मध्य प्रदेश आयरु्विज्ञान परिषद् अधिननयम, 1987 [क्रमाांक 11 सन ्1990]
र्वषय-सचूी
अध्याय 1-प्रािम्भिक
1. सकं्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ
2. पररभाषाएँ
अध्याय 2 परिषद् का गठन औि िम्िस्ट्राि तथा अन्य अधिकारियों की ननयमु्तत
3. राज्य आयवुििज्ञान पररषद् का ननगमन
4. पररषद् का गठन
5. ननिािचन का ढंग
6. नाम ननरे्दशन या सर्दस्यता पर ननर्िन्धन
7. सर्दस्यों की पर्दािधध
8. पररषद् का सम्म्मलन
9. पररषद् के अध्यि, उपाध्यि और सर्दस्यों के ललये मत
10. रम्िस्रार और अन्य अधधकारी
अध्याय 3 -िाज्य धचककत्सक िम्िस्ट्टि का तयैाि ककया िाना औि िखा िाना
11. रम्िस्टर का तयैार ककया िाना
12. रम्िस्टर का रखा िाना
13. अनतररक्त अर्िताओं का रम्िस्रीकरण
14. रम्िस्रीकृत व्यिसायी के विशषेाधधकार
15. राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में नाम के प्रविष्ट ककये िाने का प्रनतषधे करने या उसमें से नाम र्टाये िाने का ननरे्दश रे्दने की पररषद् की शम्क्त
16. पररषद् द्िारा राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में पररितिन
17. िाँचों में प्रककया
18. पररषद् के विननश्चय के विरुद्ध अपील
अध्याय -4 परिषद ननधि
19. पररषद् ननधध
20. िे उद्रे्दश्य म्िनके ललये पररषद् ननधध उपयोम्ित की िा सकेगी
अध्याय 5 - प्रकीर्ि
21. इस अधधननयम या केन्रीय अधधननयम 1956 का स ं102 में यथा उपर्धंधत के लसिाय व्यिसाय करने का प्रनतषधे
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22. राज्य सरकार द्िारा ननयतं्रण
23. पररषद् द्िारा र्दी िाने िाली िानकारी और उसका प्रकाशन
24. शाम्स्त
25. ररम्क्त के कारण कायि ाहर्याँ आहर्द अविधधमान्य नर्ीं र्ोंगी
26. सर्दभािपिूिक की गई कायि ार्ी का सरंिण
27. राज्य सरकार द्िारा ननयम र्नाने की शम्क्त
28. पररषद् द्िारा विननयम र्नाने की शम्क्त ।
अध्याय - 6 ननिसन औि सांक्रमर्कालीन उपबन्ि
29. सकं्रमणकालीन उपर्न्ध ।
30. धचककत्सा व्यिसानययों को लाग ूर्ोने िाले साधारण उपर्न्ध ।
31. ननरसन तथा अन्य पररणाम । अनसुचूी ।
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मध्य प्रदेश आयरु्विज्ञान परिषद् अधिननयम, 1987 [क्रमाांक 11 सन ्1990]
[हर्दनांक 10 िुलाई, 1990 को राष्रपनत की अनमुनत प्राप्त रु्ई; अनमुनत म० प्र० रािपत्र (आसाधारण) में हर्दनांक 24 िुलाई, को प्रथम र्ार प्रकालशत की गई । मध्य प्ररे्दश में धचककत्सा व्यिसानययों के रम्िस्रीकरण से सम्र्म्न्धत विधधयों को समेककत और सशंोधधत करने तथा राज्य के ललये आयवुििज्ञान पररषद् के गठन और उनसे सशंक्त विषयों के ललए उपर्न्ध करने रे्त ुअधधननयम ।
भारत गणराज्य की अड़तीसिें िषि में मध्य प्ररे्दश विधान मण्डल द्िारा ननम्नललखखत रूप में यर् अधधननयलमत र्ो--
अध्याय 1 -प्रािम्भिक
1. सांक्षिप्त नाम, र्वस्ट्ताि औि प्रािभि- (1) इस अधधननयम का सकं्षिप्त नाम म० प्र० आयवुििज्ञान पररषद् अधधननयम, 1987 रै् ।
(2) इसका विस्तार सम्पणूि भारत पर रै् ।
(3) यर् ऐसी तारीख को प्रितृ्त र्ोगा म्िसे राज्य सरकार, अधधसचूना द्िारा, ननयत करे।
2. परििाषाएां -इस अधधननयम में, िर् तक सन्र्दभि स ेअन्यथा अपेक्षित न र्ो- (क) ''पररषद्'' से अलभप्रेत रै् धारा 3 के अधीन स्थावपत मध्य प्ररे्दश आयवुििज्ञान पररषद्; (ख) ''भारतीय धचककत्सक रम्िस्टर'' से अलभपे्रत रै् भारतीय आयवुििज्ञान पररषद् अधधननयम 1956 (1956 का स०ं 102) की धारा 21 के अधीन रखा गया रम्िस्टर;
(ग) ''आयवुििज्ञान'' से अलभपे्रत रै् आधनुनक आयवुििज्ञान की समस्त शाखाएँ और उसके अन्तगित शल्य विज्ञान और प्रसनूत विज्ञान (अब्स्टस्रेहटक्स) भी रै् ककन्त ुउसके अन्तगित पश ुआयवुििज्ञान और शल्य विज्ञान नर्ीं रै्;
(घ) ''मान्यता प्राप्त आयवुििज्ञान अर्िता '' से अलभप्रेत रै्-
(एक) भारतीय आयवुििज्ञान पररषद् अधधननयम 1956 (1956 का स०ं 102) की अनसुधूचयों में तत्समय सम्म्मललत आयवुििज्ञान अर्िताओं में से कोई अर्िता;
(र्दो) अनसुचूी में विननहर्दिष्ट आयवुििज्ञान अर्िताओं में से कोई अर्िता; (क) ''रम्िस्रीकृत व्यिसायी'' से अलभप्रेत रै् इस अधधननयम के उपर्न्धों के अधीन राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में नामांककत कोई व्यम्क्त;
(ख) ''विननयम'' से अलभप्रेत रै् धारा 28 के अधीन र्नाया गया कोई विननयम; (ग) ''राज्य धचककत्सक रम्िस्टर'' से अलभप्रेत रै् धारा 11 के अधीन रखा गया रम्िस्टर ।
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अध्याय 2- परिषद् का गठन औि िम्िस्ट्राि तथा अन्य अधिकारियों औि सेव कों की ननयमु्तत
3. िाज्य आयरु्विज्ञान परिषद् का ननगमन-(1) राज्य सरकार, यथाशक्य शीघ्र, अधधसचूना द्िारा, राज्य के ललए एक आयवुििज्ञान पररषद् की स्थापना ऐसी तारीख से करेगी िो अधधसचूना में विननहर्दिष्ट की िाए ।
(2) पररषद् मध्य प्ररे्दश आयवुििज्ञान पररषद् के नाम से एक ननगलमत ननकाय र्ोगी और उसका शाश्ित ्उत्तराधधकार तथा सामान्य मरुा र्ोगी और उसे िंगम तथा स्थािर र्दोनों प्रकार की सम्पवत्त अम्िित और धारण करने तथा इस अधधननयम के उपर्न्धों के अध्यधीन रर्त ेरु्ये, ककसी ऐसी सम्पवत्त की, िो उसके द्िारा धाररत र्ो, आन्तररत करने तथा सवंिर्दा करने की ओर अपने गठन के प्रयोिनों के ललये आिश्यक समस्त अन्य र्ातें करने की शम्क्त र्ोगी और िर् अपने ननगलमत नाम से िार्द चला सकेगी तथा उक्त नाम से उसके विरुद्ध िार्द चलाया िा सकेगा :
परन्त ुपररषर्द, राज्य सरकार की पिूि अनमुनत के बर्ना, अपने द्िारा धाररत ककसी सपवत्त को विक्रय, र्धंक पट टा के रूप में या अन्यथा अन्तररत नर्ीं करेगी या ककसी व्यम्क्त या अलभकरण से धन उधार नर्ीं लेगी ।
4. परिषद् का गठन—(1) पररषद् में ननम्नललखखत सर्दस्य र्ोंगे, अथाित-् (क) राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में नामांककत व्यम्क्तयों द्िारा अपने में से ननिािधचत पाचं सर्दस्य; (ख) पांच सर्दस्य िो राज्य सरकार द्िारा ननम्नानसुार नाम ननहर्दिष्ट ककये िायेंगे- (एक) इंडडयन मेडडकल एसोलसयेशन, मध्य प्ररे्दश राज्य शाखा द्िारा प्रस्तावित ककय े िाने िाले पाचं व्यम्क्तयों के पनैल में से उक्त एसोलसयेशन की राज्य शाखा का एक प्रनतननधध;
(र्दो) राज्य में के विश्िविद्यालयों के आयवुििज्ञान सकंायों के सर्दस्यों में से एक सर्दस्य;
(तीन) मध्य प्ररे्दश स्िास््य सेिाओ ं(मध्य प्ररे्दश रे्ल्थ सवििसेस) में र्दो सर्दस्य िो प्रथम िगि का पर्द धारण करत ेर्ों, म्िनमें से एक महर्ला डाक्टर र्ोगी;
(चार) राज्य सरकारी धचककत्सा मर्ाविद्यालयों में से एक का सकंायाध्यि (डीन);
(2) सचंालक, धचककत्सों सेिाएँ (डायरेक्टर मडेडकल सवििसेस) पररषद् का अध्यि र्ोगा और सकंायाध्यि; पररषद् का उपाध्यि र्ोगा ।
(3) उपधारा (1) के अधीन ननिािधचत या नाम-ननहर्दिष्ट प्रत्येक व्यम्क्त का नाम रािपत्र में प्रकालशत ककया िायेगा और सर्दस्य ऐसे प्रकाशन की तारीख से अपना-अपना पर्द ग्रर्ण करेंगे और उनकी पर्दािधध के प्रयोिनों के ललये; यर् समझा िायेगा कक उन्र्ोंने अपना-अपना पर्द ऐसे प्रकाशन की तारीख से ग्रर्ण कर ललया रै् ।
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(4) उपाध्यि, अध्यि के ऐसे कत्तिव्यों का पालन करेगा तथा उसकी ऐसी शम्क्तयों का प्रयोग िो अध्यि द्िारा उसे सौंपी िाएँ ।
5. ननवािचन का ढांग—(1) धारा 4 की उपधारा (1) के खण्ड (क) के अधीन ननिािचन का सचंालन पररषद् द्िारा ऐसे ननयमों के अनसुार ककया िायेगा िो राज्य सरकार द्िारा इसे ननलमित र्नाये िाए ँ।
(2) िर्ां पररषद् के ललये ककसी ननिािचन के सम्र्न्ध में कोई वििार्द अद् भतू र्ोता रै्, यर्ां िर् ऐसी कालािधध के भीतर, िो विहर्त की िाये, राज्य सरकार को ननरे्दलशत ककया िायेगा और उस पर राज्य सरकार का विननश्चय अम्न्तम आर्द्धकर र्ोगा ।
6. नाम-ननरे्दश या सर्दस्यता पर ननर्िन्धन-कोई भी व्यम्क्त धारा 4 के अधीन ननिािचन या नाम- ननरे्दशन के ललये-
(एक) पात्र नर्ीं र्ोगा िर् तक कक उसका नाम राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में न ररे्; और (र्दो) र्दो से अधधक क्रमिती अिधधयों के ललये पात्र नर्ीं र्ोगा ।
7. सदस्ट्यों की पदावधि-(1) इस अधधननयम के उपर्न्धों के अध्यधीन रर्त ेरु्ये कोई ननिािधचत या नाम-ननहर्दिष्ट सर्दस्य उस तारीख से, म्िसको िर् धारा 4 की उपधारा (3) में उपर्धंधत ककये गये अनसुार अपना पर्द ग्रर्ण करता रै्, पांच िषि की अिधध के ललये पर्द धारण करेगा. परन्त ुपर्दािरोर्ी सर्दस्य तर् तक अपने पर्द पर र्ना ररे्गा िर् तक कक उसका उत्तरा- धधकारी अपना पर्द ग्रर्ण नर्ीं कर लेता ।
(2) ककसी ननिािधचत या नाम-ननहर्दिष्ट सर्दस्य के सम्र्न्ध में यर् समझा िायेगा कक उसने अपना स्थान ररक्त कर हर्दया रै्, या िर् पररषद् की राय में, पयािप्त प्रनतरे्त ुके बर्ना, पररषद् के तीन कमिती साधारण सम्म्मलनों से अनपुम्स्थत रर्ता रै्, अथिा यहर्द िर् रम्िस्रीकृत व्यिसायी नर्ीं रर् िाता रै् ।
(3) पररषद् में की गई कोई आकम्स्मक ररक्त, यथासम्भि शीघ्र यथाम्स्थनत ननिािचन या नाम- ननरे्दशन द्िारा भरी िाएगी और उसी उस ररम्क्त को भरने के ललये ननिािधचत या नामननहर्दिष्ट ककया गया व्यम्क्त, अपने पिूि ती की अनिलसत अिधध के ललये पर्द धारण करेगा ।
(4) िर्ां ककसी सर्दस्य की र्ार्त ् उक्त पांच िष ंकी अिधध का अिसान र्ोने िाला र्ो, िर्ां ककसी पर्दोन्ननत का ननिािचन या नाम-ननरे्दशन उक्त अिधी का अिसान र्ोने के पिूि तीन मास के भीतर ककसी भी समय ककया िा सकेगा ककन्त ुिर् तर् तक पर्द ग्रर्ण नर्ीं करेगा िर् तक कक उक्त अिधध का अिसान न र्ो चुका र्ो ।
8 परिषद् का सम्भमलन -(1) पररषद्, प्रत्येक िषि में कम से कम र्दो र्ार ऐसे समय और स्थान पर सम्म्मलन करेगी िो अध्यि द्िारा ननयत ककया िाये ।
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(2) िर् तक विननयम द्िारा अन्यथा उपर्म्न्धत न ककया िाए, पररषद् के पांच सर्दस्यों स े म्िनमें से कम से कम एक अशासकीय सर्दस्य र्ोगा गणपतूी र्ोगी और पररषद् के ककसी सम्म्मलन के समि लाये गय, समस्त प्रश्न, उपम्स्थत तथा मत रे्दने िाले सर्दस्यों के र्रु्मत से विननम्श्चत ककये िाएँगे और मतों के र्रार्र-र्रार्र र्ोने की र्दशा में, पीठासीन प्राधधकारी का द्वितीय या ननणाियक मत र्ोगा ।
9. परिषद् के अध्यि, उपाध्यि औि सदस्ट्यों के ललए िते्त-पररषद् के अध्यि, उपाध्यि और सर्दस्यों को सम्म्मलनों में र्ाम्िर र्ोने के ललये ऐसे भत्तों का सरं्दाय ककया िाएगा िैसा कक पररषद् विननयमों द्िारा अिधाररत करे ।
10. िम्िस्ट्राि औि अन्य अधिकािी—(1) पररषद् राज्य सरकार की पिूि मिंूरी से, एक रम्िस्रार ननयकु्त करेगी िो पररषद् के सधचि कोषाध्यि के रूप में कायि करेगा :
परन्त ुकोई भी व्यम्क्त रम्िस्रार के रूप में ननयकु्त ककया िाने के ललये तर् तक पात्र नर्ीं र्ोगा िर् तक कक िर् रम्िस्रीकृत व्यिसायी न र्ो :
परन्त ुयर् और भी कक धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन पररषद् की स्थापना के ललए विननहर्दिष्ट की गई तारीख से प्रथम चार िषो के ललये रम्िस्रार िर् व्यम्क्त र्ोगा िो राज्य सरकार द्िारा ननयकु्त ककया िाये और िर् अपना पर्द राज्य सरकार के प्रसार्दपयिन्त धारण करेगा ।
(2) पररषद् राज्य सरकार के पिूि अनमुोर्दन से, अधधकाररयों और सेिकों के उतने पर्द समु्ित कर सकेगी म्ितने िर् इस अधधननयम के उपर्न्धों को कायािम्न्ित करने के ललये आि- श्यक समझे, और उन पर अधधकाररयों और सेिकों की ननयकु्त कर सकेगी :
परन्त ुउन पर्दों पर, म्िनका न्यनूतम िेतन 1820 रुपये या उससे अधधक र्ो, पररषर्द द्िारा ननयमु्क्तयां, राज्य सरकार का पिूि अनमुोर्दन प्राप्त ककये बर्ना नर्ीं की िाएगी ।
(3) रम्िस्रार के र्ारे में अर्िताएँ, ननयमु्क्त और सेिा की शत ेतथा िेतनमान ऐसे र्ोंगे िो विहर्त ककये िाएँ और अन्य कमिचाररयों के र्ारे में िे ऐसे र्ोंगे िो पररषद्, विननयमों द्िारा, उपर्म्न्धत करें ।
(4) पररषद्, रम्िस्रार से या ककसी अन्य कमिचारी से उसके कतिव्यों के सम्यक् पालन के ललये ऐसी प्रनतभनूत अपेक्षित करेगी और लेंगी िैसी कक िर् आिश्यक समझे ।
(5) इस धारा के अधीन पररषद् द्िारा ननयकु्त रम्िस्रार और अन्य कमिचारी भारतीय र्दण्ड सहंर्ता, 1860 (1860 का स०ं 5) की धारा 21 के अथि के अन्तगित लोक सिेक समझे िाएँगे ।
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अध्याय 3- िाज्य धचककत्सक िम्िस्ट्टि का तयैाि ककया िाना औि िखा िाना
11. िम्िस्ट्टि का तयैाि ककया िाना-(1) रम्िस्रार, राज्य के ललये धचककत्मा व्यि- सानययों का एक राज्य धचककत्सक रम्िस्टर इस अधधननयम के उपर्न्ध के अनसुार तयैार करेगा और रखेगा ।
(2) राज्य धचककत्सक रम्िस्टर ऐसे प्ररूप में र्ोगा और उसे ऐसे भागों में विभाम्ित ककया िायेगा िैसा कक विहर्त ककया िाये । रम्िस्टर में रम्िस्रीकृत व्यिसायी का परूा पता और अर्िताएँ, िर् तारीख म्िसको प्रत्येक अर्िता प्राप्त की गई थी तथा ऐसी अन्य विलशम्ष्टयां र्ोंगी िो विहर्त की िाएं ।
(3) कोई भी व्यम्क्त िो, मान्यता प्राप्त आयवुििज्ञान अर्िता रखता रै्, ककसी भी समय, रम्िस्रार को विहर्त प्ररूप में आिेर्दन करने पर तथा ऐसी फीस का, िो विननयम द्िारा विहर्त की िाय, सरं्दाय करने पर और यथाम्स्थनत अपनी उपाधध (डडग्री) या डडप्लोमा प्रस्ततु करने पर विहर्त औपचाररकताओं के परेू र्ो िाने के पश्चात,् मामलूी तौर से तीन मास के भीतर, अपना नाम राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में प्रविष्ट कराने का र्कर्दार र्ोगा :
परन्त ु यहर्द कोई व्यम्क्त ऐसी अधधक मान्यता-प्राप्त आयवुििज्ञान अर्िताएँ रखता रै् तो िर् आिेर्दन में उन समस्त मान्यता प्राप्त आयवुििज्ञान अर्िताओं का उल्लेख करेगा िो िर् आिेर्दन करने की तारीख को रखता रै् :
परन्त ुयर् और भी कक ककसी ऐसे आरे्दश का, िो पयािप्त रे्तकु से, अपनी उपाधध या डडप्लोमा प्रस्ततु करनेमें असमथि रै् एक िषि स ेअनधधक की कालािधध के ललये, अम्न्तम रम्िस्रीकरण ककया िा सकेगा यहर्द िर् पररषर्द का समाधान कर रे्दता कक िर् ऐसी उपाधध या डडप्लोमा धारण करता रै् । उपधारा (3) में अन्तवििष्ट ककसी र्ात के र्ोत ेरु्ए भी, ऐसे प्रत्येक व्यम्क्त का, नाम मर्ाकौशल मेडडकल काउम्न्सल या मडेडकल काउम्न्सल, भोपाल द्िारा रखे गये रम्िस्टर में, इस अधधननयम के प्रारम्भ की तारीख के ठीक पिूि ती हर्दन को प्रविष्ट रै्, उसका नाम इस अधध. ननयम के अधीन तयैार ककये गए राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में, उससे इस र्ात की अपेिा ककये बर्ना प्रविष्ट ककया िायेगा कक िर् इस प्रयोिन के ललये आिेर्दन करे या ककसी फीस का सरं्दाय करें ।
(5) प्रत्येक रम्िस्रेशन रम्िस्रीकृत व्यिसायी को रम्िस्रीकरण का प्रमाण पत्र विहर्त प्ररूप में हर्दया िायेगा । रम्िस्रीकृत व्यिसायी रम्िस्रीकरण प्रमाण पत्र या उसकी प्रमाखणत सत्य प्रनतललवप अपने व्यिसाय के स्थान में ककसी सर्न दृश्य भार पर प्रर्दलशित करेगा ।
12. िम्िस्ट्टि का िखा िाना—(1) पररषर्द के रम्िस्रार का यर् कतिव्य र्ोगा कक िर् इस अधधननयम के तथा पररषर्द द्िारा ककये गये ककन्र्ीं आरे्दशों के अनसुार, राज्य धचककत्सक रम्िस्टर रखे, और समय-समय पर रम्िस्टर को विहर्त रीनत में पनुरीक्षित करे । रम्िस्रार, धचककत्सक रम्िस्टर को रािपत्र में प्रकालशत करिायेगा और िषि के र्दौरान ककया गया प्रत्येक पररितिन प्रनतिषि रािपत्र में प्रकालशत ककया िा सकेगा ।
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(2) ऐसा रम्िस्टर भारतीय साक्ष्य अधधननयम, 1872 (1872 का स०ं 1) के अथि के अन्तगित लोक र्दस्ताििे समझा िायेगा और रािपत्र में प्रकालशत प्रनत द्िारा साबर्त ककया िा सकेगा ।
13. अनतरितत अर्िताओां का िम्िस्ट्रीकिर्-(1) प्रत्येक रम्िस्रीकृत व्यिसायी, िो राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में अपना नाम प्रविष्ट ककये िाने के पश्चात ्कोई ऐसी पर्दिी (टाइहटल) उपाधध या डडप्लोमा, िो मान्यता प्राप्त आयवुििज्ञान अर्िता रै्, प्राप्त कर लेता रै्, तो िर् उसकी प्रविम्ष्ट इस अधधननयम के उपर्न्धों के अनसुार राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में करिाने के ललये आर्द्ध र्ोगा ।
(2) प्रत्येक रम्िस्रीकृत व्यिसायी, म्िसे उपधारा (1) लाग ू र्ोती रै्, कोई पर्दिी, उपाधध या डडप्लामा, िो मान्यता प्राप्त आयवुििज्ञान अर्िता रै्, प्राप्त कर लेने पर, ऐसी पर्दिी, उपाधध या डडप्लोमा की प्रविम्ष्ट राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में या तो पिू ंमें की गई ककसी प्रविम्ष्ट के स्थान पर या उसके अनतररक्त कराने के ललये, ऐसे प्ररूप में और ऐसी कालािधध के भीतर िो विहर्त की िाये, तथा प्राप्त की गई प्रत्येक अर्िता के ललये ऐसी फीस, िो विननयमों द्िारा विहर्त की िाये, के साथ पररषद् को आिेर्दन करेगा :
परन्त ुिर्ां ऐसी पर्दिी, उपाधध या डडप्लोमा इस अधधननयम के प्रारम्भ र्ोने की तारीख के पिूि प्राप्त ककया गया र्ो, िर्ां ऐसा आिरे्दन ऐसे प्रारम्भ की तारीख से छर् मास के भीतर ककया िायेगा ।
(3) उपधारा (1) के अधीन आिेर्दन प्राप्त र्ोने पर पररषद् पर्दिी उपाधध या डडप्लोमा की प्रविम्ष्ट, विहर्त औपचाररकताओं के परेू र्ो िाने के पश्चात,् मामलूी तौर से तीन मास के भीतर, राज्य सरकार धचककत्सक रम्िस्टर में करेगी ।
(4) कोई रम्िस्रीकृत व्यिसायी, म्िसने कोई अनतररक्त अर्िता प्राप्त कर ली रै्, ऐसी अर्िता का उपयोग व्यिसाय के प्रयोिन के ललये या ककसी भी अन्य प्रयोिन के ललये अथिा व्यिसाय के र्दौरान उससे कोई लाभ प्राप्त करने के ललए या ननयोिन के प्रयोिन के ललये करने का तर् तक र्कर्दार नर्ीं र्ोगा िर् तक कक उसने उस अर्िता की प्रविम्ष्ट इस धारा के उपर्न्धों के अनसुार राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में न करा ली र्ो ।
14 िम्िस्ट्रीकृत व्यवसायी का र्वशषेाधिकाि—(1) इस अधधननयम या भारतीय आयवुििज्ञान पररषद् अधधननयम 1956 (1956 का स०ं 102) में कनतपय मान्यता प्राप्त आयुिविज्ञान अर्ि रखने िाले व्यम्क्तयों द्िारा धचककत्मा व्यिसाय ककये िाने के र्ारे में िो शत ेऔर ननयम अधधकधथत र्ैं उनके अध्यधीन रर्त े रु्ये, प्रत्येक ऐसा व्यम्क्त, म्िसका नाम राज्य धचककत् सक रम्िस्टर में तत्समय रै्, इस र्ात का र्कर्दार र्ोगा कक िर् अपना अर्िताओं के अनमुार, राज्य के भीतर धचककत्सा व्यिसायों के रूप में व्यिसाय करें और ऐसे व्यिसाय के सम्र्न्ध में औषधधयों (मेडडकामेन्टस) या अन्य साधधतों की र्ार्त ्कोई व्यय, प्रभार या कोई फीस, म्िसका कक िर् र्कर्दार र्ो, िसलू करे ।
(2) ककसी विधध द्िारा या उसके अधीन ककसी धचककत्सा व्यिसायों द्िारा हर्दया िाने के ललए अपेक्षित प्रमाण-पत्र तर् तक विधधमान्य नर्ीं र्ोगा िर् तक कक िर् ककसी रम्िस्रीकृत व्यिसायी द्िारा
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र्स्तािररत न र्ो और उस पर उसके नाम तथा रम्िस्रीकरण क्रमांक की मरुा न लगी र्ो ।
(3) रम्िस्रीकृत व्यिसायी द्िारा हर्दए गए प्रत्येक औषधध-पत्र (प्रमे्स्क्रप्शन) पर ऐसे रम्ि- स्रीकृत व्यिसायी के नाम तथा रम्िस्रीकरण क्रमांक की मरुा र्ोगी ।
(4) रम्िस्रीकृत व्यिसायी से लभन्न कोई भी व्यम्क्त ककसी अस्पताल, पागलखाने, रूग्णालय, औषधालय या ककसी अन्य आयवुििज्ञान ससं्था में धचककत्सक (कफम्िलशयन) शल्य धचककत्सक या धचककत्सा अधधकारी के रूप में या स्िास््य अथिा आयवुििज्ञान की ककसी अन्य सम्र्द्ध शाखा में धचककत्सा अधधकारी के रूप में कोई भी पर्द धारण करने का पात्र नर्ीं र्ोगा ।
15. िाज्य धचककत्सक िम्िस्ट्टि में नाम प्रवतृ्त ककये िाने का प्रनतषिे किने या उसमें से नाम के र्टाये िाने का ननदेश देने की परिषद् की शम्तत-पररषद्, रम्िस्रार से ननरे्दश प्राप्त र्ोने पर या अन्यथा, राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में ककसी ऐसे व्यम्क्त का नाम प्रविम्ष्ट ककये िाने का प्रनतषधे कर सकेगी या उस रम्िस्टर में स ेककसी ऐसे व्यम्क्त का नाम र्टाये िाने का आरे्दश रे्द सकेगी- (क) म्िसे ककसी र्दण्ड न्यायालय ने ककसी ऐसे अपराध के ललये कारािास से र्दण्डाधधष्ट ककया र्ो िो पररषद् की राय में उसके चररत्र में कोई ऐसा र्दोष उपर्दलशित करता र्ो कक म्िससे राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में उसका नामांकन ककया िाना या राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में उसके नाम का र्ना रर्ना अिाछंनीय र्ो िाये; या
(ख) म्िसे पररषद् न,े ऐसी िांच के पश्चात ्म्िसमें उसे स्िय ंसनुिाई का अिसर हर्दया गया र्ो और िो पररषद् के वििेकानसुार र्न्र्द कमरे में की िा सकेगी, पररषद् के सम्म्मलन में उपम्स्थत तथा मतर्दान करने िाले सर्दस्यों के र्दो-नतर्ाई र्रु्मत द्िार ककन्त ुऐसे सर्दस्य पांच से कम नर्ीं र्ोंगे, ककसी िवृत्तकर प्रसगं में गहर्ित -चरण का र्दोषी पाया र्ो ।
16. परिषद् द्वािा िाज्य धचककत्सक िम्िस्ट्टि में परिवतिन - (1) पररषद् सम्र्म्न्धत व्यम्क्त को सनेु िाने का ममु्क्त-यकु्त अिसर रे्दने और उसके आिेपों की, यहर्द कोई र्ो िाचं करने के पश्चात ्यर् आरे्दश रे्द सकेगी कक राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में की कोई ऐसी प्रविम्ष्ट, िो पररषद् की राय में कपटपिूिक या गलती से की गई रै्, या करिा र्दी गई रै्, रर् कर र्दी िाएँ या सशंो- धधतं की िायें ।
(2) पररषद् ककसी रम्िस्रीकृत व्यिसायी का नाम राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में से सरै्दि के ललये या ककसी विननहर्दिष्ट कालािधध के ललये र्टाये िाने का ननरे्दश उन्र्ीं कारणों से रे्द सकेगी म्िनके आधार पर उसके द्िारा रम्िस्रीकरण की धारा 15 के अधीन प्रनतषधे ककया िा सकता रै् ।
(3) पररषद् यर् ननरे्दश रे्द सकेगी कक उपधारा (2) के अधीन र्टाया गया कोई भी नाम, ऐसी शतो के, यहर्द कोई र्ो, ननन्र्ें पररषद् अधधरोवपत करना उधचत समझें, अध्यधीन रर्त ेरु्ये, पनुस्थािवपत ककया िाये ।
17.िाांचों में प्रकक्रया - धारा 12, 15 या 16 के अधीन ककसी िाचं के प्रयोिन के ललये पररषद् या धारा 29 के अधीन र्नाये गये ननयमों द्िारा प्राधधकृत कोई सलमनत, भारतीय साक्ष्य
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अधधननयम, 1872 (1872 का स०ं 1) के अथि के अन्तगित न्यायालय समझी िायेगी, और िर् लोक सेिक (िांच) अधधननयम, 1850 (1850 का स०ं 37) के अधीन ननयकु्त आयकु्त की समस्त शम्क्तयों का प्रयोग करेगी, और ऐसी िांच यथाशक्य लोक सेिक (िांच) अधधननयम, 1850 (1850 का स०ं 37) की धारा 5 के तथा धारा 8 से 20 तक के उपर्न्धों के अनसुार सचंाललत की िाएगी ।
18. परिषद् के र्वननश्चय के र्वरुद्ि अपील—(1) कोई भी व्यम्क्त, िो धारा 12, 15 या 16 के अधीन ककये गये पररषद् के विननम्श्चय से व्यधथत र्ो, राज्य सरकार को अपील कर सकेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन कोई अपील ऐसे विननम्श्चय की प्रनतललवप सम्र्म्न्धत पिकार को प्राप्त र्ोने की तारीख से तीन मास के भीतर की िाएगी और उसके साथ ऐसी फीस र्ोगी िो विननयम द्िारा विहर्त की िाये ।
अध्याय 4 - परिषद् ननधि
19. परिषद् ननधि—(1) पररषद् एक ननधध स्थावपत करेगी िो पररषद् ननधध कर्लायेगी ।
(2) ननन्नललखखत पररषद् ननधध के भाग रूप र्ोंगे, या उनका उनमें सरं्दाय ककया िाएगा (क) केन्रीय सरकार या राज्य सरकार द्िारा कोई अलभर्दाय या अनरु्दान; (ख) फीस से रु्ई आय को सम्म्मललत करत ेरु्ये, पररषद् की समस्त स्रोतों से आय; (ग) न्यास, िसीयत (विक्िेस्ट), सरं्दान, विन्यास और अन्य अनरु्दान, यहर्द कोई र्ी; (घ) पररषद् द्िारा प्राप्त समस्त अन्य धनरालशयां ।
20. वे उद्देश्य म्िनके ललये परिषद् ननधि उपयोम्ित की िा सकेगी-पररषद् ननधध ननम्न- ललखखत उद्रे्दश्यों के ललए उपयोज्य र्ोगी, अथाित-्
(क) उन ऋणों के प्रनतसरं्दाय के ललये िो पररषद् द्िारा इस अधधननयम के और उसके अधीन र्नाये गये ननयमों तथा विननयमों के प्रयोिनों के ललये उपगत ककये गये र्ों; (ख) ककसी ऐसे िार्द या ककन्र्ीं ऐसी कायि ाहर्यों के व्ययों के ललये म्िसमें पररषद् एक पिकार र्ो;
(ग) पररषर्द के कमिचाररयों के ितेन तथा भत्तों के सरं्दाय के ललए; (घ) पररषद् के पर्दाधधकाररयों (आकफस बर्यरसि को भत्तों के सरं्दाय के ललए; (ड) ककन्र्ीं ऐसे व्ययों के सरं्दाय के ललए िो इस अधधननयम के और उसके अधीन र्नाए गए ननयमों तथा विननयमों के उपर्न्धों को कायािम्न्ित करने में पररषद् द्िारा उपगत ककए गए र्ों ।
अध्याय - 5 प्रकीर्ि
21. इस अधिननयम या केन्रीय अधिननयम, 1956 का सां 102 में यथा उपबांम्न्ित के लसवाय व्यवसाय किने का प्रनतषिे-इस अधधननयम या भारतीय आयवुििज्ञान पररषद् अधधननयम, 1956 (1956
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का स ं102) में यथा उपर्म्न्धत के लसिाय, कोई भी व्यम्क्त राज्य के भीतर धचककत्सा व्यिसाय नर्ीं करेगा अथिा स्िय ंको प्रत्यित: या अप्रत्यित: इस रूप में व्यपरे्दलशत नर्ीं करेगा कक िर् धचककत्सा व्यिसाय करता रै् ।
22. िाज्य सिकाि द्वािा ननयांत्रर्--यहर्द ककसी भी समय राज्य सरकार को यर् प्रतीत र्ोता रै् पररषद् ने इस अधधननयम द्िारा या उसके अधीन उसको प्रर्दत्त शम्क्तयों में स ेककसी शम्क्त का प्रयोग करने में चूक की रै् या अनतरेक ककया रै् उसका र्दरुुपयोग ककया रै् अथिा इस अधधननयम द्िारा या उसके अधीन उस पर अधधरोवपत कत्तिव्यों में से ककसी कत्तिव्य का पालन करने में चूक की रै्, तो राज्य सरकार यहर्द िर् ऐसी चूक रै् अनतरेक या र्दरुूपयोग को गभंीर प्रकृनत का समझती रै् । उसकी विलशम्ष्टयां पररषद् को अधधसधूचत कर सकेगी, और यहर्द पररषद् ऐसे समय के भीतर िो राज्य सरकार इस ननलमत्त ननयत करें, ऐसी चूक अनतरेक या र्दरुूपयोग का उपचार करने में असफल रर्ती रै्, तो राज्य सरकार, पररषद् को र्दो िषि की कालािधध के ललए िो राज्य सरकार द्िारा एक र्ार में एक िषि से अधधक न र्ोने िाली कालािधध के ललए र्ढ़ाई िा सकेगी । विघहटत कर सकेगी । ककन्त ुविघहटत की कालािधध कुल लमलाकर पाँच िषि से अधधक नर्ीं र्ोगी, और पररषद् की समस्त शम्क्तयों और कत्तिव्यों या उनमें स े ककसी शम्क्त या कतिव्य का प्रयोग और पालन व्यम्क्त द्िारा और ऐसी कालािधध के ललए म्िसे िर् ठीक समझें करिा सकेगी और नई पररषद् को अम्स्तत्ि में लाने की कायि ार्ी करेगी ।
23. परिषद् द्वािा दी िाने वाली िानकािी औि उसका प्रकाशन--- (1) पररषद् ऐसी ररपोटि अपने ऐसे कायि िवृत्तयों की प्रनतललवपयां अपने ऐसे लखेाओं की सकं्षिम्प्तयां (एब्स्टस्रेक्टस) तथा ऐसी अन्य िानकारी राज्य सरकार को रे्दगी िो राज्य सरकार उपके्षित करें ।
(2) राज्य सरकार इस धारा के अधीन उस े र्दी गई ककसी ररपोटि प्रनतललवप सकं्षिप्त या अन्य िानकारी को ऐसी रीनत में प्रकालशत कर सकेगी िैसी कक िर् उधचत समझे ।
24. शाम्स्ट्त--यहर्द कोई व्यम्क्त म्िसका नाम राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में अकंकत नर्ीं रै् रम्िस्रीकृत धचककत्सा व्यिसायी के रूप में व्यिसाय करेगा तो िर् कठोर कारािास से, म्िसकी अिधध तीन िषि तक की र्ो सकेगी और िमुािने से िो पांच र्िार रुपये तक का र्ो सकेगा र्दण्डनीय र्ोगा :
परन्त-ु
(एक) ऐसा व्यम्क्त िो र्चैलर इन आयिेुहर्दक विथ माडिन मेडडलसन एण्ड सििरी की उपाधध रखता र्ो और मध्य प्ररे्दश आयिेुहर्दक तथा यनूानी धचककत्सा पद्धनत एि ं प्राकृनतक धचककत्सा र्ोडि में रम्िस्रीकृत र्ो, विषम धचककत्सीय औषधधयों (एलोपधैथक मेडडलसन विहर्त करने या शल्य धचककत्सा व्यिसाय करने के ललये, इस धारा के अधीन र्दण्डनीय नर्ीं र्ोगा यहर्द उसका रम्िस्रीकरण प्रमाण-पत्र उसे ऐसा करने के ललये प्राधधकृत नर्ीं करता रै्;
(र्दो) ऐसा धचककत्सा व्यिसायी, िो भारतीय आयवुििज्ञान पररषद् अधधननयम, 1956 (1956 का स०ं 102) की धारा 27 विशषेाधधकारी का र्कर्दार र्ो, मध्य प्ररे्दश में उसका रम्िस्रीकरण न र्ोने के कारण इस धारा के अधीन र्दण्डनीय नर्ीं र्ोगा ।
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25. रिम्तत के कािर् कायिवाहर्याां आहद अर्वधिमान्य नर्ीां र्ोगी-पररषद् का कोई कायि या उसकी कोई कायि ार्ी केिल इस कारण अधधमान्य नर्ीं र्ोगी कक-
(क) उसमें कोई ररक्त रै् या उसके गठन में कोई त्रहुट रै्; या
(ख) उसके सर्दस्य के रूप में कायि करने िाले ककसी व्यम्क्त के ननिािचन या नाम ननरे्दशन में कोई त्रहुट रै्; या
(ग) उसकी प्रकक्रया में कोई ऐसी अननयलमतता रै् िो मामले के गणुािगणु पर प्रभाि नर्ीं डालती रै् ।
26 सद् िावनापवूिक की गई कायिवार्ी का सांििर्-इस अधधननयम के अधीन सद् भािपिूिक की गई या की िाने के ललये प्राशनयत ककसी भी र्ात के ललये कोई भी िार्द, अलभयोिन या अन्य विधधक कायि ार्ी राज्य सरकार, पररषद् या उसकी ककसी सलमनत या सरकार के या पररषद् के विरुद्ध ककसी अधधकारी या सेिक के विरुद्ध नर्ीं र्ोगी ।
27. िाज्य सिकाि द्वािा ननयम बनाने की शम्तत -(1) राज्य सरकार, इस अधधननयम के प्रयोिनों को कायािम्न्ित करने के ललये ननयम, अधधसचूना द्िारा र्ना सकेगी ।
(2) विलशष्टतया और पिूिगामी शम्क्त की व्यापकता पर प्रनतकूल प्रभाि डाले बर्ना ऐसे ननयमों में ननम्नललखखत समस्त विषयों या उनमें से ककसी भी विषय के ललये उपर्न्ध र्ो सकें गे, अथाित ्- (क) रम्िस्रार की अर्िताएँ, ननयमु्क्त तथा सेिा की शत े उसका िेतनमान, पद्धािधध तथा शम्क्त और कत्तिव्य;
(ख) कोई भी अन्य विषय िो विहर्त ककया िाना र्ो या विहर्त ककया िाए ।
(3) इस अधधननयम के अधीन र्नाए गए समस्त ननयम विधान सभा के पटल पर रखे िायेंगे ।
28. परिषद द्वािा र्वननयम बनाने की शम्तत - पररषद्, साधारणत: इस अधधननयम के प्रयोिनों को कायािम्न्ित करने के ललये विननयम, राज्य सरकार की पिूि मिंूरी से र्ना सकेगी, और इस शम्क्त की व्यापकता पर प्रनतकूल प्रभाि डाले बर्ना ऐसे विननयमों में ननम्नललखखत के ललए उपर्न्ध र्ो सकें गे- (क) पररषद् की सम्पवत्त का प्रर्न्ध तथा उसके लेखाओं का रखा िाना और उनकी सम्परीिा; (ख) पररषर्द के सम्म्मलनों का र्लुाया िाने का और ककया िान, िर् समय िर् और िर् स्थान िर्ाँ ऐसे सम्म्मलन ककए िाने र्ों, तथा उनमें काम काि का सचंालन; पररषद् के सर्दस्यों का त्याग पत्र;
(ग) अध्यि और उपाध्यि की शम्क्तयां और कत्तिव्य;
(घ) सलमनत की ननयमु्क्त का ढ़ग, ऐसी सलमनत के सम्म्मलनों का र्लुाया िाना और ककया िाना तथा ऐसी सलमनतयों के काम-काि का सचंालन;
(ङ) पररषद् के अन्य कमिचाररयों की अर्िताएँ और सेिा की शत;े
(च) इस अधधननयम के अधीन रम्िस्रीकरण के आिेर्दन में कधथत की िाने िाली विलशम्ष्टयाँ तथा उसके साथ हर्दये िाने िाला अर्िताओं का सर्तू,
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(छ) इस अधधननयम के अधीन ककए गये आिरे्दनों तथा अपीलों पर सरं्दत्त की िाने िाली फीस; (ि) राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में अनतररक्त अर्ितायें प्रविष्ट कराने के ललये सरं्दत्त की िाने िाली फीस; और
(झ) कोई भी विषय म्िसके ललये इस अधधननयम के अधीन उपर्न्ध विननयमों द्िारा ककया िा सकता र्ो ।
अध्याय 6 --ननिसन औि सांक्रमर्कालीन उपबन्ि
29. सांक्रमर्कालीन उपबन्ि -(1) राज्य सरकार, इस अधधननयम के उपर्न्धों के अनसुार पररषद् को अम्स्तत्ि में लाने के ललए सचंालक, धचककत्सा सिेाएँ मध्य प्ररे्दश का इस अधधननयम के प्रारम्भ र्ोने के पश्चात ् प्रथम र्ार स्थावपत की िाने िाली पररषद् के ननिािचन का सचंालन करने के ललये विशषे अधधकारी ननयकु्त कर सकेगी ।
(2) धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन पररषद् की स्थापना र्ोने तक उपधारा (1) के अधीन ननयकु्त विशषे अधधकारी को इस अधधननयम के प्रयोिनों के ललये धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन स्थावपत पररषद् समझा िाएगा और िर् पररषद् 'की शम्क्तयों का प्रयोग और उसके कत्तिव्यों का ननििर्न करेगा ।
30, धचककत्सा व्यवसानययों को लाग ूर्ोने वाले सािािर् उपबन्ि -इस अधधननयम के उपर्न्ध, भारतीय आयवुििज्ञान पररषद् अधधननयम, 1956 (1956 का स०ं 102) के उन उपर्न्धों के म्िनमें समस्त धचककत्सा व्यिसानययों को लाग ूर्ोने िाले साधारण उपर्न्ध अन्तवििष्ट रै्, अनतररक्त रै्, न कक उनके अल्पीकारक ।
31. ननिसन तथा अन्य परिर्ाम - - इस अधधननयम के प्रारम्भ की तारीख से ननम्न ललखखत पररणाम र्ोगे अथाित-्-
(क) सेन्रल प्रविन्सेि एण्ड र्रार मेडीकल रम्िस्रे शन एक्ट, 1916 (क्रमांक 1 सन ्1916) और मध्य प्ररे्दश स्टेट यटूरी र्ाँडीि (रीिनल कान्स्टीट यशून एक्ट 1956 (क्रमांक 17 सन ्1956) िर्ाँ तक कक िर् उक्त एक्ट स ेसम्र्म्न्धत रै् मध्यभारत धचककत्सा व्यिसायी रम्िस्रीकरण विधान, 1954 (विधान क्रमांक 16 सन ्1954 तथा मेडीकल प्रेम्क्टशनसि रम्िस्रेशन एक्ट 1935 ( भोपाल एक्ट क्र० 7 सन ् 1935) िर्ां तक की िर् धारा 2 के खण्ड (ग) में यथापररभावषत धचककत्सा व्यिसाय करने िाले रम्िस्रीकृत व्यिसानययों से सम्र्म्न्धत रै्; ननरस्त र्ो िायेंगे;
(ख) मर्ाकौशल मेडीकल काउम्न्सल, मध्यभारत (रीिन) धचककत्सा पररषद् तथा मेडीकल प्रेम्क्टशनसि रम्िस्रेशन एक्ट, 1935 (भोपाल एक्ट क० 7 सन ्1935) की धारा 3 के अधीन स्थावपत मेडीकल काउंलसल विघहटत र्ो िाएगी ।
(ग) खंड (ख) में ननहर्दिष्ट काउँलसल/पररषद् समस्त आम्स्तयां और र्दानयत्ि धारा 3 के अधीन स्थावपत या स्थावपत समझी गई पररषद् की आम्स्तया ंतथा र्ो िायेंगे और समझ ेिायेंगे; (घ) खंड (ख) में ननहर्दिष्ट काउंलसल/पररषद् के समस्त अलभलेख और कागि पत्र, धारा 3 के
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अधीन स्थावपत या स्थावपत समझी गई पररषद् में ननहर्त र्ो िायेंगे और उस ेअन्तररत कर हर्दये िायेंगे ।
अनसुधूच [ िािा 2 (घ) देखखये ]
आयवुििज्ञान ससं्था म्िसके द्िारा प्रर्दान की गई रै् मान्यता प्राप्त आयवुििज्ञान अर्िताएं
रम्िस्रीकरण के ललये सिंेपािर
(1) (2) (3)
रार्टिसन मेडीकल स्कूल, नागपरु रूलर मेडीकल पे्रम्क्टशनसि डडप्लोमा इन मेडीकल प्रेम्क्टस
आर० एम० पी० डी० एम० पी०
[ मध्य प्ररे्दश रािपत्र (आसाधारण) हर्दनांक 24 िुलाई, 1990 के पषृ्ठ 1429-1438 पर प्रकालशत] ।
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CHHATTISGARH ACT
(No. 17 of 2018)
THE CHHATTISGARH AYURVIGYAN PARISHAD (AMENDMENT) ADHINIYAM, 2016
An Act to amend the Chhattisgarh Ayurvigyan Parishad Adhini.yam, 1987 (No. 11 of
1990 ).
Be it enacted by the Chhattisgarh Legislature in rhe Sixty-seventh Year of the Republic of India, as follows:-
I.
2.
(I)
(2)
This Act may be called the Chhattisgarh Ayurvigyan Parishad (Amendment) Adhiniyam, 20 I 6.
It shall come into force from the date of its publication in the Official Gazette. After Section 26 of the Chhattisgarh Ayurvigyan Parishad Adhiniyam, I 987 ( No. l I of 1990 ), the following shall be inserted, namely:-
"26A. Power to amend the Schedule.- ( l) If the State Government is satisfied that it is necessary in public interest then it ma~ 1, by notification, amend the Schedule and thereupon the Schedule shall be deemed to have been amended from the date of publication of said notifi,;ation in the Official Gazette.
(2) Every notification issued under sub-section (1 ), shall be laid, as soon as may be after it is issued, before the State Legislative Assembly."
592 ( 1)
Short title and commencement. Insertion of new Section 26A.
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