक होंगे आयोग के समक्ष की जाने वाली कार ' न्याधिक कार्यवाहियां होंगी. | अध्याय-चौदह विद्यमान केन्द्रीय वि पर प्रभाव तथा व्यावृत्तियां i - भारतीय चिद्युतू अधिनियप, १९६० और विद्यु् ( प्रदाय) अधिनियम, १९४८ पर इस अधिनियम का प्रभाव, विद्युतू नियापक आयोग अधिनियप, १९९८ व्यावृत्ति. ही जधिमियम, १९९८ का सां. 1Y) W ¥ अधिनयम का प्रभाव. L™ o,

o A ¥ [दिनांक १२ फरवरी 300t को रॉप्ट्रपतति की अनुमति प्रात हुई; जी ' “२ इस अधिनियां में जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न. हो, सो प्रधमबार प्रकाशित की /ाई. निम्न प्रयोजन के लिए, (एक). राज्य विद्युतू नियामक आयोग स्थापित करने; (दो) चिधुवू उद्योग की पुनः संरचना करने; (तीन) ज़ज्य में विद्युत के उत्पादन, परेषण, उप-पारेषण, वितरण और प्रदाय का. गुव्तियुवतकरण करते; (चार). चिद्युतू के पोमण और प्रदाय के अनुशञपन को विनियपित करने; | (पांच) विद्युत को क्रय, पारेपण, उप-पारेषण, | वितरण, प्रदाय- और उपयोग को विनिगणित करने; का T (छह) उपभोक्ताओं के हितों और उपयोर्गिशा | को ध्यान में रखते हुए रोया क्रो गुणवत्ता और टैरिफ तथा _ .... ८ ऊर्न्य प्रभारों, को उपलब्ध कराने; (सात). दक्ष, पिराव्ययी और प्रतिस्पर्धी रीति से राज्य में विद्युवू उद्योग के विकास और प्रबंभ के लिए सराहायक उपाय करते; : . और उससे संसक्‍्त और या आनुगंगिक विषयों के सिए अधिनियम. भारत गणराज्य के इवयावननें वर्ष में सप्सप्रदेश विधान-मंडल द्वारा पिप्लिखिते रूप में यह अधिनियणित हो :-- अध्याय-एक प्रारम्भिक ९. (९) Ty अधिनियम का g T Ry fagp सुधार अधिनियम, Roes % संकिप्त सलाम, o सिस्तार और प्रांभ., (२). इसका विस्तार साप्पूर्ण मध्यप्रदेश राज्य पर हैं. (३). यह ऐसी तासेख को प्रवृत्त होगा जिसे रान्य सकार, अधिसूचना द्वार, नियत करे. परिधाषाएं, (क).. 'पारण का शोत्र” e A भरत है जिसके भीतर किसी पारषण अनुदति का धारक या कोई आम्य व्यचित तत्समय विद्युत गे त करने के सिंये प्राधिकृत है; ः (ख).. "आयोग" से अभिप्रेत है धाए ३ के अभीन गठित मध्यप्रदेश लिद्युतू नियामक आयोग; (ग)... “केन्द्रीय आयोग” से अभिप्रेत है १९९८ का सं. ४)की धारा ३ की धुत नियागक आयोग ऊधिनियप, १९९८ ( केन्द्रीय अधिनियम, . धारा (१) के अधीन गछित केन्द्रीय विद्युत तिसागक आयोग; e e ottt o et

P R AT S S TR पा < जलन व दिनांक 20 फरवरी 2001 , () - ® (=) (3) () (%) (=) () (3) (®) (ढ़ ' (ण) (@) (‘f)i () ) ” अधिनियम, १९१० (१९१० व (9), - sy . थ4.. _'_“-"—“————____ "केन्द्रीय अधिनियम से भप्रेत है विद्युत वियापक आयोग अधिनियम, ११९८ (१९९८ का सं. रह); '' विद्युत उद्योग" से ऐसे छंयबित या आश्तियां अभिप्रेत्त हैं जो विधुत्‌ के कारबार या उसके उत्पादव के क्रियाकलापों, पारेषण, फप-पारेषण, वितरण के या विद्युत प्रदाय या ऊर्जा प्रणाली के प्रचालन में, ऐसे कारबार और न के विनवियपन और उससे संसकत चिंमयों में संतग्व हों; "I न्यायालय" से अधिप्रेत है मध्यप्रदेश राज्य का उच्च न्यायालय; “स्थानीय प्राधिकरण *' | 3 है राज्य में नगरपालिक निगम, नगरपालिका, नगर पंचायत, जनपद i पंचायत या जिला पंचायत किन्तु और कोई अन्य प्राधिकरण नहीं; ' '' अनुजप्ति”' से अभिप्रेत है अधिनियप की धारा १५ के अधीन प्रदान की गई कोई अनुज्ञपि और इसमें सप्पिलित है धार्स दे के अधीन प्रदान की गई अमुज्नप्ति और इस अधिनियम के प्रवृत्त होने, के पूर्व भारतीय विधयु् सिधिनियम, इ९१० (१९१० का से. ९) की धारा २८ के अधीन दो गई मंजूरी ; -~ धारक से अभिप्रेत है इस अधिनियय के भाग-पांच के अधीन विधुवत हू लिये अनुज्नप्त कोई व्यक्ति और उसके अंतर्गतुदधारा ३ के अधीन भी है जिसे इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के '“ब॑ भारतीय 120 4 सें. ९) की धारा २८ के अधीन मं,” प्रदान लै गई है; *' अनुज्प्तिधारी o v AT पारेषित करने या प्रदाय करने, अनुज्ञप्त व्यवितत या ऐसा "सदस्य '' से अभिप्रेत है आयोग का सदस्य और ' उसयें आयोग ४ 'चेयरपर्सन) _ सम्मिलित होगा; ! ' **विहित'” से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियपों या चिनियमों द्वारा विहित; *' विपिय पेन" से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन आयोग द्वाय बनाए गए विनियपन; i *" नियप' ' से अधिप्रेत है राज्य रारकार द्वारा इस अधिनियप के अधीन बनाएं गए नियम; "“चयन-सपितति”' से अभिप्रेत हैं पा ४ के अधीन गतित्त चयत-समिक्ति; s [: TR अभिप्रेत है पथ्यप्रदेश राज्य; “पाज्य सरकार" से अभिप्रेत है. ग़ज्य को सरकार] '*पारेषित करना" से अभिप्रेत है किसी ऐसी प्रणाली द्वार विद्युत का परिवहन या परेषण जो पूर्णत: याँ पुख्यतः, अतिरिक्त उच्च वोल्टेज R अतिरिका उच्च दाब लाइन (हाईटिंशन लाईन) और विध्युत्तू संयंत्र से मिलकर बनी 'है और जिसका उपयोग चिद्युत्‌ को एक उत्पादन केद्द्र से किसी उप केन्द्र को, किसी उत्पादन केन्द्र से अन्य को, या उप-केन्द्र से अन्य को, या अन्यथा एक स्थान से दूसरे स्थान को परिवर्तित करे के लिए और पहुंचाने के लिये और/या अन्तर्ति काने के लिए किया जाता है; "W में उप परेषण और वितरण सम्मिलित होगा; '' उपक्रम” से अभिप्रेत है ऐसी कारबार इकाई जो कि राज्य में, यधास्थिति, उत 7. पक g by के विमिर्दिष्ट क्षेत्र में विद्युत के प्रदाय या राज्य में ऊर्जा प्रणाली के प्रचालन थे e किसी अन्य कार्यकलाप में संलग्न हो; o A7 # 4 - ARy

i, @) उन शब्दों तथा अभिव्यवितियों का जो इस अधिनियम पें प्रयुवत हैं किन्दु परिगामित नहीं हैं और भारतीय चिदुतू अधितियग, १९१० (१९९० का सं, ९) या विंदुतू ( प्रदाय) उधिनियप, १९४८ (१९४८ का सं. ५४) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होगा जो' इग उधिनियपों में उकके लिए दिया गया है. ' लिन - -.. अध्याय-दो मध्यप्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग ३. (१) राज्य के लिए एक आयोग होगा जिसे मध्यप्रदेश राज्य विद्युद्‌ नियापक आयोग के नाप से जाया जाएगा जो शाश्वत उत्तराधिकार के साध एक निममित निकाय होगा! और जिसकी एक सापान्य मुद्रा होगी और उसे जंगम तथा स्थावर दीयों प्रकार की सम्पत्ति अर्जित करने, धारण करने. और उपका व्ययन करने तथा संविदा करने को शक्ति होगी और बह उचतें नाम से चाद चलाएगा या उचत नाग से उसके विरुद्ध वाद चताया जाएगा. (२) राज्य सरकार, अधिसूचनी द्वारा आयोग गठित करेगी. आयोग एक अध्यक्त (चेयरपर्सन) और दो सदस्यों से मिलकर बनेगा जो इस अधिनियम में उपबंधित्त रीति में तियत्तित और नियुक्त किए जाएंगे. राज्य सरकार किसो भी सदस्य को अध्यक्ष (चेयरपर्सन) के रूप में पदाधिहित करेगी. दो सदस्यों में पारस्परिक ज्येष्ठता को गणना उनकी अपनी- अपनी नियुक्ति की तारोख से की जाएगी. उस दशा में ्ग लो या अधिक व्यवितियों का एक ही समय पर चयन किया , जाता है तो सल्य सरकार, नियुवित करते सपय उनमें R का अख्धारण करेगी. (३) आपोग का अछ्ाक्ष (चेयरपर्सन) और उसके ही आयोग के कृत्यों के अनन्यतः निर्वहन के लिए पूर्णकालिक रूप में मियुबत किए जाएंगे और वे कोई अन्य पद धार ; करेंगे या कोई अन्य कार्य हाथ पें नहीं लेंगे. (४) केन्द्रीय अधिधियप की धारा ₹७ की उपधारा (१) के अभीन जारी की गई अधिसूचना क्रपाक प७र२६- एफ-३-र२०-तेरह/९८ दिनांक १८-८-१९९८ द्वाप् राज्य AT 51U गठित किया गया सज्य आयोग और इस अधिमियमप के प्रारंभ होने की तारीख को अस्तित्स में आने चाला ग इस डधिनियप के प्रयोजन के लिये प्रथम आयोग होगा और उसके संबंध में यह सपझा जाएगा कि उसका गठन निये क्त किये गए अध्यक्ष (चेयरपर्सन) और सदस्यों को पदावधि की शेष कालावधि के लिए इस अधिनियप के अधीन .किपा गया है. ः ' 4 . . i . . : (५) आयोग का मुख्यालय भोपाल, मध्यप्रदेश थे छौगा और यह अना स्थानों पर अपने कार्यालय स्थापित कर सकेगा. आयोग, अपनी कार्यवाहियां, परामर्श और गग 1 4 3T अशातों पर संचालित करने का हकदार होगा, के लिए एक खसन-सपिति का गठन करेगी जो पिप्नलिखित ४. (१६) राज्य सरकार, आयोग के सदस्यों का चयन व व से मिलकर बनेगी :- (क) राज्य का मुझ सचिव-अप्यक्ष; (ख) केन्द्रीय लिदयुतु प्राधिकरण का अध्यक्ष या उसकी अनुपस्थिति ऐें केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण के अप्यश् द्वाप्र नामविर्दिष्ट एक संदेसा-- सदस्य; (1) क्रम्पनी अधिनियग, १९५६ (१९५६ का सं. ६) कीं धारा ४--वए को उपधास (१) में यथा उपनबणिति किसी गार्वजनिक वित्तीय रस्था का प्रबंध संचालक या किसी विद्युत उद्योग के कारोबार में या किसी चिद्युवू उद्योग की निधि रांचालित करने या नित्त पोषण में रांलगन भारत सरकार के स्वाभित्त या पियंत्रणाधीन किसी उपक्रप का प्रबंध. 'संत्ालक--स्देस्थ, _ ' । . | ; आयोग की AT और गठन. अध्यक्वा (सेयर- पर्सन ) और सदस्यों का अयन करने के लिए wfala =1 गठन,

198 (6 ) o - : 192 (6 ) मध्यप्रदेश सजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2001 'जायोग के सदय के रूपए में नियुक्ति के लिये शर्तें, , . (२) रान्य रार्कार, पृत्यु, पदत्थाग था हटाएं जाने के कारण हुई रिंवित को तारोख से एक पास के भा और किसी सदस्य की अधितार्मिकी या उसके कार्यकाल की समाधि के चार पास पूर्व उपधारा (१) में यधा विनि्देष्ट चयन-समिति गठित करोगो और रिवितयों को भरने के लिए चयन-समितति को निर्देश करेगी, (3) चयन-सपितधि, उस त्ारोख से जिसकी कि पिर्देश किया है, एक मास के , भीतर सदस्य के 'चयन को अंतिम रूप देगी, 1 । , (४) चयन-सपिति, उसे निर्दिष्ट की गई. प्रस्येक रिवित के लिए दो नाम के एक पैसल की सिफारिश करेगी. (५). राज्य सरकार, प्रत्येक रिवित के लिये चयन-सपितति द्वार सिफारिश किए गए दो नाम के पैनल में से सदस्यों की नियुवित करेगो. और अपने विनिश्चय को ऐसी सिफारिश की प्राप्ति के एक मास के भीतर अधिसूचित करेगी ५. (१) आयोग के सदस्य योग्यता, ईमानदारी तथा. प्रतिष्ठा वाले व्यक्ति होंगे, जिन्हें ऑपयांपरिको, अर्थशास्त्र वाणिज्य, वित्त, विधि, प्रशासन या प्रबंधन का पर्याप्त ज्ञाव और अनुभव हो, या जिन्होंने इस संबंध में संमंधित समस्याओं का e & में क्षमत्तां प्रदर्शित को हो तथा यह और कि आयोग सभी समयों पर निम्नलिखित व्यवित्यों से पिलकर M 9T o (F) . @ व्यक्ति जो विद्युत्‌ के उत्तादन या पोषण या उप-परेषण या वितरण में .विशेषज्ञता के साध ' अभियांत्रिको के क्षेत्र में अहता और पर्याप्त अनुभव रखता हो; और (@) . दो अन्य व्यवित जो किसी अन्य विषय अर्थात्‌ अर्थशास्त्र, साणिज्य, वि TR प्रचंधन में अहताएं और पर्याप्त नव रखते हों परत्तु एक से अधिक सदस्य को ख"्ड ( ं १ में उल्लिखित किसी विशिष्ट विषय के अधीन नियुसत नहीं किया जाएगा. । . (२५ कोई भी व्यवित्त यदि सह संसद W जी पी सज्य विधान मंडल का सदस्य है था किसी स्थानीय प्रधिकरण का अध्यक्ष (चेयरपर्सन) या सदस्य है तो वा: आयशोग के सदस्य के रूप में नियुवत होने के लिए अनहं होगा. (३) वह व्यवित्त जिसके नारे पें आयोग हक e F w0 o मियुक्त किये जाने पर विचार किया जा रहा है, अचयन-समपित्ति को-- I » . [ (%) ऐसा कोई पद, विदयोजन या परर्पेशंदायी करार यां उहराव जो वह. अपने स्वयं के नाप से या किसी मातिदार के चाग से किसी ऐसी ल्यक्तियों का संगप या मिगपित निकाय. पें रखता हो जो कि उनमें से किसी के स्थापित्व की ल्ल या उनमें से किसी के द्वारा अन्यथा पियंत्रित हो और जो निम्नलिखित में से कोई कारलार कर रहा 2 । (एक). विशुतू का उत्पादन, पारेषण, उप-पारेण वित्तरण या प्रदाय (तीन). विंधुत्‌ू के उत्पादन, पोषण, ) -पफोरेसण, सिततरण, प्रदाय या उपयोग के लिए संव्यबहार करने, वाली मर्शानरी, संयंत्र, उपस्को) साधित्र या फिटिंस्स का चिनिर्पाण, सिंक्रय, पटुरे पर देगा, किराए पर देना सा अन्यथा प्रदाय ST कारबार करना; .और थी (दो)... सिधुतु के उत्पादन के लिए ईंधन का सिंपिर्पाण, विक्रय या प्रदाय (नार) . उपरोबत खण्ड (एक), (दो). और (तीन) में निर्दिष्ट किसी भी कार " «४. i सेचा देने वाली फोई सत्ता; . अधिसूचित कोगा, 5

=it : «ना के ८ पक & मैं. जाएगा, सदर स्सनयर/ q प्यप्रदेश राभिपत्र, दिगांक 20 फरवरी 2001 1१ 6०1८४ (ख) ऐसी अन्य जानकारी जो Bl g या चयन-समिति द्वास अन्यथा बिहिंत को जाए, अधिशूचित करेगा. - ः : i , स्पष्टीकरण :-- इस धारों के प्रयोजन के लिये की अधिनियप, १९५६ (१९५६ का सं. १) तेदार का वहीं अर्थ होगा जो कि उसके लिए कम्पनो ma ६ में दिया; गुया ,है. के पूर्व, उपभाए+( ३) में उल्लिधित कारबारों के हित करेगा, ; , (=) आयोग का प्रत्येक सदस्य, आयोग में कार्य हित सो, स्वयं को उसकी पियुक्ति की एक शर्त के रूप न (५) यदि कोई व्यक्ति जिसे आंयोग के सदस्य के रूप में नियुवित किया जांगा हो, राण्य सरकार के या केन्द्र सरकार के या क्रिसी अन्य राज्य की सरकार के या किसी सारवृजविक क्षेत्र के उपक्रम या किसी शासकोय निकाय के अधीन कोई पद धारण करता है या किसी व्यवितत की, सरकारी प्राधिकरण की, सार्वजनिक या निज क्षेत्र की सेवा में या अन्यधा अभिलाभ पुर्वक्त नियोजित या लगा हुआ है तो ऐसा व्यक्ति आयोग में कार्यप्रहण के पूर्व उस सेवा से त्यागपत्र दे देगा या स्वैच्छिक सेवानियृचि ले लेगा, (६) आयोग के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया कोई व्यक्ति जो किसी कारण से चाहे वह जो भो हो, सदस्य नहीं रह जाता है, उसके पश्चात्‌ किसी भी “सपय T सरकार की सेवा में याःराज्य सरकार के स्वामित्व के या उसके नियंत्रणाधीम किसी निगधित निकाय यां संस्था या! उपक्रम की सेवा में फ्युवत नहीं किया जाएगा. . E 3 (७) आयोग के रादस्य के रूप में नियुवत किया गया कोई ल्पवित जो किसी कारण से "चाहे चह जो भी हो रादस्त जहाँ रह जाता है, किसी भी सम आयोग के समझा बाप जात नहीं होगा या अन्यधा किसी व्यधित का प्रतिनिधित्व नहीं कोगा या किन्हों कार्यवाहियों में आयोग के लिए या ओर से उपसंजात महाँ होगा. (८) जब तक चह व्यक्ति सदस्य का पद धारण किए रहता है और किसी कारण से चाहे चह जो भी हो उसके सदस्य न रह जाने के परचातु दो वर्ष की कालावधि शक वह व्यक्ति उपधाण (३9 में उल्लिखित कारमारों में प्रत्यश्षत: या अआप्रत्यशतः: कोई पद, नियोजन या पसमर्शीं उहराव या कोई चिंतीय हिंत अर्जित, धारित या संधारित गहीं करेगा और यदि ऐसा व्यघित स्वेच्छातिरुद्ध या उत्तरधिकार या बसीयती व्यवस्थापन के रूप में ऐसा कोई हित अर्जित करता है तो चर ऐशा हित अर्जित होगे को तारीख से तीन गारा की कालावथि के भीतर, रखयं को ऐरो हित से मिर्षिहितु को गा, (९१ किसी व्यक्ति को अनुशंसा करने के पूर्व चयन-समित्ति अपना यह समाधाग करेगी कि उस 'त्यचित का ' ऐसा कोई वित्नीय या अन्य हिंत नहीं है जिससे कि सदस्य के रूप में उसके मुरयों पर प्रतिवून्ल प्रभाव पड़ते को संभावना t € (1) प्रत्येक सदस्य जिसमें अध्यद्या (चेयरपर्सग) भी सम्मिलित हैं, उस तारीख से, जिसको कि वह आपना पद धारण करता है पांच सर्प तक को अवधि के लिए या पैंशाठ चर्ष की आयु त्तक, इनमें से जो भी पूर्वार हो, पद धारण कोगा और नियुवित की अवधि का अतेप्तान होने के पश्नात्‌ू किसी भी समय अध्सक्ष (चेयरपर्सन) या सद्रस के रूप में पुनर्नियुनित का पात्र नहीं होगा द गान्तु किसी भी ख्यनित को 'बासठ चर्म की आसु पूर्ण का लेने के पश्चात, सदस्य के रूप पें नियुक्त गहीं किया न . . ही . (२) अध्यक्ष (चेयरपर्सन) और अन्य सदा ऐसा गारिश्रणिक और अन्य: भत्ते प्राप्त करेंगे और, ने .सेता को ऐसी शर्तों द्वारा शासित होंगे जैसी कि नियपों, द्वारा तिहित की. जाए. .... ०; का; 15 प्रा S . “tu—l'«'__ अध्यक्ष ( चेगरपर्सग) और -सदस्य के लिए, I स राएकार दवा, अचधारिति किए गए लेतन और भत्ते किसी संपय उस सेतन और भत्ते से निम्नता नहीं होंगे जो कि सुसंगत्॑ समय पर राज्य सरकार में प्रमुख सचिन के पद को लागू हों : N परमु यह और कि अप (चेयापर्सन) और कं | को नियुतित के पश्चात्‌ ग्त्क सार चिहित किए गए A, भत्ते और सेवा की अन्य शर्तों में उनके अततागप्रद रूप A फेरफार नहीं किया जाएगा, | ं गादाय की पदावपणि, war इत्यादि, को शर्ते

अध्यक्ष '(चेयापर्सत ) या सदस्यों का हटाया जाना, दल अजय + [ AV [| ही की + e (३) अध्यक्ष (चेपरपरसग) | प्रत्येक अन्य सदस्य अपना पद ग्रहण करने के पूर्व ऐसे प्ररूप में, ऐसी रीति ये तथा ऐसे प्राधिकारो के सपक्ष पद और गोपनीयता को शपथ लेगा और हस्ताक्षर करेगा जो कि राज्य सरकार द्वापा चिहित किया जाए, L . £ + i | Y .| - () अध्यक्ष (चेयरपर्सन) या; कोई सदस्य, राज्य रारकार को कम से कम तीन सास को' लिखित में सूचना देकर अपना पद त्याग सकेंगे, ! ' ' i - - ७. (१) आयोग के किसी गए को, -- ः " - (कड़े जिसे दिवालिया निमायनिण कर दिया यया हो; या व (W) <@ m{u के लिए, जिसमें नैशिक' अधमता अंतर्वसिते है, सिद्धदोप ठहराया गया हो; या (गम). जो ऐसे सदस्य | रूप में कार्य करने में शारोरिक रूप से या मागसिक रूप से असमर्ध हो गया हो; या " | (घ)... जो युक्तियुकत क। इंकार कर चुका रिण के बिना कम से कु्म तीस मास तक की कालावधि के लिये कार्य करे से या कार्य करने में सफल रहा हो; यां T . . (5)... जो सदस्य के रूगमें नियुवित को कित्हों भी शर्तों में सें किसी ₹. सो पूरा नहीं करता हो; या (च) जिसने ऐसा चित्ती' *या अन्य हिस अर्जित कर लिया हो, जिसे कि. एक: यदस्य के रूप में उसयें, i < F W प्रतिकूल, प्रभाव पड़ सकता हो; या . . (o) जिसने स्वस लोक हित | के प्रतिकूल रीति में आचरण किया हो या जिसने : (पनो स्थिति का इस प्रकार दुरुपयो: किया हो जिससे कि उसका पद पर नना रहना लोकहित के या इस अधिनियप के उद्देश्यों और प्रथ जगों के प्रत्तिकूल हो जाए, ' o : s आपने पद से हटाया जा सकेगा. . . न! (२) सिवाय इसके कि जहां कोई सदस्य लिखित में आरोप स्वीकार कर लेवा है, कोई भी सदस्य उपधारा (1) F ' (M), (), (F), () T (छि) में विरनिंदिष्ट आधारों पर तब तक अपने पद से नहीं हटाया जाएगा, जब aF कि राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त निर्देश किए जाने पर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति द्वारा यथा ' अनुशंसित उच्च म्यायालय के किसी आसन न्यायांधीग नै ऐसी प्रक्रिया के अपुसार जांच कंरनें के पश्चात, जैसी कि उच्य-न्यायालय द्वारा इस निमित्त विहित को जाए, यह शिकोर्ट नदेदी हो कि ऐसे आधार या आधारों पर सदस्य को हरा दिया जाना चाहिए, N ' : पं (३) उपधारा (२) के.झधीन किसी 'धदस्य के विरुद्ध जांच लंबित रहने पर राज्य सरकार, किसी सदस्य को आयोग के अध्यक्ष (चेयापर्सन) या सदस्य के रूप पें कार्य करने से केवल तभी निलंबित कर सकेगी यदि उन्च स्‍्यायालय के. मुख्य न्यायमूर्ति द्वार या उपधारा (२) के अशीन अम्वेष्ण करने के लिए नियुवत किए गए न्यायाधीश द्वारा ऐसे निलंपन को जांच करने के लिए सिफारिश को जाती है. ४) चह व्यवित जिसे आयोग के अध्यक्ष (चेयरपर्सस) या सदस्य के पद से हटा दिया गयीं हो, आयोग में किसी थी हैरि,यत में मुमर्षियुवित का पात्र नहीं होणा. T S

o 12 " सध्यप्रदेश सजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2001 ८. (६) आयोग, एक व्यक्ति को आयोग की उसके कृत्यों के . निर्वहन में सहायता करने के लिए सचिव के रूप में नियुक्त करेगा ट्ं . Prgfam, डा ३१ आयोग, राज्य सरकार की पूर्व सहपति से, उसके कृत्यों के निर्सहन में आयोग को सहायता के लिए अपेक्षित ¥ - + अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या, प्रकृति और sl क़ा और आयोग के सचिस, अधिकारियों और कर्मचारियों को देय वेत्रनसान तथा भक्तों का और उनकी सियुक्तित के अन्य नियन्धन और शर्तों का भी उदधारण -कर सकेगा, (३) आयोग के व्यंय जिनमें आयोग के अध्यक्ष (चेयरपर्सम) और सदस्यों को आयोग के सचिन, अधिकारियों और अप्य कर्मचारियों को या उनके संबंध में देय वेतन और भत्ते भी सच्पिलित हैं, राज्य की संपित पिधि पर भारित्त होंगे (४) आयोग के सचिव, अधिकारियों और अन्प ं चारियों के चयन का ढंग और रीति ऐसी होगी जैसी कि आयोग द्वारा चिहिर की जाए, (५) आयोग समय-सपय पर अपने कृत्यों के निर्वहन में आयोग को सहायता करने के लिए अपेक्षित परामर्शियों को ऐसे निरबंधनों और शर्तों गर नियुक्त कर राकेगा, जो कि * पक्के . ९. इस अधिपियग के उपनंधों के अध्यधीन रहते न निर्वहन करेगा, अर्पात्‌ :-- (%) (W) e (घ) (ड) = 'आयोग द्वारा सिंहित की जाएं, G- आयोग के कृत्य, शक्तिधां और कार्यलाहियां शी . + e }i को सेवा की गुणवत्ता, देय टैरिफ और प्रभारों को उपभोषता (विचार करते हुए सितियसित करना; राज्य में विद्युत के उपयोग में दक्षता, o और सुरक्षा को प्रोन्तत़ करना, जिसपें सेवा की गुणवत्ता, निरनारता और विश्वसनीयता औध यह कि सिद्ुतू को समस्त युविस॑सुवत गांग को पूर्ति होती है, भो सप्मसित्तित है . , अन्य कृत्पों के साथ-साथ निम्नलिखित कृत्यों का सिद्युतू के क्रय, वितरण, प्रदाय और उपयोग और सिद्युततु उद्योग दोनों के ही हितों इस अधिवियप के उपबंधों के अनुसार g6, TERET (TEE), प्रिड या फुटकर विद्युतू के लिए टैरिफ अवधार्ति करता; 4 इस अधिपचियग & 3w % argan e&flwfih गोषण की सुविधाओं के उपयोग के लिए देय टैरिफ अन्रधारितत करना I _ . इस अधिधियम के उपयंधों के अनुसार अनुद़्प्तियां प्रेदान करना, प्रतिसंहत क्ररता और उनमें संशोधन करना, अनुर्ज्ञी o सप्मिततित की जाने बाली शर्तें अवधारिति करना, अंनुसत ¥ लिए की जाने वाली अफेशाओं में चूट प्रदान करना और शूट प्राफा व्यवित्तयों द्वारा अनुगालन को जाने ताली शर्तें अवधारित करना; . अनुज्ञप्तिधारियों के कामकाल को विनियंपित करना 3l gy, Feemd st शास्सापूर्ण रीति गें _ i कामकाज किए जाने को प्रोस्तत करना; 198 (v} आयोग से रालिस, स्र्मचारियून्द और परामशदाताओं सी त. आयोग के कृत्य,

आयोग शक्तियां, कौ (3) (जड़े (3 (ज) () (3) (3. (%) () (7 - (m () न ४ पथ बा | ८ अनुस्प्तिारियों तथा अन्य! लोगों से, और अन्य व्यक्तियों के साथ सपन्वय करके fae के उत्पादक, परेषण, उप-पोरेपण, वितरण, प्रदाय और उपयोग को अधिवृद्धि के लिए अनुसपिधारियों तथा अन्य -. व्यक्तियों से परिप्रेक्ष्य योजनाएं और स्कोगें बनाने को अमैक्षा करना; चिंदुत्ु के उत्पादन, पारेषण, उप-पारेषण, लित्रण, प्रदाय और उसके उपयोग से संमंधितत जानकारी १ एकन्रित काना तथा उसे आ लिखित करना और मांग को जाने पर विधुत्‌ तथा उसके उपयोग के ' लिए ऐसी जानकारी और आंकड़े तथा पूर्वानुमान एकप्रित करने को आनुज्ञत्तिधारियों तथा अन्य व्यक्तियों से अपेक्षा काना; '. | , . राज्य में ऊर्जा की मना प्रचालन और राज्य में विद्युत उद्योग से शंपद्ध ७, “* घित आस्तियों, संपत्तियों तथा संपत्तियों में के हित को विपियपित करता; ः राज्य में विद्युत्‌ उद्योग के लिए मानक स्थापित करना और प्रयर्तित करण... वा, गुणवत्ता, निएंतरता और सेसा की विश्वेसगीयता संभंधी मानक तथा संकैत्तकी (कोड) और प्रदाय संक्रेतकी (सप्लाय कोड) नर बियास काना सम्पिलित है और जिसमें प्रिड कोड चथा विंधण कोड i सम्पिलित % राज्य में विधुतु उद्योग में प्रतिस्पर्धात्सकता को बढ़ाना; समुचित मांग प्रबंधन के द्वारा विद्युतू के उपयोग थें क्षय और हाथियों में कमी करके विद्युत के दक्षतापूर्ण उपयोग और उसके संरक्षण को बढ़ाता; राज्य A fage उत्पादन, पारेषण, उप-परेसण, सितरण, प्रदाय और उपयोग से संयद्ध विषयों पर राज्य सरकार को, ऐसो सहायता और सलाह देया जैसो कि आयोग समुचित्त समझे; यदि आयोग समुचिद्र सपझे तो सापले ऐसे अन्य अधिकरणों और निकायों को निर्दिष्ट करना जो उपभोक्ता सिवादों, अनुसप्तिधारियों के क्रिंयाकलापों के आवरोधक और अनुसित व्यापारिक व्यवहार तथा प्रयंधन तथा प्रशासन के पलों का निपटार करते हैं; अतुग्प्तिधारियों के बीच न और मापेदों को प्यायतिर्णोत्त करना और यदि इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार आवश्यक सिमझा जाए तो मामलों को माध्यस्थप्‌ को निर्दिष्ट करना; पर्थवार्कि नियामक अभिकरणों के साथ सपन्वय रखना और राज्य पं सिंधुवू उद्योग के समुचित पंथविरिक विंनियगस के लिए ीदियां और प्रक्रियाएं विकसित करना; - P i Y 0 T E fed | . अमुज्प्तिधारियों के चीच के को एक सगान प्रणाली अधिकथित, का और 1 1८ ऐसे समस्त आनुषंगिक या प्रासीधक क्रियाकलाप हाथ में सेना जि्हें' कि आर भी कृत्यों के प्रभावों निर्वहन के लिए समुचित्त समझे, ः . १०, (१) आयोग को इृप्र अधिनियप के | किसी जांच या क्रार्यसाही के प्रयोजनों के लिए निष्नलिखित विषयों के संबंध में सही शबिदयां प्रापा होंगी जो कि सिविल पक्िया संहिगा, १९०८ (१९०८ का पा, ५) के अधीन क्रिसी चाद का बिधारण करते समय किसी सिविल न्यायालय में पक होती हैं, अधत्‌ :-- o (F} किसी साशी को सपन जार क 1 तथा. उसे उपस्थित होने के लिए चितश करना और शपथ गर परीक्षण करना; । Rk Sy अली,

एकल गप्यप्रदेश TV, 1671 20 i o (@) . साइय के रूप सें येश किए जाने योप्य फ़िसो दस्तानेज था किसी अना सास्वान सामंणी का प्रकटी- करण तंधा गेंश किया जानता; { (m M W WA 6 ग्रहण किया जाती; '(घ)... किसी न्यायालय या कार्याहाय से फ़िसी < (ड).... साशियों के परीक्षण के लिये कमीशन , (च) आपने लिनिश्चयों, निदेशों तथा आदेशों का पुर्षिलोकत करता; और () कोई अन्य विषय जो राज्य सरकार द्वारा विहित किए जाएं, (२) आयोग को अपने रामक्ष को किसी कार्ययाही, गुनवाई या बिपय मैं ऐसे अंतरिम आदेश गाफि काने की शक्ति होगी जो कि आयोग रागुन्तित समझे; (३) आयोग, लिखित में किसो साधारण या विशेष, आदेश ट्वाग और ऐसी wiill ¥ आाध्यधीन रहते हुए, जैसी कि आदेश में विनिर्दिप्ट को जाएं आयोग की पदद और सहायता करेंने के लिए किसी सदस्य, अधिकारी या किसी अन्य व्यक्ति को इस अधिनियम के अधीन ऐसी शचितियां प्रत्यायीजित कर सकेगा; पर (४) आयोग को किसी स्यक्ति से यह जमेक्षा ही | की शब्ति होगी कि वह -- (कक)... व्यक्ति अपनी अभिएक्षा या नियंत्रण में की, विद्युत के उत्पादन, पारेषण, उप-पारेषण, वितरण, प्रदाय या उपयोग उक्ता क्षेत्रों में अंतर्धस्त किहीं उपक्रमों के कृत्यों या अन्य लिायों से संतंधित किन्हीं _ ऐसी पुस्तकें, लेखा या अन्य दस्तावेज जो कि अध्यपेक्षा में विनिर्दिष्ट था वर्णित की जाएं, और ज़िनको पसेक्षा ऊयोग इस अधिनियम के प्रयोजनों या इस अधिनियम के अधीन आयोग द्वादय निर्वहन किए. ' जाने चाले कृत्यों के लिए आसश्यक या सुसंगत समझे, इस निमित्त ,चिंनिर्दिप्ट किए गए आयोग के किसी अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करें जो उनकी चाश्ञा करते और उन्हें रखने के लिए डानुजात % और (ख? इस प्रकार धिनिर्टिप्ट किए गए. किसी अधिक्रारी को उस व्यक्ति के आधिपत्य, साम्थष्स या नियंत्रण में ः की ऐसी ' जावकारी दे जो इस अधिनिगम के अधीन डागने कृत्यों करा पिर्वहन करते के, प्रयोजनों के लिए, आयोष द्वार उपेक्षित की जाए; (५) आयोग या आयोग g इस निित्त विशेष रूप से प्राधिकृत कोई अन्य उाधिकारी जो राजपत्रित डधिकारी की पंद श्रेणी से नोचे का न हो, किसी ऐसे भतन या स्थान में जहां आयोग कौ यह सिधास कर का कारण हो कि जांच की विषयवस्तु से संबंधित चोई दस्तावेज वहां पाया जा सकता है, प्रचेश कर सकेगा और दंड प्रक्रिया संड़िचा, १९७३ (१९७४ का सं. २) की धार oo के उपबंध जहां तक से लागू हो रानाते है के आध्यधोन रहते हुए उसे अधिगृदीत . क्र सकेगा या उससे उद्धाण या प्रतियां से सक्तेगा; ", (&) जहां इंस अधिनियां के अधीन किसो जांच या कार्यसाही के दौतन आयोग को यह चिश्चारों करने . का कोई आधार हो कि किसी इकाई सा स्पधित की या उसर संबंधित ऐसी कोई पुस्तकें या लेखा या दस्तानेजों. की जिनके कि संबंध में ऐसी जांच को जा रही है या जिस्हें ग गे इकाई के स्तापी से ऐसी जांच में पेश किए जाने ची उपेक्षा की जा सकती है, नष्ट किया जा रहा है, उन्हें विकृत रिया जा रहा हैं, परिसर्तित्र किया जा रहा है; उनका पिश्याक्ररण किया जा रहा है, या उन्हें छिपाया जा रहा है या उन्हें नष्ट किया जा सकता है, निकृत किया जा सकता! हैं, गरिवर्षित किया जा सकता है, उसका मिश्साकरण क्रिया जा सका % या उन्हें छिपाया जा सकता हैं तो आयोग, लिखित आदेश 1

S TSR, KA 20wl 2007 सकल नल“. 1८ (/2 / - 2 - 8 === द्वास आयोग के किसी अधिकार दे श, तलाशी और अधिग्रहण की एसी शक्तियों का प्रयोग करने के लिए ग्राधिकृत कर सक्तेगा जिनका कि प्रयोग कंगयों आ पलियप, १९५६ (इ९प६ का हां. १) की धारा रदल तथा शडण-क के अधीन निरोदण के लिए नियुवत फिए गए कियो सिरीं के द्वाए किया जाता है; न : ' अन्य विधि में अत्तर्विष्ट किसी बा '... होते ; * भी, ' और अपने i का निर्वहन करने के प्रयोजन के लिए आयोग, किसी साधारण - ) a3y द्वारा आयोग को - कालिक रूप से याइजय कभी आयोग,द्वास अगेश्ा की जाए, किसी व्यक्ति से /जरापें उत्पादन करने वाली कप्पनियां यां अनुज्ञप्तिधारी सम्मिलित हैं, विद्युत के उत्पादन, पारेषण, उप-पारेषण, विंगरण, प्रदाय या उपयोग सेप्सिं बंधित क्रियाकलापों को जामकारी जिरामें ऐसे ख्यकरति और किसो अन्य व्यक्ति था उपक्रम के बंध या रंसंग को जानकारी सम्मिलित है, देचें की अपेक्षा कर सकेगा; और (७). (क) तत्सयय प्रवृत्त (@) आयोग को, किसों और अन्य मर को उपसब्ध कराने |से खण्ड (क) यें उल्लिखित क्रियाकलाप रे संबंधित जानकारी, पुश्तकें, लेखा न्हें केन्द्रीय आयोग, केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण, केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकार प्रयोजनों के लिए मंगानें को शक्तियों का प्रयोग करने का हक होगा, प्रोग को उस सीमा तक जहां तक कि आयोग समय-समय नर उपयुवत्त समझे, [कि आयोग के चिनिश्चयों से प्रभावित हो सके हों या जिनके प्रभावित होने गा. ः Lt ' (८) अपने कृत्यों के निर्वहन मैं, ऐसे व्यक्तियों या व्यवितियों के वर्गों से, को संधवना हो, परामर्श करने का हक (९) कोई व्यर्कित, जिसे कि इस धा के अधीन सूचना जारी को जाए, ऐसी जानकारी, पुस्तकें, लेखा और अन्य दस्तावेज सप्यक्‌ रूप से देगा, जिनको देवे के लिए आयोग निदेश दे और आयोग ' के इन निदेशों का अनुपालन करने में असफल रहने या उसमें घिलंब के लिए [शिस व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही को जाएगी और बह दंडनीय होगा, (o) भारतीय सिधुत्‌ अधिनियम, ९१० (९९६० का सं. ९) की धाए १२ से १६ तक (दोनों धाराओं को सस्सितित्त करते हुए) तथा धारा १८ और ६९ में अंतर्तिष्ट किसी बात के होते हुए थी, और चिधुदू के पारेषण, उप- पारेषण, वितरण और प्रदाय के लिए विद्युत 'प्रदाय लाइनें बिछाने, साधित्र तथा साधन लगाने के लिये आयोग लिखित आदेश द्वारा अनुश्ञप्तिधारी को या विधुत्‌ के परेदण, उप-पारेषण, चितरण या प्रदाय में सगे किसी अन्य व्यक्ति को, ऐसी - शर्तों के अध्यधीन रहते हुए, जैसी कि आयोग; विनिर्दिप्ट करे, ऐसी कोई भी शक्तियां प्रदत्त कर.सकेगा_ जिनका कि प्रयोग ' भारतीय टेलीपग्राफ आधिनियम, इदट (१८८५ का सं, १३) के अधीन रेसॉग्राफ लाइनें सिखाने पर सम्बे खड़े करने - के लिए टेशीग्राफ प्राधिकारी द्वारा किया जाता है. ' . आयोग की क्रार्य- ११, (१) इस अधिनियम के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, आयोग को अपनों कार्यवाहियों के संचातव प्रथा याहियां, अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए विनियप बनाने की अमन्य शक्ति होगी और इस प्रकार बनाए गए. ऐसे समस्त e राजपत्र में प्रकाशित किए जाएंगे. । ! ’ (२) उपधाय (५) में यथा उपबंधित के सिवाय, प्रत्येक सदस्य का एक सत होगा. आयोग के सदस्यों को राय में सतगेद होने के दशा सें, बहुमत को शय गा होगी त्रथा आयोग की राय बहुमत के विचारों पर अभिव्यवत - की जाएगी. (३) आयोग के राष्पिलन के सिए गणपूर्ति दो सदस्यों हो होगी, परन्तु आयोग द्वारा पूर्व में लिए गए किसो सिनिश्चय के पुनर्विललोकन के लिए आयोग के सप्पिलन की गणपूर्ति उपधारा (५) के अध्यधीन रहते हुए उपस्थित समस्त सदस्यों से होगी, (४) जब आयोप का अध्यक्ष (चेयरपर्सन), अनुपस्थिति, न्बीपारी या किसी अन्य कारण से कृत्यों का निर्वहन करने में असमर्थ रहता है तब आयोग का वरिष्ठ सदा, अध्यक्ष (चेसरपर्सन) के कृत्यों का निर्वहन उरा,दिन तक करेगा जब तेक कि अध्यक्ष (चेयरगर्सन) अपना पद का भार ग्रहण न कर ले. ™ AT,

£, - Sl t b ///mmflw Tmfl'//,/, 1& e 20 "चर 001 —— e — (५) अध्यक्ष (ेयरपर्सग) जिसयें आयोग का चर्ष्ठ सदा मी सम्सिलित है, उस दशा में जहां तह अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहा हो, का द्विंतोय या निर्णयक्त पत-होंगा 5 . m-{ जहां अध्सक्ष (चेयरपर्सन) या सिसी पादस्स के पद में रिवित के कारण केवल दो सदा, /' या उसर्सक (लेयरपर्सन) या किसी सादस्य को ऐसी निश्शक्तता के कारण आयोग, तीस दिन से अधिक की कालाव/ /: 7 TRER सपस्त तीन सदस्यों: से कार्यवाहियां नहीं क्र सकता है वहीँ, अधागां (चेसरपर्सग) या यधारिथति अध्यक्ष ( नेयरपसेग ) के रूप में कार्य, कर पे वरिष्ठ सदस्य का मत केवल ऐसी रिक्ति था निःशक्तता की कालावति के दौराव 'ट्वितीप और विर्णसिक होगा ः पान यह और कि प्रथम परंतुक में सिमिर्दिष्ट तेसी रिक्ति या निशशवतता के दौरान, आयोग द्वारा पूर्व पें किए, गए फंसी विभिश्चय के पुनर्विलोक् के लिए दो सदस्यों से गणपूर्ति होगी. ' (६) आयोग के अध्यक्ष (चेयापर्सग) या सदस्य के पद में कोई रिवित या उसके गठन में कोई त्रुटि होने मार्ज से ही आयोग का कोई कार्य या कार्यचाहियां अचिधिमाप्य व होंगी. ः ुदेश दे सकेगा कि वह आयोग का सामिलन ऐसे सपय दे तथा इराके अततिरिवत आशोग का कोई सदस्य अन्य आयोग का राध्पिलिन चुलाने का अनुसेध कर सक्तेणा, (७) आयोप का उाध्यक्ष (चेयरपर्सन) सचिव को तथा ऐसे स्थान पर खुलाएं जैसा कि आाध्यक्ष (चेसापर्सम) नि सदस्यों तथा सचिव को लिखित मैं सूचना देका किसी भी (८) लि को रंगस्त सम्मिलनों की सूचना! गा [ दो जाएगी जब तक कि. समस्त सदस्य लिखित में सूचना का अधित्यजन न कर दें. , ( री आयोग को पाचालन द्वारा अति-आवश्यर्क | का विनिशचय करो का हक होगा. ०9५ आयोग के समस्त विंनिश्चय, निदेश न जे लिखित में होंगे और उनके 'समर्थन में कारण दिए जाएंगे, जिसमें भिल राय रखने वाले सदस्य भी सम्मिलित हैं, आधिग के चिनिश्चय, मिंदेश तथा आदेश जाधोग द्वाप अन्यथा निर्दिष्ट के सिवाय, किसी भी व्यक्रित द्वारा पिरीक्षण के लिए, उपलब्ध होंगे और उनको प्रतियां, उस रीति में:ज़ो,:आयोग खिंहिग करे उपलब्ध की जाएंगी. ] " e xm(va_'mh की कार्यबाहियां, जय तक आयोग रण साधारण या विशेष आदेश द्वारा अन्यथा चिनिर्दिष्ट न हों, लए खुलो रहेंगी. T rr.,flfi(‘.' 1 1 १२. (६) )एस्य सरकार को राज्य में विदयुव संसंधी विपयों पर,, उन उपायों को सम्पिलित करते हुए, जो ग़ज्य सें घिद्युतू उध्ोग के विक्रास के लिए. रापय योजना तथा सान्वस के लिए आवश्यक सपटे जाएं, नीति शिदेश जारो करेंगे को शविति होगी, न | - , (२) उपधाण (१) के अधीन नीति निदेश लिखित में होंगे तथा इस अधिनियम द्वारा प्राप्त किए जाने हैंसु 'नाहे गए उद्देश्यों से संगत होंगे, और वे आयोग ,कै उन कृत््यों मधा शबिरायों पर प्रतिकूल रूप से प्रभाव नहीं डालेंगे या उनमें हरतादष हीं करेंगे, जिननें इस उधिनियम के अधीन आयोग में निहित अनुक्ञापन तथा कैरशिफ का असधाएग करते की शघित भी संम्पिलित है. किरु चाह वहां तक सीभित नहीं है. ह (३) राज्य रारकार विझुतू उद्योग को प्रभावित करने चाही छिंसी भी जोति निदेश, जो तह जारी करतो है यथा कोई चिभान जो अधिनियणित किया जाना प्रस्तावित है, के संबंध में आयोग से गरापर्श करेगी तथा वह उन सिफारिशों पर यदि कोई आयोग द्वारा दी गई हो, ऐसे समय के भोतर जो राज्य सरकार बिनिर्दिष्ट करे, सम्यक्‌ रूग से घिचाए में लेगो. न | राज्य साकार नी कापान्य शबिस,

U s w164k 20 R@U 2000 बन पाक कम 20 फबा 200 () गण रास्य सरकार और आयोग बीच चिषादू ¥ पाध्यस्थप्‌, अनुज्ञापन. . एििफ्िििििििििििििि्िििसिसियिििििििययियययलनणण L पर . L . < ते पुएएए ——— इ३, (१) यदि धारा १२ में विनिर्दिष्ट विंषयों पर राज्य सरकार और आंयोग के यीच कोई तिवाद या o1t 3 होता है तो उसको g & लिए केन्द्रीय, आयोग को निर्दिष्ट किया जाएगा. (२) ऐसा निर्देश किया जाने पर, नियुक्त किया गया व्यक्ति यथासंभव ,१० दिव के भीतर निर्देश 1 Taf करेगा तथा उडा विषय पर उसका विविश्चय अंतिम तथा आवद्धकर होगा. . अध्याय-पांच - पारेषण तथा प्रदाय T 3T vy, (1) कोई व्यक्ति है या जो भारतीय विद्युत अधि 2 सं. ५४) के अधीन प्राधिकृत किया गया हैं या जिसे छूट दी गई ) ऐसा करने के लिए आनुज्नप्ति ट्वारा था इस अधिनियम के अधीन छूट के कारण प्राधिदू » द९१० (१९१० का रा. ९):.या विद्युतु (प्रदाय) अधिनियप, एद्४८ (१९४८ ' ई है, से भिन॑ कोई भी ,व्यवितत राज्य पें,-- v 1 S -E LS . 0 (ख) .. बिधुत्‌ प्रदाय, जिसमें चृहद रूप (चल्क+ में, प्रदोय उप-पारेषण या वितरण सम्मिलित है, को कारबा महीँं करेगा :, _ ” ः पा. ः परन्तु समस्त च्यक्ति जो भारतीय विद्युत्‌ अधिनियम, १९१० (१९६० का सं. ९१ या विद्युत्तु ( प्रदाय) अधिधियप., १९४८ (१९४८ का सं, 4¥) के अधीन प्राधिकृत हो या छूट दी गई है, के संबंध पें यह oy जाएगा कि वे उन विभंध्तों तथा शर्तों पर जिन पर कि पहले हो अनुज्नफ्ति या छूट दो जा '., ... हो इस अधिनियम के अधीन अपुज्ञप्तिधाए हैं, और किसो ऊनुसप्तिधारी को लागू इस अधिवियप के उपयबंध यथा आवश्यक परित्ततों सहित ऐसे व्यवित पर लागू होंगे. ' - (२) जहां कोई ऐसा प्रश्न 'उद्भूत होता है कि वया कोई त्पवित, उंपधारा (१) में यधाचर्णित विद्युत पारेपण या प्रदाय करने के कारबार में लगा गे या नहीं लगा है, ऐसे. प्रश्न पर आयोग का. वितिश्चय अंतिम तथा चाध्यकारो होगा. स्पव्ति जिसे अनुसप्ति "हों दी गईं है या अन्यथा प्राधिकृत नहों किया गया हैं, को कि वह रास्य में विद्युद पारेपण, उप-पारेमण, सलितरण यो. प्रदाय करना संद कर दे विच्छेदित कर दे. . * ’ ; 1१ (३) आयोग को ला यह आदेशित करने की शबि्ति होए तथा उनसे संबंधित अपने साधिन्र से नर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी और ६. अर्धि' . के प्रारंप होने से छह पास र को राज्य में निदयुततु पर पण करने या. प्रदाय करते मे, र...प्बार के लिए किसी व्यक्ति ग की अचधि तक ऐसे निबंधन तथा शर्तों पर जो राज्य सरकार इस अधिनियम पिप्ललिखित शर्तों के डाध्यधीन रहते हुए अमंतिप अनुजध्ति प्रदान करने को . L प्रदान को गई प्रत्येक डनंतिप अमुशाति तत्काल आयोग के समक्ष रखो जाएगी . द के उपबंधों के अधीन आयोग द्वारा अनुज्ञप्ति प्रदान किए जाने के लिए, दन समझा जाएगा; और ‘ (४) इस अधिपियप मैं की कालावधि के दौरान, राज्य या व्यनित्तयों को बारह मास से आन के उपबंधों से रांगत्त अवधारित शक्ति होगी,-- (%) . T सरकार और उसे इस किया गया आर (ख) इस धारा के अ जो आयोग चिंपिर्पिष्ट करे. i (नर की गई प्रत्येक अमंतिम अनुज्ञाप्ति उप्त तारोख से विधिमान्य नहीं रहेगी: खण्ड (क) में चण्ति अनु्धि के लिए आवेदन पर अपने आदेश पें.

fiia सप्यप्रदेश राजबैत्र, दियांक उ0 फरवरी 2001 v 198 (15) (५) राज्य सरकार, उपघारा (४) के उधोग अनंतिम उकपुसप्तिधारी को ऐसी शब्तियां, अधिकार तथा ग्राधिकार प्रदत्त करने को हकदार होगी, जैसा कि आयोग इस अधिधियम के अधोन अतुज्तत्तिधारक को प्रदान क़पने का - न हकदार है. १ ः i (६) 'ीयोगडडेंस 'अधिनियपष के अधीन उपपाग (४) के अ पी किसी अनंत्तिप अगुज्ञप्ति के संबंध में सपा शक्तियों. , तथा कृत्यों का प्रथीरगे ठँसी रीति में करने का हैँ कदाए हो गा जैसा कि ईस अधिनियम की धारा १, के अधीन किसी उतुज्ञप्तिधारी के मापले में किया जाता है. : १५. (१६) आयोग, विहिंत प्ररूप में आवेदन किया जाते कथा ऐसी फीस का संदाय करने पर, जो कि आयोग आयोग... द्वारा विहित करे, किसी व्यक्ति को,-- o . maqwmflw प्रदान (कक)... पारेषण के किरी चिनिर्दिष्ट क्षेत्र में विद्युत्‌' पोरषण करने के लिए; या (ख) विद्युत या चिद्ुतू प्रदाय वृहद्‌ रूप (घल्क)- में किसी बिनिर्दिष्ट श्रेत्र में विदयुत्‌ प्रदाय करने के लिए किसी अन्य अनुज्तप्तिधारी या व्यवित को उसका ( विद्युतू का उप-गरिषण या वितरण या प्रदाय करने हेतु, प्राधिकृत करते हुए अपुज्ञप्ति प्रदान कर सकेगा. - (२) ऐसी किसी भी अतुज्तप्ति को प्रदान करने के संबंध में निम्नलिखित उपबंध लागू होंगे,-- (%) अनुक्प्ति के लिए आवेदत्र करने वाला कोई ' च्यवित आवेदन क्राने के पश्चात्‌ १४ दिन के भोत्तार ऐसी रीति में तथा ऐसी विशिष्टियों ' ! कि आयोग द्वारा विहिंत को जाएं, आवेदन को ;सूचना _ " का प्रेकाशन करेगा; ः जीप, (@) आयोग तय तक अनुजञप्ति प्रदान महा जब तक कि-- (एक). अनुजप्ति के लिए आवेदन से संबंधित प्राप्त समस्त आश्षेपों पर आयोग दवा विचार नम कर लिया गया हो. : परनु किसी भी आश्षेप पर आयोग तब तक विचार नहीं कर सकेगा जन्न पर्क कि वह खाड (वा) के अ ये सूचतया के प्रथग प्रकाशन की तारीख से ऐसे सपय के भीतर जो आयोग ट्वास चिहिि क्रिय, जाए, जो कि ३० दिग से कप का नहीं होता, प्राप्त नहीं हो जाए; और 1 (दो). किसी ऐसे क्षेत्र में, जिसमें किसी छावनी, हचाई अड्डे, दुर्ग, आयुधशाला या कैप्म या रक्षा प्रयोजनों के लिए केन्द्र सरकार के अधिफोग में के किसी भवन या रधान का संपूर्ण या कोई भाग सप्पिलित है, प्रदाय या पाोरषण की अनुज्नप्ति-के लिए किसी आवेदन-पत्र के मापले में आयोग ने ग्रह _ : -l 1w fam @ fF T 3 v et से आतुज्नप्ति दिए जागे गे कोई { आपत्ति नहीं है (%) भारतीय विद्युवू अधिनियम, ₹९१० (९१९१० का सं, ९) की धारा ५२. या विद्युत (प्रदाय) अधिनियम, १९४८ (WRECTIH Q) W पाए ३ की उपधारा (१) के खण्ड (दो) तथा धारा ७६ पें “अन्वर्विप्ट किसी "बात के 'होते हुए पीरिइिसरडशिनियमं केअधीन समस्त अतुजञरितियों को. प्रदात करिए सजाने की राह शर्त होपीतकि”आयोग को! इस अधिनियम! 8४० ०. के उपबंधों” के अनुसार बितादों का स्यायनिर्णयत करने या उन्हें तय काने के लिए सध्यस्थ के रूप पें“कार्य' करने या मध्यस्थ को नामनिर्दिष्ट करने को शवित होगी (४) (के) अनुज्ञप्ति में ऐसी अवधि सीमा जिस तक और दर iy oo शर्तें जिनके, अधीन विद्युत o o या प्रदाय कियां जाना हो, अंर्विष्ट होंगी और उसमें ऐसो अन्य शर्तें थी अंतर्तिष्ट होंगी जिर्हें आयोग इस अधिनियम के प्रयोजनों को प्राप्त करने के लिए समुचित रागझे.

woiyny G, Rt o et 2t e i\,— L) (@) खण्ड (का) के उपनंधों की ध्यापकता पर प्रतिकूल फ्रधाव डाले मिंगा, अनुशपिग्धारी से यह अपेदित होगा कि वह-- ' ' 1 ~ | (एक). अपने (अमुज्न मुन्नष्यिधारी ) द्वारा संचालित चिंदुतू लाइनें, विधुव्‌ संयंज्र और सह उपस्कर के उपयोग के लिए किसो अन्य व्यवित रे चिनिर्दिष्ट निबंधनों पर करार करें; (=) सी जागकारो ठथा दस्तावेजें जिनका उम्रयोग अपने प्रयोजन के लिए या केन्द्रीय या राग्य सरकार या केप्ट्रीय आयाग या केन्द्रीय सिधुव्‌ प्राधिकारी फे प्रयोजनों के लिए अपेशा करें, उपलब्ध कराए (सीन) भारतीय विधुतू पथितियम १९१६० (१९१६० का सं, ९) तथा' विधुतू (प्रदाय) अधिधियम, ६५४८ (१९४८ का सं. धि४) के 'अपीग बोर्ड के ऐसे कृत्यों और, णाध्यताओं- का, जैसा आयोग चिंभिर्दिप्ट करे, जिंप्सा सें , ) (चार). ऐसी यातों पर जी :अनुज्प्ति की शर्तों के अधीन या अपेशिद हैं सा उनसे लिंचलत के लिए अपेश्षित हैं, आयोग का ' अभिप्राप्त को कि . |. ST (पांच) कोई wm e _-'<r1*m”t सेना प्रस्तानित्त कर रहा है, जिसमें इस अधिनियम के उपबंधों और चिदुत्ू (प्रदाय) वधघिवियय, इ९४८ (१९४८ का से. प४) के लागू उपबंधों के अनुसार स्कोप थी सप्गिलित है, आग को अधिसूचित करे; ' दिन (छह)... पिराल्ययी Uk 3 | का क्रंग, करे जिसमें विधुदू शबित को न्यूनतम लापत्त क्षपता के सिद्धांत का विचार और | दर्शी चित (शक्ति) क्रय उपापन प्रक्रिया सॉप्यिलित है; ¢ (सात) चिशुद्‌ फ्रदाव के लिये. 'पौरर लगाने के प्लाइंद्स तथा शिरुतू के परिदण संथा प्रदाय में होने वाले नुकसान को कम करते के पायों के लिये स्क्रौप प्रसुत करें (आउ) उन अनसतिप्ीयों या उफशोव्ताओं को fagn axe रूप (शल्क) में प्रदाय करे; (नौ) आयोग ट्रार दिए यणु निंदेशों कद उ्पुफालन करें; (दुसरे. आापुजण्ि के रियंधर के अनुधा कार्ग कोें; L (स्यारह ) o सथिधियण, चिमिसरों, भारती य चिदुतू अधिनियम, १९१९० (१९१० का सं, ९) तथा विंयुत्ू (प्रदास ) अधिनिक्य, रद्द १९४४८ का से. ५४) या उनके अधीन विरलित नियगों को अपेकाओं जहां तदाः से हापू हों, का उनुकलन करे. ः . fo मय को व्यापकेता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले लिया, आयोग द्वाप प्रदान को W o थे स्गलित शर्तों दो -अधोग शतुराफिभारी रो अपेक्षा को जा सकेगी कि वह टैरिफ स्थापित को और समय- L . A R T अधिवियन के उपंयर्ण्ण से अपने प्रभारों को मणना को. हे , हए१० (१९६० का सं. ९१ को अनुसूची में ऊतारि उपयंभ सिवाय जहां सझ रिि लव द्वास उन्हें अधिन्यया रूप से परियापिति फिंया हो दी उगेमें छूट दी न: है इसे नाग के अभोन दो गई प्राधिक संक्षय अपुगधि & e सागिरित रस जाएंगे और परदे भाग पर जाएंगे दर उस e W प्रेथी जगा vy W oo gu 48 it ofl @ s के अध्यभीय रहते हुए, जिन्हें आयोग कर सकता है, राज्य में अपने क्रियाकलापों के संग में अनुज्ञपि द्वारा प्राधिकृत उपक्रम पर लागू होंगे : W . - i - & o

. " K ‘—_-——__—j——_——_—_——T j . neyRy g 20 FET 2000 198 (17} T जहां आयोग द्वारा अन्य अनुश्ण्तिधारियों. को उनके द्वार वितरण के लिए विद्युत का प्रदाय करने के हिये प्रदाय अमुज्ञषति: दी गई हो, जहां उवत अनुसूची के खण्ड चार, पांच, छह, सात, आठ तथा चारहे के ITHY, जहां तक ऐसी अनुज्ञप्ति को ऐसे प्रदाय से संबंध हो, प्रदाय अनुज में, सप्पिलित किए गए नहीं समझे जाएंगे. जा (७).. ' क्रिसी अपुज्तपि में सीमिलित शर्तों में किसी शर्ते के ऐसे ब्समय पर, ऐसी रोति में और ऐसी परिस्थितियों पें जैसी कि उसमें विभिर्दिष्ट की. जाएं या शर्ों द्वारा याःउचके अभीन अवधारिति को जाएं, प्रभावहीन हो जाने या उसे उपातिरित किए जाने की शर्तों का उपबंध सपाविष्ट किया जा सकेगा. (८) किसी अपुज्पि पें उपधारा (७) के आधार पर सम्मिलित कोई उपबंध इस अधिनियम की धास १७ तथा धारा १८ की उपधारा (५) के द्वारा किए गए जगबंधों के. अतिरिवत प्रभावों होंगे. (९ ) जब तक किसी आनुज्ञ्सि के निसंगायों में लिनििप्ट रूप रो अन्यथा उपयंधित न.हों तस तक किसी व्यवित को अनुज़प्ति का दिया जाना प्रदाय के उसी शेज्र के भीतर किसी अन्य व्यवित को समान प्रयोजन के लिये अनुसपि प्रदाग करते में बांधक नहीं होगा और अतुराप्तिधारी किसी अपन्यता का दावा यहीं करेगा, * (१०) इस अधिनियम के अनुसार आयोग द्वास दी गई पक में यह उपबंघ हो सकेगा कि असुज्ञप्तिधारी को, विधयुत्‌ प्रदाय के मीटरिंग पाइन्ट, राजस्त्र चसूली, चिद्युव्‌ के प्प चोगे के लिये अभियोजन; मीटर g, विद्युत के अपयोजन और बिद्युतू के पोतमण, उप पारषण, वितरण या प्रदाय को प्रणणवित्त करने वाले समस्त और उसी प्रकार के विषयों पर आयोग जैसा कि चिहित करे कार्रवाई करने की शवित्त तथा प्राधिकार होगा. . (११९). आयोग, अनुज्पिधारियों तथा अन्य व्यवितियों को ऐसी शबित और प्राधिकार का प्रयोग काने के लिये प्राधिकृत करने का हकदार होगा जो कि उन्हें भारतीय विद्युत्‌ न , १९९६० (१९१० का सं. ९) तथा विद्युत (प्रदाय) अधिनियम, १९४८ (१९४८ का सं, पद) के उपचंधों के अधीम शी जा सकती हैं/दिया जा सकता है. १६. (१). आयोग अनुज़प्ति रखने की आवश्यकता से छूट(प्रदान करने के लिये किन्तु ऐसी शर्तें, यदि कोई हों, जैसा कि आयोग द्वारा चिनिर्दिष्ट की जाएं, के अनुपालन के अध्यधीन रहते हुए विनियपं बना सकेगा : . ] गाततु जहां आयोग छूट देने के आदेश के अधीन या विभियीं के अधीन चिमिर्दिष्ट रूप से अन्यथा उपबंधित करे के सिनाय, छूट प्राप्त व्यवित से यह अपेक्षा की जाएगी कि वह उन| सभी अपेक्षाओं का अजुषालन करे जिसका अनुपालन करना किसी अनुज्जप्तिधारी से अनुा्ति के” अधीन या इस अधिनिधिम या विभियपों के उपबंधों के अधीन अपेदित है. (२३५ आयोग ऐसे किसी भी विनियम के अधीन पिपालिखित को सहमति के सिवाय छूट प्रदान नहीं करोगा:-- : v (एक) उस श्ेत्र में गठित रथानीय प्राधिकरण, यदि ् हो, की जहां विद्युत प्रदाय को - जानी- हो (दो) " किसी ऐसे मामले पें, जहां किसी क्षेत्र में विद्युद्‌ दैदाय किया जाना हो वह क्िरी छातनी, हवाई अड्डा, : दुर्ग, आंयुभ शाला या फैम्प का भाग हो या ऐ८ । किसी भवन या स्थान का भाग हो जो रक्षा प्रयोजनों -' के लिये केन्द्रीय राधा के 'छापिगोग O रत el फेप्द्रीय सरयगर सी; (तचोव) '. पारेषण या प्रदाय के शेत्र के 'भीत्तर आते वाले किसी क्षेत्र में ऐसे शेन्र के आतुरज्प्तिधारी को: परन्तु यह और कि उपखंड (दो) के उपीन आने वाले करिंसों पापले के शिवाय, यदि आयोग का यह समाधाग हो जाता है कि सहपति उगुचित रूप से रोकी गई हैं को ऐसी 'सहपति आतश्यक नहीं होगी. आए अपुन्तप्ति रखने को आवश्यकता Az G e

अपुन्नप्ति को शर्तों ' का संशोधन. अनुज्ञप्ति का प्रतिसंहरण, पक ििफि न ity 16k 20 1A 2001 196017 ) " (३) (के) किसी [जिशि्द पर | के व्यवित को; या (ख) .किसी विशिष्ट को; या i (n) किसी विशिष्ट कार्घीयषि के लिए, छूट दो जा सकेगी. (४) प्रदान को गई कोई सूट, ऐसी रोति में प्रकाशित्त की जाएगी जैसी कि आयोग को समुचित्र लगे. . (५). आयोग प्रदाव की गई छूट को ऐसे कारणों सहित ज़ो लिखित में लेख; किए जाएंगे, किसी भी समय प्रतिसंहत कर सकेगा, (%) कोई छूट जब तक कि उसे पूर्व में प्रत्िसंहच न किया गया हो तग्र पत्र; सह एक. फालावधि के लिए जैसा कि छूट प्रदान करने के आदेश द्वारा या के अधीन बिनिर्दिष्ट किया जाएं या ,अवधारित किया जाए, प्रयृत्त यनी रहेगी. | हि . ७. (१). आयोग, अनुज््विधारी द्वादय आवेदन पर या यदि अनुस्तिधासी स्थाकोय प्राधिकारी नहीं हो तो संत्रंधित स्थानोय प्राधिक्रारों के आवेदन पर या 3 गा इस अधिमियग के “उद्देश्यों और 'प्रयोजमों को ध्यान में रखते हुए किसी अनुज्नप्ति के निबंधव था शर्तों में जो वह उ चत समझे, ऐसे परिवर्तन श्वथा संशोधन इस अधिनियम के ,उपबंधों के अमुसार कर सकेगा जो उसकी राय में लोकहिंत में ऐसा करने को अनुज्ञा देते हों या अपेक्षा -करते होँ:. '. फरतु धारा १, को उपधारा (७) या धारा १८ की उपधारा (५) में निर्दिष्ट अनुज्ञप्ति की शर्तों के अमुसरण में किए गए परिवर्तत या संशाधन से भिन्त कोई ऐसा परिवर्तन. या संशोधन अतुसप्तिभारी की सहसति के जिना सहाँ किया जाएगा. '- : : (२). जहां अपुज्पिधारी ने अपनी अतुन्नप्ति की शर्तों में कोई परिवर्तन या संशोधन प्रस्तावित करते हुए उपधारा (१) के अधीन कोई आपेदन किया हो सो. हां निम्नलिखित उपबंध लापूं होंगे:-- | , _ (कर). अनुक्षण्ति परी, आवेदन की एक सूचना, ऐसी रीध्ि में और ऐसो विशिष्टियों के 'साथ जैसे कि आयोग द्वारा वि'हेत किए जाएं. प्रकाशित करेगा; ः ! . ! दा. . (@) आयोग का त्रक कोई परियर्तम या संशोधन नहीं करेगा जब तक कि सूचना के प्रथप प्रकाशन की तारीख से कम से कम सीस 'देत के ऐसे समय के भीतर, जैसा आयोग विनिर्दिष्ट करे, आवेदन के संदर्भ में उसर गारा मम क पर विचार न कर लिया गया हो; और (प?. प्रदाय के वि.सी ऐसे क्षेत्र में जिधमें छावनी, हवाई e, g, e उुंफशाला 1 कैम्प या कोई ऐसा A ' AT A एंधान पूर्णतः: समालिष हैं या उसमें उसका कोई e o S -प्रह्िरपा प्रयोजनों के लिये 33 v हा मिगोग 48, v W W ey b e न प्रस्तावित करने वाले किसी परिवर्तन या रॉशिधन के आवेदन को दशा में, आयोग,. केन्द्रीय सरकार की सहपत्ति के सिवा, किस! प्रकार का गो परिवर्तन या संशोधन नहीं करेगा. (३). अपुरक्र्तिधारी के 3'तवेदन के सियं, अतुद्नपा को किसी शर्त में कोई परिवर्तन या संशोधन करने से पूर्व, आयोग प्रस्तावित परिवर्तनों या संश! धनों को बे करेगा और प्रस्तावित परिवर्तन या संशोधन के संदर्भ यें उसके द्वार; प्राप्त सभी आपत्तियों पर ऐसे समय के भीतर, जिंसा -आयोप विपिर्दि करे, जो कि 30 B से कम का नहीं होगा, लिंचार करेगा, ः ९८. (१). आयोग, इसे अधिनियम या रत अधोम विरनित विनियमों या अनुज्ञप्ति के सिबंधनों तथा शर्तों के अधीन चबाध्यताओं को मिभाने पें किसी | F WA या कृत्य को जांच,-- (%) क्िरी उपभोचता था उपभोन्ती संगम या भिससो न्यापारिक संगण से किसी शिकायत के प्रापा होने पर: या ः + निधि, 2T ०५,

] +qwfim 3, दिवाक 20 फरवरी 2001 98 (19) + सरकार या फ्रेस््रीय विद्युत प्राधिकरण या किसी अन्य (ख)' : * राज्य सरकार द्वार या केन्द्रीय आयोग या से प्राधिकरण द्वास उसे निर्दिप्ट किए जाने (गे विद्युत के उत्पादन, ,पोरेपण, उप-पारेपण, वितरण या प्रद्याय में लगी किसी कंपनी या च्यक्ति से शिकायत प्राप होने पर; या (m) किसी भी सोत से प्राप्त अपने स्वयं के ज्ञान या जानकारी मर, कर सकेगा. * (२) -उपधारा (१) के अधीन, आयोग, जांच “करने पश्चातू यदि उसकी राय पें लोकहिंत में ऐसा. करना आवश्यक हो तो ऐसे निंप्लेलिखित किसी पापते में अनुदञप्ति प्रति्दत कर सकेगा, अधत््‌ :-- . (क)... जहां अतुन्नप्तिधारी ने इस अधिनियप या उसके अधीम बनाएं गए सिनियपों या भारतीय चिंद्युत्त 2T, 1320 (R का सं, ९) या विदयुदू (प्रदाय) अधिनियम, एर४८ (१९४८ का सं. ५४) या उसके अधीन बनाएं गए नियमों या विभिग़पों के साथ पठित सज्य में लागू होने को सोपा तक इस U & उपबंधों के द्वारा या उनके अपेक्षित किसी बात के करे में जानबूझकर या. ;. अनुचित चूक की है : (@) जहां. अनुशप्तिधारी ने अनुशप्ति के किन्हीं/ नि धनों और शर्तों को मंग किया है जिसके संबंध में # ' डनुज्ञप्ति में स्पष्ट रूप से घोषित किया गया हो कि ऐसे भंग से अनुज्ञप्सि का प्रतिसंहरण होगा (m जहां अतुशप्तिधारी, अनुक्ण्ति में सिनिर्दि्ट कालावधि के भीतर या किसी दीर्पत्तर कालायधि के भीतर 7 जो कि-आयोग, आदेश द्वारा अनुज्ञात करे,-- : . . . . (एक)' आयोग को सपाधानप्रद रूप से यह खत्ताने में कि वह अनु द्वारा उस पर अधिरेपित कर्तव्यों . और बाध्यताओं को पूर्ण रूप से और दक्षतापूंवक निर्वहन करने की स्थिति में है; तथा (दो)... अतु्प्ति ्वात अपेक्षित प्रतिभूति को जमा करने या देने पें , असफल रहता है. . o (मर)... जहां अनुज्नप्तिधारी को वित्तीय स्थिति ऐसी है कि अनुज्ञप्ति द्वारा उस पर अधिरोपित कर्तव्यों और बाध्यताओं को अनुशप्तिधारी पूर्ण रूप से और दक्षतापूर्वक निर्वहन करने में असमर्थ है. (३) उंपधारा (१) तथा (२) के उपबंधों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए थीं, जहां सोकहित में ऐसा करना आवश्यक हो,''आयोग, अनुज्ञप्तिधारी के आवेदन पर या अर! धारी को सहपति से तथा यदि अनुज्प्तिधासी स्थानीय प्राधिकारो नहीं है तो संबंधित स्थानीय प्राधिकारी से परायर्श करने के पश्चात, पारेषण या प्रदाय के क्षेत्र में पूर्ण या किसी भाग के संबंध में अमुज्ञप्ति को ऐसे निबंधनों तथा शर्तों पर जो कि वह उचित समझे, प्रतिसंइत कः सकेगा का (¥) उपधारा( २) के अधीन कोई अगुदप्ति तब तक प्रतिसंहतत नहीं की जाएगी जिन तक आयोग ने उन आधारों को जिन पर ऊनुज्प्ति्ाःग्रुलिसंहरण किया जाना प्रस्तावित हैं, कथन करते हुए लिखित में कप से क्रम §o f को सूचता अनुज्प्तिधारी को न दे दी हो तथा प्रस्तावित प्रतिप्ंहरण के विरुद्ध उनत सूचना के कालावधि के भीतर अनुस्ञप्तिधाती द्वारा किसी कारण पर विचार न कर लिया हो तथा ऐसे प्रतिसंहरण के लिए कारण न दे दिया: हो (५) ऊायोग, अनुज्ञफि को प्रतिसंदत करने के बजाय ऐसे और निन्ंधनों तथा शर्त के अध्यधीन रहते हुए, जित्हें वह अभिरोपित करना उचित समझे, अतुज्ञपा को प्रबूत्त रहने को अनुज्ञा दे सकेगा और इस प्रकार अधिरोपित निधन तथा शर्तें उस पर बाध्यकारी होंगी और अतुज्ञप्तिधारी ट्वाप् उनका पालन किया जाएगा गधा उनका प्ेहीं बल और प्रभाव होगा पानी - कि वे अनुर्ज्ञप्ति में उंत्र्विष्ट थीं 7 2 AR (R IR AL Ry SR हुए १०८(१९१० का सं. 9 कोश्धारा द तथा ७ में: अंतर्विष्ट किसी बात के- जहां i होगे हुए भी, जहां आयोग धारा १८ की उपधार ()% ik Rt STl A प्रतिप्तदह्त करता हैं चहां निम्नलिखित. प्रतिसंहत @t o e उपवंध लागू होंगे, -- , . है वहां उपबंध, (कक)... आयोग, अनुज्ञेप्तिपारी को प्रतिसंहरण को सूचना की मील करेगा तंधा एक तारीख नियत कोगा जिसको प्रतिसंहरण प्रभावी होगा त्तधा उरा तारीख से, या ऐसी तारीख को या से, यदि लह पूर्वतर हो, #

अनुज़प्तिधाक त्तथा उत्पादक कं पष्ियों के प्राधाएण कार्तल्य तथा शक्तियां, अनुज़प्तिधाषियों तथा उत्पादक कंपनियों पार सिर्सस्थन, ': उपुसार आयोग या किसी अन्य दर जिरा पर आनुज्ञप्तिधारी का उपक्रम इस अधिमियम के किसी वपघंध के अनुसरण में किसी क्रेता को विक्रय कर दिया गया हो, किसी बाध्यता या दायित्वों के सिवाय जो उस तारोख तक प्रोदूधूत हो चुके . थे, इस अधिचियप के अधीन अनुश़्प्तिधारी के समस्त अधिकार, कर्तव्य, बाध्यताएं तथा दायित्व पूर्ण रूप से समाप्त छो जाएंगे था उनका पर्यवसान हो जाएगा; (@) आयोग, उस प धारी के, जिसको कि अनुज्ञप्ति प्रतिसंदत की गई हो, उपक्रम के आर्जन के लिए - आवेदन आमंत्रित करेगा तथा संदेय कोमत तथा उपक्रम के सिक्रय के अन्य निबंधन तथा शर्तें . अवधारित करोगा; « (ग).... आयोग, लिखित द्वाप, अनुज्ञप्तिधारी से यह अपेक्षा कर सकेगा कि चह खण्ड (ख़ 9 के अधीन अदधारित की गई कीमत तथा निम्नंधनों और शर्तां पर सिक्रय करे और त्तदुपरि अनुशप्तिधारी उपक्रम उस व्यवित्त को ( जो इस धारा में इसके पश्चात्‌ '' क्रेता" के नाम से निर्दिष्ट है) विक्रय कर देगा राधा जिसका कि आवेदन शायोग द्वारा स्वीकृत्त किया गया हो; और ः | 3@\:‘" प्रदाय का अनुरक्षण करने के लिए अनुज्ञप्तिधारी के उपक्रम के संबंध में ' संक्तेगा जैसा कि समुचित माना जाए, जिस्म 'रगु्प्तिधारी के उपक्रम के शेप निंदेशकों को नियुवित थी सप्मिलिद है : (प).... आयोग, विद्युत पारेण' ऐरा अंतरिम इंतजाम लिए प्रशाराकों तथा (२) जहां उपधारा (१) के अधीन किसी उपक्रेम का विक्रय क्रिया जाता हैं, सईद, 03 प्रसुतत किए गए आवेदन के अनुसार अवधारित्त उपक्रम की क्रय कौमत आयोग के निदेशानुसार जपा को जाएगी . और आयोग को यह निदेश देने की शक्ति होगी कि रांबंधित अनुर री को रकम जारी करने के पूर्व, अधिनियम कं, धारा ३६ के उपनंधों के अनुसार अनुश्पिधारी पर उद्गृहीत कोई भ जुर्पाना, प्रभार या प्रतिकर की खरकाया रकम या आमोग द्वाप्त पारित आदेशों के ः अनु््ञभ्तिधारी से शोध्य या बकाया रकम को जगा को मई रकम में पहले समायोजित किया जाए, 7 (३) जहां आयोग, उपधारा (१९) ¥l अनुजप्तिधारी से सह अपेक्षा करते हुए कोई सूचना जारो करे कि वह अपने उपक्रम का विक्रय कर दे, चहां वह ऐशी सूचना द्वारा उपक्रेप को परिदत्त करने के लिए अनुज्ञपिधारी से अपेक्षा कर सकेगा और न्तदुपरि अनुशिधारी सूचना में विपिर्दिष्ट तारीख को उपक्रम की क्रय कौमत॑ का भुगतान लंबित रहते हुए पदाभिहित क्रेता को उपक्रम g W देगा।: g किसी ऐसे मामले में क्रेता प को, परिदत्त किए जाने की तारीख से क्रय कौमत के भुगतान किए जाने तक की कालाबधि के लिए उपक्रप परिद् प्करते सपय रिजर्व नैँक की प्रवृत्त उधार दर से अनमधिक ऐसी दर से क्रय कीमत पर-डनुक्पिधारी को स्पाज देगा, जैसा कि आयोग चिनिश्चि्त की. - " (४) अनुज्ञप्तिधारी इस धारा के अधीय आयोग के आदेशों को सप्यक्‌ रूप से कार्यात्वित करेगा, चाहे अनुज्ञध्दिधारी आयोग के आदेश से च्यचधित हो और आयोग के आदेशों को आशेपित करने का आशय रखता हो. ’ २०. (१) किसी अनुज्ञाति के धारक का यह कर्तव्य होगा कि वहं यधास्थित्ति पारेषण के शुन्र या विद्युत प्रदाय या fo & वृहद्रूप (बल्क) A प्रदाय के श्ेत्र में, जिसके लिए अपुज्तप्ति प्रदान को गई है, चिद्युनु पोरेषण, उप-पारेषण, वितरण या प्रदाय की एक दश्शत्तापूर्ण, समन्वय,तधा गित्तव्ययी प्रणाली का निक्रास करे तथा उसको बगाए रखना, (२) प्रत्येक अनुराप्तिधारी तथा प्रत्येक उत्पादक कम्गनी, ऊर्जा प्रणाली तथा विद प्रदाय की लाइनों के प्रचालन तथा अतुरक्षण के संबंध में सपय-सपय पर ्िं s (APl & उपयंधों का पालन करेगी ः कि (३) आयोग, निर्नन्धन/ अपवाद तथा शर्ते यदि कोई हों, के अध्यधीग रहते हुए, भा... o सधिनियम, १९६० (१९१० का सं. ९५ को धारा रहो १९ तक 'विनिर्दिप्ट कर सकेगा जिराका रंखंध कार्य करने से हैं, इस अधिनियम के अधीन किसी अनुद्प्सि द्वारा निशुतु का परेषपा या प्रदाय करने के लिए प्राधिकृत किसी त्यनित के संबंध में इस प्रकार प्रभावी होंगे पागों कि चह व्यततित उक्त अधिमियुप पें एक अनुज्ञपिभारों है. ' रे. (१) कोई भी अनुशश्शिधारी या उत्पादक कम्पनी किसी भी रागय जहां शक्त विदु् के उत्पादन, पाोरेपण, उप- पारेषण, नित्वरण या प्रदाय के कारमार का संखंध है, आयोग की लिखित में पूर्व सहमति के लिया, किसी भी अन्य ऐसे अनुज्ञप्तिधारी या ल्यसित की आनु्र्ति या उपक्रम को जो बिधयुतू का उत्पादन, गारेषण, प्रदाय कर रहा है या उत्पादन,

i T . ' ) ] gwfi : मध्यप्रदेश , दिंगांकि 20 फरवा 2001 ' 198 (21) परेषण, उप-पारेपण या न्िदुत्‌ प्रदाय करने करा आशय रखता हो, क्रय द्वारा या अन्यथा अर्जित नहीं मोगा रा उसके साथ .. सहयुनत गहीं होगा: ः ' ¥ परन्तु ऐसी सहनधि के लिए आवेंदग WA A अुीपागाए अपने आवेदन की-ं (क)... आयोग को; और ) (@) यदि अनुसप्तिधारी प्रदाय अनुज्प्ति धारण करता हैं, अनुज्ञप्तिधारी के प्रदाय के क्षेत्र में प्रत्येक स्थानीय प्राधिकरण नो तथा उस शोन्र में भी, यदि कोई हो, जिसमें ऐसा ,अन्य व्यक्ति चिद्युनू प्रदाय करता हैं या विदुव्‌ प्रदाय करने का आशय रखता है, के स्थागीय प्राधिकरण A, कम से कम एक मास की सूचना देगा, .- . ' स्पष्टीकरण.-इस धारा के प्रयोजन के लिए कोई व्यत्तित क्रिसी अन्य व्यवितत के साध सहयुवत समझा जाएंगा यदि ' “सह क्रिसी के रलाधित्व, प्रयंधग के कारण था किसी आत्य रीति से जुड़ा हुआ हो और-अन्य व्यक्ति के साथ संयुक्त कार॒बार का हित रखता हो. ... : - (q){___aagaf:_""%”’{’ta'm’i किसी भी सपय, आयोग की लिखित में पूर्व सहमति के सिना विक्रय, बन्धक, पदेंटा, वितिपय द्वारा या अन्यथा अपनी अनुज्पति को समनुदेशित नहीं करेगा या अपने उपक्रम या उसके किसी भाग का अंतरण नहीं करेगा. (३9 इस अधिनियम के प्रयृत्त होने के गश्नात्‌ विद्युर्त (प्रदाय ) उधिनियप, इ६४८' (१९४८ का सं. ५४) की धारा इ के उपबंध राज्य में निम्नलिखित संशो धर्रों सहित लागू होंगे :-- . (F) उचत धारा में अपेक्षित सहपत्ति, 39 प के अधीन यधाठपचंधघित गंडल से अधिप्राप्त की जाने वाली ऐसी सह मत्ति के स्थान पर वह आयोग शो लो जाएगी; (@) उक्त धारा ४४ की उपधारा (१) के 1 के खण्ड (क), (ख) तथा (ग) में अंत्र्चिष्ट किसो चात '.. के होते हुए भी, आयोग को यह अधिकार होषा कि सह सहपति देये से इंकार कर दे, सदि आयोग - की यह राय हो कि सहगति देने से पी स्प में ऊर्जा प्रणाली के दश्षातापूर्ण रीति रो प्रचालन में यां चिद्युतू उद्योग के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा या अन्यथा लोकहिंत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा; और (9... उवत धारा ४ की उपधास (३) के उपिंध रान्य भें लागू पहां होंगे. (४) किसी प्रदाय अनुशण्ति का शारक, जब तक 4 शक अनुसनिति फे निवंधनों दाता या आयोग द्वारा पारित फ्सी सामान्य या विशेष आदेश द्वारा अभिल्यवत रूप से प्रतिणिद्ध नि हो, निष्नलिखित सं निदुतू का क्रय करेगे के लिए इन्नजाम . कर सकेगा — | i कि ऐसी अनुज्नप्ति के धारक को, अन्ग अनुज्ञतिधारियों को (कर)... किसी प्रदाय अनुजणि के गारक से थ करने की आनुज्ञा देता हैं; और उनके द्वाह वितरण के लिए चिद्युन्‌ C(m) ऊर्जा क्रय लपापन प्रक्रिया को शासित फिल्‍ते वाले. आयोग द्वारा सिहिंत सिंनियपों के अनुसार किशी. थी . सिद्युतु उत्पादक कर्णनो से था अचा हि प्‌ ते प्रदायकों से, ग - प्रकृषटि षि - री . . r ' . पी G ld करे कसी. भ सव्यसहार से, संचंधित्र कोई M, एन मर रा एयर . . , गे यदि उपरारा (१), (रे, (3) या (ह) में छू "उसके अध्यपीग नहीं किसा जाता है, तो यह शूस्य होगा जब तक वह उनतें उपयंो, में आन्तर्सिप्ट उपयंर के अंगुसार लोड २२. प्रत्येक डमुसष्तिधारी, जब तफ क्रि उसे आयोग, (वार गत अभिव्यवत रूप रो छूट प्रापा न हो, उाफने उपक्रम का और . आगुनप्तिशार्थों को एसी तारीख को बनाई गई प्रत्येफ एसी पृथ्ू कारबार को इकाई के लेखा का एक चार्पिक्र विवरण या विवरणियां, ऐप. बार्फिफ लेखा. प्ररूप में और ऐसी विशिष्टियां आंत्र्विष्ट करते हुए और संगप्रीक्षित या सत्यापित करने, जैसा कि आयोग निदेशित को, आयोग द्वारा विनिर्दिष्ट को जाने चाली तारीस के पूर्न तैयार कोगा और आयोग को प्रस्तुत कोगा और उसके ऐसे विवरण या उद्धरण आयोग ट्वाप चिथिर्दिग्ट को गई रीति में प्रकाशित किए जाएंगे. ’ ' ’

मध्यप्रदेश दिदयुत्‌ पंडस की संपत्तियों, कृत्यों और कर्तव्यों का पुनर्गठन, wd kid Lty f \i—x\ww-w बोर्ड का पुनर्गठन रे. (९) राज्य साकार, अंतरण-सटीप के लिए मंडल को पुरनर्गठित करने. और मडंल या उसके ऐसे भाग के जो कि उसकी आरितयां, संपच्चियां, संपत्तियों में हिंत, कार्यवाहियों और दायित्वों रं: ४ परलकर घना हो, कृत्यों, कर्तव्यों, शबवितयों तथा बाध्यताओं के अंतरण को उमे निचंधनों तथा शर्तों परे जो कि राज्य संस्कार अंत्ररण स्कोम पें उपनंधितत LB, प्रभावशील करने के लिए उपनंध करने हेपु समय-समय पर नियम लिरखित कर सकेगी, (२) जिस तारीख को तथा से उपधारा (१) के अधीन अंतरण स्कोम प्रकाशित्त की जातो है या उस शारीख को और से ऐसी अन्य च्ारोख से (जो इसमें इसके परचात्‌ प्रभावी तारीख के साम से निर्दिष्ट हैं) जैसी .कि ऐसो अंत्रण स्कोमस में विनिर्दिष्ट को जाए, राम्य सरकार यह उपबंध कर सकेगी कि आरिरियों, संपत्तियों, संपस्तियों सें हिंत, कार्ययाहियों, दायित्वों, अधिकारों और याध्यताओं आस लकर बनने याते मंडल के ऐसे उपक्रम या उसके ऐसे भाग जो प्रभावी तारीख के अल्यवहिंत्त पूर्व मंडल के हैं, अंतरश स्कौम में बिनिर्दिप्ट निंधनों तथा शर्तों पर, बोर्ड या किसी अन्य स्यक्ति द्वारा किए जाने वाले किसी और कृत्य, | ख या बात के थिमा, राज्य सरकार को S g जाएंगे और उसमें निहित हो जाएंगे. ! ~ (३) राज्य सरकार, समय-समय W, § स्कौम के लिए, उन उपक्रमों के अंतरण को प्रभावशीस करने के लिए जो कि उपधारा (२) के अधीन शन्य , निहित है, ऐसी कंपनियों या पिग्मित्त निका्थों या व्यक्त या प्राधिकारी (जिसे इसमें इसके पश्चात्‌ '' अंतरित्ती ”* कहा ग़या है) को, ऐसे निग्नंधन तथा श्तों पर जैसा कि राज्य सरकार अंतरण स्कीम में उपबंघितर करे, का उपबंध करने हेतु नियम लिरचिस कर सकेगी और ऐसा अंप्ररण तथा अंताएती में ऐसा मिहित किया जाना किसी व्यधित द्वारा किए जाने वाले किसी और कृत्य, बिलेख या बात के सिना अंत्तरण स्कोस में वििर्विष्ट 1 तारीख से प्रभावी होगा, (४). राज्य सरकार, ऐसे अंतरिती से (जो इसमें इसके पश्चात्‌ प्रथम अंप्ेरिती के नाम से निा..ष्ट है) परामर्श करते के पश्चात्‌ जिसे कि पूर्वगाषी उपयंधों के अतुसार यधास्थितिं कृत्य, कर्तव्य, अधिकार, शा थां या उपक्रग अंतरित . किए गए हैं और उसमें निहित हो गए हैं, किसी अन्य कंपनी या निगसित्त निकाय या वक्त 'पिकारी को (जो , = T SR WA R अंतरिती के साम से निर्दिष्ट है) उपक्रमों का ऐसा भाग ऐसे “नंघनों ' शर्तों पर, जैसा . कि राज्य रार्कार विपिर्दिष्ट को, प्रथम अंतरिती से दिंतीय अंप्ररिती को अंवर्ति करने मेष लगे हेतु अंतरण स्कोम के लिए नियम विरभित कर सकेगी और ऐसा अँत्तरण किसी, व्यवित् द्वारा किए. जाने. र.......ए 25० 2८: कृत्य, निलेख या बात ¥ अंपरण स्कॉप में विनिर्दिग्ट तारीख से प्रभावी होगा, ः , ] (५) एण्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, यह पद कर सकेगी कि भारतीय fagd अधिनियप, ६९६० (१९१० का सं. ९) या विद्युत (प्रदाय) अधिनियप, १९४८ (११४८ का सं. ५४) या उसके अधीन विरचित किन्हों नियमों के अधीन " मंडल द्वारा प्रयोक्तन्य ऐसे कृत्य, कर्तव्य, शवित्तयां रं बाध्यताएं, ऐसे प्रथप अंतरित्ी या g अंतरितती या अन्य कंग्ियों या निगपित मिक्तायों या च्ययत्ति या. प्राधिकारी ' ६: होंगे जैसा कि राज्य सरकार चिनिर्दिष्ट करे. (६) इस धारा में अंतर्विष्ट किसी बात के. होते हुए भी, जहां इरा भाग के अधीन अंतरण स्कीम के अनुसरण में किसी भी प्रकार का संब्यवहार किया जाता है, वहां वह समरत व्यसितयों पर जिसमें तृतीय पुक्षकार भी सप्पिलित है आनद्धकर होगा. - 1 ' l. (७) अंगरण स्कीप पमें:-- (%) अंतरित को जाने वालों संपत्ति, . थे हित, अधिकार और दायित्व को; (एक) प्रश्वशत सम्पत्ति, अधिकार और दायित्वों को चिनिर्दिष्ट था चर्णित करते हुए; - 4 . ., IETN Ll .o v 1y AN U i /f-' \ T ", PN

nvmé_l—_——__—-_____m a3, दिनांक 20 फरवरों 2001 198 (23) (दो) उपक्रम के किसी, लिनिर्दिप्ट भाग में | समस्त संपन्ति,,सधि में हिंद, अधिकारों और दायित्व को मिर्दिष्ट करते हुए; या #. हत्तीव) भागत: एक रीति में और e G में, परिभाषित किया जा सकेसा; (@) यह उपनंधे किया जा सकेगा कि स्कीम में ( दष्ट या चर्णित कोई अधिकार या दायित्व प्रथम अंतरितरी या द्िंगोप अंतरित्ती द्वारा या उसके विरुद्ध प्रिचर्तनीय होंगे; (ग) उपकेसों की पुनर्सरचना या पुनर्गठन के लिए प्रबंध कर सकेगी 'जिसपें सपुनमंगी और सह उद्यम का मंनायां जाना, विलेयन और बिलियन को शिपाप्त करना भी सप्सितित' है; ¥ (%) किसी अनुश्प्तिधाते पर किसी अन्य पश्चातवर्ती ठामुज्नप्तिधारी के साथ ऐसे लिखित करार करने या उसके पक्ष में ऐसी अन्य लिखतें निम्पादित करने कि लिए चबाध्यता अधिरेपित कर सकेगी जो कि स्कीम में सिपिर्िष्ट को जाएं ; और वी (¥ W e, आनुपंगिक और पारिणामिक उबंध कर सकेगी जो कि-सपुचित सपझे जाएं जिसमें उस आदेश को चिनिर्दिष्ट करते हुए जिंसपें/क्रोई अंतरण या संल्यचहार ,प्रधावी होगा, के उपबंध भी संम्मित्तित हैं | _ ) | ) - (¢) सुसंगत अंतरण स्कोप के प्रपाची होने % उपगत्त सपस्त ऋण और चाध्यताएं मंडल या प्रथम अंतरिती द्वाप् या उचके साध या उनकी और से की गई समस्त संबिदाएं और, किए जाने के लिए सहनद्ध समस्त विपय और बात सुसंगत अंतरण स्कीम में विनिर्दिष्ट सीमा तक यधास्थितति, प्रथम या. द्वितीय अंतरित्ती द्वातत उपगत किए गए, की गई समझी जाएंगी, (९) सुसंगत अंप्रण स्कौप के प्रभावी होने के पूर्व संस्थित था संस्थित किये जाने वाले, या लंबित सगस्त वाद या अन्य विधिक कौर्यवाहियां, जिसमें, ्रधास्थिति, मण्डल या प्रथम अंतेरिती अंतर्थस्त है, सुसंगत अंतंरण स्कौस में चिनिर्दिप्ट गोत्ति यें प्रथम याँ द्वितीय अंतर्त्ती हारा या उगके विरुद्ध जारी रहेंगी या संस्थित को जाएंगो. ' (१०) यदि राज्य सरकार द्वारा विरचित उतिरण स्कीम के अनुसरण में किसी arpafaud से उसके उपक्रम के किसी भाग को किसी अन्य कंपनी या निषसित् निकाय या व्य्ति में निहित करने के आगेकषा की जातो है तो आयोग, अतुज्ञाप्तिधारी को प्रदान की गई ,अपु्ति को संशोधित करेगा और कृत्यों के निर्वहन के लिए ऐसी आन्य कंपनी या निगमित्त निकाय या व्यक्ति को समर्थ बनाने के लिए अपेक्षित अयुक्षपि जारी करेगा, (१६) मंडल पा उस सीपा तक उन कृत्यों का निर्वहन करने, उन अधिकारों और शबिंतियों नम प्रयोग चरने तथा उन कर्तव्यों का पालन करने का भार नहीं रहेगा जो जिस सीमा तक इस अधिपियम के उपनंधों के अनुसार किसी डान्य कंपनी या निगधितत निकाय या व्यवित को अंत किए हैं और उसमें निहित करिए गए हैं तथा मंडटा उस सोगा तक उन कृत्यों का पिर्वहन, 'अधिकाएँ और शैंमितगों का प्रयोग तथा कर्गन्यों का पालन नहीं करेगा जो जिस सीमा तक इस + ' अधिनियम के उपसंधों के अगुसार किसी अना कंपनी या निगणित निकाय: या स्यवित को अंतरित किए गए हैं और उसपें निहित किए गए हैं. _ e i (१२) किसी अनुञ्तिधारी द्वारा मंडल के किसी भी अधिकार या शस्त्र का प्रयोग ऐसी शर्तों पर किया जां सकेगा जो अंग्रण स्कीम में निनिर्दिप्ट होंगी जिसपयें एक शर्त राह भी सप्पिलित है कि अतुजप्तिधारी द्वात्त ही उनका प्रयोग आयोग के अनुपोदन से ही किया जाएंगा

१४ ३४ १1 1 िननििकफ्सिसिसिििि 8 2प) एव नि LU iy अल 1 | थे: (2.0) कार्पिकों से संग्रंधितत उपसंघ, अंत्रण में फेरफाए, Hw W. (1) राज्य सरकार, उचत अंत्रिंती सें जो कि धारा २३ के अधीन अंत्ररिति करिए गए उपक्रम के भाग सा में हैं, यघारियतति, प्रधम अंतारित्री या द्वितीय अंग्रिती पें सप्पस्तियों; अधिकारों तथा दाधित्वों के पिहित हो जाये पर , मंडल के कार्गिकों का स्थागांतरण करेंने के लिए उपबंध कर सकेगी और' ऐसा स्थानांतरण उसी रोसि में प्रभावी होगा जैस कि धारा र३ के अधीन स्थागांतरण को दशा में होता, ' (२) ऐसे स्थासांतरण पर कार्पिक, यधारिथिति, प्रथप या ट्विंतीय आपरित्ती के अधीन ऐसे निबंधगों और शर्तों पर, जो कि अंप्रण स्क्रीम में अवधार्ति की जाएं, निम्नलिखित के अध्यधीन रहते हुए पद धारण करेगा या सेवा करेगा, अत :- (F) उग पर प्रथम या बन अंतरिती में के अधीन लागू सेवा के निधन तथा शर्तें स्थायांतरण से अच्यवहित पूर्व उन पर सेवी के मिखंधन तथा शर्तों से कप अनुकूल या पिम्नता नहीं होंगी ; (खे) कार्पिकों की ः में सभी प्रकार से निस्तरता चती = और (M) स्थानतिरण के रू प्रोदूभूत सेवा को समस्त प्रसुविधाएं मान्य होंगी ओर :' मी प्रयोजनों के लिए जिसमें किसी या है | सेवांत प्रसुविधाओं का भुगवान भी सम्मिलित हैं, को विचार में लिया जायेगा. . . A (3) औद्योगिक विवाद उा नियम, १९४७ (१९४७ का सं. १४) या लाथू किसी अन्य विधि में अंतर्चिष्ट किसो बात के होते हुए भी, और इस ऑिषियम में किए गए उपनंधों के सिवाय, इस. भाग के उपवंधों के अनुसार कार्पिकों के सियोजन के स्थायांतण के गा ऐसे कर्मचारी अंतरण स्कौम में यधाउपबोधित के सिवाय, इस अधिभियप त्ीँ | अन्य केद्वीय या राज्य विधि या 'सप्तिन्प विधि के अधीन कोई प्रतिकर या नुकसानी के लिए हकदार नहीं ग स्पष्टीकरण.--इद भाग त )|अंतरण स्कीम के प्रयोजतों के लिए पद “कार्मिक” से अभिप्रेत होगा तधा इसमें वे समस्त व्यवितत सप्पिलित होंगे ) प्रभावी तारीख को मंडल के कर्मचारों हैं चाहे वे किसी भी नाम से जाने २५. राज्य सरकार यह SN कर सकेगी कि स्थानांतरण धागा र३ तथा रद, के निबंधनों के अनुसार स्थानांतरण के प्रभावी होने की तारीख से बारह के पक की किसी कालांवधि तक अंतिम होंगे त्तृथा सह ऐसी पीति में जो राज्य सरकार समुचित समझे निबंधनों में s, o, उपान्तरण जोड़ने या अन्यधा तमदीली “करने का अधिकार अपने पास सुःक्षित रख सकेगे, ः हि i अध्याय--सात्त : टैरिफ रद. (१) किसो अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, (दंत के “तरराज्यिक पाोरेषण के लिए टैरिफ और गज्य में, विद्युत्त के परधास्थितति, ग्रिड, धोक, बृहद्रूप (चल्क) में या "77 :. “वेषण, वितरण तथा प्रद के लिए रैरिफ (जो इसमें इसके परचात्‌ ''टैरिफ'' के नाम से निर्दिष्ट है) इस अ,.. ' 7... o el & sy हुए होगा और टैरिफ का अवधारण इस अधिनियम के उपयंधों के अनुसार आयोग द्वारा किया जाएगा : पत्तु केन्द्रीय अधिनियम की धारा इछ के अधीन गडित सध्यप्रदेश विदयुदू नियापक आयोग द्वारा किए गए किसी आदैश या निंदेश के होते हुए भी, मंडले की अधिसूचना क्रमांक ०१-ण१/जी ए/९२/ए/१३४, क्रमांक ०५-०६/जी ए/ र९२/वी-१, क्रमांक ०५-०१/जीं ए/ए९२/बी-र, क्रमांक ०५-०६/जी YR, क्रपांक न्५-०१/जी ए/₹९२/सी- रे, क्रमांक ०५-०१/जी ए/१९२/सी-३, क्रमांक 4=t /Sl ए/१९२/डी-१, क्रमांक. ०५-०१/जो ए/१९२/डी-२, क्रमांक o4 -0 /S ए/१९२/डी-३, क्रगांक oqaplusfi ए/१९२/ई तथा क्रमांक ०५-०१/जी ए/१९२/एफ, समस्त तारीख एक मार्च, १९९९ द्वारा निश्नित किए गए टैरिफ तप प्रभार विधिमान्य तथा प्रवर्तनीय होंगे. . .

20 - 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिवाँक 20 फरवरी 2001 यसििसििसससिससििििफससस 198 (25) निप्तलिखित कारकों द्वारा पार्गदर्शित dim, iy — , r*"g{%"w‘a;fl{) 'tfiq‘, दद्षता में पर्ाप्त तथा UM "{a’tL चिद्युतू के प्रदाय को लागत अधिकृाम़िक्: परायर्तिति होती है; . . T (@) } wAF W W, संसाधनों "का पमित्तव्यपितापुर्ण उपयोग, अच्छा सप्पादन, अधिकतप विनिधान और अन्य चिषय जो राज्य आपोग इस अधिनियम के प्रयोजन हेतु सरापमुचित समझे, प्रोत्साहित करे; (M) fagq' उत्पादन, पोषण, चित्रण, और प्रदाय लाणिज्यिक सिद्धात्ों पर किया जाता है; . (=) उपभोक्ताओं के हिंत सुरक्षित रखे जाते हैं और साध ही उपभोषता युचितयुवत रीगि से विद्युतू के उपयोग के लिए भुगतान करते हैं; द (ड] विधुतु (प्रेदाय) अधिनियम, इद४८ (१९४८ का सं. ५४) की थारा हद और ५७ और उनको छठवीं अनुसूची में उपबंधित सिद्धांत और उनको प्रयुवितिगां ; और (से) मंडल की दशा में, विद्युत्‌ ( प्रदाय) अधिनियम, ९४८ की धारा ५९ के अधीन के सिद्धांतों का अनुपालन किया जाता है: | को अधिलिखित करेगा, (३9 प्रत्येक अनुज्ञप्ति का धारक और अन्य च्यर्कित, जिपें मंडल या उसके उत्तरवर्ता निकाय सप्सिलित हैं, जो राज्य में थिद्युत्‌ को धोक चृहदुरूप (सल्क) या. फ़ुटकर में सा विक्रय, वितरण या प्रदाय करने के लिए प्राधिकृत हैं, प्रपारों से प्रत्याशित राजस्व की गणना करे में समय-समय [पर आयोग द्वाग्र विनिर्दित्ट कार्यपद्धतियों और प्रक्रियाओं का पालन करेगा, जिसे वसूल करने तथा टैरिफ का अवृधारण करते में उन सजस्वों को संग्रहित करते हेतु धारक को अनुज्ञात किया गया हो. न (४५ यदि राज्य सरकार, किएरी उपभोयत्ता या उपभोषर पके सर्ग के लिए उस टैरिफ में जिसे इस धारा के अधीन राज्य आयोग द्वारा अवधारित्त किया गया हो, कॉड़ी सेंपसिदी प्रदाच करने की अपेक्षा करती है सो राज्य सरकार, सयसिडी प्रदान करने से प्रभाचित हुए स्यवितत की के लिए, ऐफगे रीति ये, जैसी कि आयोग निदेशिर करे, सन्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सम्रसिडी 'का किया कारे के लिए अनुज्ञप्तिधारी या संबंधित लिसी अन्य व्यक्ति के लिए एक शर्त के रूप में रकम का भुगतान करेगी. ः £ WY इस अधिनियम के अधीन अवधाशि कियाँ गया पा. कार्यात्वित किया गया कोई फुटकर टैरिफ :-- e e e धान, प्रकट नहीं कसा किन्तु उपभोयता कै भार क्रारक, - ऊर्जा कारक और किसी विनिर्दिष्ट कालाव्मि के A P का कुत्ता उपभोग या. समय जिस पाए ST g i & या किसी होत्र को भौगोलिक रिथिरि, 'प्रदाय, ती.प्रकृतति और वह प्रयोजन जिसके g e अमेकित है या उपभोक्ताओं . के लिए आवश्यकत्ता के आअगुप्तार अंतर () बिधयुद के किसी उपभोनता के लिए असम्यक्‌ सकेगा; / (@) वित्तीय रूप से कमजोर उपयोषताओं के मापुदु| [में के सिवाय, जिन्हें बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पटी हुई टैरिफ पर सिधुतू की Wb मात्रा उपलान्ध कराना हो, ऐसी रोति में होगा कि (२) आयोग, टैरिफ के नियत के लिए निबंधग तथा शो विनियमों द्वास अवधारिति करेगा और ऐसा FOH *. it परन्तु जहां आयोग, खण्ड (डर) में विनिर्दिष्ट कारकों का अनुसरण नहीं करता हो, सहां वह 'उसके लिए कारणों

..... 2 e s e s B न e, व o 2U ] 2001 Ijk! £ 1 oL / किसी वर्ग यथां उपभोवत्ता के वर्ग से उन्चतर टैरिफ प्रभारिति,कर अन्य वर्ग था उपभोनता के =mif को दौ जाने वाली. विद्यमाय सबसिडी उत्तग्ोसतर रूप से कम हो जाए और इस अधिनियम के प्रारंभ होने के पांच चर्म को कालावधि के भीतर उपभोक्ता के. किसी चुर्ग दे; लिए टैरिफ अनुज्ञि्तधारियों के उस वर्ग के लिए लिद्युतू प्रदाय के अनुज्ञप्तिधारी की औसर नागत ने R TR प्रतिशत फरिलकित हो जाएगी; (M) न्यायसंगत्त और की होगा तथा ऐसा होगा जो बिधुतु के प्रस्‍ ऊरर उपभोग में दक्षता को प्रोन्‍्तन्त करेगा; | (व) अधिमियग, थिनियपों के सा अन्य सुसंगत उपबंधों और अनुज्ञपि को शर्तों को पूरा करेगा, प्र हो कि सन प्रभारों से जिन्हें टैरिफ के अधीन .बयूल करने के राजस्व का आगामी चवित्तोय बर्ष के लिए अपनी संसणना के पूर्ण च्यौरे, आयोग द्वारा विहित को जाए, और ऐसी अन्य जानकारी जो कि आयोग दर रूप से अपेक्षा करे, आयोग क़ो उपलब्ध कराएगा, (६) प्रत्येक अनुक्नप्तिधारी जिसको लिए उसे अनुशात किया गया हैं प्रत्याशित ऐसे सपय पर तथा ऐसी रीति में, जैसी ऐसो संगणवा का निर्धाणण करने के लिए ३ अन्य हिंतयद्ध पषकारों को सार्वजनिक सुनवाई के पश्यात्तू अनुयप्ति को वर्ष से अनधिक ऐसे अंत्रालों पर त्तथा ऐसी रीति में जैसी कि आयोग जानें बाला टैरिफ अवधारित्त करेगा; (४). (क) आयोग, अनुजप्तिधारी : प्रारंधिक मंजूरी देते समय और तत्पश्चातु " चिहित करे, अनुज्ञप्िधारी द्वारा प्रभारित में चविनियाजित की जाने वालो ऐसी रकम, अनुज्तप्तिधाग्े के प्रदाय के व के प्रदाय को समफर्ध करने हेतु परियोजनाओं का क्रियम्वयन करने के समझे, अमुज्प्तिधारी के टैरिफ में सम्मिलित करने कर हकदार होगा. . (ख) आयोग को, चिशेष निधि झेत्र में विभिन्न स्थानों में उपभोचताओं को लिए अश्पेषितत व्ययों की पूर्ति करने हेतु आय रूप से अनुश्ञात ' किए गए फिसो परिवर्तन के संबंध में जिसमें कोई ई' न अधिगार सूत्र (एयूल सरचार्ज फॉक्िला) के अधोन॑ जो टैरिफ अवधारित' करने वाले आदेश 7 आयोग द्वार - विंपिर्दिप्ट किया जाए, समिलित है, के सियार' कोई टैरिफ या किसी टैरिफ का भाग .जो दआयोगंन्ट्वात अपधारिस किया जाए ऊँ क्रियान्वित फिया जाए, अनुज्नपिधारपुक्रि. अनुरोध पर किसी विसीय यर्प में एक सार से अपरक ' गरीक्षित यहाँ '८) पुनसीशितत किए जाने के लिए कि किया र1 सकेगा. अनुसध्तिथ्वरी, आयोग को. टरिफ में प्रस्तावित पुनीक्षण के च्यी ऐसी और +.एसर्परी के साध उपलब्ध कराएगा जैसी कि उपयोए अगेक्ा करे. WP, W जानकारी की प्राप्ति के - » बदन . v it ey व्यक्तियों कौ सुनवाई के पश्शत्‌ टैरिफ, में प्रस्तासि, पु्रीक्षण पर अपना चिनिश्चय ऊपर * (९) अनुजप्तिधारी करिसो दैमिक समाचार पत्र में जिसका परिचालन पारेवण के केत्र या प्रदाय कें श्रेत्र थें हो पारेपण या प्रदाय के शेत्र के भोतर विद्युत पोपण या विधुत प्रदाय दे लिए टैरिफ प्रकाशित करवाएगा और जनसाधारण के अनुरोध पर उपलब्ध कराएगा और ऐश टैरिफ ऐसे प्रकाशन की तारोख से सात दिन पश्नात्‌ हो प्रभावशील होगा " (10) आगुज्ञप्तिधारी दित्सी थीं टैरिफ ध्े तय तक पुनरीक्षित या संशोधित नहीं करेगा जब तक कि आयोग ने संशोधन को अनुपोदित न कर (दिया हो और उपदार (९) में उपबंधित रीति में संशोधित टैरिफ प्रकाशित न का दिया गया हो X _... (११) सिद्युततु (प्रदाय) अधिनियम, १९ 1 0 का सं. ५४) की धारा 5६, ५७, wWg-F और प७-ख में अंतर्विष्ट किसी वात के होते हुए भी, इस अपि के प्रारंभ होने की तारीख के परनात्‌ कोई रेटिंग संपिति गरिते नहीं की जाएगी और आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि 2 सज्ञनतिधारीं ने चिधुतू के थोक तंधा फुटकर दोनों प्रकार के विक्रय के लिए प्रभारों और इस अधिनियप के उपबंधों के 3T उनंक्रो आस्तियों या प्रणाली के संयोजन के तिए तथा उश्योय के लिए संबंधित उपबंधीं का पालन किया हैं, T दंड

P "y वि सप्यप्रदेश राजपत्र, दिशंक 20 फरवरी 2001 J4) ¢ofisd ) स्पष्टी करण.--इश भार में- (=) *' प्रभारों रो प्रत्याशित राजरव”” से अभिप्रेत है ऐसा कुल राजस्व जा किसी चित्तीय वर्ष मैं अगुजण्तिधारी ™ 5 *. ड्रास उपधात (६) के अधोन टैरिफ के अवधाएग में प्रयुनत पुर्वानुपाशित प्रदाग के स्वर के लिए । उपभोक्ताओं को प्रदाय किए -गएं पाल या सेवाओं के संचंन में, प्रभारों से चसूत किया जाना प्रत्याशित है. (ख) "टैरिफ से अभिप्रेत है विनिर्दिष्ट सेवाओं के लिए चिद्युतू ऊर्जा या प्रधाएँ के प्रदाय के लिए मानक कौपत की कोई अनुसूची जो टैरिफ में चिनिर्दिप्ट प्रवनर या प्रकारों के क्रेता या उपगोकता को ITEAH कराई गई ऐसी समस्त सिंतिर्दिप्ट सेवाओं पर लागू है. - र७.. रास्य सरकार, ऐसी रकम की और ऐसे निबंधन तथा शर्तीं पर जो कि सज्य सरकार, अनुज्नप्तिधारी . रास्व सर्कृर द्वास द्वारा थिविर्दिष्ट परियोजनाओं के छ़ियान्वयन हेतु समर्थ स्रनागे के लिए अवधारित करे, आर्थिक राहायता दे सकेगी... आर्थिक सहायता. जो राज्य सरकार सोकहित में आवश्यक्र सपडझ़ो, ' अध्याय-आठ आदेश रथ प्रवर्तन हैं कि कोई अनुज््तिभारी किसी . सुसंगत शर्ते या उपेक्षा. अनुपालन शुनिशिचत सह धार २९ के अधीन अंतिम आदेश ट्वाण; और यदि. करने के लिए 'ः अंतरिप आदेश द्वार ऐसे निंदेश नारी करेगा उसे. 'ैश" | . . २८. (९६) ' जहां आयोग का यह समाधान हो जाता का उल्लंघन करें रहा है "या उसका उल्लंघन करने खाला है प चह उपधारा (२) के 'अनुसाए समुचित सपझे तो इरा पारा दे कि वह अनुपालव. सुनिश्चित करते के लिए उचित समझे. (२) यह अवभारित करने में कि यया यह समुचित होगा कि कोई अंतर आदेश फिया जाए, आयोग, लिशिष्टतया निमालिखित का ध्यान रखेगा-- - . (%) =% सीपा, जिस तक अतुज्ञप्तिभारी द्वार द मंघन या संपाव्य उल्लंघन, इस अधिनियग के उद्देश्यों और प्रयोजनों को उपलब्धि को प्रभावित पी (ख) वह सीपा, जिरा तक कि अंधिम आदेश | के पूर्व सुसंगत शर्त या अपेक्षा के उल्लंघन में किसी ऐसी बात के परिणामस्वरूप जो कि का: जानो है था किए जाने से छोड़ दी गई है, किसी व्यक्ति को हाथि या नुकसान होता संभाव्य है; दर ः (1) =% सोसा जिस तक कि (इस धारा थे इसे पश्चात उपयंधित I R AT में रख़रो हुए) किसी सुसंग्ा शर्त या आपका के अधिक्रथित हि्सं के संखंध में कोई अना उपनार उदास है, (३) यदि आयोग कोई अंत्रिप आदेश कियां जाना हिस्तावित करता है तो चहें,-- (%) यह कथन करते हुए कि सह आदेश कर प्रस्ताबिंत करता हैं; - - l.-'- (ख) निम्तलिखित चातें उपवर्णिप्त करते हुए:-' ) दर - न . पर: (एक) ऐसी सुर्सगत सतें सो 'अगेक्षाएं जिनका “अनुगालन, किया , जाना प्रस्तावित आदेश द्वारा आशयित है; -.. - (दो) ऐसे कृत्य या लोप जिगरे उसको राय में उस शर्त या आगेशा का उल्लंघन होता है; . (तीन) ऐसे अन्य त्तृस्य जो उसको राय में प्रस्तावित आदेश किया जाने को “यायोचित ठग हैं ; और

RN S सकल टी लय राजू, दिनांक 20 फरवरी 2001 [ 4 K 'L:’?—/") अनुपालन सुनिशिवत काने के लिए अंतिम आदेश, (चार) प्रस्तावित आदेश के ,1पाव, और वह कालाबपि विनिर्दिष्ट करते हुए जो कि सूचना की तारीख से ५ दिन से कर्म की नहा होगी, जिंराके, कि धीत्तर अनुज्ञप्तिधारी प्रस्तावित आदेश के चिरुद्ध अध्यावेदन या आधोपे कर | सकता है, अतुश्प्तिधारी को सूचना देगा, P A ' (४) उपधारा (5) के अध्यधोन रहते हुए और अनुज्ञप्तिधारो से उपधारा (३). के अमुहारण में प्राप्त अभ्यावेदयों या आश्पों पर चिचार कर लेने के पश्चावू, आयोग ( अनुज्ञपिधारी के अप्यावेदनों या आधषेपों के कारण प्रस्तावित आदेश को उपातिश्ति करते हुए), उपधारा (३) सें निर्दिष्ट कालावधि का अन्रसान होते के पश्चातू, किसी भीं समय अंतरिम आदेश कर सकेगा यदि-- . (के) आयोग के पास यह विश्वास करने का ठोस कारण है किं उस अतुज्ञफिधारी ने जिससे कि आदेश संबंधित है, किसी सुसंपत्त शर्त प् 'अपेक्षा का उल्लंघन किया है या उल्लंघन कर रहा हैं या बह उनका उल्लंघन करने चाला है; और | अपेक्षित है, - (@) आदेश द्वाप किए गए ला उस शर्त या. अपेक्षा का अनुपालन सुनिश्चित करने के प्रयोजन से (५) आयोग, कोई अंत्रिप आदेश नहीं कर नि सकेगा यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि अनुज्ञप्तिघारी ऐसे सभी कदम उठाने के लिए सहपत्त हो गया है और यह ऐसे कदम उठा भी रहा है जिन्हें कि आयोग समझता है कि उस प्रश्नाधीन शर्त या अपेक्षा का अनुपालन सुरिश्चित करने या उसे सुक्तर बनाने के सिए अनुजञप्तिधारो को कदम उठाना चाहिए; (६) अंतरिंग आदेश,-- Vet (F) द्वारा ऐसे अनुज्ञप्तिधारी से जिससे कि वह संमंधित है, (मामले को: L L अनुसार) यह ' अपेक्षा की जा सकेगी कि चह ऐसी बातें करें या न करें जैसी कि आदेश में चिमिंदष्ट है या जो इस प्रकार विनिर्दिए किए गए प्रकार को है, (1) शौघ्रतप साध्य ऐसे समय से प्रभावशील होगा जो कि Ry g अवधारित किया गया हो; और (ग,. आयोग द्वारा किसो भी पमय प्रतिशंहत, उपांत्तरित या सिखंशिस किया जा सकेगा, परंतु किसी भी दशा में ऐसी कालावपि रं। सपाप्त होने पर जैसी कि आदेश में कथित है, तम प्रभावहोन हो जाएगा जय , तके कि आयोग, धात २९ में उपस्थित प्रक्रिया का अनुरारण करके, उस अंप्रश्मि आदेश A ik आदेश के रूप में घोषित न कर दे. . (v) अंतरिम आदेश करने के पश्चात्‌ ःन यधासाध्य शीघ्रता से,-- (% आदेश को एक प्रति उस सर (@; आदेश को ऐसी A में प्रकाशित *. प्रयोजन के लिए, जिनके कि (ए) अंताहिप आदेश को धारा र९ के | धारो पर ताधील करेगा जिससे कि वह आदेश संबंधित है; करेगा जैसी कि चह उसे उन व्यवित्तयों को जानकारी में लाने के ससे प्रपावित होने को संभावना है, समुचित समझे ; और तुसार अंतिप आदेश के रूप में घोषित करने की कार्यवाहियां प्रारंभ कोरगा, न . R () यदि आयोग अंप्तिप आदेश पं करता है, तो उगयोग,-- अंतरिंग आदेश को अंतिम आदेश के रूप में घोषित करना प्रस्तावित हद,

22 “(क) यह कथन करते हुए कि वह अंतिंम आदेश कौर ना या अंतरिम आदेश को अंतिष आदेश के रूप गे घोषित - करना पग्रस्तातिंत करता है; (@) प्रस्तासित अंतिग ,आदेश के संबंध में धात २८ की उपघारा (३) के खण्ड (ख) में चिर्दिप्ट जागकारी ¥ उपवर्णिति करते हुए ; और (ग) वह कालांसपि 'चिनिर्टिष्ट करते हुए (जो सूचना के प्रकाशन की तारीख से ६० दिप से कम को नहीं ..८.. हँगी) जिसके कि भीतर प्रस्तावित आदेश के विरुद्ध अम्यावेदन, या आदोप किए जा 'सकेंगे, सूचना देगा और उन अम्याचेदनों या आध्षोपों पर विचार करेगा जो सम्यक्रूप से किए गए हैं और चापस नहीं लिए मए हैं. आयोग ऐसे अप्यावेदतों या आशेषों की सूनना प्रकाशित करेंगा और बह कालावधि (जो सूचना के प्रकाशन की तारीख से ३९ दिन से कप की नहीं होगी) चिनिर्दिष्ट कोगा, जिसके कि भीतर और अप्याबेदन या आशेप किए जा सकेंगे, (२) उपधास (V) के अधीन, (क) “ऐसी रोचि में सूचना प्रकाशित करते हुए, जग सी कि, सागलों को उन स्ाचितयों की जिगरे सूचना संबंधित हो, और जिनका .कि उससे प्रभावित होना संभाव्य हो, जानकारी में लाने के प्रयोजन के लिए आयोग समुचित ' समझे ; और ः : (ख) उस अनुज्नप्तिधारी को जिससे कि आदेश संबंधित हो, सूनना और प्रस्तावित अन्तिम आदेश कि एक- एक प्रति तापभील कराते हुए; ः . ‘ एक सूचना दी जाएगी, (३) आयोग,-- (क) उस अमुज्प्तिधारी को सहमति के जल कि प्रस्तावित अंतिभ आदेश संबंधित हो ; और (@) उपधास (४) की अपेक्षाओं यम थे गर लिए जाने ले पश्सात्‌ के सिवाय, ग्रस्तालित अंत्तिप आदेश को उपधारा (६) में निर्दिष्ट सूचना के | प्रकाशन के अनुरारण में प्राप्त अप्यावेदतों सा आश्षेपों के चरिणापस्वरूप उपांतिरित रहीं करेगा. ’ (४) आयोग,-- (क) उस अनुगप्तिधारी पर, जिससे कि ग्राताविषि अंतिप आदेश संबंधित हो, ऐसी सूचना जैशा कि आयोग को प्ररताबित अंतिम आदेश को 4 रत करने के लिए अगेशित प्रसीत हो, उगान्ताणों के ol के साध वापील करेगा; . Ty e g ety AR पा पा “की नहीं होगी) जिसके कि भीतर प्र ही उपांत्तरणों के विरुद्ध: अ?यावेदन, या ,आशेष -किए जा सकेंगे ; और -l . ' ' (ग) उन अप्यावेदगों था आक्षेणों गर, घिभाए करेश जो कि चिंपिर्टिगट समय के भीतर सम्गक्रूम से किए गए हैं और वापस नहीं लिए गए हैं. (५) धारा २८ की उपधाश (६) के खण्ड (कल) और (ख) के उपबंध अंत्िग आदेशों को लांगू होंगे. (जो सूचना की -तापीली. की तारीख से ३० दिग से कम -.' - .

....; (६). अंतिम आदेश [किया I () ¥ e (%) _ और; कि o IRl आपात उपब्थ (३). आयोग ऐसे जुषनि. और प्रभार | प्र करने को हकदार होगा, जैसे कि उत्पादन करने वाली कंपनियों, अंनुन्नपिधारियों या अन्य ब्यवितयों के द्वारा इस उधिमियम या उसके अधीन विरचित विधियों के उपबंधों था अभेशाओं के: या आयोग द्वारा सपय -समंय पर दिए गए । शो या आदेशों के अननुपासन या उसके उल्लंघन के लिए आयोग ट्वास :किपियमों में विहित किए जाएं, बह जुर्माना, जि कि अधिरोपित करने का, आयोग, हकदार होगा, एक न्यार अनुपालन या उल्लंघन करने के लिए १,००,००० रुपये (पक लाख रूपये) तक का और प्रत्येक उस दिग के लिए जिसके कि दौसन अनुपालन या. उल्लंघन चालू रहता है, 11००० रुपये (छः हजार ) R e ol राशि तक का हों सकेगा. की . -

23 e _ . .. नाक AT, 1T 20 ety 20 । L 4 v (४) आयोग, इस भाग ने जलोन, कोई iy सा अंतिम आदेश काते समय या अनाधा किसो साधारण या विशेष आदेश दास उपधाश (३9 में साधा उपबंघधित टी H अनुपालन के दोगी व्यक्त द्वारा ऐसे व्यक्ति यां स्यधितयों को 'प्रतिक्रर संदत्त करने का निदेश देंगा जो कि ऐसे उल्संधन या अननुपालन से प्रभावित हुए हां. ' R रत . N i . . ¥ # (५) वे जुरपानि, T m प्रतिकर जो इस धास के अ न आयोग द्वारा जधिरोपित किए जाएं, e PR कर B . o B के, जो कि उल्लंघन या डागनुपालान के दोती व्ययितत के | हों, अततिरिवत गे और उनका अल्पीकरण करने वाले नहीं होंगे. i N ः + हु हर ३२. (1) अंनुज्ञप्तिधारी, उत्पादन करने साली कंपतिया और सपरत अम्य, आयोग द्वाग् ऊर्जा प्रणाली ( पावर सिस्ट्प ) और चिधुतु प्रदाय लाईतों के, प्रचालन और उनके अनुरश्षण . के लिए निमंधन और शर्तें चितियमित करने के लिए समय- समय पर विएचित चिनियमों के उपबंधों का डनुपालत वरें (२) अधिनियप के प्रयृत्त होने के पश्चात, राज्य में; उन विधुत्‌ उद्योगों को, चाहे वे अधिनियम के प्रारंभ होने के पूर्व या उसके पश्चात्‌ स्थापित हों, भाग रूप या उनके | वध ' बंध में प्रयुक्त सपा आस्त्ियां संपस्तियां, संपत्ति में हित और अन्य सुचिधाएं, आयोग द्वारा अधिनियग के उद्देश्यों "6 i को प्रमा करने के लिए और विशिप्टचया ऊर्जा प्रणाली (पावर सिस्टय) और बिद्ुतु प्रदाय लाइनों का पिरत्तर प्रचालन और अपुरक्षण बनाए रखने की आवश्यकता! के लिए विरचित किए, जाने घाते सितियपों के अध्यधीन होंगी. ' अध्याय--नौ अनुज्नप्तिधारियों द्वारा काम करने के मानक, जानकारी का प्रकटीकरण इत्यादि N ’ ३३. (९) आयोग, राज्य सरकार के पसमर्श से, राज्य सल्लाहकार सपिति के चयाम से एक राणिति कय शठत करेगा जिसमें ९ से अन्यून और ६५ से अनधिक उत्तनी. संख्या में व्यचित्र होंगे, जितने व्यवितरयों कही निगुवित आयोग निम्नलिखित हितों अधत्‌ राज्य में प्रदाय अनुज्ञषि के धारकों, राण्य में भारिषण अनुज्प्ति के धारकों, राज्य में कार्यरत उत्तादम करने चालो कंपनियों, अशासकोय संगठन, उपभोगनता और उपभोक्ता 'सपृहद, शैक्षणिक संस्थाएं, अनुसंधान निकाय, Wi, उद्योग, परिवहन, कृषि और विधुतू उद्योग में नियोजित श्रमिकों का तिपिधित्न करते लाले ऐसे प्रत्तििधियों या गिकायों से करने के पश्चाद्‌ को जाएगी जैसा कि आयोग उपयुसत समझे. (२) आयोग के अध्यदष (चेयरपर्ग) और सदस्य, सम्य सलाहकार रागिति के पदेत अध्यस (येयरपर्सग) और सदस्य होंगे. 1 : (३) राज्य सलाहंक्रार सगित्ति प्रत्येक 3 गास में कम से कग एक सार अपना सातियलन करेगी. (४) राज्य सलाहकार सपित्ति की अवधि तीन वर्ष को होगो. (५) राज्य सलाहकार स्थिति के कृत्य निप्तातुप्तार होंगे :-- ! (क) राज्य में घिद्युतू उद्योग से संबंधित नीति के प्रषुख प्रश्तों पर आयोग को सलाह देता ; और ~ बा पद. 1 . |. . ३. (१)... आगोग, आनुज्ञप्तिधारियों, सख्य सलाहकार समिधि से और उन व्यक्तियों या निकायों से, जा कि उसके समक्ष उन व्यचितयों के प्रत्तिगिधि के रूप में जात हो रहे हों, जिगके कि प्रभावित होने को संभावना हों, परापर्श करने के पश्चात, समय-समय पाए, : ' ये A आधोग कला सापाप्य P, गण्य पालाहफाते 'सपित्ति. (@) ऐसे 'ग़ासलों गर आसोग को सलाह देना जो कि आयोंग उशके समझ रखे, जिसमें, अनु्तग्तिधारियों, द्वारा... P g की गई सेवा को गुणवत्ता, तिरनार्ता iR e आनुंगप्तिधारियों द्वारा उत्लकी,. :अतुजीत . की शी और आगेक्षाओं के अनुपालन से संबंधित गागले गी. सप्पिलित R, प्लस पिचुत्त प्रदाथ फार्य T ¥ T,

परछ ६८4 मध्यप्रदेश राजपत्न, दिनांक 20 फरेंतरी 2001. - 155 ¢ ™ /' . (क ) विद्युत प्रदाय सेवाओं के उपयंधों के संबंध में और उपभोक्ताओं ्वाहत विध्युत्‌ के ऐसे ददतापूर्ण उपयोग - के उन्नयन के संबंध में, जो कि उसकी राय में दक्षत्ापूर्ण हैं और ऐसे अनुस्प्तिधारियों द्वातत प्राप्त फ्रिए. जाता कह कार्य करने ¥ U अवधारित कर सकेगा परन्तु ऐसे मायके | सरकार द्वारा गठित प्राधिकरणों द्वास थियुतू उद्योग के शिविर स्थापित सानकों के संगत होंगे और किसो भी दशा पें ऐसे मानकों से नविप्नतर ¢ 4 ' (ख) अनुज्प्तिधारियों, करने चाली कंपमियों तथा अन्य ¥ oA e oo के लिए ऊर्जा प्रणालो " (पावर सिंस्टग) प्रसालन कोड विंहित कर सकेगा, जिसमें प्रिड भा६नण के. वितरण करोड़, प्रदाय कोड और प्रदाय सिंतियप सप्सित्तित हैं, क्रिस से राज्य के भीतर तक ही सीमित नहीं होंगे; (ग) सिंधुवु के उपयोग में बह ऊर्जा प्रणाली के प्रचालन के. लिए सुरक्षा विनियप चिहित कर सकेगा;. और था खंड (क), (ख) और (M के अधीन इस प्रकार अवधारित अन्य ऐसे प्रहूप में तथा ऐसी रीति में इंतजाम करेगा जैसी कि वह समुचित समझे. . TR (२). आयोग, भिन-भिनत अनुज्ञतिधारियों के लिए धिनन-धिन मानक और कोड्स असधारित कर सकेगा, (घ) पानकों, कोड्स, चिट | मामलों के प्रकाशन कार्य करने से ३५. आयोग, (क) अमुज्ञपियों ने | धारकों से तथा (ख) आयोग के समक्ष उन उ्यक्तियों और '्पवितयों के प्रसर्गों मानकों की जान- के, जिंकके कि प्रभाषिग होने की संभावना) हो, प्रतिनिधि के रूप में उपसंजात होने. वाले स्यव्तियों या निकायों से और . (ग) राज्य सलाहकार सणिप्ति से पापी करने के गश्दात, निम्नलिखित को जिहित करते हुए विनियप, सलिएित , कर सकेसा,-- है (एक) उपभोक्ताओं और आपृ[जनता के लिए चार्ट, अनुज्ञप्तिधारियों के कामकाज के यारे में जानकारों का उनका अधिकार ; : ' o LI A (दो) वे परिस्थितियां जिंनरे कि ऐसे अनुप्तिधारियों द्वारा उपभोषताओं को उनके अधिकाएँं और ऐसे अनुजप्तिधारियों कमी मोर से होने वाले किसी विलंब या व्यत्तिक्रम के लिए उपभोक्ताओं को प्रतिकर के गुगतान की जानकाएं दी जाएगी « (त्तीय) उपभोगताओं को सिंधुतू प्रदाय से संसकत खण्ड (एक) के ऊअ"' 1 उ.. o उद्भूत किसी 'काच्यि के संबंध में कार्य 'करने के ,सानक॑; और व e, (=it ) ले परिस्थितियां जिमयें अनुअप्तिधारियों को इस धागा या ,बिनियपों की किन्हों अपेक्षाओं से छूट दी जायी है, और नह भिन-पिस अमुशपिधारियों के लिए थिनन-भिनत उपबंध कर सकेगा, उपभोक्ता संरक्षण ३६. इस अधिषियम को कोई भी लात, उपभोक्ताओं के अन्य विधियों के अधीन अधिकारों और विशेगाधिकारों विधियों के लिए. पर 'जसमें उप्रभोबता संरक्षण अधिनिश्रम, श९८४६ (१९८६ का सं. ६८) भी सम्पिलित है, किसी भी प्रकार से प्रतिकूल . प्रभाव नहीं डालेगी या उन्हें प्रभावित ग करेगी, - 1! ; : , कार्य काने के स्तरों ३७, (१६) आयोग, समय-समय गए. सिंप्ललिखित के संतंध' में जामकारी एकत्र करेगा,--- के. संबंध में ः ' जानकापी, व (F) इस अधिनियम के अधीन अनुक्प्तिधारियों से उद्पृहीत जुगनि या शास्तियां (@) ऐसे आतुदपिधारियों द्वारा प्राप्त किए गए पोषण और चिद्युतु प्रदाय सेवाओं के उपयंधों से संसक्त कार्य करने के पानक; और जज सी रस

सप्यग्रदेश हाजपन्न, 1S7HTE 20 Thiddl Juui P असल तर | () ऐसे आनुज्ञप्तिधारियों द्वारा प्रा किए, गए, उपॉरव्ताओं ट्वाण. विधुत के दशा उपयोग के उनायन से संसनरा कार्य करने के U o मा ! g 0 प्रत्येक अनुज्ञप्तिघारी प्रतिवर्ष ऐसी तारोख को या उसके पूर्व जैसी, कि आंग्रोग द्वारा दिए गए निदेश लि . में चिनिर्दिष्ट की जाए, आयोग को, निम्नलिखित जानवगुरी दद्वेश,-- ik - : (%) fafea किए गए. प्रतीक मानक को बाबत उन - R संख्या जिनपें कि शास्ति उद्गृहोत को गई,हो और उन शास्तियों के गूल्य को संकलित रकम; Al ) it e 5 (@) असपारित किए गए प्रत्येक गागके को बानतू और अआमुज्ञप्तिपारी द्वारा प्राप्त किए गए कार्य करने के स्तर की चाखत्‌ ऐसी जानकारी जैसी कि इस प्रकार विविर्दिष्ट को जाए. 3 . v (३). आयोग, प्रतितर्ष कग से कम एक चार इरा धारा के अधीन उसके द्वास एकत्रित की गई या उसे दो गई ऐसी जानकारी का, जैसी कि आयोग को इस प्रकार अपेक्षित प्रतीत हो, ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में, जैसी कि वह समुचित समझे, प्रकाशन करने के लिए इंतजाम कोरगा. : ३८. इस अधिनियग के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, आयोग, अधिलिखित किए जाने वाले कारणों से यह जानकारी. के निदेश दे सकेगा कि अनुज्ञ'्तिधारियों, उत्पादन करने खाती कंपनियों या किसी अन्य sk की बाबत्‌ कोई जानकारी प्रकटीकरण का _ गोपनीय मामी जाएगी और उसका प्रकटीकरण प्रतिषिद्ध होग : , प्रशिवेध, अध्याय-'दस ) पपीसें माध्यस्थपू और ardie , L . ¢ . (१९९६का सं. %) में या साध्यस्थपू से संबंधित, _ आयोग. द्वाता भी, अनुज्ञप्तिधारियों के बीच उद्भूत होने वाला कोई T इ o - ३९, (१) (क). माध्यस्थपू और सु्तत अधिनियम, किसी अन्य विधि में अंतर्चिष्ट किसी प्रतिकूल बात % ¥R विवाद आयोग को मिर्दिष्ट किया जाएगा. (@) आयोग, मध्यस्थ के रूप में कार्य करने के लि अग्रसर हो सकेगा और बिताद का म्यायपिर्णयग करने और निपटास करते के लिए पंत्ताट कर सकेगा सा सध्यस्थों को नागतिर्दिष्ट कर राककिगा, 4 . (1) ¥ किसी स्यायपिर्णयन और निपटोरे के सं भ से अनुसरित की जाने वाली पद्धति और प्रप्निंगा ऐसी ' होगी जैसी कि विनियपों द्वारा सिहित ‘ जाए. (२) जहां कि आयोग द्वारा नियुवत किसी मध्यस्थ ट्लाह पंदार दिया गया हो वहां इसे आयोग के समझ फाइल किया ज़ाएगा और आयोग पंघाट भर समुचित आदेश पारित कर सकेगा, जिनगें,-- कै . (@) पंब्ाट को अपाता या. उपातारिति 7 m e पर ".. (ग) मध्यस्थ द्वाप्त पुंनर्विनार किए जाने के लिप्जाट को, विप्रेण्ति फुल, ; * के आदेश भी सािलित होंगे. (३) उपधारा (२) के अधीन आयोग द्वारा दिया गया कोई पंचार था आयोग द्वादा पारित कोई उादिश, आयोग का चिनिश्वय या आदेश होगा तथा इंस अधिनिया में यथा उपनंधित के अतुसाए अपील करने सोग्य होगा.

चिद्युतू निरीक्षकों के शिनिश्चयों के विरूद्ध अपीलें, आयोग के, आदेशों के विरुद्ध अपीलें. आयोग का यजट, आयोग सा लेखा और उसको संपरोक्षा. लि" नल अप्दया रीफिपेन ना फि 20 Wil 2001 . L | A : _ (४) आयोग द्वारा उपधारा (२३ कु अिध मीन दिया गया कोई पंचाट, या आयोग द्वारा पारिसे किया गया कोई आदेश, उसी प्रकार प्रचर्ततनोय होगा यानों कि वह किसी सिविल न्यायालय को डिक्रो हो (५) आयोग, इस भाग के अपीन कार्यवाहियों के प्रारंभ होते के पूर्व किसी भी समय या कार्यवाहियों के लंचित रहने के दौरान, किसी भी समय ऐसे अंतरिम आदेश कर सकेगा जैसे कि आयोग समुचित समझे. . ०. भारतोय विद्युत अधिनियम, १९९० (१९१० का सं. ९५ या चिद्युत्‌ (प्रदाय) अधिनियग, १९४८ (१९४८ का सं. पद) में या उसके अपीन ननाये गये किसी नियम में किसी प्रतिकूल संत के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार या फेप्ट्रीय विद्युत प्राधिकरण के किसी निरीक्षक से भिन्न किसी सिदधुत निरीक्षक के विनिश्चयय के विरूद्ध अपील. आयोग को की जाएगी 1 i ' ४१, इरा अधिनिगप के अधीन आग के द्वारा पारित किसी विनिश्चय या आदेश रो व्यधित कोई व्यक्ति; उस ल्यवित को आयोग का सितिश्चय यथा आदेश संसूचित किए जाने की तारोख से साठ दिन के भीतर, उच्च न्यायालय को ऐसे आदेश से उद्पूतत होने वाले विधि के |प्रश्स पर, अपील फाइल कर सकेगा: S गायों. कर परन्तु यदि उच्च न्यायालय का यह न धान हो जाता हैं कि व्यशित व्यक्ति के पडिव, " 'ठ दिन को कालावधि के भीतर अपील प्रस्तुव न कर पाने का पर्याप्त कारण था जो वह साठ दिप को कालाल:.. ' झा: हो जाने के पश्चात्‌ ९० दिय से अनधिक् को और कालावधि के भीतर अपोल ग्रहण कर सकेगा, अध्याय--ग्यारह लेखा, संपरीक्षा तथा रिपोर्ट ४२. आयोग, प्रत्येक वित्तोय वर्ष में ऐसे प्ररूप में तथा ऐसे सपय पर, जो कि थिहि क्रिया जाए, आयोग को प्रावक! लत प्राप्तियों तथा न्यय को दे. ति हुए अगले वित्तीय चर्प के लिए अपना खजट तैयार करेग और उसे अनुमोदन के लिए राज्य सरकार को अप्रेषित v m ४. (१) आयोग, उचित लेखा तथा अन्य सुरंगत अभिलेख संधारित करेगा तृथा एंप्ले प्ररूभ में, जैसा कि भाएत के नियंत्रक और गहालेखा परीक्षक के "रापर्श से राज्य साकार द्वास सिहित किए जाएं, लेखाओं का वार्पिक चिंचरण सैयार करेगा. : . (२) आयोग के लेखाओं को संपाक्षा पल और महालेखा परीक्षक द्वारा मियुवत किसी व्यक्तित छ्वारा ऐसे अंतरगालों पर की जाएगो, जैसा कि उसके द्वारा चिनिर्टिटि किया जाए और ऐसी संपरोक्षा के संगत में उपगत कोई व्यय आयोग द्वारा चियंत्रक और पहालेख़ा परेक्षक को देर' होगा. (३) नियंत्रक और o Wi ग़फा उसके द्वारा इस अधिनियम के अधीन .आयोग के लेखाओं की संपरीक्षा के रॉबिंग में नियुवत किरो ल्यवित को ऐसी सं" पा के संबंध में वे हो अधिकार और विशेगाधिकार तथा प्राधिकार प्राय होंगे जो नियंत्रक और पहालेखा परीक्षक ने! सरकारी लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध यें साधारणतया होते हैं, और विशिष्टतया उसे बहियों, लेखाओं, हर ता चाउचरयों तथा अन्य दस्तावेजों तथा कांग्जे-पत्रों * पेश किए जाने को मांग करने गधा आयोग के किसी भी कार्यादीय का निरोदाण करने का अधिकार wrd e, (४) नियंत्रक और महालेखा परीक्षकमनउसर् द्वारा इस मिधित्त निमुक्त किए गए :, .. =1 ठयसिति द्वारा यधा प्रमाणित आयोग के संखाओं को उस पर संपगीक्षा सपोर्ट के साध आयोग ढ्वारा प्रतिवर्ष राज्य et «.. अग्रेणित किया जाएगा और राज्य सरकार उसके गाप्त होने तेरे पश्चातू सधाररूयशीघ्र संपरीक्षा i R oo विधान सभा के पटल पर e, £ )

:é&t‘d-' s P s A गा पा %2 I देश गजपत्न, ।देगाक 29 hiRu vl गण अर. (१) आयोग, प्रतिवर्ष एक वार ऐसे प्रभीष में तथा. ऐसे समय पर जैसा कि विहिस किया g आशोग को सार्पिक् खर्ष के दौरान के अपने 'फ्रियाकलापों का संहिता लिवर देते हुए एक सार्पिक पिपोर्ट तैयार करेगा, तथा रिपोर्ट की प्रत्तियां रिपोर्ट, o सरकार को अग्रेपितत को जाएंगो, : . ¥ नि न (२). उपयारा (१) के उधीन प्राग्या रिपोर्ट तह! एक प्रतति उसके प्रापा होने के पश्चातू यथाशवराशीन्र सज्य विधान सभा के पटल पर रखी जाएगी. _, --बारह और शास्तियां अधिधियप के अधीन बिरचित विनियपों या किसी उन्य प्रयोज्य . धारा हेड के उल्लंघन पारेषण या प्रदाय के कारयार में सगेगा, सह कारावास से sy के लिये शा्ति, छह पास तक का हों सकेगा W जुमनि के रूप पेर्शास्ति से जो ६,००,००० रुपये (एक लाख) तक की हो सकेगो , या दोनों से और ऐसी और शास्ति से जो प्रथग दिए के पश्चात, ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिसके क्रि दौरान अपराध - चातू रहता है ६,००० रुपये (छह हजार) तक की ही, सकेगी, दण्डनीय होगा. H अपरा। अप. जो कोई इस अधिनियम के उपबंधों या ' सिधि के उपयंधों के उल्लंघन में शिधुत के - उपयोग व ' सं यदि कोई अतुझपिधारी यां. कोई अच्य 'ख्यितित जो इस अधिनियम के किन्हीं उपयंधों के अधोन दिए गए. अन्य उपयंधों के किसी निदेश, आदेश या की गई किसी अपेश्ता का अनुपालन काने से रा उन्हें कार्यान्वित करने से क्रिसी चुक्तियुक्त उस्संपन के सिये कारण के थिना इंकार करता है या उसमें अप्फल रहता है, बह कारावारा से जो.३ मास सक का हो सकेगा या जुमनि शास्तियां के रूप में शास्ति से जो १,००,००० रूपये (एक साख) तक की हो सकेगी या दोनों से तथा ऐसी और शास्ति से, जो प्रथप दिन के पश्चात्‌ ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिसके कि दौसाग अपराध चालू रहता है हु, ००० T (A हजार) तक की हो सकेगी, दण्ड़नीय होगा. : .- wo. (1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है, सहां प्रत्येक ऐसा स्पत्ति, कंपनियों. द्वाएा जो उस अपग्राध के किए जाने के सपय उस कंपनी के कारवार के संचालन के लिए उस कंपनी का भारसाधक W AT I उसके प्रति उत्तदायों था और साथ ही वह कंपनी भी, उस अपराध के दोपों समझे जाएंगे और प्दुतुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने के का पर रे . ते : R . परन्तु इस उपधास में अंतर्विष्ट कोई भी यात किसी ऐसे व्यक्ति को किसो दंड का दायीं नहीं बमाएगी यदि चह यह साधित कर देता है कि सह अपराध उसको जानकारी के थिंता किया गया था था यह कि उराने ऐसे अपराध के किए जानें का निवारण करने के लिए समस्त सप्यक्त्‌ तरपरता सती थी, ' (२) उपधारा (६) में अंतर्विप्ट किसी सात के होते हुए भो, जहां इस अधिनियग के आधीग कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है और यह साचित हो ज़ाता है कि लह अपराध कंपनी के किसी निदेशक, प्रयंगक़, राशियव था अन्य अधिकारी की सहगयि या मौचानुकूदाता से या उराकी किसी उपेश्ा के फलरवरूप किया गया माना जा सकता है, , वहां ऐसा निदेशक, प्रपंध्रक, सचिव था अन्य अधिकार गी उस अपराध सा दोषों सपझा जाएगा और रादनुसता अपने खिरुद कार्यवाही किए, जाने और दंडिंत फिये जाने का दायी होगा, इस थार के प्रयोजनों के लिए,“ ः (कक)... ''कंपनो" से अधिप्रेत हैं कोई निषमित निकाय और उसके अंप्रति कोई फर्म था व्यकितियों के आन्य संगग मी आते हैं; और ' () "निदेशक" से किशी फर्म के राबिंध में उस फर्ष का भागोदार अभिप्रेत है. इ८. (१) कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अभीन दंडनोस किसी अपराध का, आयोग द्वारा इस पिपित्त अधाएों का संज्ञा साधारणतया या विशिए्तया प्राधिकृत किए गए आयोग के किसी अधिकाऐ द्वात लिखित में किए गए, परिवाद पर ही और उनके प्रशपा संज्ञान कोगा अन्यथा महीं और प्रथम वर्ग के न्यार्िक मजिस्ट्रेट ¥ = उसरे वश्प्लि किसी न्यायालय से भिन्न w क्रोई न्यायालय ऐसे अपराध w1 यहीं कोंगा. : - e i

शाश्तियां.. और कार्यवाहियां अस्य कार वाइईपों पर प्रतिकूल प्रभाव हीं डालें पी. फीस, जुमनि और v Y = सुर्माने और प्रभारों का उपयोजग, अधिरपेपितत जुपनि या it का कोई ot v संक्ांत नहीं किया जाएगा, अधिक्तारित्ता का 'सर्जने, el =y X करने की शक्ति, विधिधप: खनाने को 'शक्क्ति, vt ANAL I QU BT 2000 | '् कं - L'a} (२) दंड प्रक्रिया रंहिंता, १९७३ (१९७४ का से, र) में अंतर्षिप्ट किसी चात के' होते हुए भी, कोई मजिस्ट्रेट, यदि उरे ऐसा करने का कारण प्रतीत हो, परिवाद फाईल क्ररने वाले आयोग के अधिकारी को वैंगक्तिक हाजिरी से अभिएुवित्त प्रदान कर्र सकेगा. ’ (3३) आयोग, fafem § sfufafan) fre o वाले कारणों रो, आयोग के द्वारा किए गए किसी आदेश के उल्लंघन से संबंधित किसी अपराध का, कार्यवाहिं यों के संस्थित किए जाने के पूर्व या पश्चात्‌ शमन कर सकेगा. डर, इस अधिनियम के उपबंधों या य या आयोग द्वास पारित किए गए आदेशों का उल्लंघन करने ब्ालें किसी व्यवित के विरुद्ध इस अधिनियम के अधीय को कार्यवाहियां और कार्रवाईचां उन कार्रवाईयों के अतिरिवत और उप पर प्रतिकूल प्रभाव डाले थिना होंगी जो भी अन्य अधिनियपमों के अधीम आरंभ को 'जाएं, अध्याय->तेरह ~ प्रकीर्ण ५०. आयोग, इस अधिनियप के अधीककसे-शोध्य सपस्त राशियां, चाहे वे अनु; “«. » «पति और प्रभारों के रूप में शोध्य हों, मध्यप्रदेश लोक धन | ध्य राशियों की बदूली) अधिनियम, इर८छ (कमाव, ; सन्‌ इ९८८) के उपबंधों के अनुसार उसी प्रकार चसूत का हकदार होगा यानो कि ऐसी राशि उस अधिनियम सें परिभाषित लोक मांप हो और शोध्य रकप को संबंधित 'सिर्वित या प्राधिकारी को सौंप देगा. प्रभार अधिरोपित्त करने बाला आयोग या स्वायालय यह निदेश दे सकेगा के वब्ययों के भुगग्ान में या 'ठस प्रयोजन के लिंए प्रयुक्त किया जाए, . प१. इस अधिनियप के अधीन जुर्पाना कि चह संपूर्ण या उसका कोई भाग कार्यवाहि "५२." ऐसे अनुज्प्तिधाती, उत्पादन करने चागी कंपनियां और अन्य जिन पर इस अधिवियम के अधीन जुसनि,' प्रभाए या शास्तियां अधिरोपित को गईं हों, टैरिफ या देगीप्रधाएँ के रूप में उन्हें प्रत्यशतः या अप्रत्यक्षत: उपभोक्ताओं को संक्रांत नहीं करेंगे, ! ५३. इस अधिवियम या उसके अधीन वित्त सियपों या विनियपों के अधीत किया गया कोई आदेश या चविनिश्चय इस अधिनियम, में यधा उपबंधित के सिवाय अप प्रिय नहीं होगा और किसी भी सिविल न्यायालय को, जिसमें तत्सपय प्रवृत्त किसी साध्यस्थप्‌ विधि के अधीन कोई न्यावात्य या अधिकरण थी सम्गिलित है, किसी ऐसे मामले के संबंध में, जिसके कि लिए इस अधिनियम के अधीन यां उसके द्वाद आयोग को सशक्त किया गया है, कोई अधिकारिता सहीं होगी. . . . | 3 ५४. यदि इस अधिनियम के उपबंधों या उसके अधीन बनाए, गए सियपों, विनियपों; स्कोस या आदेशों को प्रधार्व करने में कोई कठिनाई उद्धूग हो सो राज्य सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, इस अधिनियप के उपबंधों से संगत ऐसे उपबंध जो उसे कठिनाई को दूर करने' के लिए आवश्यक या समी चीन प्रतीत होँ, कर सये गो, ' “छत डालन के लिए हब ५५. (१) औयोग, राजपत्र में अधिसूचना ट्वारा, इस अधिनियम के अधीन अपने * विनियम बना सकेगा, | i ः _ () सिशिष्टतया तथा पूर्णणासी उपबंधों तथा इस अधिनियम में के विनिर्दिष्ट रूप से उपबंधित विषयों को च्यापकत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले मिंचा ऐसे विनियपों की मलिखित समस्त विषयों या किसी विपय के लिए उपबंध किए जा सकेंगे, अर्धात्‌:-- (के) आयोग के क्रामकाज का , जिसमें उसकी प्रशासनिक, अर्द्ध न्यायिक तथा स्यायिक शक्तियों का प्रयोग, पाध्यस्थप्‌ तथा प्रक्रिया, आयोग का सप्सिलन सुताना तथा सप्पितन आयोजित करना, समय तथा स्थान जिस पर सम्मिलिन आयोजित किया जाएगा और आयोग के कारबार का संचालन सम्मिलित हैं; ः दे

. €7 () () (@) \. T et U7 (3) () (¥) (®) (?) (1) (%) _ संदेग फीस तथा प्रभार की व 26 मध्यप्रदेश राजुगन्र, देश गाक विकक स्सफफफ्क्प्सि फरवरी 2001 दि यिरिय गणणमससणण के सचिस्, अधिकारियों तथा कर्मुनारियों के कर्सेव्प; अनुन्तस्तिपारियों को और इहा अधिनियम को धारा १६ के उधीय सूट प्राप्त व्यवित्तयों को तथा चिधुत " 3 उत्पादन, क्रय, 'परिपण, लिंतरण 'एसं प्रदाय में अंतर्प्स्त ,अन्य खुपयिततयों को समयुदेशित किए जाने बाले कृत्यों का अगधारण, ऐसी रोतति जिसमें ऐसे चृत्यों का सिर्वहन किया जाएगा और ऊर्जा प्रणाली शधा सिद्युत्‌ प्रदारा लाइनों के संबंध में अपनाई जाने चाली प्रक्रिया तथा कोड, ऐसे च्यकिरयों द्वास ऊतुपालन की जाने वाली शर्तों का तथा उससे संबंधित अन्य पागलों का उतास . ‘ ‘ परेषण, उप-पारेषण, वितरण, तथा प्रदाय के लिए अनुशपति देगे की प्रक्रिया, अमुद़्ि प्रदान करने को शर्तें और अनुजप्ति के लिए आवेदन करने चाले व्यवितियों द्वारा उपलब्ध कराई जाने बाली चिशिष्टिसां और दस्तायेजें, गामक और सामान्य शर्तें जिसके अध्यधीन रहते हुए आनुज्ञप्ति दी जाएगी, आनुजजर्ति - देवे से छूट दी जाना, अनुनियों का प्रतिसंहरण और संशोधन राधा उसका प्रभाव और उपरोक्त से संबंधित समसा विपप; अनुज्प्तिंधारी ¥ i, wiirr, अधिकार और माध्यताएं; fae के उत्पादन, गरेफण, सिगाण, प्रदौय में अंतर्पस्ते तथा उसका उपयोग करने साले :व्यविद्यों द्वात प्रस्तुत की जाने याली ग जानकारों, लेखाओं तथा सहियों का संग्रहण, बह प्ररूप तथा यह रीति जिसमें उन्हें प्रस्तुत किया जाना हैं और उन्हें प्रचर्तित करवाना तथा गेस करने के लिए, उन्हें बाध्य करना; ' लिए अवधारण का ढंप तथा रीनधि, ऐसा अस्रधारण तथा ) विषय; अनुज्ञशिधारी के राजस्तों, टैरिफ नियतेत वियतत करने में चिचार किए जाने ऊर्जा क्रय तथा उगापन प्रक्रिया; अतुज्प्तिभारियों द्वारा जतुसरण की जाने । - सम्य सलाहकार सपिति को गठन; T विंधुत्‌ के उत्पादग, पारेषण, उप i, शितरण, प्रद्याय में अंतर्गरत तथा उपयोग करने वाले ख्यकितियों के लिए आना संहिता तथा गर कार्य का स्तर; इस अधिनियग के उपसंधों के अर के लिए अधिदेगित फिए जाने वाले जुपनि तथा प्रभार की रकण जिसगें जुर्पत और प्रभार अधिशेषित करने तथां उसका संप्रहण करने का दंग और AR साम्मित्तित्त है; दर चह प्ररूष तथा रोति सिहित करना, शिएः गम ऊर्जा प्रणाली तथा विधुत्‌' प्रदाय आशगोंग के लेखे रखे जाएंगे; ' { : पका प्रचाहान तथा अनुसक्षण i करता; ' राज्य में सिधुतू उछोग के लिए या-उकि संबंध में उपयोग में लाई गई संपत्तियों, आस्तियों तथा संपत्तियों में हित को विनियमित करना; और ः कोई अन्य विषय, जिसका इस अधिनियम के उपयंधों के अधीन चिनियगों द्वारा घिहित किया जाना अपेशित है. . ।

198 (38) "I"Lfihnm, दिपांकि 20 फरवरी 2001 ः ः । 1श | 3 ८ ’ «यान» वार] नियय बनाने को YE. (1) राज्य सरकार, अधसूचमा दवाए, इस अधिनियम के छा द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यास्तित काने के लिए नियम ० शक्ति, बना सकेगी. . ! (3) सिशिष्टटाया और पूर्वपामी शबितत तथा इस अधिनियम में विनिर्दिष्टि रूप में उपबंधिन्न विषयों को ल्यापकता पर प्रचिकूल प्रभाव -डाते चिता, ऐसे ,पियमों में निप्तलिखित सपस्त विषयों या किसो सिषय के लिए उपबंध किए जा ' सकेंगे, अर्थाततु:-- ' (%) w0 अधिपियम के अधीन कृत्यों के निर्वहन के लिए चयस समिति द्वास अपनाई जाने वालों प्रक्रिया; (ख) सदस्यों को देय लेतन तथा भत्ते और सदस्यों को लागू सेला के अन्य विबंधन तथा शर्तें; और (ग)... आनारण स्कोम तैयार करना तथा उसका कार्यान्वयन करना त्तधा बोर्ड का पुनर्गठन प्रभावी बनाने के रित्तयों Iy i कं - लिए anfrrd, दत्त तथा कार्पिकों का स्थानास्तरण; (3) इस सारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम इसके चनाए जाने के पश्चातू सधाशवयशोपध्र, राज्य विधान सभा के पटल पर रखा S, o . आयोग के सदस्य ५७. (1) आयोग के अध्यक्ष (चेयरपर्सन), सदस्यों, अधिकारियों त्ृथा अप्य कर्मचारि"” को जब ये इस अधिनियप लोकसेलक कर्मचारीवनद के किसी उपबंघ के अनुसरण में कार्य कर रहे हों या कार्य करने के लिए तात्थ 5: हों, *...तीय दंड संहिता, व सोकसैवक होंगे, (१८६० का सं, इप) की धारा २१ के अर्थ के अंतर्गत लोक सेसक समझा जा v ¢ (२) इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए कित्हों मियपों या विनियमों या कक पद नली आदेश के अधीन सद्गावपूर्वक की गई या किए जाने के लिए आशयितत किसी बात के संबंध में आयोग के, विरुद्ध या आयोग के सदस्यों या आयोग के कर्मचारिवृन्द या प्रतिनिधियों के विरुद्ध कोई वाद था. सिधिक कार्यवाही नहीं होपी, आयोग के समक्ष की ५८. आयोग के संपक्ष समस्त फार्यचाहियां पारतीय दंड संहिता, १८६०. (१८६० का रा. बंप) की पारा १९३, जाने बाली २१९ तथा २२८ के अर्ध के अंपर्गत प्यायिक कार्यवाहियां समझी जाएंगी और आयोग को दंड प्रक्रिया संहिता, १९७३ “कार्यवाहियां न्यायिक (१९७४ का सं. र) को धारा हर तथा अध्याय छब्बंस के प्रयोजगों के लिए एक सिविल स्यायालय समझा जाएगा. कार्यवाहियां होंगी, अध्याय--चौदह विद्यमान प विधान पर प्रभाव तथा व्यावृत्तियां भारतीय थिध्ुतू ५९. (१) धारा ६६ में यथा उपबंधित के सिधाय, इस अधिनियम के उपबंध, भारतीय विश्व अधिनियम, १९६० अधिधियम, ९१०. (१९१० का सं, ९) या चिद्युतु (प्रदाय) अर्धिनिगप, १९४८ (१९४८ का सं. पद) के ,उपसंधों, से अरांगत या प्रत्तिकूल आर सिदयुनू ( प्रदाय oy हुए भी अभिषावी होंगे. अधिनियप, ९४८ . पर इस sifuftray | का प्रभाव, (२) उपघास (१) के उपबंधों के पर धीन रहते हुए, धास्वीय विध्युवू अधिनियग, १९१० (१९१० का सं, ९) और विद्युत ( प्रदाय ) अधिनियम, ९४८ (१९४८ का सें. ४) में के समस्त विषय जिनसे मंडल की संबंध रहा है या मंडल कार्रवाई करता रहा है निप्तलिखिच के डीध्यधीन रहते हुए होंगे,-- : - i " जिप्मे = (F) wrm P कृत्य आतग के जिप्मे होंगे; (@) पंडल ऐएंसे कृत्यों का जिस्म! | कहाँ लेगा जिनका निर्वहन इस अधिनियप *। ८. iy बनाएं गए किन्हीं पिथपों के उफयंधों अनुसार आयोग द्वारा किया जाना हैं; . 1 झन पद, AT

A P P e e n P नर eapate AR 1, B । के अपना का # ७४ ला «11 ४. . il N Y (m) 0 ST 7 धारा २३ के अनुसार सुसीत अंतरण स्कीम को प्रचर्तन में लाने के लिए अधिसूचनाओं कें, जारी होने पर, मंडल ऐसे कृस्यों [जग नहीं लेगा जो इस अधियूचना के अधीन क्रंपनियों “या निगणित निकाय था व्यवितियों या प्राधिकारी को समतुदेशित्त हों. पु 3) इस धारा को उपधास (१) तथा (२) तथा धारा १२ के उपसंधों के अध्यधीन रहते हुए, भारतीय चिश्वुते अधिनियय, हुएइ० (१९१० का सं, ९) और चिद्युत्ू ( प्रदाय तक कि राज्य का संबंध है इसके अधी्ष अंतर्निष्ट उपबंधों ने (एक) िधिनियय, रह (१९४८ का सं, ५४) के उपनंघ जाहां अध्यधीन रहते हुए पढ़े जाएंगे. भांस्तीय विद्युतू अधिनियप, १९९८) (६९१९० का सं. ९) का सं. ९) में मंडल के प्रति समस्त निर्देशों को, जहां या इस अधितियग के अधीन विरचित फिर्हों नियमों में यधा उपबंधित आयोग या रन पी i निकाय या व्यनित्र या प्राधिकारी के प्रति निर्देश और जहां कहाँ भी उनका संग्र॑थ नौतिंगत विपयों से है, सज्य सरकार के प्रति निर्देश के रूप में पढ़े जाएंगे : काल .।. « , TGRS fifln" अधिनियप, १९१० (१९१ तक कि राज्य का संबंध है, इस अधि परस्सु संडल उन नियामक कृत्यों से भिन्न ऐसे कृत्यों का प्रयोग करता रहेगा जिन्हें संडल ढ्ारा किया जाता (दो) (तीन) (=) (&) (ग) (चार) रहा है था अन्यधा जिन्हें कि राज्य सदकार आयोगष के नियामक नियंत्रण, शक्तियों तथा कृत्यों के डध्यधीन रहते हुए विगिर्दिप्ट कंरे . भारतीय सिंधुतू अधिमिगप, इुर१० (१९१० का से, ९) की धारा ३ से ११, र८, कद (२), &~ ५० दा ५६ में उपबंधित लिपयों के संभंध में उस सीसा तक जहां तक इद अधिनियम में विंनिर्दिष्ट उपबंध किए गए हैं, भारतीय विद्युत अधिमियग, १९१० के उपबंध राज्य में लागू नहीं होंगे भारतीय विद्युत अधिनियग, १९१० (१९१० का सं, ९) को अन्य समस्त धाराओं के उपबंध निम्नलिखित के सिवाय लागू होंगे:-- अतुज्तति"', ' अनुज्प्तिधारी !, ही प्रधारक'' का वहीं अर्थ होगा, जो इस अधिशियम में परिभाषित किया गया है और अनुज्ञप्तियों के संनंध में यह अर्थ सगाया जाएगा कि वे 3o अधिमियप के अधोन जारी की गई हैं; भारतीय विशुतु अधिनियप, १९१० (१९१० का सं. ९) के उपबंधों में विद्युत ( प्रदास) अधिनियप, इ९४८ (१९५८ का सं. 'पड) की धाराओं का संदर्भ जहां कहीं भी लागू हो, इस अधिनियम के सत्स्थानी उपबंधों के संदर्भ के रूप में माना जाएगा; इन उपबंधों में साध्यस्थम्‌ का संदर्भ शिवाय जहां यह केन्द्रोय चिद्युततू प्रापिकरण के रांजंध में हो, इस अधिनियम को धारा ३९ के अधीन कार्यबाहियों के संदर्भ के रूप में यागा जाए और भारतीय बिद्युततुछाथिनतियप, १९६० (१९१० का सं. ९) के अधीन चिहित साध्यस्थग प्रक्रिया लागू नहीं होगी. भारतीय विद्युत अधिमियय, ए९६० (१९१० का सं. ९) की अनुसूसी, इस अधिनियम के उपनंधों के प्रति निर्देश के संबंध में ही साथू होगी जिशां अगुयूचिगों का लापू होना सिचिर्दिष्ट * है, अप्यथा नहीं.

चिद्दुतू नियामक आयोग ऊअधिनियप, e ( केप्दीय अधिधिचम, ९९८ सका सं, १४ ) पा इस अधिविदयम का प्रयास, i1 i N चिद्युतू (प्रदाय) अधिधियम, १९४८ (१९४८ का रा. पे . (पांच). विद्युत (प्रदाय) अधिषियग, एर४८ में मंडल के प्रत्ति सपस्त निर्देश जहां तक कि राज्य का संबंध है, इस अधिनियम या. इस अधिनियम के अधीन लिरचित किन्हों" पिय्ों में यधाउपमंधित आयोग या कंपनी या निगधिप्त पिकाय या व्यक्ति या प्राधिकारी के प्रप्ति और जड़ां कहीं भी उपका संबंध सामान्य नौतिंगत विषयों से है, सम्य सरकार के प्रति निर्देश के रूप में एढ़े जाएंगे: परनु इस अधिनियम के अध्याय! छह के अधीन जब तक मंडल के समस्त कृत्य पुरर्गठित॑ नहीं हो जाते हैं तब तक मंडल मय कृत्यों से भिन्न ऐसे कृत्यों का जिन्हें मंडल ट्वारा किया जा रहा है या अन्यथा जिन्हें राज्य सरकार दिंष्ट करे, तथापि आयोग नियापक नियंत्रण, उसको शवित तथा कृत्यों के अध्यधीन रहते हुए प्रयाध करता रहेगा, | .o , (छह). चिदयुतु (प्रदाय) अधिनिपिय, १९४८ (१९४८ का सं. ५४) की धारा ५ से W, १९, रण, र३ से रण, 30, ४० से ४५, डर से ५४, ५६ से &%, W3 और ७५ से ८३ में उपबंधित विषयों के संबंध यें उस सीमा तक ४ | कि इस अधिनियम में विनिर्दिष्ट उपबंध किए गए हैं, विद्युत ( प्रदाय अधिनियम, इरह८ (१९1८ का सं. पड) के उपबंध राज्य में लागू नहीं होंगे. लागू « होंगे:-- (%) W ", "31"' प़िधारी '', ** अनुज्तिघधारक ', का वहां अर्थ होगा, जो इस -अधिनियप में परिभाषित किया गा है और अतुज्ियों के संबंध में यह अर्ध लगाया जाएगा कि ने इस अधिनियम के अधीन ज़िएी की गई हैं; , ! (सात) विद्युत (प्रदाय) अधिर्फियी, १९४८ की अन्य समस्त धाराओं के उपवंध निम्नलिखित के सिंचाय (@) P (प्रदाप) अधिनिम, १९४८ (१९४८ का सं, ५४) के उपबंधों में भारतीय सिधुदु अधिनियम, १९१० (१९१० का से !९) की धाराओं का संदर्भ जहां कहाँ भी लागू हो, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों & S भ के रूप में माना जाएगा; (M इन उपबंधों में मा का संदर्भ सिवाय जहां यह केन्द्रीय विधुत्‌ प्राधिकरण के संबंध पें हो, इस अधिनियम की पाल ९ के अधीन कार्यन्राहियों के संदर्भ के रूप में लिया जाएगा और e ( प्रदाय ? अधिनियम, (१९४८ का से. प४) के अधीन विहित की गई माध्यस्थपु प्रक्रिया लागू नहीँ होगी, (आठ). विदुदू (प्रदाय) ऊअधिनियप, १९४८ (१९४८ का सं. ५४) की अनुसूची इस अधिनियम में किए गए उपबंधों के संदर्भ में ही तथा इस अधिपियप में उगचंधित उपांतरणों सहित ही लागू होंगी, धण, (६) इस अधिभियग के प्रारंभ होने पर, केन्द्रीय अधिनियम को धारा १७ के अधीन गठित राज्य विद्युत पियामक आयोग इस il के उपबंधों के अनुसार समस्त शक्तियों का प्रयोग और समस्त कृत्यों का निर्वहव करेगा न कि केन्द्रीय अधिनियप के आंपर्गत, ं (२) उपधास (११ में यथा उपबंधित के सिवाय, केन्द्रीय अधिनियम के उपयबंध जहां तक उनका संबंध राज्य आयोग 1 से है, राज्य में लागू नहीं होंगे. | . ' I - . ’ धंश्. (१) इस अधिनियप में .अंतर्चिए किसी वात के होते हुए थी, भारसीय चिंदयुतू 'अधिनियप, इ९६० (१९१० को सं, ९) या चिद्युतु (प्रदायप) अधिनियम, १९४८ (१९४८ का से, ५४) या उसके अधीन विरसित्त नियमों के अधीन Y + -

R R T T LT —— अ 29 ____________..—mwt————————————‘——fiq“ राजपस, दिंगांक 20 फरवरी 2001 198 (41) केम्द्रीय आयोग, क्षेत्रीय चिद्युत्‌ मंडल, केप्द्रीय विध्यु्‌ मकर केन्द्रीय सरकार तथा ननललनलल्टल्ोलयायन ये पा पक मीन सरकार के अधीन प्राधिकिण सरकार के अधीन प्राधिकरण की शव्तियां, अधिकार त्तृथा कृत्य अप्रभावित एहेंगे तथा पचल बने रहेंगे, _ - F (२) इस अधिनियप पें अंतर्विष्ट कोई भी बात सिद्युत्‌ू के अंतेरज्यिय परेसण के संसंध में पावरप्रिड कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड या अन्य निकायों या अनुक्प्तिधारियों पर या केन्द्रीय सरकार के स्वामित्व यथा उसके द्वारा नियंजिंत उत्पादन करने वालो कंगतियों था केन्द्रीय सरकार के स्वापित्व के उपक्रमों पर लापू नहीं होगी. (३) इस अधिधियम के प्रांभ होने के पूर्व, भारीय विधुग्‌ अधिपियम, १९६० (६९९० का सं. ९) या विद्युत ( प्रदाय ) अधिनियग, १९४८ (१९४८ का सं. पद) के अधोष मंडल सहित किसी ल्यवित या प्राधिकारी द्वारा कौ गई समस्त कार्रवाईयां इस अधिसिंयम द्वारा उचत अधिनियमों में किए. गए उपांपरणों के होते हुए भी बिधिमास्य तथा प्रचर्तनोय होंगी. भोपाल, दिचांक 20 फ़रवरी 2001 क्र, 1689-इक्कौस-अ( प्रा. .-“ भारत के संधि धाग के उनुच्छेद 348 के खण्ड (3) के अनुसरण में, मध्यप्रदेश विद्युचू शुभाए डधिनियप, 2000 (क्रमांक 4 सन्‌ 2001) का अंग्रेजी अनुवाद सम्यपाल के प्राधिकार से एतदद्राण प्रकाशित किया जाता है. मध्यप्रदेश के राज्गपाल के नाम से गधा ऊादेशानुसार, ' आए, के. सिंटोके, अतिरिक्त समिव, A

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