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Madhya Pradesh act 030 of 1981 : The MP Rajya Suraksha & Lok Vyavashtha Act, 1980

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मध्यप्रदेश राज्य सरुक्षा तथा लोक व्यवस्था अधिनियम, 1980 (क्र. 30 सि ्1981)

अिकु्रमणिका

अध्याय 1

प्रारम्भिक

1. सकं्षिप्त नाम, विस्तार तथा अिधि

अध्याय 2 व्यम्ततयों के आिे- जािे और उिके कायो का निर्बन्िि

2. पररभाषा

3. ननर्बन्िन आदेश करने की शक्तत

4. ननर्बन्िन आदेशों का प्रनतसहंरण

5. ननर्बन्िन आदेश का ननलम्र्न

6. ननर्बन्िन आदेश के ललए आिारों का प्रकटन

7. सलाहकार पररषद का गठन

8. सलाहकार पररषद् को ननदेश

9. सलाहकार पररषद की प्रक्रिया

अध्याय 3 समाज ववरोिी तत्वों और पवूब में ससद्िदोष ठहराये गये व्यम्ततयों का नततर-बर्तर ककया जािा

10. व्यक्ततयों के दलों तथा समहूों का नततर-बर्तर क्रकया जाना

11. अपराि करने के ललए आमादा व्यक्ततयों का हटाया जाना

12. कनतपय अपरािों के ललए दोषलसद्ि ठहराये गये व्यक्ततयों का हटाया जाना िा

13. िारा 11, 12 या 13 के अिीन आदेशों के प्रितबन की कालािधि

14. िारा 11, 12 या 13 के अिीन आदेश पाररत क्रकये जाने के पिूब सनुिाई की जाएगी

15. अपील

16. कनतपय मामलों में पाररत आदेश की अक्न्तमता

17. व्यक्तत द्िारा क्जला आदद न छोड़ने पर तथा हटाये जाने के पश्चात ्उसके द्िारा उसमें प्रिेश करने पर प्रक्रिया

18. उस क्जले आदद में क्जससे हट जाने के ललए क्रकसी व्यक्तत का ननदेश ददया गया था, प्रिेश करने या लौटने की अनजु्ञा

19. ननिाबसन (एतसटनबमेन्ट) की राज्य सरकार की शक्तत

20. िारा 11, 12 13 या 20 के अिीन ननदेशों का उल्लघंन के ललये शाक्स्त

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21. क्जस िते्र के हट जाने के ललए क्रकसी व्यक्तत को ननदेश ददया गया हो उस िेत्र में, अनजु्ञा के बर्ना, प्रिेश करने के ललये या जर् अस्थायी रूप स ेलौटने के ललए अनजु्ञा दी गई हो तो अधिक ठहरने के ललये शाक्स्त

22. िारा 11, 12,13 या 20 के अिीन जारी क्रकये ननदेशों के उल्लघंन के ललये अलभयोजनों में उपिारणा

23. उस व्यक्तत द्िारा ननष्पाददत क्रकये गये र्िं-पत्र का समपहरण क्जसे उस िेत्र में प्रिेश करने या लौटने की अनजु्ञा दी गई थी क्जस िते्र से हट जाने का उसे ननदेश ददया गया था

24. क्जला मक्जस्रेटों की शक्ततयों तथा कर्त्बव्यों का प्रत्यायोजन

25. जानकारी का स्त्रोत प्रकट नहीं क्रकया जाएगा

अध्याय 4 समाज ववरोिी कक्रयाकलापों का नियतं्रि

26. सिंारक पदाथब आदद के विधि विरुद्ि कब्जे के ललये दण्ड

27. िेत्र के ननिालसयों पर सामदूहक जुमाबनों का अधिरोपण

अध्याय 5 लोक क्षेम और व्यवस्था

28. लशविरों, किायदों (ड्रिल) परेडों आदद का ननयतं्रण

29. िददबयों (यनूनफामब) का ननयतं्रण

30. पथ्या (पाथ ि)े सड़क आदद के उपयोग को प्रनतवषद्ि या ननर्बक्न्ित करने की शक्तत

अध्याय 6 कनतपय स्थािों तथा क्षते्रों तक पहुुँच

31. सरंक्षित स्थान

32. सरंक्षित िेत्र

33. गाडब के साथ र्ल प्रयोग करना या उससे र्चकर ननकलना

34. कनतपय स्थानों तथा िते्रों के ललए आदेश

अध्याय 7 निवारक निरोि

35. कनतपय व्यक्ततयों के ननरोि के आदेश करने की शक्तत

36. ननरोि आदेशों का ननष्पादन

37. ननरोि के स्थान तथा ननरोि की शतों का विननयमन करने की शक्तत

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38. ननरोि आदेशों का कनतपय आिारों पर अविधिमान्य या अप्रितबनशील न होना

39. फरार व्यक्ततयों के सम्र्न्ि में शक्ततयों

40. ननरोि आदेश के आिारों का उस व्यक्तत को प्रकट क्रकया जाना जो उस आदेश स ेप्रभावित हुआ हो

41. सलाहकार र्ोडों का गठन

42. सलाहकार र्ोडों को ननदेश

43. सलाहकार र्ोडों की प्रक्रिया

44. सलाहकार र्ोडब की ररपोटब पर कायबिाही

45. ननरोि की अधिकतम कालािधि

46. ननरोि आदेशों का प्रनतसहंरण

47. ननरुद्ि व्यक्ततयों की अस्थायी ननमुबक्तत

अध्याय 8 अिपुरूक

48. राज्य सरकार की शक्ततयों तथा कर्त्बव्यों का प्रत्यायोजन

49. ननयम

50. अपराि करने के प्रयत्न के ललये शाक्स्त

51. अपराधियों को सशं्रय देने के ललये शाक्स्त

52. पररत्राण

53. अन्य विधियों का लाग ूहोना िक्जबत नहीं होगा -

54. क्रकसी भी पलुलस अधिकारी द्िारा तलाशी ली जाने की शक्तत

55. ननरसन

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मध्यप्रदेश राज्य सरुक्षा तथा लोक व्यवस्था अधिनियम 1980 (क्र. 30 सि ्1981)

इस अधिननयम को ददनांक 8 जून, 1981 को राष्रपनत की अनमुनत प्राप्त हुई । इस अनमुनत का प्रकाशन ''मध्यप्रदेश राजपत्र'' (असािारण) में, ददनांक 14 जुलाई, 1981 को प्रथम र्ार क्रकया गया |

राज्य की सरुक्षा एव ंलोक व्यवस्था र्िाए रखिे के सलए तथा उिसे ससंतत कनतपय अन्य ववषयों के सलये उपर्न्ि करिे हेत ुअधिनियम ।

भारत गणराज्य के र्र्त्ीसिें िषब में मध्यप्रदेश वििान मण्डल द्िारा ननम्नललखित रूप में यह अधिननयलमत हो -

अध्याय 1 प्रारम्भिक

1. सकं्षक्षप्त िाम, ववस्तार तथा अवधि - - (1) इस अधिननयम का सक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश राज्य सरुिा तथा लोक व्यिस्था अधिननयम, 1980 है ।

(2) इसका विस्तार सम्पणूब मध्यप्रदेश पर है ।

(3) यह इसके प्रारम्भ होने के तीन िषब का अिसान हो जाने पर प्रभािशील नही ंरहेगा, लसिाय उन र्ातों के सम्र्न्ि मेँ जो क्रक ऐसे अिसान के पिूब की गयी हों या करने से छोड़ दी गयी हों ।

अध्याय 2 व्यम्ततयों के आिे-जािे और उिके कायो का निर्बन्िि

2. पररभाषा - - इस अध्याय में ''ननर्बन्िन आदेश'' स ेअलभप्रेत है िारा 3 के अिीन क्रकया गया आदेश ।

3 ननर्बन्िन आदेश करने की शक्तत - - (1) यदद राज्य सरकार या क्रकसी क्जला मक्जस्रेट क्रकसी व्यक्तत के सम्र्न्ि में यह समािान हो जाता है क्रक िह क्रकसी ऐसी रीनत में कायब कर रहा है या उसके ऐसी रीनत में कायब करने की सम्भािना है क्जससे राज्य की सरुिा पर या लोक व्यिस्था र्नाये रिने पर प्रनतकूल प्रभाि पड़ता है और यह क्रक इसे इस प्रकार कायब करने से रोकने के ललए जन सािारण के दहत में यह आिश्यक है क्रक इस िारा के अिीन आदेश क्रकया जाय, तो यथाक्स्थनत राज्य सरकार या क्जला मक्जस्रेट ऐसा आदेश कर सकेगा क्जसमें - -

(क) यह ननदेलशन क्रकया जा सकेगा क्रक िह, उस क्स्थनत के लसिाय जहााँ तक क्रक उसे उस

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आदेश के उपर्न्िों द्िारा या ऐसे प्राधिकारी या व्यक्ततयों द्िारा, जो क्रक उस आदेश में विननददबष्ट क्रकये जाये, अनजु्ञात क्रकया जाय, मध्यप्रदेश के क्रकसी ऐसे िेत्र या स्थान में नही ं रहेगा क्रक उस आदेश में विननददबष्ट क्रकया जाय;

(ि) उससे यह अपेिा की जा सकेगी क्रक िह मध्यप्रदेश के ऐसे स्थान में या ऐसे िेत्र के भीतर में विननददबष्ट क्रकया जाय और यदद िह पहले से ही िहीीँ न हो, तो उस स्थान या िेत्र में ऐसे समय के भीतर चला जाय जो क्रक आदेश में विननददबष्ट क्रकया जाय;

(ग) उससे यह अपिेा की जा सकेगी क्रक िह ऐसी रीनत में, ऐसे समयों पर तथा ऐसे प्राधिकारी या व्यक्तत को, जैसा क्रक आदेश में विननददबष्ट क्रकया जाय, अपने आने-जाने की सचूना दे या उसके समि उपक्स्थत हो या अपने आने-जाने की सचूना भी दे और उपक्स्थत भी हो ; (घ) ऐसे व्यक्ततयों से, जो क्रक उस आदेश में उक्ल्लखित क्रकये जाये, सहयतुत रहने या उनसे सम्पकब रिने के सम्र्न्ि में उन पर ऐसे ननर्बन्िन अधिरोवपत क्रकये जा सकें ग ेजैसे क्रक उस आदेश में विननददबष्ट क्रकये जायें;

(ङ) क्रकसी भी ऐसी िस्त ुयी िस्तओुं का, जो क्रक उस आदेश में, विननददबष्ट की जायें, उसके द्िारा कब्जे में रिा जाना प्रनतवषद्ि या ननर्बक्न्ित क्रकया जा सकेगा ।

(2) क्रकसी भी ऐसे व्यक्तत को, जो राज्य का मामलूी तौर से ननिासी हो, राज्य से अपिक्जबत क्रकये जाने या हटाये जाने का ननदेश देत ेहुए कोई ननर्बन्िन आदेश क्रकया जायेगा और क्जला मक्जस्रेट द्िारा क्रकये क्रकसी ऐसे आदेश में, क्रकसी व्यक्तत को उस क्जले से, क्जसमें िह पहले से ही ननिास कर रहा है, अपिक्जबत जाने या हटाये जाने का ननदेश नहीं ददया जाएगा ।

(3) जहााँ क्रकसी व्यक्तत के सम्र्न्ि में उपिारा (1) के िण्ड (ि) के अिीन आदेश ददया जाता िहााँ राज्य सरकार ऐसे व्यक्तत के ललए उस कालािधि के दौरान क्जसमें क्रक ननर्बिन आदेश प्रिरृ्त् रहता र्ात सवुििा का प्रर्न्ि करेगी तथा उसे ऐसे भरण-पोषण भत् त ेका सदंाय करेगी जैसा क्रक िह उधचत समझे:

परन्त ुइसमें की कोई र्ात उस क्स्थनत में लाग ूनहीं होगी जर्क्रक ऐसा आदेश क्रकसी व्यक्तत स े यह अपेिा करता है क्रक िह ऐसे नगर या स्थान में, जहााँ क्रक िह मामलूी तौर से ननिास कर रहा है, ननिास करे या र्ना रहे ।

(4) (क) जहााँ क्रकसी क्जला मक्जस्रेट द्िारा कोई ननर्बन्िन आदेश क्रकया जाता है, िहााँ क्जला मक्जस्रेट तरुन्त, क्रकन्त ुअधिक से अधिक चार ददन के भीतर, आदेश की एक प्रनत, आदेश क्रकय ेजाने के आिारों तथा ऐसी अन्य विलशक्ष्टयों के साथ जो क्रक उसकी राय में उस विषय स ेसम्र्क्न्ित हों, राज्य सरकार को भेजेगा और आदेश िण्ड (ि) तथा (ग) के उपर्न्िों के अध्यिीन रहत े हुए, पन्रह ददन की कालािधि तक प्रिरृ्त् रहेगा ।

(ि) िण्ड क के अिीन ननर्बन्िन आदेश की प्रनत प्राप्त होने पर, राज्य सरकार आदेश की पकु्ष्ट कर सकेगी, उसे उपान्तररत कर सकेगी या उसे वििक्ण्डत कर सकेगी ।

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(ग) ऐसा कोई ननर्बन्िन आदेश, जो (एक) राज्य सरकार द्िारा क्रकया गया है; या (दो) क्जला मक्जस्रेट द्िारा क्रकया गया है तथा राज्य सरकार द्िारा िण्ड (ि) के अिीन पकु्ष्टकृत या उपान्तररत क्रकया गया है ।

(5) यदद कोई व्यक्तत क्रकसी ननर्बन्िन आदेश के उल्लघंन में क्रकसी िते्र या स्थान में पाया जाता ऐझे क्रकसी आदेश की अपेिाओं के अनसुार क्रकसी िेत्र या स्थान को छोड़ने में चूक करता है, तो

(6) के उपर्न्िों पर प्रनतकूल प्रभाि डाले बर्ना, उसे क्रकसी पलुलस अधिकारी द्िारा ऐसे िते्र या से हटाया जा सकेगा ।

(6) यदद कोई व्यक्तत क्रकसी ननर्बन्िन आदेश के उपर्न्िों का उल्लघंन करेगा तो िह कारािास से, क्जसकी अिधि तीन िषब तक की हो, सकेगी, या जमुाबने से, या दोनों से दण्डनीय होगा ।

4. निर्बन्िि आदेशों का प्रनतसहंरि - - (1) ननर्बन्िन आदेश क्रकसी भी समय, राज्य शासन द्िारा प्रनतसहंत या उपान्तीरत क्रकया जा सकेगा ।

(2) क्रकसी ननर्बन्िन आदेश का प्रनतसहंरण या अिसान, उसी व्यक्तत के विरुद्ि, क्रकसी ऐसे में, क्जसमें क्रक ऐसे प्रनतसहंरण या अिसान की तारीि के पश्चात ्ऐसे नये तथ्य उद् भतू हो गये हों, । क्जनके आिार पर राज्य सरकार का यह समािान हो जाय क्रक ऐसा आदेश क्रकया जाना चादहए, नया ननर्बन्िन आदेश क्रकये जाने को िक्जबत नहीं करेगा:

परन्त ुकोई भी ऐसा नया आदेश केिल राज्य सरकार द्िारा ही क्रकया जायेगा ।

5. निर्बन्िि आदेश का निलभर्ि - - (1) राज्य सरकार, क्रकसी ननर्बन्िन आदेश का प्रितबन क्रकसी शतब के या ऐसी शतों पर, जैसी क्रक िह उधचत समझे और जो उस व्यक्तत द्िारा विरुद्ि ननर्बन्िन आदेश क्रकया गया है, प्रनतग्रहीत की जायें, ननलक्म्र्त कर सकेगी और िह क्रकसी भी समय ननलम्र्न आदेश को रद्द कर सकेगी ।

(2) उपिारा (1) के अिीन विननददबष्ट की गई शतों में, उन शतों के, क्जन पर आदेश ननलबंर्त क्रकया गया है, सम्यक् अनपुालन के ललये प्रनतभतू सदहत या प्रनतभतू रदहत र्न्िपत्र ननष्पाददत क्रकया जाने की अपिेा की जा सकेगी ।

(3) कोई भी ऐसा व्यक्तत, क्जसके सम्र्न्ि में इस िारा के अिीन ननर्बन्िन आदेश ननलबंर्त कर ददया जाता है, ऐसे समय तथा स्थान पर और ऐसे प्राधिकारी के समि उपक्स्थत होगा जैसा क्रक यथाक्स्थनत ननलम्र्न आदेश में या ऐसे ननलम्र्न को रद्द करने िाले आदेश में विननददबष्ट क्रकया गया हो ।

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(4) यदद कोई व्यक्तत उपिारा (3) में विननददबष्ट की गई रीनत में उपक्स्थत होने में पयाबप्त कारण के बर्ना चूक करेगा, तो िह कारािास से, जो तीन िषब तक का हो सकेगा, या जुमाबने से या दोनों से दण्डनीय होगा ।

(5) यदद कोई ऐसा व्यक्तत, क्जसके सम्र्न्ि में ननर्बन्िन आदेश ननलक्म्र्त कर ददया जाता है, इस िारा के अिीन या उसके द्िारा ननष्पाददत क्रकये गये र्िंपत्र में उस पर अधिरोवपत की गई शतों में से क्रकसी शतब की पनूत ब करने में असफल रहेगा तो क्जला मक्जस्रेट र्िंपत्र को राज्य सरकार के पि में समपहत घोवषत कर सकेगा और उसके द्िारा आर्द्ि कोई व्यक्तत उसकी शाक्स्त का सदंाय करने का दायी होगा ।

6. निर्बन्िि आदेश के सलए आिारो का प्रकटि - - (1) ननर्बन्िन आदेश क्रकया जाने के पश्चात ्यथाशतय शीघ्र, क्रकन्त ुअधिक से अधिक एक सप्ताह के भीतर आदेश करने िाला प्राधिकारी उस व्यक्तत को, क्जसके विरुद्ि आदेश पाररत क्रकया गया है, िे आिार, क्जन पर िह आदेश क्रकया गया है, उस सीमा तक ससंधूचत करेगा जहााँ तक क्रक ऐसी ससंचूना उन तथ्यों को प्रकट क्रकये बर्ना दी जा सकती हो । प्रकट करना िह लोक दहत के विरुद्ि मानता है, और साथ ही ऐसी अन्य विलशक्ष्टयााँ ससंधूचत करेगा जो क्रक उसकी राय में उस आदेश के विरुद्ि राज्य सरकार को अभ्यािेदन करने के ललए उस व्यक्तत को समथब

र्नाने के ललये पयाबप्त हैं, और उसे ऐसा अभ्यािेदन करने के उसके अधिकार के सम्र्न्ि में जानकारी देगा, तथा उसे ऐसा करने के ललए शीघ्रतम अिसर देगा ।

(2) िह व्यक्तत, क्जसके विरुद्ि ननर्बन्िन आदेश क्रकया गया है, उस तारीि से, क्जसकी क्रक उपिारा (1) में ननददबष्ट ननर्बन्िन आदेश के आिार तथा अन्य विलशक्ष्टयााँ उसको ससंधूचत की जाती हैं, परंह ददन के भीतर, उस आदेश के विरुद्ि राज्य सरकार को अभ्यािेदन कर सकेगा ।

7. सलाहकार पररषद् का गठि - - (1) राज्य सरकार इस अध्याय के प्रयोजन के ललए एक सलाहकार पररषद् का गठन करेगी ।

(2) सलाहकार पररषद् में ऐसे तीन व्यक्तत होगे जो उच्च न्यायालय के न्यायािीश हैं, या रह चुके हैं या उस रूप में ननयतुत क्रकये जाने के ललए अदहत हैं और ऐसे व्यक्तत राज्य सरकार द्िारा ननयतुत क्रकये जायेगे: परन्त ुसलाहकार पररषद् का कम से कम एक सदस्य ऐसा व्यक्तत होगा जो उच्च न्यायालय का न् यायािीश है या रह चुका है ।

(3) राज्य सरकार सलाहकार पररषद् के सदस्यों में स ेएक ऐसे सदस्य को, जो उच्च न्यायालय का न्यायािीश है या रह चकुा है, सलाहकार पररषद् का अध्यि ननयतुत करेगी ।

8. सलाहकार पररषद को निदेश - - िारा 6 की उपिारा (2) में ननददबष्ट अभ्यािेदन के प्राप्त होने के पश्चात या उस दशा में जर्क्रक कोई अभ्यािेदन प्राप्त न हुआ हो, उसके ललये ननयत क्रकये गये

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समय का अिसान हो जाने के पश्चात ्राज्य सरकार उस व्यक्तत पर, क्जसके सम्र्न्ि में आदेश क्रकया गया है, आदेश की तामील हो जाने के तीस ददन के भीतर, िे आिार, क्जन पर क्रक आदेश क्रकया गया है, तथा सम्र्क्न्ित व् यक्तत द्िारा क्रकया गया अभ् यािदेन, यदद कोई हो, क्रकसी भी ऐसी अन्य ससुगंत सामग्री सदहत, जैसी क्रक राज् य सरकार आिश्यक सामझ िारा 7 के अिीन गदठत सलाहकार पररषद् के समि रिेगी ।

9. सलाहकार पररषद की प्रकक्रया - - (1) सलाहकार पररषद् अपने समि रिी गई सामग्री पर विचार करने के पश्चात ्और राज्य सरकार से या सम्र्क्न्ित व्यक्तत से ऐसी रीनत और जानकारी क्जसे िह आिश्यक समझे, मांगने के पश्चात ्और यदद क्रकसी विलशष्ट मामले में िह ऐसा करना आिश्यक समझती हो, या यदद सम्र्क्न्ित व्यक्तत यह चाहता हो क्रक उंसकी सनुिाई की जाय, तो स्िय ंउस े सनुने के पश्चात ्अपनी ररपोटब ननर्बन्िन आदेश की तारीि से साठ ददन के भीतर राज्य सरकार को भेजेगी ।

(2) सलाहकार पररषद् की ररपोटब के एक पथृक् भाग में सलाहकार पररषद् की इस सम्र्न्ि में राय विननददबष्ट को जायेगी क्रक तया सम्र्क्न्ित व्यक्तत के विरुद्ि ननिबचन आदेश क्रकय ेजाने के ललए पयाबप्त कारण हैं या नहीं अथिा तया ननर्बन्िन आदेश को उपांतररत क्रकया जाना आिश्यक है ।

(3) जर् सलाहकार पररषद् का गठन करने िाले सदस्यों के र्ीच मतभेद हो, तो ऐसे सदस्यों की र्हुसखं्या की राय को प्रररषद् की राय समझा जायेगा ।

(4) राज्य सरकार तथा सलाहकार पररषद् के र्ीच पत्र-व्यिहार में अन्तविबष्ट समस्त विलशक्ष्टयााँ तथा सलाहकार पररषद् द्िारा की गई ररपोटब, ररपोटब के उस भाग के लसिाय क्जसमें क्रक सलाहकार पररषद की राय विननददबष्ट है, गोपनीय होंगी तथा तत्समय प्रिरृ्त् क्रकसी विधि में अन्तविबष्ट क्रकसी र्ात के होत ेहुए भी, कोई भी न्यायालय क्रकसी लोक सेिक से यह अपेिा करने का हकदार नहीं होगा क्रक िह पिूोतत दस्तािेजों में स ेकोई दस्तािेज उसके समि पेश करे ।

(5) इस िारा में की कोई भी र्ात क्रकसी ऐसे व्यक्तत को, क्जसके विरुद्ि ननर्बन्िन आदेश क्रकया गया है, सलाहकार पररषद् को क्रकये गये क्रकसी ननदेश से सम्र्क्न्ित क्रकसी मामले में क्रकसी विधि व्यिसायी द्िारा उपसजंात होने के ललए हकदार नहीं र्नायेगी ।

अध्याय 3 समाज ववरोिी तत्वों और पवूब में ससद्िदोष ठहराये गये व्यम्ततयों का नततर-बर्तर ककया जािा

10. व्यम्ततयों के दलों तथा समहूों का नततर-बर्तर ककया जािा - - जर् कभी क्जला मक्जस्रेट, को यह प्रतीत हो क्रक क्जले में व्यक्ततयों के क्रकसी दल या समहू के आने-जाने या पड़ाि स ेितरा या सतंा सतं्रास काररत हो रहा है या ऐसा आना-जाना या पड़ाि ितरा या सतं्रास काररत करने के ललए प्रकक्ल्पत है या ऐसा यकु्ततयतुत सदेंह है क्रक ऐसे दल या समहू या उसके सदस्यों द्िारा विधि विरुद्ि

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पररकल्पना की जा रही है, तो क्जला मक्जस्रेट, ऐसे व्यक्ततयों को, जो ऐसे दल या समहू के नेता या मखुिया प्रतीत होत ेहों, सम्र्ोधित क्रकये गये तथा डोंडी वपटिाकर या अन्यथा जैसा क्रक क्जला मक्जस्रेट उधचत समझे, प्रकालशत क्रकये गये आदेश द्िारा, ऐसे दल या समहू के सदस्यों को ननदेश दे सकेगा क्रक, -

(क) िे ऐसी रीनत में आचरण करें जो दहसंा तथा सतं्रास का ननिारण करने के ललए आिश्यक हो, या

(ि) िे नततर-बर्तर हो जायें तथा उनमें से प्रत्येक सदस्य क्जले या उसके क्रकसी भाग या िेत्र तथा उसके समीपस्थ क्रकसी क्जले या क्जलों या उसके उनके क्रकसी भाग के र्ाहर ऐसे समय के भीतर चला जाय जो क्जला मक्जस्रेट विननददबष्ट करें, और यथाक्स्थनत उतत क्जले या उसके भाग या ऐसे िेत्र तथा ऐसे समीपस्थ क्जलों या उनके भाग में प्रिेश न करे या उस स्थान को न लौटे जहााँ से चले जाने के ललए उनमें से प्रत्येक को ननदेश ददया गया था ।

11. अपराि करिे के सलए आमादा व्यम्ततयों का हटाया जािा - - जर् कभी क्जला मक्जस्रेट को यह प्रतीत हो क्रक - -

(क) क्रकसी व्यक्तत के आने-जाने या कायों से मानि शरीर या सम्पवर्त् को सतं्रास, ितरा या अपहाननकाररत हो रही है, या ऐसा आना-जाना या कायब ऐसा सतं्रास, ितरा या अपहाननकाररत करने के ललए प्रकक्ल्पत है; या

(ि) यह विश्िास करने के ललए यकु्ततयतुत कारण हैं क्रक ऐसा व्यक्तत क्रकसी ऐसे अपराि के, क्जसमें र्ल या दहसंा अन्तिबललत है, या भारतीय दण्ड सदंहता, 1860 (1860 का स.ं 45) के अध्याय 12, 16 या 17 या उसकी िारा 506 या 509 के अिीन दण्डनीय क्रकसी अपराि के करने में या ऐसे क्रकसी अपराि के दषु्पे्ररण में सलंग्न होने को आमादा है और जर् क्जला मक्जस्रेट की राय में, ऐसे व्यक्तत के विरुद्ि सािीगण अपने शरीर या समपवर्त् की सरुिा के र्ारे में उसकी ओर से आशकंा होने के कारण, िुले आम साक्ष्य देने हेत ुआगे आने के ललए रजामदं नहीं है; या (ग) क्रकसी आप्रिासी के लगातार ननिास से क्रकसी महामारी का प्रादभुाबि होना सभंाव्य है; तो क्जला मक्जस्रेट उस पर सम्यक् रूपेण तामील क्रकये गये ललखित आदेश द्िारा डोडी वपटिाकर या अन्यथा, जैसा क्रक क्जला मक्जस्रेट उधचत समझे, ऐसे व्यक्तत या आप्रिासी को ननदेश दे सकेगा क्रक - - (क) िह ऐसी रीनत में आचरण करे जो दहसंा या सतं्रास या ऐसे रोग के प्रादभुाबि या प्रसार का ननिारण करने के ललए आिश्यक प्रतीत हो; या

(ि) िह क्जले या उसके क्रकसी भाग या ऐसे िते्र तथा उसके समीपस्थ क्रकसी क्जले या क्जलों या उसके/उनके क्रकसी भाग के र्ाहर ऐसे मागब से तथा ऐसे समय के भीतर जैसा क्रक क्जला

मक्जस्रेट विननददबष्ट करे, चला जाय और यथाक्स्थनत उतत क्जल ेया उसके भाग या ऐसे िेत्र तथा ऐसे समीपस्थ क्जलों या उनके भाग में, जहााँ से क्रक हट जाने का उसे ननदेश ददया गया था, प्रिेश न करें या न लौटें ।

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12. कनतपय अपरािों के सलए दोषससद्ि ठहराये गये व्यम्ततयों का हटाया जािा - - यदद कोई व्यक्तत,

(क) (एक) भारतीय दण्ड सदंहता, 1860 (1860 का स.ं 45) के अध्याय 12, 16 या 17 के या उसकी िारा 506 या 509 के अिीन क्रकसी अपराि का; या

(दो) लसविल अधिकार सरंिण अधिननयम, 1955 (1955 का स.ं 22) के अिीन क्रकसी अपराि का; या

(ि) स्त्री तथा लड़की अननैतक व्यापार दमन अधिननयम, 1956 (1956 स.ं 104) के अिीन क्रकसी अपराि का दो र्ार; या

(ग) मध्यप्रदेश राज्य में लाग ूहुए रूप में सािबजननक द्यतु अधिननयम, 1867 (1867 का स.ं 3) की िारा 3 या 4 के अिीन क्रकसी अपराि का तीन िषब की कालािधि के भीतर तीन र्ार;

लसद्िदोष ठहराया गया है तो क्जला मक्जस्रेट यदद उसके पास यह विश्िास करने का कारण हो क्रक ऐसे व्यक्तत के सम्र्न्ि में सम्भािना है क्रक िह उस अपराि क्जसके सम्र्न्ि में िह लसद्िदोष ठहराया गया था, समरूप कोई अपराि करने में स्िय ंको पनुःसलंग्न करेगा, ऐसे व्यक्तत को यह ननदेश दे सकेगा क्रक िह क्जले या उसके भाग या ऐसे िते्र या उसके समीपस्थ क्रकसी क्जले या क्जलों या उसके/उनके भाग के र्ाहर, ऐसे मागब स ेतथा ऐसे समय के भीतर, जैसा क्रक क्जला मक्जस्रेट आदेश दे, चला जाय और यथाक्स्थनत उस क्जल ेया उसके भाग या ऐसे िते्र तथा ऐसे समीपस्थ क्जलों या उनके भाग में, जहााँ से क्रक हट जाने का उसे ननदेश ददया गया था, प्रिेश न करे या न लौटे ।

स्पष्टीकरि - - इस िारा के प्रयोजन के ललए, अलभव्यक्तत ''उस अपराि के, क्जसके ललए जो व्यक्तत लसद्िदोष ठहराया गया था, समरूप अपराि'' से अलभप्रेत है - - (एक) िण्ड (क) में िखणबत अपराि के ललए लसद्िदोष ठहराये गये व्यक्तत के मामले में, उस िण्ड में िखणबत भारतीय दण्ड सदंहता, 1860 (1860 का स.ं 45) के अध्यायों या िाराओं में स ेक्रकसी के भी अन्तगबत आने िाले अपराि या उस िण्ड के उपिण्ड (2) में िखणबत अधिननयम के उपर्न्िों के अन्तगबत आने िाला अपराि; और (दो) िण्ड (ि) तथा (ग) में िखणबत अपराि के ललए लसद्िदोष ठहराये गये व्यक्तत के मामले में उतत िण्डों में िमश: िखणबत अधिननयमों के उपर्न्िों के अन्तगबत आने िाले अपराि ।

13. िारा 11, 12 या 13 के अिीि आदेशों के प्रवतबि की कालावधि - - यथाक्स्थनत क्रकसी क्जले या उसके भाग या ऐसे िेत्र तथा उसके समीपस्थ क्रकसी क्जले या क्जलों या उसके/उनके क्रकसी भागों में प्रिेश न करने के सम्र्न्ि में िारा 11, 12 या 13 के अिीन ददया गया ननदेश ऐसी कालािधि के ललए होगा जो क्रक उसमें विननददबष्ट की जाय और क्रकसी भी दशा में उस तारीि से, क्जसको क्रक िह क्रकया था, एक िषब से अधिक की कालािधि के ललए नहीं होगा ।

11

14. िारा 11, 12 या 13 के अिीि आदेश पाररत ककये जािे के पवूब सिुवाई की जाए- - (1) क्रकसी व्यक्तत के विरुद्ि िारा 11, 12 या 13 के अिीन कोई आदेश पाररत क्रकया जाने के पिूब, क्जला मक्जस्रेट उस व्यक्तत को उसके विरुद्ि ताक्त्िक अलभकथनों के सामान्य स्िरूप की ललखित जानकारी देगा और उसे उनके र्ारे में स्पष्टीकरण देने का यकु्ततयतुत अिसर देगा ।

(2) यदद ऐसा व्यक्तत उसके द्िारा पशे क्रकय ेगये क्रकसी सािी की परीिा के ललए आिदेन करे तो क्जला मक्जस्रेट, जर् तक क्रक अलभललखित क्रकय ेजाने िाले कारणों से, उसकी यह राय न हो क्रक ऐसा आिेदन तगं करने या विलम्र् करने के प्रयोजन से ददया गया है, ऐसे आिेदन को मजंूर करेगा और ऐसे साक्षियों की परीिा करेगा ।

(3) ऐसे व्यक्तत द्िारा प्रस्ततु क्रकया गया कोई भी ललखित कथन मामले के अलभलेि के साथ फाइल क्रकया जाएगा और ऐसा व्यक्तत अपना स्पष्टीकरण देने तथा अपने द्िारा पेश क्रकये गये साक्षियों की परीिा के प्रयोजन से क्रकसी विधि व्यिसायी द्िारा क्जला मक्जस्रेट के समि उपसजंात होने का हकदार होगा ।

(4) उपिारा (1) के अिीन कायबिाही करने िाला क्जला मक्जस्रेट क्रकसी ऐसे व्यक्तत की, क्जसके विरुद्ि िारा 11, 12 या 13 के अिीन क्रकसी आदेश का क्रकया जाना प्रस्तावित है, हाक्जरी सनुनक्श्चत करने के प्रयोजन के ललए, ऐसे व्यक्तत स ेअपिेा कर सकेगा क्रक िह उसके समि उपसजंात हो और जांच के दौरान ऐसी हाक्जरी के ललए प्रनतभ ूसदहत या रदहत प्रनतभनूत र्िंपत्र ननष्पाददत करे ।

(5) यदद िह व्यक्तत अपेक्षित क्रकये गये अनसुार प्रनतभनूत र्िंपत्र ननष्पाददत न करे या जांच के दौरान क्जला मक्जस्रेट के समि उपसजंात न हो, तो क्जला मक्जस्रेट के ललए यह विधिपणूब होगा क्रक िह जांच में एकपिीय कायबिाही करे और तदपुरर ऐसा आदेश जो उस व्यक्तत के विरुद्ि पाररत क्रकया जाना प्रस्तावित क्रकया गया था, पाररत क्रकया जा सकेगा ।

15. अपील - - (1) िारा 11, 12 या 13 के अिीन क्रकये गये क्रकसी आदेश से व्यधथत कोई भी व्यक्तत, ऐसे आदेश की तारीि से तीन ददन के भीतर, राज्य सरकार को अपील कर सकेगा ।

(2) इस िारा के अिीन अपील उस आदेश के, क्जसके क्रक विरुद्ि अपील की गई है, सम्र्न्ि में आपवर्त् के आिार पर सिंेप में देत े हुए ज्ञापन के रूप में की जाएगी और उसके साथ उसकी प्रमाखणत प्रनतललवप सलंग्न की जायेगी ।

(3) ऐसी अपील के प्राप्त होने पर, राज्य सरकार, अपीलाथी को या तो व्यक्ततश: या क्रकसी विधि व्यिसायी के द्िारा सनेु जाने का यकु्ततयतुत अिसर देने तथा ऐसी और जाच यदद कोई हो, जैसी क्रक िह आिश्यक समझे, करने के पश्चात ्उस आदेश की क्जसके क्रक विरुद्ि अपील की गई है, पकु्ष्ट कर सकेगी या उसमें फेरफार कर सकेगी या उसे वििक्ण्डत कर सकेगी

12

परन्त,ु िह आदेश क्जसके विरुद्ि अपील की गई है, जर् तक क्रक राज्य सरकार अन्यथा ननदेश न दे, अपील का ननपटारा होने तक प्रितबन में रहेगा ।

(4) इस िारा के अिीन अपील के ललये उपर्क्न्ित तीस ददन की कालािधि की सगंणना करने में उस आदेश की, क्जसके क्रक विरुद्ि अपील की गयी है, प्रमाखणत प्रनत ददये जाने के ललये ललया गया छोड ददया जायेगा ।

16 कनतपय मामलों में पाररत आदेश की अनंतमता : िारा 11, 12 या 13 के अिीन या राज् य सरकार द्िारा िारा 16 के अिीन पाररत क्रकया गया कोई आदेश क्रकसी न् यायालय में ननम् नललखित आिारों पर ही प्रश् नगत क्रकया जाएगा, अन् यथा नहीं -

(एक) यह क्रक क्जला मक्जस् रेट ने िारा 15 की उपिारा (1) में दी गयी प्रक्रिया का अनसुरण नहीं क्रकया था या

(दो) यह क्रक क्जला मक्जस् रेट के समि ऐसी कोई सामग्री नहीं थी क्जस पर िह आदेश आिाररत कर सकता था या

(तीन) यह क्रक क्जला मक्जस् रटे की यह राय नहीं थी क्रक सािीगण उस व् यक्तत के विरूद्ि क्जसके के सरं्िं में िारा 12 के अिीन आदेश पाररत क्रकया गया था, िुलेआम साक्ष् य देने हेत ुआगे आने के ललए रजामदं नहीं थ े।

17 व्यम्तत द्वारा म्जला आदद ि छोड़िे पर तथा हटाये जािे के पश्चात ्उसके द्वारा उसमें प्रवेश करिे पर प्रकक्रया - - यदद कोई व्यक्तत,क्जसे क्रकसी क्जल ेया उसके भाग या ऐसे िते्र तथा उसके समीपस्थ क्रकसी क्जले या क्जलों या उसके/उनके क्रकसी भाग से हट जाने का ननदेश िारा 11, 12 या 13 के अिीन जारी क्रकया जा चुका हो - -

(एक) ननदेलशत क्रकये गये अनसुार नहीं हट जाता है; या

(दो) इस प्रकार हट जाने पर, िारा 19 में यथा उपर्क्न्ित ललखित अनजु्ञा के लसिाय, यथामक्स्थनत क्जले या उसके भाग या उसके समीपस्थ क्रकसी क्जले या क्जलों या उसके/उनके क्रकसी भाग में, आदेश में कालािधि के भीतर प्रिेश करता है;

तो क्जला मक्जस्रेट उसे धगरफ्तार करिा सकेगा और पलुलस अलभरिा में उसे ऐसे िेत्र के र्ाहर ऐसे स्थान को, क्जसे क्जला मक्जस्रेट प्रत्येक मामले में विननददबष्ट करे, हटिा सकेगा ।

18. उस म्जले आदद में म्जससे हट जािे के सलए ककसी व्यम्तत का निदेश ददया गया था, प्रवेश करिे या लौटिे की अिजु्ञा - - (1) राज्य सरकार या क्जला मक्जस्रेट क्रकसी व्यक्तत को, क्जस, सम्र्न्ि में िारा 11, 12 या 13 के अिीन कोई आदेश ददया गया हो, उस क्जले या उसके भाग या ऐसे िेत्र तथा क्रकसी समीपस्थ क्जले या क्जलों या उसके/उनके भाग में, जहााँ स ेक्रक हट जाने के ललए उसे ननदश ददया गया था ऐसी अस्थायी कालािधि के ललए तथा ऐसी शतों के अध्यिीन रहत ेहुए प्रिेश करने या लौटने, के ललए ललखित अनजु्ञा दे सकेगा जसैी की ऐसी अनजु्ञा में विननददबष्ट की जायें ।

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(2) पिूोतत अनजु्ञा क्रकसी भी समय यथाक्स्थनत राज्य सरकार या क्जला मक्जस्रेट द्िारा प्रनतसहंत की जा सकेगी ।

(3) उपिारा (1) के अिीन क्रकसी व्यक्तत को यथाक्स्थनत उस क्जले या उसके ऐसे भाग या ि ै िेत्र तथा क्रकसी समीपस्थ क्जले या क्जलों या उसके/उनके भाग में, क्जससे हट जाने के ललए उस ेननदेश ददया गया था, प्रिेश करने या लौटने की अनजु्ञा देत ेसमय उतत अनजु्ञा देने िाला प्राधिकारी उससे यह अपेिा कर सकेगा क्रक िह उस पर अधिरोवपत की गई शतों के सम्यकू अनपुालन के ललए प्रनतभतू सदहत या रदहत र्िं-पत्र ननष्पाददत करे ।

(4) कोई भी व्यक्तत जो उपिारा (1) के अिीन मजंूर की गई अनजु्ञा के अनसुरण में यथाक्स्थनत उस क्जले या उसके भाग या ऐसे िेत्र तथा क्रकसी समीपस्थ क्जले या क्जलों या उसके/उनके भाग में; जहा ंसे हट जाने के ललये उसे ननदेश ददया गया था, प्रिेश करता है या लौटता है, उतत अनजु्ञा में अधिरोवपत की गई शतो का अनपुालन करेगा, और उस अस्थायी कालािधि की, क्जसके ललए क्रक प्रिेश करने या लौटने की अनजु्ञा उसे दी गई थी, समाक्प्त पर या ऐसी अनजु्ञा का पिूबतर प्रनतसहंरण हो जाने पर यथाक्स्थनत ऐसे क्जले या उसके भाग या ऐसे िेत्र तथा क्रकसी समीपस्थ क्जला या क्जलों या उसके / उनके भाग के र्ाहर चला जायेगा, और िारा 11, 12 या 13 के अिीन ददये गये मलू आदेश में विननददबष्ट कालािधि की अपयबिेलसत अिलशष्ट अिधि में, निीन अनजु्ञा के बर्ना, उसमें प्रिेश नहीं करेगा या िहााँ नहीं लौटेगा ।

(5) यदद ऐसा व्यक्तत अधिरोवपत की गई शतो में से क्रकसी शतब का अनपुालन नहीं करता है या तदनसुार हटता नहीं है या इस प्रकार हट जाने के पश्चात ्उस क्जले या उसके क्रकसी भाग या ऐसे िेत्र तथा क्रकसी समीपस्थ क्जले या क्जलों या उसके/उनके भाग में, निीन अनजु्ञा के बर्ना प्रिेश करता है या लौटता है, तो क्रकसी अन्य कायबिाही पर, जो क्रक इस अधिननयम के अिीन उसके विरुद्ि की जा सकती हो प्रनतकूल प्रभाि डाले बर्ना क्जला मक्जस्रेट उसे धगरफ्तार करिा सकेगा और पलुलस अलभरिा में उसे ऐसे िते्र के र्ाहर ऐसे स्थान को, क्जसे क्रक क्जला मक्जस्रेट प्रत्येक मामले में विननददबष्ट करे, हटिा सकेगा ।

19 निवाबसि (एतसटिबमेन्ट) की राज्य सरकार की शम्तत - - (1) राज्य सरकार या राज्य सरकार द्िारा इस सम्र्न्ि में विशषे रूप से सशतत क्रकया गया कोई अधिकारी िारा 11, 12 या 13 के अिीन क्जला मक्जस्रेट द्िारा क्जल ेमें प्रयोततव्य शक्ततयों का प्रयोग िैसी ही पररक्स्थनतयों में तथा िसैी ही रीनत में इस उपांतरण के साथ कर सकेगा क्रक राज्य सरकार या विशषे रूप से सशतत क्रकये गये अधिकारी के ललए यह विधिपणूब होगा क्रक िह यथाक्स्थनत ऐसे दल या समहू के सदस्यों या व्यक्ततयों या अप्रिालसयों या लसद्िदोष ठहराये गये व्यक्ततयो को क्रकसी क्जले या क्जलों या उसके / उनके भाग से, चाहे िे उसके/ उनके समीपस्थ हो या न हों, हट जाने के ललए और क्रकसी क्जले या क्जलों या उसके/उनके भाग में, चाहे िे उसके/उनके समीपस्थ हो या न हों, प्रिेश न करने या न लौटने के ललए ननदेश दें ।

14

(2) िारा 14, 15, 17, 18 तथा 19 के उपर्न्ि और िारा 16 के उपर्न्ि, उस दशा में जर्क्रक आदेश राज्य सरकार द्िारा विशषे रूप से सशतत क्रकये गये अधिकारी द्िारा उपिारा (1) के अिीन पाररत क्रकया गया हो, इस िारा के अिीन क्रकन्हीं शक्ततयों के प्रयोग को यथािश्यक पररितबन सदहत इस प्रकार लाग ूहोंगे जैसे क्रक िे िारा 11, 12 या 13 के अिीन क्रकन्हीं शक्ततयों के प्रयोग को लाग ू होत ेहैं ।

(3) जहााँ आदेश राज्य सरकार द्िारा उपिारा (1) के अिीन पाररत क्रकया गया हो िहााँ राज्य सरकार या तो स्िप्रेरणा स ेया व्यधथत, व्यक्तत के आिेदन पर, स्िय ंके द्िारा पाररत क्रकये गये क्रकसी भी आदेश का पनुविबलोकन कर सकेगी और उसके सम्र्न्ि में ऐसा आदेश पाररत कर सकेगी जैसा क्रक िह उधचत समझे:

परन्त ु क्रकसी भी आदेश में तर् तक फेरफार नहीं क्रकया जायेगा या उसे तर् तक उल्टा नहीं जायगा जर् तक क्रक सम्र्क्न्ित व्यक्तत को आदेश के समथबन में उपसजंात होने तथा सनेु जाने के ललए सचूना न दी गई हो ।

20. िारा 11, 12, 13 या 20 के अिीि निदेशों का उल्लिंि के सलए शाम्स्त - - यदद कोई व्यक्तत िारा 11, 12, 13 या 20 के अिीन जारी क्रकये गये क्रकसी ननदेश का विरोि करेगा या उसकी अिज्ञा करेगा या उसका अनिुतबन नहीं करेगा या क्रकसी ऐसे ननदेश के विरोि या उसकी अिज्ञा का दषु्पे्ररण करेगा तो िह कारािास से, क्जसकी अिधि तीन िषब तक की हो सकेगी, क्रकन्त ुजो, लेिर्द्ि क्रकये जाने िाले कारणों के लसिाय चार मास से कम नहीं होगी, दण्डनीय होगा और जुमाबने से भी दण्डनीय होगा ।

21. म्जस क्षेत्र के हट जािे के सलए ककसी व्यम्तत को निदेश ददया गया हो उस क्षेत्र में, अिजु्ञा के बर्िा, प्रवेश करिे के सलये या जर् अस्थायी रूप से लौटिे के सलए अिजु्ञा दी गई हो तो अधिक ठहरिे के सलये शाम्स्त - - िारा 18 में उपर्क्न्ित की गई पररक्स्थनतयों तथा रीनत में क्रकसी व्यक्तत को धगरफ्तार करने और हटाने की शक्तत पर प्रनतकूल प्रभाि डाले बर्ना, कोई व्यक्तत, जो - - (क) िारा 11, 12, 13 या 20 के अिीन उसको जारी क्रकये गये ननदेश के उल्लघंन में उस क्जले या उसके भाग, या ऐसे िेत्र तथा क्रकसी अन्य क्जले या क्जलों या उसके उनके भाग में, क्जससे हट जाने के ललये उसे ननदेश ददया गया था, अनजु्ञा के बर्ना प्रिेश करेगा या लौटेगा;

(ि) िारा 19 के अिीन मजूर की गई अनजु्ञा से, क्रकसी ऐसे पिूोतत िते्र या क्जले या उसके भाग में प्रिेश करेगा या लौटेगा क्रकन्त ुउसके उपर्न्िों के प्रनतकूल उस अस्थायी कालािधि की, क्जसके ललये क्रक उस ेप्रिेश करने या लौटने की अनजु्ञा दी गई थी, समाक्प्त पर ऐसे िेत्र से र्ाहर नहीं हटेगा या ऐसी अनजु्ञा का पिूबतर प्रनतसहंरण हो जाने पर या अस्थायी कालािधि की समाक्प्त पर या अनजु्ञा का प्रनतसहंरण हो जाने पर हट जाने के पश्चात,् निीन अनजु्ञा के बर्ना तत्पश्चात ्प्रिेश करेगा या लौटेगा:

15

िह कारािास स,े क्जसकी अिधि तीन िषब तक की हो सकेगी क्रकन्त ुजो, लेिर्द्ि क्रकये जाने िाले कारणो के लसिाय, छह मास से कम की नहीं होगी, दण्डनीय होगा और जुमाबने से भी दण्डनीय होगा ।

22. िारा 11, 12, 13 या 20 के अिीि जारी ककय ेनिदेशों कें उल्लिंि के सलये असियोजिों में उपिारिा - - तत्समय प्रिरृ्त् क्रकसी विधि में अन्तविबष्ट क्रकसी र्ात के होत ेहुए भी, िारा 11, 12, 13 या 20 के अिीन जारी क्रकये गये ननदेश के उल्लघंन सम्र्न्िी क्रकसी अपराि के अलभयोजन में, आदेश की अधि-प्रमाखणत प्रनत पेश क्रकये जाने पर, जर् तक क्रक प्रनतकूल साबर्त न कर ददया जाये तथा क्जसे साबर्त करने का भार अलभयतुत पर होगा, यह उपिारणा की जायेगी क्रक - - (क) आदेश, यथाक्स्थनत क्जला मक्जस्रेट या िारा 25 के अिीन राज्य सरकार द्िारा सशतत क्रकये गये अपर क्जला मक्जस्रेट या उपिण्ड मक्जस्रेट या राज्य सरकार या िारा 20 के अिीन राज्य सरकार द्िारा विशषे रूप स ेसशतत क्रकये गये क्रकसी अधिकारी द्िारा क्रकया गया था;

(ि) यथाक्स्थनत क्जला मक्जस्रेट या िारा 25 के अिीन राज्य सरकार द्िारा सशतत क्रकये गए अपर क्जला मक्जस्रेट या उपिण्ड मक्जस्रेट या राज्य सरकार या िारा 20 के अिीन राज्य सरकार द्िारा विशषे रूप से सशतत क्रकये गये क्रकसी अधिकारी का यह समािान हो गया था क्रक िे आिार क्जन पर या िह प्रयोजन क्जसके ललए िह क्रकया गया था, विद्यमान था तथा उस आदेश का क्रकया जाना आिश्यक था; और

(ग) आदेश अन्यथा विधिमान्य था और इस अधिननयम के उपर्न्िों के अनरुूप था ।

23. उस व्यम्तत द्वारा निष्पाददत ककये गये र्िं-पत्र का समपहरि म्जस ेउस क्षेत्र में प्रवेश करिे या लौटिे की अिजु्ञा दी गई थी म्जस क्षेत्र से हट जािे का उसे निदेश ददया गया था - - यदद िारा 19 की उपिारा (1) के अिीन अनजु्ञात कोई व्यक्तत, उतत उपिारा के अिीन या उतत िारा की उपिारा (3) के अिीन उसके द्िारा ननष्पाददत क्रकये गये र्न्ि-पत्र में अधिरोवपत की गई क्रकसी शतब का अनपुात नहीं करता है, तो उसके र्न्ि-पत्र का समपहरण कर ललया जाएगा और उसके द्िारा आर्द्ि कोई भी व्यक्तत तत्सम्र्न्िी शाक्स्त का भगुतान करेगा या न्यायालय के समािान योग्य कारण र्तलाएगा क्रक ऐसी शाक्स्त का भगुतान तयों नहीं क्रकया जाना चादहए ।

24. म्जला मम्जस्रेटों की शम्ततयों तथा कर्त्बव्यों का प्रत्यायोजि - - दण्ड प्रक्रिया सदंहता, 1973 (1974 का स. 2) में क्रकसी र्ात के होत े हुए भी, राज्य सरकार, आदेश द्िारा, यह ननदेश दे सकेगी क्रक इस अधिननयम के अिीन क्जला मक्जस्रेट को प्रदर्त् क्रकसी शक्तत का या उस पर अधिरोवपत क्रकये गये क्रकसी कर्त्बव्य का प्रयोग या पालन ऐसे अपर क्जला मक्जस्रेट या उपिण्ड मक्जस्रेट द्िारा तथा ऐसे िेत्रों के ललए, जो क्रक आदेश में विननददबष्ट क्रकये जायें, क्रकया जाएगा ।

25 जािकारी का स्त्रोत प्रकट िहीं ककया जाएगा - - इस अधिननयम की क्रकसी भी र्ात के सम्र्न्ि में यह नहीं समझा जायेगा क्रक िह यथाक्स्थनत राज्य सरकार या क्रकसी ऐसे अधिकारी क्जस े उसके द्िारा िारा 20 के अिीन विशषे रूप से सशतत क्रकया गया हो, या क्जला मक्जस्रेट या िारा 25

16

के अिीन सशतत क्रकये गये अपर क्जला मक्जस्रेट या उपिण्ड मक्जस्रेट से यह अपेिा करती है क्रक िह उस व्यक्तत को, क्जसके विरुद्ि इस अधिननयम की िारा 11, 12, 13 या 20 के अिीन आदेश क्रकया गया है या क्रकसी न्यायालय को अपनी जानकारी का स्त्रोत या कोई तथ्य प्रकट करे क्जसकी क्रक ससंचूना से, यथाव्यक्तत राज्य सरकार या ऐसा अधिकारी क्जस ेिारा 20 के अिीन सशतत क्रकया गया है, या क्जला मक्जस्रेट या िारा 25 के अिीन सशतत क्रकये गये अपर क्जला मक्जस्रेट या उपिण्ड मक्जस्रेट की राय में, क्रकसी इवर्त्ला देने िाले की पहचान या नाम प्रकट होता हो ।

17

अध्याय 4 समाज ववरोिी कक्रयाकलापों का नियतं्रि

26. सकं्षारक पदाथब आदट के ववधि ववरुद्ि कब्जे के सलये दण्ड - - कोई भी व्यक्तत, जो कोई सिंारक (कारोलसि) पदाथब या रि ऐसी पररक्स्थनतयों में अपने शरीर पर रि कर ले जायेगा या जानत े हुए उसे अपने कब्जे या ननयतं्रण में रिेगा क्जनसे ऐसा यकु्ततयतुत सदेंह उत्पन्न होता हो क्रक िह क्रकसी विधिपणूब उद्देश्य के ललये उसे अपने शरीर पर रि कर नहीं ले जा रहा है या उसे विधिपणूब उद्देश्य से अपने कब्जे या ननयतं्रण में नहीं रि ेहुए है, उस दशा में जर्क्रक यह दलशबत न कर सकता हो क्रक िह उसे क्रकसी विधिपणूब उद्देश्य स ेअपने शरीर पर रि कर ले जा रहा था या अपने कब्जे या ननयतं्रण में रिे हुए था कारािास से, क्जसकी अिधि तीन िषब तक की हो सकेगी, दण्डनीय होगा और जुमाबने से भी दण्डनीय होगा ।

27. क्षेत्र के निवाससयों पर सामदूहक जुमाबिों का अधिरोपि - - (1) (क) यदद राज्य सरकार को यह प्रतीत हो क्रक क्रकसी िते्र के ननिासी या ननिालसयों का कोई िगब या उपिगब ऐसे अपरािों के क्रकय े जाने से सम्र्क्न्ित है या ऐसे अपरािों के क्रकये जाने को दषु्पे्रररत कर रहा है क्जनकी पररणनत मतृ्य ुया घोर उपहीत या सम्पवर्त् की हानन या उसके नकुसान में या उद्दीपन या क्रफरौती के ललए व्यिहरण में होती है अथिा होने की सम्भािना है, या ऐसे अपरािों के क्रकये जाने से सम्र्क्न्ित व्यक्ततयों को सशं्रय दे रहा है, या अपराधियों का पता लगाने या पकड़िाने में अपनी शक्तत भर परूी सहायता नहीं दे रहा है या ऐसे अपरािों के क्रकये जाने से सम्र्क्न्ित, ताक्त्िक साक्ष्य दर्ा रहा है, तो राज्य सरकार, अधिसचूना द्िारा उस िेत्र के ननिालसयों या ननिालसयों के िगब या उपिगब पर सामदूहक जुमाबना अधिरोवपत कर सकेगी ।

(ि) िण्ड (क) के अिीन सामदूहक जुमाबना अधिरोवपत करने िाला आदेश कम से कम एक ऐसे समाचार-पत्र में, क्जसका सम्र्क्न्ित िेत्र में पररचालन हो और ऐसी अन्य रीनत में, क्जस ेराज्य सरकार उस आदेश को सम्र्क्न्ित िेत्र के ननिालसयों की जानकारी में लाने के ललए सिाबधिक उपयतुत समझे, भी प्रकालशत क्रकया जायेगा ।

(2) राज्य सरकार या कोई ऐसा अधिकारी, जो राज्य सरकार द्िारा सािारण या विशषे आदेश द्िारा, इस ननलमर्त् सशतत क्रकया गया हो, क्रकसी भी ऐसे ननिासी को या ऐसे ननिालसयों के क्रकसी भी िगब 'या उपिगब को ऐसे जमुाबने या उसके क्रकसी भाग का भगुतान करने के दानयत्ि से छूट दे सकेगा ।

(3) क्जला मक्जस्रेट, ऐसी जांच करने के पश्चात ्जैसी क्रक िह आिश्यक समझे, ऐसे जुमाबने को उन ननिालसयों के र्ीच प्रभाक्जत करेगा जो जुमाबने का भगुतान करने के ललए सामदूहक रूप से दायी हो और ऐसा प्रभाजन ऐसे ननिालसयों के अपने- अपने सािनों के सम्र्न्ि में क्जला मक्जस्रेट के ननणबय के अनसुार क्रकया जायेगा ।

(4) प्रभाजन करत ेसमय, क्जला मक्जस्रेट िह भाग ननयत कर सकेगा क्जसका भगुतान क्रकसी

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सयंतुत या अविभतत कुटुम्र् द्िारा क्रकया जाना हो ।

(5) ऐसे जुमाबने का िह भाग, जो क्रकसी ननिासी अथिा सयतुत या अविभतत कुटुम्र् द्िारा देय होने के रूप में ननयत क्रकया गया हो - -

(क) उस रीनत में, जो क्रक क्रकसी न्यायालय द्िारा अधिरोवपत क्रकये गये जुमाबनों की िसलूी के ललए दण्ड प्रक्रिया सदंहता, 1973 (1974 का स. 2) द्िारा उपर्क्न्ित की गई है, इस प्रकार िसलू क्रकया जा सकेगा मानो क्रक ऐसा भाग क्रकसी न्यायालय द्िारा अधिरंोवपत क्रकया गया जुमाबना हो:

परन्त ुराज्य सरकार, दण्ड प्रक्रिया सदंहता, 1973 (1974 का स.ं 2) की िारा 421 की उपिारा

(2) में ननददबष्ट ननयमों के स्थान पर, उस रीनत का क्जसमें क्रक उतत सदंहता की उतत िारा

(1) के िण्ड (क) के अिीन िारण्टों का ननष्पादन क्रकया जाना हो, विननयमन करत ेहुए तथा क्रकन्हीं ऐसे दािों के, जो जुमाबने का भगुतान करने के ललए दायी व्यक्तत से लभन्न क्रकसी व्यक्तत द्िारा ऐसी सम्पवर्त्, के सम्र्न्ि में क्रकये गये हों जो क्रक िारण्ट के ननष्पादन में कुकब की गई हो, सकं्षिप्त अििारण के ललए ननयम इस अधिननयम के अिीन र्ना सके, (ि) भ-ूराजस्ि की र्काया के तौर पर िसलू क्रकया जा सकेगा ।

(6) उपिारा (1) के अिीन सामदूहक जुमाबना अधिरोवपत करने िाला आदेश राज्य सरकार द्िारा क्रकसी भी समय प्रनतसहंत या उपांतररत क्रकया जा सकेगा ।

अध्याय 5 लोक क्षेम और व्यवस्था

28. सशववरों, कवायदों (ड्रिल) परेडों आदद का नियतं्रि - - (1) यदद राज्य सरकार का यह समािान हो जाता है क्रक लोक सरुिा या लोक व्यिस्था र्नाये रिने के दहत में ऐसा करना आिश्यक है, तो िह सािारण या विशषे आदेश द्िारा, क्रकसी िेत्र में सनैनक प्रकार के ऐसे लशविरों का लगाया जाना या क्रकसी ऐसे अभ्यास, सचंलन, व्यिक्स्थत चालन (इिॉल्यशुन) या किायद का कराया जाना प्रनतवषद्ि या ननर्बक्न्ित कर सकेगी जो आदेश में विननददबष्ट क्रकये गये हो |

(2) यह सनुनक्श्चत करने की दृक्ष्ट से क्रक क्रकसी भी स्थान पर सनैनक प्रकार का कोई अप्राधिकृत अभ्यास सचंालन व्यिक्स्थत चालन या किायद नहीं की जाती है, राज्य सरकार सािारण या विशषे आदेश द्िारा क्रकसी ऐसे िगब के व्यक्ततयों या सगंठनों द्िारा, जो उस आदेश में विननददबष्ट क्रकये गये हों, क्रकसी लशविर के लगाये जाने, परेड, सक्म्मलन, सभा क्रकये जाने या जुलसू ननकाले जाने या उसमें भाग ललये जाने को प्रनतवषद्ि या ननर्बक्न्ित कर सकेगी या उसी पर शतें अधिरोवपत कर सकेगी ।

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(3) इस िारा के अिीन क्रकये गये क्रकसी आदेश का कोई भी उल्लघंन कारािास से, जो तीन िषब तक का हो सकेगा या जुमाबने से, या दोनों मे दण्डनीय होगा ।

29. वददबयों (यनूिफामब) का नियतं्रि- - (1) यदद राज्य सरकार का यह समािान हो जाता है क्रक क्रकसी ऐसी पोशाक या पररिान की िस्त ु (आदटबकल ऑफ एपारेल) या सम्प्रतीक से, जो सघं के प्राधिकारी सशतत र्ल के सदस्य या क्रकसी पलुलस र्ल के या तत्समय प्रिरृ्त् क्रकसी विधि के अिीन गदठत क्रकसी र्ल के सदस्य द्िारा पहने जाने या प्रदलशबत क्रकये जाने के ललये अपेक्षित क्रकसी िदी या िदी के भाग या सपं्रतीक से लमलता जुलता है, सािबजननक रूप से पहने जाने या प्रदलशबत क्रकये जाने स े लोक िेम, व्यिस्था र्नाये रिने या शाक्न्त या प्रशाक्न्त के र्नाये रिने पर प्रनतकूल प्रभाि पड़ने की सम्भािना है राज्य सरकार, सािारण या विशषे आदेश द्िारा क्रकसी भी ऐसी पोशाक या पररिान की िस्त ुया सम्प्रतीक को प्रनतवषद्ि या ननर्बक्न्ित कर सकेगी ।

(2) इस िारा के प्रयोजनों के ललए, क्रकसी पोशाक, पररिान की िस्त ुया सपं्रतीक के सम्र्न्ि में यह समझा जायेगा क्रक िह सािबजननक रूप से पहनी गई है या जनता में प्रदलशबत की गई है यदद िह इस प्रकार पहनी या प्रदलशबत की जाती है क्जसस ेक्रक िह क्रकसी व्यक्तत को क्रकसी ऐसे स्थान में ददिाई दे क्जसमें जनता की पहंुच हो ।

(3) यदद कोई व्यक्तत इस िारा के अिीन क्रकये गये क्रकसी आदेश का उल्लघंन करेगा तो िह कारािास से क्जसकी अिधि तीन िषब तक की हो सकेगी, या जुमाबने से या दोनों से दण्डनीय होगा ।

30. पथ्या (पाथ व)े सड़क आदद के उपयोग को प्रनतवषद्ि या निर्बम्न्ित करिे की शम्तत --

(1) राज्य सरकार, लोक व्यिस्था र्नाये रिने के ललये या जनसािारण के दहत में, आदेश द्िारा, - - (क) क्रकसी सड़क, पथ्या (पाथ ि)े या जल मागब के उपयोग को;

(ि) क्रकसी भलूम पर से क्रकसी व्यक्तत, या पश ुया यान के आने-जाने को; तीन मास से अनधिक की ऐसी कालािधि तक के ललये जो क्रक आदेश में विननददबष्ट की जाय, प्रनतवषद्ि या ननर्बक्न्ित कर सकेगी ।

(2) यदद कोई व्यक्तत उपिारा (1) के अिीन क्रकये गये क्रकसी आदेश का उल्लघंन करेगा, तो र्ह कारािास से क्जसकी अिधि तीन िषब तक हो सकेगी, या जुमाबने से, या दोनों से दण्डनीय होगा ।

अध्याय 6 कनतपय स्थािों तथा क्षते्रों तक पहुुँच

31. सरंक्षक्षत स्थाि - - (1) यदद राज्य सरकार जनसािारण के दहत में क्रकसी स्थान या क्रकसी िगब के स्थानों के सम्र्न्ि में यह आिश्यक या समीचीन समझती है क्रक अप्राधिकृत व्यक्ततयों के प्रिेश रोकने के ललए विशषे पिूाबििाननयां र्रती जानी चादहए, तो राज्य सरकार, आदेश द्िारा उस स्थान को

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या यथाक्स्थनत उस िगब के प्रत्येक स्थान को सरंक्षित स्थान घोवषत कर सकेगी, और तदपुरर, उस समय तक जर् तक क्रक िह आदेश प्रिरृ्त् रहता है, यथाक्स्थनत िह स्थान या उस िगब का प्रत्येक स्थान इस अधिननयम के प्रयोजनों के ललये सरंक्षित स्थान होगा ।

(2) कोई भो व्यक्तत, राज्य सरकार की या क्जला मक्जस्रेट की या ऐसे अन्य अधिकारी की, जो राज्य सरकार द्िारा इस ननलमर्त् प्राधिकृत क्रकया जाय, अनजु्ञा के बर्ना क्रकसी भी सरंक्षित स्थान में प्रिेश नहीं करेगा या उस पर या उसमें नहीं रहेगा या उस पर स ेनहीं जायेगा या उसके सामीप्य में नहीं घमेूगा ।

(3) जहााँ उपन्यास (2) के अनसुरण में क्रकसी व्यक्तत को क्रकसी सरंक्षित स्थान में प्रिेश करने, उस पर या उसमें रहने या उस पर से जाने की अनजु्ञा दी जाती है, िहााँ िह व्यक्तत, ऐसी अनजु्ञा के अिीन कायब करत ेसमय, अपने आचरण को विननयलमत करने के ललए ऐसे ननदेशों का अनपुालन करेगा जो उस अधिकारी द्िारा ददये जायें, क्जसने क्रक अनजु्ञा दी है ।

(4) यदद कोई व्यक्तत इस िारा के क्रकसी उपर्न्ि के उल्लघंन में क्रकसी सरंक्षित स्थान में, प्रिेश करेगा या रहेगा, तो ऐसी क्रकन्ही ंभी अन्य कायबिाही पर, जो उसके विरुद्ि की जा सकती हों, प्रनतकूल प्रभाि डाले बर्ना, उसे क्रकसी पलुलस अधिकारी द्िारा या राज्य सरकार द्िारा इस प्राधिकृत क्रकये गये क्रकसी अन्य व्यक्तत द्िारा िहााँ से हटाया जा सकेगा ।

(5) यदद कोई व्यक्तत इस िारा के उपर्न्िों में से क्रकसी उपर्न्ि का उल्लघंन करेगा, तो िह कारािास से, क्जसकी अिधि तीन िषब तक की हो सकेगी, या जुमाबने से, या दोनों स,े दण्डनीय होगा ।

32. सरंक्षक्षत क्षेत्र - - (1) यदद राज्य सरकार, जनसािारण के दहत में यह आिश्यक या समीचीन समझती है क्रक क्रकसी िेत्र में व्यक्ततयों के प्रिेश को विननयलमत क्रकया जाए, तो राज्य सरकार, इस अधिननयम के क्रकन्हीं भी अन्य उपर्न्िों पर प्रनतकूल प्रभाि डाले बर्ना, आदेश द्िारी, ऐसे िेत्र को सरंक्षित िते्र घोवषत कर सकेगी, और तदपुरर उस समय तक जर् क्रक िह आदेश प्रिरृ्त् रहता है, ऐसा िेत्र इस अधिननयम के प्रयोजनों के ललए सरंक्षित िेत्र होगा ।

(2) ऐसी तारीि को तथा ऐसी तारीि के पश्चात ्जो क्रक उपिारा (1) के अिीन क्रकये गए आदेश में विननददबष्ट की जाय तथा क्रकन्ही ऐसी छूटों के अध्यिीन रहत ेहुए क्जनके ललये उतत आदेश द्िारा उपर्िं क्रकया जाय, कोई भी व्यक्तत, जो उतत तारीि के ठीक पिूब, उतत आदेश द्िारा सरंक्षित िेत्र के रूप में घोवषत क्रकये गये िेत्र का ननिासी नहीं था, उतत आदेश में विननददबष्ट क्रकये गये प्राधिकारी या व्यक्तत द्िारा ग्यो गये ललखित अनजु्ञा-पत्र के ननर्बन्िनों के अनसुार ही उस िेत्र में प्रिेश करेगा या उसमें रहेगा अन्यथा नहीं,

(3) यदद कोई व्यक्तत इस िारा के उपर्न्िों के उल्लघंन में क्रकसी सरंक्षित िेत्र में प्रिेश करेगा या रहेगा तो ऐसी क्रकन्हीं भी अन्य कायबिादहयों पर, जो क्रक उसके विरुद्ि की जा सकती हों, प्रनतकूल

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प्रभाि डाले बर्ना, उस सरंक्षित िते्र में कर्त्बव्यारूढ़ क्रकसी भी पलुलस अधिकारी द्िारा या उसके ननदेशों के अिीन या राज्य सरकार द्िारा इस ननलमर्त् प्राधिकृत क्रकये गये क्रकसी भी अन्य व्यक्तत द्िारा िहााँ से हटाया जा सकेगा |

(4) यदद कोई व्यक्तत इस िारा के उपर्न्िों में से क्रकसी भी उपर्न्ि के उल्लघंन में क्रकसी सरंक्षित स्थान में प्रिेश करेगा या रहेगा, तो िह कारािास से, क्जसकी अिधि तीन िषब तक की हो सकेगी, या जुमाबने से, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।

33. गाडब के साथ र्ल प्रयोग करिा या उसस ेर्चकर निकलिा - - कोई भी व्यक्तत, जो क्रकसी सरंक्षित स्थान या सरंक्षित िेत्र में, - -

(क) ऐसे स्थान या िते्र का सरंिण करने या ऐसे स्थान या िेत्र में प्रिेश को रोकने या ननयबंत्रत करने के प्रयोजन से तनैात क्रकये गये क्रकसी व्यक्तत पर आपराधिक र्ल प्रयोग करके या, करने की िमकी देकर; या

(ि) क्रकसी ऐसे व्यक्तत से अपने प्रिेश या प्रयनतत प्रिेश को नछपाने के ललये पिूाबििाननयााँ र्रतत ेहुए, प्रिेश करेगा या प्रिेश करने का प्रयत्न करेगा;

िह कारािास से, क्जसकी अिधि तीन िषब तक की हो सकेगी, या जुमाबने से, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।

34. कनतपय स्थािों तथा क्षेत्रों के सलए आदेश - - (1) इस अधिननयम के क्रकसी अन्य उपिन पर प्रनतकूल प्रभाि डाले बर्ना, राज्य सरकार - -

(क) क्रकसी ऐसे स्थान या िेत्र के र्ारे में, जो उनके द्िारा सरंक्षित स्थान या सरंक्षित िेत्र घोवषत क्रकया गया है; या

(ि) क्रकसी ऐसे अन्य स्थान या िेत्र के र्ारे में, क्जसके क्रक सम्र्न्ि में उसे यह आिश्यक प्रतीत होता हो विध्िसंक कायबिादहयों को रोकने या दर्ाने के ललए या समदुाय के जीिन के ललए आिश्यक प्रदायों तथा सेिाओं को र्नाये रिने के ललए विशषे पिूाबििाननयााँ र्रती जाये, ऐसे स्थान या िते्र में व्यक्ततयों के प्रिेश को या ऐसे स्थान या िेत्र या उसके सामीप्य में उनके आचरण को ननयबंत्रत या विननयलमत करने के ललये आदेश कर सकेगी ।

(2) पिूबगामी उपर्न्िों की व्यापकता पर प्रनतकूल प्रभाि डाले बर्ना, क्रकसी स्थान या िेत्र के सम्र्न्ि में उपिारा (1) के अिीन क्रकये गये आदेशों में ननम्नललखित र्ातों के ललए उपर्न्ि हो सकें गे- (क) ऐसे स्थान या िेत्र में व्यक्ततयों के प्रिेश को ननधचत करने के ललये और क्रकसी ऐसे व्यक्तत को, जो आदेशों के उल्लघंन में उस स्थान या िते्र में हों या जो इस अधिननयम के उपर्न्िों के क्रकसी उल्लघंन के ललये लसद्िदोष ठहराया जा चुका हो, िहााँ से हटान ेके ललये;

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(ि) यह अपेिा करने के ललये क्रक ऐसे स्थान या िेत्र में क्रकसी भी व्यक्तत या व्यक्ततयों के िगब की उपक्स्थनत विदहत प्राधिकारी को अधिसधूचत की जाये, और क्रकसी ऐसे व्यक्तत से, जो क्रकसी ऐसे अपराि के ललये लसद्िदोष ठहराया गया हो, जैसा क्रक इस िारा के िण्ड (क) में उक्ल्लखित है, यह अपेिा करने के ललये क्रक िह ऐसे स्थान या िते्र में रहत ेसमय अपने आने-जाने की ररपोटब दे और क्रकसी ऐसी अन्य शतब का अनपुालन करे जो क्रक विदहत . प्राधिकारी द्िारा उस पर अधिरोवपत की गई हो;

(ग) ऐसे स्थान या िते्र के क्रकसी व्यक्तत या व्यक्ततयों के िगब से यह अपिेा करने के ललये क्रक िह पहचान के ललये ऐसी दस्तािेजी साक्ष्य अपने साथ रिें जो क्रक विदहत की जाय; और क्रकसी व्यक्तत या व्यक्ततयों के िगब को कोई विननददबष्ट िस्त ुअपने कब्जे या ननयतं्रण में रिने से प्रनतवषद्ि करने के ललये ।

(3) क्रकसी सरंक्षित स्थान या सरंक्षित िते्र के सम्र्न्ि में इस िारा के अिीन क्रकये गये क्रकसी आदेश द्िारा ऐके स्थान या िेत्र को इस अधिननयम के ऐसे समस्त उपर्न्िों स ेया उनमें से क्रकन्ही ं भी ऐसे उपर्न्िों से, क्जनका क्रक यथाक्स्थनत क्रकसी सरंक्षित स्थान या सरंक्षित िते्र को या उसके सम्र्न्ि में लाग ूहोना अलभव्यतत हो, छूट दी जा सकेगी या यह ननददबष्ट क्रकया जा सकेगा क्रक उतत समस्त उपर्न्ि या उनमें से कोई भी उपर्न्ि ऐसे उपान्तरणों के अिीन रहत ेहुए लाग ूहोंगे जो आदेश में ननददबष्ट क्रकये जायें ।

(4) क्रकसी ऐसे स्थान या िेत्र के सम्र्न्ि में जो सरंक्षित स्थान या सरंक्षित िेत्र न हो, इस िारा के अिीन क्रकय ेगये आदेश द्िारा यह ननददबष्ट क्रकया जा सकेगा क्रक इस अधिननयम के समस्त उपर्न्ि या उनमें से कोई उपर्न्ि, क्जनका यथाक्स्थनत क्रकसी सरंक्षित स्थान या सरंक्षित िते्र को या उसके सम्र्न्ि में लाग ूहोना अलभव्यतत हो, उस स्थान या िेत्र को, या उसके सम्र्न्ि में,क्जसके क्रक र्ारे में आदेश क्रकया गया हो या तो उपान्तरण के बर्ना या ऐसे उपान्तरण के साथ लाग ूहोगे जो आदेश में विननददबष्ट क्रकया जाये ।

(5) यदद कोई व्यक्तत इस िारा के अिीन क्रकये गये क्रकसी आदेश का उल्लघंन करेगा, तो िह कारािास से, क्जसकी अिधि तीन िषब तक की हो सकेगी, या जुमाबने से, या दोनों स,े दण्डनीय होगा ।

अध्याय 7 निवारक निरोि

35. कनतपय व् यम्ततयों के निरोि के आदेश करिे की शम्तत - - (1) राज्य सरकार या सधचि की पदशे्रणी से अननम्न पदशे्रणी का राज्य सरकार का कोई अधिकारी, क्जसे उस सरकार द्िारा इस िारा के प्रयोजनों के ललए विशषे रूप से सशतत क्रकया गया हो, यदद क्रकसी व्यक्तत के सम्र्न्ि में उसका यह समािान हो जाय क्रक उसे राज्य की सरुिा या लोक व्यिस्था के र्नाये रिने पर प्रनतकूल

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प्रभाि डालने स ेिाली रीनत से कायब करने से रोकने की दृक्ष्ट स ेऐसा करना आिश्यक है, या ननदेलशत करत ेहुए आदेश कर सकेगी क्रक व्यक्तत को ननरुद्ि क्रकया जाय ।

स्पष्टीकरि - - इस उपिारा में अलभव्यतत ''लोक व्यिस्था के र्नाये रिने पर प्रनतकूल प्रभाि डालने िाली रीनत से कायब करने'' के अन्तगबत आता है कोई ऐसा कायब क्जससे - - (एक) भारतीय दण्ड सदंहता, 1860 (1860 का स.ं 45) के अध्याय 16 के अिीन; (दो) उतत सदंहता की िारा 506 या 509 के अिीन; और

(तीन) लसविल अधिकार सरंिा अधिननयम, 1955 (1955 का स.ं 22) के अिीन, दण्डनीय कोई अपराि और पिूोतत अपरािों का दषु्पे्ररण गदठत होता है ।

(2) उपिारा (1) में उपर्धंित क्रकये गये अनसुार समािान हो जाने पर, ननम्नललखित अधिकाररयों में से कोई अधिकारी भी उतत उपिारा द्िारा प्रदर्त् शक्ततयों का प्रयोग कर सकेगा - - (क) क्जला मक्जस्रेट ;

(ि) अपर मक्जस्रेट, जो राज्य सरकार द्िारा इस ननलमर्त् विशषे रूप से सशतत क्रकये गये हो ।

(3) जर् इस िारा के अिीन कोई आदेश उपिारा (2) में िखणबत क्रकसी अधिकारी द्िारा क्रकया जाता है तर् िह उस तथ्य की ररपोटब राज्य सरकार को तरुन्त भेजेगा और साथ में िे आिार, क्जन पर आदेश क्रकया गया हो, और ऐसी अन्य विलशक्ष्टयों भी, जो उसकी राय में, मामले से सम्र्क्न्ित हों, भेजेगा और कोई ऐसा आदेश, उसके क्रकये जाने के पश्चात,् र्ारह ददन से अधिक के ललए प्रिरृ्त् नहीं रहेगा जर् तक क्रक इस र्ीच राज्य सरकपर द्िारा उसे अनमुोददत न कर ददया गया हो:

परन्त ुजहााँ ननरोि के आिार पर आदेश करने िाले प्राधिकारी द्िारा ननरोि की तारीि से पांच ददन के पश्चात ् क्रकन्त ुदस ददन के भीतर िारा 41 के अिीन ससंधूचत कर ददये जात ेहैं, िहााँ यह उपिारा इस उपान्तरण के साथ लाग ू होगी मानो क्रक शब्द ''र्ारह ददन'' के स्थान पर शब्द ''पन्रह ददन'' स्थावपत कर ददये गये हैं ।

36. निरोि आदेशों का निष्पादि - - ननरोि आदेश का ननष्पादन भारत में क्रकसी भी स्थान पर उस रीनत में क्रकया जाएगा जो धगरफ्तारी िारण्टों के ननष्पादन के ललए दण्ड प्रक्रिया सदंहता, 1973 (1974 का स.ं 2) के अिीन उपर्क्न्ित है ।

37. निरोि के स्थाि तथा निरोि की शतो का ववनियमि करिे की शम्तत - - प्रत्येक व्यक्तत, क्जसके विरुद्ि कोई ननरोि आदेश क्रकया गया हो, - -

(क) ऐसे स्थान में और ऐसी शतों (क्जनके अन्तगबत भरण-पोषण, अनशुासन तथा अनशुासन भगं के ललये दण्ड भी है) के अिीन ननरुद्ि क्रकया जाने के दानयत्िािीन होगा जैसे क्रक राज्य सरकार, सािारण या विशषे आदेश द्िारा विननददबष्ट करें; और (ि) राज्य सरकार के आदेश द्िारा राज्य में के एक ननरोि स्थान से राज्य में के दसूरे

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ननरोि स्थान में हटाये जाने के दानयत्िािीन होगा ।

38. निरोि आदेशों का कनतपय आिारों पर अववधिमान्य या अप्रवतबिशील ि होिा - - कोई ननरोि आदेश केिल इस कारण अविधिमान्य या अप्रितबनशील नहीं होगा क्रक - - (क) उसके अिीन ननरुद्ि क्रकया जाने िाला व्यक्तत, आदेश करने िाली सरकार या अधिकारी

की िते्रीय अधिकाररता की सीमाओं के र्ाहर है; या

(ि) ऐसे व्यक्तत के ननरोि का सीन उतत सीमाओं के र्ाहर है ।

39. फरार व्यम्ततयों के सभर्न्ि में शम्ततयाुँ - - यदद यथाक्स्थनत राज्य सरकार या िारा 36 की उपिारा (1) या उपिारा (2) में विननददबष्ट क्रकसी अधिकारी के पास यह विश्िास करने का कारण हो क्रक क्जस व्यक्तत के सम्र्न्ि में ननरोि आदेश क्रकया गया है िह फरार हो गया है, अपने को नछपा रहा है या क्जससे उस आदेश का ननष्पादन नहीं हो सकता तो यथाक्स्थनत राज्य सरकार या ऐसा अधिकारी - -

(क) उस तथ्य की ललखित ररपोटब उस प्रथम िगब न्यानयक मक्जस्रेट को देगा जो उस स्थान पर अधिकाररता रिता हो जहााँ उतत मामलूी तौर ननिास करता हो; और तर् दण्ड प्रक्रिया

सदंहता, 1973 (1974 का स.ं 2) की िारा में उसी प्रकार लाग ू होगे मानो क्रक उसे ननरुद्ि करने के ननदेश देने िाला आदेश मक्जस्रेट द्िारा जारी क्रकया गया िारण्ट हो; (ि) राजपत्र में अधिसधूचत आदेश द्िारा उस व्यक्तत को ननदेश दे सकेगा क्रक िह ऐसे अधिकारी के समि, ऐसे स्थान पर तथा ऐसी कालािधि के भीतर, जैसा क्रक आदेश में विननददबष्ट क्रकया जाय, हाक्जर हो; और यदद उतत व्यक्तत ऐसे आदेश का अनपुालन करे तो जर् तक िह यह साबर्त न कर दे क्रक उसके ललए सम्भि नहीं था क्रक िह उसका अनपुालन करे और यह क्रक उसने, आदेश में िखणबत अधिकारी को उसमें विननददबष्ट कालािधि के भीतर, उस कारण की, क्जससे उसका अनपुालन असम्भि हो गया था तथा अपने पत-ेदठकाने की सचूना दे दी थी, िह कारािास से, क्जसकी अिधि तीन िषब तक की हो सकेगी, या जुमाबने से या दोनों से दण्डनीय होगा ।

40. निरोि आदेश के आिारों का उस व्यम्तत को प्रकट ककया जािा जो उस आदेश से प्रिाववत हुआ हो - - (1) जर् कोई व्यक्तत क्रकसी ननरोि आदेश के अनसुरण में ननरुद्ि क्रकया गया हो तर् आदेश करने िाला प्राधिकारी, यथाशतय शीघ्र, क्रकन्त ुननरोि की तारीि से मामलूी तौर पर पांच ददन के भीतर तथा असािारण पररक्स्थनतयों में और ऐसे कारणों से जो लेिर्द्ि क्रकये जायेगे, दस ददन के भीतर, उसको िे आिार ससंधूचत करेगा क्जन पर िह आदेश क्रकया गया हो, और उसे राज्य सरकार को उस आदेश के विरुद्ि अभ्यािेदन करने का शीघ्रतम अिसर देगा ।

(2) उपिारा (1) में की गई कोई भी र्ात प्राधिकारी से यह अपिेा नहीं करेगी क्रक िह ऐसे तथ्य प्रकट करे क्जन्हें प्रकट करना िह लोक दहत के विरुद्ि समझता है ।

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41. सलाहकार र्ोडों का गठि - - (1) राज्य सरकार, जर् भी आिश्यकता हो, इस अधिननयम के प्रयोजनों के ललए एक या अधिक सलाहकार र्ोडों का गठन करेगी ।

(2) ऐसे प्रत्येक र्ोडब का गठन मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मखु्य न्यायाधिपनत की लसफाररशों के अनसुार होगा ।

(3) ऐसा प्रत्येक र्ोडब एक अध्यि तथा दो से अन ्न सदस्यों से लमलकर र्नेगा, और अध्यि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय का सेिारत न्यायािीश होगा तथा सदस्य क्रकसी भी उच्च न्यायालय के सेिारत या सेिाननिरृ्त् न्यायािीश होगे ।

42. सलाहकार र्ोडों को निदेश - - इस अधिननयम में अलभव्यतत रूप से अन्यथा उपर्क्न्ित के लसिाय ऐसे प्रत्येक मामले में क्जसमें इस अधिननयम के अिीन ननरोि आदेश क्रकया गया हो, उस आदेश के अिीन क्रकसी व्यक्तत के ननरोि की तारीि से तीन सप्ताह के भीतर, राज्य सरकार, िारा 42 के अिीन अपने द्िारा गदठत सलाहकार र्ोडब के समि ि ेआिार क्जन पर िह अभ्यािेदन तथा उस दशा में, जर् क्रक आदेश िारा 36 की उपिारा (2) में ननददबष्ट क्रकय ेगये क्रकसी अधिकारी द्िारा क्रकया गया हो, उस अधिकारी द्िारा उस िारा की उपिारा (3) के अिीन दी गई ररपोटब भी रिेगी ।

43. सलाहकार र्ोडों की प्रकक्रया - - (1) सलाहकार र्ोड,ै अपने समि रिी गई सामग्री पर विचार करने के पश्चात ्तथा राज्य सरकार से या राज्य सरकार के माध्यम स ेइस प्रयोजन के ललए र्लुाये गये क्रकसी व्यक्तत से या सम्र्द्ि व्यक्तत से ऐसी अनतररतत जानकारी, जैसी क्रक िह आिश्यक समझे, मांगने के पश्चात ्और यदद क्रकसी विलशष्ट मामले में िह ऐसा आिश्यक समझता हो अथिा यदद सम्र्द्ि व्यक्तत यह चाहत ेहों क्रक उसे सनुा जाय तो स्िय ंउसको सनुने के पश्चात ्राज्य सरकार को अपनी ररपोटब सम्र्द्ि व्यक्तत के ननरोि की तारीि से सात सप्ताह के भीतर भेजेगा ।

(2) सलाहकार र्ोडब की ररपोटब के एक पथृक् भाग में उसकी राय विननददबष्ट की जायेगी, क्रक सम्र्द्ि व्यक्तत के ननरोि के ललए पयाबप्त कारण हैं या नहीं ।

(3) जर् उन सदस्यों में, क्जनसे सलाहकार र्ोडब गदठत हुआ है, मतभेद हों, तर् ऐसे सदस्यों की र्हुसखं्या की राय को र्ोडब की राय समझा जायेगा ।

(4) -इस िारा में की कोई भी र्ात उस व्यक्तत को, क्जसके विरुद्ि आदेश क्रकया गया हो, इस र्ात का हकदार नहीं र्नायेगी क्रक िह सलाहकार र्ोडब को क्रकये गये ननदेश से सम्र्क्न्ित क्रकसी मामले में क्रकसी विधि व्यिसायी द्िारा उपसजंात हो, सलाहकार र्ोडब की कायबिाही और उसकी ररपोटब उसके भाग के लसिाय क्जसमें र्ोडब की राय विननददबष्ट हो, गोपनीय होगी ।

44. सलाहकार र्ोडब की ररपोटब पर कायबवाही - - (1) क्रकसी ऐसे मामले में, क्जसमें सलाहकार

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र्ोडब ने यह ररपोटब दी हो क्रक उसकी राय में क्रकसी व्यक्तत के ननरोि के ललये पयाबप्त कारण हैं, राज्य सरकार ननरोि आदेश की पकु्ष्ट कर सकेगी और सम्र्द्ि व्यक्तत को ऐसी कालािधि पयबन्त ननरुद्ि रि सकेगी क्जतनी क्रक िह ठीक समझे ।

(2) क्रकसी ऐसे मामले में, क्जसमें सलाहकार र्ोडब ने यह ररपोटब दी हो क्रक उसकी राय में सम्र्द्ि व्यक्तत के ननरोि के ललये पयाबप्त कारण नहीं हैं, राज्य सरकार ननरोि आदेश को प्रनतसहंत करेगी तथा उस व्यक्तत को तत्काल ननमुबतत करिा देगी ।

45. निरोि की अधिकतम कालावधि - - िारा 45 के अिीन पषु्ट क्रकये गये क्रकसी ननरोि आदेश के अनसुरण में क्रकसी व्यक्तत को क्जस अधिकतम कालािधि पयबन्त ननरुद्ि रिा जा सकेगा, िह ननरोि की तारीि स ेछह मास की होगी:

परन्त ुइस िारा में अन्तविबष्ट कोई भी र्ात, ननरोि आदेश को पहले ही क्रकसी समय प्रनतसहंत करने या उपान्तररत करने की राज्य सरकार की शक्तत का प्रभाि नहीं डालेगी ।

46. निरोि आदेशों का प्रनतसहंरि - - क्रकसी ननरोि आदेश के प्रनतसहंत हो जाने या उसका अिसान हो जाने के कारण, क्रकसी भी ऐस ेमामले में क्जसमें क्रक ऐस ेप्रनतसहंरण या अिसान की तारीि के पश्चात ्ऐसे नए तथ्य उद् भतू हों क्जनके क्रक आिार पर यथाक्स्थनत राज्य सरकार या क्रकसी अधिकारी का यह समािान हो जाता है क्रक ऐसा आदेश क्रकया जाना चादहए, उसी व्यक्तत के विरुद्ि िारा 36 के अिीन क्रकसी नए ननरोि आदेश का क्रकया जाना िक्जबत नहीं होगा ।

47. निरुद्ि व्यम्ततयों की अस्थायी निमुबम्तत - - (1) राज्य सरकार क्रकसी भी समय यह ननदेश दे सकेगी क्रक कोई भी ऐसा व्यक्तत जो ननरोि आदेश के अनसुरण में ननरुद्ि क्रकया गया है या तो बर्ना शतों के या ननदेश में विननददबष्ट की गई ऐसी शतो पर, क्जन्हें ऐसा व्यक्तत प्रनतग्रहीत करे, क्रकसी विननददबष्ट कालािधि के ललए ननमुबतत क्रकया जाये और राज्य सरकार उसकी ननमुबक्तत को क्रकसी भी समय रह कर सकेगी ।

(2) उपिारा (1) के अिीन क्रकसी व्यक्तत को ननमुबतत क्रकये जाने का ननदेश देत ेसमय, राज्य सरकार उस व्यक्तत से यह अपेिा कर सकेगी क्रक िह ननदेश में विननददबष्ट की गई शतों के सम्यक् अनपुालन के हेत ुप्रनतभओूं सदहत या रदहत एक र्िंपत्र ननष्पाददत करे ।

(3) उपिारा (1) के अिीन ननमुबतत क्रकया गया कोई व्यक्तत यथाक्स्थनत अपनी ननमुबक्तत का ननदेश देने िाला या अपनी ननमुबक्तत को रद्द करने िाले आदेश में विननददबष्ट क्रकये गये समय तथा स्थान पर तथा उस आदेश में विननददबष्ट क्रकये गये प्राधिकारी के समि अपने को प्रस्ततु करेगा ।

(4) यदद कोई व्यक्तत उपिारा (3) में विननददबष्ट की गई रीनत में स्िय ंको प्रस्ततु करने में पयाबप्त कारण के बर्ना असफल रहेगा, तो िह कारािास से, क्जसकी अिधि तीन िषब तक की हो

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सकेगी, या जुमाबने से या दोनों से दण्डनीय होगा ।

(5) यदद उपिारा (1) के अिीन ननमुबतत क्रकया गया कोई व्यक्तत उन शतो में से, जो क्रक उतत िारा के अिीन या उसके द्िारा ननष्पाददत क्रकये गये र्न्िपत्र में उस पर अधिरोवपत है, क्रकसी भी शतब को हा नहीं करेगा तो र्न्िपत्र समपहत हुआ घोवषत क्रकया जाएगा तथा उस र्न्िपत्र द्िारा आर्द्ि कोई व्यक्तत तत्सरं्िंी शाक्स्त का भगुतान करने का दायी होगा ।

अध्याय 8 अिपुरूक

48. राज्य सरकार की शम्ततयों तथा कर्त्बव्यों का प्रत्यायोजि - - राज्य सरकार, आदेश द्िारा, यह ननदेश दे सकेगी क्रक िह िारा 28 के अिीन सामदूहक जुमाबना अधिरोवपत करने की और िारा 50 के अिीन ननयम र्नाने की शक्तत को छोड कर, क्रकसी भी ऐसी शक्तत या कर्त्बव्य का, जो इस अधिननयम द्िारा राज् य सरकार को प्रदर्त् की गई या उस पर अधिरोवपत क्रकया गया है, प्रयोग तथा ननिबहन ऐसी शतो यदद कोई हों, जैसी क्रक उस ननदेश में विननददबष्ट की जाएं, के अध्यिीन रहत ेहुए, उसके अिीनस्थ क्रकसी ऐसे अधिकारी द्िारा क्रकया जायेगा जो क्जला मक्जस्रेट की पदशे्रणी से ननम्न पदशे्रणी का न हो ।

49. नियम - - (1) राज्य सरकार, इस अधिननयम के प्रयोजनों को कायाबक्न्ित करने के ललए ननयम, पिूब प्रकाशन के पश्चात ्र्ना सकेगी ।

(2) इस अधिननयम के अिीन र्नाये गये समस्त ननयम, उनके र्नाये जाने के पश्चात ् यथासम्भि शीघ्र वििान सभा के पटल पर रिे जायेग े।

50. अपराि करिे के प्रयत्ि के सलये शाम्स्त - - जो कोई इस अधिननयम के अिीन क्रकसी अपराि के क्रकये जाने का दषु्पे्ररण करेगा या कोई ऐसा अपराि करने का प्रयत्न करेगा और ऐसा प्रयत्न करने में अपराि क्रकये जाने की ददशा में कोई कायब करेगा, िह उस अपराि के ललये उपर्क्न्ित दण्ड से दण्डनीय होगा ।

51. अपराधियों को सशं्रय देिे के सलये शाम्स्त - - जो कोई क्रकसी ऐस ेव्यक्तत को, क्जसने इस अधिननयम के अिीन कोई अपराि क्रकया है, जानकर मदद या सहायता देगा या सशं्रय देगा या उसे नछपायेगा, िह ऐसे अपराि के ललये उपर्क्न्ित दण्ड से दण्डनीय होगा ।

स्पष्टीकरि - - इस उपिारा के प्रयोजन के ललये शब्द ''सशं्रय'' के अन्तगबत है क्रकसी व्यक्तत को आश्रय, भोजन, पेय, िन, िस्त्र, आयिु, गोला-र्ारूद या प्रिहण के सािन देना या क्रकन्हीं सािनों से, चाहे िे उसी प्रकार के हों या नहीं क्जस प्रकार के इस िारा में पररगखणत हैं, क्रकसी व्यक्तत की सहायता पकड़ ेजाने से र्चने के ललये करना ।

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52 पररत्राि - - (1) क्रकसी व्यक्तत के विरुद्ि क्रकसी ऐसी र्ात के ललये, जो इस अधिननयम या उसके अिीन र्नाये गये क्रकन्हीं ननयमों या क्रकये गये क्रकन्हीं आदेशों के अनसुरण में सदभािपिूबक की गई हो या क्जसका सदभािपिूबक क्रकया जाना आशनयत रहा हो, कोई िाद, अलभयोजन या अन्य विधिक कायबिाही नहीं होंगी ।

(2) इस अधिननयम के अिीन अलभव्यक्तत रूप से अन्यथा उपर्क्न्ित के लसिाय, सरकार के विरुद्ि क्रकसी भी ऐसे नकुसान के ललये, जो क्रकसी ऐसे र्ात के कारण हुआ हो या क्जसका क्रकसी ऐसी र्ात के कारण होना सम्भाव्य हो जो इस अधिननयम या उसके अिीन र्नाये गये क्रकन्हीं ननयमों या क्रकये गये क्रकढ़ी आदेशों के अनसुरण में सदभािपिूबक की गई हो या क्जसका सदभािपिूबक क्रकया जाना आशनयत रहा हो, कोई िाद या अन्य विधिक कायबिादहयााँ नहीं होंगी ।

53. अन्य ववधियों का लाग ूहोिा वम्जबत िहीं होगा - - इस अधिननयम के उपर्न्ि, तत्समय प्रिरृ्त् क्रकसी भी अन्य अधिननयम, अध्यादेश या विननयम के अनतररतत होगे, उनका अल्पीकरण करने िाले नहीं ।

54. ककसी िी पसुलस अधिकारी द्वारा तलाशी ली जािे की शम्तत - - कोई भी पलुलस अधिकारी या कोई व्यक्तत, क्जस ेराज्य सरकार द्िारा इस ननलमर्त् प्राधिकृत क्रकया गया हो, यथाक्स्थनत सरंक्षित स् थान या सरंक्षित िेत्र में प्रिेश करने िाले या प्रिेश चाहने िाले या उस पर या उसमें रहने िाले या छोड़ने िाले क्रकसी व्यक्तत की तथा ऐसे व्यक्तत द्िारा उसमें लाये गये क्रकसी यान, जलयान, पश ुया िस्त ुकी तलाशी ले सकेगा, और तलाशी के प्रयोजन के ललये ऐसे व्यक्तत, यान, जलयान पश ु या िस्त ुको ननरुद्ि रि सकेगा:

परन्त ुइस िारा के अनसुरण में क्रकसी स्त्री की तलाशी क्रकसी स्त्री द्िारा ही ली जायेगी अन्यथा नहीं और यह क्रक ऐसी तलाशी लशष्टता का सम्यक ध्यान रित ेहुए ली जायेगी ।

55. निरसि - - मध्यप्रदेश सािबजननक व्यिस्था अधिननयम, 1965 (िमाकं 17, सन ्1965) एतद्द्िारा ननरस्त क्रकया जाता है ।