कमर्चारी पर्ितकर अिधिनयम, 1923
(1923 का अिधिनयम सखं्याकं 8)1
[5 माचर्, 1923]
िनयोजन के कितपय वगᲄ ᳇ारा अपन े2[कमर्चािरयᲂ] को दघुर्टना ᳇ारा हुई क्षित के िनिमᱫ पर्ितकर का सदंाय िकए जान े
का उपबधं करन ेके िलए
अिधिनयम
अतः यह समीचीन ह ैिक िनयोजकᲂ के कितपय वगᲄ ᳇ारा अपने3[कमर्चािरयᲂ] को दघुर्टना ᳇ारा हुई क्षित के िनिमᱫ पर्ितकर का संदाय िकए जाने का उपबंध िकया जाए;
अतः एत ्द᳇ारा िनम् निलिखत रूप से यह अिधिनयिमत िकया जाता हःै—
अध्याय 1
पर्ारिम्भक
1. सिंक्षप् त नाम, िवस्तार और पर्ारम्भ—(1) यह अिधिनयम4[कमर्चारी] पर्ितकर अिधिनयम, 1923 कहा जा सकेगा । 5 [(2) इसका िवस्तार 6 *** सम्पूणर् भारत पर ह ै।]
(3) यह 1924 की जुलाई के पर्थम िदन को पर्वृᱫ होगा ।
2. पिरभाषाएं—(1) इस अिधिनयम मᱶ, जब तक िक िवषय या संदभर् मᱶ कोई बात िवरु न हो,— 7* * * *
(ख) "आयुक् त" से धारा 20 के अधीन िनयुक् त कमर्कार पर्ितकर आयुक् त अिभपेर्त ह;ै (ग) "पर्ितकर" से इस अिधिनयम ᳇ारा यथा उपबंिधत पर्ितकर अिभपेर्त ह;ै 8[(घ) "आिशर्त" से मृत कमर्कार के िनम् निलिखत नातेदारᲂ मᱶ से कोई अिभपेर्त ह,ै अथार्त्:—
(i) िवधवा, अपर्ाप् तवय9[धमर्ज या दᱫक] पुतर्, और अिववािहता9[धमर्ज या दᱫक] पुतर्ी, या िवधवा माता; तथा
(ii) पुतर् या पुतर्ी िजसने 18 वषर् की आयु पर्ाप् त कर ली ह ैऔर जो िशिथलांग ह,ै यिद वह कमर्कार की मृत्यु के समय उसके उपाजर्नᲂ पर पूणर्तः आिशर्त था या थी;
(iii) (क) िवधुर; (ख) माता-िपता िजसके अन्तगर्त िवधवा माता नहᱭ आती ह;ै (ग) अपर्ाप् तवय अधमर्ज पुतर्, अिववािहता अधमर्ज पुतर्ी, या यिद िववािहता ह ैऔर अपर्ाप् तवय ह ैया यिद िवधवा ह ैऔर अपर्ाप् तवय ह ैतो पुतर्ी चाह ेवह10[धमर्ज हो या अधमर्ज या दᱫक;] (घ) अपर्ाप् तवय भाई, या अिववािहता बहन, या िवधवा बहन यिद वह अपर्ाप् तवय ह;ै 1 इस अिधिनयम का गोवा, दमण और दीव पर 1962 के िविनयम सं० 12 की धारा 3 और अनुसूची ᳇ारा; दादरा और नागर हवेली पर 1963 के िविनयम सं० 6 की धारा 2 और अनुसूची 1 ᳇ारा तथा पांिडचेरी मᱶ 1963 के िविनयम सं० 7 की धारा 3 और अनुसूची 1 ᳇ारा तथा लक्कादीव, िमिनकोय और अमीनदीवी ᳇ीप पर 1965 के िविनयम सं० 8 की धारा 3 और अनुसूची ᳇ारा, िवस्तार िकया गया ह ै।
िशकु्ष अिधिनयम, 1961 (1961 का 52) के अधीन िशक्षुᲐ को लागू होने के संबंध मᱶ इस अिधिनयम को उस अिधिनयम की धारा 16 और अनुसूची ᳇ारा उपान्तिरत िकया गया ह ै।
2 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 2 ᳇ारा पर्ितस्थािपत ।
3 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 3 ᳇ारा पर्ितस्थािपत ।
4 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत ।
5 िविध अनुकूलन आदेश, 1950 ᳇ारा उपधारा (2) के स्थान पर पर्ितस्थािपत ।
6 1970 के अिधिनयम सं० 51 की धारा 2 और अनुसूची ᳇ारा (1-9-1971 से) "जम्मू-कश्मीर राज्य के िसवाय" शब्दᲂ का लोप िकया गया । 7 1959 के अिधिनयम सं० 8 की धारा 2 ᳇ारा (1-6-1959 से) खंड (क) का लोप िकया गया ।
8 1959 के अिधिनयम सं० 8 की धारा 2 ᳇ारा (1-6-1959 से) पूवर्वतᱮ खंड के स्थान पर पर्ितस्थािपत ।
1
2
(ङ) िवधवा पुतर्-वध;ु (च) पूवर्मृत पुतर् की अपर्ाप् तवय सतंान; (छ) पूवर्मृत पुतर्ी की अपर्ाप् तवय सतंान, यिद उस सतंान के माता-िपता मᱶ से कोई भी जीिवत नहᱭ ह;ै (ज) जहां1[कमर्चारी] के माता-िपता मᱶ से कोई भी जीिवत नहᱭ ह ैवहां िपतामह और िपतामही; यिद वह1[कमर्चारी] की मृत्यु के समय उसके उपाजर्नᲂ पर पूणर्तः या भागतः आिशर्त था या थी;] 2[स्पष् टीकरण—उपखंड (ii) और उपखंड (iii) की मद (च) और मद (छ) के पर्योजनᲂ के िलए, पुतर्, पुतर्ी या संतान के पर्ित िनदᱷशᲂ के अंतगर्त कर्मशः दᱫक पुतर्, पुतर्ी या संतान ह ै;]
3[(घघ) "कमर्चारी" से ऐसा कोई ᳞िक् त अिभपेर्त ह,ै जो—
(i) रेल अिधिनयम, 1989 (1989 का 24) की धारा 2 के खंड (34) मᱶ यथापिरभािषत ऐसा रेल कमर्चारी ह,ै जो िकसी रेल के िकसी पर्शासिनक िजला या उपखंड कायार्लय मᱶ स्थायी रूप से िनयोिजत नहᱭ ह ैऔर िकसी ऐसी हिैसयत मᱶ िनयोिजत नहᱭ ह,ै जो अनुसूची 2 मᱶ िविनिदष् ट ह;ै अथवा
(ii) (क) िकसी पोत का मास्टर, नािवक या कमᱮदल का अन्य सदस्य ह;ै (ख) िकसी वायुयान का केप्टन या कमᱮदल का अन्य सदस्य ह;ै (ग) िकसी मोटर यान के संबंध मᱶ डर्ाईवर, हले्पर, मैकिनक, क्लीनर के रूप मᱶ या िकसी अन्य हिैसयत मᱶ भतᱮ िकया गया ᳞िक् त ह;ै
(घ) ऐसा कोई ᳞िक् त ह ैजो िकसी कंपनी ᳇ारा िवदशे मᱶ काम करने के िलए भतᱮ िकया जाता ह,ै और जो भारत के बाहर िकसी ऐसी हिैसयत मᱶ जो अनुसचूी 2 मᱶ िविनिदष् ट ह ैिनयोिजत ह,ै और, यथािस्थित, ऐसा पोत, वायुयान या मोटर यान अथवा कंपनी भारत मᱶ रिजस्टर्ीकृत ह,ै अथवा
(iii) िकसी ऐसी हिैसयत मᱶ िनयोिजत ह,ै जो अनुसूची 2 मᱶ िविनिदष् ट ह,ै चाह ेिनयोजन की संिवदा इस अिधिनयम के पािरत िकए जाने से पहले या उसके पश् चात् की गई थी और चाह े ऐसी संिवदा अिभ᳞क् त या िवविक्षत हो, मौिखक या िलिखत मᱶ हो; िकतु इसमᱶ ऐसा कोई ᳞िक् त सिम्मिलत नहᱭ ह,ै जो संघ के सशस् तर् बलᲂ के सदस्य की हिैसयत मᱶ कायर् कर रहा ह ैऔर िकसी कमर्चारी के पर्ित िनदᱷश मᱶ, जो आहत हो गया हो, जहां कमर्चारी की मृत्यु हो गई ह,ै उसके आिशर्तᲂ या उनमᱶ से िकसी के पर्ित िनदᱷश सिम्मिलत ह;ै] (ङ) "िनयोजक" के अन्तगर्त कोई ᳞िक् त-िनकाय, चाह ेवह िनगिमत हो या नहᱭ, और िनयोजक का कोई पर्बंध अिभकतार् और मृत िनयोजक का िविधक पर्ितिनिध आता ह,ै और जब िक कमर्कार की सेवाएं उस ᳞िक् त ᳇ारा, िजसके साथ1[कमर्चारी] ने सेवा या िशक्षुता की कोई संिवदा की ह,ै अन् य व् यिक् त को अस्थायी तौर पर उधार द ेदी गई ह ᱹया भाड़ ेपर दी गई ह ᱹवहां "िनयोजक" से जब तक वह1[कमर्चारी] उसके िलए काम करता रहता ह,ै वह अन्य ᳞िक् त अिभपेर्त ह;ै
(च) "पर्बंध अिभकतार्" से कोई ऐसा ᳞िक् त अिभपेर्त ह ैजो िकसी अन्य ᳞िक् त का ᳞वसाय या कारबार चलाने के पर्योजन के िलए ऐसे अन्य ᳞िक् त के पर्ितिनिध के रूप मᱶ िनयुक् त ह ैया कायर् कर रहा ह,ै िकन्तु इसके अन्तगर्त िनयोजक4के अधीनस्थ ᳞िष् टक पर्बंधक नहᱭ आता;
5 [(चच) "अपर्ाप् तवय" से वह ᳞िक् त अिभपेर्त ह ैिजसने अᲶारह वषर् की आयु पर्ाप् त नहᱭ की ह;ै] (छ) "आंिशक िनःशक् तता" से जहां वह, िनःशक् तता अस्थायी पर्कार की ह ैवहां ऐसी िनःशक् तता अिभपर्ेत ह ैिजससे कमर्कार की उस िनयोजन मᱶ उपाजर्न सामथ्यर् कम हो जाती ह,ै िजसमᱶ वह उस दघुर्टना के समय िजसके पिरणामस्वरूप िनःशक् तता हुई, लगा हुआ था, और जहां िक िनःशक् तता स्थायी पर्कार की ह ैवहां ऐसी िनःशक् तता अिभपेर्त ह,ै िजससे हर ऐसे िनयोजन मᱶ उसकी उपाजर्न-सामथ्यर् कम हो जाती ह ैिजसे गर्हण करने के िलए वह उस समय समथर् थाः परन्तु6[अनुसूची 1 भाग 2 मᱶ] िविनिदष् ट हर क्षित के बारे मᱶ यह समझा जाएगा िक उसके पिरणामस्वरूप स्थायी आंिशक िनःशक् तता होती ह;ै
(ज) "िविहत" से इस अिधिनयम के अधीन बनाए गए िनयमᲂ ᳇ारा िविहत अिभपर्ेत ह;ै
2 1995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 2 ᳇ारा (15-9-1995 से) अंतःस्थािपत । 3 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 6 ᳇ारा अंतःस्थािपत ।
3
(झ) "अिहत िचिकत्सा ᳞वसायी" से अिभपेर्त ह ैिकसी1[ऐसे केन्दर्ीय अिधिनयम, पर्ान्तीय अिधिनयम या िकसी2[राज्य] के िवधान-मंडल के अिधिनयम] के अधीन, जो िचिकत्सा-᳞वसािययᲂ का रिजस्टर रखे जाने के िलए उपबंध करता ह,ै3*** रिजस्टर्ीकृत कोई ᳞िक् त, या िकसी ऐसे के्षतर् मᱶ, जहां ऐसा अिन्तम विणत कोई भी अिधिनयम पर्वृᱫ नहᱭ ह,ै कोई ऐसा ᳞िक् त, िजसके बारे मᱶ राज्य सरकार ने शासकीय राजपतर् मᱶ अिधसूचना ᳇ारा घोिषत िकया ह ैिक वह इस अिधिनयम के पर्योजनᲂ के िलए अिहत िचिकत्सा ᳞वसायी ह;ै 4 * * * *
(ट) "नािवक" से िकसी5*** 6[पोत] के कमᱮदल का कोई ᳞िक् त अिभपेर्त ह,ै िकन्तु इसके अन्तगर्त5***
(ठ) "पूणर् िनःशक् तता" से ऐसी िनःशक् तता अिभपेर्त ह,ै चाह ेवह अस्थायी पर्कार की हो या स्थायी पर्कार की, जो िकसी कमर्कार को ऐसे सब काम के िलए असमथर् कर दतेी ह,ै िजसे वह उस दघुर्टना के समय, िजसके पिरणामस्वरूप ऐसी िनःशक् तता हुई थी, करने मᱶ समथर् थाः
7 [परन्तु अनुसचूी 1 के भाग 1 मᱶ िविनिदष् ट हर क्षित के या उसके भाग 2 मᱶ िविनिदष् ट क्षितयᲂ के समुच् चय के बारे मᱶ वहां जहां उपाजर्न-सामथ्यर् की हािन का संकिलत पर्ितशत, जैसा उक् त भाग 2 मᱶ उन क्षितयᲂ के सामने िविनिदष् ट ह,ै सौ या उसके अिधक होता ह,ै यह समझा जाएगा, िक उसके पिरणामस्वरूप स्थायी पूणर् िनःशक् तता हुई ह;ै]
(ड) "मजदरूी" के अन्तगर्त, िकसी यातर्ा भᱫे से या िकसी यातर्ा सम्बन्धी के मूल्य से, या कमर्कार के िनयोजक ᳇ारा िकसी पᱶशन या भिवष्य-िनिध मᱶ िदए गए अिभदाय से, या कमर्कार के िनयोजन की पर्कृित के कारण उस पर हुए िकन्हᱭ िवशेष ᳞यᲂ को पूरा करने के िलए उसे दी गई िकसी रािश से िभन् न ऐसा िवशेषािधकार या फायदा आता ह,ै जो धन के रूप मᱶ पर्ाक्किलत िकया जा सकता ह;ै
8* * * * *
(2) िकसी स्थानीय पर्ािधकारी की या9[सरकार की ओर से] कायर् करने वाल ेिकसी िवभाग की शिक् तयᲂ और कतर्᳞ᲂ के पर्योग और पालन के बारे मᱶ, जब तक िक पर्ितकूल आशय पर्तीत न होता हो, इस अिधिनयम के पर्योजनᲂ के िलए यह समझा जाएगा िक वह ऐसे पर्ािधकारी या िवभाग का ᳞वसाय या कारबार ह ै।
10 [(3) केन्दर्ीय सरकार या राज्य सरकार ऐसा करने के अपने आशय की कम से कम तीन मास की सूचना, राजपतर् मᱶ अिधसूचना ᳇ारा, दनेे के पश् चात्, िकसी ऐसी उपजीिवका मᱶ िनयोिजत ᳞िक् तयᲂ के िकसी वगर् को, िजसके बारे मᱶ उसका समाधान हो गया ह ै िक वह पिरसंकटमय उपजीिवका ह,ै वैसी ही अिधसूचना ᳇ारा, अनुसूची 2 मᱶ जोड़ सकेगी और तदपुिर इस अिधिनयम के उपबंध, केन्दर्ीय सरकार ᳇ारा अिधसूचना की दशा मᱶ, उन राज्यक्षेतर्ᲂ के भीतर िजन पर इस अिधिनयम का िवस्तार ह,ै या राज्य सरकार ᳇ारा िकसी अिधसूचना की दशा मᱶ, ᳞िक् तयᲂ के ऐसे वगᲄ को राज्य के भीतर, लागू हᲂगेः
परन्तु ऐसे जोड़ते समय, यथािस्थित, केन्दर्ीय सरकार या राज्य सरकार िनदशे द े सकेगी िक इस अिधिनयम के उपबंध ᳞िक् तयᲂ के ऐसे वगᲄ को केवल िविनिदष् ट क्षितयᲂ के बारे मᱶ ही लागू हᲂगे ।]
अध्याय 2
11 [कमर्चािरयᲂ] के िलए पर्ितकर
3. पर्ितकर के िलए िनयोजक का दाियत्व—(1) यिद12[कमर्चारी] को अपने िनयोजन से और उनके अनकुर्म मᱶ उद्भूत दघुर्टना ᳇ारा वैयिक् तक क्षित कािरत होती ह ैतो उसका िनयोजक इस अध्याय के उपबन्धᲂ के अनुसार पर्ितकर का दनेदार होगाः परन्तु िनयोजक—
(क) िकसी ऐसी क्षित के बारे मᱶ िजसके पिरणामस्वरूप कमर्कार को13[तीन] िदन से अिधक की कालाविध के िलए पूणर् या आंिशक िनःशक् तता नहᱭ रहती;
1 िविध अनुकूलन आदशे, 1950 ᳇ारा "केन्दर्ीय िवधान-मंडल के या भारत के िकसी पर्ान्त मᱶ िकसी िवधान-मंडल के अिधिनयम" शब्दᲂ के स् थान पर पर्ितस्थािपत । 2 िविध अनुकूलन (सं० 3) आदशे, 1956 ᳇ारा "भाग क या भाग ख राज्य" के स्थान पर पर्ितस्थािपत ।
3 1959 के अिधिनयम सं० 8 की धारा 2 ᳇ारा (1-6-1959 से) िचिकत्सा अिधिनयम, 1858 के अधीन या इसे सशंोधन करने वाला कोई अिधिनयम, या" शब्दᲂ का लोप िकया गया ।
4 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 2 ᳇ारा खंड (ञ) का लोप िकया गया ।
4
(ख) दघुर्टना1[᳇ारा हुई िकसी क्षित के बारे मᱶ, िजसके पिरणामस्वरूप मृत्यु2[या स्थायी पूणर् िनःशक् तता] नहᱭ हुई ह]ै, और जो पर्त्यक्षतः इस कारण से हुई मानी जा सकती ह ैिक—
(i) उसके होने के समय3[कमर्चारी] पर मिदरा या औषिधयᲂ का असर था, अथवा (ii)3[कमर्चारी] का के्षम सुिनिश् चत करने के पर्योजन के िलए अिभ᳞क् त रूप से िदए गए िकसी आदशे या अिभ᳞क् त रूप से बनाए गए िकसी िनयम की अवज्ञा3[कमर्चारी] ᳇ारा जान-बूझकर की गई थी, अथवा
(iii) कोई ऐसा रक्षोपाय या अन्य युिक् त, िजसके बारे मᱶ वह जानता था िक वह3[कमर्चारी] का के्षम सुिनिश् चत करने के पर्योजन के िलए उपबिन्धत की गई ह,ै3[कमर्चारी] ᳇ारा जानबूझकर हटाई गई थी या उसकी अवहलेना की गई थी,4***
5 * * * *
इस पर्कार दनेदार नहᱭ होगा ।
6 [(2) यिद अनुसचूी 3 के भाग क मᱶ िविनिदष् ट िकसी िनयोजन मᱶ िनयोिजत 3 [कमर्चारी] को कोई ऐसा रोग लग जाता ह ैजो उस िनयोजन मᱶ िविशष् टतः होने वाले उपजीिवकाजन्य रोग के रूप मᱶ उस भाग मᱶ िविनिदष् ट ह,ै या िजस िनयोजक की सेवा मᱶ
(क) िकसी3[कमर्चारी] को अनुसचूी 3 के भाग ग मᱶ िविनिदष् ट िकसी िनयोजन मᱶ एक या अिधक िनयोजकᲂ की सेवा मᱶ रहने के समय कोई ऐसा रोग, जो उस िनयोजन मᱶ िविशष् टतः होने वाले उपजीिवकाजन्य रोग के रूप मᱶ उस भाग मᱶ िविनिदष् ट ह,ै ऐसी िनरन्तर कालाविध के दौरान लग गया ह ैजो उस िनयोजन के िलए इस उपधारा के अधीन िविनिदष् ट कालाविध से कम ह,ै तथा
(ख) वह रोग उस िनयोजन से और उसके अनुकर्म मᱶ उद्भूत हुआ ह,ै
तो ऐसे रोग के लगने के बारे मᱶ यह समझा जाएगा िक वह इस धारा के अथर् के अन्दर दघुर्टना ᳇ारा हुई क्षित हःै परन्तु यह भी िक यिद यह सािबत हो जाता ह ै िक कोई3[कमर्चारी], िजसने अनुसचूी 3 के भाग ख मᱶ िविनिदष् ट िकसी िनयोजन मᱶ िकसी िनयोजक के अधीन या उस अनसुूची के भाग ग मᱶ िविनिदष् ट िकसी िनयोजन मᱶ एक या अिधक िनयोजकᲂ के अधीन, उस िनयोजन के िलए इस उपधारा के अधीन िविनिदष् ट िनरन्तर कालाविध के िलए सेवा की ह ैऔर उसे ऐसी सेवा की समािप् त के पश् चात् कोई ऐसा रोग लग गया ह ैजो उस िनयोजन मᱶ िविशष् टतः होने वाल ेउपजीिवकाजन्य रोग के रूप मᱶ, यथािस्थित, उक् त भाग ख या उक् त भाग ग मᱶ िविनिदष् ट ह ैऔर यह िक ऐसा रोग उस िनयोजन से उद्भूत हुआ था तो उस रोग के लगने के बारे मᱶ यह समझा जाएगा िक वह इस धारा के अथर् के अन्दर दघुर्टना ᳇ारा हुई क्षित ह ै।]
8 [(2क) यिद अनसुूची 3 के भाग ग मᱶ िविनिदष् ट िकसी िनयोजन मᱶ िनयोिजत िकसी 3 [कमर्चारी] को उस िनयोजन मᱶ िविशष् टतः होने वाला कोई ऐसा उपजीिवकाजन्य रोग लग जाता ह,ै िजसके लगने के बारे मᱶ यह समझा जाता ह ैिक वह इस धारा के अथर् के अन्दर दघुर्टना ᳇ारा हुई क्षित ह ैऔर ऐसा िनयोजन एक से अिधक िनयोजकᲂ के अधीन था तो, ऐसे सब िनयोजक पर्ितकर का ऐसे अनुपात मᱶ सदंाय करने के दायी हᲂगे जैसा आयुक् त उन पिरिस्थितयᲂ मᱶ न्यायसंगत समझे ।] (3)9[केन्दर्ीय सरकार या राज्य सरकार] िकसी भी वणर्न के िनयोजन को, ऐसा करने के अपने आशय की कम से कम तीन मास की सूचना, शासकीय राजपतर् मᱶ अिधसूचना ᳇ारा, दनेे के पश् चात् अनुसचूी 3 मᱶ िविनिदष् ट िनयोजनᲂ मᱶ वैसी ही अिधसूचना ᳇ारा, 1 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 3 ᳇ारा "से होने वाली िकसी कमर्कार को क्षित" के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 2 1995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 3 ᳇ारा (15-9-1995 से) अंतःस्थािपत ।
5
जोड़ सकेगी और इस पर्कार जोड़ ेगए िनयोजनᲂ के बारे मᱶ उन रोगᲂ को िविनिदष् ट करेगी, िजनके बारे मᱶ इस धारा के पर्योजनᲂ के िलए समझा जाएगा िक वे कर्मशः उन िनयोजनᲂ मᱶ िविशष् टतः होने वाले उपजीिवकाजन्य रोग ह ᱹऔर तदपुिर उपधारा (2) के उपबन्ध, 1 [केन्दर्ीय सरकार ᳇ारा अिधसूचना की दशा मᱶ, उन राज्यक्षेतर्ᲂ के भीतर िजन पर इस अिधिनयम का िवस्तार ह,ै या राज्य सरकार ᳇ारा अिधसूचना की दशा मᱶ, राज्य के भीतर]2*** ऐसे लागू हᲂगे मानो इस अिधिनयम ᳇ारा यह घोिषत िकया गया था िक वे रोग उन िनयोजनᲂ मᱶ िविशष् टतः होने वाल ेउपजीिवकाजन्य रोग ह ᱹ।]
(4) उपधाराᲐ3[(2), (2क)] और (3) ᳇ारा यथा उपबिन्धत के िसवाय िकसी रोग के िलए कोई भी पर्ितकर4[कमर्चारी] को तब तक संदये न होगा जब तक िक रोग उसके िनयोजन से और उसके अनुकर्म मᱶ उद्भूत दघुर्टना ᳇ारा हुई िकसी िविनिदष् ट क्षित के कारण से5*** पर्त्यक्षतः हुआ नहᱭ माना जा सकता ।
(5) यिद4[कमर्चारी] ने िनयोजक या िकसी अन्य ᳞िक् त के िवरु िकसी िसिवल न्यायालय मᱶ िकसी क्षित के िलए नकुसानी का कोई वाद संिस्थत कर िदया ह ैतो इसमᱶ की िकसी भी बात के बारे मᱶ यह न समझा जाएगा िक वह4[कमर्चारी] को उस क्षित के िलए पर्ितकर पाने का कोई अिधकार पर्दान करती ह,ै और िकसी क्षित के िलए4[कमर्चारी] ᳇ारा िकसी िविध-न्यायालय मᱶ नुकसानी के िलए कोई भी वाद न चल सकेगा,—
(क) यिद उसने उस क्षित के बारे मᱶ पर्ितकर का कोई दावा आयुक् त के समक्ष संिस्थत कर िदया ह,ै अथवा (ख) यिद उस क्षित के िलए पर्ितकर के संदाय का उपबन्ध करने वाला कोई करार4[कमर्चारी] और उसके िनयोजन के बीच इस अिधिनयम के उपबन्ध के अनुसार हो चुका ह ै।
6 [4. पर्ितकर की रकम—(1) इस अिधिनयम के उपबंधᲂ के अध्यधीन यह ह ै िक पर्ितकर की रकम िनम् निलिखत होगी, अथार्त्:—
(क) जहां िक क्षित के पिरणामस्वरूप मृत्यु हो
जाती ह ै
मृत4[कमर्चारी] की मािसक मजदरूी को सुसंगत गुणक से गुणा
करके पर्ाप् त रकम से7[पचास पर्ितशत] के बराबर रकम; या
8[एक लाख बीस हजार] की रकम, इनमᱶ से जो भी अिधक हो;
(ख) जहां िक क्षित के पिरणामस्वरूप स्थायी मतृ4[कमर्चारी] की मािसक मजदरूी को सुसंगत गुणक से गुणा भी
10 [परंतु केन्दर्ीय सरकार, राजपतर् मᱶ अिधसूचना ᳇ य पर, खंड (क) और खंड (ख) मᱶ उिल्लिखत पर्ितकर क
खंड (ख) के पर्योजनᲂ के िलए, िकसी4[कमर्चारी] के संबंध मᱶ, "सुसंगत गुणक" से अनुसचूी
* * * *
जहां िक क्षित के पिरणामस्वरूप स्थायी (i) ऐसी क्ष की दशा मᱶ, जो अनुसूच ाग 2 िविनिद ह,ै
पूणर् िनःशक् तता हो जाती ह ै। करके पर्ाप् त रकम के9[साठ पर्ितशत] के बराबर रकम; या 8 [एक लाख चालीस हजार रुपए] की रकम, इनमᱶ से जो
अिधक हो :
ारा, समय-सम
ी रकम मᱶ वृि कर सकेगी ।]
स्पष् टीकरण 1—खंड (क) और
4 के पहले स्तंभ मᱶ की पर्िवष् ट के सामने उस अनसुूची के दसूरे स्तंभ मᱶ िविनिदष् ट गुणक अिभपेर्त ह,ै जो वषᲄ की उस संख्या को िविनिदष् ट करता ह,ै जो4[कमर्चारी] के, पर्ितकर दये होने की तारीख के ठीक पूवर्वतᱮ, अंितम जन्म िदवस को पूणर् हुए वषᲄ की संख्या के बराबर ह ै।
11 *
(ग) ित ी 1 के भ मᱶ ष् ट
आंिशक िनःशक् तता हो जाती ह ै ह,ै उस पर्ितकर का, जो स्थायी पूणर् िनःशक् तता की दशा मᱶ संदये होता, ऐसा पर्ितशत, जो उस क्षित ᳇ारा कािरत उपाजर्न-सामथ्यर्
की हािन के पर्ितशत के रूप मᱶ उस भाग मᱶ िविनिदष् ट ह,ै तथा
(ii) ऐसी क्षित की दशा मᱶ, जो अनुसचूी 1 मᱶ िविनिदष् ट नहᱭ 1 1995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 3 ᳇ारा (15-9-1995 से) अंतःस्थािपत । 2 1970 के अिधिनयम सं० 51 की धारा 2 और अनुसूची ᳇ारा (1-9-1971 से) कितपय शब्दᲂ का लोप िकया गया । 3 1959 के अिधिनयम सं० 8 की धारा 3 ᳇ारा (1-6-1959 से) "उपधारा (2)" के स्थान पर पर्ितस्थािपत ।
5 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 3 ᳇ारा "पूणर्तः और" शब्दᲂ का लोप िकया गया । 6 1984 के अिधिनयम सं० 22 की धारा 3 ᳇ारा (1-7-1984 से) धारा 4 के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 7 1995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 4 ᳇ारा (15-9-1995 से) "चालीस पर्ितशत" के स् थान पर पर्ितस् थािपत 8 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 7 ᳇ारा पर्ितस्थािपत ।
9 1995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 4 ᳇ारा (15-9-1995 से) "पचास पर्ितशत" के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 10 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 7 ᳇ारा अंतःस्थािपत ।
11 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 7 ᳇ारा लोप िकया गया ।
6
उस पर्ितकर का, जो स् थायी पूणर् िनःशक् तता की दशा मᱶ संदये होता, ऐसा पर्ितशत, जो उस क्षित ᳇ारा स्थायी रूप से कािरत उपाजर्न-सामथ्यर् की (जैसे अिहत िचिकत्सा ᳞वसायी ᳇ारा िनधार्िरत िकया जाए) हािन का आनुपाितक हो । स ेअिधक क्षितयां होती ह,ᱹ वहां इस शीषर्क के अधीनस्पष् टीकरण 1—जहां िक एक ही दघुर्टना से हक संदये पर्ितकर की रकम
र्न-सामथ्यर् का िनधार्रण करने मᱶ, अिहत िचिकत्सा
᳞वसायी
(घ) जहां िक क्षित के पिरणामस्वरूप, चाह े
र् चाह े
1 [कमर्चारी] की मािसक मजदरूी के पच्चीस पर्ितशत के समतुल्य
2 [(1क) उपधारा (1) मᱶ िकसी बात के होते हुए भी, आयुक् त हुई िकसी दघुर्टना के सबंंध मᱶ िकसी 1 [कमर्चारी] को संदये
धारा (1) के पर्योजनᲂ के िलए िकसी कमर्चारी के संबंध मᱶ ऐसी
मािसक म
य, जो उस दशा मᱶ,—
तता की तारीख से; अथवा
ी पर्तीक्षा
(क) िकसी ऐसी एकमुश्त रकम या अधर्-मािसक सदंायᲂ मᱶ से, िजनका1[कमर्चारी] हकदार ह,ै िकसी संदाय या भᱫे की वह र
क नहᱭ होगा, िजतनी से
घर्टना क
भᱫा, जो [कमर्चारी] ने िचिकत्सा लेखे िनयोजक से पर्ाप् त िकया ह,ै परन्तुक के खंड (क) के अथर् के अ
के ᳇ारा उपगत वास्तिवक िचिकत्सा ᳞य की
पर्ितपूित क
ख से पहले, िजसको कोई अधर्-मािसक संदाय शोध्य होता ह,ै िनःशक् तता के दरू हो जाने पर, उस अधर्-मास के िलए ऐसी
क, उपधारा (1) के अधीन पर्ितकर
के अितिर
ᱶ वृि कर सकेगी ।]
संकिलत कर ली जाएगी िकन्तु िकसी भी दशा मᱶ ऐसी नहᱭ होगी िक वह उस रकम से बढ़ जाए, जो उन क्षितयᲂ के पिरणामस्वरूप स्थायी पूणर् िनःशक् तता होने की दशा मᱶ संदये होती ।
स्पष् टीकरण 2—उपखंड (ii) के पर्योजनᲂ के िलए उपाज
, अनुसचूी 1 िविनिदष् ट िविभन् न क्षितयᲂ के संबंध मᱶ उपाजर्न-सामथ्यर् की हािन के पर्ितशत का सम्यक् ध्यान रखेगा; पूण आंिशक, अस्थायी िनःशक् तता हो जाती ह ै। रकम का अधर्-मािसक संदाय उपधारा (2) के उपबन्धᲂ के अनुसार िकया जाएगा ।
, भारत के बाहर
पर्ितकर की रकम िनयत करते समय उस दशे की िविध के अनुसार, िजसमᱶ दघुर्टना हुई थी, ऐसे1[कमर्चारी] को अिधिनणᱮत की गई पर्ितकर की रकम को, यिद कोई हो, ध्यान मᱶ रखेगा और अपने ᳇ारा िनयत की गई रकम मᱶ से उस दशे की िविध के अनुसार 1 [कमर्चारी] को अिधिनणᱮत की गई पर्ितकर की रकम को घटा दगेा;]
3 [(1ख) केन्दर्ीय सरकार, राजपतर् मᱶ अिधसूचना ᳇ारा, उप
जदरूी िविनिदष् ट कर सकेगी, जो वह आवश्यक समझे ।]
(2) उपधारा (1) के खंड (घ) मᱶ िनिदष् ट अधर्-मािसक संदा
(i) िजसमᱶ िक ऐसी िनःशक् तता अᲶाईस िदन या उससे अिधक रहती ह,ै िनःशक्
(ii) िजसमᱶ िक ऐसी िनःशक् तता अᲶाईस िदन स ेकम रहती ह,ै िनःशक् तता की तारीख से तीन िदन क कालाविध के अवसान के पश् चात् सौलहवᱶ िदन को और तत्पश् चात् िनःशक् तता के दौरान या पांच वषर् की कालाविध के दौरान इनसे से जो भी कालाविध लघतुर हो, आधे-आधे मास पर संदये होगाः
परन्तु—
कम काट ली जाएगी, जो1[कमर्चारी] ने, यथािस्थित, ऐसी एकमुश्त रकम की या पर्थम अधर्-मािसक संदाय की पर्ािप् त से पूवर्, िनःशक् तता की कालाविध के दौरान पर्ितकर के रूप मᱶ िनयोजक से पर्ाप् त की ह;ै तथा (ख) कोई भी अधर्-मािसक संदाय िकसी भी दशा मᱶ इतनी रकम से, यिद कोई हो, अिध दु े पहले1[कमर्चारी] की मािसक मजदरूी की आधी रकम उस मजदरूी की आधी रकम स ेअिधक ह,ै िजसे वह दघुर्टना के पश् चात् उपािजत कर रहा ह ै।
स्पष् टीकरण—ऐसा कोई संदाय या 1
न्दर पर्ितकर के रूप मᱶ उसके ᳇ारा पर्ाप् त संदाय या भᱫा नहᱭ समझा जाएगा । 3 [(2क) कमर्चारी को िनयोजन के दौरान कािरत क्षितयᲂ के उपचार के िलए उस ी जाएगी ।]
(3) उस तारी रािश संदये होगी जो उस अधर्-मास मᱶ िनःशक् तता की अिस्तत्वाविध की आनुपाितक हो ।
) अंतःस्थािपत ।21995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 4 ᳇ारा (15-9-1995 से 3 2009 के अिधिनयम स०ं 45 की धारा 7 ᳇ारा अंतःस्थािपत । 4 2009 के अिधिनयम स०ं 45 की धारा 7 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 5 2009 के अिधिनयम स०ं 45 की धारा 7 ᳇ारा अंतःस्थािपत ।
7
1 [4क. शोध्य हो जान ेपर पर्ितकर का िदया जाना और ᳞ितकर्म के िलए शािस् त—(1) धारा 4 के अधीन पर्ितकर शोध्य होते ही द ेिदया जाएगा ।
ितगृहीत करता ह ैउस पर आधृत अनिन्तम संदाय करने के िलए वह आब होगा और ऐसा संदाय, कोई अितिरक् त दावा कर
ी अिधकतम दरᲂ से अनिधक ऐसी उच् चतर दर से, जो केन्दर्ीय सरकार ᳇ारा, राजपतर् मᱶ अिधसूचन
श का शािस्त के रूप मᱶ संदाय
करेगाः
िदए िबना पािरत नहᱭ िकया जाएगा िक उसे क्यᲂ न पािरत िकया जाए ।
मजदरूी" पद से इस अिधिनयम मᱶ और इसके पर्योजनᲂ के िलए
एक मास ध
के िहसाब
वां भाग
होगी, जो
मजदरूी वह औसत
मािसक र
रना सम्भव नहᱭ ह)ै] मािसक मजदरूी उस िनयोजक से, जो पर्ितकर का दनेदार
ह,ै दघुर्टन
ुपिस्थित-कालाविध के िलए िवच्छेद
नहᱭ हुआ ह,ै12[इस
(2) िजन दशाᲐ मᱶ िनयोजक पर्ितकर के िलए दाियत्व दावाकृत िवस्तार तक पर्ितगृहीत नहᱭ करता उनमᱶ िजस पर्कार िवस्तार तक का दाियत्व वह पर्
ने के सम्बन्ध मᱶ2[कमर्चारी] के अिधकार पर पर्ितकूल पर्भाव डाले िबना, यथािस्थित, आयुक् त के पास िनिक्षप् त कर िदया जाएगा या3[कमर्चारी] को द ेिदया जाएगा ।]
(क) यह िनदशे दगेा िक िनयोजक, बकाया रकम के अितिरक् त, उस पर बारह पर्ितशत पर्ितवषर् की दर से या िकसी अनुसूिचत बᱹक की उधार दनेे क
ा ᳇ारा, ऐसी शोध्य रकम पर िविनिदष् ट की जाए, साधारण ब्याज का संदाय करेगा;
(ख) यिद उसकी यह राय ह ैिक िवलम्ब के िलए कोई न्यायोिचत्य नहᱭ ह ैतो, यह िनदशे दगेा िक िनयोजक, बकाया रकम और उस पर ब्याज के अितिरक् त ऐसी रकम के पचास पर्ितशत से अनिधक अितिरक् त राि परन्तु शािस्त के संदाय के िलए कोई आदशे, खंड (ख) के अधीन िनयोजक को यह हतेुक दिशत करने का युिक् तयुक् त अवसर स्पष् टीकरण—इस उपधारा के पर्योजनᲂ के िलए, "अनुसूिचत बᱹक" से ऐसा बᱹक अिभपेर्त ह ैजो तत्समय भारतीय िरजवर् बᱹक अिधिनयम, 1934 (1934 का 2) की ि᳇तीय अनुसचूी मᱶ सिम्मिलत ह ᱹ।
4 [(3क) उपधारा (3) के अधीन संदये ब्याज और शािस्त, यथािस्थित, 3 [कमर्चारी] या उसके आिशर्त को संदᱫ की जाएगी ।] [5. मजदरूी का िहसाब करने की पित—5***6["मािसक
की सेवा के िलए संदये समझी जाने वाली मजदरूी की रकम (चाह ेवह मजदरूी मास के िहसाब से या िकसी भी अन्य कालावि से या मातर्ानुपाती दरᲂ से संदये हो) अिभपेर्त ह,ै और िजसका िहसाब िनम् निलिखत रूप मᱶ िकया जाएगा], अथार्त्— (क) जहां िक3[कमर्चारी] उस िनयोजक की, जो पर्ितकर का दनेदार ह,ै सेवा मᱶ दघुर्टना से ठीक पहले के बाहर मास से अन्यून की िनरन्तर कालाविध के दौरान रहा ह,ै वहां3[कमर्चारी] की मािसक मजदरूी उस कुल मजदरूी का बारह उस कालाविध के अिन्तम बारह मासᲂ मᱶ िनयोजक ᳇ारा उसे संदाय के िलए शोध्य हो गई ह;ै 7 [(ख) जहां िक दघुर्टना से ठीक पहले की उस सवेा की सम्पूणर् िनरन्तर कालाविध, िजसके दौरान 3 [कमर्चारी] उस िनयोजक की सेवा मᱶ था, जो पर्ितकर का दनेदार ह,ै एक मास से कम थी वहां,3[कमर्चारी] की मािसक कम8*** होगी िजसे उसी िनयोजक ᳇ारा उसी काम मᱶ िनयोिजत कोई3[कमर्चारी], या यिद कोई3[कमर्चारी] इस पर्कार िनयोिजत नहᱭ था, तो उसी पिरक्षेतर् मᱶ िकसी वैसे ही काम मᱶ िनयोिजत कोई3[कमर्चारी] दघुर्टना से ठीक पहले के बारह मास के दौरान उपािजत कर रहा था;]
9 [(ग)] 10 [अन्य दशाᲐ मᱶ (िजनके अन्तगर्त वे दशाएं आती ह,ᱹ िजनमᱶ िक आवश्यक जानकारी के अभाव मᱶ खण्ड (ख) के अधीन मािसक मजदरूी का िहसाब क
ा से ठीक पहले की सेवा की अिन्तम िनरन्तर कालाविध के िलए उपािजत कुल मजदरूी को ऐसी कालाविध मᱶ समािवष् ट िदनᲂ की संख्या से िवभािजत करने पर पर्ाप् त भजनफल की तीस गुनी होगी । 11 * * * *
स्पष् टीकरण—सेवा की ऐसी कालाविध, िजसमᱶ काम पर से चौदह िदन से अिधक की अन
1 [धारा]] के पर्योजनᲂ के िलए िनरन्तर कालाविध समझी जाएगी ।
ंतःस्थािपत ।
) "उपधारा (3)" के स्थान पर पर्ितस्थािपत ।
ारा (1) के रूप मᱶ पुनःसंख्यांिकत िकया गया और 1938 के अिधिनयम सं० 9 की धारा 4 ᳇ारा ा (30-6-1934 से) "इस अिधिनयम के पर्योजन के िलए कमर्कार की मािसक मजदरूी की गणना की जाएगी" के स्थान पर
"समझी जाएगी" शब्दᲂ का लोप िकया गया । ािपत ।
1 1959 के अिधिनयम सं० 8 की धारा 5 ᳇ारा (1-6-1959 से) अ 2 2009 के अिधिनयम स०ं 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत ।
"(1)" कोष् ठकᲂ और अकं का लोप िकया गया । 6 1939 के अिधिनयम सं० 13 की धारा 2 ᳇ार पर्ितस्थािपत । मोटे अक्षरᲂ मᱶ शब्द 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 5 ᳇ारा "धारा 4" के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 7 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 5 ᳇ारा अंतःस्थािपत ।
8 1939 के अिधिनयम सं० 13 की धारा 2 ᳇ारा (30-6-1934 से)
9 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 5 ᳇ारा मूल खण्ड (ख) को (ग) के रूप मᱶ पुनः अक्षरािंकत िकया गया । 10 1959 के अिधिनयम सं० 8 की धारा 6 ᳇ारा (1-6-1959 से) "अन्य दशाᲐ मᱶ" के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 11 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 5 ᳇ारा परन्तुक का लोप िकया गया ।
12 1929 के अिधिनयम सं० 5 की धारा 3 ᳇ारा "इस धारा" के स्थान पर पर्ितस्थ
8
2 * * * *
6. पनुिवलोकन—(1) पक्षकारᲂ की बीच हुए िकसी करार के अधीन के या आयुक् त के आदशे के अधीन के ऐसे अधर्मािसक संदाय का
साथ अिह
पाया जाए िक दघुर्टना के
पिरणामस्
मᱶ से
िकसी के ᳇
ता के अधीन ᳞िक् त को पर्ितकर के रूप मᱶ एकमुश्त रािश का कोई भी संदाय
आयुक् त क
र उतनी रकम], िजतनी उस आिशर्त को संदये पर्ितकर से अिधक न हो, ऐसे पर्ितकर मᱶ से आयुक् त ᳇
री] के बारे मᱶ पर्ितकर के रूप मᱶ] उपधारा (1) के अधीन िकसी धन के िनक्षेप पर,8*** यिद वह आवश् नयत करे, अपने समक्ष
उपसंजात
कर िदया जाएगा या आयुक् त
के स्विवव
ैस् तर्ी या िविधक िनयᲃग्यता के अधीन ᳞िक् त नहᱭ ह,ै दगेा और अन्य दशा
े या ऐसे ᳞िक् त की िनयᲃग्यता के दौरान उस ᳞िक् त के फायद ेके िलए ऐसी रीित से, जैसी आयुक् त ᳇ारा िनिदष् ट क
पुनिवलोकन, जो इस अिधिनयम के अधीन संदये ह,ै आयुक् त ᳇ारा, या तो िनयोजक के या3[कमर्चारी] के आवेदन पर, िजसके त िचिकत्सा-᳞वसायी का यह पर्माणपतर् होगा िक4[कमर्चारी] की दशा मᱶ तब्दीली हो गई ह,ै या इस अिधिनयम के अधीन बनाए गए िनयमᲂ के अध्यधीन रहते हुए, ऐसे पर्माणपतर् के िबना िकए गए आवेदन पर िकया जा सकेगा ।
(2) कोई भी अधर्मािसक संदाय इस धारा के अधीन पुनिवलोकन पर, इस अिधिनयम के उपबन्धᲂ के अध्यधीन रहते हुए, चालू रखा जा सकेगा, बढ़ाया जा सकेगा, घटाया जा सकेगा या समाप् त िकया जा सकेगा, या यिद यह वरूप स्थायी िनःशक् तता हो गई ह ै तो, उसे ऐसी एकमुश्त रािश मᱶ सपंिरवितत िकया जा सकेगा । िजसका4[कमर्चारी] हकदार ह,ै िकन्तु उस रािश मᱶ से ऐसी रकम कम कर दी जाएगी जो उसे अधर्मािसक सदंायᲂ के रूप मᱶ पहले ही पर्ाप् त हो चुकी ह ै।
7. अधर्मािसक सदंायᲂ का सरंाशीकरण—अधर्मािसक संदाय पर्ाप् त करने के िकसी अिधकार का मोचन, पक्षकारᲂ के बीच के करार ᳇ारा, या यिद पक्षकारᲂ मᱶ करार नहᱭ हो पाता और संदाय कम से कम छह मास तक िकए जाते रह ेह ᱹतो दोनᲂ पक्षकारᲂ ारा आयुक् त को िकए गए आवेदन पर, ऐसी एकमुश्त रकम के संदाय ᳇ारा िकया जा सकेगा, जो, यथािस्थित, पक्षकारᲂ ᳇ारा करार पाई जाए या आयुक् त ᳇ारा अवधािरत की जाए ।
8. पर्ितकर का िवतरण—4[(1) िकसी ऐसे4[कमर्चारी] के बारे मᱶ, िजसकी मृत्यु क्षित के पिरणामस्वरूप हो गई ह,ै पर्ितकर का कोई भी संदाय और िकसी स् तर्ी को या िविधक िनयᲃग्य
े पास िनक्षेप करने से अन्यथा नहᱭ िकया जाएगा, और सीधे िनयोजक ᳇ारा कर िदए गए िकसी ऐसे संदाय के बारे मᱶ यह न समझा जाएगा िक वह पर्ितकर का संदाय हःै
5 [परन्तु मृत 4 [कमर्चारी] की दशा मᱶ िनयोजक िकसी भी आिशर्त को 6 [ऐसे 4 [कमर्चारी] की तीन मास की मजदरूी के बराबर रकम का अिभदाय पर्ितकर म ेकर सकेगा औ
ारा काट ली जाएगी और िनयोजक को पर्ितसंदᱫ कर दी जाएगी ।]
(2) दस रुपए से अन्यून कोई अन्य ऐसी रािश, जो पर्ितकर के रूप मᱶ संदये ह,ै उस ᳞िक् त के िनिमᱫ, जो उसका हकदार ह,ै आयुक् त के पास िनिक्षप् त की जा सकेगी ।
(3) आयुक् त के पास िनिक्षप् त िकसी पर्ितकर के सम्बन्ध मᱶ आयुक् त की रसीद पयार्प् त उन्मोचन होगी ।
(4) आयुक् त7[िकसी मृत4[कमर्चा यक समझे तो आिशर्तᲂ को ऐसी तारीख को, िजसे वह पर्ितकर का िवतरण अवधािरत करने के िलए ि होने के िलए अपेिक्षत करने वाली सूचना का पर्काशन या हर एक आिशर्त पर उसकी तामील ऐसी रीित से कराएगा जैसी वह उिचत समझे । यिद आयुक् त का समाधान िकसी ऐसी जांच के पश् चात्, िजसे वह आवश्यक समझ ेहो जाता ह ै िक कोई भी आिशर्त िव᳒मान नहᱭ ह ैतो वह उस धन का अितशेष उस िनयोजक को, िजसके ᳇ारा वह संदᱫ िकया गया था, पर्ितसंदᱫ कर दगेा । आयुक् त िकए गए सभी संिवतरणᲂ को िवस्तारप्ूवर्क दिशत करते हुए एक िववरण िनयोजक के आवेदन पर दगेा । 9 [(5) िकसी मृत 4 [कमर्चारी] के बारे मᱶ िनिक्षप् त पर्ितकर, उपधारा (4) के अधीन की गई िकसी कटौती के अध्यधीन रहते हुए, मृत4[कमर्चारी] के आिशर्तᲂ मᱶ या उनमᱶ से िकन्हᱭ मᱶ ऐसे अनुपात मᱶ, िजसे आयुक् त ठीक समझे, पर्भािजत ेकानुसार िकसी एक आिशर्त को आबंिटत िकया जा सकेगा ।
(6) जहां िक आयुक् त के पास िनिक्षप् त िकया गया कोई पर्ितकर िकसी ᳞िक् त संदये ह ैवहां आयुक् त वह धन उसके हकदार ᳞िक् त को उस दशा मᱶ िजसमᱶ िक वह ᳞िक् त िजससे पर्ितकर संदये ह
Ა मᱶ द ेसकेगा ।
(7) जहां िक आयुक् त के पास िनिक्षप् त कोई एकमुश्त रािश िकसी स् तर्ी या िविधक िनयᲃग्यता के अधीन ᳞िक् त को संदये ह ै वहां, ऐसी रािश उस स् तर्ी क
ी जाए, िविनिहत की जा सकेगी, उपयोिजत की जा सकेगी या अन्यथा बरती जा सकेगी, और जहां िक िविधक िनयᲃग्यता के अधीन ᳞िक् त को कोई अधर्मािसक संदाय संदये ह ैवहां, आयुक् त स्वपेर्रणा से या इस िनिमᱫ अपने को िकए गए िकसी आवेदन पर, यह 1 1938 के अिधिनयम सं० 9 की धारा 4 ᳇ारा "उपधारा" के स्थान पर पर्ितस्थािपत ।
2 1929 के अिधिनयम सं० 5 की धारा 3 ᳇ारा जोड़ी गई उपधारा (2) का 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 5 ᳇ारा लोप िकया गया । 3 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत ।
8 1995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 6 ᳇ारा (15-9-1995 से) कितपय शब्दᲂ का लोप िकया गया । 9 1929 के अिधिनयम सं० 5 की धारा 4 ᳇ारा मूल उपधारा (5) के स्थान पर पर्ितस्थािपत ।
9
आदशे द ेसकेगा िक संदाय उस िनयᲃग्यता के दौरान1[कमर्चारी] के िकसी आिशर्त को या िकसी अन्य ऐसे ᳞िक् त को, िजसे आयुक् त 1 [कमर्चारी] के कल्याणाथर् उपबन्ध करने के िलए सबसे अिधक उपयुक् त समझे, िकया जाए ।] 2 [(8)] जहां िक इस िनिमᱫ अपने को िकए गए िकसी आवेदन पर या अन्यथा आयुक् त का समाधान हो जाता ह ैिक पर्ितकर के प मᱶ दी गई िकसी रािश के िवतरण के सम्बन्ध मᱶ, या उस रीित के सम्बन्ध मᱶ, िजसमᱶरू ऐसे िकसी आिशर्त को संदये कोई रािश िविनिहत
का हतेुक दिशत करने के िलए अवसर न द ेिदया गया हो िक ऐसा आदशे क्यᲂ न िकया जाए, और न वह िकसी ऐसी दशा मᱶ िकया जा
या अन्य अनुिचत साधनᲂ ᳇ारा अिभपर्ाप् त िकया गया ह,ै वहां ऐसे ᳞िक् त को या उसके िनिमᱫ इस पर्कार दी गई कोई र
ी पर्कार समनुिदष् ट या भािरत िकए जाने के योग्य या कुक᳹
के दाियत्व
के पश् चात् यथासाध्य शीघर् उस रीित से, जो इसमᱶ पश् चात् उपबिन्धत की गई ह,ै न द ेदी गई हो और जब
जाएगा िक वह उन िदनᲂ मᱶ से पहले िदन को हुई थी, िजनके दौरान1[कमर्चारी] उस रोग ᳇ारा कािरत िनःशक् तत
णना उस िदन से की जाएगी िजसको1[कमर्चारी] िनःशक् तता
की सूचना
ए िनयोिजत िकए जा चकुने पर, इस पर्कार िनयोिजत नहᱭ रह जाता और उस िनयोजन मᱶ िविशष् टत
वा [कमर्चारी] की ऐसी दघुर्टना के पिरणामस्वरूप हुई मृत्यु के बारे मᱶ8[िकया] गया ह ैजो िनयोजन के प े स्थान मᱶ हुई थी, जहां1[कमर्चारी] दघुर्टना के समय िनयोजक या उसके ᳇ारा िनयोिजत िकसी ᳞िक् त के िनयंतर्ण
की जानी, उपयोिजत की जानी या अन्यथा बरती जानी ह,ै आयुक् त के आदशे मᱶ फेरफार, िकसी ऐसे ᳞िक् त ᳇ारा, जो माता या िपता ह ैसंतान की उपेक्षा के कारण, या िकसी आिशर्त की पिरिस्थितयᲂ मᱶ फेरफार के कारण, या िकसी अन्य पयार्प् त हतेुक से िकया जाना चािहए वहां, आयुक् त पूवर्वतᱮ आदशे मᱶ फेरफार के िलए ऐसे आदशे कर सकेगा, जैसे वह मामले की पिरिस्थितयᲂ मᱶ न्यायसंगत समझे :
परन्तु िकसी ᳞िक् त पर पर्ितकूल पर्भाव डालने वाला ऐसा कोई भी आदशे तब तक न िकया जाएगा जब तक िक उस ᳞िक् त को इस बात
एगा, िजसमᱶ िक उस आदशे मᱶ आिशर्त ᳇ारा िकसी ऐसी रािश का पर्ितसंदाय अन्तवर्िलत होता हो जो उस आिशर्त को पहले ही संदᱫ की जा चुकी ह ᱹ।
3 [(9) जहां िक आयुक् त िकसी आदशे मᱶ उपधारा (8) के अधीन इस तथ्य के कारण फेरफार करता ह ैिक ᳞िक् त को पर्ितकर का संदाय कपट, पर्ितरूपण
कम आगे धारा 31 मᱶ उपबिन्धत रीित से वसूल की जा सकेगी ।]
9. पर्ितकर का समनिुदष् ट, कुकर् या भािरत न िकया जाना—इस अिधिनयम के अधीन संदये कोई भी एकमुश्त रािश या अधर्मािसक संदाय, इस अिधिनयम ᳇ारा तथा उपबिन्धत के िसवाय, िकसी भ
के अधीन नहᱭ होगा, और न1[कमर्चारी] से िभन् न िकसी ᳞िक् त को िविध की िकर्या ᳇ारा संकर्ान्त होगा और न कोई दावा उसके िवरु मजुरा िकया जाएगा ।
10. सचूना और दावा—(1)4[पर्ितकर के िलए कोई भी दावा तब तक आयुक् त ᳇ारा गर्हण नहᱭ िकया जाएगा जब तक िक दघुर्टना की सूचना उसके घिटत होने
तक िक दावा दघुर्टना होने के5[दो वषर्] के भीतर, या मृत्यु हो जाने की दशा मᱶ, मृत्यु की तारीख से5[दो वषर्] के भीतर, उसके समक्ष कर न िदया गया होः]
परन्तु जहां िक दघुर्टना ऐसे रोग का लगना ह,ै िजसके सम्बन्ध मᱶ धारा 3 की उपधारा (2) के उपबन्ध लागू होते ह ᱹवहां, दघुर्टना के बारे मᱶ यह समझा
ा के पिरणामस्वरूप काम पर से िनरन्तर अनुपिस्थत रहा थाः
6 [परन्तु यह भी िक ऐसा कोई रोग लगने के कारण हुई ऐसी आंिशक िनःशक् तता की दशा मᱶ, जो 1 [कमर्चारी] को काम से अनुपिस्थत रहने के िलए मजबूर नहᱭ करती, दो वषर् की कालाविध की ग
अपने िनयोजक को दतेा हःै
परन्तु यह भी िक यिद कोई1[कमर्चारी], जो िकसी िनयोजन मᱶ, धारा 3 की उपधारा (2) के अधीन उस िनयोजन के सम्बन्ध मᱶ िविनिदष् ट िनरन्तर कालाविध के िल
ः होने वाले िकसी उपजीिवकाजन्य रोग के लक्षण िनयोजन की समािप् त के दो वषर् के भीतर उसमᱶ िवकिसत हो जाते ह,ᱹ दघुर्टना उस िदन हुई समझी जाएगी िजस िदन उन लक्षणᲂ का पता पहले पहल चला थाः] 7 [परन्तु यह भी िक—
िरसर मᱶ या िकसी ऐस
के अधीन काम कर रहा था और1[कमर्चारी] ऐसे पिरसर मᱶ, या ऐसे स्थान मᱶ, या िनयोजक के िकसी पिरसर मᱶ मरा था, या उस पिरसर या स्थान का, जहां दघुर्टना हुई थी, सामीप्य छोड़ ेिबना मरा था, अथवा
4 1938 के अिधिनयम सं० 9 की धारा 5 ᳇ारा मूल शब्दᲂ के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 5 1959 के अिधिनयम सं० 8 की धारा 8 ᳇ारा (1-6-1959 से) "एक वषर्" के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 6 1962 के अिधिनयम सं० 64 की धारा 5 ᳇ारा (1-2-1963 से) अन्तःस्थािपत ।
7 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 7 ᳇ारा अंतःस्थािपत ।
8 1938 के अिधिनयम सं० 9 की धारा 5 ᳇ारा पर्ितस्थािपत ।
10
(ख) यिद िनयोजक को1[या कई िनयोजकᲂ मᱶ से िकसी एक को, ᳞वसाय या कारबार की िकसी ऐसी शाखा के पर्बन्ध के िलए िजसमᱶ क्षत2[कमर्चारी] िनयोिजत था, िनयोजक के पर्ित उᱫरदायी िकसी ᳞िक् त को] दघुर्टना का ज्ञान िकसी अन्य ᳫोत से, उस समय या उस समय के आसपास हो गया था, जब वह दघुर्टना हुई थी,
तो सूचना का अभाव या उसमᱶ कोई तुर्िट या अिनयिमतता3[दावे के गर्हण] िकए जाने के िलए वजर्न न होगीः] परन्तु यह भी िक इस बात के होत ेहुए भी िक इस उपधारा मᱶ यथाउपबिन्धत सम्यक् समय के भीतर सूचना नहᱭ दी गई ह ैया दावा नहᱭ4[िकया] गया ह,ै आयुक् त िकसी भी मामले मᱶ पर्ितकर के िकसी भी दावे को उस दशा मᱶ5[गर्हण] और िविनिश् चत कर सकेगा, िजसमᱶ उसका समाधान हो जाए िक, यथािस्थित, वैसे सूचना दनेे या दावा6[करने] मᱶ असफलता पयार्प् त हतेुक से हुई थी ।
(2) ऐसी हर सूचना मᱶ क्षत ᳞िक् त का नाम और पता िदया होगा और सरल भाषा मᱶ क्षित का कारण और वह तारीख िजसको दघुर्टना हुई, किथत होगी और उसकी तामील िनयोजक पर या कई िनयोजकᲂ मᱶ से7[िकसी एक] पर, या ᳞वसाय या कारबार की िकसी ऐसी शाखा के, िजसमᱶ क्षत2[कमर्चारी] िनयोिजत था, पर्बन्ध के िलए िनयोजक के पर्ित8*** उᱫरदायी िकसी ᳞िक् त पर की जाएगी ।
9[(3) राज्य सरकार यह अपेक्षा कर सकेगी िक िविहत वगर् के िनयोजक अपने पिरसर मᱶ, िजसमᱶ2[कमर्चारी] िनयोिजत ह,ᱹ िविहत पर्रूप मᱶ एक सूचना-पुस् तक रखᱶगे िजस तक पिरसर मᱶ िनयोिजत िकसी भी क्षत2[कमर्चारी] की या सावपूवर्क उसकी ओर स े कायर् करने वाले िकसी भी ᳞िक् त की सभी युिक् तयुक् त समयᲂ पर आसानी से पहुचं हो सकेगी ।
(4) इस धारा के अधीन सूचना की तामील, उस ᳞िक् त के, िजस पर उसकी तामील की जानी ह,ै िनवास-स्थान या िकसी कायार्लय या कारबार के स्थान मᱶ पिरदᱫ करके या उस पते पर रिजस्टर्ीकृत डाक से भेजकर, या जहां िक सूचना-पुस्तक रखी जाती ह ै वहां सूचना-पुस्तक मᱶ पर्िविष् ट करके, की जा सकेगी ।]
10 [10क. पर्ाणान्तक दघुर्टनाᲐ के सम्बन्ध मᱶ िववरणᲂ की िनयोजकᲂ स ेअपके्षा करन ेकी शिक् त—(1) जहां िक आयुक् त को िकसी ᳫोत से यह इिᱫला पर्ाप् त होती ह ै िक कोई2[कमर्चारी] अपने िनयोजन से और उसके अनुकर्म मᱶ उद्भूत दघुर्टना के पिरणामस्वरूप मर गया ह ैवहां वह उस2[कमर्चारी] के िनयोजक को उससे यह अपेक्षा करने वाली सूचना रिजस्टर्ीकृत डाक ᳇ारा भेज सकेगा िक वह िविहत पर्रूप मᱶ ऐसा िववरण, िजसमᱶ वे पिरिस्थितयां िजनमᱶ2[कमर्चारी] की मृत्यु हुई बताई गई हो और यह उपदिशत िकया गया हो िक िनयोजक की राय मᱶ वह उस मृत्यु के कारण पर्ितकर िनिक्षप् त करने का दायी ह ैया नहᱭ, उस सूचना की तामील से तीस िदन के भीतर िनवेिदत करे ।
(2) यिद िनयोजक की राय हो िक वह पर्ितकर िनिक्षप् त करने का दायी ह ैतो वह सूचना की तामील से तीस िदन के भीतर ऐसा िनक्षेप करेगा ।
(3) यिद िनयोजक की राय हो िक वह पर्ितकर िनिक्षप् त करने का दायी नहᱭ ह,ै तो वह अपने िववरण मᱶ उन आधारᲂ को उपदिशत करेगा िजन पर वह दाियत्व से इन्कार करता ह ै।
(4) जहां िक िनयोजक ने दाियत्व से इस पर्कार इन्कार िकया ह,ै वहां आयुक् त ऐसी जांच के पश् चात ्जैसी वह ठीक समझे मृत
10ख. पर्ाणान्तक दघुर्टनाᲐ और गम्भीर शारीिरक क्षितयᲂ की िरपोटᱸ—(1) जहां िक िकसी तत्समय पर्वृᱫ िविध ᳇ारा यह अपेिक्षत ह ैिक िनयोजक के पिरसर मᱶ घिटत िकसी ऐसी दघुर्टना की, िजसके पिरणामस्वरूप मृत्यु11[या गम्भीर शारीिरक क्षित] हो गई हो, सूचना िकसी पर्ािधकारी को िनयोजक ᳇ारा या उसकी ओर से दी जाए, वहां, वह ᳞िक् त, जो सूचना दनेे के िलए अपेिक्षत ह,ै मृत्यु 11 [या गम्भीर शारीिरक क्षित] के सात िदन के भीतर आयुक् त को एक िरपोटर् भेजेगा िजसमᱶ वे पिरिस्थितयां बताई जाएंगी िजनमᱶ मतृ्यु 11 [या गम्भीर शारीिरक क्षित] हुई ह ै:
परन्तु जहां िक राज्य सरकार ने ऐसा िविहत िकया हो वहां सूचना दनेे के िलए अपेिक्षत ᳞िक् त ऐसी िरपोटर् आयुक् त को भेजने के बजाय उस पर्ािधकारी को भेज सकेगा िजसे सूचना दनेे के िलए वह ᳞िक् त अपेिक्षत ह ै।
11 [स्पष् टीकरण—"गंभीर शारीिरक क्षित" से ऐसी क्षित अिभपेर्त ह ैिजसमᱶ िकसी अगं के उपयोग की स्थायी हािन या िकसी अंग की स्थायी क्षित अथवा दिृष् ट या शर्वण शिक् त की स्थायी हािन या उसे स्थायी क्षित अथवा िकसी अंग मᱶ अिस्थभंग अथवा क्षत 1 1938 के अिधिनयम सं० 9 की धारा 5 ᳇ारा अंतःस्थािपत ।
11
᳞िक् त की अपन ेकाम से बीस िदन से अिधक की कालाविध के िलए मजबूरी के कारण अनुपिस्थित अन्तवर्िलत ह ैया अन्तवर्िलत होना पूणर्तः अिधसभंा᳞ ह ै।]
(2) राज्य सरकार, शासकीय राजपतर् मᱶ अिधसूचना ᳇ारा, उपधारा (1) के उपबन्धᲂ का िवस्तार, उस उपधारा की पिरिध मᱶ आने वाले पिरसरᲂ से िभन् न पिरसरᲂ के िकसी वगर् पर कर सकेगी, और ऐसी अिधसूचना ᳇ारा उन ᳞िक् तयᲂ को िविनिदष् ट कर सकेगी जो आयुक् त को िरपोटर् भेजᱶगे ।
1 [(3) इस धारा मᱶ की कोई भी बात उन कारखानᲂ को लागू न होगी िजनको 2 [कमर्चारी] राज्य बीमा अिधिनयम, 1948 (1948 का 34) लागू होता ह ै।]
11. िचिकत्सीय परीक्षा—(1) जहां िक2[कमर्चारी] ने दघुर्टना की सूचना दी ह ैवहां, यिद िनयोजक उस समय से, जब सूचना की तामील हुई थी, तीन िदन का अवसान होने के पहले उससे यह पर्स्थापना करता ह ैिक िकसी अिहत िचिकत्सा-᳞वसायी ᳇ारा उसकी परीक्षा मुफ्त कराई जाएगी, तो, वह अपने को ऐसी परीक्षा के िलए पर्स्तुत करेगा और कोई भी2[कमर्चारी], जो इस अिधिनयम के अधीन अधर्मािसक संदाय पाता ह,ै यिद उससे ऐसी अपेक्षा की जाए, तो समय-समय पर अपने को ऐसी परीक्षा के िलए पर्स्तुत करेगाः परन्तु2[कमर्चारी] इस अिधिनयम के अधीन बनाए गए िनयमᲂ के अनुसार से अन्यथा, या उन अन्तरालᲂ से, जो िविहत िकए जाएं, लघतुर अन्तरालᲂ पर िचिकत्सा-᳞वसायी ᳇ारा परीक्षा कराने के िलए अपने को पर्स्तुत करने के िलए अपेिक्षत नहᱭ िकया जाएगा ।
(2) यिद2[कमर्चारी] िनयोजक ᳇ारा उपधारा (1) के अधीन या आयुक् त ᳇ारा िकसी भी समय ऐसा करने के िलए अपेिक्षत िकए जाने पर, अिहत िचिकत्सा-᳞वसायी ᳇ारा अपनी परीक्षा कराने के िलए अपने को पर्स्तुत करने से इन्कार करता ह ैया उसमᱶ िकसी पर्कार से बाधा डालता ह ै तो ऐसे इन्कार या ऐसी बाधा के बने रहने के दौरान उसका पर्ितकर का अिधकार उस दशा के िसवाय िनलिम्बत रहगेा िजसमᱶ इन्कार की दशा मᱶ वह इस पर्कार अपने को पर्स्तुत करने से िकसी पयार्प् त कारण ᳇ारा िनवािरत हुआ था ।
(3) यिद2[कमर्चारी] उस कालाविध के अवसान स ेपूवर्, िजसके भीतर वह िचिकत्सीय परीक्षा के िलए अपने को पर्स्ततु करने के िलए अपेिक्षत िकए जाने के िलए उपधारा (1) के अधीन दाियत्वाधीन ह,ै इस पर्कार परीिक्षत हुए िबना उस स्थान के, िजसमᱶ वह िनयोिजत था, सामीप्य से स्वेच्छापूवर्क चला जाता ह ैतो उसका पर्ितकर का अिधकार तब तक के िलए िनलिम्बत रहगेा जब तक वह लौट नहᱭ आता और ऐसी परीक्षा कराने के िलए अपने को पेश नहᱭ कर दतेा ।
(4) जहां िक ऐसा2[कमर्चारी], िजसका पर्ितकर का अिधकार उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन िनलिम्बत हो गया ह,ै िचिकत्सीय परीक्षा के िलए अपने को वैसे पर्स्तुत िकए िबना, जैसा उन उपधाराᲐ मᱶ से िकसी के ᳇ारा अपेिक्षत ह,ै मर जाता ह ैवहां, यिद आयुक् त ठीक समझे तो वह मृत2[कमर्चारी] के आिशर्तᲂ को पर्ितकर का संदाय िनिदष् ट कर सकेगा ।
(5) जहां िक पर्ितकर का अिधकार उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन िनलिम्बत ह ैवहां िनलम्बन की कालाविध के िलए कोई भी पर्ितकर संदये नहᱭ होगा और यिद िनलिम्बत की कालाविध धारा 4 की उपधारा (1) के खण्ड (घ) मᱶ िनिदष् ट पर्तीक्षा- कालाविध के अवसान के पूवर् पर्ारम्भ होती ह ैतो पर्तीक्षा-कालाविध मᱶ उतनी कालाविध बढ़ा दी जाएगी िजसके दौरान िनलम्बन बना रहता ह ै।
(6) जहां िक क्षत2[कमर्चारी] ने उस अिहत िचिकत्सा-᳞वसायी ᳇ारा अपनी पिरचयार् कराने से इन्कार कर िदया ह,ै िजसकी मुफ्त सेवाएं उस ेिनयोजक ᳇ारा पर्स्थािपत की गई ह,ᱹ या ऐसी पर्स्थापना पर्ितगृहीत कर चुकने के पश् चात् ऐसे िचिकत्सा-᳞वसायी के अनुदशेᲂ की जानबूझकर अवहलेना की ह ै वहां3[यिद यह सािबत कर िदया जाता ह ै िक2[कमर्चारी] की पिरचयार् िकसी अिहत िचिकत्सा-᳞वसायी ᳇ारा तत्पश् चात् िनयिमत रूप से नहᱭ हुई ह ैया उसकी ऐसी पिरचयार् तो हुई ह ैपर वह अिहत िचिकत्सा-᳞वसायी के अनुदशेᲂ का अनुसरण करने मᱶ जानबूझकर असफल रहा ह ैऔर ऐसा इन्कार, अवहलेना या असफलता उस मामले की पिरिस्थितयᲂ मᱶ अयुिक् तयुक् त थी] और उससे क्षित गुरूतर हो गई ह ैतो क्षित और उसके पिरणामस्वरूप हुई िनःशक् तता के बारे मᱶ यह समझा जाएगा िक वे उसी पर्कार की और उसी अिस्तत्वाविध की ह,ै िजस पर्कार की और िजस अिस्तत्वाविध की उनके होने की पर्त्याशा उस दशा मᱶ युिक् तयुक् त रूप मᱶ की जा सकती थी िजसमᱶ िक2[कमर्चारी] की पिरचयार् िकसी अिहत िचिकत्सा-᳞वसायी ᳇ारा िनयिमत रूप से की गई होती4[और उसके अनदुशेᲂ का अनुसरण2[कमर्चारी] ने िकया होता], और यिद कोई पर्ितकर संदये ह ैतो वह तदनुसार संदये होगा ।
12. सिंवदा करना—(1) जहां िक कोई ᳞िक् त (िजसे इसके पश् चात् इस धारा मᱶ मािलक कहा गया ह)ै, अपने ᳞वसाय या कारबार के अनुकर्म मᱶ या उसके पर्योजनᲂ के िलए िकसी अन्य ᳞िक् त के साथ (िजसे इसके पश् चात् इस धारा मᱶ ठेकेदार कहा गया ह)ै िकसी ऐसे पूरे काम या उसके िकसी भाग को, जो मािलक के ᳞वसाय या कारबार का मामूली तौर से भाग ह,ै ठेकेदार ᳇ारा या उसके अधीन िनष्पादन करने के िलए संिवदा करता ह ैवहां, उस काम के िनष्पादन मᱶ िनयोिजत2[कमर्चारी] को मािलक ऐसे पर्ितकर का दनेदार होगा िजसका दनेदार वह होता यिद वह2[कमर्चारी] उसके ᳇ारा अ᳞विहत रूप से िनयोिजत िकया गया होता; और जहां िक मािलक से पर्ितकर के िलए दावा िकया जाता ह ैवहां यह अिधिनयम, इसके िसवाय िक पर्ितकर की रकम का िहसाब2[कमर्चारी] की उस 1 1959 के अिधिनयम सं० 8 की धारा 9 ᳇ारा (1-6-1959 से) अन्तःस्थािपत ।
3 1938 के अिधिनयम सं० 9 की धारा 6 ᳇ारा कितपय शब्दᲂ के स्थान पर पर्ितस्थािपत ।
4 1938 के अिधिनयम सं० 9 की धारा 6 ᳇ारा अन्तःस्थािपत ।
12
िनयोजक के अधीन मजदरूी के पर्ित िनदᱷश से िकया जाएगा िजसके ᳇ारा वह अ᳞विहत रूप से िनयोिजत ह,ै इस पर्कार लागू होगा मानो िनयोजक के पर्ित िनदᱷशᲂ के िलए मािलक के पर्ित िनदᱷश पर्ितस्थािपत कर िदए गए हᲂ ।
(2) जहां िक मािलक इस धारा के अधीन पर्ितकर का दनेदार ह ैवहां वह ठेकेदार से1[या िकसी अन्य ᳞िक् त से, िजससे
(3) इस धारा की िकसी भी बात का यह अथर् नहᱭ लगाया जाएगा िक वह िकसी2[कमर्चारी] को मािलक के बजाय ठेकेदार से पर्ितकर वसूल करने से िनवािरत करती ह ै।
(4) यह धारा िकसी ऐसी दशा मᱶ लागू नहᱭ होगी िजसमᱶ िक दघुर्टना उस पिरसर पर, मᱶ या के आसपास न होकर अन्यतर् हुई ह,ै िजस पर मािलक ने, यथािस्थित, काम के िनष्पादन का उपकर्म िकया ह ैया पर्ाियकतः करता ह ैया जो अन्यथा उसके िनयंतर्ण या पर्बंध के अधीन ह ै।
13. पर-᳞िक् त के िवरु िनयोजक के उपचार—जहां िक2[कमर्चारी] ने िकसी ऐसी क्षित के िलए पर्ितकर वसूल िकया ह ैजो ऐसी पिरिस्थितयᲂ मᱶ कािरत हुई थी िजनमᱶ उसके िलए नुकसानी के िलए संदाय करने का िकसी ऐसे ᳞िक् त पर िविधक दाियत्व सृष् ट हुआ था जो उस ᳞िक् त से िभन् न ह ैिजसने पर्ितकर िदया ह ैवहां वह ᳞िक् त िजसने पर्ितकर िदया ह ैऔर कोई ऐसा ᳞िक् त, िजससे धारा 12 के अधीन क्षितपूित करने की अपेक्षा की गई ह ैउस ᳞िक् त से अपनी क्षितपूित कराने का हकदार होगा जो नुकसानᲂ के िलए संदाय करने का यथापूवᲃक् त रूप मᱶ दायी ह ै।
14. िनयोजक का िदवाला—(1) जहां िक िनयोजक ने िकसी2[कमर्चारी] के पर्ित इस अिधिनयम के अधीन अपने िकसी दाियत्व के बारे मᱶ िकन्हᱭ बीमाकतार्Ა से संिवदा की ह,ै वहां िनयोजक के िदवािलया हो जाने की, या अपने लेनदारᲂ के साथ पर्शमन करने की, या ठहराव करने की कोई स्कीम बनान ेकी दशा मᱶ, या यिद िनयोजक कोई कम्पनी ह ैतो कम्पनी का पिरसमापन पर्ारम्भ होने की दशा मᱶ, उस दाियत्व के बारे मᱶ बीमाकतार्Ა के िवरु िनयोजक के अिधकार2[कमर्चारी] को, िदवाले या कम्पिनयᲂ के पिरसमापन से सम्ब िकसी तत्समय पर्वृᱫ िविध मᱶ िकसी बात के होते हुए भी, अंतिरत और उसमᱶ िनिहत हो जाएंगे, और ऐसे िकसी अंतरण पर बीमाकतार्Ა के वे ही अिधकार और उपचार हᲂगे, और वे उन् हᱭ दाियत् वᲂ के अध् यधीन ऐसे हᲂगे, मानो वे िनयोजक हᲂ, िकन्तु ऐसे िक बीमाकतार्2[कमर्चारी] के पर्ित उस दाियत्व से अिधक दाियत्व के अधीन न हᲂगे िजसके अधीन वे िनयोजक के पर्ित होते ।
(2) यिद2[कमर्चारी] के पर्ित बीमाकतार्Ა का दाियत्व2[कमर्चारी] के पर्ित िनयोजक के दाियत्व से कम ह ैतो2[कमर्चारी] िदवाला सम्बन्धी कायर्वािहयᲂ मᱶ या समापन मᱶ अितशेष को सािबत कर सकेगा ।
(3) जहां िक ऐसे िकसी मामले मᱶ, जो उपधारा (1) मᱶ िनिदष् ट ह,ै बीमाकतार्Ა के साथ िनयोजक की (पर्ीिमयमᲂ के संदाय के िलए अनुबधं स े िभन् न) संिवदा, उसके िकन्हᱭ िनबन्धनᲂ या शतᲄ का अननुपालन िनयोजक ᳇ारा िकए जाने के कारण शून्य या शून्यकरणीय ह ैवहां, उस उपधारा के उपबंध इस पर्कार लागू हᲂगे मानो वह संिवदा शून्य या शून्यकरणीय न हो, और2[कमर्चारी] को दी गई रकम को बीमाकतार् िदवाले की कायर्वािहयᲂ मᱶ या समापन मᱶ सािबत करने के हकदार हᲂगेः परन्तु इस उपधारा के उपबन्ध िकसी ऐसी दशा मᱶ लागू नहᱭ हᲂगे िजसमᱶ2[कमर्चारी] दघुर्टना होने और उसके पिरणामस्वरूप हुई िनःशक् ता की सूचना िदवाले या समापन की कायर्वािहयᲂ के संिस्थत िकए जाने की जानकारी पाने के पश् चात् यथासाध्य शीघर् बीमाकतार्Ა को दनेे मᱶ असफल रहता ह ै।
(4) यह समझा जाएगा िक उन ऋणᲂ के अन्तगर्त, जो िकसी िदवािलए की सम्पिᱫ के िवतरण मᱶ या पिरसमापनाधीन िकसी कम्पनी की आिस्तयᲂ के िवतरण मᱶ पर्िसडᱶसी नगर िदवाला अिधिनयम, 1909 (1909 से 3) की धारा 49 के अधीन या पर्ान्तीय िदवाला अिधिनयम, 1920 (1920 का 5) की धारा 61 के अधीन या3[कंपनी अिधिनयम, 1956 की धारा 530] के अधीन अन्य सब ऋणᲂ पर पूिवकता दकेर िदए जाने ह,ᱹ िकसी ऐसे पर्ितकर म ेशोध्य रकम आती ह ैिजसके िलए दाियत्व, यथािस्थित, िदवािलए के न्यायिनणर्यन के आदशे की तारीख से पहले या पिरसमापन के पर्ारम्भ की तारीख से पहले पर्ोद्भूत हो गया था और वे अिधिनयम तदनुसार पर्भावी हᲂगे ।
(5) जहां िक पर्ितकर अधर्मािसक संदाय ह ैवहां उस म ेशोध्य रकम इस धारा के पर्योजनᲂ के िलए उतनी एकमुश्त रािश की रकम मानी जाएगी िजतनी के िलए अधर्मािसक संदाय का, यिद यह मोचनीय होता, उस दशा मᱶ मोचन िकया जा सकता िजसमᱶ िक धारा 7 के अधीन उस पर्योजन के िलए कोई आवेदन िकया गया होता और ऐसी रकम के िवषय मᱶ आयुक् त का पर्माणपतर् उसका िनश् चायक सबूत होगा ।
1 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 9 ᳇ारा अन्तःस्थािपत ।
13
(6) उपधारा (4) के उपबन्ध ऐसी रकम की दशा मᱶ लागू हᲂगे िजस ेबीमाकतार् उपधारा (3) के अधीन सािबत करने का हकदार ह,ै िकन्तु अन्यथा वे उपबन्ध वहां लागू नहᱭ हᲂगे जहां िक िदवािलए ने या पिरसमापनाधीन कम्पनी ने बीमाकतार्Ა के साथ उपधारा
(1) मᱶ यथािनिदष् ट संिवदा कर ली ह ै।
(7) यह धारा वहां लागू नहᱭ होगी जहां िक कम्पनी का पिरसमापन केवल पुनगर्ठन या िकसी दसूरी कम्पनी से समामलेन के पर्योजनᲂ के िलए स्वेच्छया िकया जाता ह ै।
1 [14क. पर्ितकर िनयोजक ᳇ारा अन्तिरत आिस्तयᲂ पर पर्थम भार होगा—जहां िक िनयोजक अपनी आिस्तयᲂ का अन्तरण िकसी ऐसे पर्ितकर म ेशोध्य िकसी रकम के संदाय से पूवर् कर दतेा ह ैिजसके िलए दाियत्व अन्तरण की तारीख से पूवर् पर्ोद्भूत हो गया था वहां ऐसी रकम का इस पर्कार अन्तिरत आिस्तयᲂ के उस भाग पर, जो स्थावर सम्पिᱫ से िमलकर बना ह,ै िकसी अन्य तत्समय पर्वृᱫ िविध मᱶ िकसी बात के होते हुए भी पर्थम भार होगी ।]
15. मास्टरᲂ और नािवकᲂ स ेसम्ब िवशषे उपबन्ध—यह अिधिनयम उन2[कमर्चािरयᲂ] की दशा मᱶ, जो3*** पोतᲂ के मास्टर या नािवक ह,ᱹ िनम् निलिखत उपान्तरᲂ के अध्यधीन रहते हुए, लागू होगा, अथार्त्—
(1) दघुर्टना की और पर्ितकर के दावे की सूचना की तामील वहां के िसवाय जहां िक क्षत ᳞िक् त पोत का मास्टर ह,ै पोत के मास्टर पर ऐसे की जाएगी, मानो वह िनयोजक हो, िकन्तु जहां िक पोत पर ही दघुर्टना हुई ह ैऔर िनःशक् तता पर्ारम्भ हुई ह ैवहां िकसी नािवक के िलए यह आवश्यक नहᱭ होगा िक वह दघुर्टना की कोई सूचना द े।
(2) मास्टर या नािवक की मृत्यु हो जाने की दशा मᱶ पर्ितकर के िलए दावा दावेदार को मृत्यु का समाचार िमलने के पश् चात्4[एक वषर्] के भीतर, या जहां िक पोत सब जनᲂ के साथ नष् ट हो गया ह ैया नष् ट हो गया समझा जाता ह ैवहां उस तारीख से, िजस तारीख को पोत ऐसे नष् ट हुआ या ऐसे नष् ट हुआ समझा जाता ह,ै अᲶारह मास के भीतर िकया जाएगाः 5 [परन्तु इस बात के होते हुए भी िक कोई दावा इस उपधारा मᱶ यथाउपबिन्धत सम्यक् समय के भीतर नहᱭ िकया गया ह ैआयुक् त िकसी भी मामले मᱶ पर्ितकर के िकसी दावे को उस दशा मᱶ गर्हण कर सकेगा िजसमᱶ उसका समाधान हो जाए िक दावा वैसे करने मᱶ असफलता पयार्प् त हतेुक से हुई थी ।]
(3) जहां िक क्षत मास्टर या नािवक6[भारत के िकसी भाग मᱶ या]7[िकसी िवदशे मᱶ] उन्मोिचत कर िदया जाता ह ै या पीछे छोड़ िदया जाता ह ैवहां, उस भाग मᱶ के िकसी न्यायाधीश या मिजस्टेर्ट ᳇ारा या उस िवदशे मᱶ के िकसी कौन्सलीय आिफ़सर ᳇ारा िलए गए और उस ᳞िक् त ᳇ारा, िजसके ᳇ारा वे िलए जाते ह,ᱹ केन्दर्ीय सरकार या िकसी राज्य सरकार को पारेिषत कोई भी अिभसा᭯य, दावा पर्वितत कराने की िकन्हᱭ भी कायर्वािहयᲂ मᱶ सा᭯य मᱶ गर्ा᳭ हᲂगे— (क) यिद अिभसा᭯य उस न्यायाधीश, मिजस्टेर्ट या कौन्सलीय आिफसर के हस्ताक्षर ᳇ारा अिधपर्माणीकृत हो िजसके सामने वह िदया गया ह;ै
(ख) यिद, यथािस्थित, पर्ितवादी या अिभयुक् त ᳞िक् त को स्वयं या अपने अिभकतार् ᳇ारा साक्षी की पर्ितपरीक्षा करने का अवसर िमल गया था; तथा
(ग) यिद अिभसा᭯य िकसी दांिडक कायर्वाही के दौरान िदया गया था तो यह सािबत होने पर िक अिभसा᭯य अिभयुक् त ᳞िक् त की उपिस्थित मᱶ िदया गया था,
और िकसी भी मामले मᱶ उस ᳞िक् त के हस्ताक्षर या पदीय हिैसयत को सािबत करना आवश्यक नहᱭ होगा िजसके ᳇ारा ऐसा कोई अिभसा᭯य हस्ताक्षिरत िकया गया पर्तीत होता ह ै और ऐसे ᳞िक् त ᳇ारा यह पर्माणपतर् िक पर्ितवादी या अिभयुक् त ᳞िक् त को साक्षी की पर्ितपरीक्षा करने का अवसर िमला था और यिद अिभसा᭯य िकसी दांिडक कायर्वाही मᱶ िदया गया था तो यह िक वह अिभयुक् त ᳞िक् त की उपिस्थित मᱶ िदया गया था, तब के िसवाय जब िक तत्पर्ितकूल सािबत कर िदया जाता ह,ै इस बात का पयार्प् त सा᭯य होगा िक उसे वह अवसर िमला था और अिभसा᭯य इस पर्कार िदया गया था । 8 * * * *
9 [(4)] उस कालाविध के िलए कोई 10 [अधर्मािसक संदाय] संदये नहᱭ होगा िजसके दौरान पोत का स्वामी, क्षत मास्टर या नािवक के भरण-पोषण के ᳞यᲂ को वािणिज्यक पोत पिरवहन सम्बन्धी11*** िकसी तत्समय पर्वृᱫ िविध के अधीन चुकाने का दायी ह ै।
1 1959 के अिधिनयम सं० 8 की धारा 10 ᳇ारा (1-6-1959 से) अन्तःस्थािपत ।
14
1 [(5) कोई भी पर्ितकर िकसी ऐसी क्षित के िलए इस अिधिनयम के अधीन संदये न होगा, िजसके िलए उपदान, भᱫे या पᱶशन के संदाय के िलए उपबन्ध पᱶशन्स (नेवी, आमᱮ, एयर फोसर् ऐण्ड मकᱷ न्टाइल मैरीन), ऐक्ट, 1939 (2 और 3, जाजर् 6, अ० 83) के अधीन बनाई गई वार पᱶशन्स ऐण्ड िडटेन्शन अलाउन्सेज़ (मकᱷ न्टाइल मैरीन, एट्सेटर्ा) स्कीम, 1939 या वार पेन्शन्स ऐण्ड िडटᱶशन अलाउन्सेज़ (इिण्डयन सीमेन, एट्सेटर्ा) स्कीम, 1941 के अधीन या केन्दर्ीय सरकार ᳇ारा बनाई गई यु पᱶशन और िनरोध भᱫे (भारतीय नािवक) स्कीम, 1942 के अधीन िकया गया ह ै।
(6) इस अिधिनयम ᳇ारा अपेिक्षत समय के भीतर सूचना दनेे या दावा करने या कायर्वाही पर्ारम्भ करने मᱶ असफलता िकसी वैयिक् तक क्षित की बाबत इस अिधिनयम के अधीन कायर्वाही के चलने के िलए वजर्न न होगी, यिद— (क) उस क्षित की बाबत संदाय करने के िलए कोई आवेदन पूवर्वतᱮ खंड मᱶ िनिदष् ट स्कीमᲂ मᱶ से िकसी के अधीन कर िदया गया ह,ै तथा
(ख) राज्य सरकार पर्मािणत कर द ेिक उक् त आवेदन इस युिक् तयुक् त िवश् वास मᱶ िकया गया था, िक क्षित ऐसी थी िजसके िलए वह स्कीम, िजसके अधीन आवेदन िकया गया था, संदायᲂ के िलए उपबन्ध करती ह,ै और यह िक इस आधार पर िक वह क्षित ऐसी क्षित नहᱭ थी वह आवेदन नामंजूर कर िदया गया था या उस आवेदन के अनुसरण मᱶ िकए जाने वाले संदाय बन्द कर िदए गए थे, तथा
(ग) उस तारीख से िजस तारीख को राज्य सरकार का उक् त पर्माणपतर् कायर्वाही पर्ारम्भ करने वाले ᳞िक् त को िदया गया था, एक मास के भीतर इस अिधिनयम के अधीन कायर्वाही पर्ारम्भ कर दी जाती ।] 2 [15क. वाययुानᲂ के कैप्टनᲂ और कमᱮदल के अन्य सदस्यᲂ स ेसबंिंधत िवशषे उपबधं—यह अिधिनयम उन 3 [कमर्चािरयᲂ] की दशा मᱶ, जो वायुयानᲂ के कैप्टन या कमᱮदल के अन्य सदस्य ह,ᱹ िनम् निलिखत उपान्तरणᲂ के अधीन रहते हुए लागू होगा, अथार्त्:—
(1) दघुर्टना की और पर्ितकर के दावे की सूचना की तामील, यहां के िसवाय जहां क्षत ᳞िक् त वायुयान का कैप्टन ह,ै वायुयान के कैप्टन पर ऐसे की जाएगी, मानो वह िनयोजक हो, िकन्तु जहां वायुयान पर ही दघुर्टना हुई ह ैऔर िनःशक् तता पर्ारम्भ हुई ह ैवहां कमᱮदल के िकसी सदस्य के िलए यह आवश्यक नहᱭ होगा िक वह दघुर्टना की कोई सूचना द े।
(2) कैप्टन या कमᱮदल के अन्य सदस्य की मृत्यु हो जाने की दशा मᱶ, पर्ितकर के िलए दावा, दावेदार को मृत्यु का समाचार िमलने के पश् चात् एक वषर् के भीतर, या जहां वायुयान समोजनᲂ के साथ नष् ट हो गया ह ैया नष् ट हुआ समझा जाता ह ै। वहां उस तारीख से, िजस तारीख को वायुयान ऐसे नष् ट हुआ था या ऐसे नष् ट हुआ समझा जाता ह,ै अठारह मास के भीतर िकया जाएगाः
परन्तु इस बात के होते हुए भी िक कोई दावा इस उपधारा मᱶ उपबंिधत सम्यक् समय के भीतर नहᱭ िकया गया ह,ै आयुक् त िकसी भी मामले मᱶ पर्ितकर के िकसी दावे को उस दशा मᱶ गर्हण कर सकेगा िजसमᱶ उसका यह समाधान हो जाता ह ै िक दावा इस पर्कार करने मᱶ असफलता पयार्प् त हतेकु से हुई थी ।
(3) जहां वायुयान का क्षत कैप्टन या कमᱮदल का अन्य सदस्य भारत के िकसी भाग मᱶ अथवा िकसी अन्य दशे मᱶ िनमुर्क् त कर िदया जाता ह ैया पीछे छोड़ िदया जाता ह ैवहां उस भाग मᱶ के िकसी न्यायाधीश या मिजस्टेर्ट ᳇ारा अथवा उस िवदशे मᱶ के िकसी कौन्सलीय आिफसर ᳇ारा िलए गए और उस ᳞िक् त ᳇ारा, िजसके ᳇ारा वे िलए जाते ह,ᱹ केन्दर्ीय सरकार या िकसी राज्य सरकार को पारेिषत कोई भी अिभसा᭯य, दावा पर्वितत कराने की िकन्हᱭ भी कायर्वािहयᲂ मᱶ सा᭯य मᱶ उस दशा मᱶ गर्ा᳭ हᲂगे िजसमᱶ,—
(क) अिभसा᭯य उस न्यायाधीश, मिजस्टेर्ट या कौन्सलीय आिफसर के हस्ताक्षर ᳇ारा अिधपर्माणीकृत िकया जाता ह ैिजसके समक्ष वह िदया गया ह;ै
(ख) यथािस्थित, पर्ितवादी या अिभयुक् त ᳞िक् त को स्वयं अथवा अपने अिभकतार् ᳇ारा साक्षी की पर्ितपरीक्षा करने का अवसर िमल गया था;
(ग) यिद अिभसा᭯य िकसी दांिडक कायर्वाही के दौरान िदया गया था तो, यह सािबत हो जाने पर िक अिभसा᭯य अिभयुक् त ᳞िक् त की उपिस्थित मᱶ िदया गया था,
और िकसी भी मामले मᱶ उस ᳞िक् त के हस्ताक्षर या पदीय हिैसयत को सािबत करना आवश्यक नहᱭ होगा िजसके ᳇ारा ऐसा कोई अिभसा᭯य हस्ताक्षिरत िकया गया पर्तीत होता ह ैऔर ऐसे ᳞िक् त ᳇ारा यह पर्माणपतर् िक पर्ितवादी या अिभयुक् त ᳞िक् त को साक्षी की पर्ितपरीक्षा करने का अवसर िमला था, और यिद अिभसा᭯ य िकसी दांिडक कायर्वाही मᱶ िदया गया था तो यह िक वह अिभयुक् त व् यिक् त की उपिस् थित मᱶ िदया गया था, तब के िसवाय जब िक तत्पर्ितकूल सािबत कर िदया जाता ह,ै इस बात का पयार्प् त सा᭯य होगा िक उसे वह अवसर िमला था और ऐसा अिभसा᭯य इस पर्कार िदया गया था ।
1 1942 के अिधिनयम सं० 1 की धारा 2 ᳇ारा (3 िसतम्बर, 1939 से) पूवर्वतᱮ खण्ड के स्थान पर पर्ितस्थािपत । िजसे 1939 के अिधिनयम सं० 42 की धारा 2 ᳇ारा उसी तारीख से अन्तःस्थािपत िकया गया था ।
2 1995 अिधिनयम सं० 30 की धारा 8 ᳇ारा (15-9-1995 से) अंतःस्थािपत ।
3 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 3 ᳇ारा पर्ितस्थािपत ।
15
15ख. कंपिनयᲂ और मोटरयानᲂ के िवदशे मᱶ के1[कमर्चािरयᲂ] से सबंिंधत िवशषे उपबधं—यह अिधिनयम,—
(i) उन1[कमर्चािरयᲂ] की दशा मᱶ, जो ऐसे ᳞िक् त ह ᱹिजन्हᱶ भारत मᱶ रिजस्टर्ीकृत कंपिनयᲂ ᳇ारा भतᱮ िकया गया ह ै और उस रूप मᱶ, िवदशे मᱶ कायर् कर रह ेह,ᱹ और
(ii) उन ᳞िक् तयᲂ की दशा मᱶ जो मोटरयान अिधिनयम, 1988 (1988 का 59) के अधीन रिजस्टर्ीकृत मोटरयानᲂ के साथ डर्ाइवर, हले्पर, मैकेिनक, क्लीनर या अन्य1[कमर्चािरयᲂ] के रूप मᱶ कायर् के िलए िवदशे भेजे गए ह;ᱹ िनम् निलिखत उपान् तरणᲂ के अधीन रहते हुए लागू होगा, अथार्त् :—
(1) दघुर्टना की और पर्ितकर के दावे की सूचना की तामील, दघुर्टना के दशे मᱶ, यथािस्थित, कम्पनी के स्थानीय अिभकतार् या मोटरयान के स्वामी के स्थानीय अिभकतार् पर की जा सकेगी ।
(2) उस2[कमर्चारी] की मृत्यु हो जाने की दशा मᱶ, िजसकी बाबत इस धारा के उपबंध लागू हᲂगे, पर्ितकर के िलए दावा, दावेदार को मृत्यु का समाचार िमलने के पश् चात् एक वषर् के भीतर िकया जाएगाः परन्तु इस बात के होते हुए भी िक कोई दावा इस उपधारा मᱶ उपबंिधत सम्यक् समय के भीतर नहᱭ िकया गया ह,ै आयुक् त िकसी भी मामले मᱶ पर्ितकर के िकसी दावे को उस दशा मᱶ गर्हण कर सकेगा िजसमᱶ उसका यह समाधान हो जाता ह ैिक दावा इस पर्कार करने मᱶ असफलता पयार्प् त हतेुक से हुई थी ।
(3) जहां क्षत2[कमर्चारी] भारत के िकसी भाग मᱶ अथवा िकसी अन्य दशे मᱶ िनमुर्क् त कर िदया जाता ह ै या पीछे छोड़ िदया जाता ह ैवहां उस भाग मᱶ के िकसी न्यायाधीश या मिजस्टेर्ट ᳇ारा अथवा उस िवदशे मᱶ के िकसी कौन्सलीय आिफसर ᳇ारा िलए गए और उस ᳞िक् त ᳇ारा, िजसके ᳇ारा वे िलए जाते ह ᱹकेन्दर्ीय सरकार या िकसी राज्य सरकार को पारेिषत कोई भी अिभसा᭯य दावा पर्वितत कराने की िकन्हᱭ भी कायर्वािहयᲂ मᱶ सा᭯य मᱶ उस दशा मᱶ गर्ा᳭ हᲂगे िजसमᱶ—
(क) अिभसा᭯य उस न्यायाधीश, मिजस्टेर्ट या कौन्सलीय आिफसर के हस्ताक्षर ᳇ारा अिधपर्माणीकृत िकया जाता ह ैिजसके समक्ष वह िदया गया ह;ै
(ख) यिद, यथािस्थित, पर्ितवादी या अिभयुक् त ᳞िक् त को स्वयं अथवा अपने अिभकतार् ᳇ारा साक्षी की पर्ितपरीक्षा करने का अवसर िमल गया था;
(ग) यिद अिभसा᭯य िकसी दांिडक कायर्वाही के दौरान िदया गया था तो, यह सािबत हो जाने पर िक अिभसा᭯य अिभयुक् त ᳞िक् त की उपिस्थित मᱶ िदया गया था,
और िकसी भी मामले मᱶ उस ᳞िक् त के हस्ताक्षर या पदीय हिैसयत को सािबत करना आवश्यक नहᱭ होगा िजसके ᳇ारा ऐसा कोई अिभसा᭯य हस्ताक्षिरत िकया गया पर्तीत होता ह ै और ऐसे ᳞िक् त ᳇ारा यह पर्माणपतर् िक पर्ितवादी या अिभयुक् त ᳞िक् त को साक्षी की पर्ितपरीक्षा करने का अवसर िमला था और यिद अिभसा᭯य िकसी दांिडक कायर्वाही मᱶ िदया गया था तो यह िक वह अिभयुक् त ᳞िक् त की उपिस्थित मᱶ िदया गया था, तब के िसवाय जब िक तत्पर्ितकूल सािबत कर िदया जाता ह,ै इस बात का पयार्प् त सा᭯य होगा िक उसे वह अवसर िमला था और ऐसा अिभसा᭯य इस पर्कार िदया गया था ।]
16. पर्ितकर के बारे मᱶ िववरिणया—ं3[राज्य सरकार] शासकीय राजपतर् मᱶ अिधसूचना ᳇ारा, िनदशे द े सकेगी िक 1 [कमर्चािरयᲂ] को िनयोिजत करने वाला हर ᳞िक् त या ऐसे ᳞िक् तयᲂ का कोई िविनिदष् ट वगर् ऐस ेसमय और ऐसे पर्रूप मᱶ और ऐसे पर्ािधकारी को, जैसे अिधसूचना मᱶ िविनिदष् ट िकए जाएं, एक शु िववरणी भेजेगा िजसमᱶ उन क्षितयᲂ की संख्या, िजनके िलए िनयोजक ᳇ारा पूवर्तन वषर् के दौरान पर्ितकर द ेिदया गया ह,ै और ऐसे पर्ितकर की रकम और पर्ितकर के बारे मᱶ ऐसी अन्य िविशिष् टयां िविनिदष् ट हᲂगी, जैसी3[राज्य सरकार] िनिदष् ट करे ।
17. सिंवदा ᳇ारा त्याग—इस अिधिनयम के पर्ारम्भ के चाह ेपूवर्, चाह ेपश् चात् की गई संिवदा या करार, िजसके ᳇ारा कोई 2 [कमर्चारी] िनयोजन से या उसके अनुकर्म मᱶ उद्भूत वैयिक् तक क्षित के िलए िनयोजक से पर्ितकर पाने के िकसी अिधकार का त्याग कर दतेा ह ैवहां तक बाितल और शून्य होगा जहां तक वह इस अिधिनयम के अधीन पर्ितकर दनेे के िकसी ᳞िक् त के दाियत्व को हटाने या कम करने के िलए तात्पियत ह ै।
4 [17क. िनयोजक का कमर्चारी को उसके अिधकारᲂ की जानकारी दने े का कतर्᳞ —पर्त्येक िनयोजक, िकसी कमर्चारी के िनयोजन के समय तत्काल, कमर्चारी को इस अिधिनयम के अधीन पर्ितकर संबधंी उसके अिधकारᲂ की िलिखत मᱶ और इलैक्टर्ािनक साधनᲂ के माध्यम से अंगर्ेजी या िहन्दी मᱶ या िनयोजन के के्षतर् की राजभाषा मᱶ, जो कमर्चारी समझता हो, जानकारी दगेा ।]
18. [आय ु का सबतू]—कमर्कार पर्ितकर (संशोधन) अिधिनयम, 1959 (1959 का 8) की धारा 12 ᳇ारा (1-6-1959 से) िनरिसत ।
1 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 3 ᳇ारा पर्ितस्थािपत ।
2 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत ।
16
1 [18क. शािस्तया—ं(1) जो कोई— (क) वह सूचना-पुस्तक रखने मᱶ असफल रहगेा िजसे रखने के िलए वह धारा 10 की उपधारा (3) के अधीन अपेिक्षत ह,ै अथवा
(ख) आयुक् त को वह िववरण भेजने मᱶ असफल रहगेा िजसे भेजने के िलए वह धारा 10क की उपधारा (1) के अधीन अपेिक्षत ह,ै अथवा
(ग) वह िरपोटर् भेजने मᱶ असफल रहगेा िजसे भेजने के िलए वह धारा 10ख के अधीन अपेिक्षत ह,ै अथवा (घ) वह िववरणी दनेे मᱶ असफल रहगेा िजसे दनेे के िलए वह धारा 162[के अधीन अपेिक्षत ह,ै या;] 3 [(ङ) कमर्चारी को ऐसे पर्ितकर संबंधी उसके अिधकारᲂ की जानकारी दनेे असफल रहगेा जो धारा 17क के अधीन अपेिक्षत ह,ै]
वह जुमार्ने से, जो2[जो पचास हजार रुपए से कम का नहᱭ होगा िकन्तु जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा] दण्डनीय होगा ।
(2) इस धारा के अधीन कोई भी अिभयोजन, आयुक् त के ᳇ारा या उसकी पूवर् मंजूरी से संिस्थत िकए जाने के िसवाय, संिस्थत नहᱭ िकया जाएगा, और कोई भी न्यायालय इस धारा के अधीन िकसी अपराध का संज्ञान तब तक नहᱭ करेगा जब तक िक अपराध के िलए पिरवाद4[उस तारीख से छह मास के भीतर नहᱭ िकया जाता िजस तारीख को अिभकिथत अपराध का िकया जाना, आयुक् त को ज्ञात हुआ था ।
अध्याय 3
आयकु् त
19. आयकु्तᲂ को िनदशे—(1) यिद पर्ितकर दनेे के िकसी ᳞िक् त के दाियत्व के िवषय मᱶ कोई पर्श् न के अन्तगर्त यह पर्श् न आता ह ैिक क्षत ᳞िक् त5[कमर्चारी] ह ैया नहᱭ), या पर्ितकर की रकम या अिस्तत्वाविध के िवषय मᱶ कोई पर्श् न (िजसके अन्तगर्त िनःशक् तता के पर्कार या िवस्तार िवषयक पर्श् न आता ह)ै इस अिधिनयम के अधीन की िकन्हᱭ कायर्वािहयᲂ मᱶ उठता ह ैतो वह पर्श् न करार के अभाव मᱶ6[आयुक् त] ᳇ारा तय िकया जाएगा ।
(2) िकसी भी िसिवल न्यायालय को िकसी ऐसे पर्श् न िजसके िलए इस अिधिनयम के ᳇ारा या अधीन यह अपेिक्षत ह ैिक वह आयुक् त ᳇ारा तय िकया जाए या िविनिश् चत िकया जाए या उसके बारे मᱶ कारर्वाई आयुक् त ᳇ारा की जाए तय करने, िविनिश् चत करने या उसके बारे मᱶ कारर्वाई करने की या इस अिधिनयम के अधीन उपगत िकसी दाियत्व को पर्वितत कराने की अिधकािरता न होगी ।
20. आयकु्तᲂ की िनयिुक् त—(1) राज्य सरकार िकसी भी ᳞िक् त को7[जो राज्य न्याियक सेवा का पांच वषर् से अन्यून की अविध के िलए सदस्य ह ैया रहा ह ैया पांच वषर् से अन्यून की अविध के िलए अिधवक् ता या प्लीडर ह ैया रहा ह ैया पांच वषर् से अन्यून अविध के िलए ऐसा राजपितर्त अिधकारी ह ैया रहा ह,ै जो कािमक पर्बंध, मानव संसाधन िवकास और औ᳒ोिगक संबंधᲂ मᱶ शैिक्षक अहर्ताएं और अनभुव रखता हो,] शासकीय राजपतर् मᱶ अिधसूचना ᳇ारा, ऐसे8*** के्षतर् के िलए5[कमर्चारी] पर्ितकर आयुक् त िनयुक् त कर सकेगी जो अिधसूचना मᱶ िविनिदष् ट िकया जाए ।
9 [(2) जहां िक िकसी 8 *** के्षतर् के िलए एक से अिधक आयुक् त िनयुक् त िकए गए ह ᱹवहां राज्य सरकार उनके बीच कारबार के िवतरण का िविनयमन साधारण या िवशेष आदशे ᳇ारा कर सकेगी ।]
10 [(3)] कोई भी आयुक् त इस अिधिनयम के अधीन िविनश् चय के िलए अपने को िनदᱷिशत िकसी िवषय को िविनिश् चत करने के पर्योजन के िलए ऐसे एक या अिधक व् यिक् तयᲂ को, जो जांचाधीन िवषय से सुसंगत िकसी िवषय का िवशेष ज्ञान रखते हᲂ, जांच करने मᱶ अपनी सहायता के िलए चुन सकेगा ।
10 [(4)] हर आयुक् त भारतीय दण्ड संिहता (1860 का 45) के अथर् के अन्दर लोक सेवक समझा जाएगा ।
21. कायर्वािहयᲂ का स्थान और अन्तरण—11[(1) जहां इस अिधिनयम के अधीन कोई बात आयुक् त ᳇ारा या उसके समक्ष की जानी ह ैवहां इस अिधिनयम के उपबंधᲂ और उसके अधीन बनाए गए िकन्हᱭ िनयमᲂ के अधीन रहते हुए, उस के्षतर् के आयुक् त ᳇ारा या उसके समक्ष की जाएगी िजसमᱶ—
1 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 11 ᳇ारा अन्तःस्थािपत ।
2 2017 के अिधिनयम सं० 11 की धारा 3 ᳇ारा पर्ितस्थािपत ।
3 2017 के अिधिनयम सं० 11 की धारा 3 ᳇ारा अंतःस्थािपत ।
4 1962 अिधिनयम सं० 64 की धारा 6 ᳇ारा (1-2-1963 से) कितपय शब्दᲂ के स्थान पर पर्ितस्थािपत ।
6 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 12 ᳇ारा "आयुक्त" के स्थान पर पर्ितस्थािपत ।
7 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 8 ᳇ारा अंतःस्थािपत ।
8 1962 अिधिनयम सं० 64 की धारा 7 ᳇ारा (1-2-1963 से) "स्थानीय" शब्द का लोप िकया गया । 9 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 13 ᳇ारा अंतःस्थािपत ।
10 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 3 ᳇ारा उपधारा (2) और (3) उस धारा की उपधारा (3) और (4) के रूप मᱶ पुनःसंख्यांिकत ।
17
(क) वह दघुर्टना हुई थी िजसके पिरणामस्वरूप क्षित हुई; या (ख)1[कमर्चारी] या उसकी मृत्यु की दशा मᱶ पर्ितकर के िलए दावा करने वाला आिशर्त साधारणतया िनवास करता ह;ै या
(ग) िनयोजक का रिजस्टर्ीकृत कायार्लय हःै
परन्तु िकसी भी मामले मᱶ ऐसे िकसी आयुक् त के समक्ष या उसके ᳇ारा, जो उस क्षेतर् पर िजसमᱶ दघुर्टना हुई ह,ै अिधकािरता रखने वाले आयुक् त से िभन् न ह,ै केन्दर्ीय सरकार ᳇ारा िविहत रीित से उसके ᳇ारा उस क्षेतर् पर अिधकािरता रखने वाले आयुक् त और संबंिधत राज्य सरकार को सूचना िदए िबना, कायर्वाही नहᱭ की जाएगीः
परन्तु यह और िक जहां1[कमर्चारी], िकसी पोत का मास्टर या नािवक ह ैअथवा िकसी वायुयान का कैप्टन या कमᱮदल का कोई सदस्य ह ैअथवा िकसी मोटर यान या कंपनी का1[कमर्चारी] ह,ै भारत से बाहर दघुर्टना का िशकार होता ह ैवहां ऐसी कोई बात उस के्षतर् के आयुक् त ᳇ारा या उसके समक्ष की जा सकेगी, िजसमᱶ, यथािस्थित, पोत, वायुयान या मोटर यान का स्वामी या अिभकतार् िनवास करता ह ैया कारबार चलाता ह ैअथवा कंपनी का रिजस्टर्ीकृत कायार्लय िस्थत ह ै।
(1क) यिद उस आयुक् त से िजसके पास धारा 8 के अधीन कोई धन जमा िकया गया ह,ै िभन् न कोई आयुक् त, इस अिधिनयम के अधीन िकसी मामले मᱶ कायर्वाही करता ह ैतो पश् चात्वतᱮ आयुक् त ऐसे मामले के उिचत िनपटारे के िलए िकसी अिभलेख के या पूवर्वतᱮ आयुक् त के पास शेष रह ेधन के अतंरण की मांग कर सकेगा और ऐसा अनुरोध पर्ाप् त होने पर वह आयुक् त उसका अनपुालन करेगा ।]
(2) यिद आयुक् त का2[समाधान हो जाता ह ैिक उसके समक्ष लिम्बत िकन्हᱭ कायर्वािहयᲂ से उद्भूत िकसी िवषय मᱶ] कारर्वाई िकसी अन्य आयुक् त ᳇ारा चाह ेवह उसी राज्य मᱶ हो या नहᱭ, अिधक सुिवधानुसार की जा सकती ह,ै तो इस अिधिनयम के अधीन बनाए गए िनयमᲂ के अध्यधीन रहते हुए वह यह आदशे द ेसकेगा िक ऐसा िवषय या तो िरपोटर् के िलए या िनपटाए जाने के िलए ऐसे अन्य आयुक् त को अन्तिरत कर िदया जाए और यिद वह ऐसा करता ह ैतो ऐसे िवषय के िविनश् चय के िलए सुसंगत सभी दस्तावेजᱶ ऐसे अन्य आयुक् त को अन्तिरत कर िदए जाएं और यिद वह ऐसा करता ह ैतो ऐसे िवषय के िविनश् चय के िलए सुसंगत सभी दस्तावेजᱶ ऐसे अन्य आयुक् त को तत्क्षण पारेिषत करेगा, और जहां िक िवषय िनपटाए जाने के िलए अन्तिरत िकया जाता ह ैवहां वह िकसी ऐसे धन को भी िविहत रीित से पारेिषत करेगा जो उसके पास शेष रहा ह ैया जो उसने कायर्वािहयᲂ मᱶ के िकसी पक्षकार के फायद ेके िलए िविनिहत िकया हःै
3 [परन्तु जहां िक कायर्वािहयᲂ मᱶ का कोई पक्षकार आयुक् त के समक्ष हािजर हुआ ह ैवहां आयुक् त आिशर्तᲂ के बीच िकसी एकमुश्त रािश के िवतरण से सम्ब अन्तरण का कोई आदशे, ऐसे पक्षकार को सुनवाई का अवसर िदए िबना, नहᱭ करेगाः] 4 * * * *
(3) वह आयुक् त, िजसे कोई िवषय इस पर्कार अन्तिरत िकया जाता ह,ै इस अिधिनयम के अधीन बनाए गए िनयमᲂ के अध्यधीन रहते हुए उसकी जांच करेगा और यिद वह िवषय िरपोटर् के िलए अन्तिरत िकया गया था तो उस पर अपनी िरपोटर् दगेा या यिद वह िवषय िनपटाए जान ेके िलए अन्तिरत िकया गया था तो कायर्वािहयᲂ को ऐसे चालू रखेगा मानो वे मलूतः उसके ही समक्ष पर्ारम्भ हुई थᱭ ।
(4) उस आयुक् त से िजसे कोई िवषय उपधारा (2) के अधीन िरपोटर् के िलए अन्तिरत िकया गया ह ै िरपोटर् िमलने पर वह आयुक् त, िजसके ᳇ारा वह िनदᱷिशत िकया गया था, िनदᱷिशत िवषय को ऐसी िरपोटर् के अनुरूप िविनश् चय करेगा । 5 [(5) राज्य सरकार िकसी भी मामले को अपने ᳇ारा िनयुक् त िकसी आयुक् त से अपने ᳇ारा िनयुक् त िकसी अन्य आयुक् त को अन्तिरत कर सकेगी ।]
22. आवदेन का पर्रूप—6[(1) जहां कोई ऐसी दघुर्टना हो जाती ह ैिजसकी बाबत इस अिधिनयम के अधीन पर्ितकर का संदाय करने का दाियत्व उद्भूत होता ह ैवहां ऐसे पर्ितकर के िलए कोई दावा इस अिधिनयम के उपबन्धᲂ के अधीन रहते हुए, आयुक् त के समक्ष िकया जा सकेगा ।
(1क) उपधारा (1) के उपबन्धᲂ के अधीन रहते हुए, िकसी िवषय के आयुक् त ᳇ारा तय िकए जाने के िलए कोई भी आवेदन] 7 [जो आिशर्त या आिशर्तᲂ ᳇ारा पर्ितकर के िलए िकए गए आवेदन से िभन् न हᲂ] न िकया जाएगा यिद और जब तक उसके संबंध मᱶ पक्षकारᲂ के बीच ऐसा कोई पर्श् न न उठा हो िजसे वे करार ᳇ारा तय करने मᱶ असमथर् रह ेहᲂ ।
4 1995 अिधिनयम सं० 30 की धारा 10 ᳇ारा (15-9-1995 से) दसूरे परन्तुक का लोप िकया गया । 5 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 14 ᳇ारा अंतःस्थािपत ।
18
(2)1[आयुक् त को आवेदन] ऐसे पर्रूप मᱶ, जैसा िविहत िकया जाए, िकया जा सकेगा और उसके साथ ऐसी फीस होगी, यिद कोई हो, जैसी िविहत की जाए, और उसमᱶ िकन्हᱭ ऐसी िविशिष् टयᲂ के अितिरक् त, जैसी िविहत की जाएं, िनम् निलिखत िविशिष् टयां अन्तिवष् ट हᲂगी, अथार्त्—
(क) उन पिरिस्थितयᲂ का संिक्षप् त कथन िजनमᱶ आवेदन िकया गया ह ैऔर वह अनुतोष या आदशे, िजसका आवेदक दावा करता ह;ै
(ख) िनयोजक के िवरु पर्ितकर के िलए दावे की दशा मᱶ वह तारीख िजसकी दघुर्टना की सूचना की िनयोजक पर तामील हुई थी, और, यिद ऐसी सूचना की तामील नहᱭ हुई या सम्यक् समय मᱶ नहᱭ हुई तो ऐसे लोप का कारण; (ग) पक्षकारᲂ के नाम और पत;े या
(घ)2[आिशर्तᲂ ᳇ारा पर्ितकर के िलए आवेदन की दशा के िसवाय] उन मामलᲂ का, िजनके बारे मᱶ करार हो चुका ह ै और उन मामलᲂ3[का] िजनके बारे मᱶ करार नहᱭ हुआ ह,ै संिक्षप् त कथन ।
(3) यिद आवेदक िनरक्षर ह ैया िकसी अन्य कारण से अपेिक्षत जानकारी िलिखत रूप मᱶ दनेे मᱶ असमथर् ह ैतो, यिद आवेदक ऐसा करना चाह ेतो, आवेदन आयुक् त के िनदशेाधीन तैयार िकया जाएगा ।
4 [22क. पर्ाणान्तक दघुर्टना की दशाᲐ मᱶ अितिरक् त िनक्षपे अपिेक्षत करन े की आयकु् त की शिक् त—(1) जहां िक ऐसे 5 [कमर्चारी] के बारे मᱶ, िजसकी मृत्यु क्षित के पिरणामस्वरूप हो गई ह,ै संदये पर्ितकर के रूप मᱶ कोई रािश िनयोजक ᳇ारा िनिक्षप् त की गई ह ैऔर आयुक् त की राय मᱶ ऐसी रािश अपयार्प् त ह ैवहां आयुक् त अपने कारणᲂ को किथत करते हुए िलिखत सूचना ᳇ारा िनयोजक को इस बात का हतेुक दिशत करने के िलए अपेिक्षत कर सकेगा िक वह इतने समय के भीतर, िजतना सूचना मᱶ किथत िकया जाए, अितिरक् त िनक्षेप क्यᲂ न करे ।
(2) यिद िनयोजक आयुक् त को समाधानपर्द रूप मᱶ हतेुक दिशत करने मᱶ असफल रहता ह ैतो आयुक् त कुल संदये रकम को अवधािरत करने वाला और िनयोजक से यह अपेक्षा करने वाला अिधिनणर्य द ेसकेगा िक वह उतनी रािश िनिक्षप् त कर द े िजतनी कम ह ै।]
23. आयकु्तᲂ की शिक् तया ं और पर्िकर्या—आयुक् त को, ऐसी शपथ पर (िजसे अिधरोिपत करने के िलए आयुक् त एतद ्᳇ारा सशक् त िकया जाता ह)ै सा᭯य लेने और सािक्षयᲂ को हािजर कराने और दस्तावेजᲂ और भौितक पदाथᲄ को पेश करने के िलए िववश करने के पर्योजन के िलए िसिवल पर्िकर्या संिहता, 1908 (1908 का 5) के अधीन की िसिवल न्यायालय की सभी शिक् तयां पर्ाप् त हᲂगी 6 [और आयुक् त 7 [दण्ड पर्िकर्या संिहता, 1973 (1974 का 2) की धारा 195 के और अध्याय 26] के सभी पर्योजनᲂ के िलए िसिवल न्यायालय समझा जाएगा ।]
8 [24. पक्षकारᲂ की हािजरी—िकसी पक्षकार की साक्षी के रूप मᱶ उसकी परीक्षा के पर्योजन के िलए अपेिक्षत हािजरी से िभन् न कोई हािजरी, आवेदन या कायर् जो िकसी ᳞िक् त ᳇ारा आयुक् त के समक्ष या आयुक् त से िकए जान ेके िलए अपेिक्षत ह,ै ऐसे ᳞िक् त की ओर से िकसी िविध ᳞वसायी ᳇ारा या बीमा कम्पनी या रिजस्टर्ीकृत ᳞वसाय सघं के पदधारी ᳇ारा, या कारखाना अिधिनयम, 1948 (1948 का 63) की धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन या खान अिधिनयम, 1952 (1952 का 35) की धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन िनयुक् त िनरीक्षक ᳇ारा, या राज्य सरकार ᳇ारा इस िनिमᱫ िविनिदष् ट िकसी अन्य आिफसर ᳇ारा जो ऐसे ᳞िक् त ᳇ारा िलिखत रूप मᱶ पर्ािधकृत हो, या आयुक् त की अनुज्ञा से, इस पर्कार पर्ािधकृत िकसी अन्य ᳞िक् त ᳇ारा, िकया जा सकेगा ।]9
25. सा᭯य अिभिलिखत करने का ढंग—जैस-ेजैसे हर साक्षी की परीक्षा होती जाएगी वैसे-वैसे आयुक् त उस साक्षी के सा᭯य के सार का संिक्षप् त ज्ञापन बनाता जाएगा और ऐसा ज्ञापन आयुक् त ᳇ारा अपने हाथ से िलखा और हस्ताक्षिरत िकया जाएगा और अिभलखे का भाग होगाः
परन्तु यिद आयुक् त ऐसा ज्ञापन बनाने से िनवािरत हो जाता ह ै तो वह ऐसा करने की अपनी असमथर्ता का कारण अिभिलिखत करेगा और स्वयं बोल कर ऐसा ज्ञापन िलिखत रूप मᱶ तैयार कराएगा और उसे हस्ताक्षिरत करेगा और ऐसा ज्ञापन अिभलेख का भाग होगाः
परन्तु यह और िक िकसी िचिकत्सीय साक्षी का सा᭯य यावत्शक्य शब्दशः िलखा जाएगा ।
19
1 [25क. पर्ितकर स ेसबंिंधत िवषयᲂ के िनपटान के िलए समय सीमा—आयुक् त, िनदᱷश की तारीख से, तीन मास की अविध के भीतर इस अिधिनयम के अधीन पर्ितकर से संबंिधत मामले का िनपटान करेगा और कमर्चारी को उक् त अविध के भीतर उसके संबंध मᱶ िविनश् चय के बारे मᱶ सूिचत करेगा ।]
26. खचᱷ—आयुक् त के समक्ष की कायर्वािहयᲂ के आनुषंिगक सभी खचᱷ इस अिधिनयम के अधीन बनाए गए िनयमᲂ के अध्यधीन रहते हुए आयुक् त के िववेकाधीन हᲂगे ।
27. मामलᲂ को िनविेदत करन े की शिक् त—यिद आयुक् त उिचत समझे तो वह िविध का पर्श् न िविनश् चय के िलए उच् च न्यायालय को िनवेिदत कर सकेगा और यिद वह ऐसा करता ह ैतो वह उस पर्श् न को ऐसे िविनश् चय के अनुरूप िविनिश् चत करेगा ।
28. करारᲂ का रिजस्टर्ीकरण—(1) जहां िक पर्ितकर के रूप मᱶ संदये कोई एकमुश्त रािश की रकम, करार ᳇ारा, चाह े अधर्मािसक संदायᲂ से मोचन के तौर पर या अन्यथा, तय हो गई ह ैया जहां िक कोई पर्ितकर इसी पर्कार तय हो गई ह ैिक वह2[िकसी स् तर्ी को या िविधक िनयᲃग्यता के अधीन िकसी ᳞िक् त को]3*** संदये ह,ै वहां उसका एक ज्ञापन िनयोजक ᳇ारा आयुक् त को भेजा जाएगा, जो उसके असली होने के िवषय मᱶ अपना समाधान हो जाने पर ज्ञापन को रिजस्टर मᱶ िविहत रूप मᱶ अिभिलिखत करेगाः परन्तु—
(क) ऐसा कोई ज्ञापन आयुक् त ᳇ारा संब पक्षकारᲂ को सूचना के संसूिचत िकए जाने के पश् चात् सात िदन से पहले अिभिलिखत नहᱭ िकया जाएगा;
4* * * *
(ग) आयुक् त िकसी भी समय रिजस्टर को पिरशु कर सकेगाः
(घ) जहां िक आयुक् त को पर्तीत हो िक िकसी एकमुश्त रािश के संदाय के बारे मᱶ कोई करार, वह चाह ेअधर्मािसक संदाय से मोचन के तौर पर हो या अन्यथा हो, या2[िकसी स् तर्ी को या िविधक िनयᲃग्यता के अधीन िकसी ᳞िक् त को]5*** संदये पर्ितकर की रकम के बारे मᱶ कोई करार, रािश या रकम की अपयार्प् तता के कारण या कपट या असम्यक् असर या अन्य अनुिचत साधनᲂ ᳇ारा उस करार के अिभपर्ाप् त िकए जाने के कारण रिजस्टर्ीकृत नहᱭ िकया जाना चािहए वहां वह करार के ज्ञापन को अिभिलिखत करने से इन्कार कर सकेगा6[और ऐसा आदशे िजसके अन्तगर्त करार के अधीन पहले दी गई िकसी रािश के बारे मᱶ कोई आदशे आता ह,ै कर सकेगा] जैसा वह पिरिस्थितयᲂ मᱶ न्यायसंगत समझे ।
(2) पर्ितकर के संदाय के िलए जो करार उपधारा (1) के अधीन रिजस्टर्ीकृत िकया जा चुका ह,ै वह भारतीय संिवदा अिधिनयम, 1872 (1872 का 9) मᱶ या िकसी अन्य तत्समय पर्वᱫृ िविध मᱶ िकसी बात के होते हुए भी, इस अिधिनयम के अधीन पर्वतर्नीय होगा ।
29. करार को रिजस्टर्ीकृत करान ेमᱶ असफल रहन ेका पर्भाव—जहां िक ऐसे िकसी करार का ज्ञापन, िजसका रिजस्टर्ीकरण धारा 28 ᳇ारा अपेिक्षत ह,ै उस धारा की अपेक्षानुसार आयुक् त को नहᱭ भेजा गया ह ैवहां, िनयोजक उस पर्ितकर की कुल रकम दनेे का दायी होगा िजसे वह इस अिधिनयम के उपबन्धᲂ के अधीन दनेे का दायी ह ैऔर, जब तक िक आयुक् त अन्यथा, िनिदष् ट न करे, वह िकसी रकम की, जो पर्ितकर के तौर पर चाह ेउसे करार के अधीन या अन् यथा,7[कमर्चारी] को दी गई ह,ै आधी से अिधक रकम काट लेने के िलए, धारा 4 की उपधारा (1) के परन्तुक मᱶ िकसी बात के होते हुए भी हकदार नहᱭ होगा ।
30. अपीलᱶ—(1) आयुक् त के िनम् निलिखत आदशेᲂ से अपील उच् च न्यायालय मᱶ होगी, अथार्त्:— (क) पर्ितकर के रूप मᱶ एकमुश्त रािश को चाह ेअधर्मािसक संदाय से मोचन के तौर पर या अन्यथा, अिधिनणᱮत करने वाला या एकमुश्त रािश के दावे को पूणर्तः या भागतः अननजु्ञात करने वाला आदशे; 8[(कक) धारा 4क के अधीन ब्याज या शािस्त अिधिनणᱮत करने वाला आदशे;]
(ख) अधर्मािसक संदाय से मोचन अनुज्ञात करने से इन्कार करने वाला आदशे; (ग) मतृ7[कमर्चारी] के आिशर्तᲂ के बीच पर्ितकर के िवतरण का उपबन्ध करने वाला आदशे या िकसी ऐसे ᳞िक् त के दावे को जो यह अिभकथन करता हो िक वह ऐसा आिशर्त ह,ै अनुज्ञात करने वाला आदशे; (घ) धारा 12 की उपधारा (2) के उपबन्धᲂ के अधीन क्षितपूित की रकम के िकसी दावे को अनुज्ञात या अननजु्ञात करने वाला आदशे; अथवा
1 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 9 ᳇ारा अंतःस्थािपत ।
2 1929 के अिधिनयम सं० 5 की धारा 6 ᳇ारा कितपय शब्दᲂ के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 3 1924 के अिधिनयम सं० 7 की धारा 3 और अनुसूची 2 ᳇ारा "या आिशर्त को" शब्दᲂ का लोप िकया गया । 4 1929 के अिधिनयम सं० 5 की धारा 6 ᳇ारा खण्ड (ख) का लोप िकया गया ।
5 1924 के अिधिनयम सं० 7 की धारा 3 और अनुसूची 2 ᳇ारा "या िकसी आिशर्त को" शब्दᲂ का लोप िकया गया । 6 1924 के अिधिनयम सं० 7 की धारा 2 और अनुसूची 1 ᳇ारा "या ऐसा आदशे कर सकेगा" के स्थान पर पर्ितस्थािपत ।
8 1959 के अिधिनयम सं० 8 की धारा 15 ᳇ारा (1-6-1959 से) अन्तःस्थािपत ।
20
(ङ) करार के ज्ञापन को रिजस्टर्ीकृत करने से इंकार करने वाला या उसे रिजस्टर्ीकृत करने वाला या यह उपबन्ध करने वाला िक उसका रिजस्टर्ीकरण शतᲄ के अधीन होगा, आदशेः
परन्तु जब तक िक अपील मᱶ सारवान् िविध-पर्श् न अन्तवर्िलत न हो, और खण्ड (ख) मᱶ यथािनिदष् ट आदशे से िभन् न आदशे की दशा मᱶ जब तक िक अपील मᱶ िववादगर्स्त रकम1[दस हजार रुपए या ऐसी उच् चतर रकम जो केन्दर्ीय सरकार राजपतर् मᱶ अिधसूचना ᳇ारा िविनिदष् ट करे] से अन्यून न हो, आदशे के िवरु कोई भी अपील नहᱭ होगीः
परन्तु यह और िक िकसी ऐसे मामले मᱶ, िजसमᱶ पक्षकारᲂ ने आयुक् त के िविनश् चय का पालन करने के िलए कोई करार कर िलया ह ैया िजसमᱶ आयुक् त का आदशे पक्षकारᲂ मᱶ हुए करार को पर्भावशाली करता ह,ै कोई भी अपील नहᱭ होगीः 2 [परन्तु यह और िक जब तक िक अपील के ज्ञापन के साथ आयुक् त ᳇ारा िदया गया इस भाव का पर्माणपतर् न हो िक अपीलाथᱮ ने उसके पास वह रकम िनिक्षप् त कर दी ह ैजो उस आदशे के अधीन संदये ह ैिजसके िवरु अपील की गई ह,ै िनयोजक ᳇ारा खण्ड (क) के अधीन कोई भी अपील नहᱭ होगी ।]
(2) इस धारा के अधीन अपील के िलए पिरसीमाकाल साठ िदन का होगा । (3)3[पिरसीमा अिधिनयम, 1963 (1963 का 36)] की धारा 5 के उपबन्ध इस धारा के अधीन की अपीलᲂ को लागू हᲂगे । 4 * * * *
31. वसलूी—आयुक् त िकसी ऐसी रकम को, जो पर्ितकर के संदाय के िकसी करार के अधीन या अन्यथा िकसी ᳞िक् त ᳇ारा इस अिधिनयम के अधीन संदये हो, भू-राजस्व की बकाया के रूप मᱶ वसलू कर सकेगा और आयुक् त राजस्व वसूली अिधिनयम, 1890 (1890 का 1)5की धारा 5 के अथर् के अन्दर लोक अिधकारी समझा जाएगा ।
अध्याय 4
िनयम
32. िनयम बनान ेकी राज्य सरकार की शिक् त—(1)6[राज्य सरकार] इस अिधिनयम के पर्योजनᲂ को कायार्िन्वत करने के िलए िनयम7बना सकेगी ।
(2) िविशष् टतः और पूवर्गामी की ᳞ापकता पर पर्ितकूल पर्भाव डाले िबना ऐसे िनयम िनम् निलिखत सभी िवषयᲂ के िलए या उनमᱶ से िकसी के िलए उपबंध कर सकᱶ गे, अथार्त्—
(क) उन अन्तरालᲂ और शतᲄ को िविहत करना िजन पर पुनिवलोकन के िलए आवेदन धारा 6 के अधीन िकया जा सकेगा, यिद उसके साथ िचिकत्सीय-पर्माणपतर् न हो;
(ख) उन अन्तरालᲂ और शतᲄ को िविहत करना, िजन पर कोई8[कमर्चारी] िचिकत्सीय परीक्षा कराने के िलए धारा 11 की उपधारा (1) के अधीन अपने को पर्स्तुत करने के िलए अपेिक्षत िकया जा सकेगा; (ग) वह पर्िकर्या िविहत करना िजसका अनसुरण इस अिधिनयम के अधीन मामलᲂ को िनपटाने मᱶ आयुक् त ᳇ारा और ऐसे मामलᲂ मᱶ पक्षकारᲂ ᳇ारा िकया जाना ह;ै
(घ) एक आयुक् त से दसूरे को िवषयᲂ और मामलᲂ के अन्तरण को और ऐसे मामलᲂ मᱶ धन के अन्तरण को िविनयिमत करना;
(ङ) वह रीित िविहत करना, िजसमᱶ आयुक् त के पास के धन को िकसी मृत7[कमर्चारी] के आिशर्तᲂ के फायद ेके िलए िविनिहत िकया जा सकेगा, और इस पर्कार िविनिहत धन एक आयुक् त से िकसी अन्य आयुक् त को अन्तिरत करना; (च) आयुक्तᲂ के समक्ष की कायर्वािहयᲂ मᱶ ऐसे पक्षकारᲂ का पर्ितिनिधत्व जो अपर्ाप् तवय ह ै या हािजर होने मᱶ असमथर् ह;ै9
(छ) वह पर्रूप और रीित िविहत करना िजसमᱶ करारᲂ के ज्ञापन उपिस्थत िकए जाएंगे और रिजस्टर्ीकृत िकए जाएंग;े
1 2017 के अिधिनयम सं० 11 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत ।
2 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 17 ᳇ारा अंतःस्थािपत ।
3 1995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 13 ᳇ारा (15-9-1995 से) कितपय शब्दᲂ के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 4 2017 के अिधिनयम सं० 11 की धारा 5 ᳇ारा लोप िकया गया ।
5 बंगाल टाउट्स ऐक्ट, 1942 (1942 के बंगाल अिधिनयम 5) की धारा 18 ᳇ारा नई धारा 31क को इस अिधिनयम को बंगाल मᱶ लागू करने के िलए अंतःस्थािपत िकया गया ।
6 िविध अनुकूलन आदेश, 1937 ᳇ारा "सपिरषद ्गवनर्र जनरल" के स्थान पर पर्ितस्थािपत ।
8 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत ।
21
(ज) अधर्मािसक संदायᲂ के पुनिवलोकन के आवेदनᲂ पर िविनश् चय होने तक उन सदंायᲂ का आयुक् त ᳇ारा पूणर्तः या भागतः िवधािरत रखा जाना,1***
1* * * *
1[(झ) इस अिधिनयम के अधीन की कायर्वािहयᲂ मᱶ जो खचर् अनुज्ञात िकए जा सकᱶ गे उनके मापमान िविनयिमत करना;
(ञ) इस अिधिनयम के अधीन आयुक् त के समक्ष की कायर्वािहयᲂ के संबंध मᱶ दये फीसᲂ की रकम िविहत और अवधािरत करना;
(ट) आयुक्तᲂ ᳇ारा अपने समक्ष की कायर्वािहयᲂ के रिजस्टरᲂ और अिभलेखᲂ का रखा जाना; (ठ) उन िनयोजकᲂ के वगर् जो धारा 10 की उपधारा (3) के अधीन सूचना-पुस्तकᱶ रखᱶगे और ऐसी सूचना-पुस्तकᲂ के पर्रूप िविहत करना;
(ड) िनयोजकᲂ ᳇ारा धारा 10क के अधीन िनवेिदत िकए जाने वाले िववरण का पर्रूप िविहत करना;2*** (ढ) उन मामलᲂ को िविहत करना, िजनमᱶ धारा 10ख मᱶ िनिदष् ट िरपोटर् आयुक् त से िभन् न पर्ािधकारी को भेजी जा सकेगी;]
3 [(ण) इस अिधिनयम की संिक्षिप् तयां िविहत करना और ऐसी संिक्षिप् तयᲂ को अन्तिवष् ट करने वाली सूचनाएं संपर्दिशत करने की िनयोजकᲂ से अपेक्षा करना;
(त) वह रीित िविहत करना िजसमᱶ उपजीिवकाजन्य रोगᲂ के रूप मᱶ िविनिदष् ट िकए गए रोगᲂ का िनदान िकया जा सकेगा;
(थ) वह रीित िविहत करना िजसमᱶ रोगᲂ को इस अिधिनयम के पर्योजनᲂ मᱶ से िकसी के िलए पर्मािणत िकया जा सकेगा;
(द) वह रीित िविहत करना िजसमᱶ और वे मानक िजनके अनसुार असामथ्यर् का िनधार्रण िकया जा सकेगा ।] 4 [(3) इस धारा के अधीन बनाया गया पर्त्येक िनयम, बनाए जान ेके पश् चात् यथाशीघर्, राज्य िवधान-मंडल के समक्ष रखा जाएगा ।]
33. [स्थानीय सरकार की िनयम बनान े की शिक् त ।]—भारत शासन (भारतीय िविध अनुकूलन) आदशे, 1937 ᳇ारा िनरिसत ।
34. िनयमᲂ का पर्काशन—(1)5[धारा 32] ᳇ारा पर्दᱫ िनयम बनाने की शिक् त इस शतर् के अध्यधीन होगी िक िनयम पूवर् पर्काशन के पश् चात् बनाए जाएं ।
(2) साधारण खण्ड अिधिनयम, 1897 (1897 का 10) की धारा 23 के खण्ड (3) के अनुसार िविनिदष् ट की जाने वाली वह तारीख, िजसके पश् चात् उन िनयमᲂ के पर्ारूप पर िवचार िकया जाएगा जो धारा 326*** के अधीन बनाए जाने के िलए पर्स्थािपत हᲂ, उस तारीख से तीन मास कम की न होगी िजसको पर्स्थािपत िविनयमᲂ का पर्ारूप सवर्साधारण की जानकारी के िलए पर्कािशत िकया गया था ।
(3) इस पर्कार बनाए गए िनयम7***8*** शासकीय राजपतर् मᱶ पर्कािशत िकए जाएंगे और ऐसे पर्काशन पर ऐसा पर्भाव रखᱶगे मानो वे इस अिधिनयम मᱶ अिधिनयिमत हᲂ ।
9 [35. पर्ितकर के रूप मᱶ िदए गए धन के अन्तरण के िलए अन्य दशेᲂ के साथ िकए गए ठहरावᲂ को िकर्यािन्वत करन ेके िलए िनयम—10[(1)] केन्दर्ीय सरकार इस अिधिनयम के अधीन आयुक् त के11[पास िनिक्षप् त] ऐसे धन को,12[जो ऐसे ᳞िक् त को अिधिनणᱮत
22
हुआ हो या शोध्य हो] जो1***2[िकसी िवदशे मᱶ] िनवास करता ह ैया करने जा रहा ह,ै3[ऐसे िवदशे मᱶ] अन्तिरत को िकर्यािन्वत करने के िलए िनयम अतंिरत करने के िलए, और4[कमर्चािरयᲂ] के पर्ितकर से सम्बिन्धत िविध के अधीन5***6***7***7[िनिक्षप् त] िकसी ऐसे धन की,8[जो िकसी ऐसे ᳞िक् त को अिधिनणᱮत हुआ हो, या शोध्य हो] जो9[िकसी राज्य] मᱶ िनवास करता ह ैया करने जा रहा ह,ै 9 [िकसी राज्य] मᱶ पर्ािप् त 10 [िवतरण] और पर्शासन के िलए िनयम, शासकीय राजपतर् मᱶ अिधसूचना ᳇ारा, बना सकेगी]:] 10 [परन्तु पर्ाणान्तक दघुर्टनाᲐ के सम्बन्ध मᱶ इस अिधिनयम के अधीन िनिक्षप् त कोई भी रािश, संपृक् त िनयोजक की सम्मित के िबना, तब
अनुसार इस पर्कार अन्तिरत कर िदया
गया ह ैवह
गए िनयमᲂ का ससंद ्के समक्ष रखा जाना—इस अिधिनयम के अधीन केन्दर्ीय सरकार
᳇ारा बना
1
[धारा ए] उन क्षितयᲂ की सचूी िजनके बारे मᱶ जाता ह ैिक उनके पिरणामस्वरूप कर्म संख्यांक क्षित का वणर्न उपाजर्न सामथ्यर् की तक ऐसे अन्तिरत न की जाएगी जब तक रािश पर्ाप् त करने वाले आयुक् त ने धारा 8 की उपधाराᲐ (4) और (5) के उपबन्धᲂ के अधीन उसके िवतरण और पर्भाजन को अवधािरत करने वाला आदशे पािरत न कर िदया हो ।
(2) जहां िक आयुक् त के पास िनिक्षप् त धन, इस धारा के अधीन बनाए गए िनयमᲂ के ां, आयुक् त के पास िनिक्षप् त पर्ितकर के स्वयं उसके ᳇ारा िवतरण के सम्बन्ध मᱶ इस अिधिनयम मᱶ अन्यतर् अंतिवष् ट उपबधं ऐस े िकसी धन के िवषय मᱶ लागू रह जाएंगे ।
11 [36. केन्दर्ीय सरकार ᳇ारा बनाए
या गया पर्त्येक िनयम बनाए जाने के पश् चात् यथाशीघर्, संसद ्के पर्त्येक सदन के समक्ष, जब वह सतर् मᱶ हो, तीस िदन की अविध के िलए रखा जाएगा । यह अविध एक सतर् मᱶ अथवा12[दो या अिधक आनुकर्िमक सतर्ᲂ मᱶ पूरी हो सकेगी ।] यिद उस सतर् के या पूवᲃक् त आनुकर्िमक सतर्ᲂ के ठीक बाद के सतर् के अवसान के पूवर् दोनᲂ सदन उस िनयम मᱶ कोई पिरवतर्न करने के िलए सहमत हो जाएं तो तत्पश् चात् वह ऐसे पिरवितत रूप मᱶ ही पर्भावी होगा । यिद उक् त अवसान के पूवर् दोनᲂ सदन सहमत हो जाएं िक वह िनयम नहᱭ बनाया जाना चािहए तो तत्पश् चात् वह िनष्पर्भाव हो जाएगा । िकन्तु िनयम के ऐसे पिरवितत या िनष्पर्भाव होने से उसके अधीन पहले की गई िकसी बात की िविधमान्यता पर पर्ितकूल पर्भाव नहᱭ पड़गेा ।]
13 [अनुसूची
2(1) और 4 दिेख 14 [भाग 1
समझा स्थायी पणूर् आिंशक िनःशक् तता हुई ह]ᱹ हािन का पर्ितशत
1. दोनᲂ हाथᲂ की हािन या उच् चतर स्थानᲂ पर िवच्छेदन. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 100
2. एक हाथ और एक पाद की हािन. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 100
3. टांग या ऊरु से दोहरा िवच्छेदन, या एक ओर टांग या उरु से िवच्छेदन और दसूरे पाद की हािन. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . दक्ृ शिक् त की इस िवस्तार तक हािन िक दावेदार ऐसा कोई काम करने मᱶ असमथर् हो
100
4.
100
5.
जाता ह ैिजसके िलए दक्ृ शिक् त आवश्यक ह.ै . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . चेहरे की बहुत गम्भीर िवदर्पूता. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 100
6. पूणर् बिधरता. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 100 1 िविध अनुकूलन आदेश, 1948 ᳇ारा अंतःस्थािपत "िकसी भाग ख राज्य को या" शब्द और अक्षरᲂ का 1951 के अिधिनयम सं० 3 की धारा 3 और अनुसूची ᳇ारा लोप िकया गया ।
2 1984 के अिधिनयम सं० 22 की धारा 5 ᳇ारा (1-7-1984 से) कितपय शब् दᲂ के स्थान पर पर्ितस्थािपत ।
3 1984 के अिधिनयम सं० 22 की धारा 5 ᳇ारा (1-7-1984 से) "ऐसे भाग या दशे मᱶ" के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 4 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत ।
5 िविध अनुकूलन आदेश, 1950 ᳇ारा "िकसी भाग ख राज्यᲂ मᱶ या" अंतःस्थािपत शब्दᲂ मᱶ से "िकसी भाग ख राज्य मᱶ" शब्दᲂ और अक्षरᲂ का 1951 के अिधिनयम सं० 3 की धारा 3 और अनुसूची 2 ᳇ारा और "या" शब्द का 1957 के अिधिनयम 36 की धारा 3 और अनुसूची ᳇ारा लोप िकया गया । 6 1984 के अिधिनयम सं० 22 की धारा 5 ᳇ारा (1-7-1984 से) कितपय शब्दᲂ के स्थान पर पर्ितस्थािपत ।
11 1962 के अिधिनयम सं० 64 की धारा 8 ᳇ारा (1-2-1963 से) अंतःस्थािपत ।
23
कर्म स ंक र्न सामथ्यर् की ंख्या क्षित का वणर्न उपाज हािन का पर्ितशत
1 [भाग 2
उन क्षितयᲂ की सचूी िजनक समझा जाता ह ैिक उनके े बारे मᱶ पिरणामस्वरूप स्थायी पणूर् आिंशक िनःशक् तता हुई ह]ै 2 [1] स्कन्ध संिध से िवच् . . . . . . . . . . . 0
80
2 [3]
70
2 [4]
4
60
2 [5]
2 [ दोनᲂ पादᲂ का िवच्छेदन िज रह जाए. . . . . . . . . . . . 0
80
2 [18]
4
70
2 [19]
िवच्छेदन के मामल—ेऊध्वर् शाखा (कोई भी भजुा) छेदन. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . .9 2 [2] स्कन्ध से नीचे िवच्छेदन, जब िक स्थूणक अंसकूट के िसरे के 3 [20.32 स०ेमी०] से कम हो. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . अंसकूट के िसरे से4[20.32 से०मी०] से कूपर्र के िसरे के नीचे4[11.43 से०मी०] से कम
तक िवच्छेदन. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . एक हाथ की या एक हाथ के अंगूठे और चारᲂ अंगिुलयᲂ की हािन, या कूपर्र के िसरे से
[11.43 से०मी०] से नीचे िवच्छेदन. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . अंगूठे की हािन. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 30 2 [6] अंगूठे की और उसकी करभ-अिस्थ की हािन. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 40 2 [7] एक हाथ की चार अंगुिलयᲂ की हािन. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 50 2 [8] एक हाथ की तीन अंगुिलयᲂ की हािन. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 30 2 [9] एक हाथ की दो अंगुिलयᲂ की हािन. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 20 2 [10] अंगूठे की अिन्तम अंगुिल-अिस्थ की हािन. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 20 5 [10क] अिस्थ की हािन के िबना अंगूठे के िसरे का िगलोिटन िवच्छेदन. . . . . . . . . . . . . . . . . . 10 िवच्छेदन के मामल—ेअधःशाखा
11]
सके पिरणामस्वरूप अन्तांग मातर्
9
2 [12] पर्पदानगुिल-अिस्थ संिध से दोनᲂ पादᲂ की सब अंगुिलयᲂ की हािन. . . . . . . . . . . . . . . 80 2 [13] पर्पंदागुिल-अिस्थ संिध से दोनᲂ पादᲂ की सब अंगुिलयᲂ की हािन. . . . . . . . . . . . . . . . 40 2 [14] िनकटस्थ अन्तरांगुिल-अिस्थ संिध के िनकट दोनᲂ पादᲂ की सब अंगुिलयᲂ की हािन. . . . 30 2 [15] िनकटस्थ अंतरांगुिल-अिस्थ संिध से दरू दोनᲂ पादᲂ की सब अंगुिलयᲂ की हािन. . . . . . 20 2 [16] िनतम्ब पर िवच्छेदन. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 90 2 [17] िनतम्ब से नीचे िवच्छेदन, जब िक स्थूणक बृहत् उरु-अिस्थ के िसरे से नापे जाने पर 4 [12.70 से०मी०] से अिधक लम्बा न हो. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . िनतम्ब से नीचे िवच्छेदन, जब िक स्थूणक वृह्त उरु-अिस्थ के िसरे से नापे जाने पर
[8.89 से०मी०] से अिधक लम्बा हो, िकन्तु मध्योरु से आगे न हो. . . . . . . . . . . . . . . मध्योरु के नीचे से घुटने के4[8.89 से०मी०] नीचे तक िवच्छेदन. . . . . . . . . . . . . . . .60 2 [20] घुटने से नीचे िवच्छेदन, जब िक स्थूणक 4 [8.89 से०मी०] से अिधक हो, िकन्तु 5" से अिधक न हो. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . .
50
1 1962 के अिधिनयम सं० 64 की धारा 9 ᳇ारा (1-2-1963 से) अन्तःस्थािपत । 2 1962 के अिधिनयम सं० 64 की धारा 9 ᳇ारा (1-2-1963 से) पर्िवष् ट सं० 7 से 54 तक को कर्मशः 1 से 48 तक के रूप मᱶ पुनःस्थािपत िकया गया । 3 1995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 14 ᳇ारा (15-9-1995 से) "8" के स्थान पर पर्ितस्थािपत ।
4 1995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 14 ᳇ारा (15-9-1995 से) कितपय शब्दᲂ के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 5 1995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 14 ᳇ारा (15-9-1995 से) अंतःस्थािपत ।
24
कर्म संख्यांक क्षित का वणर्न उपाजर्न सामथ्यर् की हािन का पर्ितशत
1 [21] घुटने से नीचे िवच्छेदन, जब िक स्थूणक 2 [12.70 से०मी०] से अिधक हो. . . . . . . . . .
.
2 [50]
1 [ एक नेतर् की हािन, जब िक कोई अन्य उपदर्व न हो और दसूरा नेतर् पर्सामान्य हो. . . . . 0
30
3 [26क.] िनम् निलिखत की हािन— क—दाएं या बाएं हाथ की अगंिुलयां तजर्नी 1 [ सम्पूणर्. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 4 1 [ सम्पूणर्. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 2 1 [ सम्पूणर्. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 1 [39] पर्पदांगुिल-अिस्थ संिध से. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 14 1 [22] एक पाद का िवच्छेदन िजसके पिरणामस्वरूप अन्तांग-मातर् रह जाए. . . . . . . . . . . . . 2 [50] 1 [23] पर्पदांगुिल-अिस्थ संिध के िनकट से एक पाद का िवच्छेदन. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 2 [50] 1 [24] पर्पदांगुिल-अिस्थ संिध से एक पद की सब अंगुिलयᲂ की हािन. . . . . . . . . . . . . . . . . . 20 अन्य क्षितया ं
25] 4
1 [26] एक नेतर् की दिृष् ट की हािन, जब िक नेतर्गोलक मᱶ उपदर्व या िवदर्पूता न हो और दसूरा नेतर् पर्सामान्य हो. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . एक नेतर् की आंिशक दिृष् ट की हािन. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . .
.
10]
27] . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 1
1 [28] दो अंगुिल-अिस्थयां. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 11 1 [29] एक अंगुिल-अिस्थ. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 9 1 [30] अिस्थ की हािन के िबना िसरे का िगलोिटन िवच्छेदन. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 5 मध्यमा
31] . . . . . . . . 1
1 [32] दो अंगुली-अिस्थयां. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 9 1 [33] एक अंगुिल-अिस्थ. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 7 1 [34] अिस्थ की हािन के िबना िसरे का िगलोिटन िवच्छेदन. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 4 अनािमका या किनि᳧का
35] . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 7
1 [36] दो अंगुली-अिस्थयां. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 6 1 [37] एक अंगुिल-अिस्थ. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 5 1 [38] अिस्थ की हािन के िबना िसरे का िगलोिटन िवच्छेदन. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 2 ख—दाएं या बाएं पाद की अगंिुलया ं
अगंठूा
. . . . . .
1 [40] उसका भाग, कुछ अिस्थ की हािन सिहत. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 3 1 1962 के अिधिनयम सं० 64 की धारा 9 ᳇ारा (1-2-1963 से) पर्िवष् ट सं० 7 से 54 तक को कर्मशः 1 से 48 तक के रूप मᱶ पुनःसंख्यांिकत िकया गया । 2 1995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 14 ᳇ारा (15-9-1995 से) कितपय शब्दᲂ के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 3 1995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 14 ᳇ारा (15-9-1995 से) अंतःस्थािपत ।
25
कर्म संख्यांक क्षित का वणर्न उपाजर्न सामथ्यर् की हािन का पर्ितशत
कोई अन् य अगंिुल
1 [ पर्पदांगुिल-अिस्थ संिध से. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 1 [43] पर्पदांगुिल-अिस्थ संिध . . . . . . . . . . . . .
1 [ पर्पदांगुिल-अिस्थ सं . . . . . . . . . . . . .
1 [ पर्पदांगुिल-अिस्थ सं . . . . . . . . . . . . .
41] . . . . . . . . . . . . . 3
1 [42] उसका भाग, कुछ अिस्थ की हािन सिहत. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 1 अगंठेू को छोड़कर एक पाद की दो अगंिुलया ं
से. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 5
1 [44] उसका भाग, कुछ अिस्थ की हािन सिहत. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 2 अगंठेू को छोड़कर एक पाद की तीन अगंिुलया ं
45]
िध से. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 6 1 [46] उसका भाग, कुछ अिस्थ की हािन सिहत. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 3 अगंठेू को छोड़कर एक पाद की चार अगंिुलया ं
िध से. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 9 1 [48] उसका भाग, कुछ अिस्थ की हािन सिहत. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 3] 2 [िटप्पणी—इ ंग या अवयव की
हािन के स
अनुसूची 2
[3[धार िेखए]
उन ᳞िक् तयᲂ की सचूी, जो4[कमर्चारी] की 2(1) (घघ)] के उपबन्धᲂ के अध्यधीन
िनम् निलिखत ᳞िक् त,3[धारा (2) (1) (घघ)] क स धारा के उपबन्धᲂ के अध्यधीन रहते हुए4[कमर्चारी] ह,ᱹ अथार्त्
रेल मᱶ िनयोिजत] िकसी िलफ्ट या वाष् प या अन्य यांितर्क शिक् त या िव᳒ुत ᳇ारा नोिदत यान को चलाने 7 [उसकी
मᱶ िजसमᱶ या िजसकी पर्सीमाᲐ के अन्दर कारखाना अिधिनयम, 1948 (1948 का 63) की धारा 2 के खंड (ट
ु या िकसी वस्तु के भाग के िनमार्ण, पिरवतर्न, मरम्मत, अलंकरण, पिररूपण के पर्योजन के िलए, अथवा उपयोग,
टीकरण—ऐसे पिरसर या पर्सीमाᲐ के बाहर, िकन्तु ऐसे िकसी कायर् मᱶ, जो िकसी वस्तु या िकसी वस्तु के भाग के िनमार्ण, पिरवतर्न, मरम्मत, अलंकरण या पिररूपण से, अथवा उपयोग, पिरवहन या िवकर्य के िलए उस ेअन्यथा स अनुसचूी मᱶ िनिदष् ट िकसी अंग या अवयव के उपयोग की पूणर् तथा स्थायी हािन या उस अ मतुल्य समझी जाएगी ।]
ा 2(1) (घघ)] द
पिरभाषा के अन्तगर्त3[धारा
रहत ेहुए आत ेह ᱹ
े अथर् के अन्दर और उ कोई ᳞िक् त जो— 5 [ 6 [(i) 3 [ मरम्मत करने] या उसके अनुरक्षण के संबंध मᱶ या ऐसे िकसी यान पर लदाई या उस पर से उतराई के संबंध मᱶ िनयोिजत ह;ै अथवा
(ii) उस पिरसर ) मᱶ यथापिरभािषत िविनमार्ण-पर्िकर्या चलाई जा रही ह,ै या ऐसे िकसी भी पर्कार के ऐसे काम मᱶ, जो ऐसी िकसी िविनमार्ण-पर्िकर्या या िनिमत वस्तु का आनषुंिगक या उससे संब ह ैऔर िजसमᱶ वाष्प, जल या अन्य यांितर्क शिक् त या िव᳒ुत् शिक् त पर्युक् त होती ह,ै8*** िनयोिजत ह ै 9[चाह ेऐसे िकसी काम मᱶ िनयोजन ऐसे पिरसर मᱶ या पर्सीमाᲐ के अन्दर हो या न हो]; अथवा
(iii) वस्त पिरवहन या िवकर्य के िलए उसे अन्यथा अनुकूिलत करने के पर्योजन के िलए िकसी ऐस ेपिरसर मᱶ िनयोिजत ह ै 8 ***; 10 ***
9 [स्पष्
1 1962 के अिधिनयम सं० 64 की धारा 9 ᳇ारा (1-2-1963 से) पर्िवष् ट सं० 7 से 54 तक को कर्मशः 1 से 48 तक के रूप मᱶ पुनःसंख्यांिकत िकया गया । 2 1960 के अिधिनयम सं० 58 की धारा 3 और अनुसूची 2 ᳇ारा अंतःस्थािपत ।
26
अनुकूिलत नन
**
ऐसे अनुकिषत िकया जाना आशियत ह,ै अथवा मास्टर या नािवक क
र, िजसका वह मास्टर या कमᱮदल का सदस्य नहᱭ ह,ै लदाई, उससे उतराई, उसमᱶ उसकी मरम्मत करने, उसे तोड़ डालने, साफ करने या उसका रंग-रोगन करने के पर्योजन क
ा उठाने के पर्योजनᲂ के िलए, अथवा
के पर्योजन
के िलए, अ
वश्यक हो
तब चपल ण-संकमर् को
बनाए रख
ेकर छत के
िशखागर् त
समुदर्ी संकमर् के, िजसके अन्तगर्त पोतᲂ के लंगर डालने का स्थान आता ह,ै स जत ह;ै अथवा
उनकी मरम्मत करने, या उतार लनेे मᱶ िनयोिजत
ह;ै अथवा
ने, या उसे तोड़ने मᱶ,1*** िनयोिजत ह;ै अथवा
े खंड (31) और धारा 197 की उपधारा (1)] मᱶ यथापिरभ ी संिवदा की पूित कर रहा ह,ै सीधे या िकसी उप ठेकेदार के माध्यम से िनयोिजत ह;ै अथवा करने से संबंिधत िकसी कायर् का आनुषंिगक या उससे संबंिधत ह,ै िनयोिजत ᳞ित इस खंड के पर्योजनᲂ के िलए ऐसे पिरसर या पर्सीमाᲐ के अंदर िनयोिजत समझे जाएंगे; अथवा]
(iv) िनयोजक के ᳞वसाय या कारबार के संबंध मᱶ िवस्फोटकᲂ के िविनमार्ण या हथालने मᱶ िनयोिजत ह;ᱹ अथवा
(v) खान अिधिनयम, 1952 (1952 का 35) की धारा 2 के खंड (ञ) मᱶ यथापिरभािषत िकसी खान मᱶ िकसी ख संिकर्या मᱶ अथवा िकसी खनन संिकर्या के या अिभपर्ाप् त खिनज के आनुषंिगक या उससे संसक् त िकसी पर्कार के काम मᱶ,1* या भूिम के नीचे िकसी भी पर्कार के काम मᱶ िनयोिजत ह;ै अथवा
(vi) (क) पूणर्तः या भागतः वाष्प ᳇ारा या अन्य यांितर्क शिक् त या िव᳒ुत ᳇ारा नोिदत पोत के, या ऐसे पोत के, जो इस पर्कार नोिदत पोत ᳇ारा अनुकिषत िकया जाता ह,ै या िजसका
1 * * * *
27
(xiii) िनरीक्षक, डाक-रक्षक, डाक छांटने वाले या वैन िपयन के रूप मᱶ रेल डाक-सेवा मᱶ1[या तार संकेतक के रूप मᱶ या डाक या रेल के िसर-नलेर के रूप मᱶ] िनयोिजत ह,ै या भारतीय डाक और तार िवभाग मᱶ िकसी ऐसी उपजीिवका मᱶ, िजसमᱶ मामूली तौर पर बाहर का काम अन्तवर्िलत हो, िनयोिजत ह;ै] अथवा
2
चतम िबन्द ुसे ल ादन या पर्दाय मᱶ2*** िनयोिजत
धिनयम, 1927 (1927 का 17) की धारा 2 के खण्ड (ध) मᱶ यथापिरभािषत दीपस्तंभ मᱶ िनयोिजत
पर्दशर्न के िलए आशियत चलिचतर्ᲂ के िनमार्ण मᱶ, या ऐसे िचतर्ᲂ को पर्दिशत करने मᱶ िनयोिजत ह;ै अथवा
यᲂ या जंगली जीव-जन्तुᲐ के पर्िशक्षण, पालने या उनसे काम लेने मᱶ, िनयोिजत ह;ै अथवा हन मᱶ, या दावानल के िनयंतर्ण या बुझाने मᱶ िनयोिजत ह;ᱹ अथवा
ह;ै
अथवा]
अन्दर माल हथालने या उसका पिरवहन करने मᱶ िनयोिजत ह;ै अथवा
ालन या
रेिडयᲂ ऐि
(xxviii) भारतीय वायुयान अिधिनयम, 1934 (1934 का 22) की धारा 2 मᱶ यथापिरभािषत वायुयान के सिन् नमार्ण
त ᳇ारा या िव᳒तु ᳇ारा चलते ह,ᱹ5[उ᳒ान-कृिष
संिकर्याᲐ
(xiv) पर्ाकृितक पैटर्ोिलयम या पर्ाकृितक गैस िनकालने की िकर्याᲐ के सम्बन्ध मᱶ,2*** िनयोिजत ह;ै अथवा
(xv) ऐसी िकसी उपजीिवका मᱶ, िजसमᱶ िवस्फोटक संिकर्याएं अन्तवर्िलत हᲂ, िनयोिजत ह;ै अथवा
(xvi) ऐसे उत्खन् न करने मᱶ िनयोिजत ह,ै *** या िवस्फोटक पर्युक् त िकए गए ह ᱹया िजसकी गहराई उसके उच् ेकर िनम् नतर िबन्द ुतक3[बारह] फुट से अिधक ह;ᱹ अथवा
(xvii) दस ᳞िक् तयᲂ से अिधक को वहन करने योग्य पार नौका चलाने मᱶ िनयोिजत ह;ै या 4 [(xviii) िकसी भू-संपदा मᱶ िनयोिजत, िजसका अनुरक्षण इलायची, िसनकोना, कॉफी, रबड़ या चाय उगाने के पर्योजन के िलए िकया जाता ह;ै या]
5 [(xix) िव᳒ुत ऊजार् के उत्पादन, रूपान्तरण, पारेषण या िवतरण मᱶ अथवा गैस के उत्प ह;ै अथवा]
(xx) भारतीय दीपस्तंभ अि ह;ै अथवा
(xxi) लोक-
(xxii) हािथ 6 [(xxiii) ताड़ के पेडᲂ से रस िनकालने या वृक्षᲂ को िगराने या उनसे लᲶे बनाने मᱶ या अन् तदᱷशीय जल ᳇ारा काष् ठ के पिरव
(xxiv) हािथयᲂ या अन्य जंगली जीव-जन्तुᲐ को पकड़ने या उनका िशकार करने की संिकर्याᲐ मᱶ िनयोिजत 7 [(xxv)] गोताखोर के रूप से िनयोिजत ह;ै 5 [अथवा
(xxvi) (क) िकसी ऐसे भाण्डागार या अन्य स्थान की, िजसमᱶ माल भंडािरत िकया जाता ह;ै2*** अथवा (ख) िकसी ऐसे बाजार की, *** पर्सीमाᲐ मᱶ, या के
(xxvii) िकसी ऐसी उपजीिवका मᱶ, िजसमᱶ रेिडयम या एक्स-रे सािधतर् को हथालाना या उसका अिभच क्टव पदाथᲄ का संस्पशर् अन्तवर्िलत ह,ै िनयोिजत ह;ै]1[अथवा]
1
, बनाने, खोल डालने, चालन या अनुरक्षण मᱶ या उसके संबंध मᱶ िनयोिजत ह;ै अथवा
(xxix) टेर्क्टरᲂ या अन्य यंतर्ᲂ ᳇ारा, जो वाष्प या अन्य यांितर्क शिक् , बनो᳒ोग, मधुमक्खी पालन या खेती करने मᱶ िनयोिजत ह;ै] अथवा
(xxx) नलकूप के िनमार्ण, चालन, मरम्मत या अनरुक्षण मᱶ,2*** िनयोिजत ह;ै अथवा
(xxxi) िकसी भवन मᱶ िव᳒ुत िफिटग के अनुरक्षण, मरम्मत या नवीकरण मᱶ िनयोिजत ह;ै अथवा
(xxxii) सरकस मᱶ िनयोिजत ह ै।]
5 1995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 15 ᳇ारा (15-9-1995 से) मद (xix) और "खेती करने मᱶ िनयोिजत ह"ै के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 6 1938 के अिधिनयम सं० 9 की धारा 11 ᳇ारा अन्तःस्थािपत ।
7 1938 के अिधिनयम सं० 9 की धारा 11 ᳇ारा मूल खण्ड (xxiii) को (xxv) के रूप मᱶ पुनः संख्यांिकत िकया गया ।
28
1 [(xxxiii) िकसी कारखाने या स्थापन मᱶ चौकीदार के रूप मᱶ िनयोिजत ह;ै अथवा
xiv) समुदर् मᱶ मछली पकड़ने की िकसी संिकर्या मᱶ िनयोिजत ह;ै अथवा लए या सांपᲂ की दखेभाल करने
के पर्योजन लने की अपेक्षा की जाती ह;ै अथवा
से
यानᲂ मᱶ ल
याए,ं जल
या मछली पकड़ने
मᱶ िनयोिज
) बलुडोजरᲂ, टेर्क्टरᲂ, पावर िटलरᲂ तथा वैसी ही मशीनᲂ के चालन या मरम्मत या अनुरक्षण मᱶ िनयोिजत ह;ᱹ ापन बोडᲄ पर िचतर् बनान ेके िलए कलाकार के
रूप मᱶ िन
सी
*
उपजीिवक ी सचूी
कर्.सं. उपजीिवकाजन्य िनयोजन
(xx
(xxxv) िकसी ऐसे रोजगार मᱶ िनयोिजत ह ैिजसमᱶ िवष िनकालने के पर्योजन के ि के िलए सांपᲂ को हथालने अथवा िकसी िवषैले जीव-जन्तु या कीट को हथा
(xxxvi) घोड़ᲂ, खच् चरᲂ और सांड जैसे जीव-जन्तुᲐ के हथालने संबंधी काम मᱶ िनयोिजत ह;ै अथवा (xxxvii) िकसी यंतर्नोिदत यान मᱶ लदाई या उससे उतराई के पर्योजन के िलए अथवा ऐसे माल की, िजसकी ऐ ादाई की गई ह,ै उठाई-धराई करने मᱶ या उसका पिरवहन करने मᱶ िनयोिजत ह;ै अथवा (xxxviii) िकसी स्थानीय पर्ािधकारी की सीमाᲐ के भीतर मल नािलयᲂ या सेिप्टक टᱹकᲂ की सफाई मᱶ िनयोिजत ह;ै अथवा
(xxxix) सवᱷक्षण और अन्वेषण, खोज अथवा निदयᲂ के मापन या िनस्सारण पेर्क्षण मᱶ िनयोिजत ह,ै िजसके अंतगर्त संवधर्न संिकर् िवज्ञानीय पेर्क्षण तथा बाढ़ पूवार्नुमान िकर्याकलाप भूगभर्-जल सवᱷक्षण और खोज ह;ᱹ (xl) ऐसे जंगलᲂ के साफ करने मᱶ अथवा भूिम या तालाबᲂ के ठीक करने मᱶ िनयोिजत ह;ै2*** (xli) ऐसी भूिम पर खेती करने मᱶ या पशु धन के पालन-पोषण तथा अनुरक्षण या वन संिकर्याᲐ त ह;ै2***
(xlii) कूपᲂ, नलकूपᲂ, तालाबᲂ, झीलᲂ, जल धाराᲐ तथा वैसे ही ᳫोतᲂ से जल उत्थापन के िलए पर्योग मᱶ लाए जाने वाले पंिपग उपस्कर के संस्थापन, अनुरक्षण या मरम्मत मᱶ िनयोिजत ह;ᱹ (xliii) िकसी खुले कूप या खोद ेगए कूप, बोर कूप, बोर तथा खोद ेगए बूथ िफल्टर पाइंट और वैसे ही बोिरग संिन् नमार्ण, या उन्हᱶ गहरा करने मᱶ िनयोिजत ह;ᱹ
(xliv) कृिष संिकर्याᲐ या बागानᲂ मᱶ कीटनाशी या नाशक जीव मार के फुहारन करने और उसके धूल झाड़न मᱶ िनयोिजत ह;ᱹ
(xlv) यांितर्क फसल कटाई और गहाई संिकर्याᲐ मᱶ िनयोिजत ह;ᱹ
(xlvi
(xlvii) भूिम तल से 3.66 मीटर या उससे अिधक ऊंचाई पर िवज्ञ
योिजत ह;ᱹ
(xlviii) शर्मजीवी पतर्कार और अन्य समाचारपतर् कमर्चारी (सवेा की शतᱸ) और पर्कीणर् उपबन्ध अिधिनयम, 1955 (1955 का 45) मᱶ पिरभािषत िक समाचारपतर् स्थापन मᱶ िनयोिजत ह ᱹऔर बा᳭ कायर् मᱶ लगे ह;ᱹ] 3 [(xlix) पानी के भीतर कायर् के िलए गोताखोरᲂ के रूप मᱶ िनयोिजत ।]
29
कर्.सं. उपजीिवकाजन्य रोग िनयोजन
(1) (2) (3)
(ख) सभी कायर् जो पशु-िचिकत्सा कायर् के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
(ग) जीव-जन्तुᲐ, जीव-जन्त ᲂ, ऐसे शवᲂ के भागᲂ या अन्य काय
. ंपीिड़त वायु मᱶ कायर् ᳇ारा कािरत रोग ।
3. सीसा या उसके िवषैले सिम्मशर्णᲂ ᳇ारा कािरत ोग ।
स ।
भाग ख
म्मशर्णᲂ ᳇ारा कािरत
2. पारद या उसके िवषलैे सिम्मशर्णᲂ ᳇ारा कािरत रोग भी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
4. और बᱹनजीन के एिमडो िवषैले ᳞ुत्प᳖ᲂ या सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ । ग
री
10. सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ । कािरत रोग ।
त
म्मशर्णᲂ ᳇ारा कािरत
ु शव
᳞ापािरक माल के; जो जीव-जन्तुᲐ या जीव-जन्तु शवᲂ ᳇ारा संदिूषत हो गया हो, हथालन ेसे संबंिधत कायर् ;
2
स (घ) र् िजसमᱶ संदषूण की िविशष् ट जोिखम हो । सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ । भी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ र
4. नाइटर्स धूमᲂ ᳇ारा िवषाक् तता । सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
5. काबर्िनक फास्फोरस सिम्मशर्णᲂ ᳇ारा िवषाक् तता । सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
1. फास्फोरस या उसके िवषलैे सि रोग ।
सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ । । स
3. बᱹनजीन या उसके िवषैले समजातᲂ ᳇ारा कािरत रोग । नाइटर्ो
सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ । उसके समजातᲂ ᳇ारा कािरत रोग ।
5. कर्ोिमयम या उसके िवषलैे सिम्मशर्णᲂ ᳇ारा कािरत रोग ।
संिखया या उसके िवषैले सिम्मशर्णᲂ ᳇ारा कािरत रोग । सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
6. सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
7. रेिडयो एिक्टव पदाथᲄ और आयनकारी िविकरणᲂ ᳇ारा कािरत रो ।
सभी कायर् जो रोिडयोएिक्टव पदाथᲄ या आयतका िविकरणᲂ के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
8. तारकोल, डामर, िबटूमने, खिनज तेल, एन्थर्सीन या इन पदाथᲄ के सिम्मशर्णᲂ; उत्पादᲂ या अवशेषᲂ ᳇ारा कािरत त्वचा का पर्ाथिमक उपकला-बुंदयुक् त कᱹसर । सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
9. (ऐिलफैिटक एनडरेोमेिटक आविलयᲂ के) हाइडर्ोकाबर्नᲂ के िवषैले हलैोजने ᳞ुत्प᳖ᲂ ᳇ारा कािरत रोग । काबर्न डाइसल्फाइड ᳇ारा कािरत रोग ।
सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
11. अवरक् त िविकरणᲂ से उत्पन् न उपजीिवका जन्य मोितयािबन्द ।
सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
12. मᱹगनीज या उसके िवषैले सिम्मशर्णᲂ ᳇ारा सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
13. शारीिरक, रासायिनक या जैिवक कारकᲂ ᳇ारा, जो अन्य मदᲂ मᱶ सिम्मिल नहᱭ ह;ᱹ कािरत त्वचा रोग । सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
14. शोर ᳇ारा कािरत शर्वण हािन । सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
15. पर्ितस्थापी डाइनाटर्ोफीनॉल या ऐसे पदाथᲄ के लवणᲂ ᳇ारा िवषाक् तता ।
सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
16. बेिरिलयम या उसके िवषलैे सि रोग ।
कैिडिमयम या उसके िवषैले सिम्मशर्णᲂ ᳇ारा कािरत सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
17.
रोग । सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
30
कर्.सं. उपजीिवकाजन्य रोग िनयोजन
(1) (2) (3)
18. कायर् पर्िकर्या मᱶ अन्तिवष् ट मान्यतापर्ाप् त सुगर्ाही कारकᲂ ᳇ारा कािरत उजीिवका-जन्य दमा ।
सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
19. फ्लुओरी या उसक ᳇ारा कािरत रोग ।
सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम क ए उच्छन् न करते हᲂ । र और
ᱶ
27. के पर्भाव से उत्पन् न सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।] ध
ता और िसकता यक्षमा परन्तु यह िक
िसकतामयता पिरणामी िनयᲃग्यता या मृत्यु क
क घटक हो ।
2. सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
3. सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ । े अिभश् वसन ᳇ारा कािरत बिहरस्थ
ाइटीज
े िवषैले सिम्मशर्णᲂ े िल
20. नाइटर्ोिग्लसरीन या अन्य नाइटर्ोएिसड ऐस्टरᲂ ᳇ारा कािरत रोग ।
सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
21. एलकोहॉलᲂ और कीटोनᲂ ᳇ारा कािरत रोग । सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
22. श् वासरोध, काबर्नमोनोक्साइड और उसके िवषलै े ᳞ुत्प᳖ᲂ, हाईडर्ोजन सल्फाइड ᳇ारा कािरत रोग । सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
23. एस्बैस्टॉस ᳇ारा कािरत फेफड़ा कᱹस मीिजथीिलओमा ।
सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
24. मू्तर्ाशय या वृक्क या मूतर्वािहनी की एिपिथिलअल लाइिनग का पर्ाथिमक अबुर्द ।
सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ । 1 [25. बरफ से िघरे के्षतर्ᲂ म िहमांधता । सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
26. अत्यंत गरम जलवायु मᱶ गमᱮ के पर्भाव से उत्पन् न रोग । अत्यंत ठंडी जलवायु मᱶ ठंड
सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ । रोग ।
भाग ग
1. स्क्लेरोजेिनक खिनज ूल (िसिलकोिसस एन्थर्ािसिलकोिसस एस्बेस्टौिसस) ᳇ारा कािरत फुफ्फुस- धूिलमय
ािरत
करने मᱶ आवश्य
इकु्षधूिलमयता ।
रूई, फ्लैक् स हमै्प और सीसल धूिल (िबिसनोिसस) ᳇ारा कािरत श् वासनी फुफ्फुस रोग ।
सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
4. काबर्िनक धूल क एलजᱮ एिल्बयोल सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
5. कठोर धातुᲐ ᳇ारा कािरत श् वसनी-फुफ्फुस । सभी कायर् जो संबंिधत जोिखम के िलए उच्छन् न करते हᲂ ।
31
र्वतᱮ उसके ूणर् हुए वषᲄ की संख्या गुणक
1 [कमर्चारी] को पर्ितकर दये होने की तारीख के ठीक पूव अिन्तम जन्म िदवस को प
(1) (2)
17. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 227.49
18. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . .
. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 225.22
20. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 0
52. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 146.20
226.38
19. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . .
. . . 224.0
21. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 222.71
22. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 221.37
23. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 219.95
24. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 218.47
25. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 216.91
26. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 215.28
27. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 213.57
इससे अिधक नहᱭ 28. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 211.79
29. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 209.92
30. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 207.98
31. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 205.95
32. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 203.85
33. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 201.66
34. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 199.40
35. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 197.06
36. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 194.64
37. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 192.14
38. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 189.56
39. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 186.90
40. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 184.17
41. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 181.37
42. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 178.49
43. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 175.54
44. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 172.52
45. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 169.44
46. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . .
47. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . .
166.29
163.07
48. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 159.80
32
1 [कमर्चारी] को पर्ितकर दये होने की तारीख के ठीक पूवर्वतᱮ उसके अिन्तम जन्म िदवस को पूणर् हुए वषᲄ की संख्या गुणक
(1) (2)
53. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 142.68
54. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 139.13
55. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 6
. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 131.95
57. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 3
135.5
56. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . .
. . . . 128.3
58. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 124.70
59. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 121.05
60. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 117.41
61. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 113.77
62. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 110.14
63. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 106.52
64. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 102.93
65 या अिधक. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 99.37] ______
1 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत ।