Uttar Pradesh act 006 of 1878 : The Treasure Trove Act, 1878

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भारतीय निखात निनि अनिनियम, 1878

(1878 का अनिनियम सखं याकं 6)1 [13 फरवरी, 1878]

निखात निनि स ेसम् बन‍ ित नवनि का सशंोिि करि ेके निए

अनिनियम

उद्देनशका—यह समीचीि ह ैकक निखात निनि से संबंनित नवनि का संशोिि ककया जाए; अत: इसके द्वारा निम् िनिनखत रूप में यह अनिनियनमत ककया जाता ह ै:—

प्रारंनभक

1. सनंिप् त िामइस अनिनियम का संनिप् त िाम भारतीय निखात निनि अनिनियम, 1878 ह ै। नवस् तार—इसका नवस् तार2[उि राज् यिेत्रों के नसवाय जो 1 िवम् बर, 1956 से ठीक पहिे भाग ख राज् यों में समानवष् ट थे] संपूर्ण भारत पर ह ै।

3* * * * *

2. [अनिनियनमनतयों का निरसि ।]—संशोिि अनिनियम, 1891 (1891 का 12) द्वारा निरनसत ।

3. निवाणचि खडं—इस अनिनियम में,—

"निनि" से मृदा में, या मृदा से संिग् ि ककसी वस् तु में, निपी हुई ककसी भी मूल् य की कोई वस् तु अनभप्रेत ह;ै

"किक् टर" से अनभप्रेत ह ै (1) नजिे का स् वतंत्र भारसािक राजस् व अनिकारी, और (2) इस अनिनियम के अिीि किक् टर के कृत् यों का पािि करिे के निए राज् य सरकार द्वारा नियुक् त अनिकारी ।

"स् वामी"—जब कोई व् यनक् त ककसी भूनम या उससे संिग् ि ककसी वस् तु के अ‍ तरर् सम् ब‍ िी ककसी निखत में ककसी आरनित अनिकार के अिीि, ऐसी भूनम या वस् तु में की निनि का हकदार है, तब वह इस अनिनियम के प्रयोजिों के निए ऐसी भूनम या वस् तु का स् वामी समझा जाएगा ।

4. निनि के पाि ेवािे द्वारा सचूिा—जब कभी दस रुपए से अनिक रकम या मूल् य की कोई निनि पाई जाती ह ैतो उसके पािे वािा यथासाध् य शीघ्रता से—

(क) ऐसी निनि के प्रकार और पररमार् या िगभग मूल् य की;

(ख) उस स् थाि की जहां निनि पाई गई थी;

(ग) निनि के पाए जािे की तारीख की,

1 यह अनिनियम संथाि परगिा व् यवस् थापि नवनियम (1 872 का नवनियम 3) की िारा 3 द्वारा संथाि परगिा में, खोंडमि नवनि नवनियम, 1936 (1936 का नवनियम 4) की िारा 3 और अिुसूची द्वारा खोंडमि नजिे में; और अंगुि नवनि नवनियम, 1936 (1936 का नवनियम 5) की िारा 3 और अिुसूची द्वारा अंगुि नजि ेमें, प्रवृत्त घोनित ककया गया है । इसे नशड यलू् ड नडनस् िक् ट स ऐक् ट, 1874 (1874 का 14) की िारा 3(क) के अिीि अनिसूचिा द्वारा, हजारीबाग, िोहारडगा और मािभूम के अिुसूनचत नजिों तथा परगिा ढािभूम में और ससंहभूम नजि ेमें कोल् हि में भी प्रवृत्त घोनित ककया गया हैभारत का राजपत्र, 1881, भाग 1, पषृ् ठ 504 देनखए । (उस समय िोहारडगा नजिे के अंतगणत वतणमाि पािामऊ नजिा भी था, नजसे 1894 में पृथक ककया गया; िोहारडगा जब रांची नजिा कहिाता है, किकत्ता गजट, 1899, भाग 1, पषृ् ठ 44 देनखए) । इसे 1963 के नवनियम सं० 6 की िारा 2 और अिुसूची 1 द्वारा (1-7-1965 से) दादरा और िागर हवेिी पर, 1963 के नवनियम सं० 11 की िारा 3 और अिुसूची द्वारा गोवा, दमर् और दीव पर तथा 1965 के नवनियम सं० 8 की िारा 3 और अिुसूची द्वारा उपांतरर्ों सनहत (1-10-1967 से) संपूर्ण संघ राज् यिेत्र ििद्वीप पर नवस् ताररत और प्रवृत्त ककया गया । 1963 के नवनियम सं० 7 की िारा 3 और अिुसूची 1 द्वारा यह अनिनियम पांनडचेरी में प्रवृत्त हुआ । 1955 के मैसूर अनिनियम सं० 14 द्वारा इस अनिनियम का बेल् िारी नजिे पर िागू होिा निरनसत ककया गया । 1947 के नबहार अनिनियम सं० 22 द्वारा, नबहार में, 1949 के मद्रास अनिनियम सं० 36 द्वारा, मद्रास में, 1960 के पजंाब अनिनियम सं० 24 द्वारा, पजंाब में, 1972 के आ‍ र प्रदेश अनिनियम सं० 15 द्वारा, आ‍ र प्रदेश में, संशोनित ककया गया ।

2 नवनि अिुकूिि (सं० 2 ) आदेश, 1956 द्वारा "भाग ख राज् य" के स् थाि पर प्रनतस् थानपत ।

3 "और यह तरु‍ त प्रवृत्त होगा" शब् द 1914 के अनिनियम सं० 10 की िारा 3 और अिसूुची 2 द्वारा निरनसत ककए गए ।

1

2

निनखत सूचिा किक् टर को दगेा और निनि को या तो निकटतम सरकारी खजािे में निनिप् त करेगा, या किक् टर को, निनि ऐसे समय और स् थाि पर, जैसा वह समय-समय पर अपेनित करे, पेश करिे के निए ऐसी प्रनतभूनत दगेा जैसी किक् टर ठीक समझता ह ै।

5. दावेदारों से हानजर होि ेकी अपिेा करिे वािी अनिसूचिा—िारा 4 के अिीि सूचिा के प्राप् त होिे पर, किक् टर ऐसी जांच (यकद कोई हो) करिे के पश् चात , जैसी वह ठीक समझता ह,ै निम् िनिनखत उपाय करेगा, (अथाणत ) :— (क) वह ऐसी रीनत से, जैसी कक राज् य सरकार इस निनमत्त समय-समय पर नवनहत करे, इस आशय की कक अमुक तारीख को (उसका उल् िेख करते हुए) अमुक निनि (उसके प्रकार, पररमार् और िगभग मूल् य का उल् िेख करते हुए) अमुक स् थाि में (उसका उल् िेख करते हुए) पाई गई थी; और निनि या उसके ककसी भाग का दावा करिे वािे सभी व् यनक् तयों से यह अपेिा करिे वािी अनिसूचिा प्रकानशत करेगा कक वे उसमें उनल् िनखत कदि को और स् थाि पर स् वयं या अनभकताण द्वारा किक् टर के समि हानजर हों; ऐसा कदि ऐसी अनिसूचिा के प्रकानशत होिे की तारीख के पश् चात चार मास से पहिे का या िह मास से बाद का ि होगा;

(ख) जब वह स् थाि नजसकी बाबत किक् टर को यह प्रतीत होता ह ैकक निनि उसमें पाई गई थी, निनि के पाए जािे की तारीख को ककसी ऐसे व् यनक् त के कब् जे में था जो पािे वािे से नभ‍ ि ह,ै तब किक् टर ऐसे व् यनक् त पर भी इसी आशय की एक नवशेि निनखत सूचिा की तामीि करेगा ।

6. हानजर ि होि े पर अनिकार का समपहरर्—ककसी व् यनक् त का, नजसका ऐसी निनि या उसके ककसी भाग पर कोई अनिकार, उस स् थाि के, नजसमें ऐसी निनि पाई गई थी, स् वामी के रूप में या अ‍ यथा ह ैऔर जो िारा 5 के अिीि जारी की गई अनिसूचिा की अपेिािुसार हानजर िहीं होता है, ऐसा अनिकार समपहृत हो जाएगा ।

7. किक् टर द्वारा जाचं की जाि ेवािी और अविाररत की जाि ेवािी बातें—िारा 5 के अिीि अनिसूनचत कदि को, किक् टर निनि को अपिे समि पेश कराएगा, और—

(क) उस व् यनक् त के बारे में नजसके द्वारा, उस स् थाि के बारे में नजसमें और उि पररनस् थनतयों के बारे में नजिमें, ऐसी निनि पाई गई थी; और

(ख) यावत संभव उस व् यनक् त के बारे में नजसके द्वारा, और उि पररनस् थनतयों के बारे में नजिमें ऐसी निनि निपाई गई थी,

जांच करेगा और उिका अविारर् करेगा ।

8. निनि पर दावा करि ेवाि ेव् यनक् त द्वारा वाद िाि ेके निए अिजु्ञात ककया जाि ेवािा समय—यकद िारा 7 के अिीि जांच की जािे पर किक् टर को यह नवश् वास करिे का कारर् प्रतीत होता ह ैकक निनि को, उसके पाए जािे की तारीख के पूवण एक सौ विण के अ‍ दर, उस व् यनक् त द्वारा जो उक् त अनिसूचिा की अपेिािुसार हानजर हुआ ह ैऔर ऐसी निनि पर दावा करता है, या ककसी अ‍ य ऐस े व् यनक् त द्वारा, निपाया गया था, नजसके अनिकार के अिीि ऐसा व् यनक् त दावा करता ह,ै तो किक् टर उस मामिे की सुिवाई की ऐसी अवनि के निए स् थनगत करिे वािा आदशे देगा नजसे वह पयाणप् त समझता ह,ै नजससे कक दावेदार द्वारा अपिा अनिकार नसद्ध करिे के निए नसनवि ‍ यायािय में वाद संनस् थत ककया जा सके ।

9. निनि कब स् वानमनवहीि घोनित की जा सकेगी—यकद ऐसी जांच करिे पर किक् टर को यह नवश् वास करिे का कोई कारर् प्रतीत िहीं होता ह ैकक निनि इस प्रकार निपाई गई थी; अथवा जहां िारा 8 के अिीि कोई अवनि नियत की गई ह ैवहां, यकद किक् टर की जािकारी में ऐसी अवनि के अ‍ दर यथापूवोक् त कोई वाद संनस् थत िहीं ककया गया ह;ै अथवा यकद ऐसा वाद ऐसी अवनि के अ‍ दर संनस् थत ककया गया ह ैऔर वादी का दावा अन‍ तम रूप से अस् वीकार कर कदया गया ह,ै तो किक् टर निनि को स् वानमनवहीि घोनित कर सकेगा ।

ऐसी घोिर्ा के नवरुद्ध अपीि—इस िारा के अिीि की गई घोिर्ा से व् यनथत कोई व् यनक् त, घोिर्ा की तारीख से दो मास के अ‍ दर उसके नवरुद्ध, मुख य नियंत्रक राजस् व प्रानिकारी1से अपीि कर सकेगा ।

ऐसी अपीि के अिीि रहते हुए, ऐसी प्रत् येक घोिर्ा अन‍ तम और निश् चायक होगी ।

10. घोिर्ा की पश् चात वती कायणवानहयां—जब िारा 9 के अिीि ककसी निनि के बारे में कोई घोिर्ा की गई ह,ै तब ऐसी निनि का इसमें इसके पश् चात अ‍ तर्वणष् ट उपब‍ िों के अिुसार या तो उसके पािे वािे को पररदाि कर कदया जाएगा या उसके और उस स् थाि के स् वामी के बीच, नजसमें वह पाई गई ह,ै इसमें इसके पश् चात उपबन‍ ित रीनत से नवभाजि कर कदया जाएगा ।

11. जब स् थाि के स् वामी के रूप में कोई अ‍ य व् यनक् त दावा िहीं करता ह ैतब निनि का पाि ेवाि ेको कदया जािा—जब ककसी निनि के बारे में यथापूवोक् त कोई घोिर्ा की गई है, और ऐसी निनि के पािे वािे से नभ‍ ि कोई व् यनक् त िारा 5 के अिीि प्रकानशत

1 मुख य नियंत्रक राजस् व प्रानिकारी की पररभािा के निए देनखए सािारर् खण् ड अनिनियम, 1 897 (1 897 का 1 0) की िारा 3(1 0) ।

3

अनिसूचिा की अपेिािुसार हानजर िहीं हुआ है, और उसिे उस स् थाि के स् वामी के रूप में, नजसमें वह पाई गई ह,ै निनि के ककसी अंश के निए दावा िहीं ककया है, तब किक् टर ऐसी निनि का उसके पािे वािे को पररदाि कर दगेा ।

12. जब ऐसा केवि एक व् यनक् त ही दावा करता ह ैऔर उसके दाव ेपर कोई नववाद िहीं ह ैतब निनि का नवभाजि ककया जािा और अशंों का पिकारों को पररदाि ककया जािा—जब ककसी निनि के बारे में यथापूवोक् त कोई घोिर्ा की गई ह ैऔर केवि एक व् यनक् त ही जो ऐसी निनि के पाि ेवािे से नभ‍ ि ह,ै इस प्रकार हानजर हुआ ह ैऔर उसिे दावा ककया ह ैऔर पािे वािे व् यनक् त िे उस व् यनक् त के दावे पर कोई नववाद िहीं ककया ह,ै तब किक् टर निनि का उस पािे वािे और इस प्रकार दावा करिे वािे व् यनक् त के बीच निम् िनिनखत नियम के अिुसार नवभाजि करिे की कायणवाही करेगा, (अथाणत ) :—

यकद पािे वािे और ऐसा दावा करिे वािे व् यनक् त िे निनि के व् ययि के बारे में कोई ऐसा करार िहीं ककया ह ैजो तत् समय प्रवृत्त ह,ै तो निनि का तीि-चौथाई ऐसे पािे वािे को और अवनशष् ट ऐसे व् यनक् त को आबन‍ टत ककया जाएगा । यकद उस पािे वािे और ऐसे व् यनक् त िे ऐसा कोई करार ककया ह ैतो निनि का व् ययि तदिुसार ककया जाएगा :

पर‍ तु यकद किक् टर ककसी मामिे में ठीक समझता ह ैतो वह ककसी निनि का इस िारा द्वारा यथानिदेनशत रूप में नवभाजि करिे के बजाय,—

(क) दोिों में से ककसी एक पिकार को ऐसी सम् पूर्ण निनि या उसमें ऐसे पिकार के अपिे अंश से अनिक का आबंटि, ऐसे पिकार द्वारा किक् टर को दसूरे पिकार के निए इतिी ििरानश के कदए जािे पर कर सकेगा नजतिी कक किक् टर, यथानस् थनत, उस दसूरे पिकार के अंश या इस प्रकार आबन‍ टत आनिक् य के समतुल् य नियत करे; अथवा (ख) ऐसी निनि का या उसके ककसी प्रभाग का िोक नििाम द्वारा नवक्रय कर सकेगा और नवक्रय आगमों का इसमें इसके पूवण नवनहत नियम के अिुसार पिकारों के बीच नवभाजि कर सकेगा :

पर‍ तु यह और भी कक जब किक् टर िे िारा 9 के अिीि अपिी घोिर्ा द्वारा ककसी ऐसे दावे को अस् वीकार कर कदया ह ैजो इस अनिनियम के अिीि ककसी ऐसे व् यनक् त द्वारा ककया गया था, जो उक् त पािे वािे या नजस स् थाि में निनि पाई गई ह ैउस स् थाि के स् वामी के रूप में दावा करिे वािे व् यनक् त से नभ‍ ि ह,ै तब ऐसा नवभाजि तब तक िहीं ककया जाएगा जब तक कक दो मास ि बीत गए हों और उस व् यनक् त द्वारा, नजसका दावा इस प्रकार अस् वीकार कर कदया गया ह,ै िारा 9 के अिीि अपीि पेश ि की गई हो, अथवा यकद इस प्रकार अपीि पेश की गई ह ैतो जब तक ऐसी अपीि खाररज ि की जा चुकी हो ।

जब किक् टर िे इस िारा के अिीि नवभाजि कर कदया है, तब वह पिकारों को ऐसी निनि के भाग या उिके बदिे में उस िि का पररदाि करेगा नजसके निए वे ऐसे नवभाजि के अिीि हकदार हैं ।

13. स् थाि के स् वानमत् व के बारे में नववाद की दशा में कायणवानहयों का रोक कदया जािा—जब ककसी निनि के सम् ब‍ ि में यथापूवोक् त कोई घोिर्ा की जा चुकी है और दो या अनिक व् यनक् त यथापूवोक् त हानजर हो गए हैं और उिमें से प्रत् येक िे उस स् थाि के स् वामी के रूप में, जहां ऐसी निनि पाई गई थी, दावा ककया ह,ै या ऐसे ककसी व् यनक् त के अनिकार पर, जो इस प्रकार हानजर हुआ ह ैऔर नजसिे ऐसा दावा ककया है, ऐसी निनि के पािे वािे िे नववाद ककया है, तब किक् टर ऐसी निनि का प्रनतिारर् कर िेगा और अपिी कायणवानहयों को, इस दनृष् ट से रोकिे का आदशे दगेा कक उस नविय की नसनवि ‍ यायािय द्वारा जांच कर िी जाए और उसका अविारर् कर कदया जाए ।

14. ऐसे नववाद का निपटारा—कोई ऐसा व् यनक् त जो इस प्रकार हानजर हुआ है और नजसिे ऐसा दावा ककया है, ऐसे आदशे की तारीख से एक मास के अ‍ दर, अपिे अनिकार की घोिर्ा करिे वािी नडक्री अनभप्राप् त करिे के निए नसनवि ‍ यायािय में वाद संनस् थत कर सकेगा; और ऐसे प्रत् येक वाद में निनि का पािे वािा और किक् टर के समि ऐसे दावे पर नववाद करिे वािे सब व् यनक् त प्रनतवादी बिाए जाएंगे ।

15. और उसके बाद नवभाजि—यकद ऐसा कोई वाद संनस् थत ककया जाता ह ैऔर उसमें वादी का दावा अन‍ तम रूप से नसद्ध हो जाता ह ैतो किक् टर िारा 12 के उपब‍ िों के अिीि रहते हुए निनि का उसके और पािे वािे के बीच नवभाजि कर देगा । यकद कोई ऐसा वाद यथापूवोक् त संनस् थत िहीं ककया जाता है, या यकद ऐसे सब वादों में वाकदयों के दावे अन‍ तम रूप से अस् वीकार कर कदए जाते हैं तो किक् टर वह निनि, पािे वािे को पररदत्त कर दगेा ।

16. निनि को सरकार की ओर स ेअर्जणत कर ििे ेकी शनक् त—किक् टर िारा 9 के अिीि घोिर्ा करिे के पश् चात और निनि को इसमें इसके पूवण उपबन‍ ित रूप से पररदत्त करिे या नवभानजत करिे के पहिे, ककसी भी समय, अपिे द्वारा हस् तािररत िेख द्वारा अपिे इस आशय की घोिर्ा कर सकेगा कक वह सरकार की ओर से वह निनि या उसके ककसी नवनिर्दणष् ट प्रभाग को, ऐसी निनि या प्रभाग की सामग्री के मूल् य के बराबर ििरानश, और साथ ही उस मूल् य का पंचमांश उसके हकदार व् यनक् तयों को देकर अर्जणत कर िेगा, तथा वह ऐसी ििरानश अपि ेखजािे में ऐस ेव् यनक् तयों के जमाखाते निनिप् त कर सकेगा; और उसके बाद ऐसी निनि या प्रभाग सरकार की सम् पनत्त समझा जाएगा और इस प्रकार निनिप् त ककए गए िि से यावत शक्य ऐसे बरता जाएगा मािो कक वह ऐसी निनि या प्रभाग हो ।

17. किक् टर के नवनिश् चय का अनंतम होिा और सद भावपवूणक ककए गए कायों के निए ककसी वाद का उसके नवरुद्ध ि िाया जा सकिा—किक् टर के द्वारा इस अनिनियम के अिीि कदए गए ककसी नवनिश् चय या ककए गए कायण पर ककसी नसनवि ‍ यायािय में

4

आपनत्त िहीं की जाएगी और इसके द्वारा प्रदत्त शनक् तयों के प्रयोग में सद भावपूवणक की गई ककसी बात के निए उसके नवरुद्ध कोई वाद िहीं िाया जाएगा या अ‍ य कायणवाही िहीं होगी ।

18. किक् टर द्वारा नसनवि ‍ यायािय की शनक् तयों का प्रयोग ककया जािा—इस अनिनियम के अिीि कोई जांच करिे वािा किक् टर, नसनवि प्रकक्रया संनहता1द्वारा नसनवि ‍ यायािय को वादों के नवचारर् के निए प्रदाि की गई ककसी भी शनक् त का प्रयोग कर सकेगा ।

19. नियम बिाि ेकी शनक् त—2[(1)] राज् य सरकार, समय-समय पर, इस अनिनियम के अिीि कायणवानहयों का नवनियमि करिे के निए ऐसे नियम जो इससे संगत हैं, बिा सकेगी ।

ऐसे नियमों को, राजपत्र में प्रकानशत होिे पर, नवनि का बि प्राप् त होगा । 3 [(2) इस अनिनियम के अिीि राज् य सरकार द्वारा बिाया गया प्रत् येक नियम, बिाए जािे के पश् चात , यथाशीघ्र, राज् य नविाि-मंडि के समि रखा जाएगा ।]

शानस् तया

20. सचूिा, आकद दिे ेमें पाि ेवािे के असफि रहि ेपर शानस् त—यकद ककसी निनि का पािे वािा सूचिा दिेे में असफि रहगेा, अथवा या तो िारा 4 द्वारा अपेनित नििेप िहीं करेगा या प्रनतभूनत िहीं दगेा, अथवा ऐसी निनि को इस प्रकार पररवर्तणत करेगा या पररवर्तणत करिे का प्रयत् ि करेगा नजससे कक उसकी पहचाि निप जाए, तो ऐसी निनि का वह अंश या उसके बदिे में वह िि, नजसका वह अ‍ यथा हकदार होता, सरकार में निनहत हो जाएगा,

तथा वह मनजस् िेट के समि नसद्धदोि ठहराए जािे पर, कारावास से नजसकी अवनि एक विण तक की हो सकेगी, या जुमाणिे स,े या दोिों से, दनण् डत ककया जाएगा ।

21. िारा 20 के अिीि अपराि दषु् प्रेररत करि ेवािे स् वामी को शानस् त—यकद उस स् थाि का स् वामी, नजसमें कोई निनि पाई गई ह,ै भारतीय दण् ड संनहता (1860 का 45) के अथण में, िारा 20 के अिीि ककसी अपराि का दषु् प्रेरर् करेगा तो ऐसी निनि का वह अंश, या उसके बदिे में वह िि नजसका वह अ‍ यथा हकदार होता, सरकार में निनहत हो जाएगा,

तथा वह मनजस् िेट के समि नसद्धदोि ठहराए जािे पर, कारावास से नजसकी अवनि िह मास तक की हो सकेगी, या जुमाणिे से, या दोिों से, दनण् डत ककया जाएगा ।

अिुसूची—[संशोिि अनिनियम, 1891 (1891 का 12) द्वारा निरनसत ।]

______

1 अब नसनवि प्रकक्रया संनहता, 1 908 (1 908 का 5) देनखए ।

2 2 005 के अनिनियम सं० 4 की िारा 2 और अिुसूची द्वारा पुि:संख यांककत । 3 2005 के अनिनियम सं० 4 की िारा 2 और अिुसूची द्वारा अंत:स् थानपत ।

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