जन् म और मृत् य ुरिजस् टर्ीकरण अिधिनयम, 1969
(1969 का अिधिनयम सखं् याकं 18)
[31 मई, 1969]
जन् म और मतृ् य ुके रिजस् टर्ीकरण के िविनयमन और तत् सबं िवषय का
उपबन् ध करन ेके िलए
अिधिनयम
भारत गणराज् य के बीसव वषर् म संसद ् ारा िनम् निलिखत रूप म यह अिधिनयिमत हो :—
अध् याय 1
पर्ारिम्भक
1. संिक्षप् त नाम, िवस् तार और पर्ारम् भ—(1) यह अिधिनयम जन् म और मृत् यु रिजस् टर्ीकरण अिधिनयम, 1969 कहा जा सकेगा ।
(2) इसका िवस् तार सम् पूणर् भारत पर ह ै।
(3) यह िकसी राज् य म उस तारीख1 को पर्वृ होगा िजसे केन् दर्ीय सरकार, शासकीय राजपतर् म अिधसूचना ारा िनयत करे :
परन् तु िकसी राज् य के िविभन् न भाग के िलए िविभन् न तारीख िनयत की जा सकगी ।
2. पिरभाषाएं और िनवर्चन—(1) इस अिधिनयम म, जब तक िक संदभर् से अन् यथा अपेिक्षत न हो,—
(क) “जन् म” से जीिवत-जन् म या मतृ-जन् म अिभपेर्त ह ै;
(ख) “मृत् यु” से जीिवत-जन् म हो जाने के पश् चात् िकसी भी समय जीवन के सब लक्षण का स् थायी तौर पर िवलोपन
अिभपेर्त ह ै;
(ग) “भर्ूण-मृत् यु” से गभार्धान के उत् पाद का, गभर् चाह े िजतने समय का हो, अपनी माता से पूणर् िनष् कासन या
िनष् कषर्ण से पूवर् जीवन के सब लक्षण का अभाव हो जाना अिभपेर्त ह ै;
(घ) “जीिवत-जन् म” से गभार्धान के ऐसे उत् पाद का, गभर् चाह ेिजतने समय का हो, अपनी माता से पूणर् िनष् कासन
या िनष् कषर्ण अिभपेर्त ह,ै जो ऐसे िनष् कासन या िनष् कषर्ण के पश् चात् श् वास लतेा ह ैया जीवन का कोई अन् य लक्षण दिशत
करता ह ैऔर ऐसे जन् म वाला पर्त् येक उत् पाद जीिवत-जात समझा जाता ह ै;
1 अिधिनयम िनम् निलिखत के्षतर् म पर्वृ होगा :—
1-5-1974 से संपूणर् िमजोरम संघ राज् यके्षतर् म : दिेखए अिधसूचना सं० सा०का०िन० 379, तारीख 22-3-1974 ।
िजला उधमपुर के रामनगर पुिलस स् टेशन की अिधकािरता की सीमा म समािवष् ट के्षतर् ।
िजला बारामुला के कुपवाड़ा पुिलस स् टेशन की अिधकािरता की सीमा म समािवष् ट के्षतर् ।
जम् मू और शर्ीनगर की नगरपािलका सीमा म समािवष् ट के्षतर् ।
अनंतनाग, कठुआ और लेह की शहरी के्षतर् सिमितय की सीमा म समािवष् ट क्षेतर् ।
1-1-1971 से संपूणर् गोवा, दमण और दीव संघ राज् यके्षतर् म : दिेखए अिधसूचना सं० सा०का०िन० 1927, तारीख 21-11-1970, भारत का राजपतर्, भाग 2,
अनुभाग 3 (i), पृ० 4276 ।
1-1-1971 से संपूणर् मिणपुर संघ राज् यके्षतर् म : दिेखए अिधसूचना सं० सा०का०िन० 2027, तारीख 24-11-1970, भारत का राजपतर्, भाग 2, अनुभाग 3(i),
पृ० 4623 ।
1-4-1971 से संपूणर् अंडमान और िनकोबार ीप समूह संघ राज् यके्षतर् म : दिेखए अिधसूचना सं० सा०का०िन० 106, तारीख 16-1-1971, भारत का राजपतर्, भाग 2,
अनुभाग 3 (i), पृ० 284 ।
1-10-1971 से संपूणर् नागालैण् ड राज् य म : दिेखए अिधसूचना सं० सा०का०िन० 1324, तारीख 30-8-1971, भारत का राजपतर्, भाग 2, अनुभाग 3 (i),
तारीख 11-9-1971, पृ० 3662 ।
1-7-1972 से अरुणाचल पर्दशे संघ राज् यक्षेतर् म : देिखए अिधसूचना सं० सा०का०िन० 552, तारीख 11-4-1972, भारत का राजपतर्, भाग 2, अनुभाग 3 (i),
पृ० 1294 ।
1-4-1972 से संपूणर् ितर्पुरा राज् य म : दिेखए अिधसूचना सं० सा०का०िन० 202 (अ०), तारीख 17-3-1972, भारत का राजपतर्, असाधारण, भाग 2, अनुभाग 3 (i),
पृ० 505 ।
1-12-1972 से पिश् चमी बंगाल राज् य की बराकपुर, लाबंग और जलपहाड़ छाविनय की सीमा म समािवष् ट के्षतर् म : दिेखए अिधसूचना सं० सा०का०िन० 463
(अ०), तारीख 21-11-1972, भारत का राजपतर्, असाधारण, भाग 2, अनुभाग 3 (i), पृ० 21-27 ।
2
(ङ) “िविहत” से इस अिधिनयम के अधीन बनाए गए िनयम ारा िविहत अिभपर्ेत ह ै;
(च) िकसी संघ राज् यके्षतर् के संबंध म “राज् य सरकार” से उसका पर्शासक अिभपेर्त ह ै;
(छ) “मृत-जन् म” से ऐसी भर्ूण-मृत् यु अिभपेर्त ह ैजहां गभार्धान का उत् पाद कम से कम िविहत गभार्विध पर्ाप् त कर
चुका ह ै।
(2) इस अिधिनयम म िकसी ऐसी िविध के पर्ित, जो िकसी क्षेतर् म पर्वृ नह ह,ै िनदश का उस के्षतर् के संबंध म यह अथर्
लगाया जाएगा िक वह उस क्षेतर् म पर्वृ तत् स् थानी िविध के पर्ित, यिद कोई हो, िनदश ह ै।
अध् याय 2
रिजस् टर्ीकरण स् थापन
3. भारत का महारिजस् टर्ार—(1) केन् दर्ीय सरकार, शासकीय राजपतर् म अिधसूचना ारा, िकसी व् यिक् त को भारत के
महारिजस् टर्ार के रूप म िनयुक् त कर सकेगी ।
(2) केन् दर्ीय सरकार, ऐसे अन् य अिधकारी भी, ऐसे पदनाम से, जैसे वह ठीक समझ,े महारिजस् टर्ार के इस अिधिनयम के
अधीन ऐसे कृत् य के, िजनका िनवर्हन करने के िलए वह उन् ह समय-समय पर पर्ािधकृत करे, महारिजस् टर्ार के अधीक्षण और िनदशेन के
अधीन िनवर्हन करने के पर्योजन के िलए िनयुक् त कर सकेगी ।
(3) महारिजस् टर्ार उन राज् यक्षतर् म, िजन पर इस अिधिनयम का िवस् तार ह,ै जन् म और मृत् यु के रिजस् टर्ीकरण के बारे म
साधारण िनदशे जारी कर सकेगा और जन् म और मृत् यु के रिजस् टर्ीकरण के िवषय के मुख् य रिजस् टर्ार के िकर्याकलाप के समन् वय और
एकीकरण के िलए कदम उठाएगा और उक् त राज् यके्षतर् म इस अिधिनयम की कायार्न् वयन िवषयक वािषक िरपोटर् केन् दर्ीय सरकार को
पर्स् तुत करेगा ।
4. मखु् य रिजस् टर्ार—(1) राज् य सरकार, शासकीय राजपतर् म अिधसूचना ारा, िकसी राज् य के िलए एक मुख् य रिजस् टर्ार
िनयुक् त कर सकेगी ।
(2) राज् य सरकार, ऐसे अन् य अिधकारी भी, ऐसे पदनाम स,े जैसे वह ठीक समझे, मुख् य रिजस् टर्ार के ऐसे कृत् य का िजनका
िनवर्हन करन े के िलए वह उन् ह समय-समय पर पर्ािधकृत करे, मखु् य रिजस् टर्ार के अधीक्षण और िनदशेन के अधीन िनवर्हन करने के
पर्योजन के िलए, िनयुक् त कर सकेगी ।
(3) राज् य सरकार ारा िदए गए िनदशे के, यिद कोई ह , अध् यधीन रहते हुए मुख् य रिजस् टर्ार िकसी राज् य म इस अिधिनयम
के उपबन् ध और तद ्धीन बनाए गए िनयम और िकए गए आदशे के िनष् पादन के िलए मुख् य कायर्पालक पर्ािधकारी होगा ।
(4) मखु् य रिजस् टर्ार राज् य म रिजस् टर्ीकरण के कायर् के समन् वय, एकीकरण और पयर्वके्षण के िलए समिुचत अनुदशे िनकाल कर
या अन् यथा रिजस् टर्ीकरण की दक्ष प ित सुिनिश् चत करने के िलए कदम उठाएगा तथा उस राज् य म इस अिधिनयम के कायार्न् वयन के
बारे म एक िरपोटर्, ऐसी रीित से और ऐसे अन् तराल पर, िजन् ह िविहत िकया जाए, धारा 19 की उपधारा (2) म िनिदष् ट सांिख् यकीय
िरपोटर् के साथ तैयार करेगा और राज् य सरकार को पर्स् तुत करेगा ।
5. रिजस् टर्ीकरण खडं—राज् य सरकार, शासकीय राजपतर् म अिधसूचना ारा, राज् य के भीतर के राज् यके्षतर् को ऐसे
रिजस् टर्ीकरण खण् ड म, िजन् ह वह ठीक समझे, िवभक् त कर सकेगी और िविभन् न रिजस् टर्ीकरण खण् ड के िलए िविभन् न िनयम िविहत
कर सकेगी ।
6. िजला रिजस् टर्ार—(1) राज् य सरकार, पर्त् येक राजस् व िजले के िलए एक िजला रिजस् टर्ार और उतने अितिरक् त िजला
रिजस् टर्ार िनयुक् त कर सकेगी िजतने वह ठीक समझे और जो िजला रिजस् टर्ार के साधारण िनयंतर्ण और िनदशेन के अध् यधीन रहते हुए,
िजला रिजस् टर्ार के ऐसे कृत् य का िनवर्हन करगे िजनका िनवर्हन करने के िलए िजला रिजस् टर्ार उन् ह समय-समय पर पर्ािधकृत करे ।
(2) मखु् य रिजस् टर्ार के िनदशेन के अध् यधीन रहते हुए, िजला रिजस् टर्ार िजले म के जन् म और मृत् यु के रिजस् टर्ीकरण का
अधीक्षण करेगा तथा इस अिधिनयम के उपबन् ध और मुख् य रिजस् टर्ार ारा इस अिधिनयम के पर्योजन के िलए समय-समय पर िनकाले
गए आदशे का िनष् पादन िजले म करने के िलए उ रदायी होगा ।
7. रिजस् टर्ार—(1) राज् य सरकार नगरपािलका, पंचायत या अन् य स् थानीय पर्ािधकारी की अिधकािरता के भीतर का क्षेतर्
समािवष् ट करन ेवाले पर्त् येक स् थानीय क्षेतर् के िलए या िकसी अन् य के्षतर् के िलए या उनम से दो या अिधक के समुच् चय के िलए एक
रिजस् टर्ार िनयुक् त कर सकेगी :
परन् तु राज् य सरकार िकसी नगरपािलका, पंचायत या अन् य स् थानीय पर्ािधकारी की दशा म उसके िकसी अिधकारी या, अन् य
कमर्चारी को रिजस् टर्ार के रूप म िनयुक् त कर सकेगी ।
(2) पर्त् येक रिजस् टर्ार इस पर्योजन के िलए रखे गए रिजस् टर म धारा 8 या धारा 9 के अधीन उसे दी गई इि ला, फीस या
ईनाम के िबना दजर् करेगा तथा अपनी अिधकािरता के भीतर होने वाले पर्त् येक जन् म और पर्त् येक मृत् यु के िवषय म स् वयं जानकारी पर्ाप् त
3
करने के िलए पूरी सावधानी से कदम उठाएगा तथा रिजस् टर्ीकरण के िलए अपेिक्षत िविशिष् टय के अिभिनश् चयन और रिजस् टर्ीकरण के
िलए भी कदम उठाएगा ।
(3) पर्त् येक रिजस् टर्ार का कायार्लय उस स् थानीय क्षेतर् म होगा िजसके िलए वह िनयुक् त िकया गया हो ।
(4) पर्त् येक रिजस् टर्ार जन् म और मृत् यु के रिजस् टर्ीकरण के पर्योजन के िलए अपने कायार्लय म ऐसे िदन और ऐसे समय पर,
िजनका मुख् य रिजस् टर्ार िनदशे द,े हािजर रहगेा और रिजस् टर्ार के कायार्लय के बाहरी ार पर या उसके पास के िकसी सहजदशृ् य स् थान
पर एक बोडर् लगवाएगा िजस पर उसका नाम तथा िजस स् थानीय क्षेतर् के िलए वह िनयुक् त हो उसका जन् म और मृत् यु का रिजस् टर्ार तथा
उसकी हािजरी के िदन और घंटे स् थानीय भाषा म िलखे ह गे ।
(5) मुख् य रिजस् टर्ार के पूवर् अनुमोदन से रिजस् टर्ार अपनी अिधकािरता के िविनिदष् ट के्षतर् के सम् बन् ध म उप-रिजस् टर्ार िनयुक् त
कर सकेगा और उन् ह अपनी कोई या सभी शिक् तयां और कतर्व् य स प सकेगा ।
अध् याय 3
जन् म और मतृ् य ुका रिजस् टर्ीकरण
8. जन् म और मतृ् य ुका रिजस् टर्ीकरण करान ेके िलए अपिेक्षत व् यिक् त—(1) नीचे िविनिदष् ट व् यिक् तय का यह कतर्व् य होगा िक
वे धारा 16 की उपधारा (1) के अधीन राज् य सरकार ारा िविहत पर्रूप म पर्िवष् ट िकए जाने के िलए अपेिक्षत िविभन् न िविशिष् टय की
इि ला अपने सव म ज्ञान और िवश् वास के अनुसार, ऐसे समय के भीतर, जो िविहत िकया जाए, मौिखक या िलिखत रूप म रिजस् टर्ार
को द या िदलवाएं,—
(क) खण् ड (ख) से (ङ) तक म िनिदष् ट स् थान से िभन् न िकसी घर म, चाह ेवह िनवासीय हो या अिनवासीय, हुए जन् म
और मृत् यु की बाबत, उस घर का ऐसा मुिखया, या यिद उस घर म एक से अिधक गृहिस् थयां िनवास करती ह तो उस गृहस् थी
का ऐसा मुिखया, जो उस घर या गृहस् थी ारा मान् य मुिखया हो और यिद िकसी ऐसी कालाविध के दौरान, िजसम जन् म या
मृत् यु की िरपोटर् की जानी हो, िकसी समय ऐसा व् यिक् त घर म उपिस् थत न हो तो मुिखया का वह िनकटतम संबधंी जो घर म
उपिस् थत हो और ऐसे िकसी व् यिक् त की अनुपिस् थित म उक् त कालाविध के दौरान उसम उपिस् थत सबसे बड़ा वयस् थ पुरुष ;
(ख) िकसी अस् पताल, स् वास् थ् य केन् दर्, पर्सूित या पिरचयार् गृह या वैसी ही िकसी संस् था म जन् म या मृत् यु की बाबत,
वहां का भारसाधक िचिकत् सक अिधकारी या उसके ारा इस िनिम पर्ािधकृत कोई व् यिक् त ;
(ग) जले म जन् म या मृत् यु की बाबत, जेल का भारसाधक जेलर ;
(घ) िकसी चावड़ी, छतर्, होस् टल, धमर्शाला, भोजनालय, वासा, पांथशाला बैरक, ताड़ीखाना या लोक अिभगम
स् थान म जन् म या मृत् यु की बाबत, वहां का भारसाधक व् यिक् त ;
(ङ) लोक स् थान म अिभत् यक् त पाए गए िकसी नवजात िशशु या शव की बाबत, गर्ाम की दशा म गर्ामणी या गर्ाम
का अन् य तत् स् थानी अिधकारी और अन् यतर् स् थानीय पुिलस थाने का भारसाधक आिफसर :
परन् तु कोई व् यिक् त जो ऐसे िशशु या शव को पाता ह ैया िजसके भारसाधन म ऐसा िशशु या शव रखा जाए, वह उस
तथ् य को उस गर्ामणी या पूव क् त अिधकािरय को सूिचत करेगा ;
(च) िकसी अन् य स् थान म, ऐसा व् यिक् त जो िविहत िकया जाए ।
(2) उपधारा (1) म िकसी बात के होते हुए भी, राज् य सरकार िकसी रिजस् टर्ीकरण खण् ड म िव मान दशा को ध् यान म
रखते हुए, आदशे ारा, यह अपेिक्षत कर सकेगी िक ऐसी कालाविध के िलए, जो आदशे म िविनिदष् ट की जाए, उपधारा (1) के खण् ड
(क) म िनिदष् ट घर म जन् म और मृत् यु के सम् बन् ध म इि ला उस खण् ड म िविनिदष् ट व् यिक् तय के बजाय वह व् यिक् त दगेा जो राज् य
सरकार ारा पदनाम से इस िनिम िविनिदष् ट िकया गया हो ।
9. बागान म जन् म और मतृ् य ु के सम् बन् ध म िवशषे उपबन् ध—िकसी बागान म जन् म और मृत् यु की दशा म इस बागान का
अधीक्षक धारा 8 म िनिदष् ट इि ला रिजस् टर्ार को दगेा या िदलवाएगा :
परन् तु धारा 8 की उपधारा (1) के खण् ड (क) से (च) तक म िनिदष् ट व् यिक् त उस बागान के अधीक्षक को आवश् यक
िविशिष् टयां दगे ।
स् पष् टीकरण—इस धारा म “बागान” पद से चार हकै् टर से अन् यून िवस् तार की ऐसी भूिम अिभपेर्त ह ैजो चाय, काफी, काली
िमचर्, रबड़, इलायची, िसनकोना या ऐसे अन् य उत् पाद को, जो राज् य सरकार, शासकीय राजपतर् म अिधसूचना ारा िविनिदष् ट करे,
उपजाने के िलए तैयार की जा रही ह ैया िजसम ऐसी उपज वस् तुत: होती ह ैतथा “बागान का अधीक्षक” पद से वह व् यिक् त अिभपेर्त ह ै
जो बागान के शर्िमक या बागान के कायर् का भार या अधीक्षण रखता हो, चाह ेवह पर्बन् धक, अधीक्षक या िकसी अन् य नाम से पुकार
जाता हो ।
10. जन् म और मतृ् यु की सचूना दने ेऔर मतृ् य ुके कारण को पर्मािणत करने का कुछ व् यिक् तय का कतर्व् य—(1) (i) जन् म या
मृत् यु के समय उपिस् थत दाई या िकसी अन् य िचिकत् सीय या स् वास् थ् य पिरचारक का,
4
(ii) शव के व् ययन के िलए अलग कर िदए गए िकसी स् थान के पर्बन् धक या स् वामी या ऐसे स् थान पर उपिस् थत रहने के िलए
स् थानीय पर्ािधकारी ारा अपेिक्षत िकसी व् यिक् त का, अथवा
(iii) िकसी अन् य व् यिक् त का, िजसे राज् य सरकार उसके पदनाम से इस िनिम िविनिदष् ट करे,
यह कतर्व् य होगा िक वह पर्त् येक ऐसे जन् म या मृत् यु या दोन की, िजसम उसने पिरचयार् की हो या वह उपिस् थत था, या जो ऐसे के्षतर् म,
जैसा िविहत िकया जाए, हुई ह,ै सूचना रिजस् टर्ार को इतने समय के भीतर और ऐसी रीित से द ेिजसे िविहत िकया जाए ।
(2) िकसी क्षेतर् म इस िनिम पर्ाप् य सुिवधा को ध् यान म रखते हुए, राज् य सरकार यह अपेक्षा कर सकेगी िक मृत् यु के कारण
का पर्माणपतर्, ऐसे व् यिक् त से और ऐसे पर्रूप से, जो िविहत िकया जाए, रिजस् टर्ार ारा अिभपर्ाप् त िकया जाएगा ।
(3) जहां राज् य सरकार ने उपधारा (2) के अधीन यह अपेक्षा की हो िक मृत् यु के कारण का पर्माणपतर् अिभपर्ाप् त िकया जाए
वहां उस व् यिक् त की मृत् यु की दशा म, जो अपनी अिन् तम बीमारी के दौरान िकसी िचिकत् सा-व् यवसायी की पिरचयार् म था, उस व् यिक् त
की मृत् यु के पश् चात् तत् काल वह िचिकत् सा-व् यवसायी कोई फीस िलए िबना ऐस ेव् यिक् त को, जो इस अिधिनयम के अधीन िकसी मृत् यु से
संब इि ला दनेे के िलए अपेिक्षत हो, मृत् यु के कारण के बारे म, अपने सव म ज्ञान और िवश् वास के अनुसार कथन करते हुए,
पर्माणपतर् दगेा, और ऐसा व् यिक् त वह पर्माणपतर् पर्ाप् त करेगा और इस अिधिनयम की अपेक्षानसुार मृत् यु से संब इि ला दतेे समय
रिजस्टर्ार को पिरद करेगा ।
11. इि ला दने े वाल े का रिजस् टर पर हस् ताक्षर करना—पर्त् येक व् यिक् त, िजसने रिजस् टर्ार को इस अिधिनयम के अधीन
अपेिक्षत कोई इि ला मौिखक रूप म दी हो, इस िनिम रखे गए रिजस् टर म अपना नाम, वणर्न और िनवास-स् थान िलखेगा तथा यिद
वह िलख नह सकता ह ैतो रिजस् टर म अपने नाम, वणर्न और िनवास-स् थान के सामने अपना अंगुष् ठ-िचह्न लगाएगा और ऐसी दशा म
वे िविशिष् टयां रिजस् टर्ार ारा िलखी जाएंगी ।
12. इि ला दने ेवाल ेको रिजस् टर्ीकरण की पर्िविष् टय के उ रण का िदया जाना—जन् म या मृत् यु का रिजस् टर्ीकरण पूणर् होते
ही, रिजस् टर्ार रिजस् टर म से उस जन् म या मृत् यु से सम् ब िविहत िविशिष् टय का अपने हस् ताक्षर सिहत उ रण उस व् यिक् त को मुफ्त
दगेा िजसने धारा 8 या धारा 9 के अधीन इि ला दी ।
13. जन् म और मतृ् य ु का िवलिम् बत रिजस् टर्ीकरण—(1) िजस जन् म या मृत् यु की इि ला तदथर् िविनिदष् ट कालाविध के अवसान के
पश् चात,् िकन् तु उसके होने के तीस िदन के भीतर, रिजस् टर्ार को दी जाए, वह ऐसी िवलम् ब-फीस, जो िविहत की जाए, िदए जाने पर
रिजस् टर्ीकृत की जाएगी ।
(2) िजस जन् म या मृत् यु की िवलिम् बत इि ला उसके होने के तीस िदन के पश् चात् िकन् तु एक वषर् के भीतर, रिजस् टर्ार को दी
जाए वह िविहत पर्ािधकारी की िलिखत अनजु्ञा से और िविहत फीस िदए जाने तथा नोटरी पिब् लक या राज् य सरकार ारा इस िनिम
पर्ािधकृत िकसी अन् य अिधकारी के समक्ष शपिथत शपथ-पतर् के पेश िकए जाने पर ही रिजस् टर्ीकृत की जाएगी ।
(3) जो जन् म या मृत् यु होने के एक वषर् के भीतर रिजस् टर्ीकृत नह की गई हो, वह उस जन् म या मृत् यु की शु ता का सत् यापन
करने के पश् चात् पर्थम वगर् मिजस् टेर्ट या पेर्िसडने् सी मिजस् टेर्ट ारा िकए गए आदशे पर और िविहत फीस िदए जाने पर ही रिजस् टर्ीकृत
की जाएगी ।
(4) इस धारा के उपबंध ऐसी िकसी कारर्वाई पर कोई पर्ितकूल पर्भाव न डालगे जो िकसी जन् म या मृत् यु का रिजस् टर्ीकरण
उसके िलए, िविनिदष् ट समय के भीतर कराने म िकसी व् यिक् त के असफल रहने पर उसके िवरु की जा सकती हो और ऐसे िकसी जन् म
या मृत् यु को ऐसी िकसी कारर्वाई के लिम् बत रहने के दौरान रिजस् टर्ीकृत िकया जा सकेगा ।
14. बालक के नाम का रिजस् टर्ीकरण—जहां िकसी बालक का जन् म नाम के िबना रिजस् टर्ीकृत िकया गया हो वहां ऐसे बालक
की माता या िपता या संरक्षक बालक के नाम के सम् बन् ध म इि ला, या तो मौिखक या िलिखत रूप म, रिजस् टर्ार को िविहत कालाविध
के भीतर दगेा और तब रिजस् टर्ार ऐसे नाम को रिजस् टर म दजर् करेगा और पर्िविष् ट को आ क्षिरत करेगा और उस पर तारीख डालेगा ।
15. जन् म और मतृ् यु के रिजस् टर म पर्िविष् ट को ठीक या र करना—यिद रिजस् टर को समाधान पर्दान करने वाले रूप म यह
सािबत कर िदया जाए िक इस अिधिनयम के अधीन उसके ारा रखे गए रिजस् टर म जन् म या मृत् यु की कोई पर्िविष् ट पर्रूपत: या सारत:
गलत ह ैअथवा कपटपूवर्क या अनुिचत तौर पर की गई ह ैतो वह ऐसे िनयम के अध् यधीन रहते हुए, जो राज् य सरकार ारा, ऐसी शत
की बाबत िजन पर और ऐसी पिरिस् थितय की बाबत िजनम ऐसी पर्िविष् टय को ठीक या र िकया जा सकेगा, बनाए जाएं, मलू
पर्िविष् ट म कोई पिरवतर्न िकए िबना पाश् वर् म यथोिचत पर्िविष् ट करके उस पर्िविष् ट की गलती को ठीक कर सकेगा या उस पर्िविष् ट को
र कर सकेगा तथा पाश् वर्-पर्िविष् ट पर अपने हस् ताक्षर करेगा और उसम ठीक या र करने की तारीख जोड़ दगेा ।
अध् याय 4
अिभलखे और सािंख् यिकय को रखना
16. िविहत पर्रूप म रिजस् टर का रिजस् टर्ार ारा रखा जाना—(1) पर्त् येक रिजस् टर्ार, रिजस् टर्ीकरण क्षेतर् या उसके िकसी भाग
के िलए, िजसके सम् बन् ध म वह अिधकािरता का पर्योग करता हो, िविहत पर्रूप म जन् म और मृत् यु का रिजस् टर रखेगा ।
5
(2) मुख् य रिजस् टर्ार ऐसे पर्रूप और अनुदशे के अनुसार, जो समय-समय पर िविहत िकए जाएं, जन् म और मृत् यु की पर्िविष् टयां
करने के िलए पयार्प् त संख् या म रिजस् टर छपपवाएगा और पर्दाय कराएगा ; तथा ऐसे पर्रूप की स् थानीय भाषा म एक पर्ित पर्त् येक
रिजस् टर्ार के कायार्लय के बा ार पर या उसके िनकट िकसी सहजदशृ् य स् थान पर लगाई जाएगी ।
17. जन् म और मतृ् यु के रिजस् टर की तलाशी—(1) राज् य सरकार ारा इस िनिम बनाए गए िकन् ह िनयम के अध् यधीन रहते
हुए, िजनके अन् तगर्त फीस और डाक-महसलू के संदाय से संब िनयम भी ह, कोई व् यिक् त—
(क) जन् म और मतृ् यु के रिजस् टर की िकसी पर्िविष् ट की रिजस् टर्ार ारा तलाश करवा सकेगा ; तथा
(ख) ऐसे रिजस् टर म से िकसी जन् म या मृत् यु से सम् ब कोई उ रण अिभपर्ाप् त कर सकेगा :
परन् तु िकसी व् यिक् त को िदया गया मृत् यु सम् बन् धी कोई उ रण, मृत् यु का रिजस् टर म यथा पर्िवष् ट मृत् यु के कारण से संबंिधत
िविशिष् टय को पर्कट नह करेगा ।
(2) इस धारा के अधीन िदए गए सभी उ रण भारतीय सा य अिधिनयम, 1872 (1872 का 1) की धारा 76 के उपबन् ध के
अनुसार, रिजस् टर्ार ारा या िकसी अन् य ऐसे अिधकारी ारा, िजसे ऐसे उ रण दनेे के िलए राज् य सरकार ने पर्ािधकृत िकया हो,
पर्मािणत िकए जाएंगे और उस जन् म या मृत् यु को िजससे वह पर्िविष् ट संब हो, सािबत करने के पर्योजन के िलए सा य म गर्ा ह गे ।
18. रिजस् टर्ीकरण कायार्लय का िनरीक्षण— रिजस् टर्ीकरण कायार्लय का िनरीक्षण और उनम रखे गए रिजस् टर की परीक्षा
ऐसी रीित से, और ऐसे पर्ािधकारी ारा िजसे िजला रिजस् टर्ार िविनिदष् ट करे, िकया जाएगा ।
19. कािलक िववरिणय का रिजस् टर्ार ारा मखु् य रिजस् टर्ार को सकंलन के िलए भजेा जाना—(1) पर्त् येक रिजस् टर्ार मुख् य
रिजस् टर्ार को या उसके ारा िविनिदष् ट िकसी अन् य अिधकारी को ऐसे अन् तराल पर और ऐसे पर्रूप म, जो िविहत िकए जाएं, उस
रिजस् टर्ार ारा रखे गए रिजस् टर की जन् म और मृत् यु की पर्िविष् टय के बारे म एक िववरणी भेजेगा ।
(2) मृत् यु रिजस् टर्ार, रिजस् टर्ार ारा िववरिणय म दी गई इि ला का संकलन कराएगा और वषर् के दौरान रिजस् टर्ीकृत जन् म
और मृत् यु की सांिख् यकीय िरपोटर् ऐसे अन् तराल पर और ऐसे पर्रूप म, जो िविहत िकए जाएं, सवर्साधारण की जानकारी के िलए
पर्कािशत करेगा ।
अध् याय 5
पर्कीणर्
20. भारत स ेबाहर नागिरक के जन् म और मतृ् य ुके रिजस् टर्ीकरण के बारे म िवशषे उपबन् ध—(1) उन िनयम के अध् यधीन
रहते हुए, जो केन् दर्ीय सरकार ारा इस िनिम बनाए जाए,ं महारिजस् टर्ार भारत के नागिरक के भारत से बाहर जन् म और मृत् यु
िवषयक ऐसी इि ला रिजस् टर्ीकृत कराएगा जो उसे नागिरकता अिधिनयम, 1955 (1955 का 57) के अधीन बनाए गए और भारतीय
क सल कायार्लय म ऐसे नागिरक के रिजस् टर्ीकरण संबंधी िनयम के अधीन पर्ाप् त ह और पर्त् येक ऐसा रिजस् टर्ीकरण भी इस अिधिनयम
के अधीन सम् यक् रूप म िकया गया समझा जाएगा ।
(2) भारत से बाहर जन् मे ऐसे बालक की दशा म िजसकी बाबत उपधारा (1) म यथा उपिन् धत इि ला पर्ाप् त न हुई हो, यिद
बालक के माता-िपता भारत म बसने की दिृष् ट से भारत वापस आएं तो वे बालक के भारत पंहुचन ेकी तारीख से साठ िदन के भीतर
िकसी भी समय बालक का जन् म इस अिधिनयम के अधीन उसी रीित से रिजस् टर्ीकृत करा सकगे मानो बालक का जन् म भारत म हुआ था
और धारा 13 के उपबन् ध ऐसे बालक के जन् म को पूव क् त साठ िदन की कालाविध के अवसान के पश् चात् लागू ह गे ।
21. जन् म या मतृ् यु के सम् बन् ध म इि ला अिभपर्ाप् त करन ेकी रिजस् टर्ार की शिक् त—रिजस् टर्ार िकसी व् यिक् त से, या तो मौिखक
या िलिखत रूप से, यह अपेक्षा कर सकेगा िक िजस पिरके्षतर् म वह व् यिक् त िनवास करता ह ैउसम हुए जन् म या मृत् यु संबंधी कोई इि ला
जो उसे ह,ै वह उसे द ेऔर वह व् यिक् त ऐसी अपेक्षा का अनुपालन करने के िलए आब होगा ।
22. िनदशे दने ेकी शिक् त—केन् दर्ीय सरकार िकसी राज् य सरकार को ऐसे िनदशे द ेसकेगी जो इस अिधिनयम के या तद ्धीन
बनाए गए िकसी िनयम या िकए गए िकसी आदशे के उपबन् ध म से िकसी का उस राज् य म िनष् पादन करने के िलए आवश् यक
पर्तीत ह ।
23. शािस् तया—ं(1) कोई व् यिक् त जो—
(क) धारा 8 और 9 के िकन् ह उपबन् ध के अधीन ऐसी इि ला, िजसे दनेा उसका कतर्व् य ह,ै दनेे म युिक् तयुक् त कारण
के िबना असफल रहगेा ; अथवा
(ख) जन् म और मतृ् यु के िकसी रिजस् टर म िलखे जाने के पर्योजन से कोई ऐसी इि ला दगेा या िदलवाएगा िजसे वह
जानता ह ै या िवश् वास करता ह ै िक वह उन िविशिष् टय म से िकसी के बारे म िमथ् या ह ै िजन् ह जानना और िजनका
रिजस् टर्ीकृत िकया जाना अपेिक्षत ह ै; अथवा
(ग) धारा 11 ारा अपेिक्षत रूप से रिजस् टर म अपना नाम, वणर्न और िनवास-स् थान िलखने या अपना अंगुष् ठ-
िचह्न लगाने से इन् कार करेगा,
6
वह जुमार्ने स,े जो पचास हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण् डनीय होगा ।
(2) कोई रिजस् टर्ार या उपरिजस् टर्ार जो अपनी अिधकािरता म होन ेवाले िकसी जन् म या मृत् यु के रिजस् टर्ीकरण म या धारा 19
की उपधारा (1) ारा अपेिक्षत िववरिणयां भेजने म उपेक्षा या उससे इन् कार युिक् तयुक् त कारण के िबना करेगा वह जुमार्ने से जो पचास
रुपए तक का हो सकेगा, दण् डनीय होगा ।
(3) कोई िचिकत् सास-व् यवसायी, जो धारा 10 की उपधारा (3) के अधीन पर्माणपतर् दनेे म उपेक्षा या उससे इन् कार करेगा और
कोई व् यिक् त जो ऐसा पर्माणपतर् पिरद करने म उपेक्षा या उसस ेइन् कार करेगा वह जुमार्ने स,े जो पचास रुपए तक का हो सकेगा,
दण् डनीय होगा ।
(4) कोई व् यिक् त, जो इस अिधिनयम के िकसी ऐसे उपबन् ध का, युिक् तयुक् त कारण के िबना, उल् लघंन करेगा, िजसके उल् लंघन
के िलए इस धारा म िकसी शािस् त का उपबन् ध नह ह,ै वह जुमार्ने स,े जो दस रुपए तक का हो सकेगा, दण् डनीय होगा ।
(5) दण् ड पर्िकर्या संिहता, 1898 (1898 का 5) म िकसी बात के होते हुए भी, इस धारा के अधीन अपराध का िवचारण
मिजस् टेर्ट ारा सकं्षेपत: िकया जाएगा ।
24. अपराध के पर्शमन की शिक् त—(1) ऐसी शत के अध् यधीन रहते हुए, जो िविहत की जाएं मुख् य रिजस् टर्ार ारा,
साधारण या िवशेष आदशे ारा, इस िनिम पर्ािधकृत कोई अिधकारी इस अिधिनयम के अधीन िकन् ह दािण् डक कायर्वािहय के
संिस् थत िकए जाने के पूवर् या पश् चात,् िकसी व् यिक् त से, िजसने इस अिधिनयम के अधीन कोई अपराध िकया हो या िजस पर अपराध
करने का युिक् तयुक् त संदहे हो, उस अपराध के पर्शमन के तौर पर पचास रुपए से अनिधक धनरािश पर्ितगृहीत कर सकेगा ।
(2) ऐसी धनरािश द ेदनेे पर वह व् यिक् त उन् मोिचत कर िदया जाएगा और ऐसे अपराध की बाबत उसके िवरु कोई आगे
कायर्वाही नह की जाएगी ।
25. अिभयोजन के िलए मजंरूी—इस अिधिनयम के अधीन दण् डनीय िकसी अपराध के िलए कोई अिभयोजन, मुख् य रिजस् टर्ार
ारा, साधारण या िवशेष आदशे ारा, इस िनिम पर्ािधकृत अिधकारी ारा ही संिस् थत िकया जाएगा, अन् यथा नह ।
26. रिजस् टर्ार और उप-रिजस् टर्ार का लोक-सवेक समझा जाना—सभी रिजस् टर्ार और उप-रिजस् टर्ार, जब वे इस अिधिनयम
या तद ्धीन बनाए गए िकसी िनयम या िकए गए िकसी आदशे के उपबंध के अनुसरण म कायर् कर रह ेह या कायर् करते तात् पियत ह ,
भारतीय दण् ड संिहता (1860 का 45) की धारा 21 के अथर् म लोक सेवक समझे जाएंग े।
27. शिक् तय का पर्त् यायोजन—राज् य सरकार, शासकीय राजपतर् म अिधसूचना ारा, यह िनदशे द ेसकेगी िक इस अिधिनयम
या तद ्धीन बनाए गए िनयम के अधीन उसके ारा पर्योक् तव् य कोई शिक् त (जो धारा 30 के अधीन िनयम बनाने की शिक् त से िभन् न
हो) ऐसी शत के, यिद कोई ह , जो िनदशे म िविनिदष् ट की जाएं, अध् यधीन रहते हुए, राज् य सरकार के अधीनस् थ ऐसे अिधकारी या
पर्ािधकारी ारा भी, जो िनदशे म िविनिदष् ट िकया जाए, पर्योक् तव् य ह गी ।
28. सद ्भावपवूर्क की गई कारर्वाई के िलए पिरतर्ाण—(1) इस अिधिनयम या तद ्धीन बनाए गए िकसी िनयम या िकए गए
िकस आदशे के अनुसरण म सद ्भावपूवर्क की गई या की जाने के िलए आशियत िकसी बात के िलए कोई भी वाद, अिभयोजन या अन् य
िविधक कायर्वाही सरकार के, महारिजस् टर्ार के, िकसी रिजस् टर्ार के, या िकसी अन् य व् यिक् त के, जो इस अिधिनयम के अधीन िकसी
व् यिक् त का पर्योग या िकसी कतर्व् य का पालन कर रहा हो, िवरु न होगी ।
(2) कोई भी वाद या अन् य िविधक कायर्वाही इस अिधिनयम या तद ्धीन बनाए गए िकसी िनयम या िकए गए िकसी आदशे के
अनुसरण म सद ्भावपूवर्क की गई या की जाने के िलए आशियत िकसी बात के होते हुए या होने से संभाव् य िकसी नुकसान के िलए
सरकार के िवरु नह होगी ।
29. इस अिधिनयम का 1886 के अिधिनयम सखं् यांक 6 के अल् पीकरण म न होना—इस अिधिनयम की िकसी बात का यह अथर्
नह लगाया जाएगा िक वह जन् म, मृत् यु और िववाह रिजस् टर्ीकरण अिधिनयम, 1886 के उपबन् ध के अल् पीकरण म ह ै।
30. िनयम बनान ेकी शिक् त—(1) केन् दर्ीय सरकार के अनुमोदन से राज् य सरकार इस अिधिनयम के पर्योजन को कायार्िन् वत
करने के िलए िनयम शासकीय राजपतर् म, अिधसूचना ारा, बना सकेगी ।
(2) िविशष् टत: और पूवर्गामी उपबन् ध की व् यापकता पर पर्ितकूल पर्भाव डाले िबना, ऐसे िनयम िनम् निलिखत के िलए उपबन् ध
कर सकगे—
(क) इस अिधिनयम के अधीन रखे जाने के िलए अपेिक्षत जन् म और मृत् यु के रिजस् टर के पर्रूप ;
(ख) वह कालाविध िजसके भीतर तथा वह पर्रूप और रीित िजसम रिजस् टर्ार को धारा 8 के अधीन इि ला दी
जानी चािहए ;
(ग) वह कालाविध िजसके भीतर और वह रीित िजससे धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन जन् म और मृत् यु की
सूचना दी जाएगी ;
(घ) वह व् यिक् त िजससे और वह पर्रूप िजसम मृत् यु के कारण का पर्माणपतर् अिभपर्ाप् त िकया जाएगा ;
7
(ङ) वे िविशिष् टयां िजनका उ रण धारा 12 के अधीन िदया जा सकेगा ;
(च) वह पर्ािधकारी जो धारा 13 की उपधारा (2) के अधीन जन् म या मृत् यु के रिजस् टर्ीकरण की अनुज्ञा द ेसकेगा ;
(छ) धारा 13 के अधीन िकए गए रिजस् टर्ीकरण के िलए संदये फीस ;
(ज) धारा 4 की उपधारा (4) के अधीन मखु् य रिजस् टर्ार ारा िरपोट का पर्स् तुत िकया जाना ;
(झ) जन् म और मृत् यु के रिजस् टर की तलाशी और ऐसी तलाशी के िलए तथा रिजस् टर म से उ रण िदए जाने के
िलए फीस ;
(ञ) वे पर्रूप िजनम और वे अन् तराल िजन पर िववरिणयां और सांिख् यकीय िरपोटर् धारा 19 के अधीन दी और
पर्कािशत की जाएगी ;
(ट) रिजस् टर्ार ारा रखे जाने वाले रिजस् टर और अन् य अिभलेख की अिभरक्षा, उनका पेश िकया जाना और
अन् तरण ;
(ठ) जन् म और मृत् यु के रिजस् टर म गलितय को ठीक करना और उनकी पर्िविष् टय को र करना ;
(ड) कोई अन् य िवषय जो िविहत िकया जाना ह ैया िकया जाए ।
1[(3) इस अिधिनयम के अधीन बनाया गया पर्त् येक िनयम, बनाए जाने के पश् चात ्यथाशीघर्, राज् य िवधान-मण् डल के समक्ष
रखा जाएगा ।]
31. िनरसन और व् याविृ —(1) धारा 29 के उपबन् ध के अध् यधीन रहते हुए यह ह ैिक िकसी राज् य या उसके भाग म पर्वृ
िविध का उतना अंश, िजतने का संबंध इस अिधिनयम के अन् तगर्त िवषय से ह,ै उस राज् य या भाग म इस अिधिनयम के पर्वृ होने के
समय स,े यथािस् थित, उस राज् य या भाग म िनरिसत हो जाएगा ।
(2) ऐसे िनरसन के होते हुए भी, ऐसी िकसी िविध के अधीन की गई कोई बात या कारर्वाई (िजसके अन् तगर्त िनकाला गया
कोई अनुदशे या िनदशे, बनाया गया कोई िविनयम या िनयम या िकया गया कोई आदशे भी ह)ै, जहां तक ऐसी बात या कारर्वाई इस
अिधिनयम के उपबन् ध से असंगत न हो, पूव क् त उपबन् ध के अधीन ऐसे की गई समझी जाएगी मानो वे उस समय पर्वृ थे जब वह
बात या कारर्वाई की गई थी और तद्नुसार तब तक पर्वृ बनी रहगेी जब तक वह इस अिधिनयम के अधीन की गई िकसी बात या
कारर्वाई ारा अितिष् ठत न कर दी जाए ।
32. किठनाई दरू करन ेकी शिक् त—यिद इस अिधिनयम के उपबन् ध को िकसी राज् य म पर्भावशील करने म कोई किठनाई,
उनके िकसी क्षेतर् म लागू करने म उद्भूत होती ह ैतो केन् दर्ीय सरकार के अनुमोदन स,े आदशे ारा, राज् य सरकार ऐसे उपबन् ध कर
सकेगी या ऐसे िनदशे द ेसकेगी जो इस अिधिनयम के उपबन् ध से असंगत न ह और जो उस किठनाई को दरू करने के िलए, राज् य
सरकार को आवश् यक या समीचीन पर्तीत ह :
परन् तु इस धारा के अधीन कोई आदशे िकसी राज् य के िकसी क्षेतर् के सम् बन् ध म उस तारीख को, जब यह अिधिनयम उस क्षेतर् म
पर्वृ हो, दो वषर् के अवसान के पश् चात् नह िकया जाएगा ।
______
1 1986 के अिधिनयम सं० 4 की धारा 2 और अनुसूची ारा (15-5-1986 से) अंत:स् थािपत ।