हा है. हु... 122 तन, की... 'कमाक 142 1 A, शूक्वार, दिनाक 8 फरवरी 1991--+माघ 19, शक्के 1912 e . विधि श्र विधायोी कार्य विजाग - प के . . 'l‘"v"]‘. भांपाल, पिनांकि 8 फरवरी 1991. v "का, 2546-इक्कीस-अ (प्रा ),-मध्वमदश विधान awr &7 Foeteten afufiew, fow gy Penis 22 लनवजरी 1991 से राष्ट्र्ंत की जनुर्मात प्राप्त बे चुकी हा, एसक्ट्वारा सर्वसाधारण की जानकारी के Yew senfrer et amer o मध्यप्रयेश को राज्यपाल' को नाम से तथा आदेशानुसार, टी, पी, एस... पिल््लइ' ,. उपसाचिव न मध्यप्रदेश श्रघिनियम क्रमोक ४ सन १९९१. मध्यप्रदेश राज्य सुरक्षा झधिनिय म; १९६९० « (विषयसू-सूची , की श्रष्याय--१ प्रारंभिक . घाराएं : १. संक्षिप्त नाम तथा विस्तार २. परिभाषा. है, नियेन्धत प्रादेश करने की शवित. झष्याय ४--समाज भवेरोधी तत्वों और पर्व में सिद्धदोष ठहराये गये व्यक्तियों दा तितर-बितर किया जाना ८ ध्रध्याय २--व्यवितयों के थाने जानें शौर उनके कार्यों का निर्वेन्ध न ¥, व्यक्तियों के दलों तथा समूहों का तितर-बितर किया जाता. उ61
६. १७, ts. te. R R रे, २४. W. २६. Q. रद. २६. ४०. 13 दर. . . ३४५. मध्यप्रदोष्टा राजपत्र, दिनांक 8 फरवरी 1991 झपराध करने के लिये झामावा श्यक्तियों को हटाया जाना. कतिपय पपराधों के ,सिल्दोव उसने ससे शक्तियों का दूटाया जाना. धारा ४, ४ या ६ के e el कै प्रेतन की कालावधि. धारा है, ¥, % q1 5 & oy giw ot किये जाने के भू सुनवाई की जायेगी, झपील, कठिपय माससों में पारित शादेशों की भंसिमता. . व्यक्ति हारा जिला प्रादि न छोड़ने तथा हठाये जाने के पश्चात उसमें प्रवेश करने पर प्रकिया. उस जिले धादि में, जिससे जुढ़ जाने के लिए किसी व्यक्ति को निदेश दिया गया था, प्रवेश करने या लौटने के; लिए भ्रस्थायी भ्तुशां, निर्वासित ( एक्सटरैंमेंट) की संजय सरकार के शॉरि: धार है, डं, ६, ६ या वे के प्रधीन निदेशों के उल्लंघन के लिए शास्ति जिस क्षेत्र से दट जाने के लिए किसी व्यक्ति को निदेश दिया गया हो, उस क्षेत्र में भनुज्ञा के चिता, प्रवेश करने के लिये या जय झस्थायी रूप से लौटने के लिये अनज्ञा वी मई हो तो श्रषिक__ठहरने लिये शास्ति घारा ३ के श्रघीन हियूं गए प्रादेश या घारा ४, ४, ६ या १३ के झधीन जारी किये गये मिर्देशों के उल्लंघन के लिये ध्रसियोजनों में उपधारणा उस व्यक्ति हारा निष्पादित किये गये बन्धफ्ते को समपहरण लिसे उस क्षेत्र में प्रवेश करने या लौटने की ऋयूशा दी गई थी दिस क्षेत्र से हट जाने के लिये उसे निदेबा दिया गया था. जिला मजिस्ट्रेटीं की शक्तियों तथा कतंब्यों का उत्पायोजन. 'ानकारी का स्रोत प्रकट नहीं किया जाएगा. श्रष्याय ४--समोज विरोधी क्रियाकलापों को नियंत्रण . संक्षारक पदार्थ प्ाषि के विधि विरुद्ध कब्जे के लिये दण्ड, क्षत्र के निवासियों पर सामूहिक जुर्मानों का झधिरोपण. (प्रघ्याय ”इ--लोक क्षेम भौर व्यवस्था . शिविरों, कव य्दों (डिस ), परे भश्रादि का मिर्मेत्रण, वर्दियों (यूनिफ]में) = R पद्या (पाथवे), सड़क धादि, के उपयोग को अ्रतिथिद्ध या निर्बन्धित करने की शक्ति. झध्याय ६-कतिपय स्थानों तथा क्षेत्रों तक पहुंच संरक्षित स्थान. संरक्षित नेत्र. ब्रा के साथ यल प्रयोग करवा या उससे बच्कर निकलना, कतिपय स्थानों तथा क्षेत्रों के लिए भादेश, अध्याय ७---भ्नुप्रक. राज्य सरकार की पंक्तियों तथा कतेंव्यों का प्रत्यायोजन, नियम. प्रपराध करने के प्रयतत के लिये शास्ति, म्रपराधियों को संक्षेप देने के लिये शास्ति, परित्राण- ey विधियों का लागू होना वॉजित नहीं होगा. किसी भी पुलिप् अधिकारों द्वारा तलाशी ली जाने की शक्ति,
. मध्यप्रदेदा राजपत्र , दिनांक 8 फरवरी 1951 __._”. मध्यप्रदोशा राजपत्र, दिनांक 8 फरवरी 1991 नि 363 मध्यप्रदेश झधिनिपम क्रमांक 4 ननू 1991 मध्यब्रदेश राज्य सुशक्षा अधिनियम, १९९०८. [दिनांक 22 जनवरी 1991 को राष्ट्रपति की श्रदुमति प्राथत हुई; पतुसति “'सध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण) में दिनांक 8 फरवरी, 199 1 को प्रबम बारे प्रकाशित की सई. ] राज्य की सुरक्षा और लोक व्यवस्था बनायें रखने तथा उनतें प्रथकत कतिपय भय विषयों के लिए उपबन्ध करने हेतु झधिनियम भारत गणराज्य के इकतालीसवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान-मंडल ढारा निम्नलिखित रूप मं यह अधि नियमित हो :- श्रध्याय १--प्रारंभिक. १. (१) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश राज्य सुरक्षा श्रधिनियम, १९६९० है. संक्षिप्त नाम तथा - (९) इसका विस्तार सम्पूण मध्यप्रदेश पर है. विस्तार . श्रध्याय २--व्यक्तियों के भ्रानें जाने भौर उनके कार्यों का निर्बन्धन. २. इस झष्याय में “निर्वन्धन श्रादेश” से झमिप्रेत है धारा ३ के शधीन किया गया झादिश, परिभाषा. ३. (१) यदि किसी जिला मजिस्ट्रेट का किसी व्यक्ति के संबंध में यह समाधान हो जाता ¥ निर्बेन्धन धघादेश कि वह किसी ऐसी रीति मं कार्य कर रहा है या उसके एसी रीति में कार्य करने की संभावना है जिससे करने की शक्ति. शज्य की सुरक्षा पर था. लोक *यवस्था बनाये रखने पर प्रतिकूल भ्रभाव पढ़ता है, पीर यदद कि उसे इस प्रकाश कार्य करने से रोक्ते के लिए जनपाधाएण के हित में यह भ्ावश्यक है कि इस धारा के अधीन झादेश किया जाय, तो जिला मजिस्ट्रेट ऐसा भ्रादेश कर सकेगा जिसमें-- (क) उससे यह ध्रपेक्षा की जा सकेगी कि वह ऐसी रोसि में, ऐप समर्यों पर तथा ऐसे प्राधिकारी या व्यक्ति को जैसा कि उस श्रादेश में विनिदिष्ट किया जाएं झपने भ्राने जानें की सुचना दे या उसके समक्ष उपस्थित हो या भ्रपनें थाने जानें की सूचना भी दे झौर उपस्थित भी हो; (ख) ऐसे व्यक्तियों से, जो कि उस श्रादेश में उत्लिखित किये जाय, संटबूक्त रहने या उनसे सम्पर्क रखते के सम्बन्ध मं उप्त पर ऐसे निरवन्धन श्रधिरोपित किये जा सकेंगे जो उस धादेश में विभििष्ट किये जाय॑ (व) किसी भी ey e o1 WP W, N उस श्रादेश मेँ विनिर्षिष्टे की जाय, उसके ब्वारा कब्णे में ससा जाना या स्पयीग में लाया जाना अलिथिद्ध या निर्वीन्धित किया जा सकेगा. ' (२) उपधारा (है) के श्रधघीन किया गया निर्ेन्धन झादेश ऐसी कालावधि के लिए प्रवर्तन में रहेगा जो उसमें विनिर्षिष्ट की जाए श्ौर जो किसी भी दशा मु, उस झाटेश की तारख से एक वर्ष की काला- ofg से भ्रधघिक नहीं होगी. झष्याय ३--समाज विरोधी तत्वों श्रौर|पूर्व में सिद्धदोष ठहराये गयेपृव्यक्तियों का तितर-बिलर किया जाना. ¥, जब कभी जिला मजिस्ट्रेड को यह प्रतीत हो कि जिले में व्यक्तियों के किसी दल या समूह के. व्यक्तियों के दलों श्ाने जाने यां पड़ाव से खतरा या संत्रास कारित हो रहा है या ऐसा श्राना जाना या पड़ाव खतरा या. था समूहों का संज्ञास कारित करने के लिये प्रकल्पित है या ऐसा युक्तियुक्त संदेह है कि ऐसे दल या समूह या उसके लितर-बितिर किया सदस्यों द्वारा विधि बिरुद्ध परिकल्पना की जा रही है, तो जिला मजिस्ट्रेट, ऐसे व्यक्तियों को, जो ऐसे दल ः
364 मध्यप्रदर्श ससससससपस्--- यमदरश राजपत्र, दिनांक 5 फरवरी 1991 न एएएएि्ि्िन्यणणण्टणणणणसस्टासाणणाप्मपस्डीयययययमय्य या समूह के नेता या मुखिया प्रतीत होते हों, संबोधित किये गये तथा डॉडी पिटवाकर या श्रत्य॑या जैसा जिला मजिस्ट्रेट उचित समझे, प्रकाशित किये गये झादेश द्वारा, ऐसे दल या समूह के सदस्यों को यह नि दे सकेगा कि-- (क) वे ऐसी रोति में झाचरण करें जो हिंसा तथा संत्रास का" निवारण करने के लिये भ्ावश्य हो; या (ख) वे तितर-बितर हो जाय तथा उनमें से प्रत्येक सदस्य जिले या उसके किस भाग या ऐसे क्षेत्र तथा उसके समीपस्थ किसी जिले या जिलों या उसके/उनके किसी भाग वे बौहर ऐसे समय के भीतर चला जाय जो जिला म्स्ट्रेट विनिदिष्ट करे, शोर यथास्थिति उक्त जिले या उसके भाग या ऐसे क्षेत्र तथा ऐसे समीपस्थ जिलों या उनके भाग में प्रवेश न करें या उस स्थान को न लौटे जहां से चले जाने के लिये उनमें से प्रत्येक को निदेश दिया गया था. अपराध करने के X जब कसी जिला मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत हो कि — लिये. झामाधा व्यक्तियों का (क) किसी व्यक्ति के ग्रानें जाने या कार्यों से मानव धारीर या सम्पत्ति को संत्रास, खतरों, दढाया जाना. या झपहानिकारित हो रही है या ऐसा घाना जाना या कार्य ऐसा W@y, AV @ अ्रपहानिकारित करने के लिये प्रकल्पित है; या (व). यह विश्वास करने के लिये युक्तियुक्त कारण है कि ऐसा श्यवित' किसी ऐसे श्रपराघ के ; जिसमें बल या हिंसा भ्र्तवंतित है, या भारतीय दण्ड संहिता, १८६० (१८६० का सं. ४४५) के अध्याय १२, १६ या १७ या उसकी धारा ५०६ थी ५०६ के झझघीन दण्डनीय किसी झ्रपराघ के करने में या ऐसे किसो भपराध के दुष्प्ररण में संलग्न है _ या संलग्न होने को ब्रामादा है श्रोर जब जिला मजिस्ट्रेट की राय में, एसे व्यितिं के _ विरुद्ध साक्षीगण अपने शरीर या सम्पत्ति की सुरक्षा के बारे में उस्की झोर से श्रार्शका होने के कारण, खुले धाम साक्ष्य देने हंतु भ्रागे शाने के लिये रजामन्द नहीं है; था (ग) किसी श्राप्रवासी के लगातार निवास से किसी सहामारी का प्रादुर्भाव होना संभाव्य है; तो जिला मजिस्ट्रेट, उस पर सम्पक्रूपण तामील किये गये लिखिए धादेश द्वारा डॉडी पिटवाकर या ध्रत्यथा, जैसा जिला मजिस्ट्रेट उचित समझे, ऐसे व्यक्ति या भाप्रवासी को निर्देश दे सकेगा! फि-- (%) वह ऐसी रीति में श्राचरण करे जो दिसा तथा संत्रास या ऐसे रोग के शादूर्भाव या प्रसार का निवारण करने के लिये झावण्यक प्रतीत हो; या (ख). वह जिले या उसके किसो भाग या ऐसे क्षेत्र तचा उसके समीपंस्क्ष किसो जिले या जिलों ः या. >सक्ते,उपके किसी भाग के बाहर ऐसे मागे से तथा ऐसे समय के भोतर, जेसा कि जिला मजिस्ट्रेट दिभि्दिष्ट कर, . चला जाय. पौर यथास्थिति उक्त जिले या उसके भाग या ऐसे क्षेत्र तथा ऐसे समोपस्थ जिलों. या उनके भाग में, जद्दों से कि हट जाने का उसे निदेश दिया गया था, प्रवेश त करें या न लॉटे. कपिपय भ्रपराधों दर ६. यदि कोई व्यक्ति; . - f सद्धदोष o - DRI T2 है संहिता ः ) . :E & गये (क) (९१) भारतीय दण्ड , पृध६० (पृद६० का सं. ४) के अध्याय १२, १६ या व्यक्तियों का १७ के या उसकी धारा ५०६ या ५०६ के अ्रघीन किसी श्रपराध का; या हाया जाना, (२) सिविल श्रधिकार संरक्षण झधिनियम, १६४५५ (१६५४ का सं. २२) के प्रधीन किसी झपराध का; या (ख) स्त्री तथा लड़की अन॑तिक ब्यापार दमन प्रधिनियम, १९५६ (१९६५६ का सं. १०४) के झधीन किसी ध्रपराघ का दो बार; या
. मध्यप्रदेश राजपत्र , हदिमाँक 3 ST 1991 आटा 4 - (न). सध्यप्रदेश राज्य में लाथू हुये रूप में साबेजनिक झूत श्रघिनियम, १८६७ (१८६७ W भीतर तीन चार; 'सिद्धदोष ठहराया जा चुका है तो जिला मजिस्ट्रेट, बदि उसके पास यह विश्वाप करने का कारण दे कि ऐसे व्यक्ति के बंजंध में यह संताव्य है कि यह उस अपराध के, जिसके लिये कि बहू सिद्धदोष ठहराया गया था, समरूप कोई भ्रपराह्र के करने § @€ को पतन: संलग्न करेगा, ऐसे व्यक्ति को यह निदेश दे सकेंगा कि यह जिले या ससके भाग या ऐसे क्षेत्र तथा उसके. समीफस्व किसी fo या जिसों का उसके/ उनके भाग के बाहर, ऐसे भागे से तथा ऐसे समय के भीतर, जैसा कि जिक मजिस्ट्रेट सादे दे, गला जाम ot धवास्थिति उस जिले था उसके भाग या ऐसे क्षेत्र तथा ऐसे समीपस्थ जिसों या सनक भाग में, जहां मे कि हद जाने का उसे निदेश दिया गया था, प्रवेश न करे था ने लौटे, स्पब्टोकरण ---इस धारा के श्रयोजन के लिघे, अभिव्यक्ति “कस अपराध के, जिसके लि .कि बढ़े खिंददोष ठहराया गया था, समख्य घ्पराध ” से श्रसित्रत हैं-- (एक) aw (%) में वर्णित भ्रषराघ के लिखे सिद्धदोष ठदराये गये व्यक्ति के सामले में, उस खंण्द में वर्णित भारतीव दष्क संहिता, १८६० (१८६० का सं, 'ह५) के प्रब्यायों या घाराओों में से किसी के भी भंतर्गत श्राने वाले श्रपराध या उस खण्ड के उपलब्ध (दो) में वर्णित घिनियम के उपब्धों के धंतर्गत भ्राने बाला झपराध; भौर (दो) खण्ड (ख) तथा (ग) में वशित भ्रपराद के लिय सिद्धदोष ठदराये गये बयक्ति के मामले में, उक्त खण्डों में क्रमश: बशधित अधिनियमों के छपनंधों के अंतर्गत झाने बानें भ्रप रॉघ, ७. warfeafy किसी जिले था इसके भाग या ऐसे क्षेत्र तथा उसके समंपस्थ किम्री जिले या जिलों जा खउसमा/उजक किसी भाय में प्रबेश न करने गो सबंध में धारा ४, भ या ६ के श्धबीन दिया गया निकेश ऐसी कालावधघि के लिए होगा जो कि उसमें किनि्िष्ट को जाए श्ौर किसी भी दशा में एस तारीख से, जिसको कि बहू किया गया. शा, एक वर्ष मे य्धिक को कालावधि के लिये नहीं होगा. «८. (१) किसो व्यक्ति के विरुद्ध धारा दे, ४, Yar 5६ के श्रधीन कोई प्ादेश पारित किया जाने है पूव, जिल! मजिस्ट्रेट छू ठपक्ति को उपके. विहद्ध ताश्विक अभिकथनों के सामात्य स्वरूप की लिखित जानकारी देगा श्ौर उसे बनके बारे में सध्टीकरण W W युक्तिपूक्स यवसर देगा, () बदि ऐसा =fer उम्कें द्वारा बेश किये गे जिंती सोझी की परीक्षा के लिये ब्रावेदन करे जो जिला मजिस्ट्रे, जब तक कि अधिलिखित किय जाने वाले कारणों से, उसकी बह राय न हो कि ऐसा ज्ञाधदन संग करेगे बा बिलम्ब करने के अयोजन से किम गया है, ऐसे प्रावेदन को मंजूर करेगा धर ऐसे म्राक्षियों की करोका करेगा. (है). ऐमखें स्वक्ति द्वारा wega किबा गवा कोई मो लिखित कथन मामले के भ्थिलेख के साथ फाइल किया शाएगा शौर ऐसा ब्थक्ति प्पता स्पष्टोकरण देने तथा प्रपने दारा पेश किये गये साझ्ियों की परीक्षा करने के प्रयोजन से किसो सिछि स्पववाय हारा जिला मजिस्ट्रेट के समझ उपसंकात होने का बुकदार होगा. (¥) इपबारा (१) के भवीम कायबाही करने वाला जिला मजिस्ट्रेट फिी ऐसे ब्यक्ति को, जिसके विष्द घारा दे, डे, इ या ६ के प्रघीन कितीं प्रादेश का किया जीना प्रस्तावित है, हाजिरो सुनिश्चित करने के प्रवोजन को लिये, ऐसे व्यक्ति से यह ग्रपेक्षा कर सकेगाझ्लकि वह उसके समक्ष उपसंजात gl AN जांच के दौरान ऐसी हाजरी के लिये प्रतिभू, सहित था रहित प्रतिभूति वंधपत्र निष्पादित करें. (५) यदि वहू वपक्ति सपेक्षित किये गंपरे श्नुसार प्रतिभूति बंघपन्र निष्पादित ने करे या जांच के दौरान जिला प्िस्ट्रेंट के समक्ष उपसंजाब व हो, -तो जिला मल्स्ट्रेट के लिये यह विंधिपूर्ण होगा कि बह. जाँच में एक G eI कर भौर तद्ठुपरि ऐसा भादेश, कों कि उस व्यक्ति के बिर्द्ध बात किया जाना प्रस्वादिव्व किया गया था, पारित किया जा सकेगा. 365 e एक याायययन्यमोा LN o~ . सं:३) कौ धास ३ या ४ के श्रष्चीन किसी मपराध का तोम W की कालावधि के घारा ४, प्रथा दे के झधीन भादेशों के ब्रबलैन को कालाबधि. grery, Gy ar ६ के झधीन घादेश पारित किम जाने के पूथ सुनवाई की न्ञायगी.
366 अष्यप्रदेद राजपन्र ,, Pels 8 फरवरी 1991 . _— e — " झपी लत. ६. (१) धारा ¥, ¥, %A1 ६ के प्रधीन जिला सजिस्ट्रड हारा था धारा १३ के अधीन fady wv | से सशक्त किए गए किसी झन्य प्रधिकारी ढारा किए गए. किसी झादेश, से व्यभित भी व्यक्ति, .. ऐसे भादेश की ताटीखू, से. तीस दिन के भीतर, रॉज्य सरकार को भ्पील कर सकेगा. ऐसी _झपील का o विनिश्वव, बचासंभव, धपील फाइल की लाने की तारीख से बार मास कीं कालावधि के भीतर; किया जाएगा. () इस धारा के अधीन झपीस उस झादेश के, जिवके कि विरुद्ध पपोल की गई है, संबंध में झापति के आझाधार सक्षेप में देते हुए शापम के सर्प में की जायेगी शोर उसके साथ उसकी प्रमाणित प्रति संलग्न की जायेगी. (V) ऐसी भ्रपीस के प्राप्त होने पर, राज्य सरकार, झपीलार्थी को या. तो व्यक्तिश: मा किसी बिधि व्यवसायी के द्वारा सुने जाने का युक्तियुक्स प्रवसर देने तथा ऐसी झौर जांच, यदि कोई हो, जैसी कि बहू प्रावश्यक समझे, करने के परचात उस भादेश की; जिसके कि विरुद्ध प्रपील को गई है, पुष्टि कर सक्केगी या उसमें फेरफार कर सकेगी या उसे विजन्क्ति कर सकेगी: परन्तु वह झादेश, लिसके विरुद्ध भ्रपील की गई है, जब तक कि. राण्य सरकार भन्यथा निर्देश न दै, झपील का निफ्टारा होने तक प्रवतम में रदेगा. (४) इस घारा के झधीन भ्रपील के लिये उपबंधित तीस दिन को कालावधि की मसंगगना करने में इस झादेश की, जिसके कि विरुठ भ्रपीस की wf हैं, प्रमाणित धति दिये जाने के लिये लिया गधा समय छोड़ दिया जायेगा. कलतिपय मामलों में १०. धारा 3, Y, XA ६ के अधीन पारित किया मया कोई श्रादेश किसी न्यायालय में निम्त- पारित भावेशों की लि खिस झाधारों पर ही प्रर्नगत किया जायगा, अन्यथा तहीं -- बंतिमता, (एक) यह कि जिला भजिस्ट्रेट ने AT ८ की उपधारा (१) में दी गई प्रक्रिया का झनुसरण नहीं .किया था ; या ‘@) बह कि जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष ऐसी कोई सामग्री नहीं थी जिस पर वहू भपता ध्ादेश आधारित कर सकता था; या (तीन) यह कि जिला मजिस्ट्रेट की यह राय. नहीं थी कि सालीगण उस व्यक्ति के विरुद्ध, जिसके कि. संत्रेप्ठ में धारा ५ के म्धीत थादेश पारित किया गया था; छुरो भ्राम साक्य देने के हेतु भागे आानें के लिये रलामन्द नहीं थे. व्यक्ति द्वारा जिला qq. यदि कोई व्यक्ति, जिते किसी जिले या उसके भाग या ऐसे क्षेत्र तया उसके समोपस्थ किसी झादि न छोड़ने पर जिले या जिलों या उसके/उनके किसीं भाग से हट जाने का निदेश धारा ४, ४ या ६ के प्रधीन जारी किया तथां हुटाये जाने के — : पश्चात् उसके हारा जा चुका हो निदेशित किये गये भर उसमें प्रवेश करने (एक) त किये गये अंनुतार नहीं हट जाता है; या घर प्रफ्रिया. . बधि 5 (दो) इस प्रकार हट जाने पर, धारा १२. में यथा -उपबंधित लिखित झनुज्ञा के सिवाय, यथा स्थिति जिले या उसके भाग या उसके समीपस्थ किसी जिले या जिलों व! उसके/उन हे किसी भाग में, श्रादेश में विनिधिष्ट कालावधि के भीतर, प्रवेश करता है, . तो जिला मजिस्ट्रेट उसे गिरफ्तार करवा सकेगा श्रौर पुलिस भभिरक्षा में उसे ऐसे क्षेत्र के. बाहर ऐसे स्थान को, जिसे जिना म्िस्ट्रेट प्रत्येक मामले में विभिधिष्ट करे, हवा सकेगा. उस जिले भादि में १२. (१) राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट किसी ब्यमित को, जिसके संबंध में घारा ४, ५ जिससे हद जाने के या ६ के झधघीन कोई भादेश किया गया हो, उस जिले था उसके भाग या ऐसे क्षेत्र तथा किसी समीपस्थ लिए किसी व्यषिति जिले या जिलों या उसके /उनके भाग में, जहाँ से कि हट जोन के लिये उते निदेश दिया मय था ऐसी को निदेश दिया, गया स्थायी कालावधि के सिए तथा एसी शर्ती कं भष्यधीन रहते हुए प्रमेश करने या लौटने के लिए सीटान के । नशा. लिखित श्रनुश्ञा दे सकेगा जैसी कि ऐसी श्रतूक्षा में विनिदिष्ट की जायें,
सध्यप्रदोप्न राजपत्र, दिनांक 8 फरवरी 1991 367 o - | (R} प्ूर्वॉक्त प्रनुशा किसी भी. समय अजास्थिति राज्य सरकार यथा जिन्ना मजिस्ट्रेट दाद प्रतिसंहत की जा सकंगी, (व) उपधारा (१) के अधीन किसी .व्यगत को यवास्थिति उस जिले वा. उसके ऐसे भाग या ऐसे क्षेत्र तथा किनी संमीपस्थ जिले या जिलों ,था उसकं/ उनके भाग में, जिससे हट जाने के लिए उसे निदेश दिया गया था, प्रवेश करते या लौटने की प्रनुजा देते समय उक्त Ao 2 बाला प्राधिकारी उससे यद श्रपेजा कर सकेगा कि वह उस पर भधिरोपित की गई शर्तों के सम्यक अनुपालन के लिए प्रतिभ्न सहित या रहित बन्ध-पत्र निष्पादिप्त करे. (४) कोई भी ध्यकति जो. उपधघाश . (९) के धधीन मंजूर की गई अनुज के भमुसरण में यधथास्थिति उस जिले या उसके भाग या ऐसे क्षेत्र तथा किसी समीपस्थ जिले या जिलों या उसक/पितके भांग में, जहां से हट जाने के लिए उसे निदेश दिया गया था, प्रवेश करता है या बौटता है, उक्त झतुज्ञा में सधिरोपित की गई शर्तों का प्रनुपालन करेगा, झौर उस झस्थायी कालावधि की, जिसके लिए कि प्रवेश करने या लौटने की अ्रतजा उसे दी गई थी, सर्माध्ति पर या ऐसी श्रनुज्ञा का पुर्वतर प्रतिसंहरण हो _... जाने पर ययास्थिति ऐसे जिले था. उसके भाग था ऐसे क्षेत्र तथा किसी समीपस्थ जिला या जिलों या TR/ भाग के बाहर खला जायेगा, और धारा ४, ४ या ६ के प्रधीन दिये गये मूल धादेश में विनि्िष्ट कालावधि की अपयंवसित अवशिष्ट घवधि में, नवीन प्नुज्ञा के बिना, उसमें प्रवेश नहीं करेगा या वहां नहीं लौटेगा. (५) यदि ऐसा व्यक्ति झधिरोपित की गई शर्ती में से किसी शर्तें का प्नुणालन नहीं करता है मा तदूनुसार हटता नहीं है या इस प्रकार हट जाने के पश्चातु उस जिले या उसके किसी भाग या ऐसे क्षेत्र तथा किसी समीपस्थ जिलें या जिलों या उसके/उनके भाग में, तवीन झतुजक्ञा के बिना, प्रवेश करता है या लौटता है, तो किसी भ्रन्य कार्यवाही पर, जो कि इस भधिनियम के अ्रधीन उसके विरुद्ध की जा सकती हो, प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना जिला मजिस्ट्रेट उसे विरफ्तार करवा सकेगा भौर पूलित श्रशिरखा में उसे ऐसे क्षे्त के बाहर ऐसे स्थान को, जिसे कि जिला मजिस्ट्रेट प्रत्येक मामले में विनिविष्ट करे; हत्था सकेगा. १३. (१) राज्य सरकार या राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में थिघोव रूप से सशक्त किया. निर्वासन (एक्स: गया कोई अधिकारी धारा 3, ४, ५ या ६ के अधीन जिला मजिस्ट्रट द्वारा जिले मे प्रयोक्तव्य शक्तियों का टर्नेमेग्ट) की राज्य प्रयोग बेसी ही परिस्थितियों में तथा वैसी ही रीति में इस उपान्तरण के साथ कर सकेगा कि राष्य सर- सरकार की शक्ति कार या विशेष रूप से सशक्त किये गये झधिकारो के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह यथास्थिति ऐते दल... फॉर को शक्ति, या समूह के सदस्यों या व्यक्तियों या भश्रगसियों, या सिद्धदोष ठदरायें गये व्यक्तियों को किसी जिले या जिलों या उसके/उनकों भाग से, चाहें वे उसके/वनक समोपस्थ हों या न हों, हट जाने के लिए ध्ौर किसी जिले या. जिलों या उसके/उन्तके भाग मे, 'वाहे ये उसके/उनके समंपस्थ हो या न हों, प्रवेश न करने या न लौटने के लिए निदेश दे. ' () धारा ७, 5८; र०, 99 भर है के उपबंध अर घारा £ के उपबन्ध, उस दशा में जबकि घ्रादेश राज्य सरकार दारा विशेष रुप से सशक्त किये गये श्रधिकारी हारा उपधारा (१) के झधोीन पारित किया गया हो, इस घारा के अधीन किन्हीं शक्तियों के प्रयोग को यथावश्यक परिवर्तन सहित इस प्रकार लागू होंगे जैसे कि वें घारा ३, ४, शया ६ के झधीन किन्हीं शक्तरयों के प्रयोग को लागू होते हैं. (3) जहाँ श्रादेश राज्य सरकार हारा उपघारा (१) के झ्रघीन पारित किया गया हो वहां राज्य सरकार या तो स्वम्रणा से या. व्यथित व्यक्ति के झ्रावेदन पर, स्वयं के द्वारा पारित किये गये किसी भी झ्रादश को पुरषिलोकतन कर सकेगी झोर उसके संबंध में ऐसा भादेश पारित कर सबेगी जैसा की वह सचित समझे : परन्तु किसी भो श्रादेश में तब तक फेरफार नहीं किया. जायेगा या उसे तब तक उलटा नहीं जायगा जंब तक कि संबंधित व्यक्ति को श्रादेश के समन में उपसंजात होने तवा सुने जानें के लिए सूचना न दे दीं गई हो.
368 __—==:E£'\. मध्यप्रदेश राजपत्र, छिनांक 8 फाइवरी 1991 . . धारा हे, ४, श, १४. यदि कोई ब्यथिस धारा ३, ४, ५, ६ या १३ के अधीन जारी किये गए किसी निदेशू को L & W निरोध करेगा या उपकी झबज्ञा करेगा या उसका झनुवतंन नहीं करेगा या किसी ऐसे निंदेश के विरोध ये निदेशों के उल्ल- उसकी श्रनज्ञा का पुष्प्रेरण करेगा तो बहू कारावास से, जिसकी श्रवधि तीन त्षे तक की हो सकेगी किन्तु घन के लिए शासह्ति. जो, लेखबद्ध किये जाने वाले कार्रणों के सिवाय चार सास से कस की नहीं होगी, दण्डनीय होगा श्र जुर्मानि मे भी दण्डनीय होगा. जिस क्षेत्र से हुट १४. धारा ११ में उपबंधित की गई परिस्थितियों तथा रीति मं किसी व्यविश को गिरफ्तार जाने के लिए किसी. करने और हटाने की शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिवा, कोई ध्वक्ति, जो-- ध्यक्ति को निदेश दिया गया हो उस &9 में, पनुज्ञा के (कै) धारा ४, श, है या १३ के म्रधोन उसको जारी किये. गये मिंदेश के उल्लंघतद में उस ford या ध्सके भाग, पा ऐसे |क्षे्र तथा किसी प्रत्य जिले या जिलों या - उसके/ उनके भाग में, जिससे हट जानें ,के लिए उसे निर्देश दिया गया था, oo के थिना, प्रवेश करने ~ - लौटे के लिए या जब बिना अंवंश करंगा था लोटेगा ; प्रस्थायी रूप से लौटने के लिए (@) धारा १२ के प्रधीन मंजूर की गई प्रनुा से, किसों ऐसे पूर्वोक््त क्षेत्र था जिले या उसके घनुज्ञा दी गई हो भाग में प्रवेश करेगा था लोटेगा किन्तु उसके उपबन्धों के प्रतिकूल उस श्रस्थायो काला- तो झधिक ठहुरने बधि की, जिसके लिए कि उसे प्रवेश करने या लौटने की शझ्नुशा दो गई थी, समाप्ति के लिए शास्ति. पर या ऐसी झनुगां का पूर्वतर प्रतिसंहरण हो जाने पर ऐसे क्षेत्र से बाहुर नहीं हृटेगा या ऐसी श्रस्थायों कालावधि की समाप्ति पर बा श्रनुज्ञा का प्रतिसंहरण हो जाने पर हुठ जौनें के पश्चात, नवीन W 3 घिना तत्पश्चातु प्रवेश करेगा या लौटेंगा; बहु कारावास से, जिसकी प्रव्धि तीन वरष॑ तक कं हो सकेगी कस्तु जो, लेखबद्ध किरे जान बाले कारणों के सिवाय, छह मात से कम की नहीं होगी, द्डनीय होगा और जुमनिं ब्रे भी टण्डनीय होश, भारा २ के अधीन १६. तत्समय प्रवृत किसी विधि में झंतविष्ट किसी बात के होते बुए मो, छारा ३ के जधोन पारित किए बारित किए गएप्रादेश शए आदेश य घारा ४, ६ या १३ के झधीन जारी किवे गये निदेश के उल्लंबन संबंधी किसी माधारा ४, ४.६ या अपराध के प्रभियोजन में, भादेश को भधि-प्रमाणित अति पेश किये जानें पर, जम तक कि प्रतिकूल के ग्रघीन जारी लि - N fqfia गये निदेशों के पाविप्त न कर दिया जाय तथा जिसे सावित करने का भार भभियुक्त गर होगा, यह उपघारणा की जायेगी-- चक््लंघन के लिए अभि - बोजनों में उषधघारणा, (%) झादेश, यथास्थिति जिला सजिस्ट्रेट या धारा १८ के अधीत राज्य सरकार द्वारा सशक्त किये गये उपखण्ड मजिस्ट्रेद या. राज्य सरकार वा घारा १३ के घरघीन राज्य संरकार द्वारा विशेष रूप से सशक्त किये मये किशीं [धविकारी ढारा किया या थी , (a) यधास्थिति जिला मजिस्ट्रैट ot oo 4 % ol राज्य सरकार टारा संशबत किये गये झपर जिला मजिस्ट्रेट या सपलाण्ड मजिस्ट्रेट या. राज्य सरकार या धारा १३ के ध्रधीन राज्य सरकार ढारा विशेष रूप से सशक्त किये गये किसी श्रधिकारो का यह समाधघान हों गया था कि & आ्राप्तार जिन पर भा वह प्रयोजन जिसके लिए वह किया गया था, विद्य- मान था, तथा उस भादेश का किया लाना भावश्यक था; A () सशादेश झन्यथा विधिमात्य था मौर इस अधिनियम के छपबंधों के भ्नुरूप था, उस व्यक्ति द्वारा १७. मदि घारा 1} की उपधारा (१) के भध्रघीन धनुजातत कोई ,व्यक्ति, उक्त उपधारा के निष्पादित किये गये. भ्घीन या उक्त घारा की उपधारा (३) के श्रघोन उसके द्वारा मिंष्पादित किये गये वस्थ्र-पंत्र मेँ अधि- हैखग जिस रस झत रोपित की गई किसी शर्त का अनुपालन नहीं करता है, वो उसके बन्ध-पत्र का समक्हूरण कर लियां में प्रवेश करने या. AW आर उसके द्वारा पावद्ध कोई भी व्यक्ति तर्संबंधी शास्ति का भुगतान करेगा या न्यायालय के लौटने की झनुशञा दी समाधान योग्य कारण बतलायेगा कि ऐसी शास्ति का भुगतान क्यों नहीं किया जाना चाहिये. गई थी जिस क्षेत्र से हुठ जान का उसे निदक दिया बया था. i
LN मध्यप्रवंदा राजपद्व, चिशांक 8 फरवरी 1991 369 ." १८. बंड प्रक्रिबा संहिता, १६७३ (१९७४ का सं. २) में किसी बात के होते हुए भी, राश्य जिला. मलिस्ट्रेटों सरकार, श्रादेश द्वारा, यह निर्देश दे सकेगी कि इस प्रशिनियम के श्रषनीन जिला मजिस्ट्रेट को प्रदत्त किप्नी की शक्तियों तथा शक्ति का मा उस पर अधिरोपित किये गये किपी क्ेव्य का आयोग या पालन ऐसे श्पर जिला अजिस्ट्रेटे था लय का ज्रत्या- उपबंड सिस्ट्रेट द्वारा तवा ऐसे झेत्रों के लिए, जो कि भादेश में विनिधिष्ट किये जायें, किया जानना. * . g whebrer की किसी भी बात' के संबंध में जद ot e जाचगा कि बह धरव्यास्थिति' लानकारी का स्थांत राज्य सरकार था कसी एस आँजिकारी, ललिसे उसमे तारा धारा 22 को अधीन पविशंज रूपा स॑ संशाकत किया गया वा, प्रकट महीं किया. था जिला साजिस्ट्रेट था धारा ९८ के अचीन' सशक्त किये गये अपर लिला मजिस्ट्रेट था उपसाप्य माजिस्ट्रंट स॑ जद gy, भपेता का्ती ब्' हक बच उस awfeer को, चिसनों विल्छ इस अधिनियम की धारा के ४, ५, ६ और ९२ के अधीन आयशा किया गया ज्ञ, या किसी न्यायालय का लपनी जानकारी का खांत या कहें तथ्य प्रकट कर. धिसकी M संसूचना से, जर्धास्थितति राज्व सरकार या एसा अधिकारी जिसे धारा ९३ वी अंधीन संशबत्त' गकिवा ey था जला साधिस्ट्रंट जा धारा' ९८ के अधीन सदाजत' किये गये अपर जिला मजिस्ट्रेट या उपबण्ढ मजिस्ट्रेट की राय में, किसी हत्तला दने वाले की पहचान या नाम e gy ot : अच्चाभ ४-समायथ िरांधी ्रिधाकेलापरं का गैनंचंत्रणा २०. कह भी व्वाक्त, जां कइ संझात्क (कारसिय) धदार्थ या प्रच एंसी पॉरीस्थातियों में अपन शरीर पर लंजार्क पदार्थ आावि , स्व कर ले जायंगा था बानत॑ दुए उसे अपने कम्जे या नियंघण में स्खंगा. जिनसे एसा युर्गवतयूषत' संदोध उत्पन्न को el e छंता थे कि ay किसी विधिपूर्ण सददेश्य के लिए उसे अपन शरीर पर स्ख कर नहीँ ले जा रहा बा या उसे किसी कब्दे वो पियें कह, चिधिपूर्ण उद्देश्य से अपने कब्जे या नियंत्रण में नहीं स्खे दुए दो, उस का में जबाक मई जद पीरशत न कर सकता हा कि बह o Tt लिशिपूर्ण उद्देश्य से अपने शरीर पर स्ख कर ले जा रहा था. या अपन कन्बं या नियंत्रण में रखें दुए था. कारावास से, विसंकी अर्वाध तीन वर्ष तक की हाँ सकेगी, कलनौय हंगा आर जुर्माने सै भी कहनीय g, . (V) @) याँबे राज्य सरकार का यह प्रतीत वाँ लि फिसी क्षेत्र के निवासी o Pt का कह कंच के निर्ासियों , वर्ग या उपबर्ग एसे अपराध को पके जाने से संबीधत हैं या एंस॑ अपराधों के दिये लाने को दु्ॉस्त का रहा धर सामु दिक बुमानँ, ब लिनकी परत्तिति मृत्यु था जार छत या संपत्ति की हानि या उसके नुकसान में जा छकवीवन या वफिशाँती की का अधिरॉपण, :-ब्यपट्ण मं शेती ज, अथवा होने की संभाषना मा, या. एस अपराधों के पकिय जाने स॑ संबंधित व्य्तितथाँ का संश्रय दो रहा हों, या अपराधिथां का पता लगाने या पकड़वाने में अपनी शक्ति भर पूरी सहावता नवीं दे रहा दे था एंसे अपराध के किये जाने से संबंधित, तात्विक साइय क्या रहा वाँ, तां राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा» उसको हत्र के एंसे पिवासियाँ था पिवासिलं के वर्ग था उपबर्ग पर सामुदिक जुर्माना अधघिरपित कर सकेगी. (ख) खण्ड (क) के अधीम सामु्िि जुर्माना आधरोपित!' कान वाला आदइंश कम से कम एक एसे समाचार पच' मं, बजिसका संबंधित क्षेत्र में पात्चालन था, आर एसी अन्य रीति. मं, जिसे राज्य सरकार, छस जादंश &t gt क्षेत्र के निर्वासियाँ की आनकारी में लाने के तलिए. सर्वाधिक उपयुक्त समझा, भी जर्काशित किया WRET, (२) राल्य सरकार या का एंसा अधिकारी, जी राज्य सरकार द्वारा, साधारण या विशेष आदंशा द्वारा, हत निमित्त सशक्त किया गया है, पकिसी भी ऐसे तिषासी कं था एसे निर्वासियाँ के वकिसी भी वर्ग या उपवेर्ग को शंसे जुर्गनि या उसके किसी भाग का भुरातान बहन के दायित्व से छूट दो सकंगा, @ जिला मजिस्ट्रेट, एंसी जांच करने के रश्चात जैसी कि. बद आवश्यक समझो, एंसे जुर्माने को. उन पिवासियाँ के वीघ प्रभाजित करोगा जा जुर्मानि का भुः शान करसमे के लियं सामुिके रूप ले दायी शो, आर एसा प्रभाजन एंसे नि्धासियाँ के अपने-अपने साधनों के संबंध में गजिला माजिस्ट्रैट के निर्णय' के अनुसार किया जायेगा. (¥ प्रभाजन करते समय, हिला मजिस्ट्रेट घह भागा निंयत कर सकेगा जिसका भुगतान किसी संयुक्त था अधिभकत केटदम्ब द्वारा किया जाना ही. (५) एंसे ऊुरमनि का बह भाग, जी किसी निवासी अथवा संयुक्त' था अधिभक्त कटूटूम्ब द्वारा दंय होनें के रूप में नियत किया गाया हो,-- @ g रीति माँ, था Py फकिसी न्यायालय दृवारा' जधिसेंचित किये गये जुरमानों की वसूली कै लिए कष्ट प्रीऋया सीक्ता, ९९०१५ (९९०४ का सं, २) दृवारा पफबाघित की गई हा,
370 शिविरों, कवावंदों (हिल). परेंशों wnf का लियंतण. वदियों .. (वुनि- %t ) का निमंत्रण. पथ्या (पाथ वे), सड़क श्रादि के उपयोग को प्रति- घिद्धि या. निें- न्घित करने ,की शंवित- मध्यप्रदोश राजपत्र , दिनांक 8 s 1991 इस प्रकार वसूल कियो. जा सकेगा मानों कि ऐसा मांगे किसी न्यायोलय द्वारा wfe- रोपित किंया गया जुर्माना हो: परन्तु राज्य सरकार, दंड प्रक्रिया संहिता, १९७३ (१९७४ का सं. २) की धारा ४२१ की उपघारत (२) में निददिष्ट नियमों के स्थान पर, उस रीति का जिसमे कि waa संहिता की उपत धारा कें। उपबारा (१) के (क) मो झघीन वारण्टों का निध्पादन किया जाना हो, विनियमन करें हुए तथा किष्ही ऐसे दौचों के, जो जुर्मानि का भूमतान करने के लिये दायी व्यवित से भिनत किमी व्यक्ति ढवारा किसी ऐसी संवस्ति के संभधंध मे किये गये शों जो कि वारण्ट के निष्पादन में कुक को गई हो, संकिप्त झववाइग के लिये नियम इस धलिनिवम के झाधीन बना सकेंगी, या (ख) भू-राजस्व की बकाया के तौर पर वसूल किया जा सकेगा. (%) उपधारा (१) के घ्घोन सामूहिक जुमति भधिरोषित करने वाला शझादेश राज्य सरकार हारा किसी' भी समय प्रतिसंहत या घपांसरित किया जा सकेगा. झरध्याय भ--लोक क्षेस श्र व्यवस्था २९. (१) यदि राज्य सरकार का यह समाधान हो जाता है कि शोक सुरक्षा या लोव, ब्यदस्था बनायें रखने के दित में ऐसा करना झावश्यक है, तो बहू, साधारण या विशेष झादेश द्वारा, किसी क्षेत्र में सैनिक श्रकार के ऐसे शिधिरों कं लगाया जाना या किसी ऐसे भ्म्वास, संचलन, ब्पर्थस्थत, बालन (इवॉल्यूशम ) या जवायंद का कराया जामां अ्तिथिद्ध या मिरघन्धित कर सकेगी जो शादेश में विनिदि ष्ट किये गये हों. (२) यह सुनिश्चित करने की दृष्टि से कि किसी भी स्थान पर सैनिक प्रकार 'का कोई शप्राधिकृत झम्यार, संचालन व्यवस्थित चालन या कबा!यद नहीं की जाती है, राज्य सरकार साधारण या विशष आदेश «द्वारा किसी ऐसे वर्ग के व्यक्तियों या संगठनों रा, जो उस भ्रादेश में विरनिदिष्ट किये सये हों, किसी शिविर के न्नगाये जाने, परेह सम्मिलन, सभा किये जांने या जुलूस निकाले जाने या उसमें भाग लिये जौने को प्रतिषिद्ध या मिर्बन्धित कर सकेगी या उस पर शर्ते झधिरोपित कर सकेगी (दे) हस हारा के श्नीन किये गये किसी झादेशे का कोई भी उस्लंघन कारावास से, जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा या जूर्माने से, वा. दोनों से, दंडलीय होगा. _ ' २३. (१) यदि राज्य सरकार का यह समाधान हो जाता हैं. कि किसी ऐसी पोशाक या परिघान की वस्तु (घाडिकल माफ ए पारल) या सम्प्रतीक से, जो संघ के सब्र बल के सदस्य या किसी पुलिस बल के जा तह्समय प्रवुत्त किसी विधि के श्रधघीन गठित किसी बल के सदस्य द्वारा पहने जाने या प्रदर्शित किथ' जाते के लिये भ्रपेक्षित किसी वर्दी या वर्दी के भाग या सम्प्रतीक से मिलता जुलता है, सौर्वे्ऑनिके रूप से पहन जाने वा प्रदर्शित किये जाने से लोक क्षेम, व्यवस्था बनाये रखने या शांति या प्रणांति के बनाये रखने पर प्रतिकूल प्रभाष पड़ने की संभावना हैक तो राज्य सरफार, साधारण या विशेष म्रादंग द्वारा, किसी भी ऐसी पौषाक या परिधान की बस्तू या सम्प्रतीक को प्रतिषिद्ध या निबेन्धित कर सकेगी. : (२) इस धारा के प्रयोजनों के लिये, किसी पोशाक, परिधान की वस्तू था सम्प्रतीक के संदंध में यह समझा जायेगा कि वह सार्वजनिक रूप से पहनी गई हैं या जनता में प्रदर्कित की गई है यदि वह इस प्रकार पहनी या प्रदर्शित की जाती है जिससे कि बेह किसी व्यक्ति को किसी ऐसे स्थान में दिखाई दें जिसमें जनता वी पहुंच हो. (1) पदि कोई व्यक्ति इस घारा के झपीन किये गये किसी झादेश का उल्लंघन करेगा तो बहू कारावास ले, जिसकी झ्रतघि तीन वर्ष तक की ही सकेगी, था जुर्मानि से, या दोनों से, दंडनीय होगा. ¥, () राज्य सरकार, लोक व्यवस्था बनाए रख ने के लिये या ननसाघा/रण के हित में, भादेश द्वारा, (क) किसी सड़क, पथ्या (पाय बे) या जल मार्ग के सपयोग को ; (ख) किसी भूमि पर से, किसी व्यक्ति, पशु या यान के थाने जानेको ; तीन मास से शनधिक की ऐसी कॉलाबधि तक के लिये, जो कि न्नादिश में किनिडिब्ट की जाय, प्रतिथिद्ध था निर्वे्घित कर सकेंगी.
! मध्यप्रदोषा 'राजपत्र, दिसांक 8 फरवरी 1991 (२) यदि कोई ब्यक्ति उपघाश ( १) के श्रधीन' किये गए किसी धादेश का उत्संघन करेगा, तो बह कारावास से जिसकी भवधि तीन वर्ष तफ हो सकेगी, या जुर्मानि स, या वोनों से, दंडनोय होगा. अध्याय ६--कतिपय स्थानों तथा क्षेत्रों तक पहुंच . २४५. (१) यदि राज्य सरक।र जनस/धारण के दवित में किसी स्थान या किसो वगे के स्थानों के संबंध में यह श्रावश्यक या समीचीम समझती है कि अ्रप्ाधिफ्त ब्यक्तियों के प्रबेश रोकने के लिये विशेष पूर्वावधानियां बरती जानी चाहियें, तो राज्य सरकार, WAV W, S स्थान को या यधथास्थिति उस वर्ग के प्रत्येक स्थान को संरक्षित स्थान थोषित कर सकेगी, धार तदुर्पारि, उस समय तक तब तक कि वह झादेश॑ प्रवृत्त रहता है, यथास्थिति बहू स्थांम या उस वर्ग का प्रत्येक स्थान इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिये संरक्षित्त स्थान होगा. (२) कोई भी व्यक्ति, राज्य सरकार की या जिला मजिस्ट्रेट की या ऐसे धन्य अधिकारी की, जो राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिफत किया जाय, झनुज्ञा के बिना किसी भी संरक्षित स्थान में प्रवेश नहीं करेगा या उस पर था उसमें नहीं रहेगा या उस पर से नहीं जादगा या उसके सामीप्य में नहीं घू मेगा. (३) जहाँ उपधारा (२) के घनुसरण में किसो व्यक्ति को किसी संरक्षित स्थान में प्रवेश करने, उस पर या उसमें रहने था उस पर से थाने की शंगुशा दी जाती हैं, वहाँ वह व्यक्ति, [ऐसी ,झनुज्ञा के wita w1 करते समय, अपने धाघरण को विनियमित करने के लिये ऐसे निदेशों का श्रतुपालन करेंगा जो उस प्राधिक्रारी दारा दिये जाएं, जिसने अझतु्ञा दी है. (४) यदि कोई व्यंक्ति.इस घारा के किसी सपबंघ के उल्लंघन में किसी संरक्षित स्थान में, प्रवेश करेगा या रहेगा, तो एस किन्हीं भी श्रन्य कार्येवाहियों पर, जो उसके धिरुद्ध की जा सकती हों, प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उसे किसी पुलिस श्रधिकारी द्वार। बा राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिक्त किए मए किसी श्रन्य व्यक्ति द्वारा वहां से हटाया जा सकेगा. (%) यदि कोई व्यक्ति इस धारा के उपबंधों में से किसी उपबंध का उल्लंघन करेगा, तो वह हारावास से, जिसकी प्रवंधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्वानि से, या दोनों से, दंडनीय होगा. % (१) यदि राज्य सरकार, जनसाधारण के हित में यह धघावश्यक या समीर्चान समझती है कि किसी क्षेत्र में व्यक्तियों के प्रवेश को विनियमित किया जाए, तो राज्य सरकार, इस अझ्धिनिमम के S WY धन्य उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ध्रादेश हारा, एसे क्षेत्र को संरक्षित क्षेत्र घोषित कर सकेगी, पीर तदुपरि उस समय तक जंत्र कि व भादेश प्रवुत्त रहता है, ऐसा क्षेत्र इस श्धिनियम के प्रयोजनों के लियें संरक्षित क्षेत्र होगा. (R) ऐस्रो तारीख को तथा ऐसी तारीख के पश्चात् जो उपधारा (१) के श्रधीन किए गए प्रादेश में विभििष्ट की जाय तथा किन्हीं ऐसो छूटों के श्रध्यघीन रहते हुए जिनके लिये उक्त श्रादेश द्वारा उपनंध किया जाय, कोई भी ऐसा व्यक्ति, जी उचत तारीख के ठीक पूर्व, उक्त झ्रादेश द्वारा संरक्षित क्षेत्र के रूप में घोषित किए गए क्षेत्र का निवासी नहीं था, उपत झादेश में विनिदिष्ट किए गए प्राधिकारी या ज्यक्ति द्वारा उसे दिए गए लिखित अझनुज्ञापत्र के निवा्यनों & oA ही उस क्षेत्र में प्रवेश करेगा या उससें रहेगा अन्यथा नहीं. (३) यदि कोई व्यक्ति इस धारा के उपबन्धों के उल्लंघन में किसी संरक्षित क्षेत्र में प्रवेश करना या रहेगा तो ऐसी किन्दहीं भी भ्न्य कार्यवाहियों पर, जो उसके विस की जा सकती हों, प्रतिकूल प्रभाण डाले बिना, उस संरक्षित क्षेत्र में कर्तव्पारूड़ किसी भी पुलिप श्रघिकारी द्वारा या उसके निदेशों के ध्रघीन या राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिक्त किए गए किसी भी श्रन्य ब्यक्ति द्वारा वहां से हटाया जा ख्रकेगा. 371 संरक्षित स्थान, संरक्षित क्षेत्र,
-+ 372 .... अध्यप्रदोश राजपत , दिनांक 8 फरवरी 1991 (४) यदि कोई स्यक्ति इस घारा के उपबधों में मे किसी भी उपबंध के उल्लंघन में फिसो संरक्षित स्थान में प्रवेश करेगा या रहेगा, तो बह कारावास से, जिसकी झवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, बा जुर्माति से, बा दोनों मरे, दष्डनीय होगा. भा के साथ बल २७. कौई भी व्यक्ति, जॉ किसी सरक्षित स्थान था सरंक्षित क्षेत्र में,-- प्रयोग करता या उससे... बचघकर (%) ऐसे स्थान या क्षेत्र का संरक्षण करने या ऐसे स्थान या क्षेत्र में प्रवेश को रोकने या निकलना. निषं॑त्रित करने के प्रयोजन से तैनात किए गए किसी व्यक्ति पर झ्ापराधिक वल प्रयोग करके या प्रयोग करने की धमकी देकर; या (ख) किसी ऐसे व्यक्ति से भ्पने प्रवेश या प्रयतित / प्रवेश को छिपाने के लिये पुर्वावधानियाँ बरतते हुए, प्रवेश करेगा या प्रवेश करने का प्रयत्न करेया, बह कारावास से, जिसको भ्वधि तीन वर्ष तक की हो ब्केगी, था जुर्माने बे, या दोनों से, दण्डतोय होगा. कतिपय स्थानों तथा रद. (है) इस भ्रधिनियम के किसी भल्य उपबंध पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, राज्य सरकार-- कषत्रों के लिये भादेश. (क) किसी ऐसे भस्य स्थान या क्षेत्र के बारे में, जो उनके द्वारा संरक्षित स्थान या संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है; सा (ख) किसी ऐसे oy स्थान या क्षेत्र के बारे में, जिसके संबंध में उसे यह घावश्यक प्रतीत होता ही कि ध्वंतक कार्यबाहियों को रोकने या दबाने के लिये या. समुदाय के जीचन के लिये झ्ावश्यक प्रदायों तथा सेवाओं को बनाये रखने के लिये. विशेष पूर्वा- वघानियां बरती जाएं, ऐसे स्थान या क्ेत्र में व्यक्तियों के प्रवेश को या ऐसे स्थान था क्षेत्र में या उसके सामीप्य में उनके झाच रण को नियंत्रित था विनियमित करने के लिये आदेश कर सकेगी. (२). पृवंगामी उपबंधों की व्यापकता पर प्रति्वूल. प्रभाव डाले बिना; किसी स्थानीय 'ेन्न के संबंध में उपघारा (१) के श्रघीन किए गए देशों में निम्नलिखित ol के लिये उपबंध हो सकेंगे-- (क) ऐसे स्थान या क्षेत्र में ब्यक्तियों के भ्रबेश को निर्वन्धित करने के लिए शभीर किसी ऐसे ब्पक्ति को, जो भ्रादेशों के उल्लंभन में उस स्थान था लेंव्र में हों या जो इस प्रधिनियम के उपबन्धों के किसी उल्लंघन के लिये सिद्धदोष ब्हसया जा चुका हो, वहां से हटाने के लिये ; (@) यह भपेक्षा करने के लिये कि ऐसे स्थान या छत में किसी भी व्यक्ति या. व्यक्तियों के बंग॑ को उपस्थिति विह्वित प्राधिकारी को भविसुचित की चाए, और किसी ऐंबे व्यक्ति से, जो किसी ऐसे श्रपराघ के लिये सिद्धदोच ठहराया यया हो, जैसा कि इस उपधारा के खंड (क) में उल्लिदित हे, मद भपेक्षा करने के लिये कि बह ऐसे स्थान या क्षेत्र में रहते समय अपने भ्राने जाने की रिपोर्ट दे भर किसी ऐसी श्न्य शर्त का अनुगालन करे जो कि विह्लित प्राधिकारी द्वारा उस पर अधिरोपित की गई हो ; (ग). ऐसे स्यात या क्षेत्र के किसी व्यक्ति या. व्यव्तियों के बगे से महु श्रपेक्षा करने के लिये कि वे पहचान के लिये ऐसी दस्ताबेजी साक्ष्य घ्पने साथ रखें जो कि विड्वित की जाए, Wit (घ) किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के at को कोई विनिरिष्ट वस्तु श्रपने कब्जे या नियंत्रण में रखने से प्रतिषिद्ध करने के लिये. (३) किस्री संरक्षित स्थान था संरक्षित क्षेत्र के संबंध में इस घारा के अधीन करिए गए किसी भादेश द्वारा ऐसे स्थान या क्षेत्र को इस अधिनियम के ऐसे समस्त उपबन्धों से था उनमें से किन्हीं भी ऐसे उपबन्धों से, जिनका कि बथास्थिति किसी संरक्षित स्वान या. संरक्षित क्षेत्र को बा उसके संबंध में लागू होना भभिव्यक्त हो, छूट दी जा सकगी या यह निर्दिष्ट किया जा सकेगा कि उनत समस्त उपबन्ध या उनमें से कोई भी उपबन्ध ऐसे उपान्तरणों के झष्यघीन रहते हुए लागू होंगे जो भादेश में निदिष्ट किए जाएं.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 8 फरवरी 1991 373 (¥) किसी ऐसे स्थान या क्षेत्र के संवंध में जो संरक्षित स्थान या संरक्षित क्षेत्र न @), WA के भधीन किये गये भोदेत दारा यह निद््ड फिया जा तफेगा छि इस अधिनियम के समस्त उपबन्ध या उनमें से कोई उपबंध, जिनका ययास्यिति छिसी संरजित स्थान या संरक्षित क्षेत्र को या. उपके संबंध में लागू होतः धमिव्यक्त हो, उस स्थान या शलषेत्र को, या उपके संबंध में, जिसके कि बारे में प्रदेश किया गया हो या तो उपान्तरण के बिना या ऐसे उपास्तरण के साथ लागू होंगे जो wmdw में दिनिर्िष्ट किया जाए; (v) यदि कोई व्यक्ति इस घाय के प्रधीत किए गए हिसो झादेश का उल्लंघन करेगा, तो वह कारावास से, जितकी भ्वधि तीन वर्ष तक की हो सकेगो, या जुमनि से, ब्रा दोनों से, दंडनीय होंगा. अध्याय ७--भ्रनुपूरक ९९: राज्य सरकार, घादेश ढारा, यह निदेश दे सकेगी कि बह धारा २१ के भझघोन सामूहिक जुर्माना म्रधिरोपित करने को श्ौर धारा ३० के श्घीन नियम बनाने की शक्ति को छोड़कर, किसी भी ऐसो शक्ति या कर्तव्य का, जो इंग अधिनियम द्वास राज्य सरकार को प्रदत्त की गई था उत पर झधि- रोपित किया गया है, प्रयोग तया निर्वहन एसो शर्तों यदि कोई हों, जैसी कि उस निर्देश में विनिर्दिष्ट की जाएं, & AW रहते हुए, उसके घधीनस्थ किसी. ऐसे भ्धिकारी द्वारा किया जाएगा जी शिला मजिस्ट्रेट की पदब्रेणी से निम्न पदलेणी का ने हो. ३०. (है) राज्य सरकार, इस प्रधिनियम के प्रयोजनतों को कार्यास्थित करते के लिये नियम, पूर्व प्रकाशन के परवचातू बता सकेगी, (R) इस प्रधिनियम के प्रदीन बनाएं गए समस्त नियम, उनके बनाए जाने के पश्चातू यया सम्भव शीघ्र विधाल सभा के पटल पर रखे जाएंगे . ' ११. जो कौई इत शधिनियम के धयीन किसी घपराधघ के फिये जाने का दुष्प्रेरण वारेगा या कोई ऐसा झपराधघ करने का प्रयत्न फकरेमा मर ऐसा N9 करने में झ्पराघ छिए जाने की दिशा में कोई कार्य करेगा, वह उस झपराध के लिए उपबंधित दंड से दंधनीय होगा, ३९. जोफकोई किसी ऐंसें व्यक्ति को, जितने इस प्रधिनियम के झधघोन कोई पपराध किया है, जान कर मदद या सदायता देगा या संशय देगा या उसे छिपाएंगा, वह ऐसे धपराध के लिए उपबंधित दंड से दंडनोय होगा . हफब्टोकरण---इस धारा के प्रयो न को लिये शहद “संखय” के झंतमंत हैं किसी ठशिति को धाश्य, भोजन, पेय, धन, वत्त्, आयुध, गोजॉ-आाकूव या प्वड्ण के साधन देना या किन्द्ीं साधनों से, चाहे वे उसी प्रकार के हाँ या नहीं जिस प्रयार के इस धारा में परिमणित दै, किसो व्यक्ति की सहायता पकड़े जाने से बचने के लिये करना... W, () feit व्यक्ति के विदद्ध किसो ऐसी बात के लिए, जो. इस भधिनियम या उसके प्रघोत बनाएं गे फिस्दीं नियनों या किए गर फिन्हों मादेशों के भतुसरण में सद्भावपूवक की गई हो या विद मार किया जाना घागयितर रहा हों, कोई वाद, भगियोजन या भय विधिक कार्यव, ही होगी , ’ (२) _ इस भविनियम के धघीन wfsse कर से पन्यया उपबंधित के सियय, सरकार के विरुद्ध किसी भी एसे नुकसान के लिये, जो किसी ऐसो T R कारगहुप्रा हो वा जित हां हिसो ऐसो बात के कारण होता सम्माव्य हो जो इसे भविनियम या सैसके पवीन बनाएं गए किस्हों नियमों था किए मए किर्हीं भादेशी कप्रमुमरण में सदभावडृवंक की गई हो या शिसका सद्भावपूर्वक किया जाना भाशयित रहा हो, कोई वाद या प्रत्य विधिक कार्यवाहियां नहीं होगी . . इस भधघनियम को उपदन्ध, तरसमय प्रब्त किसी भी धरय झधिनियम, अस्यादेश या विनियम के झतिश्क्त हुति, उनका सस्पीकरण करने बाल नहीं. राज्व सरक।र की शक्तियों तथा कलंब्यों का प्रत्या- योजत, नियम , झपराध करने के प्रयत्न के. लिये शॉस्ति . झपराधियों दो संश्रय देने के लिए शास्ति . परल्राण . प्रस्य विधियों का लागू होना वजित वहीं होगा .
374 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 8 फरवरी 1991 किसी. भी पुलिस 35. कोई भी पुलिस अधिकारी या कोई व्यक्ति, जिसे राज्य सरकार हारा इस निभित्त प्राधिकृत किया अधिकारी दारा गया हो, यथास्थिति संरक्षित स्थान या संरक्षित क्षेत्र में प्रवेश करने वाले या प्रवेश चाहने वाले या उस पर तलाशी ली जाने की या उसमें रहने वाले या उसको छोड़ने वाले किसी व्यक्ति की तथा ऐसे व्यक्ति दारा उसमें लाए गए किसी ः यान, जलयान, पशु या वस्तु की तलाशी ले सकेगा, और तलाशी के प्रयोजन के लिये ऐसे व्यक्ति, यान, जलयान, पशु या वस्तु को निरुद्ध रख सकेगा: परन्तु इस धारा के अनुसरण में किसी स्त्री की तलाशी किसी स्त्री हारा ही ली जाएगी अन्यथा नहीं और यह कि ऐसी तलाशी भ्िष्टता का सम्यक ध्यान रखते हुए ली जाएगी. भोपाल, दिनांक 8 फरवरी 1991 क्र. 2547-इक्कीस-अ-(प्रा..--'मारत के संविधान के अनुच्छेद 348 के खण्ड (3) के अनुसरण में, मध्यप्रदेश राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 (क्रमांक 4 सन् 1991) का अंग्रेजी अनुवाद राज्यपाल के प्राधिकार से एतदुद्वारा प्रकाशित किया जाता है. मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, टी. पी. एस. पिल्लई, उपसचिव.