द्ाक- व्यय की पूर्व -अदायगी के बिना ' > « पैंजी, क्रमांक भोपाल डिवीजन डाक द्वारा भेजे जाने के लिए अनुपत., ५) e प. प्र. 108- भोपाल/03-05. अनुभति-पत्र क्र. भोपाल-म. प्र. जि.पू.भु /04 भोपाल-03-05. (असाधारण) प्राधिकार से प्रकाशित क्रमांक 304] भोपाल, शुक्रवार, दिनांक 16 जुलाई 2004--आषादू 25, शक 1926 विधि और विधायी कार्य विभाग भोपाल, दिनांक 16 जुलाई 2004 क्र. 2835-207-इक्कोस-अ( प्रा, ).-- मध्यप्रदेश विधान सभा का निम्नलिखित अधिनियम, जिस पर दिनांक 8 जुलाई 2004 को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त हो चुकी है, एतद्ट्वारा सर्वसाधारण कौ जानकारी के लिये प्रकाशित किया जाता है. मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाप से तथा आदेशानुसार, एम. पी. नेया, अतिरिक्त सचिव,
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 16 'जुलाई 2004 13 ४, ५, tE. o, ८. . मध्यप्रदेश अधिनियम क्रमांक ९ सन् २००४ मध्यप्रदेश असंगठित कर्मकार कल्याण अधिनियम, २००३. विषय-सूची अध्याय--१ प्रारंभिक संक्षिप्त नाप, विस्तार और प्रारंभ, परिभाधाएं, अध्याय--र ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों के असंगठित कर्मकारों के लिए कल्याण बोर्ड ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों के असंगठित कर्मकारों के लिए कल्याण बोर्ड का गठन. बोर्ड का सचिव और अन्य अधिकारी, बोर्ड का सम्मिलन, ; रिक्तियों आदि से बोर्ड कौ कार्रवाइयां अविधिमान्य नहीं होंगी. बोड़ों कौ, अधिकारिता और कृत्य, कल्याण निधि का गठन और उसका उपयोजन, उपनिधियों को सृज्धित और विलीन करने की शक्ति, Tz वार्षिक रिपोर्ट. लेखा और संपरीक्षा, # अध्याय--३ कल्याण निधि के सदस्य के रूप में असंगठित कर्मकारों का रजिस्ट्रीकरण निधि का सदस्य, सदस्य के रूप में असंगठित कर्मकार का रजिस्ट्रीकरण. परिचय-पत्र, सदस्यता समाप्ति, सदस्यों का रजिस्टर, सदस्य द्वारा अधिदाय. अधिटाय के असंदाय का प्रभाव, e i — एए
सध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 16 जुलाई 2004 ¥ 608 (1) e. W रेरे. . ¥, 6. <. R Jo. ३९. ३२. डे. जे, अध्याय--४ नियोजनों के कतिपय पप्रवर्गों द्वारा अधिदाय का संदाय रजिस्ट्रौकरण अधिकारों की नियुक्ति, स्थापना के रजिस्ट्रीकरण को अपेक्षा करने की शक्ति, स्थापना का रजिस्ट्रीकरण, कतिपय मापलों में रजिस्ट्रोकरण का प्रतिसंहरण अपील. अरजिस्ट्रीकरण का प्रभाव. नियोजकों द्वारा .अधिटाय. अध्याय-५ निरीक्षण निरीक्षकों की नियुक्ति, निरीक्षक को शक्तियां, अध्यायव--६ असंगठित कर्मकारों के कल्याण के लिए उपकर आदि संपत्ति के अंतरण पर अतिरिक्त शुल्क. कतिपय प्रवर्गों के मोटरयानों पर अतिरिक्त कर. वन उत्पाद के विक्रय या प्रदाय पर कल्याण उपकर. कतिपय गौण खनिजों पर रायल्टी और . अनिवार्य भाटक के संबंध में उपबंध. धारा २९ से ३६ के अधीन उद्ग्रहोंत रकम के संग्रहण को प्रक्रिया तथा धारा ३२ के अधीन रकम को पृथक् रखने तथा धारा ८ के अधीन गठित निधि में उन्हें जम। करने के लिए प्रक्रिया. अधिसुचित कृषि उपज के विक्रय पर कल्याण उपकर.
608 (2) L 0. 3. ३९. बह. 8 2 g हू ¥ “t. L. Wi WY, मध्यप्रदेश दाजपत्र, दिनांक 16 जुलाई 2004 अध्याय--७ शास्ति तथा प्रक्रिया बाधा डालने के लिए शास्ति. अन्य अपराधों के लिए शारित. अपील, जुमनि की वसूली. कंपनियों द्वारा अपएध. अपराधों का संज्ञाय, अधियोजन की परिसीमा, अध्याय-< प्रकीर्ण छूट देने को शक्ति, अनुसूची का संशोधन. अभिकर्ताओं को नियुक्त करने की बोर्ड कौ शक्ति. शक्तियों का प्रत्यायोजन., जिला योजना समिति द्वारा जिले में अधिनियम के कार्यान्वयन का अनुश्रवण किया जाना. चिवरणियां, सद्भावपूर्वक को गई कार्रवाई के लिए संरक्षण, निदेश देने को राज्य सरकार की शक्ति. कठिनाइयों को दूर करने को शक्ति. नियम बनाते की शक्ति. विनियम बनाने को शक्ति. बोर्ड द्वारा स्कोमों का तैयार किया जाना. कतिपय विधियों को व्यावृत्ति. अनुसूची.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 16 जुलाई 2004 608 (3) मध्यप्रदेश अधिनियम क्रमांक ९ सन् २००४ मध्यप्रदेश असंगठित कर्मकार कल्याण अधिनियम, २००३. ००४ को राष्ट्रपति करती अनुपति प्राप्त हुई; अनुभति “' घब्यप्रदेश राजपदर ( असाधारण )'” में दिसंक १६ जुलाई, र००४ करो प्रचमथाएं प्रकाशित करते गईं. ] मध्यप्रदेश रास्य के ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों के असंगठित कर्मकारों के लिए कल्याण बोर्ड और कल्याण निधि का गठन करने और उससे संसक्त या उससे आनुषंगिक विषयों का उपबंध करने के लिए अधिनियम. भारत गणराज्य के चौवनये वर्ष में मध्यप्रदेश विधान-पंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियभित हो:-- अध्याय--१ प्रारंधिक १. (१६) इस अधिनियम का संकिप्त नाप मध्यप्रदेश असंगठित कर्मकार कल्याण अधिनियम, र००३ है. (२) इसका विस्तार. अनुसूची में विनिर्दिष्ट नियोजनों पर हैं. (३) यह ऐसी तारीख से प्रवृतत होगा जिसे सरकार, अधिसूचना द्वारा, नियत करे, और भिन्न-भिन्न क्षेत्रों के लिए, भिन-भिन नियोजनों के लिए तथा इस अधिनियम के भिनन-भिनन उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी. रे. इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-- (%) () (m) (%) (% (च) (उ) *"प्रसुविधा"' से अभिप्रेत है ऐसी प्रसुविधा जो धाण ७ की उपधारा (२) के अधीन दी जाए; *'चोर्ड'' से अभिप्रेत है थारा ३ के अधीन गठित बोर्ड; ** ठेकेदार” से अधिप्रेत है ऐसा व्यक्ति जो किसी स्थापना के लिए, माल के प्रदाय मात्र अथवा विनिर्माण को वस्तुओं से भिन्न, परिणाम देने हेतु उत्पादन करने के लिए असंगठित कर्मकारों को लगा कर 'उसका जिम्या लेता हैं अथवा जो स्थापना में किसी कार्य के लिए ऐसे कर्मकारों की पूर्ति करता है और इसमें उप-ठेकेदार तथा अधिकर्ता सम्मिलित हैं; किसी ठेकेदार द्वारा या उसके माध्यम से लगाए गए किसी असंगठित कर्मकार के संबंध में *' नियोजक '' से अभिप्रेत है प्रमुख नियोजक और किसी अन्य असंगठित कर्मकार के संबंध में ऐसा व्यक्ति जो स्थापना के क्रियाकलापों पर अंतिम नियंत्रण रखता हो और इसमें ऐसा कोई अन्य व्यक्ति सम्मिलित है जिसे ऐसी स्थापना के क्रियाकलाप सौंपे जाते हों चाहे ऐसा व्यक्ति अभ्निकर्ता, प्रबंधक या अनुसूचित नियोजन में प्रचलित किसी अन्य नाप से जाना जाता हो; ** स्थापना" से अधिप्रेत है कोई स्थान या परिसर जिसमें उसकी ऐसी प्रसीपा भी सम्मिलित है, जिसमें या जिसके किसी भाग में सामान्यत: कोई अनुसूचित नियोजन चलाया जा रहा है या चलाया जाता है; किसो नियोजक ये संदंध में "परिवार" से अभिप्रेत है ऐसे नियोजक के पति-पत्नी, पुत्र, पुत्री, पिता, माता, भाई या बहन जो उसके साथ रहता है और उस पर पूर्णत: आश्रित है; "निधि" से अधिप्रेत है धारा ८ के अधीन गठित कल्याण निधि; संकिप्त नाप, चिस्त्था अऔर प्राँध,
19 €08 (4) i मध्ण्प्रदेश राजपत्र, दिनांक 16 जुलाई 2004 (जज) (%) (®) () (@) (®) (%) (=) @) (%) (®) “निरीक्षक से अभिप्रेत है धाण र७ के अधीन नियुक्त निरीक्षक; “श्रम आयुक्त” से अभिप्रेत है मध्यप्रदेश औद्योगिक संबंध अधिनियम, १९६० (क्रमांक २० सन् १९६०) कौ धारा ३ के अधीन राज्य सरकार द्वारा रान्य के लिए नियुक्त किया गया श्रम आयुक्त; इस अधिनियप के अधीन गठित की गई कल्याण निधि के संबंध में ''सदस्य'' से अधिप्रेत है धारा १४ के अधीन एक सदस्य के रूप में रजिस्ट्रीकृत असंगठित कर्मकार; **यधास्थिति किसी ग्रामीण या नगरीय क्षेत्र का सामान्यत: निवासी '' से अभिप्रेत है ऐसा व्यक्ति जो पूर्वतर बारह मास के अधिकांश समय में ऐसे क्षेत्र में निवास कर चुका है, तथा उसका इसी प्रकार अगले बारह मास तक बने रहना प्रत्याशित हो; ** प्रमुख नियोजक'' से अभिप्रेत है ऐसा नियोजक जो किसी अनुसूचित नियोजन में किसी ठेकेदार द्वारा या उसके माध्यम से असंगठित कर्मकारों को नियोजित करता हो; *' ग्रामीण क्षेत्र” से अभिप्रेत है ऐसा क्षेत्र जो नगरीय क्षेत्र न हो; ** अनुसूचित नियोजन'' से अभिप्रेव हैं अनुसूची में वितनिर्दिष्ट कोई नियोजन और उसमें सम्मिलित है, ऐसे नियोजन का भाग बनने वाले कार्य को कोई प्रक्रिया या शाखा; *स्कौप'' से अधिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन बनाई गई स्कीम; *' अनुसूची" से अभिप्रेत है इस अधिनियम से संलग्न अनुसूची; ** कानूनी कल्याण निधि” से अभिप्रेत है इस अधिनियम से भिन्न किसी राज्य या केन्द्रीय विधान के अधीन कर्मकारों के कल्याण के लिए स्थापित और राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त जारी को गईं अधिसूचना द्वारा पोषित कौ गई *' कानूनी कल्याण निधि''; *** असंगठित कर्मकार'' से अभिप्रेत है ऐसा व्यक्ति जो प्रत्यक्षत: या किसी एजेंसी या ठेकेदार के माध्यम से एक या अधिक अनुसूचित नियोजन/नियोजनों में लगा हुआ है, चाहे मजदूरी के लिए हो या बिना मजदूरी के लिए या जो ऐसे अनुसूचित नियोजन/नियोजनों में स्वयं या उसकी मर्जी से केवल परिवार श्रम के साथ कार्य के किसी ऐसे स्थान में कार्य करता है/करती है जिसमें 'ठसका भर, खेत या कोई सार्वजनिक स्थान सप्सिलित है जो कि अन्य के नियंत्रणाधीन हो या न हो तथा इसमें सम्मिलित हैं :-- (एक). ऐसा व्यक्ति जो गृह आधारित कर्मकार या आकस्मिक अथवा संविदा कर्मकार या स्व-नियोजित (दो) कर्मकार है; और ऐसा व्यक्ति जिसे किसी नियोजक या ठेकेदार द्वारा कच्चा माल उसे परिवर्तित करने या कोई 'उत्पाद बनाने या किसी कार्य के लिए दिया जाता हो या फेरी लगाकर या गली में बेचने के लिए तैयार माल दिया जाता है या चल या घा पहुंच सेवा उपलब्ध कराने के लिए यान, औजार या पशौनरी प्रदान कौ जाती हो, किन्तु इसमें किसी नियोजक के परिवार का कोई सदस्य सम्मिलित नहीं हैं;
rmMMu________________WM 608 (5) (%) “maa"amtmt.mtqum-ntuhth ट्वाद “'बृहतर नगरीय क्षेत्र” और “*लपुत्तर नगरीय छषेत्र”” के रूप में अधिसूचित शेत्र; (न)... “सजदूरी” का बही अर्थ होगा जो सजदूरी भुगठान अधिनियम, १९३६ (१९३६ का सं. ४) को धारा र के खण्ड (उद) में उसके लिए दिया गया है. अध्याय-र२ ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों के असंगठित कर्मकारों के लिए कल्याण बोर्ड. ३. (१) राज्य सरकार, ऐसी तारीख से, जो कि अधिसूचना द्वाण नियत की जाए, मध्यप्रदेश ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्याण बोर्ड और मध्यप्रदेश नगरीय असंगठित कर्मकार कल्याण बोर्ड के नाम से बोर्ड का गठन कोगी जो इस अधिनियम के अधीन उन्हें प्रदत शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का पालन करेंगे : पार्तु प्रत्येक बोर्ड के गठन के लिए भिन-भिनन तारीखें नियत की जा सकेंगी. (२) उपधारा (९६) के अधीन गठित प्रत्येक बोर्ड पूर्वोब्त नाम से एक निगधित निकाय होगा, जिसका शाश्यत उत्तराधिकार होगा तथा जिसकी सामान्य मुद्रा होगी और जो उक्त नाम से वाद चलायेगा तथा उक्त नाम से उसके विरुद्ध बाद चलाया जा सकेगा. (३) प्रत्येक बोर्ड एक अध्यक्ष (चेयएपर्सन) और पंद्रह से अनधिक उतनी संख्या में अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगा जो रास्य सरकार द्वारा इसके लिए नियुक्त किए जाएं: « .. परन्तु बोर्ड में राज्य सरकार, नियोजकों और असंगठित कर्मकारों का प्रतिनिधित्व कर रहे सदस्यों की एक समान संख्या सम्मिलित होगी. और असंगठित कर्मकारों का प्रतिनिधित्व कर रहे लगभग एक तिहाई सदस्य महिलाएं होंगी. (४) बोर्ड के अध्यक्ष (चेयरपर्सस) और अन्य सदस्यों की नियुक्ति के निबंधन और शर्तें तथा उनको देय बेतन और अन्य भत्ते तथा बोर्ड के सदस्यों कौ आकस्पिक रिक्तियों को भाने की रीति ऐसी होगी जैसी कि विहित की जाए, ४.९९) चाय ३ के आयोग गठित किया यदा प्रत्येक चोट एक सचिव और देते अन्-अधिकाएं सब कर्मचारियों को नियुक्त करेगा जितने कि बह इस अधिनियम के अधीन कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वइन के लिए आवश्यक समझे : पा्तु बोर्ड का सचिव, राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से नियुक्त किया जाएगा: पान्तु यह और कि एक हो व्यक्ति को दोनों बोड़ों का सचिव नियुक्त किया जा सकेगा. (२) बोर्ड का सचिव इसका मुख्य कार्यकारी अधिकारी होगा. (३) बोर्ड के सचिव और अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारियों की नियुक्ति के निर्बंधन तथा शर्तें तथा उनको देय बेतन तथा भत्ते ऐसे होंगे जैसा कि बोर्ड विनियमों द्वारा वितिर्दिष्ट को. ५. (१) बोर्ड, ऐसे समय और स्थान पर सप्मिलन करेगा और उसके सप्मिलन में (ऐसे सम्मिलन में गणपूर्ति भी सम्पिलित है) कारबार के संव्यवहार के संबंध में प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन करेगा जैसा कि विहित किया जाए, (२) अध्यक्ष (चेयरपर्सन) या यदि वह किसी कारण से बोर्ड के सम्मिलन में उपस्थित होने में असमर्थ है तो इस संबंध में अध्यक्ष (चेयरपर्सन) द्वारा नाम-निर्दिष्ट किया गया कोई सदस्य और ऐसे नामनिर्देशन कौ अनुपस्थिति में, सम्सिलन में उपस्थित सदस्यों द्वारा उनमें से निर्वाचित कोई अन्य सदस्य, सम्मिलन की अध्यक्षता करोगा., - i बह चोई का सचिव आऔर चोई का स्टीपमलय, v L
608 (6) मध्यप्रदेश शाजपत्र, दिनांक 16 जुलाई 2004. - L (३) समस्त प्रश्न जो बोर्ट के किसी सप्सिलन के सपश्च आते हों, उपस्थित और भतदान करने वाले सदस्यों * बहुमत द्वारा विनिश्चित किए जाएंगे और मतों के बराबर रहने की दशा में अप्सक्ष (चेयरपर्सन) या उसकी अनुपस्थि में, अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति का द्वितीय या निर्णायक मत होगा... . पिच्तियों आदि से ६. बोर्ड का कोई कार्य या कार्रवाइयां,-- wrd ) wrteya M‘Munflfl (%) बोर्ड में किसी रिक्ति या उसके गठन में किसी त्रुटि; या (m) बोर्ड के सदस्य के रूप में कार्य कर रहे किसी व्यक्ति को नियुक्ति में किसी जुटि; या (m) बोर्ड को प्रक्रिया में किसी अनियमितता जिससे मामले के गुणागुण पर प्रभाव नहीं पड़ता हो, के कॉरण अविधिमान्य नहीं होगा/होगी. et को. ...... ७. (१) मध्यप्रदेश ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्याण बोर्ड और मध्यप्रदेश नगरीय असंगठित कर्मकार कल्याण अधिकारिता और बोर्ड को अधिकारिता का विस्तार उन असंगठित कर्मकारों पर होगा जो सामान्यतया राज्य के क्रपश: प्रापोण आऔ.. R ¥ झषेत्रों में निवास करते हैं. (२) उपधारा (१) के उपरबंधों के अध्यधीन रहते हुए बोर्ड, धारा १३ के अधीन हकदार सदस्यों को निम्नलिखित में से समस्त या कोई प्रसुविधाएं उपलब्ध करा सकेगा, अर्थात्:-- (%) दुर्घटना की दशा में किसी सदस्य को तुरन्त सहायता; (@) उन सदस्यों को पेंशन जो ६० वर्ष की .आयु पूर्ण कर चुके हों; (m गृह निर्माण के लिए सदस्य को ऋण और अग्रिम; (w) सदस्यों के समूह बीमा के लिए प्रीपियप का भुगतान; (% w=il % fow & लिये -वितीय सहायता; () किसी सदस्य या उसके ऐसे आशव्रित को जिसे विहित किया जाए, की गंभीर बीमारी के उपचार के लिए सहायता; (छठ). महिला सदस्यों को प्रसूति प्रसुविधा; और (जज)... ऐसी अन्य प्रसुविधाएं जिन्हें विहित किया जाए, (३) किसी प्रसुविधा को प्रदान करने की पात्रता का मानदण्ड, वह पैमाना जिस पर यह दी जा सकेगी, आवेद-, करने और मंजूर करने को प्रक्रिया तथा प्रसुविधा प्रदान करते से संसक्त अन्य आनुधंगिक विषय ऐसे होंगे जैसा कि बोर्ड इस निभधित बनाई स्कौम द्वारा उपबंधित करो. (४) बोर्ड किसी स्थानीय प्राधिकाण था किसी नियोजक को किसी स्थापना में असंगठित कर्मकारों के कल्याण से संसक्त प्रयोजन के लिए राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित किसी स्कीम के लिए ऋण या सहायता प्रदान कर सकेगा. (५) बोर्ड, किसी ऐसे स्थानीय प्राधिकरण या किसी ऐसे नियोजक को वार्षिक सहायठा अनुदान संदत कर "1
| ०५ मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 16 जुलाई 2004 608 (7) जो असंगठित कर्मकारों और उनके परिवार के सदस्यों की प्रसुविधा के लिए बोर्ड द्वारा विनिर्दिष्ट स्तर के कल्याण उपाय और सुविधाएं, बोर्ड के समाधानप्रद रूप में उपलब्ध कराता हो, तथापि किसी स्थानीय प्राधिकरण या नियोजक को सहायता अनुदान के रूप में देय रकस,-- (%) राज्य सरकार या इस संबंध में उसके ट्वात विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति द्वारा यधाअवधारित कल्याण उपाय और सुविधाएं उपलब्ध कराने में खर्च की गई रकम; या (@) ऐसी रकम जो विहित को जाए, इनमें से जो भी कम हो, से अधिक नहीं होगी : परन्तु कोई भी सहायता अनुदान किसी ऐसे कल्याण उपायों और सुविधाओं के संबंध में देय नहीं होगा जहां यथा पूर्वोक्त अवधारित उस पर खर्च की गई रकम इस निमित विहित की गई रकम से कम हैं. (८) (१) राज्य सरकार द्वारा धारा ३ को उपधारा (१) के अधीन मध्यप्रदेश ग्रामीण असंगठित कर्पकार कल्याण कल्याण विधि का बोर्ड और मध्यप्रदेश नगरीय असंगठित कर्मकार कल्याण बोर्ड गठित करने के लिए नियत की गई तारीख से क्रमश: मध्यप्रदेश गठन और उसका ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्याण निधि और मध्यप्रदेश नगरीय असंगठित कर्मकार कल्याण निधि के नाम से ज्ञात निधियों T का गठन किया जाएगा. (२) मध्यप्रदेश ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्याण निधि, मध्यप्रदेश ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्याण बोर्ड में निहित होगी और उसके द्वार प्रशासित की जाएगी जबकि 'मध्यप्रदेश नगरीय असंगठित कर्मकार कल्याण निधि, मध्यप्रदेश असंगठित नगरीय कर्मकार कल्याण बोर्ड में निहित होगी और उसके द्वारा प्रशासित की जाएगी. (३) निधि में,-- (%) राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार द्वारा संबंधित बोर्ड को दिए गए अनुदान और ऋण; (ख) निधि के सदस्यों से प्राप्त अभिदाय; (ग). धारा २६ के अधीन नियोजकों से प्राप्त अधिदाय; (घप)... धारा ३३ और ३४ के उपबंधों के अनुसार निधि में देय समस्त धन, जमा किए जाएंगे. (४) निधि को,-- (%) धारा ७ के अधीन बोर्ड के कृत्यों के निर्वहन में उसके व्ययों; (ख). बोर्ड के सदस्यों, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और अन्य पारिश्रपिक; और (ग).... इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत उद्देश्यों और प्रयोजनों पर व्ययों, के लिए उपयोजित किया जाएगा. (५) बोर्ड किसी वित्तीय वर्ष में अपने सदस्यों, अधिकारियों तथा अन्य कर्मचारियों के वेतन, भत्तों तथा अन्य पारि श्रमिक के मददे तथा अन्य प्रशासनिक व्ययों की पूर्ति के लिए किसी विततीय वर्ष के दौरान अपने कुल व्ययों के पंद्रह प्रतिशत से अधिक व्यय उपगत नहीं कोगा.
608 (8) मध्यप्रदेश राजपत्, दिनाक 16 'जुलाई 2004 जलन e उपनिधियों को _ ९. (१) राज्य सरकार, आदेश द्वाण, कल्याण बोर्ट की सलाद पर अथवा अन्यपा आदेश में विनिर्टिष्ट किए गए हद माकी नाम से उपनिधि सृजित कर सकेगी और निदेश दे सकेगी कि श्मादेश में वितिर्टिप्ट ारीख को निधि में जमा धन एक या अधिक उपनिधियों में जपा कर दिया जाए, () उपधारा (१) में निर्दिप्ट आदेश में निम्नलिखित विनिर्दिष्ट होंगे,-- | | (एक). बह क्षेत्र और/या अनुसूचित नियोजन जिसके लिए उपनिधि सृज्चित को जाना है; (दो). बह सीपा जिस तक और वह रीति जिसमें आदेश में विनिर्टिष्ट तारीख को निधि में जया धन, और भावी प्रोद्भवन उपनिधि में जमा की जाना है; (ठोन) इस अधिनियम और उसके अधीन बनाएं गए नियमों से अनअसंगत वह मेकेनिज्म यह सुनिश्चित करने के लिए कि उपनिधि में जमा किया गया धन खण्ड (एक) में निर्दिष्ट क्षेत्रों और/या अनुसूचित नियोजन के निधि के सदस्यों के कल्याण के लिए उपयोजित किया जाए; और (चार). उठपनिधि के सृजन से आनुर्षंगिक कोई अन्य मामले : परन्तु खण्ड (तीन) में निर्दिष्ट मेकेनिज्म में ऐसी रीति में जैसी कि विहित की जाए बोर्ड की उप समिति का गठन भी समाविष्ट हो सकेगा : परन्तु यह और कि ऐसी उप-समिति में सहयोजित सदस्य सम्मिलित होंगे, जो कि बोर्ड के सदस्य न हों, जिन्हें राज्य सरकार द्वारा ऐसी रीति में नामनिर्टिष्ट किया जा सकेगा जैसी कि विहित की जाए : परन्तु यह भी कि सहयोजित सदस्यों को ठप-समिति के सम्मिलन में जिसके लिए उन्हें नामनिर्दिष्ट किया गया हो भाग लेने का अधिकार होगा. परन्तु उन्हें सप्मिलन में मठदान करने का अधिकार नहीं होगा. (३) राज्य सरकार, अव्देश द्वार, बोर्ड कौ सलाह पर अथवा अन्यथा निदेश दे सकेगी कि:-- (एक) उपधारा (१) के अधीन सृजित की गई किसी उपनिधि को दो या अधिक उपनिधियों में और विभाजित किया जाए; (दो). उपधाण (१) के अधीन और/अथवा पूर्वोक्त खण्ड (एक) के अधीन सृजित की गईं एक या अधिक उपनिधियों का उस निधि में विलय किया जाए जिसमें से उसे सृद्धित किया गया था; (तीन) उपधारा (१) के अधीन और/अधथवा पूर्वोक्त खण्ड (एक) के अधीन सृजित की गई दो या अधिक उपनिधियां एकल उपनिधि में विलय को जाएं, * (४) उपधारा (३) के अधीन पारित किए गए आदेश में उपधारा (२) के खण्ड (एक), (दो), (तीन), और (चार) में उल्लिखित बिन्दुओं पर उपबंध यघावश्यक 'परिवर्तनों सहित अंतर्विष्ट रहेंगे, (५) बोर्ड का यह कर्तव्य होगा कि वह इस धारा के अधीन प.रित किए गए प्रत्येक आदेश को प्रभावशील करे. जाट, ०. बोर्ड, प्रत्येक वित्तीय वर्ष में, ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर, जैसा कि विहित किया जाए, बोर्ड को प्राक्कलित प्राप्तियां और व्ययों को दर्शित करते हुए आगामी वितीय वर्ष के लिए उसका बजट तैयार कोगा और उसे राज्य सरकार को अग्रेषित करेगा.
o+ मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 16 जुलाई 2004 —_—— — ——o ््टटटाटएतएएउटाटटटएल्एएएएएएणणणटणणणणइ ााटाइाशिा एप पी —_— - ६१. बोर्ड, प्रत्येक वित्तीय बर्ष में ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर जैसा 'कि विहित किया जाए, पूर्व वित्तीय वर्ष जे राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगा, १२. (१) बोर्ड, उचित॑ लेखा और अन्य सुसंगठ अभिलेख संधारित करोगा तथा लेखाओं का एक वार्षिक विवरण, ऐसे प्ररूप में तैयार करेगा जैसी कि विहित किया जाए, (२) बोर्ड के लेखाओं की संपरीक्षा, संचालक, स्थानीय निधि संपरीक्षा, द्वारा मध्यप्रदेश स्थानीय निधि संपरीक्षा अधिनियम, ₹९७३ (क्रमांक ४३ सन् १९७३) के उपबंधों के अनुसार कौ जाएगी और उक्त अधिनियम के उपबंध बोर्ड पर इस प्रकार लागू होंगे मानों कि यह एक स्थानीय निकाय है. (३) बोर्ड, राज्य सरकार को संपरीक्षक को रिपोर्ट के साथ उसके लेखाओं की संपरौक्षित प्रति, ऐसी तारीख के पूर्व प्रस्तुत करेगा जैसी कि विहित को जाए. (४) राज्य सरकार, वार्षिक रिपोर्ट और संपरीक्षक की रिपोर्ट, उनके प्राप्त होने के पश्चात् यथधाशक्य शौघ्र विधान सभा के पटल पर रखवाएगी, अध्याय-३ कल्याण निधि के सदस्य के रूप में असंगठित कर्मकारों का रजिस्ट्रीकरण १३. इस अधिनियम के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए इस अधिनियम के अधीन सदस्य के रूप में रजिस्ट्रीकृत प्रत्येक असंगठित कर्मकार, बोर्ड द्वारा इस अधिनियम के अधीन प्रशासित निधि से उपबंधित प्रसुविधाओं के लिए हकदार होगा. १४. (१) प्रत्येक असंगठित कर्मकार जिसने अठारह वर्ष को आयु पूर्ण कर ली है, किन्तु साठ वर्ष की आयु पूर्ण नहीं की है और जो किसी अन्य कानूनी कल्याण निधि के अधीन प्रसविधा प्राप्त करने का पात्र नहीं है, इस अधिनियम के अधीन सदस्य के रूप में रजिस्ट्रीकरण के लिए पात्र होगा परन्तु राज्य सरकार, अधिसूचना द्वार, निम्नलिखित एक या अधिकं मानदंड विहित कर सकेगी जिसकी पूर्ति न होने पर असंगठित कर्मकार सदस्य के रूप में रजिस्ट्रीकरण हेतु अपात्र हो जायेगा:-- (एक) भूमि के खाते का अधिकतम आकार, (दो). परिवार की अधिकतम आय : परन्तु यह और कि राज्य सरकार राज्य में भिन-भिनत प्रवर्गों को या भिनत-भितत भागों में स्थित भूमियों के लिए भूमि के खाते के भिन-भिन अधिकतम आकार विनिर्दिष्ट कर सकेगी. (२) सामान्यतया ग्रामीण क्षेत्र के निवासी असंगठित कर्मकार धारा ८ के अधीन गठित मध्यप्रदेश ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्याण निधि के सदस्य के रूप में रजिस्ट्रीकरण के लिए पात्र होंगे, जबकि नगरीय क्षेत्र में सामान्यतः: निवास करते वाले असंगठित कर्मकार मध्यप्रदेश नगरीय असंगठित कर्मकार कल्याण निधि के सदस्य के रूप में (जिस्ट्रीकरण के लिए पात्र होंगे परन्तु कोई भो कर्मकार एक साथ दोनों निधियों के सटस्य के रूप में रजिस्ट्रीकण के लिए पात्र नहीं होगा, (३) रजिस्ट्रोकण के लिए आवेदन ऐसे प्ररूप में, जैसा कि विनियपों में विनिर्टिप्ट किया जाए तथा ऐसे अधिकारी को किया जाएगा जिसे कि इस संबंध में संबंधित बोर्ड द्वारा प्राधिकृत किया जाए, 608 (9) चार्षिक पीपोर्ट, लेखा और संपरी का, i b ं
‘——_—.J“‘_—_J— 608 (10) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 16 जुलाई 2004 (४) उपधाण (३) के अधीन प्रत्येक आवेदन के साथ ऐसे दस्तावेज संलग्न किए जाएंगे तथा उसके साथ पक स . रुपए से अनधिक की ऐसी फीस दी जाएगी जो विनियमों में वितिर्टिप्ट की जाए, (५) यदि उपधारा (३) के अधीन संबंधित बोर्ड द्वारा प्राधिकृत अधिकारी का समाधान हो जाता है कि आवेदक ने इस अधिनियम तथा उसके अधीन बनाएं गए नियमों के उपबंधों का अनुपालन कर दिया हैं तो बह इस अधिनियम के अधीन सदस्य के रूप में कर्मकार का नाग रजिस्ट्रीकृत कोगा : पान्तु रजिस्ट्रीकरण के लिए कोई आवेदन आवेदक को सुनवाई का अवसर दिए बिना नामंजूर नहीं किया जाएगा. (६) उपधारा (५) के अधीन विनिश्चय से व्यथित कोई व्यक्ति ऐसे विनिश्वय की तारीख से तीस दिन के भीतर संबंधित बोर्ड के सचिव यथा इस निमित बोर्ड द्वारा विनिर्टिप्ट किसी अन्य अधिकारी को अपील कर सकेगा तथा ऐसी अपील पर सचिव या ऐसे अन्य अधिकारी का विनिश्वय अंतिम होगा : परन्तु सचिव था इस निभित्त बोर्ड द्वारा विनिर्दिष्ट कोई अन्य अधिकारी तौस दिन की उक्त कालावधि का अवसान होने पर अपील ग्रहण कर सकेगा यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि ऐसा व्यक्ति समय पर अपील फाइल करने से समुचित कारण से निवारित था. (७) बोर्ड का सचिव ऐसे रजिस्टर संधारित करवाएगा जैसा कि विहित किए जाएं, चरिजय- पत्र, ८: संवाधित चोद, अतेक कादतन यो साक च्विय-पत, लिंस चर उस खावाित (पोलेकाफ) स्थिपका हो; देखा तथा जिसमें उसके द्वारा अनुसूचित नियोजन में किए गए कार्य के ब्यौरों की प्रविष्टि करने के लिए पर्याप्त स्थान होगा. सदस्यता समाप्ति, ६६. (६) ऐसा असंगठित कर्मकार, जो इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत किया गया है, को सदस्यता,-- (एक) धारा १९ के प्रवर्तन के परिणामस्वरूप; या (दो). जब बह,-- (%) साठ वर्ष को आयु पूरी कर लेता है; या (@) किसी अन्य कानूनी कल्याण निधि के अधीन सदस्य के रूप में, परिचय पत्रधारक के रूप में या हिताधिकारी आदि के रूप में रजिस्ट्रीकृत हो जाता हैं जो ऐसी निधि से प्रसुविधा प्राप्त करने को उसे पात्रता प्रदान करता है, समाप्त हो जाएगी. (२) उपधारा (१) में अत्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, यदि कोई ब्यक्ति साठ बर्ष की आयु पूर्ण करने के ठोक पूर्व लगातार विगत तीन बर्थ तक सदस्य रहा है तो यह ऐसी प्रसुविधा प्राप्त करने का पात्र होगा जैसी कि विहित को जाए, सदस्यों का रजिस्टर, १७. किसी स्थापना के संबंध में प्रत्येक नियोजक जिसको इस अधिनियम कौ धारा २१ के अपीन यह अधिनियम लागू होता है, एक रजिस्टर ऐसे प्ररूप में जैसा कि विहित किया जाए, संधारित करेगा जिसमें उसके द्वाद नियोजित सदस्यों के नियोजन के ब्यी दर्शाएं जाएंगे. इस प्रकार संधारित रजिस्टर का संबंधित बोर्ड के सचिव द्वारा था इस निधित बोर्ड द्वारा मम्यक् रूपेण प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी द्वारा बिना किसो पूर्व सूचना के निरीक्षण किया जा सकेगा,
r__- : ) - मध्यप्रदेश राजपत्र दिनांक 16 जुलाई 2004 608 (11) 608 (11) . ६८. ऐसा असंगठित कर्मकार जो इस अधिनियम & अधीन सदस्य के रूप में रजिस्ट्रीकृत किया गया है जब तक कि वह साठ वर्ष कौ आयु पूरी नहीं कर लेता है तब तक ऐसी दर पर जैसी कि बोर्ड द्वारा विनिर्टिप्ट की जाए, निधि में अधिदाय कोगा तथा भिन-भिनन वर्गों के असंगठित कर्मकारं के लिए अभिदाय की भिन्न-भिन्न दो विनिर्दिष्ट की जा सकेंगी : परन्तु अभिदाय की दो सामान्यतया प्रत्येक पांच थर्ष में एक बार पुनरीक्षित की जाएंगी. १९. जहां किसी सदस्य ने धाणा ८ के अधीन उस तारोख के पश्चात् जब अभिदाय शोध्य हो गया हो, लगातार एक वर्ष से अन्यून कौ कालावधि तक अपना अभिदाय संदत्त नहीं किया है तो वह सदस्य नहीं रह जाएगा: परन्तु यदि बोर्ड के सचिव का यह समाधान हो जाता है कि अधिदाय का असंदाय युक्तियुक्त हेतुक से था तथा असंगठित कर्मकार बकाया जमा करने का इच्छुक है तो वह ऐसे कर्मकार को अभिदाय का बकाया जमा करने कौ अनुज्ञा दे सकेगा तथा बकाया के जमा कर दिए जाने पा, कर्मकार का रजिस्ट्रीकरण पुनःस्थापित हो जाएगा, अध्याय--अ४ नियोजकों के कतिपय प्रवर्गों द्वारा अधिदाय का संदाय २०. राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचित आदेश द्वारा,-- (%) (=) ऐसे व्यक्तियों को जो सरकार या स्थानीय निकाय के अधिकारी हों और जिन्हें वह उचित समझे, इस अधिनियम को धारा २२ के प्रयोजन के लिए रजिस्ट्रीकरण अधिकारी नियुक्त कर सकेगी; और ऐसी सीमा परिनिश्चित कर सकेगी जिसके भीतर कोई रजिस्ट्रीकरण अधिकारी इस अधिनियम द्वार था 'उसके अधीन उसको प्रदतत शक्तियों का प्रयोग कोगा. W, T सरकार, अधिसूचना द्वारा, यह अपेक्षा कर सकेगी कि ऐसे मानदंड तथा शर्तें, जैसा कि अधिसूचना में नियत की जाएं, को पूर्ति करने वाली प्रत्येक स्थापना इस अधिनियम के ठपबंधों के अनुसार स्वयं को रजिस्ट्रीकृत कराएगी तथा तब यह अधिनियम प्रत्येक ऐसी स्थापना को लागू हुआ माता जाएगा. रर. (१) प्रत्येक नियोजक,-- (%) (ख) ऐसी स्थापना के संबंध में जिसको यह अधिनियम धारा २६ के अधीन कोई अधिसूचना जारी होने पर लागू होता है; और किसी अन्य स्थापना के संबंध में, जिसको यह अधिनियम ऐसी अधिसूचना जारी होने के परचात् किसी सपय लागू हो सकेगा, उस तारीख से जिसको यह अधिनिय-+ ऐसे स्थापना के लिए लागू होठा है, साठ दिन को कालावधि के भीतर ऐसी स्थापना के रजिस्ट्रीकरण के लिए रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को आवेदन करेगा: परन्तु रजिस्ट्रीकरण अधिकारी पूर्वोक्त कालावधि का अवसान होने के पश्चात् कोई ऐसा आवेदन ग्रहण कर सकेगा यदि उसका यह सपाधान हो जाता है कि आवेट्क सपुचित कारण से ऐसी कालादधि के भौतर आवेदन करने से निवारित था. झदस्य e अधिदाय के असंदाप का प्रभाव, रजिस्ट्रीकरण अधिकाएँं करी
&08 (12) woRuwEw fEwegedos 00 0 o मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनाक 16 जुलाई 2004 कट बह ऐसी फीस के साथ होगा जैसी कि विहित को जाएं, (३) उपधाण (१) के अधीन ऐसा आवेदन प्राप्त होने पर रजिस्ट्रीकरण अधिकारी ऐसी स्थापना को रजिस्ट्रीकृत कोगा तथा नियोजक को ऐसे प्ररूप में तथा ऐसे समय के भीतर और ऐसी शर्तों के अध्यधीन रहते हुए जैसी कि विहित को जाएं रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र जारी करेगा. (४) जहां इस धाण के अधीन किसी स्थापना के रजिस्ट्रीकरण के पश्चात् ऐसी स्थापना के संबंध में 'उसके स्वामित्व या प्रबंधन या अन्य विहिंत विशिष्टियों में कोई परिवर्तन होता है, तो नियोजक द्वारा ऐसे परिवर्तन संबंधी विशिष्टियों को सूचना रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को ऐसे परिवर्तन को तारीख से तौस दिन के भीतर ऐसे प्ररूप में दो जाएगी जैसा कि fafea किया जाए, सरिपय नाषलों में २३. यदि रजिस्ट्रीकरण अधिकारी का इस निमित उसको किए गए किसी निर्देश पर या अन्यथा यह समाधान हो एजिस्ट्रीकरण का... जाता हैं कि किसी स्थापना का रजिस्ट्रीकरण किसी सारवान तथ्य के दुर्व्यपदेशन से या छिपाने से अभिप्राप्त किया गया प्रतिसंहरण. हैं या ऐसी स्थापना द्वारा किए गए किसी संकर्म के संबंध में इस अधिनियम के ठपबंध का अनुपालन नहीं किया गया हैं या यह कि किसी अन्य कारण से रजिस्ट्रीकरण अनुपयोगी या प्रभावहीन हो गया है तथा उसे प्रतिसंदत किया जाना अपेक्षित है, तो बह स्थापना के नियोजक को सुनवाई का अवसर दिए जाने के पश्चात् रजिस्ट्रीकरण प्रतिसंइत कर सकेगा. अपील, र४. (१६) धारा २३ के अधीन किए किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, उस तारीख से जिसको उसे आदेश संसूचित किया हैं, तोस दिन के भीतर अपील अधिकारी को अपील प्रस्तुत कर सकेगा जो राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त चामसतनिर्दिष्ट व्यक्ति होगा: परन्तु अपील अधिकारी तीस दिन की उक्त कालावधि का अवसान हो जाने के पश्चात् अपील ग्रहण कर सकेगा यदि उसका समाधान हो जाता है कि अपीलार्धी पर्याप्त कारण से समय पर अपील फाइल काने से निवारित था. (२) उपधाण (१) के अधीन अपील प्राप्त होने पर, अपील अधिकारी अपीलार्थी को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् प्रतिसंहरण के आदेश की यधासंभव शीघ्रता के साथ पुष्टि कर सकेगा, उसे उपांतरित कर सकेगा या उलट सकेगा. आरजिस्ट्रीकरण का २५. ऐसी स्थापना का जिसको धारा २६ के अधीन यह अधिनियम लागू होता है नियोजक,-- (%) धाएता २१ के अधीन रजिस्ट्रीकृत किए जाने के लिए अपेक्षित ऐसी स्थापना की दशा में, किन्तु जो उस धारा के अधीन रजिस्ट्रीकृत नहीं की गई है; (w) ऐसी स्थापना की दशा में जिसके संबंध में रजिस्ट्रीकरण धारा २३ के अधीन प्रतिसंदत किया गया है तथां धार रद के अधीन ऐसी अपील को प्रस्तुत करने के लिए विहित कालावधि के भीतर ऐसे प्रतिसंदरण के आदेश के विरुद्ध कोई अपील प्रस्तुत नहीं की गई जहां ऐसी अपील इस प्रकार प्रस्तुत को गई है, ऐसी अपील खारिज कर दी गई है, यधास्थिति धारा २२ कौ उपधारा (१) में निर्दिष्ट कालावधि का अवसान हो जाने के पश्चात् या धारा २३ के अधीन रजिस्ट्रीकरण का प्रतिसंहरण होने के पश्चात् या धारा र४ के अधीन अपील प्रस्तुत करने की कालावधि का अवसान होने के पश्चात् या अपील के खारिज होने के पश्चात् स्थापना में असंगठित कर्मकार नियोजित नहीं करेगा. frerasy o र६. (९१) प्रत्येक नियोजक, मिसको स्थापदा का रजिस्ट्रीकरण धारा २६ के अधीन अपेक्षित है, प्रत्येक मास को अधिटाय, १५ तारोख के पूर्व उपधारा (२) में विनिर्टिप्ट बोर्ड को, उसके द्वारा पूर्व मास के दौरान असंगठित कर्मकारों को देय
(‘" 'सध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 16 जुलाई 2004 कट सजदूरी की 'पांच प्रतिशत से अनधिक ऐसे प्रतिशतता के समतुल्य राशि जैसी कि इस निभित राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की जाए, देगा. (२) कोई नियोजक उपधात (९) के अधीन अपना अधिदाय मध्यप्रदेश नगरीय असंगठित कर्मकार कल्याण बोर्ड या मध्यप्रदेश ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्याण बोर्ड को संदत कोगा जो इस बात पर निर्भर कोगा कि उसकी स्थापना कहां अवस्थित है, it क्षेत्र में या ग्रामीण क्षेत्र में. (३) उपधारा (१) के अधीन संदेव अधिदाय, सचिव या बोर्ड के ऐसे अन्य अधिकारी जिसे बोर्ड द्वारा इस निभधित विनिर्टिषप्ट किया जाए, के पक्ष में डिमांड ड्राफ्ट द्वारा संदत किया जाएगा जिसके साथ ऐसे प्ररूप में जैसा कि बोर्ड ट्रारा विनिर्टिप्ट किया जाए, विवाण पत्र संलान किया जाएगा. (४) उपधारा (१) के अधीन संदेय अभिदाय के परिणामस्वरूप, नियोजक द्वारा असंगठित कर्मकार को संदेव मजदूरी में से कोई कटौती नहीं को जाएगी. (५) यदि बोर्ड को यह राय है कि इस अधिनियम के अधीन उपधात (१) में विनिर्दिप्ट तारीख को नियोजक द्वारा देय किसी राशि का संदाय नहीं किया गया है तो वह एक मांग नोटिस ऐसे प्ररूप में जैसा कि विहित किया जाए, जारी करेगा जिसमें नियोजक से अपेक्षा कौ जाएगी कि वह एक मास के भीतर राशि जमा को या यह कारण बताएं कि क्यों न इसे उससे भू-राजस्व के बकाया के तौर पर वसूल कर लो जाए, (६) यदि उपधारा (५) के अधीन जारी नोटिस के अनुसरण में कोई नियोजक नोटिस में विनिर्टिप्ट कालावधि के भीतर रकम जमा करने में और साथ ही बोर्ड के समाधानप्रद रूप में कारण बताने में, असफल रहता है तो बोर्ड, संबंधित जिले के कलक्टर को एक प्रमाण-प३्र उसमें कथित रकम को वसूली भू-राजस्व कौ बकाया की तौर पर करते हेतु जारी कर सकेगा और तदुपरि कलक्टर उस रकम की भू-राजस्व की बकाया के तौर पर वसूली करने के लिए अग्रसर होगा और रकम को बोर्ड को विप्रेषित कर देगा: परन्तु यदि नियोजक उपधारा (५) के अधीन जारी नोटिस के प्रत्यु्त में कारण बताते हुए अभ्यावेदन प्रस्तुत कर देता है ठो ऐसे अभ्यावेदन पर विचार करने, ऐसी जांच जैसी कि आवश्यक समझी जाए, करने और अभ्यावेदन रदूद करने के कारण देते हुए विस्तृत आदेश पारित करने के बाद ही उपर्युक्तानुसार प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा, (७) उपधार (५) अऔऔर (६) के अधीन बोर्ड को शक्तियों का उसके सचिव द्वार, और ऐसे अन्य अधिकारियों द्वारा जो कि बोर्ड द्वात इस निभित्त प्राधिकृत किए जाएं, प्रयोग किया जाएगा. अध्याय-५ निरीक्षण २७. (१९) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, अपने ऐसे अधिकारियों, बोर्ड के अधिकारियों, और धारा ४४ के अधीन नियुक्त किए गए उसके (बोर्ड के) अधिफर्याओं के ऐसे अधिकरीयों को, जैसा सह उचित समझे इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए निरीक्षक के रूप में नियुक्त कर सकेगी और उन्हें ऐसी स्थनीय सीमाएँं समनुदेशित कर सकेगी जैसी कि वह ठचित समझे. (२) इस धाण के अधीन नियुक्त किया गया प्रत्येक निरीक्षक श्रम आयुक्त के नियंत्रण के अध्यधीन होगा और बह श्रम आयुक्त के साधारण नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अध्यधीन रहते हुए अपनों शक्तियों का प्रयोग करेगा और अपने कृत्यों का पालन करोगा, , (३) इस धारा के अधीन नियुक्त किया गया .प्रत्येक निरीक्षक, भारतीय टंड संहिता, १८६० (१८६० का ४५) को धारा २१ के अर्थ के अन्तर्गत लोक सेवक सपा जाएगा. 608 (13) निरीक्षकों =) जियुद्धित, 1o
%fl(m मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 16 जुलाई 2004 निरीक्षक w २८. (६) इस निभित बनाएं गए किन्हीं नियमों के अध्यधीन रहते हुए, कोई निरीक्षक, उन स्थानीय सीमाओं कै W, भीतर जिनके लिए उसे नियुक्त किया गया है तथा अध्याय-४ के उपबंधों को प्रवर्तित करने की दृष्टि से,-- (%) समस्त युक्तियुक्त समयों पर, अपने ऐसे सहायकों (यदि कोई हों), के साथ जो कि सरकारी या किसी स्थानीय था अन्य लोक प्राधिकारी की सेवा के व्यक्ति हों, किन्हों परिसरों था स्थान में जहां असंगठित कर्मकार नियोजित हैं या जहां से उन्हें (कर्मकारों को) कार्य दिया जाता है, किसी रजिस्टर या अधिलेख या नोटिस के जिनका वहां रखा जाना या प्रदर्शित किया जाना इस अधिनियम था किसी अन्य अधिनियम के द्वारा या उनके अधीन अपेक्षित है, परीक्षण के प्रयोजन के लिए प्रवेश कर सकेगा यथा उनकी तलाशी ले सकेगा; (ख) किसी ऐसे व्यक्ति का परीक्षण कर सकेगा जो उस परिसर या स्थान में पाया जाए, और जिसके यार में उसमें नियोजित असंगठित कर्मकार के होने का विश्वास करने के लिए उसके पास युक्तियुक्त कारण है या वहां उसे कार्य दिया जाता है; (ग) ... असंगठित कर्मकार को काम देने वाले व्यक्ति से, कोई सूचना देने की अपेक्षा कर सकेगा जिसका दिया जाना उसकी शक्ति के अधीन है और जो उन व्यक्तियों के नाप और पते से संबंधित है जिनके लिए कार्य दिया जाता है या जिनसे कार्य लिया जाता है और उक्त कार्य के लिए भुगतान किया जाता है; (w) ऐसे रजिस्टर, मजदूरी के अधिलेख या नोटिस अथवा उनके प्रभागों को प्रतियां अधिगृहीत करेगा या लेगा जो कि वह इस अधिनियम के अधीन अपराध के संबंध में सुसंगत समझे, जिसके बारे में उसे यह विश्वास करने का कारण है कि यह नियोजक द्वारा किया गया है; और (® T अन्य शक्तियों का प्रयोग करेगा जैसा कि विहित किया जाए: परन्तु इस उपधारा के अधीन शक्तियों का प्रयोग राज्य सरकार या श्रम आयुक्त द्वारा इस निमित जारी साधारण या विशेष आदेश के अनुसार किया जाएगा... - (२) कोई व्यक्ति जिससे उपधारा (१) के अधीन निरीक्षक द्वारा किसी दस्तावेख को प्रस्तुत करने या किसी जानकारी को देने कौ अपेक्षा की जाती है, वह भारतीय दंड संहिता, १८६० (१८६० का ४५) को धारा १७५ और १९७६ के अधीन अर्थ के अन्तर्गत ऐसा करने के लिए विधिक रूप से बाध्य समझा जाएगा, (३) दण्ड प्रक्रिया संहिता, १९७३ (१९७४ का २) के उपबंध जहां तक हो सके, उपधाण (१) के अधीन तलाशियों और अधिग्रहण पर उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वह उक्त संहिता की धारा ९४ के अधीन जारी प्राधिकारी के वारंट के अधीन तलाशियों और अधिग्रहण को लायू होते हैं. अध्याय-६ असंगठित कर्मकारों के कल्याण के लिए उपकर आदि संपत्ति के अंतरण पर २९. अचल सम्पत्ति के विक्रय, दान या बंधक से संबंधित लिखतों पर भारतीय स्टा-4 अधिनियम, १८९९ (१८९९ अतिरिक्त शुल्क. का २) के अधीन अधिरोपित शुल्क को, यथास्थिति, ऐसी सम्पत्ति के, मूल्य के, या बंधक की दशा में ऐसे लिखत द्वारा प्रतिभूत रकम के, एक प्रतिशत से अनधिक ऐसी दर से बदाया जाएगा, जैसी कि राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा, समय-समय पर, विनिर्दिष्ट कोर: परन्तु बंधक के संबंध में अधिरोपित ऐसा अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क, उस पर स्टॉम्प शुल्क की रकम से अधिक नहीं होगा:
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 16 जुलाई 2004 जाए —— e —— एच टटटटणएएए77ए7ए7777777एएए77ए77ए = - O 0 (_‘ परन्तु यह और कि भारतीय स्टाम्प अधिनियम, १८९९ या उसके अधीन बनाये गये नियमों के अधीन स्टाम्प शुल्क के भुगतान रो छूट प्राप्त किसी लिखत के संबंध में कोई अतिरिक्त शुल्क अधिरोपित नहीं किया जाएगा. ३०. मध्यप्रदेश सोटरयान कराधान अधिनियम, १९९१ को प्रथम अनुसूची में विनिर्दिष्ट सोटरयानों पर तिमाही कर को दर उस दर से बढ़ाई जाएगी जो पांच प्रतिशत से अधिक नहीं होगी जैसी ऱन्य सरकार, समय-समय पर, अधिसूचना द्वाण, विनिर्दिप्ट को. ३१९. (१) विक्रय को गई और प्रदाय की गईं प्रत्येक बन उत्पाद पर बन विभाग द्वारा ऐसे मूल्य के जिस पर ऐसा बन उत्पाद बेचा या प्रदाय किया जाता है, एक प्रतिशत से अनधिक ऐसी दर से कल्याण उपकर उदगृहीत और संगृहीत किया जाएगा जैसा कि राज्य सरकार अधिसूचना द्वार, समय-समय पर, विनिर्दिष्ट करे. (२) उपधाता (१) के अधीन उदगृहीत कल्याण उपकर, तत्समय प्रवृत किसी अन्य विधि के अधीन बन उत्पाद पर उदग्रहणोय किसी कर के अतिरिक्त होगा. (३) बन विधाग द्वारा विक्रय किये गये या प्रदाय किये गये बन उत्पाद के संबंध में उपधारा (१) के अधीन टेय कल्याण उपकर उस व्यक्ति द्वारा देय होगा जिसको वन उत्पाद विक्रय या प्रदाय किया जाता है और ऐसे विक्रय या प्रदाय से संबंधित बन विभाग के अधिकारी या कर्मचारी द्वारा ऐसे विक्रय या प्रदाय के समय संगृहीत किया जाएगा और वसूल किया जाएगा. स्पष्टीकरण.-- अभिव्यक्ति “बन बविधाग'' और “बत्र उत्पाद” का वही अर्थ होगा जो मध्यप्रदेश कराधान अधिनियम, १९८२ (क्रमांक १५ सन् १९८२) में उसे समनुदेशित किया गया हैं. ३२. राज्य सरकार द्वारा इस निमित जारी अधिसूचना द्वारा विनिर्दिहट की जाने वाली तारीख से खान और खनिज (विनियमतन और विकास) अधिनियम, १९५७ (१९८७ का सं. ६७) की धारा १५ की ठउपधारा (३) के अधीन मध्यप्रदेश गौण खनिज नियम, १९९६ को अनुसूची-१ में सम्मिलित गौण खनिज के संबंध में देय रायल्टी अथवा अनिवार्य भाटक के पांच प्रतिशत के बराबर रकम पृथक् रखी जाएगी तथा धारा ३३ के ठपबंधों के अनुसार अदा की जाएगी. ३३. (१) धारा र९, ३० तथा ३९६ के अधीन उद्ग्रहीत क्रमश: अविरिक्त स्टाम्प शुल्क, मोटर यान कर तथा कल्याण उपकर तथा धारा ३२ के अधीन पृथक् की गई रायल्टी या अनिवार्य भाटक के आगम को प्रथमत: संग्रहीत किया जाएगा और उसे संचित निधि में ऐसी रीति में जैसी कि विहित की जाए, जमा किया जाएगा. (२) राज्य सरकार प्रत्येक वित्तीय वर्ष के प्रारंभ होने पर विधि द्वारा किए गए सम्यक् विनियोग के परयात् पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष में उक्त धारा २९, ३० तथा ३१ के अधीन वसूल किए गए आगम तथा धारा ३२ के अधीन पृथक् रखी गई रकम के समतुल्य रकम को संचित निधि में से आहरित करेगी और इस प्रकार आहरित रकम को वितीय वर्ष कौ ३१ जुलाई तक था ८ के अधीन गठित निधियों में निम्नलिखित रीति में संदत करेगी और उक्त निधि में ऐसी जमा शशि राज्य को संचित निधि पर प्रभारित होगी :-- (एक) धारा ३१ तथा ३२ के अधीन बसूल को गई रकम मध्यप्रदेश ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्याण निधि में जमा को जाएगी; (दो). धारा ३० के अधीन बसूल कौ गई रकम मध्यप्रदेश नगरीय असंगठित कर्मकार कल्याण निधि में जमा को जाएगी; 608 (15) कदतिपय प्रथ्गों के चोटरयानों था अतिरिक्त कर. लग उत्पाद के जिक्र सा प्रदाप पा e 1८.
___——Jd——m (16) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 16 जुलाई 2004 अधिसूचित कृषि 'उपय के थिक्रष पा T TIRL wrur डालने दे; लिए अन्य अपपधों के लिए (सीन) ्न््न्र में विभाजित की जाएगी जैसी कि विहित की जाएं. ३४. (१) प्रत्येक अधिसूचित कृषि उपज, जिस पर मध्यप्रदेश कृषि उपज मंडी अधिनियप, १९७२ (क्रमांक र४ सन् १९७३) की धारा १९ के अधीन बाजाए फौस उदगृहीत की जाती है, के विक्रय पर कल्याण उपकर ऐसी दर से जो बाजार फौस के दस प्रतिशत से अधिक नहीं होगा, जैसा कि राज्य सरकार, समय-समय पर, अधिसूचना द्वारा वितिर्टिष करे, उदगृहीत किया जाएगा. (२) उपधारा (१) के अधीन कल्याण उपकार को उक्त धारा १९ के अधीन उदगृहीत एवं संगृहीत की जाने बालों बाजार फोस क्रे साथ मंडी समिति द्वारा संगृहीौत किया जाएगा. (३) कल्याण उपकर उसी व्यक्ति द्वार संदत किया जाएगा जो उक्त धारा १९ की उपधारा (२) के अधीन बाजार फोस संदत करने के दायी हैं. (४) मंडी समिति द्वारा प्रत्येक माह संगृहीत कल्याण उपकर कौ रकम मध्यप्रदेश प्रापीण असंगठित कर्मकार कल्याण बोर्ड को पश्चात्वर्ती माह की १५ तारीख तक प्रेषित को जाएगी तथा बोर्ड इस प्रकार प्राप्त को गई समस्त रकम को सध्यप्रदेश ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्याण निधि में जमा कोगा. (५) मंडी सपिति द्वारा कल्याण उपकर के संप्रहण, उसका लेखा रखने तथा बोर्ड को अंतरण करने की प्रक्रिया ऐसो होगी जैसी कि विहित की जाए, स्पष्टीकरण.-- अभिव्यक्ति “मंडी समिति", “बाजार फीस'' तथा “ अधिसूचित कृषि उपज'' के वही अर्थ होंगे जो मध्यप्रदेश कृषि उपज मंडी अधिनियम, १९७२ (क्रमांक २४ सन् १९७३) में क्रमश: नके लिए समनुदेशित किये गये हैं. अध्याय-७ 'गास्ति तथा प्रकिया ३५. (१) जो कोई किसी निरीक्षक को इस अधिनियम के अधीन उसके कर्तव्यों का निर्वहन करने में बाधा द्ालेगा या किसी स्थापना के संबंध में इस अधिनियम द्वाय या उसके अधीन प्राधिकृत किसी निरीक्षण, परीक्षण, जांच या अन्वेषण करने के लिए युक्तियुक्त सुविंधा देने से इंकार करेगा या जानबूझकर उपेक्षा करेगा, वह ऐसे कारावास से जिसकी अवधि तीन मास तक हो सकेगी, या जुर्मानि से, जो एक हजार रुपये तक हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा. (२) जो कोई, किसी निरीक्षक द्वारा मांग किए जाते पर इस अधिनियम के अनुसरण में रखे गये किसी रजिस्टर या अन्य दस्तावेज को पेश करने से जानबूझकर इन्कार करेगा अथवा किसी ऐसी बात को निवारित करेगा था निवारित करने का प्रयास करेगा अथवा कोई ऐसी बात करेगा जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि उससे किसी व्यक्ति के, इस अधिनियम के अधीन अपने कर्तव्यों के अनुसरण में कार्य करने वाले किसी निरीक्षक के समझष उपसंजात होने से, या उसके द्वारा परीक्षण किये जाने से निवारित किए जाने की संभावना है, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्मने से जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा. ३६. (१) जो कोई, इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध का था इसके अधीन बनाएं गए किन्हीं नियमों का उल्लंघन करेगा अधवा इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध का या इसके अधीन बनाएं गए किन्हों नियमों का अनुपालन करने में असफल रहेगा वह, यथास्थिति, ऐसे प्रत्येक उल्लंघन या असफलता के लिए जुर्माने से, जो एक हजाए रुपये तक का हो सकेगा, और यधास्थिति, जारी रहने वाले उल्लंघन या असफलता की दशा में, ऐसे अतिरिक्त जुर्माने से, जो ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिसके टौरान ऐसा उल्वंघन था असफलता ऐसे प्रथम उल्लंघन था असफलता के लिए टोषसिद्धि के पश्चात् जारी रहती है एक सी रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा!
vy मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 16 जुलाई 2004 ह््. उपधारा (१) के अधीन कोई शास्ति श्रप आयुक्त द्वारा था सदायक श्रम आयुक्त से अनिम्न श्रेणी के ऐसे अन्य अधिकारी द्वार, जिसे राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में अधिसूचना द्वारा सशक्त किया जाए, अधिरोपित की जा सकेगी, (३) कोई शास्ति तब तक अधिरोपित नहीं को जाएगी, जब तक कि संबंधित व्यक्ति को लिखित सूचता,-- (कक). उन आधारों की, जिन पर शास्ति अधिरोपित करने का प्रस्ताव है, जानकारी देते हुए; और (@) उसे ऐसे युक्ति-युक्त समय के भोतर, जो उसमें उल्लिखित शास्ति के अधिरोपण के बारे में सूचना में विनिर्दिह किया जाए, लिखित अभ्यावेदन करने का और यदि बह ऐसी बांछा करता हैं तो उस मापले में उसकी सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देते हुए, नहीं दे दी जाती हैं. (४) इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी अन्य उपबंध पर प्रतिकूल प्रभाव ढाले बिना, श्रम आयुक्त और ऐसे अन्य अधिकारियों को, जो उपधारा (२) के अधीन सशक्त किए जाएं, निम्नलिखित विषयों को बाबत् इस धारा के अधीन किन्हों शक्तियों का प्रयोग करते समय सिविल प्रक्रिया संहिता, १९०८ (१९०८ का ५) के अधीन सिविल न्यायालय की सभी शक्तियां प्राप्त होंगी, अर्थात् :-- (%) साकियों को सपन करना और हाजिर काना; (ख). किसी दस्तावेज के प्रकट और पेश करने को अपेक्षा काना; (m) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रति की अध्यपेक्षा करना; (प).. शपध-पत्रों पर साधष्य ग्रहण करना; और (%) साकियों या दस्तावेजों के परीक्षण के लिए कमीशन जारी काना, (५) इस धारा में अत्तर्वि्ट किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह संबंधित व्यक्ति को यथास्थिति, इस अधिनियम या किसी अन्य विधि दट्वाण दण्डनीय बनाए गए किसी अपराध के लिए इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन या किसी अन्य विधि के अधीन अधियोजित किए जाने से अधवा इस अधिनियम या किसी ऐसे विधि के अधीन उस शास्ति या दण्ड से जो इस धारा ट्वारा उस अपराध के लिए उपबंधित है, कोई अन्य या उच्चतर शास्ति के लिए दायी होने से निवारित करती है : परन्तु किसी व्यक्ति को एक हो अपराध के लिए दो बार टंडित नहीं किया जाएगा. ३७. (१) धाण ३६ के अधीन किसी शास्ति के अधिरोपण से व्यधित कोई व्यक्ति,-- (%) जहां शास्ति श्रम आयुक्त द्वारा अधिरोपित कौ गई है, वहां रास्य सरकार को; (ख) जहां शास्ति श्रम आयुक्त के अधीनस्थ किसी अधिकारी द्वारा अधिर्ेपित की गई है, वहां ऐसे प्राधिकारी को, जो विहित किया जाए, ऐसी शॉस्ति के अधिरोपण की ऐसे व्यक्ति को संसूचना की तारीख से तीन मास को कालावधि के भौतर अपील कर सकेगा : पान्तु यदि, यधास्थिति राज्य सरकार या विहित प्राधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि अपीला्ी, तीन मास को उक्त कालावधि के भीतर अपील करने से पर्याप्त कारण से निवारित किया गया था तो वह तोन मास को अतिरिक्त कालावधि के भीतर ऐसी अपील करने के लिए अनुज्ञात कर सकेगा. 608 (17) 11५
608 (18) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 16 जुलाई 2004 (२) “जज रे - और ऐसी अधिरिकत जांच, यदि कोई हो, जो वह आवश्यक सपझे, करते के पश्चात् उस आदेश की, जिसके विरुद्ध अपील की गई है, पुष्टि करते हुए, उसे उपान्तरित करते हुए या उसे उलटते हुए ऐसा आदेश पारित कर सकेगा, जो वह ठौक समझे अथवा मामले को ऐसे निर्देश के साथ, जो वह उचित समझे, नए विनिश्वय के लिए वापस भेज सकेगा. et W) g ३८. जहां धारा ३६ के अधीन किसी व्यक्ति पर अधिरोपित किसी जुर्मते का संदाय नहीं किया जाता है वहाँ,-- (एक). यधास्थिति, श्रम आयुक्त या धारा ३६ को उपधारा (२) के अधीन सशक्त अन्य अधिकार इस प्रकार संदेय रकम को, ऐसे व्यक्ति के पाल को, जो उसके नियंत्रण के अधीन है, प्रतिधृत करके या उसका विक्रय करके वसूल कर सकेगा; या (दो). यदि रकम खण्ड (एक) में उपबंधित रीति से ऐसे व्यक्ति से वसूल नहीं की जा सकती है, तो यधास्थिति, श्रम आयुर् या रान्य सरकार द्वारा सशक्त अधिकारी ऐसे व्यक्ति से शोध्य रकम को विनिर्दिष्ट करते हुए एक प्रमाण-पत्र तैयार कर सकेगा जिस पर उसके हस्ताक्षर होंगे और उसे उस जिले के कलक्टर को जिसमें ऐसा व्यक्ति किसी संपत्ति का स्वामी है या निवास करता है या अपना कारबार करता है, भेजेगा और उक्त कलब्टर ऐसे प्रमाण-पत्र के प्राप्त होने पर उसमें विनिर्दिष्ट रकप को ऐसे व्यक्ति से वसूल करने के लिए यैसे ही अग्रसर होगा मानों वह भू-राजस्व को बकाया है. कम्पनियों द्वरा ३९. (१) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया हो, वहां ऐसे प्रत्येक T व्यक्ति, जो 78 अपराध के किए जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए, उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही बह कम्पनी भी, ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और टष्डित किए जाने के भागी होंगे : परन्तु इस उपधारा में अन्तर्वि्ट कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी. (२) उपंधाणा (१) में अत्तर्विप्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध, किसी कम्पनी द्वारा किया गया हो और यह साबित हो जाए कि वह -अपयाध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी कौ सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वर्ष ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिय या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तदूनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किये जाने का भागी होगा. स्पष्टीकरण.--इस थार के प्रयोजनों के लिए,-- (%) “कम्पत्री” से कोई निगभित निकाय अधिप्रेत है और इसके अंतर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम है; या () फर्म के संबंध में "निदेशक से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है. अपपधों का संड्ान, Yo, (g)dtmmm_mtmmraamwmnmwm सरकार द्वारा इस निमित प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी की पूर्व लिखित मंजूरी से,-- (%) किसी निरीक्षक go; या () सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, १८६० (१८६० का २६) के अधीन रजिस्ट्रौीकृत किसी स्वैच्छिक संगठन के पदाधिकारी द्वारा; या
\y _ सध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 16 जुलाई 2004... 608 (17) ह्. उपधात (१) के अधीन कोई शास्ति श्रम आयुक्त द्वाता था सहायक श्रम आयुक्त से अनिम्न श्रेणी के ऐसे अन्य अधिकारी द्वार, जिसे राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में अधिसूचना द्वाद सशक्त किया जाए, अधिरोपित की जा 'सकेगी. (३) कोई शास्ति तब तक अधिरेपित नहीं की जाएगी, जब तक कि संबंधित व्यक्ति को लिखित सूचना,-- (%) उन आधारों कौ, जिन पर शास्ति अधिरेपित करने का प्रस्ताव है, जानकारी देते हुए; और (') 78 @ युक्ति-युक्त समय के भोतर, जो उसमें उल्लिखित शास्ति के अधिरोपण के बारे में सूचना में चिनिर्दिए किया जाए, लिखित अध्यावेदन करने का और यदि वह ऐसी बांऊा करता हैं तो उस मामले में उसकी सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देते हुए, नहीं दे दी "जाती है. (४) इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी अन्य उपबंध पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, श्रम आयुक्त और ऐसे अन्य अधिकारियों को, जो उपधारा (र) के अधीन सशक्त किए जाएं, निम्नलिखित विषयों की बाबत इस धारा के अधौन किन्हों शक्तियों का प्रयोग करते समय सिविल प्रक्रिया संहिता, १९०८ (१९०८ का ५) के अधीन सिविल न्यायालय को सभी शक्तियां प्राप्त होंगी, अर्थात् :-- (%) साशियों को समन करना और हाजिर काना; (ख).. किसी दस्तावेज के प्रकट और पेश करने की अपेक्षा करना; (ग).. किसी न्यायालय या कार्यालय से किसो लोक अधिलेख या उसको प्रति को अध्यपेक्षा करना; (घप).. शपथ-पत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना; और (%) साक्षियों या दस्तावेजों के परीक्षण के लिए कमीशन जारी करना. (५) इस धारा में अत्तर्विष्ट किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह संबंधित व्यक्ति को यधास्थिति, इस अधिनियम या किसी अन्य fafu gro दण्डनीय बनाएं गए किसी अपराध के लिए इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन या किसी अन्य विधि के अधीन अभियोजित किए जाने से अथवा इस अधिनियम या किसी ऐसे विधि के अधीन उस शास्ति या दण्ड से जो इस - धारा द्वारा उस अपराध के लिए उपबंधित है, कोई अन्य था उच्चतर शास्ति के लिए दायी होने से निवारित करती है : परन्तु किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए दो बार दंडित नहीं किया जाएगा. ३७. (१) धारा ३६ के अधीन किसी शास्ति के अधिरोपण से व्यधित कोई व्यक्ति,-- अपील, (%) जहां शास्ति श्रम आयुक्त द्वारा अधिरोपित को गईं है, वहां रास्य सरकार को; (ख) जहां शास्ति श्रम आयुक्त के अधीनस्थ किसी अधिकारी द्वारा अधिरोपित को गईं है, वहां ऐसे प्राधिकारी को, जो विहित किया जाए, ऐसी शॉस्ति के अधिरोपण की ऐसे व्यक्ति को संसूचना की तारीख से तीन मास को कालावधि के भीतर अपील कर सकेगा : परन्तु यदि, यधास्थिति राज्य सरकार या विहित प्राधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि अपीलाधों, तीन मास की उक्त कालावधि के भीतर अपील करने से पर्याप्त कारण से निवारित किया गया था तो बह तीन मास को अतिरिक्त कालावधि के भोतर ऐसी अपील करने के लिए अनुज्ञात कर सकेगा.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 16 जुलाई 2004 608 (19) (ग).. व्यवसाय संघ अधिनियम, १९२६ (१९२६ का १६) के अधीन किसी रजिस्ट्रीकृत किसी संबंधित व्यवसाय संप के किसी पदाधिकारी द्वारा, किए गए परिवाद पर ही करेगा अन्यथा नहीं. (रे) प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय से अगर कोई न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का जिचाएण नहीं कोगा. ४१. कोई भी न्यायालय, इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय अपराध का संज्ञान तब तक नहीं कोगा जब तक कि उसके लिए परिवाद उस तारीख से, जिसको अभिकथित अपराध के किए जाने को जानकारी, यधथास्थिति, निरीक्षक, किसी स्वैच्छिक संगठन के किसी पदाधिकारी या संबंधित किसी व्यवसाय संघ के किसी पदाधिकारी को हुई, तीन मास के भौतर नहीं कर दिया जाता हैं. अध्याय-८ प्रकीर्ण '४रे.. राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा तथा ऐसी शर्तों के अध्यधीन रहते हुए तथा ऐसी कालावधि के लिए जो अधिसूचना में विनिर्दिह की जाए, इस अधिनियम के समस्त उपबंधों था किसी उपबंध के प्रवर्तन से किसी अनुसूचित नियोजन में या किसी स्थापना में या किसी स्थापना के किसी भाग थें नियोजित समस्त असंगठित कर्मकारों या उनके किसी वर्ग या वर्गों को छूट दे सकेगी यदि सरकार की राय में समस्त ऐसे असंगठित कर्मकार या कर्मकारं का ऐसा वर्ग या ऐसे वर्ग ऐसी प्रसुविधाओं का उपभोग कर रहे हैं जो कि संपूर्ण रूप में ऐसे असंगठित कर्मकारों के लिए उससे कम अनुकूल नहीं है जो कि इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उपबंधित है : परन्तु राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, किसी भी समय, विनिर्दिष्ट किए जाने वाले कारणों से उपयोक्त अधिसूचना को विखण्डित कर सकेगी. ४३: राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, ऐसा करने के अपने आशय की कम से कम तीन माह की सूचना देने के पश्चात् बैसी ही अधिसूचना द्वारा अनुसूची के किसी भी मद को उपांतरित कर सकेगी या ऐसे किसी नियोजन को, जिसके संबंध में यह राय हो कि उसे इस अधिनियम के उपबंध लागू होना चाहिए, अनुसूची में जोड़ सकेगी और तब यथा- उपांतरित या जोड़े गये ऐसे नियोजन को इस अधिनियम के ठपबंध लागू होंगे. ४४. (१) इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी थोर्ड यथास्थिति उपधारा (२) या उपधारा (३) में विनिर्दिष्ट निकायों में से एक या अधिक निकायों को अपनी ओर से निम्नलिखित समस्त कृत्यों या किसी कृत्य का पालन करने के लिए अपने अभिकर्ता नियुक्त कर सकेगी, अर्थात् :-- (एक) सदस्यों और/या नियोजकों का रजिस्ट्रीकरण, (दो). सदस्यों और/या नियोजकों से अधिदाय का संग्रहण, (तीन) सदस्यों को परिचय-पत्र का जारी करना तथा उनका नवीनीकरण, (चार). प्रसुविधा प्रदान करने के लिए सदस्यों से आवेदन के प्ररूप प्राप्त करना, ऐसे आवेदनों को प्रक्रिया में लाना तथा प्रसुविधा की मंजूरी देना, (पांच) बोर्ड ट्वाता या उसकी और से दिये गये किसी ऋण या अध्िम को किश्तों का संग्रहण: परत्तु नियोजकों के रजिस्ट्रीकरण तथा उतके अधिदायों के संप्रहण का कृत्य केवल उन्हों स्थानीय निकायों को समनुदेशित किया जाएगा, जिन्हें अधिकर्ता के रूप में नियुक्त किया जाए, अधियोजन को छूट देने बे शक्ति eyt W v अधिकर्ताओं को नियुक्त काने करो लोई जी शक्ति, W
vy 608 (20) I | | e —————————————————————————————————————————————e मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 16 जुलाई 2004 (२) न र उपधाण (६) के अधीन अधिकर्ता के रूप में नियुक्त कर सकेगा :-- (एक) (दो) (तौन) (चार) (पांच) (छह) (सात) (आठ) (नौ) मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, १९९३ (क्रमांक १ सन् १९९३) के अधीन गठित जिला या जनपद पंचायत; मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, १९६१ (क्रमांक ३७ सन् १९६१) के अधीन गठित नगर पंचायत; मध्यप्रदेश राज्य लघु बनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ या उसका कोई घटक जिला सहकारी संघ; मध्यप्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ या उसका कोई घटक संभधागीय सहकारी संघ; मध्यप्रदेश राज्य सहकारी मत्स्य महासंप या उसका कोई पटक जिला सहकारी संघ; मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी अधिनियम, १९६० (क्रमांक १७ सन् १९६१) या मध्यप्रदेश स्वायत सहकारिता अधिनियम, १९९९ (क्रमांक र सन् २०००) के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोई अन्य सहकारी सोसाइटी; किसी केन्द्रीय या राज्य विधान के अधीन गठित कोई श्रप कल्याण बोर्ट चाहे वह किसी भी नाम से जाना जाता हो; व्यवसाय संघ अधिनियम, १९२६ (१९२६ का १६) के अधीन रजिस्ट्रीकृत व्यवसाय संघ; मध्यप्रदेश सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, १९७३ (क्रमांक ४४ सन् १९७३) के अधीन रजिस्ट्री कृत तथा असंगठित कर्मकारों के कल्याण के लिए कार्य करने वाली स्वैच्छिक एजेन्सी, (३) मध्यप्रदेश नगरीय असंगठित कर्मकार कल्याण बोर्ड उपधारा (६) के अधीन निम्नलिखित निकार्यों में से किसी. एक या अधिक को अधिकर्ता नियुक्त कर सकेगा, अर्थात् :-- (एक) (दो) (तीन) (चार) (पांच) (छह) मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम, १९५६ (क्रमांक र३ सन् १९५६) के अधीन गठित नगरपालिक निगम या मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियप, १९६१ (क्रमांक ३७ सन् १९६१) के अधीन गठित नगरपालिका परिषद्; जिला नगरीय विकास अभिकरण; मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी अधिनियम, १९६० (क्रमांक १७ सन् १९६१) या मध्यप्रदेश स्वायत्त सहकारिता अधिनियम, १९९९ (क्रमांक रे सन् २०००) के अधीन रजिस्ट्रीकृत सहकारी सोसाइटी; केन्द्रीय या राज्य विधान के अधीन गठित कोई श्रम कल्याण बोर्ड जो किसी भी नाम से जाना जाता हो; स्यवसाय संघ अधिनियम, १९२६ (१९२६ का १६) के अधीन रजिस्ट्रीकृत व्यवसाय संघ; या मध्यप्रदेश सोसाइटी रजिस्ट्रीककण अधिनियम, १९७३ (क्रमांक ४४ सन् १९७३) के अधीन रजिस्ट्रीकृत तथा असंगठित कर्मकारों के कल्याण के लिए कार्य करने बाली कोई स्वैच्ठिक एजेन्सी. (४) नगरपालिक निगम, नगरपालिका परिषद्, नगर पंचायत, जिला पंचायत तथा जनपद पंचायत से भिन्न किसी अन्य निकाय को यधास्थिति उपधारा (२) या उपधारा (३) के अधीन अपन अधिकर्ता नियुक्त करने के पूर्व बोर्ड ऐसे निकाय को पूर्व सहमति प्राप्त करेगा. 7. -
11% दर 608 (21) ' टटटििििययययििय्िनयययिियिििििदििितिि िसिियिि्ििसिसि्ंँं्क्रिकओ्िक्रिद्ध---ि््रिय्यय — - (५) बोर्ड अपने अधिकर्ताओं को नियुक्ति, उनके कार्यकरण तथा ऐसे अधिकर्ताओं के बोर्ट से संबंध को विनियपित करने के लिए विनियम बना सकेगा. अप... बोर्ड, साधाण या विशेष आदेश द्वारा बोर्ड के अध्यक्ष (चेपरपर्सन) या किसी अन्य सदस्य को या सचिव या किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी को ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के, यदि कोई हों, अध्यधीन रहते हुए जो उक्त आदेश में बिनिर्दि्ट को जाएं, इस अधिनियम के अधीन अपनी ऐसी शक्तियों और कर्तव्यों को, जिन्हें बह आवश्यक समझे, प्रत्यायोजित कर सकेगा. H ६... (१) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियम में अत्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जिला योजना समिति शिला घोजनका सचिति का यह कर्तव्य होगा कि वह जिले में इस अधिनियम के कार्यान्वयन का पुनर्थिलोकन तथा अनुश्रवण प्रत्येक उदह मास द्वारा जिले. थे में कम से कम एक बार अपने समप्मसिलन में को. अधिनियम के कार्षान्ययतन कार अनुभ्जणा किया ' (२) उपधारा (१) में निर्दिष्ट प्रत्येक पुनर्विलोकन सम्मिलन में समिति के सदस्यों के अलावा (क) असंगठित कर्मकारों, (ख) उनके नियोजकों, और (ग) जिले में स्थित विशेषज्ञों, सक्रिय कार्यकर्ताओं एक्टिविस्ट्स तथा स्वैच्छिक ऐजेंसियों में से प्रत्येक के कम से कम तीन तथा अधिक से अधिक पांच प्रतिनिधियों को *' हितधारी'' (स्टेकहोल्डर) के रूप में उपस्थित होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा. (३) उपधाणा (२) में निर्दिष्ट '* हितधारी " ( स्टेकहोल्डर) को सम्मिलन में विचार-विमर्श में भाग लेने का अधिकार होगा किन्तु सत देने का अधिकार नहीं होगा. (४) उपधाण (२) में निर्दिष्ट “ हितधारी ' (स्टेकडोल्डर) समिति के" अध्यक्ष द्वारा उसके सदस्य सचिव के पणमर्श से एक थार में दो वर्ष की कालावधि के लिए नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे : परन्तु किसी हितधारी (स्टेकहोल्डर) का कार्यकाल उस समय तक चालू रहेगा जब तक कि उसका उत्तराधिकारी नामनिर्दिष्ट 4 कर दिए जाए, ' (५) जिला योजना समिति उपधारा (१) में निर्टिष्ट अपने कर्दव्य किसी उपसमिति को समनुदेशित कर सकेगी : 'परत्तु उपसमिति द्वारा ऐसी उप समिति की प्रत्येक पुनर्विलोकन सप्मिलन में हितधारियों (स्टेकहोल्डर्स) को भी उपस्थित होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा. स्पष्टीकरण.--(१) इस धागा के प्रयोजन के लिए “जिला योजना समिति” और उसकी *' उपसभिति”' से अभिप्रेत है मध्यप्रदेश जिला योजना समिति अधिनियम, १९९५ (क्रमांक १९ सन् १९९५) की क्रमश: धारा ३ तथा ९ के अधीन गठित सपिति या उपसपिति. (२) उपधाण (२) के प्रयोजनों के लिए शब्द “सदस्यों” में उपरपुक्त अधिनियम की धाण ५ में निर्टिप्ट विशेष आमंत्रित भी सम्मिलित हैं. ४७, बोर्ड, सपय-समय पर राज्य सरकार को ऐसी विवरणियां देगा जिनकी वह अपेक्षा करे. चिजाणियां, ४८. (१) इस अधिधियम अथवा उपके अधीन बनाएं गए किसी नियम या किए गए आदेश के अनुसरण में _ सद भावपूर्वक की सद्भावपूर्वक को गई या को जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए, कोई भी वाद, अधियोजन या अन्य विधिक. गईं कर्रवाई के लिए कार्यवाही, किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी. W
9 o8(2) मध्यप्रदेश राजपत, दिशंक 16 जुलाई 2004... ¥ (२) न्ल्ल्स्ललल्ल्च सदूभावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के होते हुए था हो सकते वाले किसी नुकसान के लिए, कोई भी अधियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही, राज्य सरकार, किसी बोर्ड या इस अधिनियम के अधीन गठित समितियों या ऐसे बोर्ड या किसी सदस्य या राज्य सरकार या बोर्ड के किसी अधिकारी या कर्मचारी या सरकार या किसी बोर्ड या समिति द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी. निदेश देने जते शज्य ४९. राज्य सरकार किसी बोर्ड को इस अधिनियप के उपबंधों को कार्यान्वित काने के बारे में निदेश दे सकेगी. साकार की शक्ति कठिनाइयों को दूर ५०. यदि इस-अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो राज्य सरकार, राजपत्र करने की शक्ति... सें प्रकाशित e T, ऐसे उपबंध कर सकेगी जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों और जो उस कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत होते हों : पा्तु ऐसा कोई आदेश, इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तारीख से दो वर्ष को समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा. नियस छताने करी ५१. (१) रास्य सरकार, अधिसूचना द्वार, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यात्वित करने के लिए नियम शबति, झरना सकेगी. (२) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति कौ व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हों विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात् :-- (कक). धारा ३ की उपधारा (४) के अधीन बोर्ड के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों को नियुक्ति के निबन्धन तथा शर्तें, उनको संदेव वेतन तथा अन्य भत्ते और उनके पदों में आकस्मिक नियुक्तियों को भाते की रीति; . (@) धात ५ को उपधारा (१) के अधीन बोर्ड के सम्मिलन का समय और स्थान तथा ऐसे सम्मिलन में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया के नियम जिनके अन्तर्गत कारबार के संव्यवहार के लिए आवश्यक गणपूर्ति भी है; (ग)... प्रसुविधा, जो धारा ७ को उपधारा (२) के अधीन दी जाएं; (प).. धारा ७ की उपधारा (५) के खण्ड (ख) के अधीन स्थानीय प्राधिकारियों और कर्मचारियों को संदेय सहायता अनुदान की सीमा; ) (रु)... वह प्ररूप, जिसयें और वह सपय जिसके भीतर धारा १० के अधीन बोर्ड का बजट तैयार किया जाएगा और सरकार को भेजा जाएगा; (च) बह प्ररूप जिसमें और वह समय जिसके भीतर थारा ११ के अधीन बोर्ड की वार्षिक रिपोर्ट राज्य सरकार को प्रस्तुत की जाएगी; (७)... थाण १२ की डपधारा (३) के अधीन लेखाओं के बार्षिक विवरण का प्ररूप और बह ठारीख जिसके पूर्व उपधारा (३) के अधीन संपरीक्षक की रिपोर्ट के साथ लेखाओं की संपरीक्षित प्रति दी जाएगी; (%) उन रजिस्टरों का प्ररूप रो धारा १४ की उपधाण (७) के अधीन संधारित किए जाएंगे; (झ) वे प्रसुविधाएं, जो धारा १६ की उपधाय (२) के अधीन दो जा सकेंगी; (जज). उन रजिस्टरों का प्ररूप जो धारा १७ के अधीन नियोजक ट्वारा संधारित किए जाएंगे; (2) धारा २२ को उपधारा (२) के अधीन आवेदन का प्ररूप, वे विशिष्टियां जो उसमें होंगी और संद्त की जाने याली फीस;
(3) (%) (®) () ([) (9) (द) (घ) (न) गा मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 16 जुलाई 2004 धारा ररे की उपधारा (३) के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र का प्ररूप, बह समय जिसके भीतर और वे शर्तें जिनके अध्यधीन रहते हुए ऐसा प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा; यह प्ररूप जिसमें स्वाभित्व या प्रबंध में परिवर्तन या अन्य विशिष्टियों की सूचना थारा २२ की ठपधारा (४) के अधीन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को दी जाएंगी; वह प्ररूप जिसमें धारा २६ की उपधारा (५) के अधीन बोर्ड द्वारा नियोजक को मांग सूचना जारी की जाएगी; ये शक्तियां जिनका धारा २० की उपधारा (१) के खण्ड (ढ) के अधीन किसी निरीक्षक द्वारा प्रयोग किया जा सकेगा; वह रीति जिसमें क्रमश: धारा र९, ३० तथा ३१६ के अधीन ठद्गृहीत किया गया अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क, मोटरयान कर तथा कल्याण उपकर और धारा 32 के अधीन पृथक् रखी गयी रायल्टी या अनिवार्य भाटक संग्रहीत तथा राज्य की संचित निधि में जमा किया जाएगा; वह रीति जिसमें धारा र९ के अधीन वसूल की गई रकम धारा ३३ के अधीन दो निधियों के बीच प्रभाजित की जाएगी; धारा ३४ की उपधारा (५) के अधीन कल्याण उपकर के संग्रहण तथा लेखा रखने और उसे बोर्ड को अंतरित करने की प्रक्रिया; वह प्राधिकारी जिसे धारा ३७ की उपधारा (१) के अधीन अपील की जाएगी; कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना अपेक्ित है या विहित किया जाए, (३) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीप्र राज्य विधान सभा के समक्ष रखा जाएगा. ५२. (१) बोर्ड, राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से अपने कारबार को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए ऐसे विनियम बना सकेगा जो इस अधिनियप या इसके अधीन बनाए गए नियमों से संगत हों. (२) विशिष्टतया और उपधाण (१) को शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित समस्त या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थाद् :-- (%) () बोर्ड के सचिव तथा अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की धारा ४ की ठपधारा (३) के अधीन नियुक्ति का ढंग, सेवा के निर्बंधन तथा शर्तें और उनको संदेव वेतन तथा भत्ते; बोर्ड को उपसमितियों का गठन, बोर्ड के कृत्य तथा शक्तियां जो ऐसी उपसमितियां प्रयोग करें तथा बह रीति जिसमें वह ऐसा कर सकती है : परन्तु बोर्ड की प्रत्येक उपसपिति में प्रतिनिधित्व कर रहे असंगठित कर्मकारों के सदस्य तथा उनके नियोजकों (ग) को सदैव समान संख्या समाविष्ट होगी; बह प्ररूप, जिसमें सदस्य के रूप में रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन धारा १४ को उपधारा (३) के अधीन किया जाएगा; 608 (23) चिनियम खताने को
12 608 (24) (W) @ (च) (७) (ज) (झ) विरुद्ध अपीलों की सुनवाई के लिए सक्षम होंगे; ey \ वह प्ररूप, जिसमें धारा १५ के अधीन सदस्यों को परिचय-पत्र जारी किए जाएंगे; सदस्यों के धिन्न-धिन्न प्रवर्गो द्वार देय अधिदाय की दरें तथा उनके संग्रहण की रीति; बोर्ड को नियोजकों के अभिदाय के भुगतान का दंग; धारा ४४ के अधीन अधिकर्ताओं की नियुक्ति के 'लिए प्रक्रिया, उनके कृत्यों की प्रक्रिया तथा दुह रीति जिसमें बोर्ड उनके कामकाज का पर्यवेक्षण करेगा. चोई द्वारा स्कीमों का ५३. (१) बोर्ड, राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से धारा ७ की उपधारा (२) के अधीन सदस्यों को प्रसुविधा तैयार किया जाना... देने के लिए स्कीम तैयार कर सकेगा. (२) स्कौम में निम्नलिखित विषयों के बारे में उपबंध किए जा सकेंगे, अर्थात् :-- (%) (ख) (ग) (%) (® () प्रसुविधा का प्रकार; पात्रता की शर्तें; व्यक्ति जिसे प्रसुविधा देय होगी; प्रसुविधा देने के लिए माप या दौं; आवेदन करने के लिए प्रक्रिया तथा प्ररूप; मंजूरी के लिये प्रक्रिया तथा वह सक्षम प्राधिकारी जो मंजूरी प्रदान करेगा; (छ).. संवितरण की प्रक्रिया; (W) . निबन्धन तथा शर्तें जिनके अध्यधीन रहते हुए प्रसुविधा दी जाएंगी; और (झ) कोई अन्य आनुष॑ंगिक विषय, कतिपय विधियों की ५४. इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट कोई भी बात राज्य में की किसी तत्स्थानी विधि के प्रवर्तन को प्रभावित नहीं ब्यावृत्ति, रूरेगी जिसमें इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन असंगठित कर्मकारों के लिए उपबंधित कल्याण स्कौम से अधिक हितकारी ठपबंध है.
2! 29 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 16 जुलाई 2004 608 (25) ) अनुसूची [धाण र (त) देखें] भाग-एक कृषि में नियोजन जिसमें सम्मिलित है उद्यानिकी तथा कृषि प्रसंस्करण. दुग्ध-उद्योग (डेरी), मुर्गीपालन, सुअरपालन तथा अन्य पशुपालन में नियोजन. मछलौपालन में नियोजन, वानिकी में नियोजन जिसमें सम्मिलित है मुख्य तथा गौण वन उपज के उत्खनन तथा संग्रहण से संबंधित क्रियाकलाप., रेशम-उत्पादन में नियोजन. ही हु 2 टू टू भाग-दो L. लेटराइट गोलाश्म मृत्तिका का निकाला जाना, भवन का पत्थर, सड़क की गिट्टी, बजरी, मुरम, रेत तथा मिट्टी खदान क्रिया तथा उत्खनन में नियोजन. र. पत्थर को तोड़ने तथा दलने में नियोजन, 3 पकी ईंट तथा टाइल बनाने में नियोजन. भाग-तीन १. (क) किसी बाजार या दुकान या डिपो या कारखाना या भांडागार या गोदाम या किसी अन्य स्थापना, एवं (ख) मध्यप्रदेश कृषि-ठपज मंडी अधिनियम,१९७२ (क्रमांक र४ सन् १९७३) के अधीन गठित मण्डी समितियों के निवंत्रणाधीन कोई बाजार; में लदाई-उतराई, देर लगाने (स्टेकिंग), पैकिंग करने, वहन करने, तौलने, मापने और ऐसे ही अन्य शारीरिक कार्य, जिसमें उसको तैयारी तथा अन्य संसक्त कार्य शाधिल हैं, में नियोजन. R सार्वजनिक परिवहन यानों में माल की लदाई या उनसे माल की उतराई से संबंधित तथा कोई अन्य आनुषंगिक या संसक्त प्रचालन में नियोजन, 2 गोदाम में खाद्यान कौ लदाई, उतराई तथा वहन करना खाद्यानों को उटाई तथा सफाई, खाद्यान्नों का बोरों में भरना, ऐसे बोरों कौ सिलाई करना तथा उससे तथा आनुष॑गिक तथा संसक्त अन्य कार्य में के संबंध में नियोजन. भाग-चार t. खादी, हथकरषणा (हैंडलूम) तथा पावरलूम उद्योग में नियोजन, २. कपड़े का विरंजित करना (ब्लीचिंग) रंगाई तथा छपाई में नियोजन, जे सिलाई में नियोजन. भाग-पांच सुगन्धित तीलियां ( अगरबती) के बनाने में नियोजन. कदाई, धूम्रपान (स्मॉकिंग) तथा तैयार वस्त्र (रेडोपेड गारमेन्ट्स) बनाने में नियोजन, पापड़, अचार, जेम्स, जेलो अन्य परिरक्षित खाद्य पदार्थ, पिसे मसाले तथा वासक बनाने में नियोजन. खाना बनाने में नियोजन. खिलौने बनाने में नियोजन. की के 4 ०! के 122
608 (26) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 16 जुलाई 2004 दि भाग-उह t चमड़े के शोध तथा प्रसंस्करण में नियोजन. 3 जूते तथा चमड़े कौ अन्य थस्तुएं बनाने तथा सरम्सत करने में नियोजन. जे सफाई तथा झाड़ू-बहारू सेवाओं में नियोजन. भाग-सात पैग-पिकिंग में नियोजन. ह दरवाजे -दरवाजे (द्वार-द्वार पर) पुराने समाचार- पत्रों (री) का संग्रहण (तथा विक्रय) तथा त्यक्त वस्तुएं (कबाड़ी ) में नियोजन. % बेचने वाला (हॉकर) तथा मार्ग में फेरी लगाकर बेचने वाला (स्ट्रोट वेण्डर) के रूप में नियोजन. भाग-आठ मोटर परिवहन कर्मकार अधिनियम, १९६१ (१९६१ का २७) में यथा परिभाषित मोटर परिच्रहन कर्मकार, साइकिल-रिक्शा, आटो-रिक्शा तथा टैक्सी चलाने में ऐसा नियोजन जो “मोटर परिवहन कर्मकार'' की श्रेणी में नहीं आता. आटा, तेल, दाल तथा चावल मिल में नियोजन, प्राइवेट सुरक्षा सेवाओं में नियोजन, प्लास्टिक उद्योगों में नियोजन. लकड़ी का काम करने की इकाइयों में नियोजन. बर्तन बनाने में नियोजन, कारीगर (शिल्पी) जैसे लुहार, बढ़ई, गारा बनाने, चाक बनाने ( कुम्हार) आदि में नियोजन, दरी तथा कारपेट बनाने में नियोजन. आतिशबाजी तथा माचिस उद्योग में नियोजन, डब्बे तथा पैकिंग कौ अन्य सामग्री बनाने में नियोजन, भोपाल, दिनांक 16 जुलाई, 2004 2४ & 2 की हा 2६४६१ -~ क्र. 2836-207-इक्कीस-अप प्रा. ).-- भारत के संविधान के अनुच्छेद 348 के खण्ड (3) के अनुसरर में, सथ्यप्रदेश असंगठित कर्मकार कल्याण अधिनियम, 2003 (क्रमांक 9 सन् 2004) का अंग्रेजी अनुवाद राज्यपाल के प्राधिकार से एतट्ट्वारा प्रकाशित किया जाता हैं. मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाए। से तथा आदेशातुसार, एम, पी. नेपमा, अतिरियत सचित.