Madhya Pradesh act 005 of 1970 : The Madhya Pradesh Ayurvedic, Unani and Naturopathic Practitioner Act 1970

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परण प्रदेश आयुर्वे दिक, यूनानी तथा प्राकृतिक चिकित्सा चप्रवसाधी अधिनियम, १६७० (कऋऋषान ५ सन ¢ 24 वप्यप्रदेश राजपत्र, दिनाक ४ फरवरी १९७१ में प्रकाडित सम. प्र. सायुर्ते दिक तथा यूनानी चिकित्सा पद्धति एव प्ाकरलिक चिकित्सा बोर्ड W= ;

q भोपाल, दिनांक १ फरवरी १९६७१ न. ३०८६-इक्कीस-अ(प्रा.).-मध्यप्रदेश विधानसभा का निम्नलिखित अधिनियम, कल पा दिनांक ३० जनवरी १६७१ को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त हो चुकी है, हरा सर्वसाधारण की जानकारी के लिये प्रकाशित किया जाता है. मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, श्री. हरि. पगारे, सचिव मध्यप्रदेश अधिनियम क्रमांक ५ सन्‌ १६७१ ' मध्यप्रदेश आयुर्वेदिक, यूनानी तथा प्राकृतिक-चिकित्सा व्यवसायी अधिनियम, १९७० विषय-सूची पुर ना ५... संक्षिप्त नाम तथा विस्तार. :... पर्भाषाएं. २.. बाई का निगमन. «८... वो का गठन. +.. निर्वाचन का ढंग. ६... सदस्यता के लिये अहंताएं तथा निरहेंताएं. :.. वोई के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा सदस्यों की पदावधि. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा सदस्यों द्वारा पदत्याग. अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष के विरुद्ध अविद्वास का प्रस्ताव, . सदस्य बने रहने के लिये निर्वोग्यताएं. . आकस्मिक रिक्तियों का भरा जाना. ५. बोर्ड का सम्मिलन, . सम्मिलिन का सभापति. प्रदनों का विनिदचय बहुमत से किया जायगा. १८. गणपूर्ति. १६. कार्यवाहियों के कार्यवृत, ५ 9. रिक्ति कार्यवाहियों आदि को अविधिमान्य नहीं बनायेगी. 1८. सदस्यों के लिये भत्ते. 1६. बोर्ड की शक्तियां, कतंव्य तथा कृत्य. «९. वो का रजिस्ट्रार तथा अन्य अधिकारी और सेवक, «०. रजिस्ट्रार के कर्तव्य, पि O D S o o - o W

T - <R 23 9%, २४. २६. फ् '3, NG, \ २४. 3Y. 3%. 33. 3G, ३४. o, पे. %3 €3 g, ¥, अनुसूची . . सूची का पुनरीक्षण. . जांचों में प्रक्रिया. : , वोर्ड के विनिदुचय के विरुद्ध अपील 3. रजिस्टीक़त व्यवसाधियों के विशेषाधिकार ४. इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत न चिये गये व्यक्तियों द्वारा चिकिता i | i पं ! 1 { f वोर्ड-निधि. उदद इ्य, जिनके लिये बोर्ड-निधि उपयोजित की जा सकेगी. * व्यवसायियों का राज्य रजिस्टर. वह व्यक्ति जिसका रजिस्ट्रीकरण किया जा सकेगा और रजिस्ट्रीकरण फीस. अतिरिक्त अहंताओं का रजिस्ट्रीकरण. विरूजालयीन चिकित्सा अभ्यास के लिए अस्थायी रजिस्ट्रीकरण उन व्यक्तियों से, जो रजिस्ट्रीकरण के लिए पात्र हों या व्यवसायियों के राज्य रजिस्टर में दर्ज किये गये सभझे जाते हों, भिन्न ऐसें 'व्यक्तियाँ की सूची वनाये रखना जो कि व्यवसायरत हों. : व्यवसाधियों के राज्य रजिस्टर में या सूची में प्रविष्ट करने का प्रतिषेध करे या उसमें से प्रविष्टि हटाये जाने का निदेश देने की बोर्ड की शक्ति. ' व्यवसाय आदि किये जाने का प्रतिषेघ शास्ति. ः - i राज्य सरकार द्वारा नियंत्रण. अनुसूची का संशोधन. दस्तावेज पेश करने के लिए बोडे के सेवकों को समन करने पर तिन्धन, दुस अधिनियम के अधीन कार्य करने वाले व्यक्तियों का परित्राण. हुस अधिनियम के अधीन अपराधों का विचारण करने के लिये सक्षम न्यायाल# तथा अपराधों का संज्ञान. मुत्यु-समीक्षा वा कार्य करने से छूट, . ‘ नियम वनाने की शक्ति. ) विनियम बनाने की शक्ति. कतिपय अधिनियमितियों का निरसन तथा व्यावृत्ति. अध्यादेश क्रमांक १४ सन्‌ १६७० का निरसन.

3 मध्यप्रदेश अधिनियम क्रमांक ५ सन्‌ १६७१ मध्यप्रदेश आयुर्वेदिक, यूनानी तथा प्राकृतिक-चिकित्सा व्यवसायी अधिनियम, १९७० [दिनक ३० जनवरी १६७१ को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त हुई; अनुमति “मध्यप्रदेश राजपत्र” (असाधारण) में, दिनांक ३० जनवरी १४७१ को प्रथम बार प्रकाशित की गई | ध्यप्रदेश में आयुर्वेदिक तथा यूनानी चिकित्सा पद्धतियों के व्यवसायियों के रजिस्ट्रीकरण से संबंधित विधि को समेकित और संशोधित करने, प्राकृतिक-चिकित्सा के व्यवसाय को विनियमित करने और राज्य के लिए आयुर्वेदिक तथा यूनानी चिकित्सा पद्धति एवं प्राकृतिक-चिकित्सा वोर्डे के गठन के लिए एवं उससे संबंधित विषयों के लिए उपवन्ध करने के हेतु अधिनियम. भारत गणराज्य के इक्कीसवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान मण्डल द्वारा इसे निम्नलिखित रूप में अधिनियमित किया जाय :- पहला अध्याय--प्रारम्भिक संक्षिप्त नाम १. (१) यह अधिनियम मध्यप्रदेश आयुर्वेदिक, यूनानी तथा गकृतिक-चिकित्सा व्यवसायी अधिनियम, १६७० कहा जा सकेगा. 1२) इसका विस्तार सम्पूर्ण मध्यप्रदेश पर है. > इसका अधिनियम में, जव तक सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित गे हों, (क) “अनुमोदित संस्था” से अभिप्रत है. चिकित्सालय, स्वास्थ्य केन्द्र या अन्य ऐसी संस्था जिसमें कोई व्यक्ति, उसे आयुर्वेदिक या. यूनानी चिकित्सा-पद्धति या प्राकृतिक-चिकित्सा से संबंधित कोई चिकित्सीय अहँता प्रदान की जाने के पूर्व अपने अध्ययन-पाठ्यक्रम द्वारा अपेक्षित प्रशिक्षण, यदि कोई हो, प्राप्त कर सके, (ख) “आयुर्वेदिक पद्धति” से अभिप्रत है, अष्टांग आयुर्वेदिक _ पद्धति और उसके अन्तर्गत सिद्ध भाता है, चाहे ऐसी आधुनिक प्रगतियां द्वारा, जैसी कि बोडे समय-समय पर अबव- धारित करे, उसकी अनुपूर्ति की गई हो या न॑ की गई हो, तथा विस्तार परिभाषाएं

¥ (ग) “बोड़े” से अभिषप्रत है धारा ३ तथा ४ के अधीन स्थापित तथा गठित किया गया मध्यप्रदेश आयुर्वेदिक तथा यूनानी चिकित्सा-पद्धति एवं प्राकृतिक-चिकित्सा बोर्ड, (घ) “सूचीबद्ध व्यवसायी” से अभिष्र त है ऐसा व्यवसायी जिसका नाम धारा २८ के अधीन बनाए रखी गई सूची में प्रविष्ट हो; (ड) “प्राकृतिक-चिकित्सा” से अभिष्र त है, प्राकृतिक-चिंकित्सा पद्धति चाहे ऐसी आधुनिक प्रगतियों द्वारा, जैसी कि बोर्ड समय-समय पर अवधारित करे, उसकी अनुपूर्ति की गई हो या न की गई हो; (च) “अध्यक्ष” से अभिप्र त है, बोर्डे का अध्यक्ष; (छ) “व्यवसायी” से अभिप्र त है, आयुर्वेदिक या यूनानी चिकि- त्सा-पद्धति या प्राकृतिक चिकित्सा का व्यवसायी; (ज) “मान्य अहंता” से अभिप्र त है, अनुसूची में विनिर्दिष्ट की गई आयुर्वेदिक या यूनानी चिकित्सा-पद्धति या प्राकृतिक चिकित्सा-संबंधी अहेंता; (झ) “रजिस्ट्रीकृत व्यवसायी” से अभिष्र त है, व्यवसायियों & राज्य रजिस्टर में दजे किया. गया या इस अधिनियम के उपवन्धों के अधीन दर्ज किया गया समझा गया कोई व्यक्ति; (जि) “विनियम” से अभिप्रत है, धारा ४३ के अधीन बनाये गए विनियम, (ट) “ब्यवसाधियों का राज्य रजिस्टर” से अभिप्रत है, धारा २४ के अधीन रखा गया रजिस्टर, (ठ), “यूनानी पद्धति” से अभिप्र त। है, चिकित्सा की यूनानी तिब्बी पद्धति चाहे ऐसी आधुनिक प्रगतियों द्वारा, जैसी कि वो्डे समय-समय पर अवटारित करे, उसकी अनुपूति को गई हो या न की गई हो. दूसरा अध्याय-मध्यप्रदेश आयुर्वेदिक तथा यूनानी चिकित्सा पद्धति एवं प्राकृतिक-चिकित्सा वोर्ड की निगंमन तथा गठन. बोर्ड का निगमन. ३. (१) राज्य सरकार, यथाशक्य शीघ्र, अधिसूचना दारा, ऐसी तारीख से, जो कि उसमें विनिदिष्ट की जाय, आयुर्वेदिक तथा यूनानी चिकित्सा पद्धति एवं प्राकृतिक-चिकित्सा बोर्ड की स्थापना करेगी. (२) बोर्ड मध्यप्रदेश आयुर्वेदिक तथा यूनानी चिकित्सा पद्धति एवं प्राकृतिक चिकित्सा बो्डे के नाम से एक निगमित निकाय होगा और उसका शाइवत उत्तराधिकार होगा तथा उसकी सामान्य मुंद्रा होगी और उसे जंगम तथा स्थावर दोनों प्रकार की सम्पत्ति न ok बन न,

| वाई का गठन. wimrimees . -... Tty अजित करने तथा धारण करने की 'शक्ति प्राप्त होगी और. ऊसे इस अधिनियम के अधीन किये गये. उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, - उसके द्वारा धारण की गई किंसी' भी संम्पत्ति का अंतरण : करने तथा संबिदा करने और: . उसके गठन.के 'प्रयोजनों के लिए आवश्यक समस्त अन्य. . कोर्य करने की शक्ति प्राप्त होगी और वह उसकें निगमित नाम से वाद चला सकेगा या उसके - '-मित नाम से उसके विरुद्ध वाद चलाया जा सकेगा. ४. (१) वो में निम्नलिखित व्यक्ति होंगे :- एक) आयुर्वेद को उपसंचालक; ' '(ख) आयुर्वेद का सहायक संचालक; () ST A S प्रत्येक रॉजस्वर आयुक्त सम्भाग का प्रतिनि- घित्व करने वाला एक संदस्य रजिस्ट्रीकृत " व्यवसायियों दारा अपने में से निर्वाचित किया गया हो; “परन्तु यदि रजिस्ट्रीकृत व्यवसायी इस अधिनियम या उसके अधीन बनाय॑ गये नियमों के उपवन्धों के अनुसार किसी संभाग के सदस्य का निर्वाचन करने में असफल रहें, तो राज्य सरकार ऐसे संभाग _ से किसी भी रंजिस्ट्रीकृत व्यवसायी को उस रिक्त स्थान के लिये : नाम निर्देशित करेगी और इस प्रकार नाम निर्देशित किया गधा व्यक्ति इस खण्ड के अधीन सम्यक्‌ रूप से निर्वाचिंत किया गधा समझा जायेगा : परन्तु यह और भी कि प्रथम बा के गठन के लिए ऐसे सदस्य राज्य सरकार द्वारा नाम निर्देशित किये जायंगे; (घ) कम से कम पांच तथा अधिक से अधिक दस सदस्य राज्य' सर- - कार द्वारा नाम निर्देशित किये जाय॑ंगे जिनमें से-कम से कम- (एक) एक सदस्ब राज्य में के ऐसे सरकारी महाविद्यालयों के, जो अनन्यरूपेण आयुर्वेदिक या. यूनानी चिकित्सा-पद्धति या प्राकृतिक-चिकित्सा में शिक्षण दे रहे हों, अध्यापक वर्ग में से होगा; (दो) एक सदस्य ऊपर उपखण्ड (एक) में विनिर्दिष्ट किये गये महा- विद्यालयों की छोड़कर राज्य में के ऐसे अन्य महाविद्यालयों के, जो अनन्यरूपेण आयुर्वेदिक या यूनानी चिकित्सा-पद्धति या प्राकृतिक-चिकित्सा में शिक्षण दे रहे हों, अध्यापक वर्ग में से होगा; o

% (तीन) एवा-एक रादस्य आयुर्वेदिक या यूनानी चिकित्सा-पद्धति या प्राकृतिक-चिकित्सा के रजिस्ट्रीकृत व्यवसायियों में से होगा. (v) वोई के अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष बोर्ड के सदस्यों द्वारा अपने में i ey A में, जैसी कि यिहिति की जाय, निर्वाचित किये जायंगे : परन्तु प्रथम अध्यक्ष तथा प्रथम उपाध्यक्ष राज्य सरकार द्वारा नाम निर्देशित किये जाय॑ंगे. (3). उपधारा (१) या उपधघारा (२) के अधीन निर्वाचित या नाम- निर्देशित किये गये प्रत्येक व्यक्ति का नाम राजपत्न में प्रकाशित किया जायेगा. प्र (१) घारा ४ की उपघारा (१) के खण्ड () के अधीन निर्वाचन का संचालन, बोर्ड द्वारा ऐसे नियमों के अनुसार किया जायगा जो कि इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा बनाये जायं. (२) जहां वोई के लिये किसी निर्वाचन के संबंध में कोई विवाद उद्भूत हो, वहां बह ऐसी. कालावधि के भीतर जो कि विहित की जाय, सरकार को निर्देशित किया जायगा तथा उस पर राज्य सरकार का विनिष्चय अन्तिम होगा. ६. (१) कोई भी व्यक्ति धारा ४ के अधीन निर्वाचन या नाम- निदंशन के लिए पात्र नहीं होगा जब तक कि वह रजिस्ट्रीकृत व्यवसायी नहों और राज्य के भीतर निवास न करता हो. (२) कोई भी व्यक्ति वोर्ड के सदस्य के रूप में निर्वाचित या. नामनिर्देशित किये जाने के लिये निरहित होगा :- (क) यदि वह भारत का नागरिक न हो; (ख) यदि वह अनुन्मोचित दिवालिया हो; या (ग) यदि बह विकृत चित का हो तथा सक्षम न्यायालय द्वारा इस रूप में घोषित कर दिया गया हो; या (घ) यदि बह किसी दंड न्यायालय द्वारा ऐसे अपराधों के लिए, जो छः मास से अधिक के कारावास से दण्डनीय हो, सिद्धदोष ठहराया गया हो तथा उस दण्ड को उसके पदचात्‌ न तो अपास्त किया गया हो और न उसका परिहार किया गया हो तथा ऐसे व्यक्ति को राज्य सरकार के आदेश द्वारा, ऐसे दण्ड के कारण हुई निरहेंता से विमुक्त नहीं कर दिया गया हो; या निर्वाचन का ढंग सदस्यता के लिटो अहंताए तथा 1नरहताएं

तर के अध्यक्ष, पाषध्यक्ष तथा 'दस्यों की दावधि त्ऑ्यक्न उपाध्यक्ष पा. सदस्यों '1र९ पद त्याग, पयक्ष तथा :पाध्यक्ष के पिष्स अविध्वास “1 प्रस्ताव 1 TR R Y e ve—— 3 (ड) यदि वह ars का. कमेंचारी हो तथा उसे बेतन या मानदेय के रूप में पारिश्रमिक दिया जाता हो (जिख अभिव्यक्ति के अस्तर्गत फीस तथा कमीशन नहीं आयेगा); या ' (च) यंदि उसका नाम व्यवसायियों के राज्य रजिस्टर में से निकाल दिया गया हो. ७. (१) इस अधिनियम में अन्यथा उपबन्धित के सिवाय, बोर्ड के अध्यक्ष तथा सदस्यों की, जो ¥ की उपधाराों (१) के खण्ड (ग) के अधीन निर्वाचित किये गये हों या उक्त उपधारा के खण्ड (घ) के अधीन नामनिर्देशित किये हों, पदावधि उस तारीख से, जिसको कि नवीन बोर का प्रथम सम्मिलन किया जाय, प्रारंभ होने वाली पांच साल की कालावधि के लिये होगी : परन्तु प्रथम वार गठित किये गयें वो्डे के अध्यक्ष तथा सदस्यों की पदावधि बोर्ड के प्रथम सम्मिलिन की तारीख से तीन वर्ष होगी. (२) उपाध्यक्ष की पदावधि उस तारीख से, जिसको कि वह उपाध्यक्ष के रूप में निर्वाचित किया जाय, एक वर्ष की. कालावधि के लिये होगी. (३) उपधारा (१) या उपधारा (२) में विनि्दिष्ट की गई अवधि का अवसान हो जाने पर भी, वहिर्गामी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या सदस्य, जैसी भी कि दशा हो, उसके उत्तराधिकारी या यथास्थिति निर्वाचन या नामनिर्देशन होने तक पद पर वना रहेगा. (४) बहिर्गामी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या सदस्य यथास्थिति पुरननि- वचिन या पुन: नामनिर्देशन के लिए पाई होगा. ८. अध्यक्ष, किसी भी समय, उपाध्यक्ष को संबोधित किये गये पत्र द्वारा अपना पद त्याग सकेगा और उपाध्यक्ष या कोई सदस्य, किसी भी समय अध्यक्ष को संबोधित किये गये पत्र द्वारा अपना पद. त्याग सकेगा किन्तु अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या सदस्य का त्यागपत्र तब तक प्रभावी नहीं होगा जव तक कि वह बोर्ड द्वारा प्रतिग्रह्वीत न कर लिया जाय. ६. (१) अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को, ऐसे बहुमत से, जो वोई के उप- स्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई से कम न हो और ऐसा बहुमत तत्समय वोड का गठन करने वाले सदस्यों की कुल संख्या के आधे से अधिक हो, बोर्ड द्वारा पारित कियें गये -. संकल्प द्वारा उसके पद से. हटाया जा सकेगा :

8 परन्तु इस प्रेयोजने के लिये कोई संकल्प तव तक प्रस्तुत नहीं किया जगा जब तक कि ऐसा संकल्प प्रस्तुत करने के आशय की कम से कम T2z दिन की सूचना न दें दी गई हो. ः _ (२) अध्यक्ष या उपाध्यक्ष, जिसके कि विरुद्ध उपघारा (१) के शैधीन' प्रस्ताव पारित किया गया हो, पद धारण करने से तत्काल परि- विरत हो जायगों और अध्यक्ष को हटा दिये जानें 'की दशा में उपाध्यक्ष समय तक अध्यक्ष के कृत्यों को निवेदन करेगा जब तक कि. उसका TR निर्वाचित, न हो जाय, १०. : (१) येदि कौई सदस्य था अध्यक्ष या 'उपाध्यक्ष, निर्वाचित साफ नाम निर्देशित हो जाने पर कि) वाद में धारा ६ में वेणित निरहंताओं में से किसी भी _निरहेता का भागी हो जाय; या '“(ख) ' विधि व्यवसायी होने के नाते, किंसी विधिक कार्यवाही में चाहे वह सिविल हो या आपराधिक, जिसमें कि बोर्ड सम्बद्ध हो या सम्बद्ध रहा हो, बोर्ड या राज्य सरकार _ के विरुद्ध किंसी अन्य व्यक्ति की ओर से कार्य करे या उपसंजात हो; या (ग) वोई के लगातार तीन मा मूली 'संम्मिलनों में से: ऐसे कारणों के बिना, जो बोई की राय में पर्याप्त हो, अनु- पस्थित रहे; तो बोर्ड उसका पद रिक्त घोषित कर देगा : मरन्त इस धारा के अंधीन कोई भी घोषणा तब 'तक नहीं 'की जागंगी जब तक कि संबंधित सदस्य को सुनवाई का युंक्तियुक्त,अवसर,न दे हिसा गया हो. (२) उपधारा (१) के अधीन वो्ड द्वारा की गई किसी घोषणा से व्मथित कोई भी सदस्य ऐसी घोषणा की तारीख से €० दिन के भीतर * रस सरकार को अपील फाइल कर सकेगा और ऐसी अपील में राज्य सरकार का विनिष्चय अस्तिम होगा. 19 यदि बोर्ड के किसी सदस्य की मृत्यु हो जाय या वह पद मांग कर दे या वह किसी भी कारण से सदस्य न रहे, तो इस प्रकार 7 थिक्ति यथाशक्य शीघ्र यथास्थिति निर्वाचन या नामनिर्देशन द्वारा भरी नायगी और इस प्रकार निर्वाचित या नामनिर्देशित किया गया ST sy पूर्ववर्ती की अनवसित अवधि तक पद धारण करेंगा. सदस्य बने रहने के लिए नियों- ग्यताएं. आकस्मिक रिक्तियों का भरा जाना,

दर ता सम्मिलन 8:21 e, | g1 की विनिद- AU से रिगव जायगां & तीसरा अध्यास्-काम काज का संचालन १२. वोई एक कंलेंण्डर वर्ष में कम से कम दो वार ऐसे समय तथा स्थान पर सम्मिलन करेगा और बोडे का प्रत्येक सम्मिलिन ऐसी रीति में समन किया जायगा, जो कि विनियमों द्वारा विहित की जाय| किया जाप : परन्तु जब तक ऐसे विनियम न वनाये जायं॑, अध्यक्ष के लिये यह विधिपूर्ण होगा कि वह, प्रत्येक सदस्य को संबोधित किये गये पत्र द्वारा पूरे, पन्द्रह दिन की सूचना पर ऐसे समय तथा स्थान पर, जैसा कि वह समीचीन समझे; वोडे का सम्मिलिन समन करे. १३. अध्यक्ष या उसकी अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष, वोर्ड के प्रत्येक सम्मिलन की अध्यक्षता करेगा तथा दोनों की अनुपस्थिति में, उपस्थित सदस्य अपने में से एक को इस प्रयोजन के लिये निर्वाचित .कर लेंगे : परन्त घारा £ के प्रयोजन के लिए किये गये सम्मिलन में ऐसा व्यक्ति, जो कि विहित प्राधिकारी द्वारा नाम-निर्देशित किया जाय, अध्यक्षता करेगा. १४. इस अधिनियम द्वारा उसके अधीन अन्यथा उपवन्धित के सिवाय, बोर्ड के किसी भी सम्मिलन.के समक्ष लाये गये समस्त प्रदन उपस्थित सदस्यों के बहुमत द्वारा विनिध्चित किए जायेंगे और मतों के वरावर-वरावर होने की दशा में सम्मिलित की अध्यक्षता करने वालें प्राधिकारी को द्वितीय या निर्णायक मत देने का अधिकार होगा : परन्तु बोर्ड के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के निर्वाचन में मतों के वरावर-बरावर होने की दशा में, अध्यक्षता करने वाला प्राधिकारी अपने निर्णयक मत का प्रयोग नहीं करेगा और परिणाम का विनिश्चय लाट द्वारा किया जायगा. १४. किसी सम्मिलन में कोई भी कामकाज तब तक संपादित नहीं किया. जायगा जब तक कि संपूर्ण सम्मिलन में IR सात सदस्यों की गर्णपूति न वनी रहे : परन्तु स्थगित सम्मिलन का. कामकाज निपटाया जा सकेगा चाहे गणपूर्ति हो या न हो. | | । व MY oeemmaem—m——"r e e

१० १६. (१) वोडे के प्रत्येक सम्मिलिन की कार्यवाहियों के कार्य- वन्त उस प्रयोजन के लिए रखी जाने वाली पुस्तक में अभिलिखित किये जायेंगे और उसी सम्मिलन में या ठीक आगामी सम्मिलन में, अध्यक्षता करने वालें प्राधिकारी द्वारा उन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे. (२) बोर्ड के सम्मिलन की कार्यवाहियां गोपनीय होंगी और बोर्ड का कोई भी सदस्य, कार्यवाहियों के का्येवत्त में अभिलिखित किये किसी भी विषय से संघंघधित कोई भी जानकारी, जो कि सदस्य होने के नाते उसे ज्ञात हुई हो, बोर्ड के पूर्व अनुजा के बिना, किसी भी ऐसे व्यक्ति को, जो उस जानकारी को प्राप्त करने के लिए वैध रूप से हकदार न हो, संसूचित नहीं करेगा या उसी प्रकार के किसी व्यक्ति को उक्त जानकारी संसूचित की जाने की अनुज्ञा नहीं देगा, १७. बोर्ड का कोई भी कार्य केवल इस कारण अविधिमान्य नहीं हीगा कि- (%) में कोई स्थान - रिक्त है या उसके (बोर्ड के) गठन में त्टि है; या (ख) उसके सदस्य के रूप में कार्य करने वाले व्यक्ति के निर्वाचन या नाम निर्देशन में कोई त्र टि है; या (ग) उसकी प्रक्रिया में कोई ऐसी अनियमितता है जो मामले के गुणामुण पर प्रभाव नहीं डालती. १८. (१) बोर्ड के सदस्य ऐसे यात्रा तथा अन्य भत्ते प्राप्त करने के हकदार होंगे जैसे कि विहित किये जायें (२) कोई भी सदस्य उपधारा (१) के अधीन विनिदिष्ट किये गये संदाय से भिन्न किसी संदाय का हकदार नहीं होगा चौथा अध्याय-वोई की शक्तियां, कत्त व्य तथा कृत्य १६. (१) इस अधिनियम तथा उसके अधीन वनाये गये नियमों के उपवन्धों के अध्यघीन रहते हुए, वोडड ऐसी शक्तियों का प्रयोग तथा से कृत्यों का पालन करेगा जिन्हें वह इस अधिनियम के प्रयोजनों 1त। कार्यान्वित करने के लिए आवद्यक समझे कार्यवाहियों के कार्यवत्त Bfssminty बनायेगी सदस्यों के लिये भत्त वो की शक्तियां, कत्त॑ व्य तथा कृत्य,

वोइ को रजिस्ट्रार तथा अन्य अधिकारी और सेवक ११ (२). विशिष्टत: और पूर्वेगापी उपवन्ध की व्यापकता पर प्रति- कूल प्रभाव डाले बिना, वोई की शक्तियां तथा कृत्य निम्नलिखित होंगे :- (कफ) क्रमश: घारा २४ तथा २८ के अधीन अपेक्षित किये गये अनुसार व्यवसायियों का राज्य रजिस्टर तता व्यवसायियों की सूची वनाये रखना; (ख) रजिस्ट्रार के किसी भी विनिदचय के विरुद्ध अपीलों की ऐसी रीति में, जैसी कि विहीत की जाय, सुनवाई करना तथा उनको विनिश्चित करना; (गढ रजिस्ट्रीकृत तथा सुचीवद्ध व्यवसायियों के वुत्तिक आचरणों को विनियमित करने के लिये नैतिक आचार संहिता विहित करता; (घ) किसी रजिस्ट्रीकृत या सुची वद्ध व्यवसायी की भर्सेंना करना, या यथास्थिति व्यवसायियों के राज्य रजिस्टर में से या सूची में से उसे निलम्बित कर देना या हटा देना या. उसके विष्द्ध ऐसी अन्य आनुशासिक कार्यवाही करना जैसी कि बोर्ड की राय में आंवदयक या समीचीन हो. पांचवां अध्याय-रजिस्ट्रार तथा अन्य अधिकारी २०. (१) वोई एक रजिस्ट्रार नियुक्त करेगा जो कि वो के सचिव के रूप में कार्य करेगा. (२) वोर्ड ऐसे अन्य अधिकारियों तथा सेवकों को नियोजित कर सकेगा जिन्हें कि वह इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक समझे. (३) रजिस्ट्रार की अहंताएं, नियुक्ति तथा सेवा की शर्तें एवं वेतनमान ऐसे होंगे जैसे कि विह्वित किये जाय और अन्य कर्मचारियों की अहताएं, नियुक्ति तथा सेवा की शर्ते एवं वेतनमान ऐसे होंगे जैसे कि वोई राज्य सरकार की पूर्व मंजुरी से, विनियमों द्वारा अवधारित करें.

पर (४) वो रजिस्ट्रार से या किसी अन्य अधिकारी से उसके वत्त व्यों के सम्यक्‌ पालन के लिये ऐसी प्रतिभ्रूति अपेक्षित करेगा तथा लगा जैसी कि बोर्ड आवइयक समझे. (५) इस धारा के अधीन बोड़े द्वारा नियुक्त किया. गया रजिस्ट्रार या कोई अन्य अधिकारी या सेवक भारतीय दण्ड संहिता, व्द० (क्रमांक ४४५ सन्‌ १८६०) की धारा २१ के अर्थ के अन्तर्गत लोकसेवक समझा जायगा. ०१. (१) रजिस्ट्रार का यह कत्त॑व्य होगा कि वह इस अधिनियम के उपलब्धों के अनुसार व्यवसायियों का राज्य रजिस्टर रखें और समय-समय पर उसे बविहित रीति में पुनरीक्षित करे और ऐसे अन्थ कृत्यों का निर्वहन करें जिसका कि इस अधिनियम तथा उसके अधीन बनायें गये नियमों एवं विभिषमों के अधीन उसके हारा निवेहन किया जाना अपेक्षित हो या अपेक्षित हो जाय. (२) रजिस्ट्रार इस बात का ध्यान रखेगा कि व्यवसायियों का राज्य रजिस्टर समस्त समयों पर यथा संभव ठीक रहता है और यह किसी रजिस्ट्रीकृत व्यवसायी के पते या अहेताओं से संबंधित कोई सारवान्‌ परिवर्तन समय-समय पर उसमें अ्विष्ट वर सकेगा. (3) किसी ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यवसायी का, जिसकी मुत्यु हो जाय या जिसका नाम धारा २६ के अधीन रजिस्टर में से हटा दिया जाने का निर्देश दिया जाय, नाम रजिस्ट्रार द्वारा रजिस्टर में से हटा दिया जायगा. (४) इस धारा के प्रयोज॑नों के लिये, रजिस्ट्रार किसी रजिस्ट्रीकृत व्यवसायी को ब्यवसायियों के राज्य रजिस्टर में उसके नाम के सामने प्रविप्ट पते पर रसीदी रजिरट्टी डाक द्वारा पत्र भेज सकेगा जिसमें यह पूछ-ताछ की जायगी कि क्या उसने व्यवसाय करना बन्द कर दिया है या अपना पता बदल दिया है, और यदि उस पत्र की प्राप्ति के छः मास के भीतर रजिस्ट्रार की उक्त पत्र का कोई उत्तर प्राप्त न हो, तो रजिस्ट्रार व्यबसापी का सास रजिस्टर में से हटा देगा और माम के हुठायें जाने संबंधी तथ्य को ऐसी रीति में प्रकाशित करेगा जैसी कि थिद्ित की जाय : रजिस्ट्रार _ के कत्त॑ व्य.

बोई निधि 3% श्य, जिन के लिये वोडे- निधि उपयो- जित की जा सकेगी. १३ परस्तु बोर्ड यदि उसका यह समाधान हो जाय कि उक्त व्यवसायी ने व्यवसाय करना बन्द नहीं किया है, उक्त व्यवसायी का आवेदन-पत्न प्रस्तुत होने पर यह निदेश दे सकेगा कि उसका नाम रजिस्टर में पुनः स्थापित किया जाय. छठवां अध्याय-बोई की निधि २२. (१) वो एक निधि स्थापित करेगा जो वोइ-निधि कहलायेंगी. (२) निम्नलिखित वोर्ड-निधि के भाग बनेंगे या उनका उसमें संदाय किया जया. (क) केन्द्रीय या राज्य सरकार द्वारा कोई अभिदाय या अनुदान: (ख) फीस तथा जुर्मानों से हुई आय को सम्मिलित करते हुए बोर्ड की समस्त स्वोतों से आय; (ग) न्यास, बसीयत (विक्वेस्ट ), संदान, विन्यास तथा अन्य अनुदान, यदि कोई हो; (घि) वो द्वारा प्राप्त समरत अन्य राशियां, २३. बोई-निधि निम्नलिखित उद्द यों के लिये उपयोज्य होगी :- (%) इस अधिनियम तथा उसके अधीन बताये गये नियमों एवं विनियमों के प्रयोजनों के लिये वो्डे द्वारा उपगत किये गये ऋणों के प्रति संदाय के लिये; (ख) किसी वाद यथा कार्यवाही के, जिसमें बोर्ड एक पक्षकार हो, व्ययों के लिये; (1) बोर्ड के अधिकारियों तथा सेवकों के वेतनों तथा भत्तों के संदाय के लिये; (घ). बोर्ड के पदाधिकारियों (अफिस बिअरसे) को भत्तों के संदाय के लिये;

¥ (%) इस अधिनियम तथा उसके अधीन बनाये गये नियमों एवं विनियसों के उपबन्धों को कार्यान्वित करने को लिये वोह द्वारा उपगत किये गये किन्हीं भी व्ययों के संदास के लिये: (च) चिकित्सा सम्बन्धी, शिक्षा गबवेषणा तथा प्रशिक्षण की उन्नति ओर विकास, जिनका कि बोर्ड द्वारा चिकित्सा वृद्धि के सामान्य हित में होना घोषित किया गया हो, के हेतु उपगत किये गये किन्हीं अन्य व्ययों बॉ लिये; सातवां अध्याय-न्यवसाधियों का रजिस्ट्रीकरण ४. (१) बोई मध्यप्रदेश के निवासी व्यवसाधियों का रजिरटर, जो व्यवसायियों का राज्य रजिस्टर के नाम से ज्ञात होगा, विडिंत रीति में रखबायगा. (२) व्यवसाधियों का राज्य रजिस्टर ऐसे ,प्ररूप में होगा जैसा कि विहित किया जाय और उसमें प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यवसायी हा नाम, पता तथा अहंताएं, उस तारीख के साथ, जिसको कि ऐसी अहंताएं अजित की गई थीं, अन्तथ्रिप्ट होंगी. (३) ऐसा रजिस्टर भारतीय साक्ष्य अधिनिसम, १८७२ (क्रमांक १ सन्‌ १८७९) मे अर्थ के अन्तर्गत लोक दस्तावेज समझा जायगा. २४. Q) A अहता रखने वाला प्रत्येक व्यक्ति रजिस्ट्रार को ऐसी अहूंता का सबूत देने पर तथा बीस रुपये से अनधिक ऐसी फीस, जैसी कि बिह्लित की जाय, चुका देने पर व्यवसाधियों के राज्य रजिस्टर में नाम दर्ज किया जाने के लिये पाव होगा. (२) व्यवसायियों के राज्य रजिस्टर में अपना नाम प्रविष्ट करवाने के लिये आवेदन करने वाला प्रत्येक व्यक्ति बोड़ें का यह नमाघान करेगा कि वहू कोई ऐसी अहंताएं रखता है जो कि उसे इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण का दावा करने के लिये हकदार ख्रनाती है और वह रजिस्ट्रार को उस तारीख की जानकारी देगा जिसको कि उसने ऐसी अदा अभिप्राप्त की हो और बहू ऐसी अन्य जानकारी देगा जैसी कि रजिस्ट्रार इस अधिनियम के अधीन उसके कर्तव्यों का निवंहून करने के हेतु उसे समथ बनाने के लिये थपेक्षित करें. ग्यवसायियों का राज्य रजिस्टर, वह व्यक्ति जिसका रजि- स्ट्रीक रण किया जा सकेगा और रजिस्ट्रीकरण फीस.

34 q Al 3 Al २६. यदि कोई व्यक्ति, जिनका नाम व्यवसाधियों के राज्य का रिस्ट्रीवरण,... रजिस्टर में प्रविष्ट किया जा चुका हो, आयुर्वेदिक या. यूनानी चिकित्सा-पद्धति या प्राकृतिक-चिकित्सा में कोई उपाधि, उपाधि-पंत्र या अन्य अहँंता अभिष्राप्त॑ करले, तो वह विहित रीति में इस सम्बंध में आवेदन करने पर तथा पांच रुपये फीस चुकाने पर, व्यवसायियों के राज्य रजिस्टर में अपने सास के सामने या तो पूर्व में की गई किसी प्रविष्टि के स्थान पर या उसके अतिरिक्त, किसी प्रविष्टि कराने का हकदार होगा जिसमें कि ऐसी अन्य उपाधि, उपाधि-पत्र या अन्य अहंता का वर्णन हो. [लाल न २७. यदि किसी मान्य अहँता को अभिप्राप्त करने के Ferfen 1. अभ्यास लिये पूरा किया जाने वाले अध्ययन-पाठ्यक्रम में, किसी, व्यक्ति के सगे अस्थायी द्वारा अहंकारी परीक्षा उत्तीर्ण की जाने के परचात तथा उसको TR ऐसी अहता प्रदान की जाने के पूर्व प्रशिक्षण की कोई कालावधि सम्मिलित हो, तो ऐसे किसी भी व्यक्ति का, उसके द्वारा इस सम्बन्ध में आबंदन किया जाने पर, व्यवसाधियों के राज्य रजिस्टर में अस्थायी रूप से रजिस्ट्रीकरण किया. जायगा जिससे कि वह किसी अनुमोदित संस्था में पूर्वक्ति प्रशिक्षण-कालावधि तक निकित्सा का अभ्यास कर सके. पते तमक्तियों से, जो ८८. (१) बोई उन व्यक्तियों की सूची तैयार करवायेंगा :- र झन्टोकरणण . को त्सि यान हों. थी . 5 st के (%) जो धारा ४४ के अधीन निरसित अधिनियमों में से रजिस्टर में किसी भी अधिनियम के उपवबन्धों के अनुसरण में तर्ज उसे गये समझे , .. रजिस्ट्रीकृत कियें गये थे किनत कोई मान्य अहता न जाए. हो... भिन्न रखते हो; या तप व्यक्तियों की | सु सनाये रखना (ख) जो धारा ३ की उपधारा (१) के अधीन बिनिर्दिष्ट 7 ब्यममाग्र्त की गई तारीख (जो इसमें इसके प्चातू इस धारा में विनिदिष्ट तारीख के नाम से निर्दिष्ट है) के अब्यवहित पुर्व, राज्य में पांच वर्ष से अन्यूत काला- वधि तक आयुर्वेदिक या. यूनानी चिकित्सा-पद्धति या प्राकृत्तिक-विंकित्सा के क्षत्र में नियमित चिकित्सा व्यवसाय करते रहे हों, और ऐसा व्यवसाय उनके

1% जीविकोपाजन का एक मात्र साधन रहा हो और जौ इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिये पात्र नहोंयाधारा ४४ की उपघारा (१) के खण्ड (ड) के अधीन व्यवसाधियों के राज्य रजिस्टर में दर्ज किये गये न समझे जाते हों. (२). कोई भी व्यवसायी, जो उपघारा (१) के अधीन आता हो तथा उसमें निर्दिष्ट की गई सूची में अपना नाम समाविष्ट कराने की वांछा करत हो, विनिर्दिष्ट की गई तारीख से दो वर्ष भीतर रजिस्ट्रार को पचास रुपये से अनधिक ऐसी फीस के साध, जेसी कि विहित की जाय, चिहित प्ररूप में आवेदन-पत्र भेजेगा : परन्तु राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, उसमें विनिर्दिष्ट किये जाने वालें कारणों से पूर्वोक्त कालावधि में छः मास से , अनधिक और कालावधि तक की वृद्धि कर सकेगी. (दे) बोई (&) उपधारा (१) के खण्ड (क) के अधीन आने वाले - व्यक्तियों के सम्बन्ध में, धारा ४४ के अधीन निरसित अधिनियमों में से किसी भी अधिनियम के उपवन्धों के अनुसरण में उनके रजिस्ट्रीकरण के तथ्य के बारे में (@) उपधारा (१) के खण्ड (ख) के अधीन आते वाले ' व्यक्तियों के सम्बन्ध में उक्त खण्ड में बतलाये गये अनुसार, राज्य में आयुर्वे दिक या यूनानी! चिकित्सा पद्धति या प्राइृतिक-चिकित्सा के क्षेत्र में उनके द्वारा चिकित्सा व्यवसाय किये जाने के तथ्य के बारे में जांच करने के पदचात्‌ और अपना यह समाधान कर लेंने पर कि आवेदन उपधारा (१) के यथास्थिति खण्ड (क) या (ख) में,उप- वर्णित अपेक्षाओं की पूर्ति करता हे, सूची में आवेदक का. साम समाधिष्ट कर लगा (४) वह व्यक्ति, जिसका नाम इस धारा के अधीन तैयार की गई सूची के अन्तर्गत आता हो, धारा ३३ की उपधारा

उ्यकयियों F « राज्य रजिस्टर में या सूची में प्रविष्टि करमें का प्रतिषेघ - करने था उसमें से प्रविष्टि हटायें जाने 1 निर्देश देने की शक्ति... - ब्रोई् ही - पूछे. . २) में; विनिर्दिष्ट किये 10 रजिस्वीकृत व्यवसायी के समस्त विशेषाधिकारों के लिये हकदार होगा (४) रजिस्ट्रार, उपध्ारा, (२) में चिनिरदिष्ट की गई कालावधि का या ऐसी और .क़ालावधि का, जैसी कि उसके अधीन बढ़ायी जाय, अवसान हो जाने के पहचात्‌ यथाशवस शीघ्र, उपधारां (१) के अधीन तैयार की गई व्यक्तियों की सूची को राजपंत्रि में प्रकाशित करेगा तथा ऐसी सूची का प्रकार्शन इस ,बात का निइचा- यक साक्ष्य होगा कि उसमें सम्मिलित किया गया व्यक्ति उन विधे- घाधिकारों के लिये पाता रखेता है, जिनका कि वह उपधारा (४) के अधीन हकदार है. ’ " २६. .. (१) बोर्ड, रजिस्ट्रार से निदेश प्राप्त होने-पर्‌ या अन्यथा, व्यवसाधियों के राज्य रजिस्टर में या .घारा s & " अधीन.बनाये रखी गई सूची में किसी ऐसे व्यक्ति / के नाम की प्रविष्टि करने का प्रतिषेध कर संबीगों या I रजिस्टर में से या उक्त, सूची में से किसी भी ऐसे. व्यक्ति को नाम ,हदाय जौने का आदेश दे ,सकेगा- . _ (क) - जो किसी दण्ड. स्यायालय द्वारा किसी ऐसे अपराध व लिये कारावास से दण्डादिष्ट किया जा चुका हों जो कि - बोर्ड की राय में, उसके चरित में ऐसी लटि उपदर्शित करता ही जिससे कि यथास्थिति रज़िस्टर था. सूची में उसके नाम का . दर्ज क्रिया जाना या उसके नाम का A रखा जाना अवछति नीव हो जाय; मो . (m) जिसे. बोर्ड & Ry 19 % WA जो खो... के बिवेकानुसार बन्द कमरे में की जा सकेगी, संम्मिलन में उपस्थित तथा मर्तदान करने वाले दो तिहार्ड सदस्यों के बहुमत से वृत्तिक अंवचार का अपराधी पाया हो (ग). जिसके सम्बन्ध में बोर्ड ने उसकी . आपत्तियों को " घारे में, यदि कोई हो जांच.करने के पदचात्‌, यह पाया हो कि-उसने व्यवसायियों के राज्य रजिस्टर में:कपटपूर्वक रजिस्ट्रीकरण करा लिया है या धारा

9= e & अधीन बनाये रखी गई सुची में कपटपूर्वक नाम दजें करा लिया है. (२) बोर्ड किसी रजिस्ट्रीकृत व्यवसायी या किसी सुचीवद्ध व्यवसायी का नाम उपधारा (१) के अधीन यधास्थिति व्यवसामियों के राज्य रजिस्टर में से या सूची में से पूर्णतः या विनिदिष्ट कालावधि के लिये हटाये जाने का निर्देश दे सकेंगा. (३) बोर्ड यह निदेश दे सकेगा कि उपधघारा (२) के अधीन हटाया गया कोई भी नाम ऐसी शर्तों के, यदि कोई हों, जिन्हें कि बोई अधिरोपित करना उचित समझे, अध्यधीन रहते हुए पुन: प्रविष्ट कर लिया जाय. ३०. बोर्ड घारा २८ के अधीस बनाये रखी गई सूची को गेसे अन्तरालों पर और ऐसी रीति में, जो कि विहित की जाय, पुनरीक्षित करवायेगा. ३१. धारा ०४५, र८ तथा २१ के अधीन किसी जांच के प्रयोजन के लिए बोड़े भारतीय साक्ष्य अधिनियम, १८७२ (क्रमांक १ सन्‌ १८७९२) के अर्थ के अन्तगेत न्यायालय समझा जायगा. तथा पब्लिक सर्वेन्ट्स (इन्बवायरीज) एक्ट, १८५० (क्रमांक ३७ सन्‌ १८५०) के अधीन नियुक्त किये गये आयुक्त की समस्त शक्तियों का प्रसीगे करेगा, और ऐसी जांचें यथाशक्य, - पब्लिक सर्वेन्ट्स (इन्क्बायरीज) एवट, १८४५० (क्रमांक ३७, सन्‌ १८ ४०) की धारा ५ तथा ८ से २० तक के उपबन्धों के अनुसार संचालित की जायगी, ३२. (१) धारा २४, रद तथा २६ के अधीन बोर्ड के प्रत्येक विनिश्चय के विरुद्ध अपील राज्य सरकार को प्रस्तुत होगी. (२) उपधारा (१) के अधीन प्रत्येक अपील सम्बन्धित पल्षकारों द्वारा ऐसे विनिश्चय की प्रतिलिपि प्राप्त की जाने की तारीख से तीन मास के भीतर की जायगी. ३३. (१) तत्समय प्रवूत्त फिसी विधि में अस्तथिष्ट किसी बात के होतें हुए भी, मध्यप्रदेश के विधान मण्डल के समस्त ,अधि- नियमों में और मध्यप्रदेश में लागू हुए हुप में समस्त केन्द्रीय अधि- नियमों में, जहां तक कि ऐसे अधिनियम भारत के संविधान की सप्तम अनुसुची की सुची २ या सूंची ३ में विनिर्दिष्ट किये गये विषयों में से किसी भी विषय से सम्बन्धित हो, अभिव्यक्ति “बैद्य रूप & Al चिकित्सा व्यवसायी ” या “सम्यक्‌रूप से अहित चिकित्सा व्यवसायी” के अन्तर्गत था किसी अन्य शब्द या अभिव्यक्ति, जिससे कि खिंकिस्सा सूची का . पुमरीक्षण जांचों में प्रक्रिया बोर्ड के घिनियचय के विंद्द्ध भपील. _ रजिस्ट्रीकत व्यव- साथियों के विशेषा- घिकार.

इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत न *किये.. गये य्पक्तियों.. द्वारा चिकित्सा व्यवसाय आदि कियें जानें . का प्रतिषेघ, १६ व्यवसायी के रूप में था खिकिर्सा-वुत्ति के सदस्य के रुप में निधि द्वारा मान्य व्यक्ति का चोतन होता हो, के अन्तर्गत रजिस्ट्रीकृत ब्यवसायी आयेगा. (२) मान्य अहेंतायें रखने वालें व्यक्तियों द्वारा चिकिस्सा व्यवसाय के बारें में इस अधिनियम में अधिकथ्रित शर्तों तथा निर्चेन्धनों के अध्यपघीन रहते हुए ऐसा प्रत्येन व्यक्ति, जिसका नाम, तत्समय, व्ययसाधपियों के राज्य रजिस्टर में हो, इस बात का हकदार होगा कि वह अपनी अद्देताओं के अनुसार रा राज्य के झीतर चिकित्सा ब्यव- सायी के रूप में व्यवसाय करे और ऐसे व्यवसाय के सम्बन्ध में औषधिंयीं था अन्य साधिटों के बारे मैं, कोई ब्यय या प्रभार, या कोई फीस, जिनका कि बह हकदार ही, िधि के सम्यक्‌ अनुकरम में वमुल कर लें. ः (3) कोई भी प्रमाण-पल, जिसका किसी चिकित्सा व्यव- सापमी द्वारा दिया जाना किसी अधिनियम द्वारा अपेक्षित ही, उस दशा में विधिमान्य होगा जब कि ऐसा प्रमाण-परत किसी रजिर्ट्रीकृत ध्यवसायी द्वारा दिया गया हों... ') रजिस्टीकृत व्यवसायी, किसी भी ऐसे आयुर्वेदिक या यूनानी या. प्राकृतिक-चिंकित्सा औषधालय, चिकित्सालय, झरणालय या प्रसवॉलय में, जो राज्य सरकार द्वारा घोषित हों या उससे (राज्य सरकार से) अनुदान प्राप्त कर रहा हो, चिकित्सा (फिजीशियन), शल्य चिकित्सक या अन्य चिकित्सा-अधिकारी के रूप में, किसी पद को धारण करने के लिए और किसी ऐसी लोक स्थापना, निकाय या. संस्था में, . जिसमें आयुर्वेदिक या यूनानी चिकित्सा-पद्धति या प्राकृतिक-चिरकित्सा द्वारा चिकित्सा की जाती हो, आपूर्वेदिक या मूनानी चिकित्सा-पद्धति या प्राकृतिक-सिंकित्सा के अमुसार रोगियों की चिकित्सा कंरने के लिए पाव होगा. आठवां अध्याप-साधारणत: चिकित्सा व्यवसायी ३४. तत्समथ प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अन्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी 2... (एक) कोई भी ऐसा व्यक्ति जो रजिस्ट्रीकृत व्यवसायी से या ऐसे ' व्यक्ति से, जिसका कि नाम धारा २८ के अधीन तैयार की गई सुची में प्रविष्ट हो, भिन्न हो चिकित्सा व्यवसाय नहीं करेगा गा प्रत्यक्षत: या विवक्षित तौगू पर स्वर्य को इस रूप में नहीं

२० जतलेायेगा कि यह आयुर्वेदिक था यूनानी चिंकित्सी-पद्धति' 7 या प्राकृतिक चिकित्सा, की व्यवसाय करता है या उस o व्यवसाय को करने के लिए सक्षम है; (दो) -रजिस्ट्रीकृत व्यवसायी सें भिन्न कोई भी व्यक्ति (%) किसी भी जन्म यां मृत्यु प्रमाण-पत्ने “को, . ,... जिसकें कि. सम्बन्ध में तत्समय प्रवृत्त किसी ” ' विधिं था नियम द्वारा यहं अपेक्षित हो कि वह सम्यंव/ रूप से अहित चिकित्सा व्यक्सायी ' द्वारा हस्ताक्षरित या अधिप्रमाणीकृत किया जाये, हस्ताक्षरित यां अधिभ्रभाणीकृत ' नहीं करेगा: या (=) किसी भी चिकित्सीय था शारीरिंक योग्यंता के ' प्रमोण-पत्रों की, जिसके कि संम्बन्ध में तत्समय - प्रवूस किसी विधि या ” मियम द्वारा यह अपक्तित हों कि यह सम्यक्‌ रूप से अहित चिकित्सा व्यवसायी द्वारा हस्ताक्षतितिं या - - अधिप्रमाणीहत किया जाय, हस्ताकरित यो - अधिप्रमाणौकृत नहीं करेगा; या (ग)' ' किसी मुत्यु-समीक्षा में या किसी विधि न्यायां- - लय में भारतीय साक्ष्य 'अधिमियंग, "१८७३ (कमांक १, सन्‌ १८७९२), की धारा ४४ के '- अधीन विशेषज्ञ के रूप में साक्ष्य देने के लिये . अहिंत नहीं होगा. ' ३५. . जो कोई जानगूझ कर था मिथ्या रूप से अपने नाम के शक्ति... साथ कोई ऐसी उपाधि या लक्षण धारण करेगा या "उपयोग में लायेंगा या अपने नाम कें साथ कोई ऐसा अंभिवर्णन घारण करेगा या उपयोग में लावेगा' जिससे कि यह विवंक्षिते होता हो कि वह मान्य अहंता धारण करता है या कि बह रजिस्ट्रीकृत व्यवसायी है या कि. उसका नीम घारा २८ के अधीन बनाये रखी गई सूची में प्रविष्ट है, अथवा धारा ३४ के उपबन्धों में उत्लंघन के कार्य करेगा, वह प्रथम अपराध के लिए ऐसे T से, जो पांच सौ झुपये तक का g सकंगा, और प्रत्येक पर्चात्वर्ती अपराध के लिए ऐसे जुर्मानि से जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा,

राज्य सरकार द्वारा मियंत्रण, भनुसूची का सधौघन दस्तावेज पथ करने न. लिए बोरई के सेव- को को समत करने पर निर्मेस्थन. 29 नवां अध्याप-प्रकीर्ण रे६. यदि किसी भी समय राज्य सरकार को यह प्रतीत हों कि बोर्ड ने इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उसको प्रदत्त शक्तियों में से किसी भी शक्ति का प्रयोग करने में चूक की है या अतिरेक किया है या पुरुपयोग किया है या इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उसके प्रदत्त कत्त ब्यों में से किसी भी कत्त॑ब्य का पालन करने में चूक की है, तो राज्य सरकार, यदि बहू ऐसी चूक, अतिरेक या दुरुपयोग को गंभीर स्वरूप का समझती है, बोर्ड को . उसकी विशिष्टियां अधिसूचित करेगी और यदि वोई ऐसे समय के भीतर जिसे कि राज्य सरकार इस सम्बन्ध में नियत करे, ऐसी चूक, अतिरेक या दुरुपयोग का उपचार करने में असफल रहे, तो राज्य सरकार बोर्ड को विघटित कर सकेगी और बोर्ड की समस्त या किन्हीं भी शक्तियों तथा कत्त ब्यों' का ऐसे व्यक्तियों द्वारा तथा दो वर्ष से अनधिक ऐसी कालावधि के लिए जिसे कि g उचित समझे. प्रयोग तथा पालन करवा सकेगी तथा नवीन बोर्ड अस्तित्व में लाने के लिए अग्रसर होगी. २७. भारत का कोई भी विश्वविद्यालय, जो आयुर्वेदिक तथा यूनानी चिकित्सा-पद्धति या प्राकृतिकं-चिकित्सा में ऐसी चिकित्सीय अहंता प्रदान करता हो जो अनुसूची के अन्तर्गत न आई हो, ऐसी अह्त्ता को मान्य करवाने के लिए राज्य सरकार, को आबे- देन कर सकेगा और राज्य सरकार, वोड़े से परामर्श करने के पदचातु, अधिसूचना दारा, अनुसूची को इस प्रकार संशोधित कर सकेगी कि जिससे ऐ सर. अहहता उसके (अनुसूची ) के अन्तर्गत लें आई जाय और ऐसी किसी भी अधिसूचना द्वारा यह भी मिर्देशित क्या जा. सकेगा कि ऐसी चिकित्सीय अहँता उस दशा में मान्य अहता होंगी जब कि वह विनिर्दिष्ट तारीख थो परचात्‌ प्रदान की गई हो. ३८... बोर्ड के किसी भी सदस्य था अधिकारी या सेवक को किसी भी ऐसी विधिक कार्यवाही में, जिसमें कि वो्ड पक्षकार न हो, कोई रजिस्ट्रार या दस्ताबेंज पेश करने था उसमें अभिलिखित बातों को साबित करने वो लिए साक्षी के रूप में उपसंजात होने के लिए तब तक अप॑ क्षित नहीं किया जायगा जब तक कि स्यायालय विशेष कारणों से ऐसा निदेश न दें

रस २६. म्रिसी भी व्यक्ति के घरिरुद्ध किसी भी ऐसी वात के लिए जो कि इस अधिनियम के अधीन या उसके अधीन बसाये ™ नियमों या विनियमों के अधीन सदुभावपूर्वक, की गई हो या जिसका संदूभावपुर्वक किया जाना आशथित रहा हो, कोई भी वाद, अभि- योजन या अन्य विधिक कार्यवाही संस्थित नहीं की जायगी, . ०. (१) प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट के न्यायालय से भिन्न कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन किसी भी अपराध का न संज्ञान करंगा और ने उसका विचारण करेगा. (२) कोई भी न्यायालय इस अधिनियस के अधीन किसी भी अपराध का संजान राज्य सरकार द्वारा इस सम्बन्ध में सशक्त किए गये अधिकारी द्वारा की गई लिखित शिकायत पर ही करेगा अन्यधा नहीं. ’ ‘ ' YV तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यवसायी को, यदि बहु ऐसी वांछा करें, दंड प्रक्रिया संहिता, १८९८ (क्रमांक 4 A १८९८) के अधीन किसी मृत्यु-समीक्षा का कायें करने से या जुरी सदस्य या असेसर के रूप में कार्य करने से छूट दी जायगी, पसवां अध्याय-नियम तथा विनियम रे (१) राज्य सरकार, T प्रकाशन की . थर्त के अध्याधी न रह हुए, इस' अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यास्वित करने के लिए नियम बना सकेगी. () विशिप्टत: और पूरवंगामी शक्ति की ब्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले सिना, राज्य सरकार निम्नलिखित को विहित करते हुए नियम बनी सकेगी :द- (%) वह रीति जिसमें धारा ४ की उपधारा.(२) के अधीन अध्यक्ष तथा. उपाध्यक्ष निर्वाचित किये जायेंगे; दि) धारा ५ वी उपधारा (१) के अधीन मिर्वाचन को दंग; ' (ग) वह कालावधि जिसके भीतर बॉ के लिए निर्वा- चन से सम्बन्धित विवाद धारा ५ की उपधारा ()& अधीन राज्य सरकीर को मिदेशित किया जायया; - दस अधिनियम के अधीन कार्य करते वाले व्यक्तियों का परित्नाण, ईस अधिनियम के अधीन अपराधों का विचारण करने के लिए सक्षम न्यायालय तथा अपराधों का संज्ञान. मु्यु समीक्षा का कार्य करने से छूट, भियम बनाने की शक्ति.

(7) (7) (@) 3 वे यावा तथा अन्य भत्ते जिनके कि लियें थोई के सदस्य धारा १८ की उपधारा (१) के अधीन हकदार होंगे; वह रीति जिसमें धारा १९ की उपधारा (२) के खण्ड (ख) के अधीन अपील की सुनवाई की जायगी तथा उसका विनिश्चय किया जायंगा; धारा २० की उपघारा (३) के अधीन रजिस्ट्रार की अहँताएं, नियुक्ति तथा सेबां की शर्त एवं वेतनमान; वह रीति जिसमें ब्यवसायियों के राज्य रजिस्टर का धारा २१ की उपधघारा (१). के अधीन रजिस्ट्रार द्वारा पुनरीक्षण किया. जायगा; बह रीति जिसमें किसी रजिस्ट्रीकृत व्यवसायी का नाम व्यवसायियों के राज्य रजिस्टर में से हटाये जानें सम्बन्धी तथ्य घारा २१ की उपधारा (४) के अधीन प्रकाशित किया जाया. वह रीति जिसमें व्यवसायियों का राज्य रजिस्टर धारा २४ की उपघारा (१). के अधीन वो्ड द्वारा रखा जायगा; अहता का सबूत जिसके दिये: जाने पर तथा फीस जिसके 'बुकायें जाने पर कोई व्यक्ति धारा २४५ की उपधारा (१) के अधीन व्यवसायियों के राज्य रजिस्टर में नाम दर्ज किया जाने के लिए पात्र होगा; वह रीति जिसमें आयुर्वेदिक या यूनानी चिकित्सा पद्धति बा. प्राकृतिक-चिकित्सा की कोई उपाधि उपाधि-पत्न या अन्य अहता व्यवसाथियों के राज्य रजिस्टर में प्रविष्ट कराने के लिए धारा २६ के अधीन आवेदन किया जायगा; बह प्ररुप जिसमें तथा वह फीस जिसके साथ, किसी व्यवसायी का नाम व्यवसायरत व्यक्तियों की सूची में समाधिष्ट कराने के लिए धारा २८ की उपधारा (२) के अधीन आवेदन किया ज्ञायगा; और

¥ (डे) वे अन्तराल जिन पर, व्यवसाय रत व्यक्तियों की सूची धारा ३० के अधीन पुनरीक्षित की जायगी. (३) इस धारा के अधीन बनायें गये समस्त नियम विधान सभा के पटल पर रखें जायेंगे. ४३. (१) बोर्ड साधारणत: इस अधिनियम के प्रयोजनों ग कार्यान्वित करने के लिए इस अधिमियम तथा उसके अधीन पताये गये नियमों के उपबन्धों के अध्यधोन रहते हुए विनियम घना सकेगा. (२) विशिष्टत: और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकुल प्रभाव डाले बिना ऐसे विनियमों में निम्नलिखित के लिए सपबन्ध हो सकेंगे - (%) बोड की सम्पत्ति का भ्रवन्ध तथा उसके लेखाओं का बनाये रखा जाना और उनकी संपरीक्षा; (खि) बोर्ड के सम्मिलित का समन किया जाना तथा किया जाना वह समय तथा स्थान जहां कि ऐसे सम्मिलने किये जाने हों, उनमें कामकाज का संचालन: () अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष की शक्तियां और कत्त व्य; (घ) समितियों की नियुक्ति का ढंग, सम्मिलनों का समन किया जाना तथा किया जाना और ऐसी समितियों के कामकाज का संचालन: (z) बोर्ड ऐसे अधिकारियों तथा सेवकों की, जो रजिस्ट्रार से भिन्न हो, पदावधि और उनकी शक्तियां तथा कत्त व्य एवं सेवा की अन्य शर्तें: - (च) ऐसे अन्य विषय जो इस अधिनियम के अधीन बोर्ड द्वारा शक्तियों का प्रयोग किया जाने और कत्त ब्यों तथा कृत्यों का पालन किया जाने के लिए आवद्यक हो. ग्यारहवां अध्याय-निरसन . (१) धारा ३ की उपधघारा (१) के अधीन अधि- भूचना में बोर्ड की स्थापना के लिए विनिदिष्ट की गई तारीख से सिम्नलिखित परिणाम होंगे, अथतत्‌ :- बिनियम वनाने की शक्ति. कतिपय अधिनिय- मितियों का म़िरसन तथा व्यावुत्ति,

२५४ (क)--सेन्ट्ल प्राधिन्सेज एण्ड बरार आयुर्वेदिक एण्ड यूनानी प्र बिटेशनसे एवट, १९४७ (क्र्माक '४, सन्‌ पट ४८) मध्यभारत देशी औषधि विधान, संबत्‌ २००७ (क्रमांक २८, सन्‌ १६४५२) और मेडिकल प्र क्टिशनसे रजिस्ट्रेशन एक्ट, १६३५ ( भोपाल एक्ट कमांक ७ सन १६३४ ) जहां तक कि वह आयुर्वेदिक तथा यूनानी पढ़ति से चिकित्सा व्यवसाय करने वाले ब्यवसाधियों से सम्बन्धित है निरस्त हो जयिंगे; (ख) मध्यभारत देशी औषधि पषंद (मध्यभारत इडियत मेड़ीसिन बोर्ड) तथा महाकौशल बोडें ऑफ आयुर्वेदिक एण्ड यनानी सिस्टम अफि सेडिसिस्स, विघटित हो T, (ग) मेडिकल प्र बिटशनर्स रजिस्ट्रेशन एकंट, १६ ३५ (भोपाल एवट क्रमांक ७ सन्‌ १९६३४) की धारा ३ के अधीन स्थापित मेडिकल काउन्सिल, उसके रजिस्टर पर के आयर्वे दिक तथा यूनानी चिकित्सा-पद्धति के ब्यव- साथियों के सम्बन्ध में, अधिकारिता का प्रयोग नहीं करेगी: (घ) खण्ड (ख) में नि्िष्ट किये गये बोडों की समस्त आस्तियां तथा दा्ित्व धारा ३. के अधीन स्थापित किये गयें वोई वी आरिरयां तथा दायित्व होंगे और समझे जायेंगे: (ड) ऐसे समस्त रजिश्ट्रीकृत व्यवसायी, जो खण्ड (क) के अधीन निरसित अधिनियमीं में से किसी भी अधि- नियम के या राजस्थान इंडियन मेडिसिन एक्ट, १९५३ (क्रमांक ४, सन्‌ १६४३) के अधीन रजिस्ट्री कृत किये गये हों और जो धारा ३ की उपधारा (१) के अधीन विनिदिष्ट की गई तारीख को रोज्य में निवास करते हों तथा मान्य अहता रखते हों, व्यव- साथियों को. राज्य रजिस्टर में रजिस्ट्रीकृत व्यव- साथियों के रूप में दर्ज किये गयें समझे जाय॑गे (%) & समस्त कर्मचारी, जो पूर्वोवत तारीख के अब्य- वहित पूर्व खण्ड (ख) में निर्दिष्ट किये गये बोर्डों के हों या उनके नियंत्रण के अधीन हों, धारा ३ के अधीन स्थापित किये गये बोर्ड के कर्मचारी समझे जायेंगे परम्त ऐसे कर्मचारियों की सेदा के निर्बंधन तथा शर्तें, जब तक कि वें राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी से बोई द्वारा परिवर्तित न की जांय॑ वही होंगी ।

X% परन्तु यह भी कि पूर्वंगामी परन्तुक के अधीन कोई भी मंजूरी राज्य सरकार द्वारा तव तक नहीं दी जायगी जब तक कि उसके द्वारा प्रभावित व्यक्ति को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो; (छ) खण्ड (ख) से निदिष्ट किये गये वोड़ों के समस्त अभि- लेख तथा कागज-पत्र घारा ३ के अधीन स्थापित वोर्ड में निहित होंगे तथा उसे अन्तरित कर दिये जायेंगे. (२) उपघारा (१) के खण्ड (क) में वर्णित अधिनियमितियों के निरसन के होते हुए भी, ऐसे समस्त व्यक्ति, जो धारा 39 उपधारा (१) के अधीन विनिदिष्ट की गई तारीख के अव्यवहित पूर्व सैन्ट्रल प्राविन्सेज एण्ड बरार आयुर्वेदिक एण्ड यूनानी o ey एक्ट, १६४७ (क्रमांक ४, सन्‌ १६४८ ), की घारा २ के खण्ड (१) में यथा पश्भिपित अ्हंकारी परीक्षा के लिए विह्वित किये गये किसी अध्ययन पाठ्यक्रम का या मध्यभारत देशी औषधि विधान, संवत्‌ २००५७ क्रमांक २८, सन्‌ १९४२), की धारा ३२ के अधीन विहित किये गये किसी अध्ययन पाठुयक्रम का अध्यय न कर रहे थे, उसका अध्ययन करने तथा उस गरीक्षा में, जिसके लिए कि वे तैयारी कर रहे थे. बैठने के हकदार होंगे और उस प्रयोजन के लिए, इस अधि- नियम में अन्तथिंप्ट किसी बात के होते हुए भी :- (एक) धारा 5 के अधीन स्थापित किया गया बोर्ड, उप- घारा (१) के खण्ड (ख) के अधीन विघटित किये गए वो्डों की समस्त शत्तियों का प्रयोग तथा उनके समस्त कृत्यों का. निर्वेहन करेगा, और (दो) सेन्ट्रल प्राविन्सेज एण्ड बरार आयुर्वेदिक एण्ड यूनानी परे क्टिशनसे एक्ट, १६४७ (क्रमांक '४, सन्‌ १६४८), बी धारा २२ के अधीन प्राधिकृत था मध्यभारत देशी औषधि पषदू (मध्यभारत इंडियन मेडीसिन वोड) से सम्बद्ध संस्थाएं, जब कि ऐसे व्यक्तियों का अंतिम वँच सामान्य अनुक्रम परीक्षा में बेठंगा तब तक तथा उसके पट्चातु एक वर्ष की कालावधि तक इस प्रकार कार्य करती रहेंगी मानों कि उक्त अधिनियम मिरस्त नहीं मिये गये हों तथा धारा 3 के अधीन रथापित किया गया बोर्ड उक्त निरसित एक्टों के अधीन गठित किया गया बोर्ड हो. ४५. मध्यप्रदेश आयुर्वेदिक, यूनानी तथा प्राकृतिक- चिकित्सा व्यवसायी अध्यादेश, १९६७० (क्रमांक १४, सन्‌ १६७० ) एतदद्वारा निररत किया जाता है १४, सन्‌ १४६७० का निरसन,

२७ अनुसूची | घारा र (ज) देखिये | भाग क 3तससद, यूनानी चिंकित्सा पद्धति तथा प्राकृतिक-चिकित्सा सम्बन्धी मान्य अहेंतायें जो इस राज्य में के विदवविद्यालयों या संस्थाओं द्वारा प्रदान की गई हों. B चिद्वबविद्यालय या संस्था का नाम... मान्य अहृंताएं रजिस्ट्रीकरण के : लिए संक्षेपाक्षर {1 (२) (दि) (४) सागर यूनिवर्सिटी, सागर वैचलर ऑफ भापुर्वे दिक मेडिसिन वी. ए. एम. एस ' एण्ड सजरी :.. विक्रम विदवविद्यालय, उज्जैन बेचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन वी. ए. एम. एस एण्ड संजर ः “विजंकर यूनिवर्सिटी, रायपुर बेचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन वी. ए. एम. एस एण्ड सर्जरी | ८... जीवाजी यूनिवसिटी, ग्वालियर बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन वी. ए. एम. एस एण्ड सर्जरी — , :.. इन्दौर यूनिवर्सिटी, इन्दौर @ ऑफ आयुर्वेदिक मेंडिसिन वी. ए. एम. एस. एण्ड सर्जरी «,. जवलपुर यूनिवर्सिटी, जवलपुर बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन वी. ए. एस. एस. एण्ड सर्जरी तोई ऑफ इंडियन मेडिसिन, आयुर्वेदिक विज्ञानाचाये ए. ब्ही. एम, एस. मध्यमारत, ग्वालियर मिषगाचार्य शिषगाचाये. मडदाकौंशल बोड ऑफ आय-.. लाइसेंशिएट आयुर्वेदिक प्र क्टिशनर. एल. ए. पी दिक एण्ड यूनानी सिस्टम. आयुर्वेदिक विज्ञानाचार्य ए. नही. एम. एस. आफ मडिसित, जबलपुर जायें दिवा कालेज, ग्वालियर आयुर्वेदोपाध्याय आपुर्वेदोपाध्याय वेद्यवर AT बैद्यशारत्री वैद्यशास्त्री

[al s A av /_________/_——(?) (%) “"’-/(*) आल इंडिया आयु दिक ST AT अं दाचाय॑ चिद्यापीठ, दिल्‍ली I मैद्याचाये ढोदा दिशारद दीय विशारद अपेव दविशारद आपयनेदविशारद आयर्गेदरभिषक आयर्णोइभिपर्क प्रजागेद्य-परीक्षा प्रजानेद्य-परीक्षां दनवारीलाल आपुर्गेदिक आयुर्देदाचाय आयुर्गेदाचार्य कालेज, दिल्‍ली. भिषगाचार्य भिषगाचार्य ‘ _ बौद्य विशारद g AR गुजरात गुजरात यूनिवरसिटी बैेचलर आफ आयुर्गेदिक मेडी- AL GO एस. सिन एण्ड सर्जरी, ' कंकर्टी ऑफ आपयुर्गेदिक एण्ड ग्रेजुणट आफ दी फैकल्टी ऑफ... जी, एफ: ए. एम. यूमानी सिस्टम ऑफ यर्वेदिक में दीसिन मेंडीसिन श्रावणमास दक्षिण, वबड़ौदीं आपुर्गेद-उत्तमां आयर्नेद-उत्तमा आधयुर्देद-मध्यमा आपयुर्गेद-मध्यमा जम्मू एंण्ड काइ्मीर डायरेवटर ऑफ हेस्थ सबविसेज बैचलर ऑफ आपयुर्देदिक बी. ए. एम. एस. मेडीसिन एण्ड सजरी. बैचलर ऑफ यूनानी मेडी सिर बी. यू. एम. एस. एएड सर्जरी. क्रेरल क्ररल यूनिवर्सिटी डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक डी. ए. एम. मेडीसिन बैचलर इन आपुर्वेदिक बी. एं. एम. मेडीसिन मवर्नेमेन्ट आयुर्वेदिक कालेज, बैद्य-शारत्री बैरा-शास्ती . AT बैरा-कल निधि बैद्य-कलानिधि

3} — < ~— (2) महारोप्ट् स्टेंट फीकल्टी ऑफ आयुर्वेद, महाराा टू Al ऑफ आयुर्वेदिक एण्व यूनानी सिस्टम ऑफ मेडीसिन ATTE नागपुर यूनिवर्सिटी पुना यूनिवसिटी, पूता आयुर्वेद महाविद्यालय, अहमदनगर आर्योगल वैद्क महाविद्यालय, सतारते तिलक महाराष्ट्र विद्यापीठ, T विदर्भ आयुर्वेदिक कालेज, अमरावती गुरुदेव आयुर्वेदिक मंदिर मोनझरी ग्रेजुएट ऑफ दी फीकल्टी पॉफ आयुर्वेदिक मेडी सिन. आयुर्वेद-विशारद मेम्बर ऑफ दी फकल्टी आफ भायुर्वे दिक मेडीसिन. ग्रेजुएट ऑफ दी फंकल्टी ऑफ आयुर्वेदिक मेंडीसिन. माहिरे-तिब्बो-जराहूत बेचलर ऑफ आपयुर्वे दिया मेंडी- सिन एण्ड सर्जरी. बैचलर ऑफ आयुर्वे दिक मेडी - सिन एण्ड सर्जरी, आयुर्वेद-ती रथ आयुर्वेद-विशारद आपुर्वेद-विशारद बेचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडीसिस एण्ड सजरी. आयुर्ेद-से वा-पा रंगत. जी. एफ. ए. एम. आयुर्वेद-विशा रद एम. एफ. ए. एम, जी. एफ. ए. एम. माहिर-तिष्बो- जराहुत. वी. ए. एम. एस. बी, ए. एम. एस. अपूर्वेद-ती थें आायर्वेद-निशारद आपयुर्वेद-विशारद वी. ए. एम, एस, आपुर्वेद-सेव- पारंगत.

1y (=) (३) दि) LTAY जद ही an w N ok} 1 €9, %3, मेसूर बोर्ड ऑफ स्टडीज इन इंडियन- मेडीसिन, मैसूर. उड़ीसा फंकल्टी ऑफ इंडियन मेडीसिंन, उड़ीसा आयुर्वेदिक एग्जामिनेशन वो, उड़ीसा. पंजाब फंवल्टी आफ इंडियन मेडी- सिन, पंजाब 'भुपेन्द्र तिथ्बिया कालेज, पटियाला राजस्थान राजस्थान गवर्नमेन्ट एज्यूकेशन डिपार्ट मेन्ट . आयुर्वेदिक डिपार्टमेंटल एग्जा- मिनेशन, राजर्थान. महाराजा कालेज ऑफ आयुर्वेद, जयपुर तामिलनाडु मद्रास यूनिबसिटी मेजुएट ऑफ दी कालेज ऑफ जी. सी. ए. एम, मायुर्वे दिक मेडी सिन, लाइसेन्शिएट इन आयुर्वेदिक. एल. ए. एम. एस. मेडीसिन एण्ड सर्जरी. बैचलर आफ आयुर्वेदिक मेडी- बी. ए. एम. एस. सिन एण्ड सर्जरी. डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक मेड़ी- डी, ए. एम. एस. सिन एण्ड सर्जरी. ग्रेजुएट इन आयुर्वे दिक मेडीसिन जी. ए. एम. एसं. एण्ड सर्जरी. हाजिन-उल-हुबमा हाजिक-उल-हुक्मा आपयुर्वेदाचार्य आयुर्वेदा चाय भिषगूवर भिपग्वर भिषगाचार्य _ मिषगाचार्य शास्त्री-आचापें ः शास्त्री-आंचाये तवीब-कामिल तबीष-कामिल

19) (२) (2) (¥) ५०. आ्टांग आयुर्वेदिक विद्यालय, वैद्यवाचस्पति, वेद्यवाचस्पति उज्जैन ११. बोई ऑफ एग्जामितर्स, हुकीस-कामिल हकीम-की मिल भोपाल, भाग ख नह १३3. पद. 4. 1% आमवेद, यनानी चिकित्सा-पद्धति तथा प्राकृतिक-चिकित्सा सम्बन्धी मान्य अहेंताएं जो इस राज्य/दिश के बाहर के विवविद्यालयों या संस्थाओं द्वारा प्रदान की गई हो आर प्रदेश . आंध्र यनिवसिटी निर्जामिया आयर्वेदिक कालेज हैदराबाद असम बोई ऑफ आयुर्व दिक मेडी सि्स, असम. विहार स्टेट फैकट्टी ऑफ आयपुर्वे दिक एण्ड यूनानी मेडीसिन, विहार द्ह्ली बोर्ड ऑफ आयुव दिक एण्ड यनानी सिस्टम ऑफ मेडीसिन्स द्त्ली तबीव-कामिल तवीब-कामिल तवीब-ए-मुस्तनिद तबीव-ए-मुर्तनिद म्रे जुएट इन आयु दिक मेडीसिन्स जी. ए. एम. एस. g "I, डिप्लॉमा इन आयुव दिक मेडीसित डी. ए. एम. एस. एण्ड सर्जरी. ग्रे जुएट इन यूनानी मेडीसिन जी. यू. एम, एस, एण्ड सर्जरी. ग्रेजुएट इन आयुव' दिक मेडीसिन जी. ए, एम, एस. एण्ड सर्जेरी, बैचलर ऑफ इंडियन मेडीसिन वी. आई. एम. एस. एण्ड सजरी फाजिल-ए-तिब्बो-जराहत फाजिल-ए-तिब्बो i AT भिषगाचायं-धर्वंतरि शिपषगाचायें धन्वंत रि.

(१) (२) (३) डी /:.. व्यंकटेब्वर यूनिवसिटी आयुर्वेद-शिरोम्णि आयुर्वेद-शिरो- . - wfr gt e ४४. वोई ऑफ डुडियन मेंदीसिन, ग्रेजुएट ऑफ दि कालेज ऑफ. जी. सी. आई. एम प्द्रास vt A w.“w.-fim"guafi,mqg”fim एफ. आई. एम. हाई प्रोफीशियेन्शी इन इंडियन o @O सुड़ीसिन, एसोसिएट ऑफ इंडियन ए. आई. एम ' मेडीसिन. «9. बोर्ड ऑफ एस्जामिनेशन डन लाइसेंसिएट ऑफ इंडियन. एल' आई. एम- इंडीजीनस मेडी सिने, मद्रारा- मेडीसिन ६. मद्रास आयुर्वेदिक कालेज, मद्रास आयुर्व द-भूषण आयुवद-भूषण उत्तरप्रदेश / 2. लखनऊ यूनिचसिटी आयु दाचायें, बेचलर: ऑफ. बी. एम. वीं. एस. मेडीसिन एण्ड बैचलर ऑफ A आपु्ब दाचार्ये आयु दाचायें बैचलर ऑफ आयुव दिकर मेडी- AL o O 1 सिन एण्ड सर्जरी . ८८. बनारस, हिंत्दु यूनिवसिटी आयु दाचार्य वि मान ए. एम. एस: मेडीसिन एण्ड सर्जेरी- आपुं दाचार्य विथ बैचलर .. ए बी. एम: एस. ऑफ मेडीसिन एण्ड सर्जेरी. ४६... युरुकर्ल कांगड़ी यूनिवर्सिटी आयुर्वदालंकार आपयुर्वेदालंकार ५०. बोरई ऑफ इंडिघन मेडीसिम, ... आयु दाचार्य आयुर्व दाच्चायें यू. पी... बैचलर ऑफ इंडियन मेडीसिन बी” @ एण्ड सर्जरी. एस.

it 2 (> 33 (२) (३) (¥) फाजिल-उल-तिव बंचलर ऑफ मेडीसिन एंण्ड सर्जरी, डिप्लोमा ऑफ इंडीजीनस मेडीसिन एण्ड सर्जरी. आयुर्वेदाचायं, बैचलर भॉफ मेंडीसिन एण्ड सर्जरी. ' आयुर्वेदालंकार डिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग ऋषिकुल आयुर्वेदिक केपलेज, हरिद्वार, ललितहारि आयुर्वेदिक कालेज, पीलीभीत, मुन्देल खंड आुर्वेदिक कालेंजें, झांसी तकमील-उस-तिव कालेज, लखनऊ मुबा-व-तिव कालेज, लखनऊ गुसकुल महाविद्यालय, उवालापुर, हरिद्वार, तिथ्वियां कालिज, लखनऊ उत्तरप्रदेश बोर्ड, लखनऊ गुरुकुल विद्यालय, वृन्दावन अलाहाबाद यूनानी मेंडीकल कालेज अलीगढ़ मुस्लिम यूनिबसिटी आपुर्वेद-रत्न मैद्य-विशारद टौद्य-शास्ती टौद्य-विशारद ढोद्य-भूषण मैद्यराज AT एफ. एम. बी. एस. डी. आई. एम. एस. ए. एम. बी. एस. ापुर्ेदालंकार _ आपयुर्वेद-ररन बैद्य-विशारद बैद्य-शास्व्री . बौद्य-विशारद गैद्य-मूषण AT गैद्य-मूषण बैचलर ऑफ इंडियन मेडीसिन वी. आई. एमएस, एण्ड सजरी. उपाधि-परीक्षा आपयुर्वेद-भास्कर मुब्बा-उ-तिव ट्विवाधिक कोरसे डिप्लोमा इन आयुर्वेद डिप्लोमा इन यूनानी मेडीसिन बेचलर ऑफ यूनानी मेडीसिन एण्ड सर्जेरी. उपाधि-परीक्षा आयुर्वेद-भारनार मुब्बा-उ-तिव द्विवाधिक 14 डिप्लोमा इन आयुर्वेद. डिप्लोमा इन यूनानी मेडीसित बी. यू. एम. एस.

लि <t (3) (¥) “n “w W o o W से एतदुद्ारा प्रकाशित किया जाता है. पश्चिमी बंगाल सेन्ट्ल कौंसिल एण्ड स्टेट फकर्दी आँफ आधर्वेदिक मेडी- सिने, पथ्चिमी बंगाल, यामिनीभषण अष्टांग आयुर्वे- दिक क्रालेज, कलकत्ता. पाकिस्तान सनातन धर्म, प्रेमगिर आयुर्वेदिक कलेंज, लाहौर, दयानन्द आयुर्वेदिक कालेज, लाहौर लिव्बी कालेज, लाहौर मेम्बर ऑफ दि आयुर्वेदिक स्टेट फेकल्टी, आयुर्वेद-ती थे मिपषगरत्न ला इसेंशिएट इन आयु- वेंदिक मेडीसिन एण्ड सर्जरी. कविराज आयुर्वेदाचार्य गैद्यवाचस्पति गैद्यकविराज जुवा-र्तुब-हुकमा हुकीम-ए-हाजिक भोपाल, दिनांक १ फरवरी १९६७१. एम. ए. एस. एफ आपुर्वेद-ती थे एल. ए. एम. एस. मिधगरत्त कविराज आयुर्वेदाच ये गैदयवाचस्पति गैद्यकविराज जुवा-स्तुत्र-हुकमा हकीम-ए-हाजिक क्र. ३०९ ०-इक्कीस-अ (प्रा.)भारत के संविधान के अनुच्छेद ३४८ के खण्ड (३) के अनुसरण में मध्यप्रदेश आयुर्गेदिक, यूनानी तथा प्राकृतिक चिकित्सा व्यवसायी अधिनियम, १९६७० (क्रमांक ५ सन्‌ १६७१) का अंग्रेजी अनुवाद राज्यपाल के प्राधिकार मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, श्री हरि पंगारें, सचिव.

मध्यप्रदेश अधिनियम क्माक १४ सन्‌ १६७४ मध्यप्रदेश आयुर्वे दिक, यूनानी तथा प्राकृतिक चिकित्सा व्यवसायो संशोधन (अधिनियम) १९७३ दिनांक २८ फरवरी १६७४ को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त हुई, अनुमति मध्य- प्रदेश राजपत्र (असाधारण) मैं दिनांक १८ माचें १६७४ को प्रधमवार प्रकाशित की गई मध्यप्रदेण आयुर्वेदिक यूनानी तथा प्राकृतिक चिकित्सा व्यवसायी अधिनियम, १८७० को संशोधित करने हेतु अधिनियम भारत गणराज्य के चौवीसर्ने वर्षें में मध्यप्रदेश विधान . मेण्डल द्वार निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो - नंक्षिप्त नाम १. यह अधिनियम मध्यप्रदेश आयुरव दिक, यूनानी तथा प्राकृतिक चिकित्सा व्यवसायी (संशोधन) अधिनियम १९६७२ कहां जा सबगी । धारा ४ को २: मध्यप्रदेश आयुवंदिक, यूनानी! तथा प्राकृतिक चिकित्सा संशोधन ब्यवसायी अधिनियम १६७० (क्रमांक ५ सन्‌ १९७१) की घारा ४ की उपधारा (१) के खण्ड (के) को (F %) के रूप में पुन मांकित किंयां जाय और इस प्रकार पुन मांकित निये गये खण्ड (करके) & 03, निम्नलिखित खण्ड अन्तस्थापित किया जाय, अर्थात: "क) आयुवंद का संयुक्त संचालक, भोपाल, दिनांक १६ माचें १६७४ क्र एफ-आई (बी) ५-०४ दरककीस-अ(प्रा०) भारत के संविधान के अनुच्छेद ३४८ के खण्ड (३) के अनुसरण में, मध्यप्रदेश आयुर्वेदिक, यूनानी तथा प्राकृतिक चिकित्सा व्यवसायी (संशोधन) _ अधिनियम, (क्रमांक १४ सन्‌ १६७४) का अंग्रेजी अनुवाद राज्यपाल के प्राधिकार से एतदुद्ारा प्रकाशित किया जाती g मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, ओ० थार० सिद्दीकी, सचिव

मध्यप्रदेदा राजपत्र, दिनाक ९६. साच १९७६ भोपाल दिनांक २४ मांच १९७४ ऋण ११००-इक्कीस-अ (प्रा० )-सध्यप्रदेश विधान सभा को निम्नलिखित अधिनियम जिस पर दिनांवा २४ मार्च १६७४ को राष्ट्रपति की अगुमति प्राप्त हो चुकी है एुनदुद्ारा सर्वसाधारण की जानकीरी के लिए प्रकाशित किया जाता है । मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार जो. आर. सिद्दीकी सचिव सध्यप्रदेशा मधिनियम क्रमांक ६ सन्‌ १९७४ मध्यप्रदेश आयुर्वे दिक, यूनानी तथा प्राकतिक चिकित्सा व्यवसायी संशोधन (अधिनियम) १९७४ दिनांक २६ मार्च १४७४ को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त हुई अनुमति मध्यप्रदेश राजगत्र (असाधारण) में दिनांक २६ मार्चे १६७४५ को प्रथमबार प्रकाशित की गई मध्यप्रदेश आयुर्गेदिक यूनानी तथा प्राकृतिक चिकित्सा व्यवसायी अधिनियम १६७० को संशोधित करने हतु अधिनियम भारत गणराज्य के छब्बीसरे वर्ष में मश्यप्रदेश विधान मण्डल ड्ारा निम्नलिखित रूप में यह अधिभिय्रमित हो :- (१) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम सध्यप्रदेश आयुर्ेदिक, यूनानी संक्षिप्तनाभ तथा प्राकृतिक चिकित्सा व्यवसायी (संशोधन ) अधिनियम, १६७ ५ है (४) मध्यप्रदेश आयुर्गेदिक यूनानी तथा प्राकृतिक चिकित्स। व्यवसायी. धारा २८ का अधिनियम १६७० (कमांक 3 BT १६७१) जो इसमें इसके पद्चात संशोधम मुल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है कि धारा २८ में- (क) उपधारां (१) में खण्ड (के) का लोप किया जाय, _ (ख) उपधघारा (३) में (एक) शब्द दो वर्ष के स्थान पर शब्द पांच यर्षे स्थापित किये जाय

i (%) (दो) परन्तुक का लोप किया जाय, उपधारा (३ में-- (एक) स्ण्ड (वा) को लोप किया जाय (दो) खण्ड (ख) में शब्द कोप्ठक अंक तथा अक्षर उपघारा (१) के यथा स्थिति खण्ड (क) या (ख) में के स्थान पर .धड़द, कौष्ठक, अंक तथा अक्षर उपधारा (१) के खण्ड (ख) में स्थापित किये जाय, उपघारा (५) में शब्द या ऐसी और काल।वधि का जैसी कि उसके अधीन बढ़ाई जाय का लोप किया जाय, और (ड) उपधारा (प) के परचात निम्तलिखित उपधारा जोड़ी जाय अर्थात (६) कोई सूचीवद्ध व्यवसायी राज्य में आयुर्वेदिक या. यूनानी चिकित्सा पद्धति या प्राकृतिक चिविस्सा के क्षेत्र में नियमित चिकित्सा व्यवसाय के तीस बर्थ पूर्ण कर लेने पर ४८ वर्ष की आयु प्राप्त कर होने पर, व्यवसाधियों के राज्य रजिस्टर में नाम दर्ज किये जाने के लिए पाल होगा और घारा २५ के उपबन्ध ऐसे नाम दर्ज कियें जानें के संबंध ग॑ बधा आवश्यक परिवर्तन सहित लागू होंगे । धारा उ४ का ३. मूल अधिनियस की धारा ४४ की उपधारा (पके खण्ड (ड.) संगोघन की स्थान पर मिम्तलिखित खण्ड स्थापित किये जाप, अर्थात - (3.) ऐसे समस्त g व्यवशायी जो खंण्ड (क) के अधीन निरसित अधिनियमों में से किसी भी लधिनियम के था राजस्थान इंडियन में डिसिन एक्ट १६४३ (समाक ४ सन्‌ १६५३) के अधीन रजिस्ट्रीकृत किये गये हों और राज्य में निवास करतें हों, व्यवसाशियों के राज्य रजिस्टर में रजिस्ट्री कृत ब्यवसायियों के रूप में दर्ज विये गये समझें जायमें, पारा ४ तथा ४. धारा र तथा ३ हारा नियें गये संशोधन मूल अधिनियम के रा किये. e 3 हो उसके भाग वन गये रामझ्षे जायेंगे । A ¢ , बा भूललथ्मी प्रभाव सिरमन ५. मध्यप्रदेश आयुर्वेदिक युनानी तथा प्राकृतिक चिकित्सा AR (संशोधन) अध्यादेश, १६७५ (क्र० g सन्‌ १६७५) एतदुद्वारा निरस्त किया जाता है। भोपाल दिनांक २९ माच॑ १९७५ ऋत €१०१-इवर्वा,स-अ (प्रा०) भारन के संविधान वे अनुच्छेद २४८ के खण्ड (३) से अनुसरण में मध्यप्रदेश आयुर्वेदिक युनानी तथा प्राकृतिक चिकित्सा व्यवसायी (संशोधन) अधिनियम १६७४ (क्रमांक ६ सन्‌ १६७५) का अंग्रेजी अनुवाद राज्यपाल के प्राधिकार से एतदुद्दा रा प्रकाशित किया जाता है, मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार ० आर० सिद्दीकी, सचिव

सध्यप्रदेदा भधितिधम ऋमाव १३ सन १९४० मध्यप्रदेश आ पुर्वे दिक, यूनानी तथा प्राकृतिक चिकित्सा व्यवसायी (संशोधन) अधिनियम १९७७ (दिनांक ४ जुलाई: १६७७ को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त हुई, अनुमति “मध्यप्रदेश राजपत्र (असाघारण)” में दिनांक १४ जुलाई, १६७७ को प्रथमवार प्रकाशित की गई) मध्यप्रदेश आयुर्गेदिक, यूनानी तथा प्राकृत्तिक चिकित्सा व्यवसायी अधिनियम १६४७० की ओर से संशोधित करने हेतु अधिनियम भारत गणराज्य के अट्ठाइसमें बष में मध्यप्रदेश विधान मण्डल हारा निम्नलिखित रुप में यह अधिनियमित हो 2 : (१) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश आपयुर्गेदिक, यूनानी 2 तथा प्राकृतिक-चिकित्सा व्यवसायी (संशोधन ) अधिनियम, १९७७ है संक्षिप्तनाम (२) मध्यप्रदेश आयुर्देदिक, यूनानी तथा. प्राकृतिक चिकित्सा व्यवसायी... धारा दे# & अधिनियम, १६७० (क्रमांक ४ सन १६७१) की घारा ३७ के स्थान पर स्थान पर निम्तलिखिन धारा स्थापित की जाय, अर्थात्‌ 2 नयी धारा का स्थापन. ३७. भारत का को भी. विध्वविद्यालय, वोई या संस्था जो, अनुसूची का आयुर्वेदिक तथा. यूनानी चिक्रित्सा-पंद्धति या प्राकृतिक सणोधन., सनिकित्सा में ऐसी चिकित्सीय अह्डता प्रदान करती [करता दो जो कि अनुसूची के अन्तर्गत न आई हो; ऐसी अहंता को मान्य करवाने वो लिये राज्य रारकार को. आवेदन कर सकेगी| सकंगा और राज्य सरकार, बोर्ड से परामर्श करने के पश्चात्‌, अधिसूचना द्वारा, अनुसूची को इस प्रकार संशोधित कर सकंगी कि जिससे ऐसी अहृंता उसके (अनुसूची ) के. अन्तर्गत लें आई जाय और किसी ऐसी अधिसूचना द्वारा यह भी निर्द- जित किया जा सकेंगा कि ऐसी चिकित्सीय अहुंता उस दशा मे मान्य अहंता होगी जबकि वह विभिधिप्ट तारीख के पदचात्‌ प्रदान की गई हो.

धध्पप्रदेदा शासन लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग भोपाल, दिनांक २१ सितम्बर १६७८ अधिसूचना ऋमोक 3३१७५४५४०१(सतहु/मरेडि-४, चूकि अवधेशप्रताप सिह विश्वविद्यालय वैचलर आँफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी आयुर्वंदिक चिकित्सा पद्धति में ऐसी निकित्सीय अर्ता (जो इसमें इसके पइचात्‌ उक्त अहँता के नाम से निर्दिष्ट है) प्रदान गरता है जो कि मध्यप्रदेश आपूर्वेदिक, यूनानी तथा प्राकृतिक चिकित्सा व्यवसायी अधिनियम, १९७७ (क्रमांक ५ सन्‌ १९७१) की अनुसूची के अस्तर्गत नहीं जाई है । और चू कि, उक्त विच्वविद्यालय ने उक्त अहूता को मारर्य करवाने के लियें राज्य गरकार को आवेदन क्रिया है, अनएव, मध्यप्रदेश आयुबेदिक, यूनानी तथा प्राकृतिक चिकित्सा व्यवसायी अधि- नियम, १६७४ (क्रमाग ४ सन्‌ १६७१) की धारा ३७ द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए राज्य सरकार, एतद्‌ हारा, मध्यप्रदेश आयुर्वेदिक तथा यूनानी चिकित्सा पद्धति नव प्राकृतिक चिकित्सा वोई से परामर् करते के पश्चात्‌ (१) उक्त अधिनियम की अनुसूची पे निम्नलिखित संशोधन फरती है, अर्थात न संशोधन (१) उक्त अधिनियम की सूची में भाग के में अनुक्रमांक: ६ तथा उसमें सम्बन्धित परवि्टियों के पदचातू निम्नलिखित अनुकमॉक तथा प्रविष्टियां अन्त: स्थापित की जाय, AT - . T अवधेणप्रताप सिंह वैचलर ऑफ़ ची.ए.एम.एस. विद्दविद्यालय e (2 रीवा मेडिसिन एण्ड सर्जरी (2)... यह निर्देश देती है कि उक्त सिकित्सौय अहता उस दशा में मान्य अहेँता होगी जबकि यह १९७४ के पदचातु प्रदान की गई हो । ः मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेंशानुसार . सही ० उप सचिव " मध्यप्रदेश शासन लोक स्वास्थ्य एवं पर्वार कत्याण विभाग,

प्र क. ४३१८/५८०"सिवहे|मिदि-४ भोपाल, दिनांक २१ सितम्वर, १६७८ प्रतिलिपि :- नियंत्रक, शासकीय मुद्रणालय, भोपाल की और राजपत्त के आगामी अंश में प्रकाशशार्थ अग्रेपित । कृपया इसीकी प्र ० प्रतियां इस विभाग को भेजें । प्रतिलिपि सूचनाएं शव आवश्यक कार्ययाही हेतु अग्रेषित :- २-.. संचालक, देशी तिकित्सा पद्धति एवं होम्पौपैथी, म.प्र, भोपाल ३- कल सचिव, अवधेशप्रताप सिह विश्वविद्यालय, रीवा की ओर उनके पत्र क्रमांक प्रणा. ४ ३/१९७८/२५१५६दिनाक १४-७-१६७५८ के सन्दर्भ में । «४-.. रजिस्ट्रार, आयुर्वेदिक तथा यूनानी एवं प्राकृतिक चिकिर्सा पद्धति म.प्र, भोपाल । सही ० अवर सचिव मध्यप्रदेश शासन लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग मध्यप्रददा अध्यादेश क्रमांक ८ सन्‌ १९७८ यप्रदेश आयुर्वेदिक अशासकीय महाविद्यालयों के छात्रों के परीक्षा संबंधी विशेष उपबनध-अध्यादेश, १९७६ (''मध्यप्रदेण राजपत्र” (असाधारण ) में दिलांक १४ दिसम्बर, १६७८ को प्रथम बार प्रकाशित किया गया) भारत के गण राज्य के उन्तीसवें वर्ष में राज्यपाल द्वारा प्ररयापित किया उस मान्य अहेंता के लिये, जो कि राज्य के वाहर की संस्थाओं द्वारा प्रदान की जाती है, परीक्षा की तैयारी के अभिषाय से राज्य में की प्राइवेट चिकित्सा संस्थाओं में किसी पाठयुकम का अध्ययन कर रहे व्यक्तियों की परीक्षा ली जाने तथा उस प्रयोजन के लिए मध्यप्रदेश आपर्वेदिक तथा यूनानी चिकित्सा पद्धति एवं प्राकृतिक चिकित्सा बोर्ड की आपुर्वेद विज्ञाना- चायें (ए.वी.एम.एस.) की उपाधि संबंधी परीक्षा संचालित करने के लिए सशक्त करने के एवं तत्संबंधी विषयों के लिये विशेष उपबन्ध करने हेत अध्यादेश । अत: राज्य के विधान मंदल का सत्र चाल नहीं है, और मध्यप्रदेश के राज्यपाल का समाधान हो गया है कि ऐसी परिस्थितियां विद्यमान है, जिनके कारण यह आवश्यक गो गया है कि बे तत्काल कार्यबाही करें,

के संविधान के अनुच्छेद २१ हे के खण्ड (१) और अत: भारत गये अनुसार राष्ट्रपति के पूर्व अनुदेश के परस्तुक द्वारा अपेंक्षित किये प्राप्त हो चुके. है अतएव, भारत के द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, मर्यमरद लिम्नलिखित अध्यादेश प्रस्यापित करते है” मध्यप्रदेश आ पुर्वेदिर्क अशासकीय विदयोष उपबन्ध अध्यादेश संविधान के अनुच्छेद २१३ के खण्ड (१) देश के राज्यपाल गंक्षित . १-(१) इस अध्यादेश का संक्षिप्त नाम नोम॑ महाविद्यालयों के छातों के परीक्षा संबंधी १६७८ हैं, (२) इसकी विस्तार संपूर्ण मध्यप्रदेश पर है, परिभपामें २ इस अध्यादेश मं जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो - (%) अधिनियम” से अभिप्रेत हैं, मध्यप्रदेश आयुर्वेदिक, यूनानी तथा प्राकृतिक चिकित्सा व्यवसायी अधिनियम, 1६७४० (क्रमांक ४, सन्‌ १६७१) (ख) 'बोडड'' से अभिप्र त है, अधिनियम की धारा हे तथा ४ की अधीन स्थापित तथा गठित किया गया मध्यप्रदेश आयुर्वेदिक तथा यूनानी व्बिकित्सा पद्धति एवं प्राकृतिक-चिकित्सां बोर्ड, (m) "'प्राइनेट महाविद्यालय” से अभि त.॒ है, अनुसूची में विनिधिप्ट बिये गये प्राइवं ट आयुर्वेदिक महाविद्यालय, (घ) उन शब्दों तथा अभिव्यक्तियों का जो इस अध्यादेश में प्रयोग में लाई मई है, किन्तु परिभाषित नहीं की गई है, तथा अधिनिमम में परिभाषित की गई है. वहीं अर्थ होगा जो उनके लिए, उस अधिनियम में क्रमशः किया गया गया है, दोई ए. वी... ३. तत्ममय प्रवुत किसी विधि में या उसके अधीन बनाये गये कि्ही एम, एस के... लियमों या विनियमों में अन्तरविष्ट किसी बात के होते हुए भी, बोर्ड उन लिये परीक्षा यृक्तियों को जो, F - & . मी व्यवस्था... मिर्रत 5 को जो, कि राज्य के बहहूर की किसी ऐसी संस्था या ATV | किसी ऐसे बोर्ड द्वारा, जो कि मान्य अहँता प्रदान क्ररता[करती है) संचालित किसी परीक्षा की तैयारी के अभिप्राय से किसी प्राइवेट महा- विद्यालय में किसी पार्ट्यक्रम का इस अध्यादेश के प्रवृत होने के अव्यवहिंत पुर्वे अध्ययन कर रहे हों, किसी ऐसी परीक्षा में प्रवेश देगा, जो कि बोई द्वारा इस अध्यादेश के उपचन्धों के अनुसार संचालित की जावेगी,

q मु ए. ती. एम. एस. के लिये परीक्षा की व्यवस्था करने का वोदे का T W, भसूसूची का संशीघन. ४. (१) वोडे, आायुर्मद विज्ञानातार्य (ए.वी.एम.एस.) की उपाधि प्रदान किये जाने हेतु परीक्षा की व्यवस्था करेगा सथा इस धारा के अधीन बनाये गये विनियमों के अध्ययीन रहते हुए उन व्यक्तियों को, जिन्हें कि धारा ३ लाग होती है, उस परीक्षा में प्रगेश देगा (२) वोर्ड द्वारा उपघारा (१) के अधीन ली- जाने बाली परीक्षा के लिये पाठ्यक्रम बही होगा जो कि उस उपाधि को प्रदान किये - जाने हेतु बोर्ड द्वारा अधिनियम की धारा ४४ के अधीन ली गई परीक्षा के लिये हो (३) उपघारा (१) के प्रयोजन के लिये, प्रथम परीक्षा शैक्षणिक सब्र - १६७८-७६ ने अन्त में ली जायेगी और वोर्ड ऐसी परीक्षा की व्यवस्था उस गेक्षणिक सत्र से छः वर्ष की कालावधि का अवसान होने तक करता रहगा (४) बोर्ड, राज्य सरकार की पूर्ग मंजूरी से निम्नलिखित बिपयों में से किसी भी विषय के लिए विनियम बता सकेगा, अर्थात - (एक) गो जतें,जिन के कि अधीन उन व्यक्तियों को, जिन्हें कि धारा ३ लाग होती है, बोर्ड की परीक्षा में प्रनेश दिया g (दो) परीक्षकों की नियुक्त की शर्ते , (तीन) परीक्षा फीस, (चार) साधारणतया परीक्षाओं की बाबत उन समस्त अन्य विषयों के लिये, जो कि इस अध्यादेश को कार्यान्वित करने के लिये आवश्यक हों ५. अधिनियम की अनुसूची में, कमांक ७ तथा उससे संबंधित प्रविष्टि के परचात्‌ निम्नलिखित क्रमांक तथा प्रविष्टि अन्तःस्थापित की जाय, अर्थात्‌ :- (१) (र) (३0... (९) सके... सध्यप्रदेश आयुर्वेदिक. आपुर्बेद- ... ए. वी. एम, एस, तथा युनानी चिकित्सा विज्ञांनाचायं (नबंबर १९६७८ के पद्धति एवं प्राकृतिक .. पइचात्‌) चिकित्सा बोड़ें, W {

अनुसूची (बारां २ का खंड (ग) देखिये) क्रमांक प्राइवेट महाविद्यालयों के नाम (9} (२) श्री आपुर्नेद महाविद्यालय, भोपाल. आयुर्वेद बिज्ञान महाविद्यालय, घीघट, रीवा. इन्दौर आयुर्वेद महाविद्यालय, इन्दौर. 3 ¢ श्रीराम आयुर्वेद महाविद्यालय, छतरपुर, भर बाए्मीक आापुर्वेद महाविद्यालय, ग्वालियर, % आयुर्गेद चिकित्सा महाविद्यालय, दुर्ग. : श्री परमानन्द कोमल चन्द जैन, आयुर्गेद विद्यालय, कटनी. G गुना आयुर्वेद महाविद्यालय, गुना. ATV : सी. एमं. पूनाचा, तारीख १२ दिसम्बर, 3८. राज्यपाल, मध्यप्रदेश. प्ध्यप्रदेदां सम लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग भोपाल, दिनांक २४ मई १६८ ० _ अधिमचना | क्माक एफ 3-95]es [सबहमिडि-४ चूंकि, सागर विदवविद्यालय (जो इसमें इसके AW उक्त विद्वविद्यालप के नाम से निर्दिष्ट है) यूनानी चिकित्सा पद्धति में बैचलर ऑफ प्रनानी विध मार्जन मेडीसिन एण्ड सजैरी की विकित्सीय अहँता (जो इसमें इसके परचात्‌ सक्त जहँंता के नाम से निर्दिष्ट है) प्रदान करता z : और चू कि, उक्त चिकित्सीय अहेंता मध्यप्रदेश भापुर्गेदिगा, यूनानी तथा प्राकृतिक निकत्सा ब्यबसायी अधिनियम, १९३० (क्रमांक ५ सन्‌ १६७१) (जो इसमें इसके परचात्‌ उत्तः अधिनियम के नाम से निर्दिप्ट है) की अनुसूची में सम्मिलित नहीं हैं ।. और चू कि, I पिच्चविद्यालय नें उर्त अहुता को मान्यता दी जानें के हेतु राज्य सरकार को आनेदन किया है, अत्तएव, उक्त अधिनियम की धारा 30 द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य सरकार, मध्यप्रदेश आयूर्गेदिक तथा यूनानी चिकित्सा पद्धति एगं प्र कितिक चिनित्सा बोई से परामर्श करने के परचात्‌, एतदुद्ारा।ाा TR

(१)... उक्त अधिनियम की अनुसूची में निम्नलिखित संशोधन करती है, अर्थात्‌ :- संदोधन उक्त अधिनियम की अनुसूची में, भाग क में, क्रमांक १ तथा उससे सम्बन्धित प्रबिष्टियों के पहचात्‌, निम्नलिखित क्रमांक तथा प्रविष्टियां अन्त: स्थापित की जाय, iy, - ः १-क.. सागर बैचलर ऑफ . की बी. यू. एम, एस. यूलिवसिटी यूनानी विथ ’ सागर मान मेडीसिन एऐष्ड सर्जरी () यह निर्देश देती है कि उक्त चिकित्सीय अहेंता डस दशा में मान्य अहंता होगी जबकि यह १९७४ के पदचात्‌ प्रदान की गई हो ।.. . मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से. तथा आदेशानुसार सही ० (जे. एल. बोस उप सचिव क्रमांक एफ ३-१८/७८[सत्रहमिडि-४, भोपाल, दिनांक २४ मई, १६८०. . प्रतिलिपि :- ‘ व (1) नियंत्रक, शासन केन्द्रीय मूद्रथालय, भोपाल.की ओर मध्यप्रदेश राजपत्र : के आगामी अंक में प्रकाशनाथे । कृपयी मुद्रित ५०. प्रतियां इस विभाग को भेजें । () संचालक, देशी चिकित्सा पद्धति. एवं होम्यौपथी, म.प्र. भोपाल । (३) - कुल सचिव, सागर विश्वविद्यालय, सागर की. ओर उनके पत्र क्रमांक मान्यता/|३५२६ दिनांक २०-२-०८ के संदर्भ में, _ (४) रजिस्ट्रार, म.प्र. आयुर्वेद, तथा यूनानी एवं प्राकृतिक चिकित्सा @9, भोपाल की भोर gaA एगं आवश्यक कार्यवाही हेतु अग्रेषित । सत्यप्रतिलिपि . O सही ० (एन. के. गैर) (कौलाशनारायण शर्मा) . ...... .. अवर सचिव. रजिस्ट्रार . _ म० प्र० आायुर्गेद तथा यूनानी एबं प्राकृतिक चिकित्सा बोडडे, भोपाल:

मध्यप्रदेदा अधिनियम क्रमांक २१ सन्‌ १६८६. मध्यप्रदेश आयुर्वेदिक, यूनानी तथा प्राकृतिक-चिकित्सा व्यवसायी (संशोधन) अधिनियम, १९८९. [दिनांक २० अक्टूबर १६८४ को राज्यपाल की अनुमति प्राप्त हुई, अनुमति “मध्यप्रदेश राजपत्र” (असाधारण) में दिनांक ४ नवम्बर "१६.८६ को प्रथमबार प्रकाशित की गई. मध्यप्रदेश आयुर्वेदिक, यूनानी तथा प्राकृतिक-चिकित्सा व्यवसायी अधिनियम १९६७० को और संशोधित करने हेतु अधिनियम. भारत गणराज्य के चालीसवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान-मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :- १. इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश आयुर्वेदिक, यूनानी तथा प्राकृतिक-चिकित्सा व्यवसायी (संशोधन) अधिनियम, ८-2 उ - T २... मध्यप्रदेश आयुर्वेद, यूनानी तथा प्राकृतिक-चिकित्सा व्यब- सापी अधिनियम, १६७०. (क्रमांक ५ सन्‌ १६७१) की अनुसूची में, भाग ख में, प्रविष्टि ५१ (जो हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग की मान्य भहंता से सम्बंधित है) का लोप किया जाए. भोपाल, दिनांक ४ नवम्बर १९८४६ Fo १०४८ ३-इक्कीस-अ (प्रा०) भारत के संविधान के अनुच्छेद 3४८ के खण्ड (३) के अनुसरण में मध्यप्रदेश आयुर्वेदिक यूनानी तथा गाकृतिक चिकित्सा व्यवसायी (संशोधन) अधिनियम, १९८९ (क्रमांक २१ सन्‌ १६८४) का अंग्रेजी अनुवाद राज्यपाल के प्राधिकार से एतदु- पारा प्रकाशित किया जाता है. - मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार वि. वा. उमरेकर, संयुक्त सचिव, संक्षिप्त नाम अनुसूची का सेंशोघन

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